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शनिवार, 5 मई 2018

सोने से भी कीमती यह चीज जिसे हम फैंक देते हैं, इसके बारे में जानकर दंग रह जाएंगे आप

सोने से भी कीमती यह चीज जिसे हम फैंक देते हैं, इसके बारे में जानकर दंग रह जाएंगे आप


संतरे हर किसी को पसंद होते  है लेकिन कुछ लोग इनको खाकर और इनके छिलके को फेंक देते हैं, क्योंकि वह नहीं जानते हैं कि इनसे कितना नुकसान होता है लेकिन इनके इतने फायदे होते है कि हर कोई इस बात को सुनकर दंग रह जायेगा इसके छिलके सोने की कीमत से कम नहीं होते हैं..बता दे कि संतरों के अलावा सभी फलों के छिलकों में पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो कि आपके सेहत के साथ -साथ चेहरे के लिए भी फायदेमंद होते  हैं आइये जानते हैं कैसे,….

-संतरे का छिलका आपके पाचनतंत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ आपके मेटाबॉलिज्म की गति को भी बढ़ाता है, जो मोटापा और कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी दूर होती है.

-संतरे का छिलका एसि‍डि‍टी, हार्टबर्न, मतली, उल्टी आने जैसी समस्याओं को दूर करता है.

-यह छिलके ऑस्ट‍ियोपोरोसिस, कोलोन कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में काफी मददगार होते हैं, साथ ही लिवर को स्वस्थ रखकर उसके बेहतर क्रियान्वयन में भी सहायक होते हैं।संतरे के छिलके में फ्लेवेनॉइड्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं,

-इसमें विटामिन सी होने के कारण यह  रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, साथ हीआपकी त्वचा के लिए भी अच्छा होता है.

-यदि आपके चेहरे पर ब्लैकहेड्स है तो संतरे  का छिलका को सूखाकर चेहरे पर रगड़ना चाहिए.यह  आपकी त्वचा को साफ, बेदाग और चमकदार बनाने का काम करता है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

रात को सोने से पहले खाकर इस नुस्ख़े से ज़िन्दगी भर के लिए हट जाएगा आँखों से चश्मा

रात को सोने से पहले खाकर इस नुस्ख़े से ज़िन्दगी भर के लिए हट जाएगा आँखों से चश्मा


आज की लापरवाह लाइफस्टाइल, कमजोर डाईट, और मोबाइल – टीवी के बढ़ते उपयोग के चलते लोगो को बहुत जल्दी आँखों पर चश्मा लग जाता हैं. एक जमाना था जब लोगो को आँखों पर चश्मा लगाने के लिए बुढापे के आने का इंतज़ार करना होता था. लेकिन आज के जमाने में तो छोटे छोटे बच्चे भी चश्मा लगाने पर मजबूर हो जाते हैं.

आँखों से चश्मा हटाने का नुस्खा

आँखों से चश्मा हटाने का नुस्खा तैयार करने के लिए आपको सिर्फ चार चीजों की जरूरत होगी. एक बात तो साफ़ हैं कि आज के समय में किसी को भी आँखों पर चश्मा लगाना पसंद नहीं होता हैं. ऐसे में हर कोई सोचता हैं कि काश कोई ऐसा तरीका होता जिसके चलते मेरी आँखों से चश्मा हट जाता. आँखों से चश्मा हटाने के लिए बाजार में कांटेक्ट लेंस मौजूद हैं लेकिन इनकी देख रेख करना काफी पेचीदा काम होता हैं. कई लोगो को ये सूट भी नहीं होते हैं. ऐसे में आज हम आपको आँखों से चश्मा हटाने का प्राकृतिक तरीका बताने जा रहे हैं.

सामग्री: 

  • 4 बादाम 
  • एक चम्मच मिश्री
  • एक चम्मच सौंफ
  • एक गिलास दूध

नुस्खा बनाने की विधि: 

जबसे पहले एक कटोरी में थोड़ा पानी डाल के उसमे चार बादाम भिगो दे. अब अगले दिन इन चारो बादाम के छिलके उतार ले. इसके बाद बादाम को मिस्कर में डाले और इसके अन्दर एक चम्मच सौंफ और एक चम्मच मिश्री मिला दे. अब इन तीनो को मिक्सर के अन्दर पीस ले. यदि आप मिस्कर का उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो इमाम दस्ते (खलबत्ता) का उपयोग भी कर सकते हैं. जब बादाम, सौंफ और मिश्री पिस कर तैयार हो जाए तो इसे एक खाली ग्लास में डाल दे. अब इस ग्लास में सामान्य तापमान वाला ताजा दूध डाले. इस मिश्रण को दूध में अच्छी तरह से मिक्स कर ले.

प्रयोग विधि: 

बादाम, मिश्री, सौंफ और दूध से बनी ये ख़ास ड्रिंक आपको रोज रात सोने से पहले पीना होगा. ऐसा यदि आप 20 से 25 दिनों तक करोगे तो आपको आँखों की रौशनी में फर्क दिखने लगेगा. इस नुस्खे के लगातार उपयोग से आपकी आँखों का चश्मा तो हटेगा ही साथ ही जिन लोगो को चश्मा नहीं लगा हैं उन्हें आगे चलकर चश्मा लगने के चांस ना के बराबर होंगे. आँखों के अलावा ये ड्रिंक आपकी पाचन क्रिया को भी मजबूत करने का कार्य करती हैं. मतलब ये ख़ास ड्रिंक आपकी आँख और हेल्थ दोनों के लिए फायदेमंद हैं. इस ड्रिंक की ख़ास बात यह हैं कि इसे पीने के बाद आपको किसी भी प्रकार के साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं.

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये अचूक फ़ायदे

रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये अचूक फ़ायदे


देशी गाय के घी में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो और किसी चीज़ में नहीं मिलते। यहाँ तक की इसमें ऐसे माइक्रोन्यूट्रींस होते हैं जिनमें कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही, देशी गाय का घी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास एवं रोग-निवारण के साथ पर्यावरण-शुद्धि का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। प्रतिदिन रात को सोते वक़्त नाक में 2–2 बूँद गाय के देशी घी डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है। देशी घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले। और पाच मिनट लेते रहे इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है। आज आपको रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के अचूक फ़ायदो के बारे में बताएँगे: –

हार्ट अटैक
हार्ट अटैक जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, ह्रदय मज़बूत होता है।

सोरायसिस और त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक
सोरायसिस गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सोरायसिस के लिए भी कारगर है।

बाल झडना
बाल झडना गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।

आँखों की ज्योति बढ़ती है
आँखों की ज्योति एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।

कोमा से जगाए
कोमा गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है।

हथेली और पांव के तलवो में जलन
हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।

कफ की शिकायत
कफ की शिकायत गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।

कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता
कैंसर गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है।

नस्य (Desi Ghee) ना लेने का समय
नस्य ना लेने का हर समय सही नहीं होता. कृपया ध्यान रखें कि नीचे बताई गयी अवस्थाओं में इसका इस्तेमाल न करें:
  • बीमार पड़ने पर.
  • आघात होने पर.
  • बहुत थका हुआ होने पर.
  • वर्षा ऋतू में जब सूर्य ना हो.
  • गर्भवती या प्रसव के बाद.
  • बाल धोने के बाद.
  • भूक या प्यास लगने पर.
  • अजीर्ण होने पर.
  • अनुवासन बस्ती या विरेचन के बाद.

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

शुगर जैसी अनेक बीमारियों के लिए रामबाण इलाज़ है भिंडी का पानी

शुगर जैसी अनेक बीमारियों के लिए रामबाण इलाज़ है भिंडी का पानी


आज हम आपको ऐसी खबर बता रहे है जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। भिंडी काफी लोगों की पसंदीदा सब्‍जी है। लेकिन वह आपकी थाली में शायद इसलिए रहती है क्योंकि वह स्वादिष्ट होती है. हालांकि ये लेख पढ़ने के बाद भी भिंडी आपकी थाली में बनी रहेगी, लेकिन उसकी वजह बदल जाएगी. अब सिर्फ स्वाद की वजह से ही नहीं, बल्कि सेहत की वजह से भी भिंडी आपकी पसंदीदा सब्‍जी बन जाएगी। आइये जाने भिंडी खाने के फायदे।

डायबिटीज का इलाज है भिंडी के पास
डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है. भिंडी में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से यह डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है। दो भिंडी लें के दोनों सिरों को काटकर उसे एक गिलास पानी में डालकर रात भर रख दें। सुबह उठकर भिंडी निकालकर इस पानी को पिएं। ये इन्सुलिन को बढ़ाता है साथ ही इसके पानी से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और ब्लड शुगर नियंत्रण में रहेगा। इसका असर आपको 15 दिनों में देखने को मिल सकता है क्योंकि यह ब्लड शुगर के लेवल पर निर्भर करता है। यदि यह ज्यादा है तो कुछ सप्ताह लग सकते है यदि कम है तो कुछ दिनों में परिणाम मिल सकता है।

विटामिन K का है खजाना :
भिंडी में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्त संचार को बनाए रखता है. भोजन में भिंडी खाने से शरीर में विटामिन के की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे रक्‍त के थक्के नहीं बनते।

प्रेग्नेंसी में जरूर खाएं भिंडी :
वे महिलाएं, जो गर्भवती हैं या फिर गर्भधारण करना चाहती हैं, उन्हें भिंडी का सेवन जरूर करना चाहिए. भिंडी में काफी मात्रा में फॉलिक एसिड होता है, जो भ्रूण के विकास के लिए जरूरी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है :
भिंडी में विटामिन सी पाया जाता है, जिसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. शरीर में विटामिन सी की संतुलित मात्रा होने से मौसमी एलर्जी होने का खतरा भी कम रहता है।

आंखों के लिए फायदेमंद है भिंडी :
विटामिन ए और बीटा कैरोटीन आंखों की रौशनी बढ़ाता है. भिंडी में ये दोनों ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

भिंडी के सेवन से वजन नहीं बढ़ता है
भिंडी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर काफी होता है. वजह से यह शरीर को भरपूर ऊर्जा तो देती है, लेकिन इसके सेवन से वजन नहीं बढ़ता है।

कब्‍ज का रामबाण इलाज :
अगर आप कब्‍ज से परेशान हैं तो अपने भोजन में भिंडी को शामिल कर लें. भिंडी में मौजूद फाइबर रोज सुबह पेट साफ करने में मददगार होते हैं।

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

मौत को छोड़ कर सभी बीमारियों का इलाज सम्भव है इस छोटी सी हरड़ से

मौत को छोड़ कर सभी बीमारियों का इलाज सम्भव है इस छोटी सी हरड़ से


हमारे आयुर्वेद में बहुत सी ऐसी चीज़े है जिनके बारे में हमें नहीं पता, और वो इतनी गुणकारी है कि हमारी लगभग सभी समस्याएँ ठीक हो जाए, लेकिन उससे पहले हमें उनके बारे में जानने की जरुरत है. इसी तरह कुदरत की दी हुई एक बहुत ही अनमोल औषधि है, हरड़ ये इतनी गुणकारी है कि शायद ही आपको इसका ज्ञान होगा. हरड़ को संस्कृत में ‘हरीतकी’ के नाम से जाना जाता है.

आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी के सात प्रकार होते हैं, जिन्हें चेतकी हरड़, अभ्या हरड़, रोहिणी हरड़, बड़ी हरड़, काली हरड़ तथा पीली हरड़ के रूप में जाना जाता है. हरड़, बहेड़ा और आंवला के मिश्रित चूर्ण को त्रिफला कहा जाता है. इस छोटी-सी हरड़ में किन-किन बीमारियों को दूर करने की शक्तिनिश्चित है, उस पर एक नजर डालते हैं. बड़ी हरड़ के छिलके, अजवाइन एवं सफेद जीरा बराबर बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम दही में मिलाकर लेते रहने से सूखी आंव तथा मरोड़ में लाभ पहुंचता है.
ये भी पढ़िए : त्रिफला के पानी से दूर करें आंखों की सूजन और डार्क सर्कल

मौत को छोड़कर सभी चीजों का इलाज हो सकता है इससे, इतनी गुणकारी है ये औषधि

हमारे आयुर्वेद में बहुत सी ऐसी चीज़े है जिनके बारे में हमें नहीं पता, और वो इतनी गुणकारी है कि हमारी लगभग सभी समस्याएँ ठीक हो जाए, लेकिन उससे पहले हमें उनके बारे में जानने की जरुरत है. इसी तरह कुदरत की दी हुई एक बहुत ही अनमोल औषधि है, हरड़ ये इतनी गुणकारी है कि शायद ही आपको इसका ज्ञान होगा. हरड़ को संस्कृत में ‘हरीतकी’ के नाम से जाना जाता है.
आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी के सात प्रकार होते हैं, जिन्हें चेतकी हरड़, अभ्या हरड़, रोहिणी हरड़, बड़ी हरड़, काली हरड़ तथा पीली हरड़ के रूप में जाना जाता है. हरड़, बहेड़ा और आंवला के मिश्रित चूर्ण को त्रिफला कहा जाता है. इस छोटी-सी हरड़ में किन-किन बीमारियों को दूर करने की शक्ति निश्चित है, उस पर एक नजर डालते हैं.

बड़ी हरड़ के छिलके, अजवाइन एवं सफेद जीरा बराबर बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम दही में मिलाकर लेते रहने से सूखी आंव तथा मरोड़ में लाभ पहुंचता है.

काली हरड़ को महीन पीसकर मुंह तथा जीभ के छालों पर लगाते रहने से छालों से मुक्ति मिलती है. प्रतिदिन दो-चार बार लगाते रहने से हरेक प्रकार के छालों से मुक्ति मिलती है. पीली हरड़ के छिलके का चूर्ण तथा पुराना गुड़ बराबर मात्रा में लेकर गोली बनाकर रख लें. मटर के दानों के बराबर वाली इन गोलियों को दिन में दो बार सुबह-शाम पानी के साथ एक महीनें तक लेते रहने से यकृत लीवर एवं प्लीहा के रोग दूर हो जाते हैं.

छोटी हरड़ के चूर्ण को गाय के घी के साथ मिलाकर सुबह -शाम खाते रहने से पांडुरोग में लाभ मिलता है. पुराने कब्ज के रोगी को नित्यप्रति भोजन के आधा घंटा बाद डेढ़-दो ग्रामकी मात्रा में हरड़ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेते रहने से फायदा होता है.

एक मध्यम आकार की पीली हरड़ के दो टुकड़े छिलके सहित कांच के गिलास में इस तरह भिगो दें कि वह भीगने पर पूरी तरह फूल जाये. चौदह घण्टे भीगने के बाद हरड़ की गुल्ली को निकालकर उसके अन्दर के बीजों को निकालकर गुल्ली को खूब चबा-चबाकर खायें तथा ऊपर से हरड़ वाला पानी पी लें. एक माह तक इस विधि का सेवन लगातार करते रहने से ‘प्रोस्टेट ग्लैण्ड’ की सूजन ठीक हो जाती है.

गर्मी के कारण नेत्र में जलन होती हो, नेत्र लाल हो जाते हों, नेत्र से पानी गिरता हो तो त्रिफला के जल से आंखों को धोते रहने से आराम मिलता है. सुबह खाली पेट एक चम्मच त्रिफला का क्वाथ काढ़ा पीते रहने से खून की कमी दूर हो जाती है हरड़ के काढ़े में चाशनी मिलाकर पीने से गले के रोगों में लाभ मिलता है.

जिन नवजात शिशुओं के भौहें नहीं हों, हरड़ को लोहे पर घिसकर, सरसों तेल के साथ मिलाकर शिशु के भौंह वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करते रहने से धीरे-धीरे भौंह उगने लगते हैं. अगर सप्ताह में एक बार बच्चे को हरड़ पीसकर खिलाया जाता रहे, तो उसे जीवन में कब्ज का सामना कभी नहीं करना पड़ता है.

जिन स्त्रियों को गर्भपात की बार-बार शिकायत हो, उन्हें त्रिफला चूर्ण के साथ लौह भस्म मिलाकर लेते रहना चाहिए.

रात को सोते समय थोड़ा-सा त्रिफला चूर्ण दूध के साथ पीते रहने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और शीघ्र स्खलन का भय दूर हो जाता है. छोटी पीपल और बड़ी हरड़ का छिलकासमान मात्रा में लेकर पीस लें. तीन ग्राम की मात्रा में सुबह ताजे जल के साथ लेते रहने पर बैठा गला खुल जाता है. पेटदर्द होने पर हरड़ को घिसकर गुनगुने पानी के साथ लेने पर तत्काल लाभ होता है.

हरड़, सेंधा नमक तथा रसौंत को पानी में पीसकर आंख के ऊपरी भाग के चारों तरफ लेप करने से आंख आना, आंखों की सूजन, व दर्द नष्ट हो जाते हैं. नित्यप्रति प्रात: काल शीतल जल के साथ तीन ग्राम की मात्रा में छोटी हरड़ का चूर्ण सेवन करते रहने से सफेद दाग मिटाने शुरू हो जाते हैं. शरीर के जिन अंगों पर दाद हो, वहां बड़ी हरड़ को सिरके के साथ घिसकर लगाने से लाभ होता है.

बुधवार, 17 जनवरी 2018

1 रुपये की मूली में है इतनी ताकत कि जड़ से खत्म हो जाएंगी ये बीमारियां

1 रुपये की मूली में है इतनी ताकत कि जड़ से खत्म हो जाएंगी ये बीमारियां


सलाद और सब्जी के रूप में इस्तेमाल होने वाली मूली सेहत के लिए वरदान साबित होती है। मूली से सिर्फ सब्जियां ही नहीं बल्कि इससे पराठे और आचार भी बनाए जाते हैं। मामूली सी दिखने वाली मूली से कई रोगों का इलाज किया जा सकता है। जी हां, मूली कई औषधिय गुणों से भरपूर होती है। तो चलिए आज जानेंगे मूली के फायदों के बारे में-

त्वचा के लिए
मुली का सेवन करना त्वचा के लिए लाभकारी होता है। रोजाना सुबह खली पेट में मुली को खाने से चेहरा साफ और सुन्दर रहता है। मुली को पिस कर खुजली वाली हिसे में लगा कर कम से कम आधे घंटे के बाद धोने से खुजली से भी राहत मिलता है ।

कैंसर की छुट्टी
मूली में भरपूर मात्रा में फॉलिक एसिड, विटामिन C और एंथोकाइनिन पाए जाते हैं। ये तत्वन शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है।

डायबिटीज से छुटकारा
मूली कम ग्लाछइसेमिक इंडेक्स, के लिए जानी जाती है। यानी कि इसे खाने से ब्लहड शुगर पर असर नहीं होता है। रोजाना सुबह खाने में मूली का सेवन करने से डायबिटीज से जल्द छुटकारा मिल सकता है।

सर्दी-जुकाम में राहत
मूली खाने से जुकाम भी नही होता है। कुछ नहीं तो मूली को कम से कम सलाद में तो जरूर खाना चाहिए।

भूख बढाती है
यदि आप को भूख न लगने की शिकायत है तो रोज खाने के समय एक मुली को काली नमक के साथ लगा कर खाने से भूख अच्छी लगती है।

आँखों के लिए
मुली में काफी अच्छी मात्र में Vitamin A, B, C जैसे तत्व पाए जाते है जो की हमारे आँखों की रोशनी को बढाता है । रोजाना सुबह मुली को खाने से आँखों की रौशनी बढती है ।

नींद ना आना
यदि आप नींद न आने से परेशान है, तो रोजान सोने से पहले एक मुली का सेवन करे ऐसा करने से आप को नींद अच्छी आयगी ।

गैस
मुली गैस की समस्या के लिए रामबाण सिद्ध होता है। मुली और टमाटर का सलाद या मुली के juise का सेवन करने से गैस से छुटकारा मिलता है ।

बालों के लिए
यदि आप के बालो में जुएँ हो गये है और कई घरेलु उपाय अपना कर भी इससे छुटकारा नहीं मिल रहा हो तो, मुली के रस से अपने बालो को पूरी तरह से भिन्गों दे और 5 मिनट तक मालिस करे और फिर आधा घंटे के बाद अपने सर को धो ले । इस प्रक्रिया को 3 से 5 दिनों तक उपयोग करने से सारे जुएँ और लिख मर जायंगे ।

शनिवार, 13 जनवरी 2018

...तो लड़कियां इस काम के लिए भी करती हैं खीरे का इस्तेमाल

...तो लड़कियां इस काम के लिए भी करती हैं खीरे का इस्तेमाल


हम सभी जानते है खीरे में काफी तरह के पौष्टिक तत्त्व वह विटामिन पाए जाते है। तथा गर्मियों में तो यह सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। गर्मियों के मौसम में खीरा खाने से पानी की कमी पूरी हो जाती है। और पेट को साफ रखने में भी मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते है की खीरे का इस्तेमाल सिर्फ खाने के लिए ही नहीं किया जाता है।बल्कि और भी बहुत से काम के लिये किया जाता है। आईये जानते है खीरे के ये तीन महत्वपूर्ण प्रयोग।


1. आँखों की सूजन कम करने के लिये
अक्सर देखा गया है की बहुत सी लड़कियों को सुबह जल्दी जागने के बाद आँखों के नीचे सूजन की समस्या का सामना करना पड़ता है। सूजन के कारण चेहरा की रौनक खो जाती है। इस सूजन को कम करने में खीरा बहुत ही फायदेमंद है इसके लिये आपको फ्रिज में से ठंडा खीरा लेकर उसको दो गोल और पतले टुकड़े में काटना है और 10 से 15 मिनिट के लिये आँखों के ऊपर रखना है। इससे आँखों की सूजन भी कम होगी और आँखों को आराम भी मिलेगा।
2. फेस मास्क बनाने के लिये
चेहरे को कील और मुहासे आदि से दूर रखने के लिये आप खीरे और दही को मिलाकर एक फेस पैक बना ले और उसे 10 से 20 मिनिट तक चेहरे पर लगाये। इससे आपका चेहरा ग्लो करने लगेगा और आपके चेहरे को ठंडक मिलेगी कील-मुहासे की समस्या से भी आराम मिलेगा।
3. बालों का टूटना कम करने के लिये।
1 अंडा, 1 चम्मच जैतून का तेल और एक खीरा छिला हुआ इन सबको पीसकर एक पेस्ट बना ले। इस पेस्ट को बालों में लगाये और 10 मिनिट तक ऐसे ही छोड़ दे। थोड़ी देर बाद ठन्डे पानी से धो। ले इससे बालों के टूटने की समस्या से छुटकारा मिलेगा और डेंड्रफ से छुटकारा मिलेगा।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल


गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है।

गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया गया तो वहाँ पर एक नया पौधा बन जाता है। गिलोय की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि इसमें गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, अनेक प्रकार की वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाये जाते हैं।
पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है। कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है। इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं। यह क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह इन्सुलिन की उत्पत्ति को बढ़ाकर ग्लूकोज का पाचन करना तथा रोग के संक्रमणों को रोकने का कार्य करती है।
आइये हम गिलोय से होने वाले शारीरिक फायदे की ओर देखें :
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है – गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होनेवाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी – गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है। गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

पाचन क्रिया करता है दुरुस्त – गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

बवासीर का भी इलाज है गिलोय – बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

डॉयबिटीज का उपचार – अगर आपके शरीर में रक्त में पाए जाने वाली शुगर की मात्रा अधिक है तो गिलोय के रस को नियमित रूप से पीने से यह मात्रा भी कम होने लगती है।

अस्थमा का बेजोड़ इलाज – अस्थमा एक प्रकार की अत्यंत ही खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से मरीज को भिन्न प्रकार की तकलीफों का सामना करना पडता है, जैसे छाती में कसाव आना, साँस लेने में तकलीफ होना, अत्याधिक खांसी होना तथा सांसो का तेज तेज रूप से चलना। कभी कभी ऐसी परिस्थिती को काबू में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, कि अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गिलोय का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है, तथा इससे अस्थमा की समस्या से छुटकारा भी मिलने लगता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु – गिलोय हमारी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह हमारी आंखों की दृष्टी को बढाता है, जिसकी वजह से हमे बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है। यदि गिलोय के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर यह पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है।

सौंदर्यता के लिए भी है कारगार – गिलोय का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने में काफी सहायता मिलती है। यह हमारी त्वचा को युवा बनाए रखने में मदद करता है। गिलोय से हमारी त्वचा का स्वास्थ्य सौंदर्य बना रहता है। तथा उस में एक प्रकार की चमक आने लगती है।

दांतों में पानी लगना: गिलोय और बबूल की फली समान मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह-शाम नियमित रूप से इससे मंजन करें इससे आराम मिलेगा।

खुजली: हल्दी को गिलोय के पत्तों के रस के साथ पीसकर खुजली वाले अंगों पर लगाने और 3 चम्मच गिलोय का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर सुबह-शाम पीने से खुजली पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

हिचकी: सोंठ का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

कान का मैल साफ करने के लिए: गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके कान में 2-2 बूंद दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है और कान साफ हो जाता है।

कान में दर्द: गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

संग्रहणी (पेचिश): अती, सोंठ, मोथा और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 20-30 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मन्दाग्नि (भूख का कम लगना), लगातार कब्ज की समस्या रहना तथा दस्त के साथ आंव आना आदि प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

कब्ज : गिलोय का चूर्ण 2 चम्मच की मात्रा गुड़ के साथ सेवन करें इससे कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

एसीडिटी: गिलोय के रस का सेवन करने से ऐसीडिटी से उत्पन्न अनेक रोग जैसे- पेचिश, पीलिया, मूत्रविकारों (पेशाब से सम्बंधित रोग) तथा नेत्र विकारों (आंखों के रोग) से छुटकारा मिल जाता है। गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्तों को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त हो जाती है।

बवासीर, कुष्ठ और पीलिया: 7 से 14 मिलीलीटर गिलोय के तने का ताजा रस शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से बवासीर, कोढ़ और पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।

चेहरे के दाग-धब्बे: गिलोय की बेल पर लगे फलों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।

सफेद दाग : सफेद दाग के रोग में 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के रस को रोजाना 2-3 बार कुछ महीनों तक सफेद दाग के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

पेट के रोग : 18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद और छोटी पीपल, 2 नीम की सींकों को पीसकर 250 मिलीलीटर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में फूलने के लिए रात के समय रख दें तथा सुबह उसे छानकर रोगी को रोजाना 15 से 30 दिन तक पिलाने से पेट के सभी रोगों में आराम मिलता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया) : गिलोय के 2-4 ग्राम का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।

शीतपित्त (खूनी पित्त): 10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।

उल्टी होना (वमन): गिलोय का रस और मिश्री को मिलाकर 2-2 चम्मच रोजाना 3 बार पीने से वमन (उल्टी) आना बंद हो जाती है। गिलोय का काढ़ा बनाकर ठण्डा करके पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।

आंखों की बीमारी: लगभग 11 ग्राम गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद और सेंधानमक मिलाकर, इसे खूब अच्छी तरह से गर्म करें और फिर इसे ठण्डा करके आंखो में लगाने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इसके प्रयोग से पिल्ल, बवासीर, खुजली, लिंगनाश एवं शुक्ल तथा कृष्ण पटल आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं। गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे पीपल के चूर्ण और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है तथा और भी आंखों से सम्बंधित कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।

क्षय (टी.बी.): गिलोय, कालीमिर्च, वंशलोचन, इलायची आदि को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ कुछ हफ्तों तक रोजाना सेवन करने से क्षय रोग दूर हो जाता है। कालीमिर्च, गिलोय का बारीक चूर्ण, छोटी इलायची के दाने, असली वंशलोचन और भिलावा समान भाग कूट-पीसकर कपड़े से छान लें। इसमें से 130 मिलीग्राम की मात्रा मक्खन या मलाई में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से टी.बी. रोग ठीक हो जाता है।

दमा (श्वास का रोग): गिलोय की जड़ की छाल को पीसकर मट्ठे के साथ लेने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है। 6 ग्राम गिलोय का रस, 2 ग्राम इलायची और 1 ग्राम की मात्रा में वंशलोचन शहद में मिलाकर खाने से क्षय और श्वास-रोग ठीक हो जाता है।

बुखार: गिलोय 6 ग्राम, धनिया 6 ग्राम, नीम की छाल 6 ग्राम, पद्याख 6 ग्राम और लाल चंदन 6 ग्राम इन सब को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस बने हुए काढ़े को सुबह और शाम पीते रहने से हर प्रकार का बुखार ठीक हो जाता है।

जीभ की जलन और सूजन: गिलोय, पीपल, तथा रसौत का काढ़ा बनाकर इससे गरारे करने से जीभ की जलन तथा सूजन दूर हो जाती है।

मुंह के अन्दर के छालें (मुखपाक): धमासा, हरड़, जावित्री, दाख, गिलोय, बहेड़ा एवं आंवला इन सब को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। ठण्डा होने पर इसमें शहद मिलाकर पीने से मुखपाक दूर होते हैं।

शारीरिक कमजोरी: 100 ग्राम गिलोय का लई (कल्क), 100 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण, दोनों को एक साथ 1 लीटर उबलते पानी में मिलाकर किसी बंद पत्ते में रख दें। 2 घंटे के बाद मसल-छान कर रख लें। इसे 50-100 ग्राम रोजाना 2-3 बार सेवन करने से बुखार से आयी शारीरिक कमजोरी मिट जाती है।

प्यास अधिक लगना: गिलोय का रस 6 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कई बार लेने से प्यास शांत हो जाती है।

मधुमेह: 40 ग्राम हरी गिलोय का रस, 6 ग्राम पाषाण भेद, और 6 ग्राम शहद को मिलाकर 1 महीने तक पीने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है। या 20-50 मिलीलीटर गिलोय का रस सुबह-शाम बराबर मात्रा में पानी के साथ मधुमेह रोगी को सेवन करायें या रोग को जब-जब प्यास लगे तो इसका सेवन कराएं इससे लाभ मिलेगा। या 15 ग्राम गिलोय का बारीक चूर्ण और 5 ग्राम घी को मिलाकर दिन में 3 बार रोगी को सेवन कराऐं इससे मधुमेह (शूगर) रोग दूर हो जाता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया): गिलोय और सोंठ को एक ही मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से पुराने से पुराना गठिया रोग में फायदा मिलता है। या गिलोय, हरड़ की छाल, भिलावां, देवदारू, सोंठ और साठी की जड़ इन सब को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें तथा छोटी बोतल में भर लें। इसका आधा चम्मच चूर्ण आधा कप पानी में पकाकर ठण्डा होने पर पी जायें। इससे रोगी के घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है। या घुटने के दर्द दूर करने के गिलोय का रस तथा त्रिफुला का रस आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से लाभ मिलता है।

पेट में दर्द : गिलोय का रास 7 मिलीलीटर से लेकर 10 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

पीलिया रोग: गिलोय अथवा काली मिर्च अथवा त्रिफला का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर प्रतिदिन सुबह और शाम चाटने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। या गिलोय का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय की लता गले में लपेटने से कामला रोग या पीलिया में लाभ होता है। या गिलोय का रस 1 चम्मच की मात्रा में दिन में सुबह और शाम सेवन करें।

मानसिक उन्माद (पागलपन): गिलोय के काढ़े को ब्राह्मी के साथ पीने से उन्माद या पागलपन दूर हो जाता है।
शरीर की जलन: शरीर की जलन या हाथ पैरों की जलन में 7 से 10 मिलीलीटर गिलोय के रस को गुग्गुल या कड़वी नीम या हरिद्र, खादिर एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करने से शरीर में होने वाली जलन दूर हो जाती है।

कुष्ठ (कोढ़): 100 मिलीलीटर बिल्कुल साफ गिलोय का रस और 10 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण 1 लीटर उबलते हुए पानी में मिलाकर किसी बंद बर्तन में 2 घंटे के लिये रखकर छोड़ दें। 2 घंटे के बाद इसे बर्तन में से निकालकर मसलकर छान लें। इसमें से 50 से 100 ग्राम की मात्रा प्रतिदिन दिन में 3 बार सेवन करने से खून साफ होकर कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।

खून की कमी: 360 मिलीलीटर गिलोय के रस में घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में खून की वृद्धि होती है। या गिलोय (गुर्च) 24 से 36 मिलीग्राम सुबह-शाम शहद एवं गुड़ के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।

सिर का दर्द: मलेरिया के कारण होने वाले सिर के दर्द को ठीक करने के लिए गिलोय का काढ़ा सेवन करें।

ज्यादा पसीना या दुर्गन्ध आना : 20 से 40 मिलीलीटर गिलोय का शर्बत 4 गुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम के समय में पीने से बदबू वाला पसीना निकलना बंद हो जाता है।

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

जानिये पपीता और नींबू का एक साथ सेवन करने से होते है ये फायदे

जानिये पपीता और नींबू का एक साथ सेवन करने से होते है ये फायदे


विटामिन A, B और C तथा फाइबर से भरपूर पपीता और नींबू पेट, आंख और त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटैशियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स, काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन, सोडियम तथा अन्य खनिज-लवण भी मौजूद रहते हैं, जो स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होते हैं।

कब्ज की शिकायत दूर होती है: आपको बता दे कि पपीते का सेवन पेट के लिए अच्छा होता है। पपीते के छोटे-छोटे टुकड़े करके काली मिर्च का चूर्ण, सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से भोजन के प्रति अरुचि की शिकायत दूर होती है और भोजन सरलता से हजम हो जाता है।इसमे पपाइन नामक एंजाइम पाया जाता है, जो आहार को पचाने में अत्यंत मददगार साबित होता है। इसके सेवन करने से मंदाग्नि की शिकायत दूर होती है। इसमें दस्त और पेशाब की समस्या को दूर करने का गुण है।
लीवर, सिरोसिस और कैंसर से बचाव: पपीते और नींबू रस लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पपीता लीवर को काफी मज़बूती प्रदान करता है और नींबू लीवर को पित्त(बाइल) के उत्पादन में सहायता करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में भी मदद करता है। इसलिए हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं।
इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें। इसके सेवन से कोलन कैंसर, प्रोस्‍टेट कैंसर और ब्‍लड कैंसर आदि की कैंसर कोशिकाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

आंखों के लिए फायदेमंद: नींबू और पपीते में मौजूद विटामिन ए आंखों की कमजोरी को दूर करता है। पपीते में कैल्श्यिम, कैरोटीन के साथ विटामिन ए विटामिन बी, और सी, डी की की भरपूर मात्रा होती है। जो आंखों की दिक्कतों को खत्म करती है।इसके सेवन से रतौंधी रोग का निवारण होता है और आंखों की ज्योति बढ़ती है।आंखों की दृष्टि अच्‍छी बनाएं रखने के लिए इसका सेवन जरूर करे। जिन बच्‍चों को कम उम्र में ही चश्‍मा लग जाता है उनके लिए यह बेहद लाभकारी होता है।इसके अलावा विटामिन ए भी उम्र से संबंधित धब्बेदार पतन के विकास को रोकता है और आँखों के लिए स्वास्थ्य वर्धक माना जाता है।
वजन घटाने मे कारगर: नियमित रुप से सुबह खाली पेट पपीते और नींबू के रस का सेवन करें।नींबू और पपीते में पेक्टिन फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जो भूख की प्रबल इच्छा से लड़ने में मदद करता है और आप एक लंबे समय के लिए तृप्त महसूस करते है। पेट को भरा भरा महसूस करवाने के साथ यह आंतों के कार्यों को ठीक रखता है जिसके फलस्‍वरूप वजन घटाना आसान हो जाता है। इसके बाद अपना वजन चेक करें उसमें निश्चित ही कमी दिखेगी। इसके सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।

दिल औऱ ब्लडप्रेशर रखें सुरक्षित: नींबू और पपीता फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को कम करता है। बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का निर्माण धमनियों को ब्लॉक कर सकता है और दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है। नींबू का सेवन नसों में निरन्तर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। और दिल दौरे और अटैक को रोकने में सक्षम है।

नींबू में पोटाशियम भी होता है जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है और ब्रेन एवं नर्व सिस्टम को दुरूस्त करता है। पपीता में भी ब्लडप्रेशर ठीक करने प्राकृतिक गुण छिपे हुयें है। इन दोनों के सेवन से कुछ समय के लिए उसका शरीर रिलैक्‍स हो जाता है क्‍योंकि उसके शरीर से तनाव दूर करने वाले हारमोन्‍स की मात्रा बढ़ जाती है। इनमे मौजूद कई पोषक तत्व शरीर को मौसम बदलने के साथ होने वाले संक्रमणों से दूर रखने में मदद रखता हैं।

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

पानी में भीगी किशमिश खाने के चमत्कारिक फायदे, काश पहले पता होता

पानी में भीगी किशमिश खाने के चमत्कारिक फायदे, काश पहले पता होता


ड्रायफ्रूट्स खाने से हमारी शरीर में रोजमर्रा में जो जरूरी विटामिन्स और तत्वों की जरुरत होती है उसे पूरा किया जा सकता है। ड्रायफ्रूट्स में कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें ताजा भी खाया जा सकता है जिनमें से एक है किशमिश। अंगूर को सुखाने के बाद बनाई जाने वाली किशमिश में कई चमत्कारी गुण पाए जाते हैं। इससे होने वाले फायदे अनेक हैं। किशमिश खाने से आपकी बढ़ती उम्र का असर बहुत कम हो जाएगा साथ ही चेहरे पर चमक आएगी। शरीर के सारे फंक्शन ठीक से काम करेंगे और आप बहुत ही फिट महसूस करेंगे। डॉक्टर्स के अनुसार किशमिश में भरपूर मात्रा में विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट्स और शरीर को सुचारू रूप से चलाने वाले महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। किशमिश खाने से हमारे शरीर के टॉक्सिन्स खत्म होते हैं इससे पिंपल्स जैसी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और सुंदर त्वचा के साथ स्वस्थ्य शरीर बनता है। रातभर भिगोकर रखने से इसमें मौजूद शुगर कंटेट कम हो जाता है और न्यूट्रीशन वैल्यू बढ़ जाती है। इसलिए किशमिश को खाने का यह सबसे अच्चा तरीका है। 

पानी में भीगी किशमिश खाने के चमत्कारिक फायदे ।

1. रात में सोते समय एक कफ पानी में 2 चम्मच किशमिश को भिगों कर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर पिएं और किशमिश को अच्छे से चबाकर खाएं। इस तरह से किशमिश में पार्यप्त मात्रा मौजूद फाइबर हमारे शरीर के डाइजेशन को बेहतर करता है।
2. किशमिश में मौजूद बोरोन नामक माइक्रो न्यूट्रिएंट्स हमारी हड्डियों को मजबूत करता है। रेग्युलर भीगी किशमिश खाने से हमारे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया भी खत्म होता है।
3. किशमिश में मैग्नीशियम और पोटैशियम पर्याप्त रूप से पाए जाते हैं ये दोनों न्यूट्रिएंट्स हमारे शरीर का एसिड लेवल कंट्रोल करते हैं। इससे एसिडिटी की प्रॉब्लम दूर होती है। इसके अलावा इसमें मौजूद आयरन एनीमिया के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
4. किशमिश रोजाना खाने से आंखों की रोशनी भी अच्छी रहती है। क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन ए, बीटाकैरोटीन और कैरोटीनॉइड पाए जाते हैं जो कि आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है जिससे हार्ट डिसीज की चांसेस भी कम होते हैं।

5. कमजोर शरीर वाले लोगों के लिए यह एक रामबाण औषधि है। रोजाना किशमिश खाने वालों की शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और हेल्दी तरीके से उनका वजन भी बढ़ता है। इसकी वजह इसमें पाए जाने वाले फ्रक्टोज और ग्लूकोज हैं।

6. रेग्युलर भीगी किशमिश खाने से बॉडी के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। इससे हमारे शरीर में किडनी फंक्शन्स बेहतर होते हैं। साथ ही लिवर प्रॉब्लम का खतरा टलता है।

7. भीगी हुई किशमिश से बॉडी में मौजूद ब्लड प्यूरिफाय होता है इससे शरीर में इम्यूनिटी बढ़ती है और बीमारियों का खतरा टलता है। इसके अलावा पिंपल्स भी कम होते हैं। स्किन पर निखार बढ़ता है और हेल्दी त्वचा मिलती है।

8. किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ती उम्र का असर कम करने में मदद करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल प्रॉपर्टी पाई जाती है। इससे स्किन इन्फेक्शन का खतरा टलता है।

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

गर्म पानी से नहाने वाले सावधान, सिर्फ 1 फायदे के लिए कर बैठते हैं ये नुकसान

गर्म पानी से नहाने वाले सावधान, सिर्फ 1 फायदे के लिए कर बैठते हैं ये नुकसान


जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि आयुर्वेद में बहुत ही स्पष्ट लिखा गया है कि गर्म पानी से कभी स्नान नहीं करना चाहिए. नहाने के लिए हमेशा ठन्डे पानी का इस्तेमाल करें. क्योकि ठन्डे पानी का तापमान सामान्य रहता है जिससे शरीर को किसी प्रकार की कोई हानि नही पहुँचती. मान लीजिये कि आपको तेज़ बुखार है और आप नहाने के लिए असमर्थ है, इस स्थिति में आप गर्म पानी का इस्तेमाल कर सकते है.

गर्म पानी वेसे तो बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर वह केवल पीने के लिए उपयोग किया जाये. लेकिन अगर आपका शरीर एकदम स्वस्थ है तो कभी भी गर्म पानी से न नहाये, वरना आपको कई तरह की बीमारियाँ घेर सकती है. आयुर्वेद में पक्के तौर पर एक सूत्र लिखा गया है कि अगर आप सिर के उपर गरम पानी डालते है तो, आपको 123 प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ जकड सकती हैं. ये रोग मानसिक भी हो सकते है और शारीरिक भी.
बहुत सारे भारतीयों को सर्दियों में गरम पानी से नहाने की अदात है खास कर “महाराष्ट्र” के लोग सर्दी में गर्म पानी के बिना नही नहा सकते. अगर आपको भी गरम पानी से नहाने की लत लग चुकी है तो, घबराईये मत आपको डरने की जरूरत नही है बल्कि एक साधारण से उपाए से आप बीमारियों को दूर रख सकते है. और वो उपाए है कि जब भी आप गर्म पानी से नहाये तो, पानी को बेशक सारे अंगो पर डाल लीजिये परन्तु कभी भी सिर पर मत डालिए. क्योकि सिर और आंख में कफ होने के आसार ज्यादा है, इसलिए इन दोनों अंगों पर गरम पानी मत रहने दें.
आँखों और सिर के लिए ठंडा पानी बेहद लाभदायक सिद्ध हो सकता है. इसलिए कोशिश करें कि आप जब भी मुह धोएं तो ठन्डे पानी से ही धोये. हो सके तो सर्दियो में भी गरम पानी की जगह हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करें. बहुत सारे लोग ऐसा सोचते है कि सर्दी में ठन्डे पानी से नहाने से आपको सर्दी लग जाएगी. जबकि ऐसा कुछ भी नही है. सर्दी का ठन्डे पानी से दूर दूर तक कोई भी लेना-देना नही है. सर्दी उन्ही लोगो को होती है, जिनका पेट साफ़ नही रहता. अगर आपको मसल्स पैन है यानि हड्डियो में या मांसपेशियों में दर्द है तो, आप ठन्डे पानी के बाद गरम पानी डाले. जैसे एक बार शरीर पर ठंडा पानी डालिए, फिर गर्म डालिए, इससे आपके दर्द को काफ़ी राहत मिलेगी.

गर्म पानी से नहाने के नुकसान >>

गर्म पानी से नहाने पर स्किन में रेडनेस, रेशेज और एलर्जी की प्रॉब्लम हो सकती है, स्किन को ड्राई करता है. इससे स्किन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. गर्म पानी का बालों पर बुरा असर पड़ता है. इससे बालों का मोईसचर कम हो जाता है जिससे बाल रफ और ड्राई हो सकते हैं. गर्म पानी के कारण स्किन की ड्राईनेस बढती है. इससे खुजली की प्रॉब्लम हो सकती है.

गर्म पानी से नहाने पर ऑंखें ड्राई हो जाती है. इसके कारण आँखों में रेडनेस, खुजली और बार-बार पानी आने की प्रॉब्लम हो सकती है. गर्म पानी स्कल्प को ड्राई करता है. ऐसे में डेडरफ बढ़ सकती है. गर्म पानी का हाथ और पैर के नेल्स पर बुरा असर पड़ता है. नेल्स टूटने, इन्फेक्शन और आसपास की स्किन फटने की प्रॉब्लम हो सकती है.

गर्म पानी के कारण स्किन के टिश्यूज डैमेज होने लगते है. ऐसे में स्किन पर समय से पहले झुरियां आ सकती है. गर्म पानी के कारण बालों में डेडरफ की प्रॉब्लम बढ़ने लगती है. ड्राई हो चुके बाल टूटते भी ज्यादा है. इससे बाल झड़ने की प्रॉब्लम बढ़ सकती है. गर्म पानी के कारण स्किन का मोईसचर कम हो जाता है. इसे स्किन का ग्लो कम हो सकता है.

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

सुबह-सुबह आंखों पर लगाइए बासी थूक, एक महीने में उतर जायगा चश्मा

सुबह-सुबह आंखों पर लगाइए बासी थूक, एक महीने में उतर जायगा चश्मा


शरीर में पानी की कमी, अनियमित खानपान, दूषित खानपान, तनाव भरा जीवन और प्रदूषण भरे माहौल में ज्यादा वक्त बिताना आंखों के कमजोर होने के सबसे बड़े कारण हैं। इसके अलावा जो लोग हद से ज्यादा फोन, कम्प्यूटर, टीवी और टैबलेट के आगे वक्त बिताते हैं उन्हें आंखों से संबंधित अधिक बीमारियां होने का ज्यादा खतरा रहता है। आजकल लोगों का जिस तरह से लाइफस्टाइल हो गया है, उसमें आंखों का कमजोर होना और चश्मा लगना लाजमी है। इन कारणों से आपकी आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है और आपकी आंखों पर चश्मा चढ़ जाता है।

कई लोगों के तमाम तरह के प्रयासों के बावजूद चश्मा हटने का नाम नहीं लेता है। अगर तमाम प्रयासों के बावजूद आप अपनी आंखों पर लगे चश्मे को नहीं हटा पा रहे हैं तो इसके लिए आपको ना तो किसी चिकित्सक के पास जाने की जरूरत है और ना ही बाजार से महंगी दवाईयां खरीदने की जरूरत है। आज हम आपको आंखों से चश्मा हटाने के लिए एक आसान और जबरदस्त घरेलू नुस्खा बता रहे हैं।
हमारे आसपास आंखों की समस्या से घिरे दो तरह के लोग होते हैं। कुछ लोगों को जन्मजात आंखों से जुड़ी हुई होती है जिससे उन्हें चश्मा चढ़ता है, तो कुछ लोगों को अपने लाइफस्टाइल की वजह से चश्मा चढ़ता है। आजकल के समय में युवा तो दूर छोटे-छोटे स्कूल जाने वाले बच्चों को भी चश्मा चढ़ा हुआ है। अगर आप चश्में से छुटकारा पाना चाहते है तो हम आपको बताते हैं आंखों की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने का घरेलू उपाय जिनसे आप आसानी से चश्मे से छुटकारा पा सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि बासी थूक हमें स्वास्थ्य से जुड़े कितने लाभ देता है। खासकर बासी थूक हमारी आंखों के लिए बहुत लाभदायक है।
बासी थूक
बासी थूक यानि कि सुबह की लार हमारे लिए एक औषधी की तरह काम करती है। सुबह उठते ही जो हमारे मुंह में पहला थूक होता है (बिना कुल्ला किए हुए) उसे अपनी आंखों पर लगाने से आंखों का चश्मा तो हटता ही है साथ ही आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं जैसे आंखों का लाल होना, जलन होना आदि रोग भी दूर होते हैं। आयुर्वेद में भी बासी थूक से चश्मा हटाने की बात कही गई है। इसलिए जिन लोगों आंखों से जुड़ी कोई परेशानी है वह सुबह उठकर अपनी आंखों में बासी थूक लगा सकते हैं।
ये भी पढ़िए : आँखों से चश्मा हटा देंगे यह घरेलु नुस्खे

बुधवार, 29 नवंबर 2017

केवल चार दिन पपीते के बीज खाइए, बीमारियों को दूर भगाइए

केवल चार दिन पपीते के बीज खाइए, बीमारियों को दूर भगाइए


पपीता तो एक शानदार फल है ही और इसके गुणों से आप सब बहुत अच्छी तरह से परिचित भी हो । इस लेख में हम आपको बता रहे हैं भोपाल की रहने वाली श्रीमति ज्योति श्रीवास्तव का एक खास अनुभव जो उन्होने पपीते के बीज खाने के बाद महसूस हुआ । उन्होने पपीते के बीजों से मिलने वाले कुछ लाभों का वर्णन हमारे पास इस आग्रह से भेजा कि हम इसको आप सबके पास तक पहुँचायें । चलिये जानते हैं उनके अनुभव के बारे में ।

पपीते के बीज सेवन करने का तरीका :-

पके पपीते का फल काटकर उसमें मौजूद बीजों को थोड़ी देर के लिये पानी में डाल दें ऐसा करने से उसमें लगी झिल्ली फूल जायेगी । फिर इस झिल्ली को हाथों से मसलकर छुटा दें । फिर इन बीजों को तेज धूप में कड़क होने तक पूरी तरह सए सुखा लें । सूखने पर ये बीज काली मिर्च जैसे नजर आयेंगे । अब इन बीजों को मिक्सी में चलाकर बारीक पाउडर तैयार कर लें । यह पाउडर ही आपको सेवन करना है । रोज सुबह और शाम के समय 3-5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण गुनगुने पानी के साथ सेवन करना है । आगे हम बात करते हैं कि पपीते के बीज के इस चूर्ण के सेवन से क्या क्या लाभ प्राप्त होते हैं ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है डाइबिटीज में :-
पपीते के बीजों का लाभ मधुमेह के रोगियों के लिये इन्सुलिन सरीखा होता है । पपीते के बीजों के द्वारा शुगर के लेवल को नियन्त्रित किया जा सकता है । कुछ रिसर्च के अनुसार यदि रोज पपीते के बीजों का सेवन किया जाये तो इससे मधुमेह के रोग की सम्भावनाओं को काफी कम किया जा सकता है ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है फोड़े फुन्सी और एलर्जी में :-
त्वचा पर होने वाले अधिकतर रोगों में पपीते के बीजों का चूर्ण समाधान के लिये बहुत ही लाभकारी होता है। यदि इस पाउडर को पपीते के गूदे के साथ मिलाकर त्वचा पर लेप किया जाये और सेवन भी किया जाये तो यह त्वचा विकारों को दूर करने में बहुत लाभकारी होता है । इसके इस तरह से प्रयोग करने से स्किन के रोग जल्दी ठीक होते हैं और पपीते के गूदे के साथ मिलाकर लगाने से फोड़े-फुन्सी के दाग भी नही रहते हैं । इस तरह से यह फोड़े फुन्सी और दाग मिटाने में बहुत लाभकारी सिद्ध होता है ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है आँखों की रोशनी के लिये :-
पपीते में विटामिन ए, प्रोटीन, प्रोटियोलिटिक एंजाइम पाये जाते हैं और इसके यही गुण इसके बीजों में भी मौजूद रहते हैं । चिकित्सक आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिये पपीते के सेवन की सलाह देते हैं । यदि पपीते के बीज का चूर्ण रोज सुबह और शाम के समय गाय के दूध के साथ सेवन किया जाये तो यह आँखों की माँसपेशियों को मजबूती देकर रोशनी बढ़ाने का काम करता है । यही कारण है कि आँखों के कमजोर हो जाने की समस्या हो जाने पर पपीते के बीजों को उपयोगी माना जाता है ।

पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है गुर्दे की पथरी में :-
गुर्दे में पथरी हो जाये तो पपीते के बीजों का चूर्ण रोज सुबह और शाम के समय गुनगुने पानी में चौथाई ग्राम खाने का सोडा मिलाकर उसके साथ सेवन करना चाहिये । पपीते का बीज पथरी को फोड़ने का काम करता है और पानी में मिला हुआ खाने वाला सोडा पेशाब आने की मात्रा को बढ़ाता है जिससे पथरी टूटकर जल्दी ही पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है । यदि आपके साथ भी मूत्र मार्ग की पथरी की समस्या हो तो एक बार 4-5 दिन के लिये इस प्रयोग को जरूर आजमायें । इसके साथ ही पथरी के रोग में उचित परहेज का भी पालन करें ।

पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है कैंसर से बचाव में :-
कुछ रिसर्च इस तरफ इशारा करती हैं कि पपीते के बीज का पाउडर सेवन करने से कैन्सर के रोगियों को प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है । कैन्सर के रोग में पपीते के बीजों को साबुत ही निगला जा सकता है अथवा चबाकर खाया जा सकता है और पाउडर बनाकर भी सेवन किया जा सकता है ।

पपीते के बीज के पाउडर से मिलने वाले स्वास्थय लाभों की जानकारी वाला यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँचती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख के समबन्ध में आपके कुछ सुझाव हों तो कृपया कमेण्ट के माध्यम से हमको जरूर सूचित करें ।

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

कॉफी से ऐसे दूर करें आंखों की सूजन और डार्क सर्कल

कॉफी से ऐसे दूर करें आंखों की सूजन और डार्क सर्कल


देर रात का टीवी देखने या जागकर काम करने की वजह से आप पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। जाहिर है नींद पूरी नहीं होने से अगली सुबह आपकी आंखें पफी यानी सूजी हुई नजर आ सकती हैं। इससे आपका चेहरा भी सूजा हुआ लग सकता है और आप किसी बीमार व्यक्ति से कम नहीं लगते हैं। इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो जाते हैं और आप काफी थके हुए भी नजर आते हैं। कुल मिलाकर आपका फेस बहुत ज्यादा डल दिखता है। बेशक आप आई शैडो या काजल से आंखो की सूजन को कम कर सकते हैं लेकिन आंखों को तुरंत आराम देने के लिए आप कॉफी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

कॉफी ही क्यों
अगर इसका सही तरह इस्तेमाल किया जाए, तो इससे आपको सिर पर जहां बाल नहीं है वहां बाल विकसित करने और वजन कम करने में भी मदद मिल सकती है। लेकिन कॉफी का कॉस्मेटिक उपयोग यहां खत्म नहीं होता है। यह पता चला है कि आप इससे अपनी सूजी हुई आंखों से राहत पा सकते हैं।
इन दिनों आंखों की थकान दूर करने के लिए टी बैग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कुछ सालों से ब्यूटी एक्सपर्ट डार्क सर्कल और चेहरे की सूजन से राहत के लिए कैफीनयुक्त पेय जैसे चाय और कॉफी भी उपयोग कर रहे हैं। आपको बता दें कि इस उपाय में आपको इन्हें पीना नहीं बल्कि थोड़ी देर के लिए आंखों के नीचे लगाना है। वास्तव में कैफीन एक वेसोडाइलेटर है जो ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है। इसीलिए ब्यूटी प्रोडक्ट्स में कॉफी का इस्तेमाल किया जाता है।
कॉफी का ऐसे करें इस्तेमाल
एक चम्मच कॉफी पाउडर और दो चम्मच गर्म पानी को मिक्स कर लें और पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को आराम से आंखों के नीचे लगाएं और 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसे रगड़ने से बचें, ऐसा करने से आपको नुकसान हो सकता है। वैकल्पिक रूप से आप नारियल के तेल और कॉफी का मिश्रण भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस बात का रखें ध्यान
थोड़ी देर बाद ही आपको आराम मिल जाएगा और पहले की तरफ फ्रेश महसूस करेंगे। ध्यान रहे कि इस उपाय से आपको अच्छी नींद आने में मदद नहीं मिलती है और इसका इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम एक या दो बार किया जाना चाहिए।
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रविवार, 19 नवंबर 2017

मोतियाबिंद को जड़ से खत्म करेंगे ये घरेलू नुस्खे

मोतियाबिंद को जड़ से खत्म करेंगे ये घरेलू नुस्खे



आंखें शरीर का सबसे मुख्य अंग है। आंखों से ही यह खूबसूरत दुनिया देखने को मिलती है। ऐसे में इनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है लेकिन कई बार आंखों की कुछ ऐसी समस्याएं हो जाती हैं जिससे काफी परेशानी होती है। ऐसी ही एक बीमारी है मोतियाबिंद, जो बढ़ती उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। इसमें आंखों के लैंस पर एक सफेद पर्दा आ जाता है जिससे सब कुछ धुंधला दिखाई देता है। वैसे तो मोतियाबिंद को ऑपरेशन करके ही ठीक किया जाता है लेकिन कुछ घरेलू उपाय अपनाकर भी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानिए ऐसे ही कुछ आसान नुस्खों के बारे में

1. सौंफ
आंखों की रोशनी बढ़ाने में सौंफ बहुत फायदेमंद होती है। ऐसे में मोतियाबिंद होने पर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए सौंफ को पीसकर इसका पाउडर बना लें और रोजाना सुबह-शाम एक बड़ा चम्मच इस पाउडर का पानी के साथ सेवन करें।
2. विटामिन ए
मोतियाबिंद की समस्या को दूर करने के लिए आहार में विटामिन ए अधिक मात्रा में लें। ऐसे में रोजाना दिन में 2 बार गाजर का जूस पीएं या फिर कच्ची गाजर भी खा सकते हैं। इसमें काफी मात्रा में विटामिन ए होता है जो मोतियाबिंद को हटाकर आंखों की रोशनी भी तेज करता है।
3. धनिए के बीज
इसके लिए 10 ग्राम धनिए के बीजों को 300 मिली. पानी में उबालें और फिर ठंडा होने दें। अब पानी को छानकर इससे आंखों को अच्छी तरह धोएं। मोतियाबिंद के शुरूआत में ही रोजाना इस उपाय को करने से फायदा होता है।
4. आंवला
आंखों से सफेद पर्दा हटाने के लिए ताजा आंवले के 10 मिली. रस में समान मात्रा में शहद मिलाएं और इसका रोज सुबह सेवन करें। इसके अलावा आंवले का मुरब्बा खाने से भी इस बीमारी को रोका जा सकता है।
5. कद्दू के फूल
कद्दू की सब्जी तो सबने खाई लेकिन मोतियाबिंद होने पर कद्दू के फूल काफी फायदेमंद साबित होते हैं। इसके लिए इन फूलों का रस निकाल कर दिन में 2 बार आंखों में आई ड्रॉप्स की तरह डालें। 

6. शहद
मोतियाबिंद को हटाने के लिए जिस आंख में पर्दा हो, उसमें शहद लगाएं। हो सके तो आंख के लैंस पर शहद लगाएं, इससे काफी लाभ होगा।

सोमवार, 6 नवंबर 2017

हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में छुपा है आपकी सेहत का राज़, खुद जानिए कैसे !

हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में छुपा है आपकी सेहत का राज़, खुद जानिए कैसे !


सर्दियों के मौसम में हरे पत्तेदार सब्ज़ियां भी बाजार में खूब देखी जाती है। ठंडे मौसम में पत्तेदार सब्जियों और मौसमी फलों की आवक बढ़ जाती है। ऐसे में हरे पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से परहेज नहीं करना चाहिए। सेहत के हिसाब से हरी सब्जियां सेहत के लिए बहुत लाभदायक है। साथ ही ये आपकी  खूबसूरती में भी इज़ाफ़ा करती है। पालक, बथवा, methi पत्तेदार प्याज़ चोलाई ये सभी सब्ज़ियां शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है। और रक्तचाप को भी नियंत्रित रखती है।

जानिए क्या क्या गुण है इन हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में-

पालक - हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक प्रमुख है। यह आपके शरीर में लौह तत्व की कमी को पूरा करती है। खास तौर से महिलाओं के लिए पालक बहुत फायदेमंद है। महिलाओं में लौह तत्व की कमी अधि‍क होती है और उन्हें इसकी आवश्यकता होती है। इसके अलावा यह आपके शरीर में वि‍टामिन ए, कैल्श‍ियम और अन्य पोषक तत्वों की आपूर्ति भी करेगी।
मेथी - फॉलिक एसिड, मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शि‍यम और आयरन से भरपूर मेथी आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। यह आपकी शारीरिक तकलीफों को दूर कर मोटापे को कम करने में भी मदद करती है।
मूली - मूली का प्रयोग आप सलाद के लिए करते हैं, लेकिन इसके पत्ते भी बहुत पौष्ट‍िक होते हैं। इसकी पत्त‍ियों की सब्जी बनाकर खाई जाती है, जो ठंड में सर्दी से बचाने में मदद करती है। इसके अलावा इससे इससे शारीरिक दर्द और अन्य तकलीफों से निजात मिलती है।  
हरे प्याज - प्याज  के हरे पत्तों की आवक भी ठंड में खूब होती है। यह अन्य पोषक तत्वों के साथ ही रोग प्रतिरोधी गुणों से भरपूर होता है और प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। यह आंखों और त्वचा के अलावा पाचनतंत्र के लिए भी फायदेमंद है।

करेला - स्वाद में भले ही करेला कड़वा हो लेकिन इसके फायदे बहुत है। यह न केवल आपके खून को साफ करता है, बल्कि पेट से जुड़ी परेशानियों को खत्म कर पाचन में मदद करता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपको बीमारियों से बचाता है।

बुधवार, 1 नवंबर 2017

सीताफल जहॉ भी दिख जाये खाना जरूर कारण हम आपको बता रहे हैं

सीताफल जहॉ भी दिख जाये खाना जरूर कारण हम आपको बता रहे हैं


सीताफल एक ऐसा फल है जो सर्दी के मौसम में बाजारों में मिलता है । सीताफल को इंग्लिश में कस्टर्ड एप्पल कहते है और शरीफा नाम से भी ये फल जाना जाता है । सीताफल ये अनगिनत औषधियों में शामिल है ये फल पकी हुई अवस्था में बहार से सख्त और अंदर से नरम और बहुत ही मीठा होता है । इसका अंदर का क्रीम सफ़ेद रंग का और मलाईदार होता है । इसके बीज काले रंग के होते है । मार्किट में आजकल सीताफल की बासुंदी शेक और आइसक्रीम भी मिलते है । यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है । इसमें विटामिन होता है इसके अलावा इसमें नियासिन विटामिन ए राइबोफ्लेविन थियामिन ये तत्व होते है इसके इस्तेमाल से हमें आयरन कैल्शियम मॅग्नीज़ मैग्नेशियम पोटैशियम और फोस्फरस मिलते है । खास बात यह है कि सीता फल में आयरन अधिक मात्रा में होता है । इसके अन्दर मौजूद पोटैशियम और मैग्नेशियम ह्रदय के लिए बहोत ही अच्छा होता है मैग्नेशियम शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता इसके फाइबर की प्रचुर मात्रा से ब्लड प्रेशर अच्छा रहता है । इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है । इसमें विटामिन और आयरन खून की कमी को दूर करके हीमोग्लोबिन बढ़ता है ।

1. अगर आपको कब्ज की समस्या हो तो सीता फल से ये दूर हो सकती है । सीता फल में पर्याप्त मात्रा में कॉपर तथा फायबर होते होते हैं जो मल को नरम करके कब्ज की समस्या को मिटा सकते है । इसके उपयोग से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है ।
2. गर्भवती महिला के लिए सीता फल खाना लाभदायक होता है इससे कमजोरी दूर होती है, उल्टी व जी घबराना ठीक होता है । सुबह की थकान में आराम मिलता है, शिशु के जन्म के बाद सीताफल खाने से ब्रेस्ट दूध में वृद्धि होती है ।
3. यदि आप कमजोर हो या आपको वजन बढ़ाना हो तो सीताफल का भरपूर उपयोग करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शक्कर अच्छी मात्रा में होती है। जो बिना किसी नुकसान के वजन बढ़ाकर व्यक्तित्व आकर्षक दे सकती है । इसके नियमित सेवन से पिचके हुए गाल और कूल्हे पुष्ट होकर सही आकार में आ जाते हैं और व्यक्तित्व में निखार आता है ।
4. सीता फल के पेड़ की छाल में पाए जाने वाले टैनिन के कारण इससे दांतों और मसूड़ों को लाभ मिलता है । सीता फल दांत और मसूड़ों के लिए फायदेमंद होता है । इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम दांत मजबूत बनाता है।। इसकी छाल को बारीक पीस कर मंजन करने से मसूड़ों और दांत के दर्द में लाभ होता है । यह मुंह की बदबू भी मिटाता है ।
5. सीता फल में पाए जाने वाले विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, तथा राइबोफ्लेविन के कारण यह आँखों के लिए फायदेमंद होता है। यह नेत्र शक्ति को बढ़ाता है तथा आँखों के रोगों से भी बचाव करता है । जिन लोगों का काम ज्यादा लैपटोप प्रयोग वाला होता है उनके लिये इस फल का नियमित सेवन करना बहुत ही अच्छा लाभकारी रहता है ।

6. यह मानसिक शांति देता है तथा डिप्रेशन तनाव आदि को दूर करता है । कच्चे सीताफल के क्रीम खाने से दस्त व पेचिश में आराम आता है। कच्चे क्रीम को सूखा कर भी रख सकते है। जरुरत पड़ने पर इसे भिगो कर खाने पर यह दस्त मिटाने में उपयोगी होता है ।

शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

शंख सिर्फ हिन्दू धर्म का पवित्र धार्मिक प्रतीक ही नहीं है बल्कि सेहत का खज़ाना भी है

शंख सिर्फ हिन्दू धर्म का पवित्र धार्मिक प्रतीक ही नहीं है बल्कि सेहत का खज़ाना भी है


शंख बजाने के अलावा इसमें रखा पानी कई बीमारियों में फ़ायदा करता है शंख में कैल्शियम और फास्फोरस के अलावा कई मिनरल्स होते हैं जो हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं शंख से जुड़े ऐसे हेल्थ बेनिफिट्स जिनके बारे में शायद आप भी नहीं जानते होंगे.

1. शंख बजाने से फेंफडे फैलते हैं अस्थमा और सांस से जुड़ी समस्याओं में फायदा होता है.
2. रेक्टल मसल्स सिकुड़ती और फैलती है इससे उनकी एक्सरसाइज होती है गैस्ट्रिक और पेट की कई प्रॉब्लम दूर होती है.
3. प्रोटेस्ट मसल्स की एक्सरसाइज होती है पर उनमे सूजन नहीं आती.
4. यूरिनरी ब्लैडर की एक्सरसाइज होती है और इनसे रिलेटेड बिमारियों से बचाव होता है.

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5. शंख बजाने से चेस्ट की मसल्स की टोनिंग होती है.
6. गले की मसल्स की एक्सरसाइज होती है. वोकल कार्ड और थाइरायड से जुडी प्रॉब्लम्स में फायदा होता है.
7. ब्रेन और पूरी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है. हेयर फॉल की प्रॉब्लम भी दूर होती है.
8. फेस की मसल्स की एक्सरसाइज होती है. झुर्रियों से बचाव होता है.
9. रातभर शंख में रखे पानी से सुबह स्किन की रेगुलर मसाज करे. स्किन डिजीज में फायदा होता है. इस रखे पानी में गुलाब जल मिलाकर बाल धोने से बाल काले, मुलायम और घने होते है. इसके अलावा इसको तीन चम्म्च सुबह खाली पेट पीने से कब्ज जैसी तकलीफों में फायदा होता है. और इसमें उतना ही सादा पानी मिलाकर आँखों को धोने से आँखें हेल्दी रहती है.
10. नहाने के बाद शंख को स्किन पर हल्के-हल्के रगड़ने से स्किन ग्लो करती है.

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

आंखों में नज़र आए ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकती है गंभीर बीमारी

आंखों में नज़र आए ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकती है गंभीर बीमारी


आंखें इंसानी शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा होती हैं. अगर व्यक्ति आंखों की सही तरीके से देखभाल ना करे तो उसे कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. आंखों की केयर ना करने पर अनेकों हेल्थ प्रोब्लम्स हो सकते हैं. लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी भी हो सकती हैं जो किसी हेल्थ कंडीशन या बीमारी को दर्शाती हैं. अगर व्यक्ति समय रहते इन संकेतों को पहचान ले तो वह आंखों की गंभीर बीमारियों से बच सकता है.

अधिकतर लोग आंखों में हो रही समस्या को गंभीरता से नहीं लेते. आंखों के साथ बरती गयी ज़रा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. आंखों में आये कुछ ख़ास बदलाव किसी बीमारी या हेल्थ संबंधित प्रॉब्लम की तरफ़ इशारा करते हैं. ज़रा सा भी बदलाव लगने पर डॉ. के पास ज़रूर जाना चाहिए.

इन बदलावों को नहीं करना चाहिए इग्नोर

आंख से धुंधला दिखाई देना
अगर आपकी आंखों से धुंधला दिखाई देता है या आपकी आंखों का रंग बदल जाता है और साथ ही सिरदर्द और थकान महसूस होने लगती है, तो सावधान होने की ज़रुरत है. यह लक्षण ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी के भी हो सकते है. तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और जांच करवाएं.
पुतली का रंग सफ़ेद होना
अगर व्यक्ति को अपनी आंखों की पुतली सफ़ेद नज़र आ रही है तो यह मोतियाबिंद का लक्षण हो सकता है. मोतियाबिंद में आंखों की पुतलियां सफ़ेद हो जाती हैं. अंग्रेज़ी में इसे कैटरेक्ट के नाम से भी जाना जाता है. इस बीमारी के होने पर आंखों का लेंस ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

आंखों का पीला होना
आंखों का पीला होना पीलिया रोग की तरफ़ इशारा करता है. पीलिया होने से व्यक्ति को लीवर ख़राब होने, कमज़ोरी और अपच जैसी परेशानियों का ख़तरा बना रहता है.
आंखों की पलकों पर धब्बे
अगर आपकी आंखों की पलकों पर धब्बे पड़ने लगे हैं तो यह शरीर में कॉलेस्ट्रोल लेवल बढ़ने के संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा आंखों की पलकों पर धब्बा होना दिल से जुड़ी बीमारियों को भी दर्शाता है.

पूरी आंख सफ़ेद होना
अगर आपकी पूरी आंख सफ़ेद नज़र आ रही है तो यह एनीमिया या खून की कमी को बताती है. इसमें आप थकान, कमज़ोरी, सांस लेने में तकलीफ़ और चेस्ट में दर्द जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं.
आंखों का लाल होना
अगर आपकी आखें लाल दिखाई देती हैं तो आप कंजक्टीवाटिस नामक बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं. इस बीमारी में आंख लगना, इन्फेक्शन और एलर्जी होना बहुत आम बात है.

आंखों में सूजन लगना
यदि आपको अपनी आंखों में सूजन लगती है या उभरापन जैसा महसूस होता है तो यह थाइरॉयड होने का संकेत हो सकता है. इससे आंखों में इरीटेशन भी होने लगती है.
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