सर्दी जुकाम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सर्दी जुकाम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

इन चीजों के साथ शहद का सेवन करना बन सकता है ज़हर

इन चीजों के साथ शहद का सेवन करना बन सकता है ज़हर


ये बात तो सभी को अच्छे से पता है कि शहद में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं. इसके अलावा लड़कियां चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए भी चेहरे पर शहद लगाती हैं. पहले के समय में शहद का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए भी किया जाता था, लेकिन अगर शहद को सही तरह से इस्तेमाल ना किया जाए तो ये जहर बन जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं, शहद का इस्तेमाल किन चीजों के साथ करना चाहिए और किन चीजों के साथ नहीं.

गर्म चीजों के साथ
शहद की तासीर गर्म होती हैं, इसलिए शहद को कभी भी गर्म चीजों के साथ नहीं लेना चाहिए. अगर आप गर्म चीजों के साथ शहद खाते हैं, तो आपका पेट खराब हो सकता है. इसके अलावा आपको बहुत सी हेल्थ प्रॉब्लम भी हो सकती हैं. इसलिए शहद को कभी भी गर्म चीजों के साथ नहीं लेना चाहिए, क्योंकि वो उस समय जहर बन जाता है.
चाय या कॉफी
आपको ये बात जानकार जरुर हैरानी होगी कि चाय और कॉफी के साथ शहद लेने से हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता और हमें घबराहट होनी शुरू हो जाती हैं. कई लोग खांसी-जुखाम होने पर चाय के साथ शहद का सेवन करते हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करने से उन्हें फायदा होगा, लेकिन उन्हें फायदा होने के बजाए नुकसान होता है.
मूली और शहद
मूली और शहद दोनों एक दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं. शहद के साथ मूली खाने से इंसान के शरीर में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं, जिसकी वजह से हमारे शरीर के कई हिस्सों को नुक्सान पहुंच सकता है.
ये भी पढ़िए : शहद खाएं तो इन बातों का रखें ध्यान वरना ये जहर बन जाएगा

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

गर्म पानी से नहाने वाले सावधान, सिर्फ 1 फायदे के लिए कर बैठते हैं ये नुकसान

गर्म पानी से नहाने वाले सावधान, सिर्फ 1 फायदे के लिए कर बैठते हैं ये नुकसान


जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि आयुर्वेद में बहुत ही स्पष्ट लिखा गया है कि गर्म पानी से कभी स्नान नहीं करना चाहिए. नहाने के लिए हमेशा ठन्डे पानी का इस्तेमाल करें. क्योकि ठन्डे पानी का तापमान सामान्य रहता है जिससे शरीर को किसी प्रकार की कोई हानि नही पहुँचती. मान लीजिये कि आपको तेज़ बुखार है और आप नहाने के लिए असमर्थ है, इस स्थिति में आप गर्म पानी का इस्तेमाल कर सकते है.

गर्म पानी वेसे तो बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर वह केवल पीने के लिए उपयोग किया जाये. लेकिन अगर आपका शरीर एकदम स्वस्थ है तो कभी भी गर्म पानी से न नहाये, वरना आपको कई तरह की बीमारियाँ घेर सकती है. आयुर्वेद में पक्के तौर पर एक सूत्र लिखा गया है कि अगर आप सिर के उपर गरम पानी डालते है तो, आपको 123 प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ जकड सकती हैं. ये रोग मानसिक भी हो सकते है और शारीरिक भी.
बहुत सारे भारतीयों को सर्दियों में गरम पानी से नहाने की अदात है खास कर “महाराष्ट्र” के लोग सर्दी में गर्म पानी के बिना नही नहा सकते. अगर आपको भी गरम पानी से नहाने की लत लग चुकी है तो, घबराईये मत आपको डरने की जरूरत नही है बल्कि एक साधारण से उपाए से आप बीमारियों को दूर रख सकते है. और वो उपाए है कि जब भी आप गर्म पानी से नहाये तो, पानी को बेशक सारे अंगो पर डाल लीजिये परन्तु कभी भी सिर पर मत डालिए. क्योकि सिर और आंख में कफ होने के आसार ज्यादा है, इसलिए इन दोनों अंगों पर गरम पानी मत रहने दें.
आँखों और सिर के लिए ठंडा पानी बेहद लाभदायक सिद्ध हो सकता है. इसलिए कोशिश करें कि आप जब भी मुह धोएं तो ठन्डे पानी से ही धोये. हो सके तो सर्दियो में भी गरम पानी की जगह हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करें. बहुत सारे लोग ऐसा सोचते है कि सर्दी में ठन्डे पानी से नहाने से आपको सर्दी लग जाएगी. जबकि ऐसा कुछ भी नही है. सर्दी का ठन्डे पानी से दूर दूर तक कोई भी लेना-देना नही है. सर्दी उन्ही लोगो को होती है, जिनका पेट साफ़ नही रहता. अगर आपको मसल्स पैन है यानि हड्डियो में या मांसपेशियों में दर्द है तो, आप ठन्डे पानी के बाद गरम पानी डाले. जैसे एक बार शरीर पर ठंडा पानी डालिए, फिर गर्म डालिए, इससे आपके दर्द को काफ़ी राहत मिलेगी.

गर्म पानी से नहाने के नुकसान >>

गर्म पानी से नहाने पर स्किन में रेडनेस, रेशेज और एलर्जी की प्रॉब्लम हो सकती है, स्किन को ड्राई करता है. इससे स्किन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. गर्म पानी का बालों पर बुरा असर पड़ता है. इससे बालों का मोईसचर कम हो जाता है जिससे बाल रफ और ड्राई हो सकते हैं. गर्म पानी के कारण स्किन की ड्राईनेस बढती है. इससे खुजली की प्रॉब्लम हो सकती है.

गर्म पानी से नहाने पर ऑंखें ड्राई हो जाती है. इसके कारण आँखों में रेडनेस, खुजली और बार-बार पानी आने की प्रॉब्लम हो सकती है. गर्म पानी स्कल्प को ड्राई करता है. ऐसे में डेडरफ बढ़ सकती है. गर्म पानी का हाथ और पैर के नेल्स पर बुरा असर पड़ता है. नेल्स टूटने, इन्फेक्शन और आसपास की स्किन फटने की प्रॉब्लम हो सकती है.

गर्म पानी के कारण स्किन के टिश्यूज डैमेज होने लगते है. ऐसे में स्किन पर समय से पहले झुरियां आ सकती है. गर्म पानी के कारण बालों में डेडरफ की प्रॉब्लम बढ़ने लगती है. ड्राई हो चुके बाल टूटते भी ज्यादा है. इससे बाल झड़ने की प्रॉब्लम बढ़ सकती है. गर्म पानी के कारण स्किन का मोईसचर कम हो जाता है. इसे स्किन का ग्लो कम हो सकता है.

बुधवार, 29 नवंबर 2017

इन आसान घरेलू उपायों से पाएं निमोनिया से निजात

इन आसान घरेलू उपायों से पाएं निमोनिया से निजात


निमोनिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जो ज्यादातर सर्दी के मौसम में होती है लेकिन आजकल बारिश के दिनों में भी इसके रोगी देखने को मिलते हैं। बारिश में भिगने के बाद व्यक्ति को ठंड लग जाती है जिस वजह से खांसी-जुकाम और कफ की समस्या हो जाती है। धीरे-धीरे यह बढ़कर निमोनिया का रूप धारण कर लेता है। इसके अलावा यह फेफड़ों में इंफैक्शन की वजह से भी हो जाता है। अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो इससे फेफड़ों में पानी भर जाता है और सूजन आ जाती है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय करके इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। आइए जानिए इसके लक्षण और उपचार के बारे में

लक्षण

  • बलगम वाली खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार
  • सीने में दर्द
  • भूख कम लगना

घरेलू उपाय

1. हल्दी और काली मिर्च
निमोेनिया बुखार होने पर छाती में रेशा जमा हो जाता है और सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। ऐसे में हल्दी, काली मिर्च, मेथी दाना और अदरक का पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें और रोजाना इसका सेवन करें। इससे फेफड़ों की सूजन कम होगी और बुखार में भी आराम मिलेगा।
2. तिल के बीज 
इसके लिए 300 मिलीलीटर पानी में 15 तिल के बीज, 1 चुटकी नमक, 1 चम्मच अलसी और 1 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें। इससे छाती में जमा कफ बाहर निकल जाएगा।
3. अदरक
रोजाना अदरक के रस का सेवन करने से भी फायदा होता है। इसके अलावा आप अदरक के टुकड़े को चूस भी सकते हैं।

4. शहद
खांसी होने पर शहद चाटने से आराम मिलता है। ऐसे में निमोेनिया होने पर गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से फायदा होता है।
बलगम की समस्या से पाना चाहते हैं छुटकारा, तो अपनाइए ये घरेलु उपाय

बलगम की समस्या से पाना चाहते हैं छुटकारा, तो अपनाइए ये घरेलु उपाय


मौसम के कारण आए बदलाव का असर सेहत पर भी पड़ता है। खांसी,जुकाम, छींको के कारण बॉडी में बलगन जमा होनी शुरू हो जाती है। बलगम को शरीर से निकालना जरूरी है, इससे सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है। बलगन जमने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे ज्यादा देर तक जुकाम रहना,वायरल इंफैक्शन,साइनस आदि। बलगम से समस्या रहती है तो इससे छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपाय अपना कर राहत पा सकते हैं।

बलगम से समस्या के लिए अदरक और शहद :-
बलगम दूर करने के लिए 50 ग्राम अदरक को पीस कर इसमें 2 चम्मच शहद मिला लें। इस पेस्ट का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें। इससे बहुत राहत मिलेगी। इसके सेवन के बाद गुनगुना गरम पानी घूँट घूँट कर पीना बहुत लाभकारी रहता है ।
बलगम से समस्या के लिए सफेद-मिर्च :-
काली, लाल और हरी मिर्च का प्रयोग तो हम अक्सर करते हैं कभी सफेद मिर्च का प्रयोग करके देखिये । एक चम्मच शहद में आधा चम्मच सफेद काली पीसी मिर्च डालकर मिक्स कर लें। इसे 10-15 सैकेंड के लिए माइक्रोवेव में गर्म करें और पी लीजिए। लगातार एक हफ्ते तक इसका सेवन करने से बलगम से पूरी तरह से छुटकारा मिल जाएगा।
बलगम से समस्या के लिए लेमन टी :-
एक कप ब्लैक टी में 1 चम्मच ताजे नींबू का रस और शहद डाल कर मिक्स कर लें और चुस्की के साथ पी लें। इससे बलगम से राहत मिलेगी। इस चाय में शहद तभी डालें जब चाय अधिक तेज गरम ना हो अन्यथा शहद खराब हो जाता है और लाभ की जगह हानि कर सकता है ।
बलगम से समस्या हो तो प्रयोग करें गाजर :-
गाजर खाने से प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर इसका जूस बलगम दूर करने में लाभकारी है। एक गिलास गाजर के जूस में थोड़ा पानी और 1-2 चम्मच शहद मिलाकर पीएं। इससे बलगम की परेशानी दूर हो जाएगी।

बलगम से समस्या हो तो सेवन करें लहसुन और नींबू :-
एक कम पानी में 1 नींबू का रस और थोडा- सा अदरक, आधा टी स्पून काली मिर्च और एक चुटकी नमक डालकर उबालें। इसे पी लें, इससे बलगम साफ हो जाएगी। लहसुन संक्रमण को समाप्त करता है और नींबू बलगम को बाहर निकालकर बलगम से समस्या से राहत देता है ।

बलगम से समस्या हो तो सेवन करें हल्दी :-
रोजाना एक गिलास गर्म दूध में थोड़ी सी हल्दी और आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर डालकर पी लें। आप इसमें शहद भी मिक्स कर सकते। हल्दी बलगम को पिघलाकर बाहर निकालती है और संक्रमण को भी खत्म करती है ।

सोमवार, 27 नवंबर 2017

लौंग के यह इस्तेमाल करेंगे आपकी सेहत संबंधी परेशानियाँ को दूर

लौंग के यह इस्तेमाल करेंगे आपकी सेहत संबंधी परेशानियाँ को दूर


अधिकतर घरों में लोग कई चीजों के लिए लौंग का इस्तेमाल करते हैं। यह खाने के स्वाद और महक दोनों को बढ़ाता हैं। मगर क्या आप लोग जानते है कि लॉन्ग हमारी सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी होता हैं। इसका सेवन करने से सेहत से जुड़ी छोटी – मोटी परेशानियाँ दूर होती हैं। आइए जानते हैं लौंग का अलग – अलग तरह से इस्तेमाल करने से होने वाले फायदों के बारे में।

1. खांसी से राहत पाएं 
अगर आप खांसी की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे में आप अपने मुँह में लौंग रखकर चूसें। इससे खांसी आना बंद हो जाएगा और आपको खांसी की समस्या से राहत मिलेगी।
2. जुकाम से राहत पाएं
सर्दी – जुकाम की समस्या से राहत पाने के लिए लौंग का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद होता हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए आप एक सूती रूमाल पर लौंग के तेल की कुछ बुँदे डालकर उसे सूंघ लें। इससे सर्दी – जुकाम से राहत मिलेगी और इससे बंद नाक भी खुल जाएगी।
3. जोड़ों के दर्द से राहत पाएं 
बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों के दर्द की समस्या आम तौर पर देखी जाती हैं। इस परेशानी से छुटकरा पाने के लिए लौंग के तेल से मालिश करें। इससे जोड़ों का दर्द और सूजन ठीक हो जाती हैं।

4. सीने की जलन से राहत पाएं
लौंग के इस्तेमाल से आप सीने की जलन से राहत पा सकती हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए आप एक ग्लास पानी में दो – तीन लौंग को डालकर उबाल लें और फिर इसमें मिश्री मिलाएं। इस पानी का सेवन करने से सीने की जलन दूर हो जाती हैं।

रविवार, 15 अक्तूबर 2017

वो बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक

वो बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक


वो बारह बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक*

1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।


2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी के इलाज के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं तो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है जैसे कि फ्लू वायरस की वैक्सीन। बच्चों को दिए जाने वाली वैक्सीन डीटीएपी केवल बी.परट्यूसिस से लड़ने के लिए बनाई गई है जो कि बेहद ही मामूली बीमारी है। परन्तु डीटी एपी की वैक्सीन फेफड़ों के इंफेक्शन को आमंत्रित करती है जो दीर्घकाल में व्यक्ति की इम्यूनिटी पॉवर को कमजोर कर देती है।

3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री एजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।

4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।


5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।

6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।

8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।


9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं।

10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स जैसे पैरासिटेमोल ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और उनका ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
11. अनेक डाक्टर खुद योग और देसी दवाओं से अपना और अपने परिवार का इलाज करवाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आयुर्वेद और योग के साइड इफ़ेक्ट नही हैं और इससे रोग भी जड़ से समाप्त होते हैं.

12. बाइपास सर्जरी जो कि हृदयघात (दिल का दौरा) के रोगियों के लिए बताई जाती है वो डाक्टर खुद अपने लिए कभी नही सोचते क्योंकि एक तो यह स्थाई इलाज नही है दूसरा इस से दौरा फिर से पड़ने के मौके कम नही होते, खुद पर ऐसी समस्या आने पर डाक्टर घिया (लौकी) का रस या अर्जुन की छाल का काढ़ा बना कर पीते हैं या रोज प्राणायाम और योग करते हैं...!!

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

रात को नाभि में इसकी सिर्फ़ 2 बूंद डालने से होंगे ऐसे चमत्कारी फायदे जिसे जानकर चौंक जायेंगे आप !

रात को नाभि में इसकी सिर्फ़ 2 बूंद डालने से होंगे ऐसे चमत्कारी फायदे जिसे जानकर चौंक जायेंगे आप !


आज हम आपको रात को सोते वक़्त नाभि में गाय का देशी घी या नीम के तेल, सरसों के तेल, बादाम के तेल, नारियल या जैतून के तेल आदि की सिर्फ़ 2 बूँद लगाने से जो 14 चमत्कारी फ़ायदे होंगे उसके बारे में बताएँगे। आप अपनी त्वचा को अच्छा बनाने के लिए और अपनी दर्दो के लिए और प्रजनन के लिए पता नहीं क्या-क्या नुस्खे अपनाते होंगे और आप कई सारी दवाओं का उपयोग भी करते होंगे  लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि पेट की नाभि पर तेल की कुछ बूंदें लगाने से आपको कितना फायदा हो सकता है.

क्या आप जानते है यहाँ तेल रगड़ने से जोड़ों के दर्द, घुटने का दर्द, सर्दी, जुकाम, नाक बहने और त्वचा संबंधी परेशानियों से निजात मिल सकती है।


यहाँ हम आपको बतायेंगे की किस प्रकार आप अपनी नाभि इन तेलों को डाल कर दूर कर सकते हैं अपनी इन समस्याओ को जो आपके लिए मुश्किल भी नहीं हैं करना और जिसके द्वारा आपको इन चीजों से बहुत जल्दी आराम मिल जाएगा, तो चलिए जानते हैं कौन से है वो तेल जो करेंगे आपको रोग मुक्त।

नाभि में इन चीजों को लगाने के फायदे : 

जोड़ो का दर्द करे सही :  फटे होंठ या जोड़ों का दर्द है अगर आप इन चीजों से परेशान है तो आपको ज़रूरत है सरसों के तेल की जिसके द्वारा आप अपनी इस समस्या से छुटकारा पा सकेंगे, अपने पेट की नाभि पर सरसों के तेल की कुछ बूंदें लगाएँ. हाँ यह आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ये प्राचीन औषधि बहुत फायदेमंद है।


सर्दी ज़ुकाम से राहत : क्या आपको सर्दी, जुकाम है, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद है, हममे से कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हें बारो मॉस ज़ुकाम की शिकायत रहती है तो आपको बस इतना करना है की रुई के फ़ोहे को एल्कोहल में डुबोए और पेट की नाभि पर लगाएँ, बस हो गया। ये सर्दी और जुकाम की अचूक दवा है इससे आपका पुराने से पुराने ज़ुकाम ठीक हो जाएगा।

मासिक धर्म : लडकियों को मासिक धर्म में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं इन दिनों बहुत सारे होर्मोनेल चेंजेस भी होते है  जिसके कारण ना उनका मूड ठीक रहता हैं और उनका स्वस्थ्य लेकिन अगर आप मासिक धर्म होने वाली इन सम्सायो से बचना चाहती है तो रुई के फ़ोहे को ब्रां*डी में भिगोएँ और इसे पेट की नाभि पर रखें, इससे आपको इन चीजों से मुक्ति मिलेगी।


मुहासे के लिए : लड़का हो फिर चाहे लड़की हो हर कोई मुहासे की समस्या से परेशान रहता हैं अगर आप भी इसी समस्या से परेशान हैं और कोई भी उपाय काम नहीं आ रहा हैं तो नीम के तेल की कुछ बूंदें पेट के बीच में डालकर और आस-पास मसाज करने से आपके कील-मुहाँसे ठीक हो सकते हैं, और आपकी त्वचा बेदाग़ वा सुंदर हो जायेगी।

चेहरे पर निखार : अगर आपका चेहरा दागरहित वा सुंदर हो तो क्या कहने ऐसा कहा जाता है कि बादाम के तेल की कुछ बूंदें पेट की नाभि पर लगाने से चेहरे पर निखार आता है और आपकी रंगत भी अच्छी होती हैं।

प्रजनन क्षमता : नारियल या जैतून के तेल की कुछ बूंदें नाभि पर लगाएँ और धीरे-धीरे मसाज करें. इससे प्रजनन क्षमता बढ़ती है और आपकी प्रज*नन से रिलेटेड समस्याए भी खत्म होती हैं।

मुलायम त्वचा : हर किसी को बेबी सॉफ्ट त्वचा चाहिए क्या आपको स्वस्थ और मुलायम त्वचा चाहिए अगर हां तो आपको बस गाय का घी नाभि पर लगाना होगा और आप भी पा सकेंगे बेबी सॉफ्ट त्वचा।

मनुष्य के शरीर में हर बॉडी पार्ट्स का कनेक्शन नाभि से जुड़ा हुआ होता है। नाभि में रोज चुटकी भर घी की दो बूंदे लगाना ही हमें कई बीमारियों से बचाने के लिए पर्याप्त होता है। इस नेचुरल थैरेपी से कई हेल्थ प्रॉब्लम को ठीक किया जा सकता हैं। साथ ही यह खूबसूरती को बढ़ाने में भी फायदेमंद होता है।

तो आइये जाने हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार नाभि में घी की दो बूंदे लगाकर हल्की मालिश करने से होने वाले 7 फायदों के बारे में
  • स्किन : इसे नाभि में लगाने से स्किन में नमी बनी रहती है जिससे फेयरनेस बढती है।
  • चेहरे ही चमक : इससे स्किन की ड्राईनेस दूर होती होती है और चेहरे ही चमक बढती है।
  • बालों का झड़ना : इससे बालों का झड़ना रुकता है और बालों किस शाइनिंग बढती है।
  • घुटनों का दर्द : यह घुटनों का दर्द दूर करने में फ़ायदेमंद है और जॉइंट पैन से बचाता है।
  • पिम्पल्स और दाग-धब्बे : इससे चेहरे के पिम्पल्स ठीक होते है और दाग-धब्बे दूर होते है।
  • कटे-फटे होंठ : नाभि में घी लगाने से कटे-फटे होंठ नही ठीक हो जाते है।
  • कब्ज : इससे पेट की प्रॉब्लम दूर होती है और कब्ज से बचाव होता है।

रविवार, 17 सितंबर 2017

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें


सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन क्यों जरुरी है ?
सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं कृमियों को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है| सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते | अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है|

ध्यान रहे की सुर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना ना ही शुरू करें। जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है …

1. लाल रंग  :  यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है
2. हरा रंग  :  यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है
3. पीला रंग  :  चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
4. नीला रंग  :  दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है
5. बैंगनी रंग  :   श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर्गी, दाँतो के रोग में सहायक है
6. नारंगी रंग  :  वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है
7. आसमानी रंग  :  स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है |
सूरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है। अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एव कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं। हमे जिस रंग की ज़रूरत हो हम उसका इस्तेमाल करके अपने रोग दूर कर सकते हैं । सुर्य चिकित्सा मे पानी, क्रिस्टल, सुर्य स्नान, सुर्य प्राणायाम, इत्यादि तरीके अपनाये जाते हैं

जो रोगी की बीमारी एवं दशा  देखकर निर्धारित किया जाता है। सूर्य नमस्कार योग तो अपने आपमे संपन्न योग है, इससे मिलने वाले लाभ से कोई भी अनभिज्ञ नही है। अब तो सूर्य मंत्रो को और सुबह जल- अर्घ्य को भी महत्वता मिलती जा रही है। जलार्पण के लिये भी निर्दिष्ट नियम हैं, और इसका पालन करके हम कई तरह के समस्याओ से निजात भी पा सकते हैं।

इस तरह हम कह सकते हैं कि आज के दौर मे सुर्य चिकित्सा हमारे जीवन के हरेक पहलू मे कारगर है, शायद इसी कारण से हमारे पुर्वजो ने सूर्य उपासना पर बल दिया था, ताकि हम रोज ही खुद को सुख समृद्धि के दिशा मे अग्रसित हो। सूर्य से निकलने वाली रोशनी में विटामिन डी होता है जिसकी कमी से शरीर में मेटाबोलिक हड्डियों की बीमारी हो जाती है जो युवाओं में होने वाली गंभीर बीमारी है। यह हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करता है। सूर्य के प्रकाश के लाभ सिर्फ विटामिन डी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके कई अन्‍य लाभ भी होते हैं और कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।

सूर्य उपासना के लाभ/फायदे

अच्‍छी नींद आती है :- धूप सेंककर आप रात में अच्‍छी नींद ले सकते हैं। दरअसल सूर्य की रोशनी में बैठने से शरीर में मेलाटो‍निन नाम का हार्मोन विकसित होता है जिससे रात में अच्‍छी नींद आती है। इस तरह अनिद्रा की बीमारी भी इससे दूर जाती है। यानी रात में बेहतर नींद के लिए सूर्य से प्‍यार कीजिए।
वजन घटायें :- वजन घटाने के लिए आप कई तरीके आजमाते और बहुत मेहनत भी करते हैं। लेकिन आप यह जानकर हैरान न हों कि वजन कम करने में सूर्य आपकी सहायता कर सकते हैं। दिन में धूप में बैठने से आपको वजन घटाने में सहायता मिल सकती है। एक शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि सूर्य के प्रकाश और बीएमआई के बीच एक अच्‍छा सम्‍बंध होता है।
ठंड दूर भगाये :- अगर आप सर्दी से के मौसम में ठंड से कांप रहे हैं तो सूर्य की रोशनी में जाइये जनाब, यह एक प्राकृतिक अलाव है जो ठंड दूर करेगा और आपको बीमारियों से भी बचायेगा।
हड्डियां मजबूत बनायें :- हड्डियों को सही तरीके से पोषण न मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे – गठिया, गाउट आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियां मजबूत होती हैं क्‍योंकि इसमें विटामिन डी होता है।
इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाये :- इम्‍यून सिस्‍टम अगर कमजोर हो जाये तो पेट संबंधित कई तरह के रोग हो जाते हैं, इसलिए इसे मजबूत बनाये रखना जरूरी है। धूप से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत हो जाता है। सूर्य से निकलने वाली अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें इम्‍यून सिस्‍टम की हाईपरएक्टिविटी को नकारती हैं और सोराईसिस जैसी बीमारियों से बचाव करती हैं।
उम्र बढ़ती है :- अगर आपकी चाहत लंबी उम्र पाने की है तो नियमित रूप से धूप से स्‍नान कीजिए। क्‍योंकि यह खून जमने, डायबिटीज एवं ट्यूमर को ठीक करता है, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है एवं पैरों में खून जमने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता। ठंडे क्षेत्र में शीतकाल में यह खतरा ज्यादा रहता है। यह डायबिटीज जैसी बीमारी से भी बचाव करता है और अन्‍य बीमारियों से बचाता है। अगर ये सारी समस्‍यायें न हों तो उम्र बढ़ेगी ही।
बांझपन दूर करे :- यदि पुरुष बांझपन के शिकार हैं तो उनके लिए सूर्य धूप रामबाण दवा की तरह है। धूप सेंकने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार आता है। खून में सूर्य धूप से मिले विटामिन डी के बढ़ने के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा यह वियाग्रा दवा की भांति भी काम करता है। यह टेस्टोस्टोरेन हार्मोन के स्राव को भी बढ़ाता है।
दिमाग को स्‍वस्‍थ रखे :- सूर्य से निकलने वाले प्रकाश में मौजूद विटामिन डी से दिमाग स्वस्थ रहता है। विटामिन डी भविष्‍य में होने वाली बीमारी सीजोफ्रेनिया (पागलपन की बीमारी) के खतरे को कम करता है। यह दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके संतुलित विकास में सहायता प्रदान करता है। गर्भवती महिला के धूप सेंकने से यह लाभ बच्‍चे को भी मिलता है।
दिल के रोगों से बचाये :- सूर्य से मिलने वाले विटामिन डी से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती है और कैंसर का खतरा कम होता है। यह मेटाबॉलिज्‍म को सुधारता है जिससे मधुमेह एवं हृदय रोग काबू में रहते हैं। धूप दिल की बीमारियों को रोकने में मददगार होता है।
सूर्य की किरणें मनुष्य के रक्तचाप को कम करने में सहायता प्रदान करती हैं जिससे दिल के दौरे का ख़तरा बहुत सीमा तक कम हो जाता है।

बुधवार, 13 सितंबर 2017

कभी पी है प्याज की चाय, इतनी बीमारियों में है लाभकारी

कभी पी है प्याज की चाय, इतनी बीमारियों में है लाभकारी


आप रोज चाय पीते होंगे। स्वास्थ्य के मामलों में जागरुक रहने वाले लोग ग्रीन टी को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा ब्लैक टी को पसंद करने वाले लोगों की संख्या भी काफी अधिक है। मगर, आज हम आपको बताने जा रहे हैं, प्याज की चाय के बारे में।

खाने में प्याज का इस्तेमाल तो आपने खूब किया होगा, मगर क्या कभी आपने उसकी चाय बनाने के बारे में सोचा है। यदि नहीं, तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं, प्याज की चाय कैसे बनाएं और उसके क्या फायदे होते हैं।

दरअसल, प्याज के रस का इस्तेमाल बालों के टूटने की समस्या होने पर अक्सर लोग लगाते हैं। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, नींद न आने की बीमारी में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। शायद आपको जानकर हैरत होगी कि इसके रस से आप वजन भी कम कर सकते हैं।

ऐसे बनाएं प्याज की चाय

एक प्याज को काट कर एक कप पानी में डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें इसमें थोड़ा नींबू और ग्रीन टी मिला दें। आखिर में स्वादानुसार इस चाय में शहद डालकर पी लें। यह कई बीमारियों में लाभदायक होती है। जानते हैं कि किन मर्ज में इस चाय का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन बीमीरियों में लाभदायक

अनिद्रा की परेशानी वाले मरीज सोने से पहले इसका सेवन करें। कुछ दिनों के लगातार इस्तेमाल के बाद यह बीमारी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

प्याज की चाय में विटामिन सी होता है जो सर्दी-जुकाम के शुरुआती लक्षणों को रोकने का काम करता है।

एक रिसर्च के मुताबिक प्याज में ग्लूकोज प्रतिक्रिया को बेहतर करके इन्सुलिन रेजिटेंट को बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज में राहत दिलाने में मदद करता है।

प्याज की चाय से हाइपरटेंशन का खतरा कम होता है।

इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी होने से इम्यूनिटी बढ़ती है और शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है।

मोटापे की समस्या में भी यह कारगर होती है। लगातार दो 2 हफ्ते प्याज की चाय पीने से शरीर में जमा अतिरिक्त फैट कम हो जाता है।

इस चाय को पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट में इंफेक्शन भी नहीं होता है।

प्याज में घुलनशील फाइबर होते हैं। प्याज की चाय कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकती है और ये कोलोन कैंसर को ठीक करने में भी मददगार है।

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

ये हैं कुछ पुराने नुस्खे, जो रोज आ सकते हैं आपके काम

ये हैं कुछ पुराने नुस्खे, जो रोज आ सकते हैं आपके काम


हमारे घर की रसोई औषधियों का खजाना है। कई घरेलू चीजें ऐसी हैं जिनका उपयोग करके हम छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स को आसानी से ठीक कर सकते हैं। बस जरूरत है तो किचन में या हमारे आसपास उपस्थित इन चीजों के गुणों व उपयोगों की सही जानकारी की। हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही घरेलू चीजों का उपयोग इलाज के लिए करते आए है। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही प्राचीन समय से घरेलू नुस्खों के बारे में जो कि दोहों के रूप में हैं.....

1. मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना लगाने से काले होंठ भी गुलाबी होने लगते हैं।
2. मुंह की बदबू से परेशान हों तो दालचीनी का टुकड़ा मुंह में रखें। मुंह की बदबू तुरंत दूर हो जाती है।
3. लहसुन के तेल में थोड़ी हींग और अजवाइन डालकर पकाकर लगाने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है।
4. लाल टमाटर और खीरा के साथ करेले का जूस लेने से मधुमेह दूर रहता है
5. अजवाइन को पीसकर उसका गाढ़ा लेप लगाने से सभी तरह के चमड़ी के रोग दूर हो जाते हैं।
6. ऐलोवेरा और आंवला का जूस मिलाकर पीने से खून साफ होता है और पेट की सभी बीमारियां दूर होती हैं।
7. बीस ग्राम अांवला और एक ग्राम हल्दी मिलाकर लेने से सर्दी और कफ की तकलीफ में तुरंत आराम होता है
8. शहद आंवले का जूस और मिश्री सभी दस - दस ग्राम मात्रा में लेकर बीस ग्राम घी के साथ मिलाकर लेने से यौवन हमेशा बना रहता है।
9. अजवाइन को पीसकर और उसमें नींबू का रस मिलाकर लगाने से फोड़े-फुंसी दूर हो जाते हैं।
10. बहती नाक से परेशान हों तो युकेलिप्टस का तेल रूमाल में डालकर सूंघे। आराम मिलेगा।
11. बीस मिलीग्राम आंवले के रस में पांच ग्राम शहद मिलाकर चाटने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
12. रोज सुबह खाली पेट दस तुलसी के पत्तों का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
13. यदि आप कफ से पीड़ित हों और खांसी बहुत परेशान कर रही हो तो अजवाइन की भाप लें। कफ बाहर हो जाएगा।
14. अदरक का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर लेने से सर्दी दूर हो जाती है
15. थोड़ा सा गुड़ लेने से कई तरह के रोग दूर होते हैं, लेकिन इसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए चाहे ये कितना ही अच्छा लगता हो।
16. रोज खाने के बाद छाछ पीने से कोई रोग नहीं होता है और चेहरे पर लालिमा आती है।
17. छाछ में हींग, सेंधा नमक व जीरा डालकर पीने से हर तरह के रोग दूर हो जाते हैं।
18. नीम के सात पत्ते खाली पेट चबाने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
19. 20 ग्राम गाजर के रस में 40 ग्राम आंवला रस मिलाकर पीने से ब्लड प्रेशर और दिल के रोगों में अाराम मिलता है।
20. बेसन में थोड़ा सा नींबू का रस, शहद और पानी मिलाकर लेप बनाकर लगाने से चेहरा सुंदर और आकर्षक लगता है।
21. चौलाई और पालक की सब्जी भरपूर मात्रा में खाने से जवानी हमेशा बनी रहती है।
22. शहद का सेवन करने से गले की सभी समस्याएं दूर होती हैं और आवाज मधुर होती है।
23. सर्दी लग जाए तो गुनगुना पानी पिएं। राहत मिल जाएगी।
24. छाछ में पांच ग्राम अजवाइन का चूर्ण मिलाकर लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
25. सुबह- शाम खाली पेट जामुन की गुठली का रस पीने से डायबिटीज में आराम मिलता है।
26. पित्त बढ़ने पर घृतकुमारी और आंवले का रस मिलाकर पिएं। राहत मिलेगी।
27. दालचीनी का पाउडर पानी के साथ लेने पर दस्त में आराम हो जाता है।
28. गुड़ में थोड़ी अजवाइन मिलाकर लेने से एसिडिटी में राहत मिलती है।

सोमवार, 31 जुलाई 2017

बहुत सारी बीमारियों का जड़ से सफाया कर देता है दूध में लहसुन मिलाकर पीना

बहुत सारी बीमारियों का जड़ से सफाया कर देता है दूध में लहसुन मिलाकर पीना


सभी जानते हैं कि दूध हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसे पीने से कई तरह की बीमारियां दूर होती है और हड्डियां मजबूत बनती है। लेकिन अगर आप दूध में लहसुन मिलाकर पिएंगे तो इसके फायदे दोगुने हो जाएंगे। आइए जानते हैं दूध में लहसुन मिलाकर पीना सेहत के लिए किस तरह से अच्छा होता है।

– सर्दी-जुकाम होने पर दूध में लहसुन मिलाकर पीने से आराम मिलता है। साथ ही बलगम की शिकायत होने पर इसका सेवन लाभकारी माना गया है।
– मुंहासों की समस्या होने पर लहसुन वाला दूध आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। रोज एक गिलास लहसुन वाला दूध पीने से मुंहासे होने की संभावना कम हो जाती है।
– जिन लोगों को सायटिका की प्रॉब्लम है उनके लिए लहसुन वाला दूध फायदेमंद होता है। लहसुन दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। सायटिका में कमर से लेकर पैरों की नसों में बहुत तेज दर्द होता है। इसे सायटिक नर्व भी कहते हैं। 
– नई मांओं को लहसुन वाला दूध पिलाना काफी अच्छा होता है। बच्चे के जन्म लेने के बाद अगर मां को लहसुन वाला दूध पिलाया जाए तो स्तनपान में मुश्किल नहीं होती और दूध का तेजी से निर्माण होता है।
– लहसुन वाला दूध पीने से आपका पाचन तंत्र मजबूत बनता है। लहसुन में पाए जाने वाले तत्व पेट की हर तरह की समस्याओं को ठीक रखने में मददगार होते हैं।
– निमोनिया से राहत पाने के लिए लहसुन वाले दूध का सेवन करना चाहिए।
– आमतौर पर लहसुन दूध का इस्तेमाल पेट के कीड़ो को मारने के लिए किया जाता है।
– यही नहीं लहसुन दूध से बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी बचा जा सकता है। यह एक बेहतरीन एंटीबायोटिक के रुप में काम करता है।
– यह पेय नसों के दर्द में भी आराम दिलाता है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।
– इसमें तमाम तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। विटामिन ए, मिनरल, प्रोटीन, एंजाइम्स आदि होते हैं इसमें। ये सभी बैक्टीरिया को अप्रभावी करने का काम करते हैं। ऐसे में दर्द में इस दूध का सेवन करें और स्वस्थ बने रहें।

शनिवार, 29 जुलाई 2017

कैसे पाएं बारिश से होने वाली एलर्जी से छुटकारा

कैसे पाएं बारिश से होने वाली एलर्जी से छुटकारा


मानसून में होने वाली झमाझम बारिश सभी को अच्छी लगती है। पर ये स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकती है। ये सिर्फ चाय पकौड़ो की ही दावत नहीं देता बल्कि बीमारियों को भी खुला न्यौता होता है। मानसून में कई तरह की एलर्जी और बुखार आदि की शिकायत आम बात होती है। गौरतलब है कि मानसून के दौरान हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत ही कम हो जाती है। कई तरह के संक्रमण हमारे शरीर में प्रवेश करने लगते हैं, जो कई तरह के रोग उत्पन्न करते है। लेकिन अगर आप पहले से ही सावधानी रखें तो बिना बीमार पड़े बारिश का मजा ले सकते है। और हां बारिश चाहे जितनी भी पंसद क्यों ना हो, भीगने की गलती बिल्कुल भी ना करें। मानसून में होने वाली एलर्जी के बारे में पढ़ें।

सर्दी, जुकाम और बुखार
मानसून में सर्दी, जुकाम और बुखार का होना सामान्य माना जाता है। बरसात के दिनों में कहर बरपाने वाला वायरल बुखार अत्यंत संक्रामक रोग है जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी समय और कहीं भी ग्रस्त हो सकता है। बुखार, गला खराब होना, छींक आते रहना आदि इसके पमुख लक्षण होते है। लेकिन मानसून के इस सामान्य बुखार को भी हल्के में लेना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

वायरल बुखार के इलाज के तौर पर सबसे जरूरी बुखार को कम रखना है। इसके लिए ठंडे पानी की पट्टी का इस्तेमाल करना चाहिये तथा बुखार निवारक दवाईयां लेनी चाहिये। इस बुखार में रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए रोगी को पानी, गर्म सूप, गर्म दूध, जूस आदि का अधिक सेवन करना चाहिए और आराम करना चाहिए।

कंजक्टिवाइटिस
इस मौसम में कंजक्टिवाइटिस की समस्या भी आम होती है।  यह संक्रामक रोग एडीनो वायरस की वजह से होता है। वायरल इंफेक्शन में आंख में लालिमा, पानी निकलने व रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढऩे और कुछ मामलों में मरीज को हल्का बुखार व गला खराब होने की शिकायत रहती है।ज्यादातर मामलों में यदि यह वायरल तरीके से व्यक्ति की एक या दोनों आंखों को प्रभावित करे तो 4-5 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है।

अस्थमा की शिकायत
मानसून में अस्थमा की शिकायत भी ज्यादा हो जाती है। इसलिये इस मौसम में खास तौर पर अस्थमा के मरीजों को सावधानी रखनी चाहिये ताकि अटैक नहीं हो। अस्थमा होने पर सांस लेने में तकलीफ और खांसी जैसी समस्यायें पैदा होती हैं।अटैक से बचने के लिये धूम्रपान से परहेज करें तथा सिगरेट एवं बीड़ी के धुंये से बचें। पानी में भींगने से बचे।

त्वचा मे एलर्जी
मानसून में त्वचा मे एलर्जी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।वातावरण में नमी के बढ़ जाने की वजह से त्वचा की एलर्जी हो जाती है।  नमी अधिक बढ़ जाने की वजह से फंगस वाली बीमारियों होने की संभावना भी बढ़ जाती है। वहीं नमी में कई तरह के बैक्टीरिया भी पैदा होते हैं, साथ ही हाउस डस्ट माइट की वजह से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए इस समय घर और बाथरूम में सीलन न पैदा होने दें।

फूड प्वाइजनिंग का खतरा
बारिश का मौसम में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। बाजार में मिलने वाले चाय पकोड़े में बैक्टीरिया की संभावना बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।  इसलिए ही बारिश के दौरान बाहर का खाना मना किया जाता है। इस एलर्जी का सबसे बड़ा लक्षण होता है खाने के एक से छह घंटे के बीच उल्टी होना। अगर आपको भी ऐसे लक्षण दिख रहें तो सतर्क हो जाए।  

चाहे बुखार हो या फिर मानसून स्किन एलर्जी खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत सही समय पर सही डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

बुधवार, 26 जुलाई 2017

मुनक्का आपके लिए कई रोगों की दवा है, जानें मुनक्का के फायदे

मुनक्का आपके लिए कई रोगों की दवा है, जानें मुनक्का के फायदे


मुनक्का एक आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार मुनक्का में औषधीय गुणों की भरमार है. हमें प्रतिदिन 4 से 7 मुनक्का खाने चाहिए. मुनक्के को खांसी, सर्दी-जुकाम और कफ दूर करने की सबसे अच्छी दवा माना जाता है. इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स कई बीमारियों के इलाज में मदद करते हैं. इसके अलावा भी मुनक्के के कई फायदे हैं. आइए जानते है रोज़ मुनक्का खाने से क्या फायदे होते है –

1. मुनक्का में फाइबर्स होते हैं जो कि डाइजेशन ठीक रखने में मदद करता है.
2. इसमें आयरन होता है जो कि एनीमिया (खून की कमी) दूर करने में फायदेमंद है.
3. इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि सर्दी-खांसी ठीक करने में मदद करते है.
4. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है.
5. इसमें पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जो कि हार्ट अटैक की बीमारियों से बचाने में इफेक्टिव है.
6. मुनक्का खाने से ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव होता है जिससे स्किन की चमक बढ़ती है और रंग निखरता है.

दिखने में छोटी मुनक्का बहुत ही गुणकारी है। इसमें वसा की मात्रा नहीं के बराबर होती है। यह हल्की, सुपाच्य, नरम और स्वाद में मधुर होती है। इसे बड़ी दाख (रेजिन) के नाम से भी जाना जाता है। साधारण दाख और मुनक्का में इतना फर्क है कि यह बीज वाली होती है और छोटी दाख से अधिक गुणकारी होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-   
  • सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें। 
  • मियादी और पुराने ज्वर में दस मुनक्का एक अंजीर के साथ सुबह पानी में भिगोकर रख दें। रात्रि में सोने से पूर्व मुनक्का और अंजीर को दूध के साथ उबालकर लें। ऐसा तीन दिन करें। कितना भी पुराना बुखार हो, ठीक हो जाएगा। 
  • जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पाँच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएँ। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें। 
  • गलकंठ और दमा रोगियों के लिए भी इसका सेवन फायदेकारक है, क्योंकि मुनक्का श्वास-नलियों के अंदर जमा कफ को तुरंत बाहर निकालने की अद्भुत क्षमता रखती है। 
  • कब्ज के रोगियों को रात्रि में मुनक्का और सौंफ खाकर सोना चाहिए। कब्ज दूर करने की यह रामबाण औषधि है। 
  • जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएँ। इस बीच बच्चे को ठंडी चीजों एवं दही, छाछ का सेवन न करने दें। 
  • एक मुनक्का का बीज निकालकर उसमें लहसुन की फाँक रखकर खाने से उच्च रक्तचाप में आराम मिलता है। 
  • पच्चीस ग्राम मुनक्का देशी घी में सेंककर और सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आना बंद हो जाते हैं।

सोमवार, 24 जुलाई 2017

सोते वक्त बिस्तर के पास कटा नीबू रखने से हो सकते है ये चमत्कारिक फायदे

सोते वक्त बिस्तर के पास कटा नीबू रखने से हो सकते है ये चमत्कारिक फायदे


खट्टा-मीठा नींबू केवल विटामिन सी की कमी पूरी करने और सौंदर्य निखारने के काम नहीं आता। बल्कि कुछ अन्य जादू भी दिखाता है। नींबू के इन जादूई असर के बारे में जानें।

1. तनाव दूर करे
कई बार लोगों को बहुत अधिक थकावट या तनाव के कारण रात को नींद नहीं आती। ऐसा दिमाग के अशांत होने के कारण होता है। अगर आपको भी तनाव या घबराहट की वजह से रात को सोने में समस्या होती है तो नींबू का टुकड़ा काट के अपने बिस्तर के पास सोते वक्त रखें। नींबू में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी दिमाग को शांत करती है और सोने में मदद करती है।

2. सर्दी की समस्या में भी लाए नींद
ठंड आने वाली है। इस मौसम में कई लोगों को बंद नाक की समस्या होती है। बंद नाक के कारण कई बार रात को सांस लेने में समस्या हो जाती है जिससे नींद में खलल पड़ती है। ऐसी स्थिति में नींबू के टुकड़े को बिस्तर के बगल में रखें। इससे अच्छी नींद आएगी। ठंड में नींबू का इस्तेमाल खाने में ना करें, इससे आपको सर्दी हो सकती है।

3. मक्खी दूर भगाए
अगर आपके घर में मक्खियां बहुत हैं और अन्य दूसरे कीड़े-मकोड़ों की भी समस्या है तो घर में हमेशा नींबू का टुकड़ा काट कर रखें। नींबू की खुशबू से कीड़े-मकोड़े दूर भागते हैं। रात को सोने से पहले कुछ देर के लिए नींबू का टूकड़ा काटकर बिस्तर के पास रख दें और लाइट बुझा दें। नींबू की खुशबू और अंधेरे के कारण सारे कीड़े-मकोड़े और मक्खियां दूर भाग जाएंगे और आप आराम से सो पाएंगे।

4. अनिद्रा से राहत दिलाए
आज की भाग-दौड़ वाली लाइफ में कई लोगों को इनसोमेनिया मतलब अनिद्रा या कम नींद की समस्या होती है। इस समस्या के कारण लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है जिससे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको भी इनसोमेनिया की समस्या है तो रोज रात को नींबू का टुकड़ा अपने बिस्तर के नजदीक रखकर सोएं। नींबू की खुशबू दिमाग को शांत करेगी और सोने में मदद करेगी।

5. बीपी ठीक करे
जिनको सुबह उठने पर लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है वो भी इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं। लो ब्लड प्रेशर के मरीज अगर रात को सोते समय अपने बिस्तर के बगल में नींबू का टुकड़ा रखते हैं तो सुबह उनको फ्रेश महसूस होगा। ऐसा नींबू की खुशबू के कारण होता है। नींबू के गुणों के ऊपर हुए रिसर्च की माने तो नींबू की खुशबू शरीर में सेरोटिन का लेवल बढ़ाने में मदद करती है जिससे ब्लड प्रेशर के मरीजों को राहत मिलती है।
आयुर्वेद के सदा स्वस्थ रहने के 10 मन्त्र

आयुर्वेद के सदा स्वस्थ रहने के 10 मन्त्र


आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों से मिल कर बना है और ये पांच तत्व है आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी। हमारे शरीर की प्रकृति भी भिन्न भिन्न होती है जैसे वात, पित्त और कफ़ की प्रकृति और इसी प्रकृति के अनुरूप शरीर में बीमारियां उत्पन्न होती है। ऐसे में ये आवश्यक हो जाता है कि हम अपने शरीर को प्राकृतिक पोषण दे ना कि पोषण रहित भोजन और अनियमित जीवनशैली से इन तत्वों का संतुलन बिगाड़े।

तो चलिए, आज आपको बताते है आयुर्वेद के ऐसे कुछ प्राकृतिक तत्व जो किसी औषधि से कम नहीं –

तुलसी और काली मिर्च –
अगर आप रोज़ सुबह दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च को साथ में चबाएंगे तो आपको जल्दी जल्दी होने वाले सर्दी-ज़ुकाम, बुखार और श्वास रोग अस्थमा नहीं होगा।


सौंठ का प्रयोग –
अगर आप बुखार ,जुकाम ,कफ़ और फ्लू जैसी आये दिन होने वाली बीमारियों से खुद को दूर रखना चाहते है तो पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबालिये कि पानी आधा रह जाए और फिर रात को सोने से पहले इसे पी लीजिये।


दालचीनी और शहद-
दालचीनी और शहद दोनों ही अपने आप में गुणों की खान है तो सोचिये दोनों मिल कर कितनी राहत दे सकते है। सर्दियों में चुटकी भर दालचीनी का सेवन कर लीजिये या चाहे तो इसे शहद के साथ दिन में दो बार ले ले,ऐसा करके आप सर्दियों में होने वाली आम बीमारियों से अपने शरीर को बचा पाएंगे।


आंवला –
आंवला प्रकृति का दिया तोहफा है। इसमें विटामिन सी,विटामिन बी काम्प्लेक्स ,कैल्शियम ,फॉस्फोरोस और आयरन पाया जाता है। अगर आप इसे किसी भी रूप में रोज़ाना सेवन करेंगे तो आपको उच्च रक्तचाप और दिल का दौरा पड़ने जैसे मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा साथ ही साथ इसके सेवन से आपके चेहरे का तेज़ बढ़ेगा, बाल भी स्वस्थ होंगे और आप शरीर में नयी ऊर्जा महसूस करें।


हरड़ –
कहते है कि इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से हो कर जाता है वैसे ही ये भी कहा जाता है कि सभी रोगों की जड़ भी पेट से जुड़ी होती है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए पेट का स्वस्थ होना सबसे जरुरी होता है। इसके लिए आपको बस इतना करना है कि हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो के बीच में रखे और इसका रस पेट में जाने दे और जब हरड़ एकदम नरम हो जाये तो इसे चबा चबा कर निगल ले। ऐसा करके आप अपने पेट को तो स्वस्थ बना ही लेंगे साथ ही अपने दाँतो और बालों को भी स्वस्थ रख पाएंगे।


मेथी
सेहत की बातें जब भी होती है मेथी का ज़िक्र खुद-ब-खुद आ ही जाता है। अगर आप चाहते है कि आपका पेट ठीक रहे ,ब्लड शुगर नियंत्रित रहे ,जोड़ों के दर्द में राहत मिले तो आप मेथीदाना को पीसकर रख ले और इसका एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर रोज़ाना पिएं।


छाछ का सेवन
आयुर्वेद में छाछ का विशेष महत्व बताया गया है। शरीर का तेज़ बढ़ाने और स्वस्थ शरीर पाने के लिए रोज़ाना सुबह और दोपहर के भोजन में छाछ का सेवन बेहद फायदेमंद रहता है।


नाक में तेल डालना –
रोज़ रात को सोते समय सरसों का तेल नाक में लगाये और बादाम रोगन, सरसों के तेल या गाय के देसी घी की 5 – 5 बूंदे नाक में डालने से न केवल नाक से जुडी परेशानियां जैसे नाक बंद होना, जुकाम होना और छींकों से निजात मिलेगी बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा।


कानों में तेल डालना –
कान में कभी कभी 2 -3 बूँद तेल डालने से कान स्वस्थ रहते है। सर्दियों में हल्का गर्म और गर्मियों में ठंडा सरसों का तेल डाले लेकिन ध्यान रखे कि अगर आपको कान सम्बन्धी कोई भी समस्या हो तो अपने चिकित्सक से परामर्श ले।


लहसुन का सेवन –
लहसुन का स्वाद आपको बेहद पसंद है और आपके भोजन को खुशबू और ज़ायके से भर देने में इसकी अहम भूमिका भी होती है लेकिन स्वाद के साथ साथ सेहत सँवारने में भी इसका कोई जवाब नहीं। रात के खाने के साथ लहसुन की केवल 2 कली लेने से ही आप यूरिक एसिड बनने, दिल की बीमारियों, जोड़ों के दर्द और कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से दूरी बनाये रख सकते है।


आज हमारी जीवनशैली में भले ही बदलाव आ गए हो लेकिन हमारे मूल में आज भी आयुर्वेद रचा बसा है। आयुर्वेद में सेहत से जुड़ी हमारी हर समस्या का निदान छिपा हुआ है। ऐसे में अगर आप इन छोटी छोटी चीज़ों को अपने आहार में जोड़ ले तो आपको बार बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और आप एक स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन को प्राप्त कर सकेंगे। तो देर किस बात की, आज ही से आयुर्वेद के इस वरदान का लाभ उठाइये और स्वस्थ जीवन की और एक बड़ा कदम बढ़ाइए।

सोमवार, 10 जुलाई 2017

जुकाम दूर करने के लिए अपनाएं ये दादी माँ के घरेलू नुस्खे

जुकाम दूर करने के लिए अपनाएं ये दादी माँ के घरेलू नुस्खे


जुकाम एक प्रकार का संक्रमण है, जो कि वायरस के विभिन्न प्रकार के कारणों से होता है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है परन्तु इस बीमारी में दवाईयों का असर कम होता है। जुकाम की वजह से हमको सिर दर्द, नाक बहना, खांसी आना, तेज बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसी अनेक समस्याओं से जूझना पड़ता है।

अतः बेहतर होगा की हम इस समस्या से बचने के लिए घरेलु उपाय ही अपनाये। घरेलू उपचार के प्रयोग से बिना किसी दुष्प्रभाव के आप  सर्दी जुकाम पर काबू पा सकते है।

आइये जानते है किन घरेलु उपायों को अपनाकर आप सर्दी जुकाम से राहत पा सकते है :

लहसुन में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण उचित मात्रा में पाए जाते है जो की हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और साथ ही हमारे श्वसन मार्ग को खोलने में भी मदद करता है। यह उपाये हमको सर्दी से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार साबित होता है।

थोड़ा सा अदरक, एक चम्मच अजवाइन, 3-4 लौंग, 2-3 काली मिर्च, एक चम्मच मैथी, थोड़ी सी तुलसी और पुदीना की पतियों को पानी के साथ मिलाकर गर्म करके इसका काढ़ा बनाकर, दिन में कम से कम दो बार पीने से आराम मिलता है।

गले में खराश या सूखा कफ की शिकायत होने पर अदरक के पेस्ट में गुड़ और घी मिलाकर खाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।

गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी डाल कर थोड़े देर तक अच्छे से उबाल कर पीने से सर्दी जुकाम सही हो जाता। हल्दी में एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण उचित मात्रा में पाए जाते है जो की सर्दी जुकाम से लड़ने में काफी फायदेमंद होता है।

एक चम्मच प्याज को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो तीन बार खाने से लाभ होता है।

थोड़ी सी काली मिर्च को जलाकर उसका धुआँ सूंघने से बंद नाक खुल जाती है।

एक गिलास गरम पानी में थोड़ा सा नमक और चुटकीभर खाने का सोडा मिलाकर दिन में दो बार गरारे करने से गले की खराश में आराम पहुँचता है।

भिंडी का बना हुआ काढ़ा कम से कम 50 मि.ली. दिन में दो बार खाने से गले की खराश और सूखी खाँसी में आराम मिलता है।

बुधवार, 5 जुलाई 2017

कच्ची प्याज़ सलाद में खाने वाले ये बाते जान कर उछल पड़ेंगे

कच्ची प्याज़ सलाद में खाने वाले ये बाते जान कर उछल पड़ेंगे


प्याज़ के बीजों को सिरका में मिलकर पीसकर चटनी बनाकर इसे मिलने वाले रस को त्वचा के रोगों के उपचार में प्रयोग कर सकते है । जैसे दाद खाज खुजली व चिकेनपॉक्स जैसे रोग में भी इसका उपयोग कर सकते है क्यूंकि प्याज़ बहुत सारे सूक्ष्म जीवों के प्रभाव को रोकता है । 

प्याज़ के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से पुरानी खांसी व कफ़ में आराम मिलता है । 

जब भी दन्त का दर्द या मसूड़ों में सूजन हो तो प्याज़ के रस में नमक मिलाकर मलने से तुरंत आराम मिलता है। लाल प्याज़ बलदायक होता है जबकि सफ़ेद प्याज़ दिल के लिए अच्छा होता है प्याज़ ठंडा होता है अतः गर्मियों के दिनों में इसे कच्चा भी खाया जाता है 

इससे शुगर कंट्रोल होता है सर में दर्द होने पर प्याज़ के सफ़ेद कंद के रस को मुँह में डाल कर चूसे ।

यदि पथरी से परेशान है तो प्याज़ के रस को जूस की तरह बनाकर चीनी मिलाकर पिए । इसेसुबह पीने से ज्यादा लाभ मिलता है ।

जुकाम होने पर इसके रस को नाक पर मले तथा गुड या शहद के साथ ले तो आराम मिलता है ।

कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने में कच्चा प्याज खाना बहुत लाभकारी है प्याज में प्रचुर मात्रा में सल्फर होने से रक्त को पतला करने का काम करता है जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है ।

कब्ज के लिए बहुत अच्छा इलाज हैं रोज एक कच्चा प्याज खाना खाने के साथ खाने से खाना अच्छा पचता हैं ।
पेट से जुड़ी बीमारियों को दूर करता हैं । प्याज़ कब्ज़ के लिए बहुत ही सरल औषधि है इसे हर रोज़ कच्चा खाने से कब्ज़ की शिकायत दूर होती है ।

टी बी जैसी बीमारिया नहीं होती हैं

रविवार, 2 जुलाई 2017

खाली पेट खाए एक लहसुन, फिर देखें चौंकाने वाले फायदें !

खाली पेट खाए एक लहसुन, फिर देखें चौंकाने वाले फायदें !


आपने अक्सर सुना होगा कि लहसुन शरीर में गर्मी करता हैं, लेकिन शायद ही आप जानते होंगे कि सिर्फ सुबह-सुबह एक लहसुन खाने से आपको काफी चौंकाने वाले फायदें मिलेंगे। आइए जानते हैं लहसुन खाने के फायदों के बारे में।


– सुबह खालीपेट लहसुन को भूनकर खाने से कॉलेस्ट्रॉल कम होता हैं, और कॉलेस्ट्रॉल से जुड़ी सभी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय की नलियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव आदि के लिए यह बेहद फायदेमंद तरीका है।

– लहसुन वजन कम करने में भी मददगार साबित होता हैं, क्योंकि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम होने के साथ-साथ आपका वजन घटने लगेगा और मोटापा गायब हो जाएगा।

– सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है।

– सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है।

– इसमें मौजूद भरपूर कार्बोहाइड्रेट शरीर की कमजोरी को दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

शुक्रवार, 30 जून 2017

सेहत के लिए फायदेमंद है ये जड़ी बूटिया

सेहत के लिए फायदेमंद है ये जड़ी बूटिया


प्रकृति ने हमें कुछ जड़ी-बूटियां प्रदान की है जिनकी मदद से हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते है इन जड़ी बूटी के इस्तेमाल से बहुत सारी बीमारियों को दूर किया जा सकता है. और इसके साथ ही मानसिक शांति के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता है.

आइये जानते है ऐसी ही कुछ जड़ी बूटियों के बारे में-


तुलसी - तुलसी की पूजा तो हर घर में की जाती है. तुलसी के सेवन से सर्दी-जुकाम, बुखार, सूखा रोग, निमोनिया, कब्ज, जैसी समस्याओ से छुटकारा पाया जा सकता है.

लहसुन - लहसुन में भरपूर मात्रा में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते है.नियमित रूप से लहसुन का सेवन करने से से विटामिन ए, बी, सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पा सकते हैं.

दालचीनी - इसका इस्तेमाल एक मसाले के तौर पर किया जाता है.दालचीनी शरीर में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को खत्म कर देती है.

लौंग - लौंग हमारे शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के साथ यह एक अच्छी एंटीऑक्सीडेंट और बैक्टीरिया को खत्म करने वाली है.

अदरक - अदरक के इस्तेमाल से जी मिचलाने, उल्टी, मोशन सिकनेस आदि समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. यह पाचन क्रिया में भी सहायक है.

सोमवार, 19 जून 2017

रोजाना रात को पीएं लहसुन वाला दूध, फिर देखें कमाल

रोजाना रात को पीएं लहसुन वाला दूध, फिर देखें कमाल


आपने हमेशा से केसर दूध के कई फायदों के बारे में सुना होगा लेकिन क्या आपको पता है सिर्फ केसर या बादाम वाली दूध ही नहीं लहसुन वाला दूध भी कई तरह से फायदेमंद होता है. ये जानकर आपको आपको थोड़ा आश्चर्य हो सकता है लेकिन ये बिलकुल प्रमाणित है कि लहसुन वाले दूध से शरीर के कई तरह की बिमारियों को दूर किया जा सकता है.

हड्डियां होती है मजबूत
इसे पीने से कई तरह की बीमारियां दूर होती है और हड्डियां मजबूत बनती है. लेकिन अगर आप दूध में लहसुन मिलाकर पिएंगे तो इसके फायदे दोगुने हो जाएंग. आइए जानते हैं दूध में लहसुन मिलाकर पीना सेहत के लिए किस तरह से अच्छा होता है. 

सर्दी-जुकाम से छुटकारा
सर्दी-जुकाम होने पर दूध में लहसुन मिलाकर पीने से आराम मिलता है. साथ ही बलगम की शिकायत होने पर इसका सेवन लाभकारी माना गया है. 

मुंहासों की समस्या का निजात
मुंहासों की समस्या होने पर लहसुन वाला दूध आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. रोज एक गिलास लहसुन वाला दूध पीने से मुंहासे होने की संभावना कम हो जाती है. जिन लोगों को सायटिका की प्रॉब्लम है उनके लिए लहसुन वाला दूध फायदेमंद होता है. 

शरीर के दर्द से निजात
लहसुन दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है. सायटिका में कमर से लेकर पैरों की नसों में बहुत तेज दर्द होता है. इसे सायटिक नर्व भी कहते हैं. नई मांओं को लहसुन वाला दूध पिलाना काफी अच्छा होता है. बच्चे के जन्म लेने के बाद अगर मां को लहसुन वाला दूध पिलाया जाए तो स्तनपान में मुश्किल नहीं होती और दूध का तेजी से निर्माण होता है.

पेट के लिए फायदेमंद
लहसुन वाला दूध पीने से आपका पाचन तंत्र मजबूत बनता है. लहसुन में पाए जाने वाले तत्व पेट की हर तरह की समस्याओं को ठीक रखने में मददगार होते हैं. निमोनिया से राहत पाने के लिए लहसुन वाले दूध का सेवन करना चाहिए.