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सोमवार, 16 अप्रैल 2018

पेट की समस्या की समस्या से है परेशान तो रोज सुबह इस बर्तन में रखा पानी पिएं, कभी नहीं होगी

पेट की समस्या की समस्या से है परेशान तो रोज सुबह इस बर्तन में रखा पानी पिएं, कभी नहीं होगी


तांबे में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं. इससे पेट संबंधी सभी विकार दूर हो जाते हैं. इसका आयुर्वेद में काफी विस्तार से वर्णन है. जानिए तांबे के बर्तन के 10 फायदे.

1. तांबा यानी कॉपर, सीधे तौर पर आपके शरीर में कॉपर की कमी को पूरा करता है और बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से सुरक्षा देता है.

2. तांबे के बर्तन में रखा पानी पूरी तरह से शुद्ध माना जाता है. यह सभी डायरिया, पीलिया, डिसेंट्री और अन्य प्रकार की बीमारियों को पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर देता हैं.

3. तांबे में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर में दर्द, ऐंठन और सूजन की समस्या नहीं होने देते. ऑर्थराइटिस की समस्या से निपटने में भी तांबे का पानी फायदेमंद होता है.

4. अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार तांबे कैंसर की शुरुआत को रोकने में मदद करता है और इसमें कैंसर विरोधी तत्व मौजूद होते है.

5. पेट की सभी समस्याओं के लिए तांबे का पानी बेहद फायदेमंद होता है. शाम को तांबे बर्तन में रखा पानी सुबह शौच जाने से पहले खाली पेट पीने से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियों से निजात मिलती है.

6. शरीर की आंतरिक सफाई के लिए तांबे का पानी कारगर होता है. इसके अलावा यह लिवर और किडनी को स्वस्थ रखता है और किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से निपटने में तांबे के बर्तन में रखा पानी लाभप्रद होता है.

7. एनीमिया की समस्या में भी इस बर्तन में रखा पानी पीने से लाभ मिलता है. यह खाने से आयरन को आसानी से सोख लेता है जो एनीमिया से निपटने के लिए बेहद जरूरी है.

8. तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से त्वचा पर किसी प्रकार की समस्याएं नहीं होती. यह फोड़े, फुंसी, मुंहासे और त्वचा संबंधी अन्य रोगों को पनपने नहीं देता जिससे आपकी त्वचा साफ और चमकदार दिखाई देती है.

9. तांबे का पानी पाचनतंत्र को मजबूत कर बेहतर पाचन में सहायता करता है. रात के वक्त तांबे के बर्तन में पानी रखकर सुबह पीने से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है. इसके अलावा यह अतिरिक्त वसा को कम करने में भी बेहद मदददगार साबित होता है.

10. यह दिल को स्वस्थ बनाए रखकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. इसके अलावा यह हार्ट अटैक के खतरे को भी कम करता है. यह वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करने में मदद करता है.

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये अचूक फ़ायदे

रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये अचूक फ़ायदे


देशी गाय के घी में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो और किसी चीज़ में नहीं मिलते। यहाँ तक की इसमें ऐसे माइक्रोन्यूट्रींस होते हैं जिनमें कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही, देशी गाय का घी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास एवं रोग-निवारण के साथ पर्यावरण-शुद्धि का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। प्रतिदिन रात को सोते वक़्त नाक में 2–2 बूँद गाय के देशी घी डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है। देशी घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले। और पाच मिनट लेते रहे इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है। आज आपको रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के अचूक फ़ायदो के बारे में बताएँगे: –

हार्ट अटैक
हार्ट अटैक जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, ह्रदय मज़बूत होता है।

सोरायसिस और त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक
सोरायसिस गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सोरायसिस के लिए भी कारगर है।

बाल झडना
बाल झडना गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।

आँखों की ज्योति बढ़ती है
आँखों की ज्योति एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।

कोमा से जगाए
कोमा गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है।

हथेली और पांव के तलवो में जलन
हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।

कफ की शिकायत
कफ की शिकायत गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।

कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता
कैंसर गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है।

नस्य (Desi Ghee) ना लेने का समय
नस्य ना लेने का हर समय सही नहीं होता. कृपया ध्यान रखें कि नीचे बताई गयी अवस्थाओं में इसका इस्तेमाल न करें:
  • बीमार पड़ने पर.
  • आघात होने पर.
  • बहुत थका हुआ होने पर.
  • वर्षा ऋतू में जब सूर्य ना हो.
  • गर्भवती या प्रसव के बाद.
  • बाल धोने के बाद.
  • भूक या प्यास लगने पर.
  • अजीर्ण होने पर.
  • अनुवासन बस्ती या विरेचन के बाद.

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है


आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

सोना            
सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

चाँदी
चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

कांसा
काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

तांबा
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

पीतल
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

लोहा
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

स्टील
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

एलुमिनियम
एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

मिट्टी
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

टूटी हुई हड्डियों को जल्दी जोड़ने वाली रामबाण औषिधि हड़जोड़

टूटी हुई हड्डियों को जल्दी जोड़ने वाली रामबाण औषिधि हड़जोड़


वानस्पतिक नाम : Cissus quadrangularis यह लता हड्डियों को जोड़ती है। इसको अस्थि श्रृंखला के नाम से जाना जाता है। यह छह इंच के खंडाकार चतुष्कोणीय तनेवाली लता होती है। हर खंड से एक अलग पौधा पनप सकता है। चतुष्कोणीय तने में हृदय के आकार वाली पत्तियां होती है। छोटे फूल लगते हैं। पत्तियां छोटी-छोटी होती है और लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं। यह बरसात में फूलती है और जाड़े में फल आते हैं।

दक्षिण भारत और श्रीलंका में इसके तने को साग के रूप में प्रयोग करते हैं।

-हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम कार्बोनेट भरपूर पाया जाता है। हड़जोड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और फास्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। आयुर्वेद में टूटी हड्डी जोड़ने में इसे रामबाण माना गया है।

-इसके तने को तेल में भुनकर हड्डी पर बांधने से जल्दी ठीक होती है |

-इसके अलावा कफ, वातनाशक होने के कारण बवासीर, वातरक्त, कृमिरोग, नाक से खून और कान बहने पर इसके स्वरस का प्रयोग होता है।

-मुख्य रूप से इसके तने का ही प्रयोग किया जाता है। 10 से 20 मिलीलीटर स्वरस की मात्रा निर्धारित है।

-२ ग्राम हडजोड. का चूर्ण दिन में ३ बार लेने से और उसके रस को हड्डी पर लेप करने से हड्डियां जल्दी जुड़ जाती है |

-इस चूर्ण में बराबर मात्र में सौंठ चूर्ण मिलाकर रखे , ३-४ ग्राम के मात्रा में पानी से लेने पर पाचन शक्ति बढती है |

-रक्त प्रदर और मसिकस्राव अधिक होने पर इसके १० से २० मिली. रस में गोपीचंदन २ ग्राम ,घी एक चमच और शहद ४ चम्मच के साथ लेने से ठीक हो जाता है |

रविवार, 15 जनवरी 2017

हर रोग से छुटकारा दिलाएगी तुलसी और हल्दी की चाय

हर रोग से छुटकारा दिलाएगी तुलसी और हल्दी की चाय


आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग ऐसे हैं जो ना तो ठीक से खाते हैं और ना ही ठीक से सो पाते हैं। इसमें से ज्यादातर नौकरी शुदा लोग हैं जिसमें से युवाओं की संख्या ज्यादा है। अच्छी दिनचर्या ना होने से शरीर को कई रोग लग जाते हैं, जिसकी वजह से हमें रोज डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। तो अगर आप भी इनमें से एक हैं तो आज हम आपको एक नेचुरल ड्रिंक के बारे में बताएंगे, जिसे रोजाना नियमित पीने से आप का शरीर रोगों से मुक्त हो जाएगा। 

यह पेय है तुलसी और हल्दी का, जिसमें आधी मुठ्ठी तुलसी को एक कप पानी में उबाल कर उसमें आधा चम्मच हल्दी पावडर या ताजी हल्दी की गांठ को काट कर मिला दें। फिर इसे गरम करें और पेय को छान कर पी जाएं। आइये जानते हैं इस पेय को पीने से क्या क्या लाभ मिलते हैं।

कफ से दिलाए छुटकारा 
तुलसी और हल्दी का मिश्रण कफ को दूर करने के लिये काफी फायदेमंद हो सकता है क्योंकि यह गले की सूजन को दूर करता है और कफ को भगाता है।  अस्थमा के लिये यह पेय को चौड़ा करता है जिससे सांस लेने में आसानी होती है और अस्थमा से आराम मिल जाता है।

किडनियों को साफ करे 
यह घरेलू पेय आपकी किडनियों से गंदगी को साफ करने में मदद करती है और आपके शरीर को शुद्ध और स्वस्थ बनाती है।

तनाव दूर करे
इसे पीने से दिमाग की नसें शांत होती हैं और दिमाग तक ब्लड का फ्लो बढता है जिससे तनाव दूर होता है।

कब्ज से छुटकारा 
इसे नियमित पीने से पेट की सभी तकलीफें जैसे कब्ज आदि दूर होता है। 

एसिडिटी भी दूर करे 
यह पेट में जा कर एसिड के लेवल को बैलेंस करता है जिससे एसिडिटी दूर होती है।

अल्सर ठीक होता है 
यह एक नेचुरल ड्रिंक है, जो शरीर की हर समस्या को ठीक करता है, जैसे पेट या मुंह का अल्सर आदि।

पाचन क्रिया सुधारे 
यह खाना पचाने वाले जूस को सक्रिय करता है, जिससे पाचन क्रिया दुरुस्त होती है और खाना बड़े आराम से हजम होता है।

सिरदर्द दूर करे 
इस ड्रिंक को रोजाना सुबह पीने से आपको साइनस और तनाव की वजह से पैदा हुए सिरदर्द से छुटकारा मिल सकता है।

एलर्जी से छुटकारा मिलता है 
यह ड्रिंक आपके शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है और कुछ प्रकार की एलर्जी से छुटकारा भी दिलाता है। 

कैंसर से बचाए - 
प्रोस्टेट कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर इसको पीने से नहीं होते क्योंकि इस पेय में पावर फुल पाए जाते हैं। 

कोलेस्ट्रॉल घटाए - 
यह शरीर में जमा हुए फैट टिशू को घोल देता है जिससे कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

क्या आप को करेला खाने का सही तरीका आता है ?

क्या आप को करेला खाने का सही तरीका आता है ?

करेला कैसे खाये

हमारे शरीर में छ: रस चाहिए - मीठा, खट्टा, खारा, तीखा, कषाय और कड़वा | पांच रस, खट्टा/खारा/तीखा, तो बहुत खाते हैं लेकिन कड़वा नहीं खाते हैं | कड़वा कुदरत ने करेला बनाया है लेकिन करेले को निचोड़ के उस की कड़वाहट निकाल देते हैं | करेले का छिलका नहीं उतारना चाहिए और उसका कड़वा रस नहीं निकालना चाहिए | हफ्ते में, पन्दरह दिन में एक दिन करेला खाना तबियत के लिए अच्छा है |

करेला के फायदे

करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो, लेकिन सेहत के लिहाज से यह बहुत फायदेमंद होता है। करेले में अन्य सब्जी या फल की तुलना में ज्यादा औषधीय गुण पाये जाते हैं। करेला खुश्क तासीर वाली सब्जी‍ है। यह खाने के बाद आसानी से पच जाता है। करेले में फास्फोरस पाया जाता है जिससे कफ की शिकायत दूर होती है। करेले में प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस और विटामिन पाया जाता है। आइए हम आपको कडवे करेले के गुणों के बारे में बताते हैं।

करेला खाने के लाभ :-

1)कफ की शिकायत होने पर करेले का सेवन करना चाहिए। करेले में फास्फोरस होता है जिसके कारण कफ की शिकायत दूर होती है।

2)करेला हमारी पाचन शक्ति को बढाता है जिसके कारण भूख बढती है।

3)करेले ठंडा होता है, इसलिए यह गर्मी से पैदा हुई बीमारियों के उपचार के लिए फायदेमंद है।

4)दमा होने पर बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खाने से फायदा होता है।

5)लकवे के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए लकवे के मरीज को कच्चा करेला खाना चाहिए।

6)उल्टी-दस्त या हैजा होने पर करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है।

7)लीवर से संबंधित बीमारियों के लिए तो करेला रामबाण औषधि है। 

8)जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर ठीक होने तक रोजाना तीन-चार बार सेवन करने से फायदा होता है।

9)पीलिया के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद है। पीलिया के मरीजों को पानी में करेला पीसकर खाना चाहिए।

10)डायबिटीज के लिए करेला रामबाण इलाज है। करेला खाने से शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।

11)करेला खून साफ करता है। करेला खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।

12)बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मखच शक्कर मिलाकर एक महीने तक प्रयोग करने से बवासीर की शिकायत समाप्त हो जाती है।

13)गठिया रोग होने पर या हाथ-पैर में जलन होने पर करेले के रस से मालिश करना चाहिए। इससे गठिया के रोगी को फायदा होगा।

14)दमा होने पर बिना मसाले की करेले की सब्जी खाना चाहिए। इससे दमा रोग में फायदा होगा।

15)उल्टी, दस्त और हैजा होने पर करेले के रस में थोडा पानी और काला नमक डालकर पीने से फायदा होता है।

16)करेले के रस को नींबू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम किया जा सकता है।

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

हरे धनिए का सेवन करने से होने वाले फायदों के बारे में जाने

हरे धनिए का सेवन करने से होने वाले फायदों के बारे में जाने


हरा धनिया घर में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसी के साथ यह हमारे सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। हम जानते हैं कि इस बात को सुनकर आप हैरान हो रहे होंगे, लेकिन जनाब यह बात सौ आने सच है। आप धनिए का सेवन कर अपनी सेहत को फायदा पहुंचा सकते हैं।

आपको बता दें कि धनिए में होने वाला विटामिन ए, सी, कैल्शियम, कैरोटीन, फाइबर, आयरन, पोटेशियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो कि हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। आइए जाने धनिए का सेवन करने से होने वाले फायदों के बारे में।

1 मुंह के घावों से राहत
धनिए में एंटी सेप्टिक गुण होते हैं, जो कि मुंह के अंदर घाव को भरने में मदद करता है।

2 कोलेस्ट्राल कम करने में मदद
धनिए में कई तरह के पोषक तत्व होने के कारण यह कोलेस्ट्राल को भी नियंत्रित करता है और उसे बढ़ने नहीं देता है।

3 नकसीर रोग
अगर आप भी नकसीर की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे में हम आपको बता दें कि आप ऐसे में भी धनिए के रस को नाक में डाल सकते हैं। ऐसा करने से नकसीर बहना बंद कर देगी।

4 कफ से राहत
हरे धनिए में कफ से राहत दिलाने के गुण होते हैं, जिस कारण यह कफ को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। इतना ही नहीं इसके रस का सेवन करना निमोनिया के रोग से भी राहत दिलाता है।

5 किडनी संबंधी रोग से राहत
हरे धनिए में ब्लड इंसुलिन की मात्रा को संतुलित करने का गुण भी होता है, जो कि किडनी से जुड़ी समस्या को भी दूर करने में मदद करता है। इतना ही नहीं धनिए का सेवन करने से आप लीवर से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या से भी राहत पा सकते हैं।