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बुधवार, 13 दिसंबर 2017

जागने के तुरंत बाद एलोवेरा जूस पीने के आश्चर्यजनक फ़ायदे !

जागने के तुरंत बाद एलोवेरा जूस पीने के आश्चर्यजनक फ़ायदे !


कई सारी बीमारियां हमारे पेट से ही जन्‍म लेती हैं इसलिए पेट को दुरुस्‍त रखना बहुत जरूरी है, तो क्‍यों न इसकी शुरूआत सुबह होने के बाद करें और उठने के तुरंत बाद खाली पेट एलोवेरा जूस पियें और स्‍वस्‍थ रहें।

सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना है फायदेमंद :-


क्‍या आपको मालूम है कि अगर आप सुबह के समय उठते ही रोजाना खाली पेट एलोवेरा जूस पीयेंगे तो आपकी 200 से अधिक बीमारियां दूर हो सकती हैं? कई सारी बीमारियां हमारे पेट से ही जन्‍म लेती हैं और अगर आप खाली पेट एलोवेरा जूस पियेगें तो आप इस खतरे को काबू में करने का पहला कदम उठाएंगे। आइये जानते हैं कि सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से हमारे शरीर को कौन-कौन से लाभ पहुंचते हैं।

पेट साफ रहता है :-
जब आप पानी के साथ एलोवेरा जूस पीते हैं तो आपको अपने आप ही टॉयलेट जाने की इच्‍छा होने लगती है। अगर ऐसा रोजाना करेगें तब आपके पेट का सिस्‍टम गंदगी को बाहर निकालने लगेगा और आपका पेट साफ हो जाएगा। जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत रहती है उनके लिए ये नुस्खा बेहद कारगर साबित होता है।

शरीर से गंदगी बाहर निकाले :-
सुबह सुबह उठकर खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से आपके पेट के अंदर की हर प्रकार की गंदगी बाहर निकल जाती है । एलोवेरा जूस शरीर से हर प्रकार की गंदगी को बाहर निकाल देता है। साथ ही, आपको ताजगी का एहसास होता है।

भूख बढ़ती है :-
जब सुबह पेट साफ नहीं हो पाता तो भूख भी नहीं लगती। ऐसे में आपके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। अगर आप सुबह उठते ही एलोवेरा जूस पीते हैं तो आपका पेट साफ हो जाता है और इस प्रकार से आपको भूख लगती है। फिर आपका सुबह का नाश्ता अच्‍छा होता है।
सिरदर्द से छुटकारा :-
अक्सर लोगों को नींद पूरी करने के बावजूद सुबह सिर दर्द महसूस होता है। हममें से काफी लोगों को ये बात नहीं मालूम होती कि कई बार हमारे शरीर के अंदर पानी की कमी ही वजह से सिर में दर्द शुरु हो जाता है। अगर आपको भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है तो कोशिश करें कि सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पियें।
बढ़ाए मेटाबॉलिज्‍म :-
एलोवेरा जूस पीने से मेटोबॉलिज्म को भी मजबूती मिलती है। सुबह सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्‍म 24 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आप खाने को जल्‍द पचा सकेगें। जब खाना ठीक से पच जाता है तो शरीर अन्य समस्याओं से भी बच जाता है।


खून बढ़ता है :-
सुबह सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना आपका खून भी बढ़ाता है। दरअसल, खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढ़ने लगते हैं। इसलिए अगर आपको खून की कमी है तो आप इसकी आदत जरूर डाल लें।

वजन घटता है :-
अगर आप ओवर वेट हैं, और वजन घटाना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना आपकी मदद करता है। सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से शरीर से खराब ट्रांसफैट बाहार निकल कर शरीर का फैट मैटोबॉलिज्‍म बढ़ाता है। इस वजह से आपको वजन घटाने में आसानी होती है।

त्वचा पर चमक आती है :-
जब आप सुबह उठते ही सबसे पहले एलोवेरा जूस पियेंगे, तो आपकी त्वचा चमकने लगेगी। इस आदत से चेहरे पर निकलने वाले कील-मुंहासे साफ हो जाएंगे। दरअसल, चेहरे की चमक का पेट के स्वास्थ्य से गहरा संबंध होता है। जब पेट ठीक रहेगा तो आपकी त्वचा स्वस्थ्य रहेगी।

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

माइग्रेन पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

माइग्रेन पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय


यह रोग स्त्रियों को अधिक होता है। इसमें सिर के दाहिने या बाएं आधे भाग में बेचैन कर देने वाला दर्द होता है, इसीलिए इसे आधासीसी कहते हैं। सूर्य के बढ़ने के साथ-साथ दर्द बढ़ने के कारण इसे सूर्यावर्त भी कहते हैं। दर्द दोपहर में तीव्रता के साथ और सूर्य ढलने के साथ-साथ कम होता चला जाता है।

कारण : सूर्यावर्त/आधासीसी का दर्द उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों में खिंचाव, कसाव व उनका अधिक फूलना, मस्तिष्क अर्बुद, मस्तिष्क आवरण शोथ, एड्रीनल हार्मोन का स्राव कम होना, रक्त में सेरोटिनिन नामक रसायन के स्तर में असामान्यता, महिलाओं में मासिक धर्म के पूर्व व बाद में होने वाले हार्मोन के परिवर्तन, अत्यंत भावुक, संवेदनशील प्रवृत्ति होना, शारीरिक और मानसिक तनाव, थकावट, तेज धूप या तीव्र प्रकाश में अधिक देर रहना, समय पर भोजन न करना, चाय, कॉफी, शराब, गर्म चटपटी मिर्च- मसालेदार चीजें अधिक खाना, हीनभावना से पीड़ित रहना, अधिक क्रोध, चिंता करना, नींद कम लेना, मौसम में बदलाव, अधिक मैथुन करना, ज्यादा धूम्रपान, अपच की शिकायत एवं वंशानुगत कारण आदि होते हैं।
लक्षण : इस रोग में सिर के आधे भाग दाहिने या बाएं भाग में सुबह से दर्द होना, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, कनपटी में चुभने वाला दर्द शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ते जाना, भोजन में अरुचि, शोरगुल, प्रकाश, रोशनी, हिलने-डुलने में दर्द और भी अधिक बढ़ना, जी मिचलाहट, उलटी होने के बाद या नींद आने से दर्द में आराम मिलना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।
ये भी पढ़िए : माइग्रेन की समस्या से बचने के उपाय

क्या खाएं
  • हलका, सुपाच्य, पौष्टिक आहार खाएं।
  • दही, चावल और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम के भोजन में सेवन करें।
  • सूर्योदय के पूर्व गर्म दूध के साथ शुद्ध घी की जलेबी या रबड़ी खाएं।
  • नाश्ते में गुलाब-जामुन, मिठाई सेवन करें।
  • नीबू का रस, चीनी और शहद मिलाकर बनी शिकंजी भोजन के बाद पिएं।
  • भोजन के पूर्व सुबह-शाम एक कप की मात्रा में अंगूर का रस पिएं।
क्या न खाएं
  • भारी, गरिष्ठ, मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं।
  • तेल या घी में तली, अधिक तीखी, नमकीन, खटाई युक्त चीजें भी न खाएं।
  • मांसाहार सेवन न करें।
  • शराब, कड़क चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें

रोग निवारण में सहायक उपाय

क्या करें :
  • सूर्योदय से काफी पहले उठकर पानी पिएं, शौच जाएं और स्नान करें।
  • नियमित हलका व्यायाम और शरीर की मालिश करें।
  • दौरा पड़ने पर शांत, अंधेरे कमरे में, सिर पर कपड़ा बांध कर आराम करें।
  • इच्छानुसार एक कप चाय या कॉफी पिएं।
  • सिर की मालिश करें।
  • हींग को पानी में घोलकर या शुद्ध घी को बार-बार।
  • अपनी हीनभावनाएं, मानसिक तनाव, चिंता को दूर करें।
  • घी और कपूर मिलाकर नाक के नथुनों में 2-3 बूंदें टपकाएं।
  • निश्चिंत होकर गहरी नींद लें।
क्या न करें :
  • अधिक शारीरिक एवं मानसिक परिश्रम और व्यायाम न करें।
  • अजीर्ण/कब्ज की शिकायत न होने दें।
  • आंखों पर अधिक जोर पड़े, ऐसे कार्य न करें।
  • मल, मूत्र, आंसू व के वेगों को न रोकें।
  • अधिक स्त्री-प्रसंग में लीन न रहें।
  • रात्रि में जागरण न करें।
  • दिन में सोने से परहेज करें।

रविवार, 19 नवंबर 2017

जब दिखने लगे ये संकेत तो शरीर में है पानी की कमी

जब दिखने लगे ये संकेत तो शरीर में है पानी की कमी


हमारा शरीर लगभग 70 प्रतिशत पानी से बना है। अगर किसी कारण वश शरीर में पानी की कमी हो जाए तो चेहरे की चमक के साथ-साथ शरीर के बाकी सारे हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। इसलिए बेहतर है कि दिन में भरपूर मात्रा में पानी पीएं। दिनभर की थकान का कारण भी शरीर में पानी की कम मात्रा हो सकता है। कई बार लोग पूरा दिन पानी नहीं पीते और रोजाना इसी प्रक्रिया को दोहराते है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। परन्तु जब शरीर में पानी की कमी होती है तो हमारा शरीर कई तरह के संकेत देने लगते है। उन संकेतों को पहचानकर पानी की कमी को पूरा करना चाहिए। 

- यूरिन कम आना
कई बार होता कि व्यक्ति यूरिन कम आने लगता है। अगर यूरिन की मात्रा कम हो जाए तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। 
- रूखी त्वचा
भले आप अपनी त्वचा को हर रोज मॉइस्चराइजर करने के हजारों तरीके अपनाते है लेकिन फिर भी त्वचा रूखी रहती है तो यह भी शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। बेहतर होगा कि दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल बाद पानी जरूर पिएं। 
- ज्यादा सिरदर्द
अधिकतर सिर में दर्द रहना लगे तो भी इस परेशानी को इग्नोर न करें। जब आप जरा सा भी सिर हो हिलाते है तो अचानक से सिर में दर्द होने लगे तो यह शरीर में पानी की कमी के कारण होता है। 
- बार-बार मुंह सूखना
बहुत से लोगों को मुंह बार-बार सूखने लगता है फिर पानी पीने की इच्छा होती है। दरअसल इस संकेत का मतलब है कि आपके शरीर को पानी की जरूरत है। 

- भूख लगना
जब शरीर में पानी कम हो जाता है तो खाना खाने के बाद भी भऊख महसूस होने लगती है। ऐसे में खाना खाने से पहले 1 गिलास पानी पिएं। 

- चक्कर आना
ऐसी स्थिति में बार-बार चक्कर आने लगते है। इसलिए बेहतर होगा की अभी इन संकेतों को पहचानकर शरीर में पानी की कमी को पूरा करें। 

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

इस पौधे का हर अंग दवा है गठिया को तो ये 21 दिन में समाप्त कर सकता है

इस पौधे का हर अंग दवा है गठिया को तो ये 21 दिन में समाप्त कर सकता है


वैसे तो ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है तो यहाँ हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है. आक-अर्क के पौधे, शुष्क, ऊसर और ऊँची भूमि में प्राय: सर्वत्र देखने को मिलते हैं।

इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फेंली हुई है कि आक का पौधा विषेला होता है तथा यह मनुष्य के लिये घातक है। इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योकि आयुर्वेद संहिताओं मे भी इसकी गणना उपविषों में की गई है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उलटी दस्त होकर मनुष्य यमराज के घर जा सकता है।
इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बडा फायदा होता है। इसका हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है एवं यह सूर्य के समान तीक्ष्य। तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायन धर्मा हैं।
इसका रूप, रंग, पहचान : यह पौधा अकौआ एक औषधीय पादप है। इसको मदार, मंदार, आक, अर्क भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं। हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं.
इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है। फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है। आक की शाखाओं में दूध निकलता है। वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है। चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है।

इसके 9 अद्भुत फ़ायदे :

1. आक के पौधे की पत्ती को उल्टा (उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग) कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें. सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें। एक सप्ताह में आपका शुगर लेवल सामान्य हो जायेगा। साथ ही बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है।

2. आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है। यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं। कहीं-कहीं इसे ‘वानस्पतिक पारद’ भी कहा गया है। आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है।

3. इसके कोमल पत्तों के धुंए से बवासीर शाँत होती है. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिला ले और छोटी छोटी गोलियाँ बना कर खाने से खाँसी दूर होती है।

4. आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है. आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे सिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है।

5. आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है। आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है। उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये। आक ही के काडे से घाव धोवे।

6. आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है. आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.

7. आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है। बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है।

8. आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है। बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं। बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता। चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है।

9. जहाँ के बाल उड़ गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसका दूध आँख में नहीं जाना चाहिए वर्ना आँखें खराब हो जाती है। उपरोक्त कोई भी उपाय अपनी ज़िम्मेदारी पर सावधानी से ही करें।

बुधवार, 8 नवंबर 2017

शादीशुदा स्त्री पत्ता गोभी को रात में यहां पर लगाकर सोएं फिर होगा ऐसा कि…

शादीशुदा स्त्री पत्ता गोभी को रात में यहां पर लगाकर सोएं फिर होगा ऐसा कि…


इतना तो सभी जानते होगें कि पत्ता गोभी को सभी लोग खाने के लिए प्रयोग करते हैं परंतु इस सब्जी के बारें में एक नई जानकारी मिली हैं कि इसको खाने के साथ -साथ कुछ बीमारियों में भी इस्तेमाल किया जाता है..आइये जानते हैं  पत्ता गोभी के कुछ ऐसे फायदे जो कि आपने पहले नहीं सुने होगें.

सिर दर्द
पत्ता गोभी के बारे में कहा जाता है कि यदि किसी के सिर में काफी तेज दर्द हो, तो वह अपने माथे पर पत्ता गोभी बांधे फिर अपने माथे को ढक कर सो जाए इससे आपके सिर के दर्द में काफी लाभ मिलेगा.
सूजन होना
यदि आपके हाथ-पैर टांगों में कही भी किसी भी प्रकार की सूजन आ जाए तो पत्ता गोभी के फ्रेश पत्तों उस जगह पर लपेट लें और फिर किसी पट्टी से बांध ले. इस उपाय को करने से आपको सूजन में फायदा मिलेगा.
स्तनपान का दर्द 
जो औरतें अपने छोटे बच्चों को स्तनपान कराती हैं उनको छाती में काफी दर्द होता है, इस दर्द को भी दूर करने के लिए  पत्ता गोभी के फ्रेश पत्तों को रात भर अपने स्तन से लगाकर रखने से दर्द दूर हो जाता है.
थाइरोइड 
हमारे गले के निचले  हिस्से में थाइरोइड ग्रंथि होती है जो कि मनुष्य के पाचन तन्त्र के लिए हार्मोन्स पैदा करने का काम करती है, इस ग्रंथि को स्वस्थ रखने के लिए रात के समय में पत्ता गोभी के पत्तों को गर्दन पर लपेट कर ढक कर सो जाए थाइरोइड ग्रंथि में लाभ मिलेगा.

शनिवार, 4 नवंबर 2017

सारा दिन एसी के आगे पड़े रहते हैं तो हो जाएं सावधान!

सारा दिन एसी के आगे पड़े रहते हैं तो हो जाएं सावधान!


गर्मियों ने अपनी दस्तक दे दी हैं। इन दिनों की चिलचिलाती धूप से हर कोई बचना चाहता है। पसीने से दरबदर हुआ इंसान जब एसी रूम में आता है तो जैसे उसे जन्नत का एहसास होता है। इसी के चलते आजकल हर कोई आॅफिस हो या घर एसी लगवाता है। कई लोगों को तो रात में एसी के बिना नींद तक नहीं आती लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी ये आदत सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं। आइए जानते हैं कि एसी से होने वाले नुकसान के बारे में।

1. गर्म-सर्द 
ए.सी रूम में बाहरी हवा कहीं से भी नहीं आती, सारे दरवाजे बंद होते हैं। ऐसे में जब हम ए.सी रूम से बाहर निकलते हैं तो मौसम बदल जाता है। जिसमें शरीर कोे ढलने में समय लगता है। बदलते तापमान की वजह से लोगों को कई बीमारियां जैसे गर्म-सर्द,जुकाम आदि हो जाती हैं।
2. सिरदर्द 
देर तक एसी में बाठे रहने से कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत होने लगती हैं।  दरअसल, एसी में लगातार बैठे रहने की वजह से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। जिससे मसल्स में खिंचाव महसूस होता है और सिर में भारीपन होने लगता है।
3. स्किन रूखी, बेजान
एसी में लगातार बैठे रहने की वजह से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है क्योंकि स्किन को साफ फ्रैश आॅक्सीजन नहीं मिलती। जिससे त्वचा मुरझाने लग जाती है। त्वचा के साथ-साथ बालों की भी कई समस्याएं हो जाती हैं।
4. आंखें
जो लोग कॉन्टेक्ट लेंस लगाते हैं उन्हें डॉक्टर भी लंबे समय तक एसी में बैठने से मना करते हैं। एसी में बैठने से आंखों में हर वक्त थकान महसूस होती हैं। यहां तक कि आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।

5. जोड़ों में दर्द
देर तक लो टैमप्रेचर में एसी में बैठने से घुटनों का दर्द, अकड़न आदि समस्या आम है। ये तकलीफ कई बार इतनी गंभीर हो जाती है कि गठिया का रूप तक ले लेती है। बुजुर्गो को तो एसी के कारण जोड़ों में दर्द की समस्या बहुत ही जल्द हो जाती है।

रविवार, 29 अक्तूबर 2017

एक मिनट में माइग्रेन से आराम, इनसे मालिश तो कीजिये जरा

एक मिनट में माइग्रेन से आराम, इनसे मालिश तो कीजिये जरा


दिन ब दिन तनाव भरी लाइफ के कारण लोगों में कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों के साथ-साथ माइग्रेन की समस्या भी देखने को मिल रही है। माइग्रेन को दूर करने के लिए आप कई दवाइयों का सेवन करते है लेकिन किसी से भी आपको फायदा नहीं होता। आज हम आपको बताएंगे कि किस तरह आप कुछ आयुर्वेदिक नुस्खों से माइग्रेन से आराम मिलेगा और आप माइग्रेन की समस्या को जड़ से खत्म कर सकते है।

माइग्रेन से आराम पाने के लिये ठंडे पानी से मालिश :-
एक तौलिए को गुनगुने पानी में भिगोकर गर्दन और कंधों की मालिश करें। इसके अलावा आप बर्फ के टुकड़ो से मालिश भी कर सकते है। ऐसा करने से आपको तुंरत दर्द से आराम मिल जाएगा। ध्यान रखें यदि आपको अक्सर सर्दी और जुखाम की समस्या रहती है तो यह उपाय आपको नही करना चाहिये ।
माइग्रेन से आराम पाने के लिये देसी घी से मालिश :-
माइग्रेन में रोजाना गाय के देसी घी की दो बूंदे रोजाना नाक में डाले। कुछ ही समय में आपका माइग्रेन दूर हो जाएगा । साथ ही यदि कुछ बूँदे गाय के दूध से बने देशी घी की लेकर रात के सअमय मस्तक पर मालिश करके सोया जाये तो यह भी माइग्रेन से आराम पाने के लिये आपको बहुत लाभ देता है ।
माइग्रेन से आराम पाने के लिये कपूर :-
कपूर में घी या तेल मिला कर मस्तक और दर्द वाली जगहें पर हल्की सी मसाज करें। इससे आपको माइग्रेन के असहनीय दर्द से छुटकारा मिल जाएगा। कपूर का शीतलता भरा स्पर्श आपको माग्रेन के दर्द में तुरन्त राहत देता है और यह बहुत अच्छा उपाय है ।
माइग्रेन से आराम पाने के लिये नींबू का छिलका :-
नींबू के छिलके को पीस कर उसका पेस्ट बना लें। रोजाना इससे सिर की मालिश करने पर आपको माइग्रेन से छुटकारा मिल जाएगा। इसके अलावा इससे बैचेनी और जलन से भी दूर हो जाएगी। सिर में लगातार बने रहने वाले भारीपन की समस्या में भी इसका लाभ मिलता है ।
माइग्रेन से आराम पाने के लिये बंदगोभी :-
बंदगोभी की पत्तियों को पीस रोजाना कंधे और गर्दन पर लगाने से भी आपको माइग्रेन और इसके दर्द से छुटकारा मिल जाएगा। बंद गोभी के पत्तों का जूस का सेवन करना माइग्रेन से आराम पाने के लिये अच्छा माना जाता है ।

माइग्रेन से आराम पाने के लिये गाजर और खीरा :-
गाजर और खीरे के रस को मिला कर रोजाना सिर, कंधे और गर्दन की मालिश करें। आपकी माइग्रेन की समस्या दूर हो जाएगी। सलाद के रूप में भी गाजर और खीरे का अधिक सेवन करना चाहिये और इनका रस निकाल कर भी पिया जा सकता है ।

माइग्रेन से आराम पाने के लिये कुछ सरल प्रयोगों की जानकारी वाला यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से ही किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँचती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख के समबन्ध में आपके कुछ सुझाव हों तो कृपया कमेण्ट के माध्यम से हमको जरूर सूचित करें ।

शनिवार, 28 अक्तूबर 2017

जानें सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते खाने से शरीर में क्या होता है !

जानें सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते खाने से शरीर में क्या होता है !


अगर आप तुलसी के पत्तों का सेवन नहीं करते हो तो आज ही करना शुरू कर दें लेकिन ध्यान रहे कभी भी तुलसी के पत्ते को दांतों से चवा कर नहीं खाया जाता इसे सीधा पानी के साथ निगल लें ! सबसे ज्यादा पवित्र तुलसी का पौधा होता है.कहते है जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पंसद नहीं करते. घर में तुलसी का पौधा लगाने से कलह और दरिद्रता दूर होती है. तुलसी कई समस्याओं को आसानी से दूर कर सकती है.एक बात का और ध्यान रखें कभी भी तुलसी के पत्ते को शाम के समय नहीं तोडना चाहिए हिन्दू धर्म में इसकी मनाही है.

तुलसी के पत्तों का अगर आप दूध या चाय में डालकर भी सेवन करते हैं तो भी आपको इतना फायदा होगा जिसकी कल्पना आप कर नहीं सकते.तुलसी में इतनी ताकत है की ये आपके शरीर की कई बिमारियों को चुटकी में खत्म कर सकती है. खाली पेट खाने के तरीके अलग हैं  हम साथ में आपको बताएंगे की दूध के साथ लेने के इसके कितने फायदे हैं.
तनाव : दूध और तुलसी का सेवन करने से नर्वस सिस्टम भी ठीक रहता है। इसे पीने से तनाव दूर होता है।

किडनी स्टोन : अगर किसी व्यक्ति की किडनी में स्टोन है तो इस दूध का सेवन करें। इसका सेवन करने से स्टोन धीरे-धीरे गलना शुरू हो जाएगा।
सिरदर्द : अगर किसी को ज्यादातर सिरदर्द की शिकायत रहती है तो तुलसी और दूध के फेटकर हर रोज पीएं। इससे सिरदर्द से काफी राहत मिलेगी.

सांस सम्बंधी रोग : जिन लोगों को सास सम्बंधी कोई बीमारी है तो वह भी इस दूध का सेवन करें। इसे पीने से आपको काफी आराम मिलेगा.
हृदय को रखें स्वस्थ : अगर किसी व्यक्ति को हृदय रोग है तो ऐसे लोगों को सुबह खाली पेट दूध और तुलसी का सेवन करें।

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

शरीर इस हिस्से को 5 बार दबाएं और फिर दिखेगा होश उड़ा देने वाला कमाल

शरीर इस हिस्से को 5 बार दबाएं और फिर दिखेगा होश उड़ा देने वाला कमाल


हमारा शरीर एक रहस्य है। सदियां बीत गईं लेकिन इसके रहस्य अभी भी हमारी समझ से परे हैं। हमारे हाथ शरीर को स्वस्थ रखने का केन्द्र हैं। हाथ हमारे शरीर को स्वस्थ कहने कि ताकत और क्षमता देता है। ये बात तो हम सभी जानते ही हैं कि हमारा शरीर पांच मूल तत्वों से मिलकर बना है। ये पांच तत्व जब तक संतुलित रहते हैं तब तक हमारा शरीर भी चुस्त और रोगमुक्त रहता है। 

ऐसे रखें अपने शरीर को चुस्त और तंदुरुस्त
शरीर पर कुछ ऐसे प्वॉइट होते हैं जिन पर दबाव डालने से हमें कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। वैज्ञानिकों ने भी इस बात को माना है कि इन प्वॉइट्स पर दबाव डालने से एंडोर्फिन हार्मोन उत्पन्न होता है जो दर्द से राहत देने के साथ साथ बॉडी में खून और ऑक्सीजन के प्रवाह को दुरुस्त करता है। एक्यूप्रेशर या एक्यूपंचर दो ऐसी चिकित्सा पद्धतियां हैं जिनमें रक्त प्रवाह, ऑक्सीजन और उर्जा के माध्यम से मनुष्य की शारीरिक बीमारियों का इलाज किया जाता है।

ये थेरेपी है काफी कारगर
हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में एक्यूप्रेशर और एक्यूपंचर थेरेपी काफी कारगर है। ये थेरेपी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ साथ मांसपेशियों को आराम देकर तनाव और चिंता से भी राहत पहुंचाती है। एक्यूप्रेशर थेरेपी का इस्तेमाल दर्द, थकान, सिरदर्द, तनाव जैसी आम बीमारी के इलाज के लिए किया जाता है। आपको बता दें कि हमारा अंगूठा आग का, तर्जनी हवा का, बीच की उंगली अंतरिक्ष का, अनामिका पृथ्वी का और छोटी उंगली पानी का सूचक है।

अंगूठे पर पांच बार दबाने से होता है कमाल
एक्यूप्रेशर एक घरेलू उपचार है यानि इसके लिए आपको किसी डॉक्टर से सलाह लेने कि जरुरत नहीं है। एक्यूसप्रेशर थेरेपी में हाथ की उंगलियों पर निश्चित प्वाइंट पर दबाव डाला जाता है। यह दर्द, थकान, सिरदर्द, तनाव जैसी आम बीमारी के इलाज में काफी कारगर है। एक्यूप्रेशर काफी पुरानी विधि है। इसके अलावा योग भी शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए काफी उपयोगी है। मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए इस तरकीब का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आंखों में नज़र आए ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकती है गंभीर बीमारी

आंखों में नज़र आए ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकती है गंभीर बीमारी


आंखें इंसानी शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा होती हैं. अगर व्यक्ति आंखों की सही तरीके से देखभाल ना करे तो उसे कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. आंखों की केयर ना करने पर अनेकों हेल्थ प्रोब्लम्स हो सकते हैं. लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी भी हो सकती हैं जो किसी हेल्थ कंडीशन या बीमारी को दर्शाती हैं. अगर व्यक्ति समय रहते इन संकेतों को पहचान ले तो वह आंखों की गंभीर बीमारियों से बच सकता है.

अधिकतर लोग आंखों में हो रही समस्या को गंभीरता से नहीं लेते. आंखों के साथ बरती गयी ज़रा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. आंखों में आये कुछ ख़ास बदलाव किसी बीमारी या हेल्थ संबंधित प्रॉब्लम की तरफ़ इशारा करते हैं. ज़रा सा भी बदलाव लगने पर डॉ. के पास ज़रूर जाना चाहिए.

इन बदलावों को नहीं करना चाहिए इग्नोर

आंख से धुंधला दिखाई देना
अगर आपकी आंखों से धुंधला दिखाई देता है या आपकी आंखों का रंग बदल जाता है और साथ ही सिरदर्द और थकान महसूस होने लगती है, तो सावधान होने की ज़रुरत है. यह लक्षण ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी के भी हो सकते है. तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और जांच करवाएं.
पुतली का रंग सफ़ेद होना
अगर व्यक्ति को अपनी आंखों की पुतली सफ़ेद नज़र आ रही है तो यह मोतियाबिंद का लक्षण हो सकता है. मोतियाबिंद में आंखों की पुतलियां सफ़ेद हो जाती हैं. अंग्रेज़ी में इसे कैटरेक्ट के नाम से भी जाना जाता है. इस बीमारी के होने पर आंखों का लेंस ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

आंखों का पीला होना
आंखों का पीला होना पीलिया रोग की तरफ़ इशारा करता है. पीलिया होने से व्यक्ति को लीवर ख़राब होने, कमज़ोरी और अपच जैसी परेशानियों का ख़तरा बना रहता है.
आंखों की पलकों पर धब्बे
अगर आपकी आंखों की पलकों पर धब्बे पड़ने लगे हैं तो यह शरीर में कॉलेस्ट्रोल लेवल बढ़ने के संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा आंखों की पलकों पर धब्बा होना दिल से जुड़ी बीमारियों को भी दर्शाता है.

पूरी आंख सफ़ेद होना
अगर आपकी पूरी आंख सफ़ेद नज़र आ रही है तो यह एनीमिया या खून की कमी को बताती है. इसमें आप थकान, कमज़ोरी, सांस लेने में तकलीफ़ और चेस्ट में दर्द जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं.
आंखों का लाल होना
अगर आपकी आखें लाल दिखाई देती हैं तो आप कंजक्टीवाटिस नामक बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं. इस बीमारी में आंख लगना, इन्फेक्शन और एलर्जी होना बहुत आम बात है.

आंखों में सूजन लगना
यदि आपको अपनी आंखों में सूजन लगती है या उभरापन जैसा महसूस होता है तो यह थाइरॉयड होने का संकेत हो सकता है. इससे आंखों में इरीटेशन भी होने लगती है.
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मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

हार्ट अटैक सहित कई बीमारियों में रामबाण है लाल मिर्च

हार्ट अटैक सहित कई बीमारियों में रामबाण है लाल मिर्च


लालमिर्च का पौधा 60 से 90 सेमी ऊंचा होता है इसके पत्ते लंबे होते हैं। इसके फूल सफेद व पत्तियों का रंग हरा होता है। फल अगर कच्चा है तो हरा और पक जाने पर हल्का पीला व लाल होता है। एक मिर्च में बहुत से बीज होते हैं जोकि बिल्कुल बैंगन के बीजों की तरह होते हैं। लालमिर्च का स्वाद तीखा होता है यह काफी मशहूर है। कच्चे एवं पके मिर्च का आचार बनाया जाता है और इसका उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है। पिसी हुई लालमिर्च में लकड़ी का बुरादा और रंग मिला होता है। 1 चम्मच पिसी हुई लाल मिर्च 1 कप पानी में घोलें। इससे पानी रंगीन हो जायेगा और बुरादा पानी में तैरने लगेगा।

1. हार्ट अटैक (दिल का दौरा):
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब किसको हार्ट अटैक आ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं अगर पीड़ित को अस्पताल ले जाने में थोड़ी सी देरी हो गई तो उसकी जान जाने का खतरा रहता है। लेकिन एक ऐसा क्षणिक उपाय है जिसका इस्तेमाल करके आप पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राहत दिला सकते हैं और उसे आराम से अस्पताल पहुंचा सकते हैं। एक शोध के मुताबिक लाल मिर्च हृदय के मरीज के लिए रामबाण है। इसलिए जिस व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा हो उसे एक चम्मच लाल मिर्च पानी में घोलकर पिला दीजिए उसकी हालत स्थिर हो जाएगी। हालांकि, इस घोल को तभी पिलाया जाना चाहिए जब व्यक्ति होश में हो।

1. हैजा (कालरा):
लाल मिर्च के बीजों को अलग करके उसके छिलकों को बारीक पीस लें, फिर उसमें थोड़ा कपूर, हींग और शहद मिलाकर 240 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर खायें। इससे हैजा ठीक हो जाता है। हैजा में हर उल्टी और दस्त के बाद रोगी को 1 चम्मच मिर्च का तेल पिलाना चाहिए। इसे तीन चार बार पिलाने से ही हैजा खत्म हो जाता है।
अफीम और भुनी हींग की गोली देने के बाद, मिर्च का काढ़ा पिलाने से हैजा दूर होता है। लालमिर्च को बारीक पीसकर, झड़बेर जैसी गोलियां बनाकर रखें और हैजे के रोगी को हर 1 घंटे पर 1 गोली और 7 लौंग देने से हैजे की बीमारी दूर होती है।

2. मुंह के छाले: लालमिर्च को पानी में घोलकर या काढ़ा बनाकर पीने से मुंह के छाले व घाव जल्द ठीक होते हैं।

3. पेट में पानी का भरना: लालमिर्च के पौधे की 20 ग्राम पत्तियां और 10 दाने कालीमिर्च लेकर ठण्डा करके 1-1 ग्राम की मात्रा में सेंधानमक और नौसादार मिलाकर पिलाने से जलोदर में लाभ होता है।

4. खाज-खुजली: शोथ (सूजन), खुजली और त्वचा के रोगों में लाल मिर्च में पकाया हुआ तेल लगाने से लाभ होता है। बारिश के मौसम में होने वाली फुंसियों के लिये यह बहुत ही लाभदायक है।

5. त्वचा के रोग: 125 ग्राम लालमिर्च और 375 मिलीलीटर सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाने के लिये रख दें। इसके अच्छी तरह से पकने के बाद उतारकर छान लें। इसे लाल मिर्च का तेल कहते है यह कई सालों पुरानी फुंसियों को भी ठीक कर देती है और यह त्वचा के सारे रोगों में फायदा पहुंचाती है।

6. सिर का दर्द: छोटी लालमिर्च और बड़ी लालमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर थूहर के दूध के साथ पीसकर माथे पर लेप करें। इससे सभी प्रकार का सिर दर्द ठीक हो जाता है।

बुधवार, 27 सितंबर 2017

गठिया रोग, हृदय रोग, हाथों की कमजोरी दूर करने का आसान तरीका

गठिया रोग, हृदय रोग, हाथों की कमजोरी दूर करने का आसान तरीका


संगीत, अच्छा काम करने पर, शाबासी में, वाहवाही में, जागरण में, फंकसन, पार्टी, खुशी के माहौल में ताली बजाना आम बात है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ताली बजाना स्वास्थ्य के लिए अति महत्वपूर्ण लाभदायक है। आज हम आपको ताली बनाने से हाने वाले महत्वपूर्ण परखे फायदों के बारे में बता रहे हैं। वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित किया गया है कि तालियां बजाने से हजारों स्वास्थ्यवर्धक फायदें। जिन्हें बहुत कम लोग जानते। और ताली बजाना एक मजाक और उपहास मात्र समझते हैं। परन्तु हम आपको तालियां बजाने के मुख्य फायदे विस्तार से बता रहें।

ताली बजाने से महत्वपूर्ण फायदे / Benefits of Clapping 

1. रोज 400 तालियां बजाने / Clapping से गठिया रोग ठीक हो जाता है। लगातार 3-4 महीने सुबह शाम ताली बजायें। ताली बजाने से उगलियों, हाथों का रक्त संचार / Blood Flow तीव्र गति से होता है। जोकि सीधे नसों को प्रभावित करता है जिससे गठिया रोग / Arthritis ठीक हो जाता है।

2. Hand Paralysis / हाथों में लकवा और हाथ कापना, हाथ कमजोर होने पर रोज नियमित सुबह शाम 400 तालियां बजाने से 5-6 महीनें में समस्या से निदान मिलता है।

3. Internal Organs / हृदय रोग, फेंफडे खराब होने पर, लिवर की समस्या होने पर रोग नियमित सुबह शाम 400-400 तालियां बजायें। आंतरिक बीमारियों से तुरन्त छुटकारा मिलता है।
4. Immune System / रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में तालियां अहम हैं। तालियां बजाने से शरीर में तीव्र रक्त संचार होता है। शरीर का अंग अंग काम करने लगता है।

5. तालियां बजाने से नसें और धमिनयों सही तरह से सुचारू हो जाती है। Veins, Muscles Strains / मांसपेशियों का तनाव खिचाव ठीक करने में तालियां बजाना सक्षम है।

6. तालियां बजाने से सिरदर्द, अस्थमा, मधुमेह नियंत्रण में रहता है। Clapping / तालियां मारना हेल्थ समस्याऐं नियंत्रण में रखने में सहायक है।

7. Hair Fall / बालों के झड़ने से रोकने में तालियां खास फायदा करती है। तालियां बजाने से हाथों में घर्षण बनता है। हाथ की अंगूठे उगलियां नसे सिर से जुड़ी होती हैं।

8. प्रतिदिन भोजन ग्रहण के बाद 400 तालियों बजाने से शरीर समस्त रोगों से दूर रहता है। शरीर में फालतू चर्बी नहीं जमती और मोटापा / Obesity, Fat से दूर रखने में तालियां अहम हैं।

9. तालियां बजाने से स्मरण शक्ति / Memory Power बढ़ती है। क्योंकि हाथ का अंगूठे की नसें सीधें दिमाग से जुड़ी होती है।

10. शरीर के समस्त जोड़ पाइन्टस हाथों की हथेलियों उगलियों से जुड़े होते हैं। इसलिए तालियां बजानें से Healthy Body Fit Mind / शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है। 

तालियां बजाने का तरीका / Clasping Hands, Steps

1. ताली बजाने से पहले हाथों पर नारियल, जैतून, बादाम, तिल, अखरोट आदि कोई भी एक तेल लगा लें।
2. रोज सुबह 400 तालियां और रोज शाम 400 तालियां बजायें।
3. 200 तालियां हाथ ऊपर कर और 200 तालियां साधारण स्थिति में रह कर बजायें।
4. हाथों पर तीव्र घषर्ण, या हाथ गर्म होने पर कुछ सेकेंड़ रूकें।
5. तालियां बजाने के तुरन्त बाद कुछ खायें पीने नहीं। 20-25 मिनट बाद ही कुछ खायें पीयें।
क्या आपके भी सिर में दर्द रहता है, जानिये ब्रेन ट्यूमर के लक्षण, कारण और उपचार

क्या आपके भी सिर में दर्द रहता है, जानिये ब्रेन ट्यूमर के लक्षण, कारण और उपचार


ब्रेन ट्यूमर दिमाग में होने वाली एक तरह की गांठ है। जिसे ब्रेन ट्यूमर, मस्तिष्क गिल्टी या ब्रेन कैंसर कहा जाता है। बे्रन कोशिकाएं संक्रमित होकर विषाक्त रूप में गांठ बनकर धीरे-धीरे आकार विकृत असामान्य वृद्धि होती रहती है। ट्यूमर लक्षण महसूस होने पर Medical Diagnosis अवश्य करवायें। ब्रेन ट्यूमर कोई भयानक समस्या नहीं। परन्तु आरम्भ में ट्यूमर लक्षण दिखने पर तुरन्त उपचार करवाना जरूरी है।

ब्रेन ट्यूमर की जांच / Brain Tumor Check Up

ट्यूमर लक्षण महसूस होने पर न्यूरोलाॅजिक से ब्रेन ट्यूमर की सही स्थिति का पता आसानी से चल जाता है। जाचं द्वारा व्यक्ति मस्तिष्क में कोशिकाओं नसों के हलचल गांठ बनने की स्थिति आकार पता चल जाता है। जिससे शुरूआती ट्यूमर इलाज आसान हो जाता है।

पहली: शुरूआती ब्रेन ट्यूमर सामान्य आकार में होता है। जिसमें व्यक्ति आसानी से ब्रेन में होने वाली हलचल लक्षण से ट्यमर का पता चल जाता है। शुरूआती ब्रेन ट्यूमर को बिना सर्जरी के लेजर टेक्नोजी से ठीक किया जा सकता है। इस विधि का उपयोग ट्यूमर घटाने और ट्यूमर जड़ से नष्ट करने के लिए किया जाता है।

दूसरी: मध्य ट्यूमर काफी तीब्र पीड़ादायक होता है। व्यक्ति कुछ समय अंतराल में ही असाय महसूस करता है। जिसे रेडिएशन थेरेपी से रिमूव किया जा सकता है। X-Rays, Gamma Rays विधि से कैंसर सेल्स को नष्ट किया जाता है। जो कि आम भाषा में Radiation Waves विधि हैं।
तीसरी: जब ट्यूमर आकार में बड़ा एक फोड़ा गांठ कैंसर रूप ले लेता है। जिससे सिर विकृत हो जाता है। ट्यूमर विकराल रूप बाहर की तरफ दिखने लगता है। यह ब्रेन ट्यूमर मरीज के लिए नाजुक स्थिति होती है। इस स्थिति में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथैरेपी से ही रिमूव किया जा सकता है। यह प्रक्रिया तीन चरणों महीनों के अन्तराल में ट्यूमर की स्थिति संक्रमण को देखकर किया जाता है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण / Brain Tumor Symptoms

  • सिरदर्द रहना
  • रात को सरदर्द तीब्र होना
  • सिर के एक हिस्से में तीब्र दर्द होना
  • झुकने और लेटने पर मस्तिष्क में तीब्र पीड़ा
  • बोलने और शब्द सुनने समझने में परेशानी
  • याददाश्त कमजोर होना
  • आंखों से आंसू आना
  • आंखों में सूजन
  • चिड़चिड़ापन होना
  • गले में जकड़न
  • जी मचलना
  • लगातार नींद आना
  • डर भय महसूस होना
  • चेहरे का एक हिस्सा कमजोर लगना

ब्रेन ट्यूमर के कारण / Causes of Brain Tumor

  • सिर पर अन्दुरूनी चोट
  • दूषित वायु और दूषित पानी
  • तीब्र दुर्गंध गैस
  • दिमागी बुखार देर तक रहना
  • मस्तिष्क संक्रमित
  • साइनस संक्रामण
ब्रेन ट्यूमर लक्षण महसूस होने पर तुरन्त जांच करवायें। समय पर मस्तिष्क जांच उपचार ब्रेन ट्यूमर को विकराल स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है। 

ब्रेन ट्यूमर उपचार / Brain Tumor Treatment Options
Brain Tumor Treatment / ब्रेन ट्यूमर उपचार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी के माध्यम से सफल तरीके से रिमूव किया जा सकता है। अलग-अलग उपचार ट्यूमर की स्थिति, कैंसर संक्रमण, ब्रेन कोशिकाओं ट्यूमर मेलिगेन्ट, बिनाइन स्थिति आकार प्रकार जांच के बाद द्वारा परखकर किया जाता है। कई बार ट्यूमर ब्रेन के साथ अन्य शरीर अंगों में भी हो ट्यूमर कोशिकाऐं सक्रीय होती हैं।

ट्यूमर सर्जरी / Tumor Surgery
ग्रेड-1 स्थिति में ट्यूमर को सर्जरी से निकाला जा सकता है। ट्यूमर सिर विकृत आकार को सर्जरी माध्यम से कम किया जाता है। अकसर कई बार ट्यूमर सही तरह से रिमूव नहीं होता। सर्जरी से केवल ट्यूमर आकार छोटा हो पाता है। ट्यूमर सर्जरी 2-3 चरणों में की जाती है।

ट्यूमर रेडिएशन थेरेपी / Tumor Radiation Therapy
अकसर ट्यूमर विकृत विकराल होने पर सर्जरी माध्यम से पूर्ण रूप से रिमूव करना असम्भव हो जाता है। कई संक्रमित ट्यूमर कोशिकाऐं अंश सर्जरी से रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में रेडिएशन थैरेपी सफल इलाज है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग अधिकत्तर ब्रेन ट्यमर कैंसर, लीवर ट्यूमर, ब्रेस्ट कैंसर ट्यूमर घटाने और ट्यूमर रिमूव करने के लिए किया जाता है। जिसमें लेजर रेडिएशन, गामा रेज से उपचार किया जाता है।

ट्यूमर कीमोथेरेपी / Chemotherapy
Tumor Cancer / ट्यूमर कैंसर रूप बनने पर कीमोथेरेपी माध्यम से इन्ट्रावेन्स, इन्फ्यूजन विधि द्वारा ट्यूमर कैंसर सेल नष्ट करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में कीमोथेरेपी कैंसर रोधी दवाईयां मुंह के माध्यम से दी जाती है। यह नाजुक स्थिति होती है। अकसर ट्यूमर अधिक समय तक रहने पर विकृत होकर कैंसर रूप ले लेता है।

रविवार, 17 सितंबर 2017

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें


सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन क्यों जरुरी है ?
सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं कृमियों को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है| सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते | अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है|

ध्यान रहे की सुर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना ना ही शुरू करें। जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है …

1. लाल रंग  :  यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है
2. हरा रंग  :  यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है
3. पीला रंग  :  चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
4. नीला रंग  :  दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है
5. बैंगनी रंग  :   श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर्गी, दाँतो के रोग में सहायक है
6. नारंगी रंग  :  वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है
7. आसमानी रंग  :  स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है |
सूरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है। अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एव कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं। हमे जिस रंग की ज़रूरत हो हम उसका इस्तेमाल करके अपने रोग दूर कर सकते हैं । सुर्य चिकित्सा मे पानी, क्रिस्टल, सुर्य स्नान, सुर्य प्राणायाम, इत्यादि तरीके अपनाये जाते हैं

जो रोगी की बीमारी एवं दशा  देखकर निर्धारित किया जाता है। सूर्य नमस्कार योग तो अपने आपमे संपन्न योग है, इससे मिलने वाले लाभ से कोई भी अनभिज्ञ नही है। अब तो सूर्य मंत्रो को और सुबह जल- अर्घ्य को भी महत्वता मिलती जा रही है। जलार्पण के लिये भी निर्दिष्ट नियम हैं, और इसका पालन करके हम कई तरह के समस्याओ से निजात भी पा सकते हैं।

इस तरह हम कह सकते हैं कि आज के दौर मे सुर्य चिकित्सा हमारे जीवन के हरेक पहलू मे कारगर है, शायद इसी कारण से हमारे पुर्वजो ने सूर्य उपासना पर बल दिया था, ताकि हम रोज ही खुद को सुख समृद्धि के दिशा मे अग्रसित हो। सूर्य से निकलने वाली रोशनी में विटामिन डी होता है जिसकी कमी से शरीर में मेटाबोलिक हड्डियों की बीमारी हो जाती है जो युवाओं में होने वाली गंभीर बीमारी है। यह हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करता है। सूर्य के प्रकाश के लाभ सिर्फ विटामिन डी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके कई अन्‍य लाभ भी होते हैं और कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।

सूर्य उपासना के लाभ/फायदे

अच्‍छी नींद आती है :- धूप सेंककर आप रात में अच्‍छी नींद ले सकते हैं। दरअसल सूर्य की रोशनी में बैठने से शरीर में मेलाटो‍निन नाम का हार्मोन विकसित होता है जिससे रात में अच्‍छी नींद आती है। इस तरह अनिद्रा की बीमारी भी इससे दूर जाती है। यानी रात में बेहतर नींद के लिए सूर्य से प्‍यार कीजिए।
वजन घटायें :- वजन घटाने के लिए आप कई तरीके आजमाते और बहुत मेहनत भी करते हैं। लेकिन आप यह जानकर हैरान न हों कि वजन कम करने में सूर्य आपकी सहायता कर सकते हैं। दिन में धूप में बैठने से आपको वजन घटाने में सहायता मिल सकती है। एक शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि सूर्य के प्रकाश और बीएमआई के बीच एक अच्‍छा सम्‍बंध होता है।
ठंड दूर भगाये :- अगर आप सर्दी से के मौसम में ठंड से कांप रहे हैं तो सूर्य की रोशनी में जाइये जनाब, यह एक प्राकृतिक अलाव है जो ठंड दूर करेगा और आपको बीमारियों से भी बचायेगा।
हड्डियां मजबूत बनायें :- हड्डियों को सही तरीके से पोषण न मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे – गठिया, गाउट आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियां मजबूत होती हैं क्‍योंकि इसमें विटामिन डी होता है।
इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाये :- इम्‍यून सिस्‍टम अगर कमजोर हो जाये तो पेट संबंधित कई तरह के रोग हो जाते हैं, इसलिए इसे मजबूत बनाये रखना जरूरी है। धूप से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत हो जाता है। सूर्य से निकलने वाली अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें इम्‍यून सिस्‍टम की हाईपरएक्टिविटी को नकारती हैं और सोराईसिस जैसी बीमारियों से बचाव करती हैं।
उम्र बढ़ती है :- अगर आपकी चाहत लंबी उम्र पाने की है तो नियमित रूप से धूप से स्‍नान कीजिए। क्‍योंकि यह खून जमने, डायबिटीज एवं ट्यूमर को ठीक करता है, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है एवं पैरों में खून जमने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता। ठंडे क्षेत्र में शीतकाल में यह खतरा ज्यादा रहता है। यह डायबिटीज जैसी बीमारी से भी बचाव करता है और अन्‍य बीमारियों से बचाता है। अगर ये सारी समस्‍यायें न हों तो उम्र बढ़ेगी ही।
बांझपन दूर करे :- यदि पुरुष बांझपन के शिकार हैं तो उनके लिए सूर्य धूप रामबाण दवा की तरह है। धूप सेंकने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार आता है। खून में सूर्य धूप से मिले विटामिन डी के बढ़ने के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा यह वियाग्रा दवा की भांति भी काम करता है। यह टेस्टोस्टोरेन हार्मोन के स्राव को भी बढ़ाता है।
दिमाग को स्‍वस्‍थ रखे :- सूर्य से निकलने वाले प्रकाश में मौजूद विटामिन डी से दिमाग स्वस्थ रहता है। विटामिन डी भविष्‍य में होने वाली बीमारी सीजोफ्रेनिया (पागलपन की बीमारी) के खतरे को कम करता है। यह दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके संतुलित विकास में सहायता प्रदान करता है। गर्भवती महिला के धूप सेंकने से यह लाभ बच्‍चे को भी मिलता है।
दिल के रोगों से बचाये :- सूर्य से मिलने वाले विटामिन डी से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती है और कैंसर का खतरा कम होता है। यह मेटाबॉलिज्‍म को सुधारता है जिससे मधुमेह एवं हृदय रोग काबू में रहते हैं। धूप दिल की बीमारियों को रोकने में मददगार होता है।
सूर्य की किरणें मनुष्य के रक्तचाप को कम करने में सहायता प्रदान करती हैं जिससे दिल के दौरे का ख़तरा बहुत सीमा तक कम हो जाता है।

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

सरदर्द और पीठ दर्द से राहत दिलाता है पानी

सरदर्द और पीठ दर्द से राहत दिलाता है पानी


इसमें कोई दोराय नहीं कि जल ही जीवन है और जल के बिना जीवन मुमकिन नहीं। सही भी है आप कुछ दिन बिना खाए तो रह सकते हैं लेकिन बिना पानी के जीवित रह पाना मुमकिन नहीं। पानी न सिर्फ हमारी प्यास बुझाता है बल्कि पाचनतंत्र से लेकर मस्तिष्क के विकास तक में अहम भूमिका निभाता है। पानी मानव जीवन के लिए बहुमूल्य है और बचपन से ही हम इसके फायदों के बारे में सुनते आये हैं। किसी भी बीमारी में पानी रामबाण की तरह काम करता है। पानी का प्रयोग कई तरीकों से प्राकृतिक उपचार के रूप में होता है। पानी निर्जलीकरण के कारण होने वाले सरदर्द और पीठदर्द से राहत दिलाता है और हमारे शरीर को तरोताजा रखता है। स्वस्थ रहना है तो ईश्वर की इस देन का भरपूर आनंद उठायें।

1 पानी पीने से पाचन तंत्र प्राकृतिक रूप से ठीक रहता है। सुबह उठने पर एक गिलास पानी पीने से पेट साफ रहता है। साथ ही इससे कब्ज की परेशानी भी नहीं होती। 
2 अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते तो आपके शरीर में मेटाबोलिज़्म की गति धीमी हो जाती है। इसका अर्थ है वसा के अवशोषण के लिए पानी आवश्यक है। प्रतिदिन कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीयें और मनचाहा फिगर पायें ।
3 लगातार सरदर्द से बचने का एक उपाय है दवाएं लेना और दूसरा उपाय है कुछ गिलास पानी पीना। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि लगभग 90 प्रतिशत सरदर्द निर्जलीकरण के कारण होते हैं।
4 बहुत लोग एण्टी एजिंग क्रीम का प्रयोग करते हैं। मगर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से त्वचा को नमी और इलास्टिसिटी मिलती है। पानी युवा दिखने का सबसे सरल उपाय है।
5 जब भी आप थकान महसूस करें, तो अपना चेहरा पानी से धो लें। ऐसा करने से आप तरोताजा महसूस करेंगे। शरीर में पानी की कमी से पाचन तंत्र ठीक प्रकार से काम नहीं करता और थकान भी महसूस होती है।
6 भरपूर मात्रा में पानी पीने से शरीर में मौजूद हानिकारक एवं विषैले तत्व पसीने व मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं, जिससे विषाणुओं से बचाव होता है। 
7 सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से पेट की सारी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। इससे कब्ज में राहत मिलती है। 
8 सुबह खाली पेट एवं दिनभर पानी पीते रहने से तनाव नहीं होता और मानसिक समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं। जब आप सोकर उठते हैं, तो दिमाग शांत होता है। ऐसे समय पानी पीना दिमाग को ऑक्सीजन प्रदान करता है।

पानी हमारे शरीर के लिए बेहद ज़रूरी है। ज्यादातर लोग सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास पानी पीते हैं और उसके बाद कोई दूसरा काम करते हैं। हालांकि अपनी इस अच्छी आदत के कई फायदे वे जानते भी नहीं होते। अगर आप भी इस आदत का पालन करते हैं, तो आपको बता दें कि सुबह खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।

खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 4 से 5 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं।

जानिए क्यों पीना चाहिए सुबह उठकर पानीः

1 सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है और खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है।
2 सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।
3 सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए।
4 जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं, उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते।
5 सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं।

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

ऊँगलियों को रगड़ने से शरीर का दर्द गायब

ऊँगलियों को रगड़ने से शरीर का दर्द गायब


संवेदनशीलता की प्राचीन जापानी कला के अनुसार प्रत्येक ऊँगली विशेष बीमारी और भावनाओं के साथ जुड़ी होती हैं हमारे हाथ की पाँचों ऊँगलियाँ शरीर के अलग अलग अंगों से जुड़ी होती हैं इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयाँ खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए आज इस लेख के माध्यम से हम आपको जानेंगे, के शरीर के किसी हिस्से का दर्द सिर्फ हाथ की ऊँगली को रगड़ने से कैसे दूर होता है ।

हमारे हाथ की अलग अलग ऊँगलियाँ अलग अलग बीमारियों और भावनाओं से जुड़ी होती हैं शायद् आप को पता न हो हमारे हाथ की ऊँगलियाँ चिंता डर और चिड़चिड़ापन दूर करने की क्षमता रखती है।

अंगूठा– हाथ का अँगूठा हमारे फेफड़ों से जुड़ा होता हैअगर आप की दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथों से अँगूठे पर मसाज करें और हल्का सा खिचें इससे आप को आराम मिलेगा

तर्जनी - ये ऊँगली आँतों से जुडी होती है।अगर आपके पेट में दर्द है, तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े  दर्द कम हेता महसूस होगा।

बीच की ऊँगली - ये ऊँगली परिसंचरण तंत्र से जुडी होती है अगर आप को चक्कर या आपका जी घबरा रहा है तो इस ऊँगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी।

तीसरी ऊँगली - ये ऊँगली आपकी मनोदशा से जुडी होती है अगर किसी कारण आपकी मनोदशा अच्छी नहीं है या शाँति चाहते हैं तो इस ऊँगली को हल्का सा मसाज करें और खीचें आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जायेंगे आप का मन खिल उठेगा

छोटी उंगली – छोटी ऊँगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है अगर आप को सिर में दर्द है तो इस ऊँगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे आप का सिर दर्द गयब हो जायेगा इसे मसाज करने से किडनी भी तंदूरुस्त रहती है और हम स्वस्थ रहते है|

सोमवार, 11 सितंबर 2017

इसकी पत्ती सिर्फ सूंघने से सिरदर्द का जड़ से सफाया, पीने से मर जायेंगे पेट के कीड़े और पिचकारी मारने से बंद हो जायेगा नाक से बहता रक्त

इसकी पत्ती सिर्फ सूंघने से सिरदर्द का जड़ से सफाया, पीने से मर जायेंगे पेट के कीड़े और पिचकारी मारने से बंद हो जायेगा नाक से बहता रक्त


आज हम आपको निम्बू की पत्ती ऐसे 3 चमत्कारी फायदे बताएँगे जिसे सिर्फ सूंघने से सिरदर्द का जड़ से सफाया, पीने से मर जायेंगे पेट के कीड़े और पिचकारी मारने से बंद हो जायेगा नाक से बहता रक्त, तो आइए जानते है इसके बारे में। नींबू का अनोखा गुण यह है कि इसकी खट्टी खुशबू खाने से पहले ही मुंह में पानी ला देती है। चांट हो या दाल कोई भी व्यंजन इसके प्रयोग से और भी सुस्वादु हो जाता है। यह फल खट्टा होने के साथ-साथ बेहद गुणकारी भी है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि नींबू के पत्ते भी बहुत उपयोगी होते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं नींबू के पत्तों के कुछ ऐसे ही रामबाण प्रयोगों के बारे में-

कृमि रोग (पेट के कीड़े) :
10 ग्राम नींबू के पत्तों का रस (अर्क) में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मरकर नष्ट हो जाते हैं। नींबू के बीजों के चूर्ण की फांकी लेने से कीड़ों का विनाश होता है।

सिरदर्द या माइग्रेन :
नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूंघे, जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है, उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है। यह प्रक्रिया लगातार कुछ दिनों तक करने से ऐसे परिणाम मिलेंगे की आप दाँतो तले उंगलियां दबा लेंगे। हमारे द्वारा किये कुछ पीड़ितों पर यह प्रयोग इतना कारगर निकला की उनकी सिरदर्द/माइग्रेन की समस्या का जड़ सफाया हो गया।

गाय का ताजा घी सुबह-शाम 2-4 बूँद नाक में रुई से टपकाने अथवा सूंघते रहने से आधे सिर की दर्द की पीड़ा जड़ से आराम हो जाती है। साथ ही इसे नक् से खून गिरना भी जड़मूल से नष्ट हो जाता है। 7 दिन तक लें।
सिर के जिस तरफ के भाग में दर्द हो उस तरफ के नथुने में 7-8 बूँद सरसों का तेल डालने अथवा सूंघने से दर्द एकदम बन्द हो जाता है। 4-5 दिन तक दिन में 2-3 बार इसी प्रकार सूंघने से कई बार दर्द सदा के लिए मिट जाता है।

नाक से खून आना :
ताजे नींबू का रस निकालकर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून गिरता हो, तो बंद हो जाएगा।

शनिवार, 9 सितंबर 2017

अगर आप भी है माइग्रेन से परेशान तो जरूर अपनाएं ये उपचार

अगर आप भी है माइग्रेन से परेशान तो जरूर अपनाएं ये उपचार


दुनियाभर में माइग्रेन की बिमारी लगातार बढ़ती ही जा रही है। आजकल भागदौड़ की जिंदगी जो कि तनाव से तो भरपूर है पर उससे मुक्त होने के लिए हम कोई उपाय नहीं करते। इन्हीं सारी वजहें धीरे-धीरे माइग्रेन के रुप में बदलने लगती हैं। जैसे ही आप सामान्य स्थिति से एकदम तनाव भरे माहौल में पहुंचते हैं तो सबसे पहले आपका सिर दर्द बढ़ता है। ब्लडप्रेशर हाई होने लगता है और लगातार ऐसी स्थितियां आपके सामने बनने लगे तो समझिए आप माइग्रेन के शिकार हो रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है माइग्रेन के घरेलू उपचार के बारे में...

आइस पैक
माइग्रेन की वजह बनने वाली फैली या सूज मासपेशियों को रिलैक्स करने के लिए आइस पैक काफी फायदेमंद है। एक साफ टॉवल में कुछ टुकड़े आइस के रखें और उससे सिर, माथे और र्गदन के पीछे 10-15 मिनट सिकाई करें। पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदे मिलाने से असर जल्दी होता है। जब भी जरूरत लगे, इस्तेमाल करें। आप हॉट और कोल्ड कंप्रेसर को अल्टरनेट भी यूज कर सकते है।

मसाज
सिर की मसाज करें। पहली 2 उंगलयिों से हल्के हाथ से गोल-गोल घुमाकर सिर की मसाज करें। खोपड़ी के बीच, दोनो भौंहों के बीच और आंखों के कोनों पर स्थित प्रे्रशर पॉइंट्स को दबाएं। तिल के तेल में एक टुकड़ा दालचीनी और 1-2 इलायची डालकर गर्म कर लें। इस तेल से मालिश करें। मालिश दर्द के सिग्रल दिमाग तक पहुंचने में अवरोध पैदा करती है। इससे सिरोटोनि बढ़ता है, जो दर्द कम करने में मदद करता है।

पिपरमिंट
पिपरमिंट में सूजन को कम करने के गुण होते है। साथ ही, यह शांत और स्थिरता का भाव भी पैदा करता है। आप पिपरमिंट चाय पी सकते हैं या फिर पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदे एक चम्मच शहद के साथ आधे गिलास पानी में मिलाकर भी पी सकते है। पिपरमिंट ऑयल से सिर और माथे पर 20-25 मिनट मालिश करने से फायदा होता है।

सेब का सिरका
एपल साइडर विनेगर यानी सेब का सिरका माइग्रेन में राहत दिलाता है। एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच शहद डालकर पिएं। करीब 30 दिन लगातार पीने से राहत मिलेगी। जब माइग्रेन हो या लगे कि होनेवाला है तो 2-3 चम्मच लें। यह शरीर को शुध्द करने, शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल, वजन कम करने के अलावा हडिड्यों और जोड़ों के दर्द में भी राहत दिलाता है। सेब का सिरका नहीं है तो आप सेब भी खा सकते है। ग्रीन एपल को सूंघना भी फायदेमंद हो सकता है। 

अदरक
अदरक भी सिरदर्द में राहत दिलाता है। अदरक का एक चम्मच रस शहद में मिलाकर खाने से फायदा होता है। चाय में भी अदरक डालकर पी सकते है। अदरक का एक टुकड़ा मुंह में रखना भी फांयदेमंद है। अदरक का किसी भी रूप में सेवन माइग्रेन में राहत दिलाता है।

लौंग पाउडर 
अगर सिर में ज्यादा ही दर्द हो रहा है तो तुरंत लौंग पाउडर में नमक मिलाकर दूध के साथ मिलाकर पिएं। ऐसा करने से सिर का दर्द झट से गायब हो जाएगा।

शहद
सिर के जिस तरफ दर्द हो रहा है उसके दूसरी तरफ कान में 1-2 बूंदे शहद की डालें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी। अगर सिर दर्द माइग्रेन की वजह से हो रहा है तो शहद की जगह देसी घी डालें।

गाय का दूध 
सिर दर्द हो रहा है तो गाय का गर्म दूध पिएं। इससे भी काफी फायदा मिलेगा।

खीरा 
अगर सिर में ज्यादा दर्द हो रहा है तो खीरा काटकर उसकी स्लाइस को सिर पर रगड़ें या उसे सुंघे। इससे भी सिर का दर्द गायब हो जाएगा।

लहसुन 
लहसुन की कुथ कलियों का पीसकर उसका रस निकालकर पिएं। इससे भी काफी फायदा मिलेगा। 

रविवार, 27 अगस्त 2017

अपनाएं ये दमदार घरेलू नुस्खे और पाएं दवाओं से छुटकारा

अपनाएं ये दमदार घरेलू नुस्खे और पाएं दवाओं से छुटकारा


अक्सर हमारी आदत होती है कि छोटी मोटी समस्या होने पर हम उसका इलाज दवाओं में ढूँढ़ते हैं ! थोड़ा सा सिर दर्द क्या होता है हम खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं और दवाई लेकर उससे छुटकारा पा लेते हैं ! लेकिन भविष्य में दवाओं का असर बेहद हानिकारक हो सकता है और ये बात अक्सर हमारे बड़े बुजुर्ग हमे समझाते हैं ! लेकिन कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे भी हैं जो सदियों से चले आ रहे हैं और इन्हे अपनाकर हम छोटी मोटी बिमारियों से निजात पा सकते हैं जिनका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता ! आज की पीढ़ी की सोच होती है की घरेलू नुस्खे असरकारक नहीं होते और तुरंत आराम पाने के चक्कर में दवाओं का सहारा लेते हैं लेकिन यही आदत भविष्य में उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो जाती है और उन्हें पता भी नहीं चलता !

हमारे घर में रोज काम आने वाली कई ऐसी चीज़ें होती हैं जिनमे बेहतरीन औषधीय गुण पाए जाते हैं जो ना सिर्फ बीमारी से छुटकारा दिलाती है बल्कि स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव भी नहीं डालती ! आइये आपको भी कुछ दादी माँ के असरदार घरेलू नुस्खों के बारे में बताते हैं जिन्हे अपनाकर आप दवाओं से दूर रह सकते हैं और अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं !

कब्‍ज के लिए अंजीर
अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती है तो दवाई लेने की बजाय अंजीर का सेवन करें तो ज्यादा बेहतर होगा ! दरअसल अंजीर फाइबर युक्त होता है जो पेट साफ़ करने में बेहद सहायक होता है ऐसे में कब्ज की समस्या होने पर एक अंजीर को पानी में भिगोकर रख दें और रात भर उसे भीगने दें फिर सुबह उठकर अंजीर का पानी पी लें और अंजीर को चबाकर खा लें ! ऐसा नियमित रूप से कुछ दिनों तक करें आपकी कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी !

सिर दर्द की समस्या होने पर गाय के घी का सेवन करें
सिर दर्द होना एक आम समस्या है लेकिन इससे छुटकारा पाने के लिए हम दवाओं का सहारा लेते हैं लेकिन अगर आप एक देसी घरेलू नुस्खा अपनाते हैं तो आपको अपने सिर दर्द की समस्या से निजात मिल सकते हैं ! दरअसल दादी माँ के नुस्खे के अनुसार अगर सिर दर्द की समस्या हो और ऐसे में नाक में 2 बूँद शुद्ध गाय का घी डाल लिया जाये तो सिर दर्द की समस्या दूर हो जाती है ! अगर आपको सिर दर्द की समस्या अक्सर होती रहती है तो नियमित रूप से नाक में 2 बूँद शुद्ध गाय का घी डालें कुछ ही दिनों में आपको सिर दर्द की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा !

प्‍याज से करें मस्‍सों का इलाज
मस्से होने पर कई लोग या तो इनके खुद ही फोड़ लेते हैं या इन्हे कटवा लेते हैं लेकिन इससे स्किन एलर्जी और दूसरी समस्या होने का खतरा हो सकता है ! लेकिन अगर आपको बताया जाये की इसका इलाज हमारे घर में ही मौजूद है तो शायद आप भी वो घरेलू नुस्खा अपनाना ही पसंद करेंगे ! दरअसल प्याज के जरिये आप अनचाहे मस्सों से छुटकारा पा सकते हैं ! इसके लिए कुछ दिनों तक ज के रस को मस्सों पर लगाएं और प्याज को काटकर उसे मस्सों पर रगड़ें इससे कुछ ही दिनों में आपके मस्से जड़ से ख़त्म हो जायेंगे !

अदरक या मुलेठी से खांसी का इलाज
अगर गले में खराश, दर्द, सूजन या खांसी हो तो अदरक के एक छोटे टुकड़े को पीसकर उसमे गुड़ और घी मिलाएं और खा लें इससे आपको काफी आराम मिलेगा ! इसके अलावा रात को सोते समय मुलेठी के कुछ टुकड़े चबाएं और उसे मुँह में रखकर सो जाएं सुबह तक गला साफ़ हो जायेगा और आराम मिलेगा !

फटे होठ सही करे सरसों का तेल
अगर आपके होठ भी फटते हैं तो आपको तरह तरह की क्रीम लगाने की आवश्यकता नहीं है बल्कि आपके घर में रखा सरसों का तेल आपके फाटे होठ ठीक कर देगा ! अगर आपके होठ फाटे हों तो सरसों के तेल की कुछ बूँदें अपनी नाभि में लगाएं इससे होठ फटने की समस्या दूर होगी और होठ मुलायम बनेंगे !