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बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

ऐसे करें बच्चों के विभिन्न रोगों की पहचान

ऐसे करें बच्चों के विभिन्न रोगों की पहचान


1. सिर का दर्द : अगर बच्चे के सिर में दर्द होता है तो बच्चा बार-बार अपनी आंखें बंद कर लेता है। इसके अलावा वह अपने सिर को एक जगह टिकाकर नहीं रखता, उसकी गर्दन नीचे की तरफ ही झुकी रहती है वह सिर को धुनता रहता है और जगह-जगह टक्करें मारता रहता है। सिर में दर्द होने से सिर की चमड़ी बिल्कुल सिकुड़ सी जाती है। बच्चे का हाथ बार-बार सिर में ही जाता रहता है और वह अपने कान भी खींचता रहता है।

2. मूत्राशय की परेशानी : अगर बच्चे के मूत्राशय में दर्द होता है तो बच्चा पेशाब रुकने से बहुत दुखी रहता है और इसी कारण कुछ खाता-पीता भी नहीं है।

3. दर्द : बच्चे के कम या ज्यादा रोने से उसके तकलीफ (दर्द) समझा जा सकती है। अगर बच्चा कम रोता है तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) कम है और अगर बच्चा रोता ही रहे और जोर-जोर से चिल्लाए तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) ज्यादा है।

4. दिल का रोग : अगर बच्चा अपने होंठ और जीभ को दांतों से काटे और मुटि्ठयों को भींचे तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे के हृदय (दिल) में दर्द है।

5. पेडू का दर्द : अगर बच्चे का पाखाना-पेशाब (टट्टी-पेशाब) बंद हो तथा वह उल्टी दिशाओं को देखें तो उसकी वस्ति, पेडू और गुदा में दर्द समझ लेना चाहिए।

अगर बच्चे को पेशाब न आ रहा हो और बार-बार प्यास लगे और बच्चे को बेहोशी छा रही हो तो बच्चे के पेड़ू में दर्द समझ लेना चाहिए। पेट का दर्द : अगर अच्छा स्वस्थ बालक रह-रहकर बार-बार रो उठे, तो समझो उसके पेट में दर्द हो रहा है।

6. प्यास का रोग : दूध पीने वाले बच्चे को जब प्यास लगती है, तब वह अपनी जीभ बाहर निकलता है।

7. जुकाम : जब बच्चे को जुकाम होता है और उसकी नाक बंद हो जाती है, तो वह मुंह से सांस लेने के लिए, दूध पीते-पीते बार-बार स्तन को छोड़ देता है और सांस लेकर फिर दूध पीने लगता है।

8. सांस की परेशानी : अगर सांस लेते समय बच्चे की नाक का छेद बड़ा हो जायें और नाक हिले, तो समझना चाहिए कि बच्चे को सांस लेने में बड़ी परेशानी हो रही है और उसको खांसी से बड़ी तकलीफ है।

9. बुखार : अगर पता करना है कि बच्चे को कितना बुखार है तो बच्चे के मुंह में थर्मामीटर लगाना चाहिए। बालक की नाड़ी (नब्ज) स्वभाव से ही बहुत तेज चला करती है, इसलिए नाड़ी की चाल (नब्ज चलने की रफ्तार) से धोखा होने का डर रहता है जो जानने वाले अनुभवी वैद्य होते हैं, वह तो धोखा नहीं खाते, पर जो नौसिखिये (न जानने वाले) होते हैं वे धोखा खा जाते हैं। थर्मामीटर से किसी तरह का धोखा नहीं हो सकता है।

10. जिगर का रोग : बच्चों का पेट स्वभाव से ही कुछ बड़ा होता है। अगर पेट कुछ ज्यादा ही बड़ा हो तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को यकृत (जिगर) या प्लीहा का रोग है अथवा अजीर्ण है। कुछ भी रोग हो पहले अच्छी तरह पता करके कि बच्चे को रोग क्या है फिर दवा देनी चाहिए।
वरदान है पपीते के पत्ते का रस क्योंकि इसमे है 5 विटामिन का भरपूर मिश्रण

वरदान है पपीते के पत्ते का रस क्योंकि इसमे है 5 विटामिन का भरपूर मिश्रण


पपीते के पत्ते खाने में कड़वे लगते हैं लेकिन उनमें कमाल के गुण छुपे हुए होते हैं. पपीते के पत्तों में विटामिन ''ए',''बी',''सी',''डी' और ''ई' पाया जाता है साथ ही इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है.

पपीते के पत्ते के रस के फायदे :

1. मुंहासे दूर करे : अगर चेहरे पर मुंहासे हैं तो सूखी पपीते की पत्ती ले कर उसे थोड़े से पानी के साथ मिक्स कर के पेस्ट बना लें. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगा कर सुखा लें और फिर पानी से धो लें।

2. कैंसर होने से रोके : इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं जो कि इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं और सवाईकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अग्नाशय, जिगर और फेफड़ों के कैंसर को होने से रोकते हैं।

3. बैक्टीरिया की ग्रोथ रोके : पपीते की पत्तियों में 50 एक्टिव सामग्रियां होती हैं जो कि सूक्ष्मजीवों जैसे फंगस, कीड़े, परजीवी और कैंसर कोशिकाओं के विभिन्न अन्य रूपों को बढ़ने से रोकती हैं।

4. इम्यूनिटी बढ़ाए : इन पत्तियों में सर्दी और जुखाम जैसे रोगों से लड़ने की शक्ति होती है. यह खून में व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को विकास बढ़ा देती है।

5. एंटी मलेरिया गुण : यह मलेरिया से लड़ने में प्रभावकारी है. पपीते की पत्तियों का रस मलेरिया के लक्षणों को बढ़ने से रोकता है।

6. डेंगू में रामबाण : डेंगू से लड़ने के लिए पपीते की पत्तियां काफी लाभकारी है. यह गिरते हुए प्लेटलेट को बढ़ाने, खून के थक्के जमने तथा जिगर की क्षति को रोकती है, जो कि डेंगू वायरस के कारण हो जाता है।

7. माहवारी के दर्द से छुटकारा : दर्द को दूर करने के लिए एक काढ़ा बनाइए जिसमें एक पपीते की पत्ती को इमली, नमक और एक गिलास पानी के साथ मिक्स कीजिए. फिर इसे उबालिए और जब काढ़ा बन कर ठंडा हो जाए तब इसे पी लीजिए, इससे आपको आराम मिलेगा।

पपीते की पत्तियों का जूस अन्य फलों के जूस के साथ मिला कर भी रोगी को दे सकते हैं।

रविवार, 8 जनवरी 2017

ये 12 कारण जिसकी वजह से आपको खाना चाहिए 'कीवी फल'

ये 12 कारण जिसकी वजह से आपको खाना चाहिए 'कीवी फल'


कीवी फल मूल रुप से चाइनीज है, लेकिन इसे अब इंडिया के लोग भी खूब खाना पंसद करते है। यह अच्छी दिखने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह एक पहाड़ी फल है। जिसका स्वाद बहुत ही टेस्टी होता है। कीवी में भरपूर मात्रा में पॉलीफिनॉल जैसे एंटीआक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन सी और ई पाई जाती है। इसके अलावा इसमें ऐक्टिनीडेन नाम का एंजाइम पाया जाता है। जो कि हमारे शरीर को प्रोटीन देता है। इसका सेवन करने से आपको जवां रहने के साथ-साथ और सेहत संबंधी कई फायदे मिलेंगे। जानिए इन फायदों के बारें में।

रहें हमेशा जवां स्किन
इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है। जो कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ स्किन की कोशिकाओं को लंबे समय तक ठीक रखता है। जिसके कारण आपकी स्किन हमेशा जवां रहती है।

डायबिटीज को करें कंट्रोल
कीवी में ग्लाइकेमिक इंडेक्स की मात्रा कम पाई जाती है। जिसके कारण ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा नहीं बढ़ता है। इस कारण आपको डायबिटीज, हार्ट संबंधी समस्या नहीं होती है।

सर्दी-जुकाम से दिलाएं निजात
अगर आपको अक्सर सर्दी ज़ुकाम हो जाता है तो आपको कीवी फल खाना शुरु कर दें। इसका सेवन करने से आपका इम्यून सिस्टम मज़बूत रहेगा। जिसके कारण आपको सर्दी-जुकाम की समस्या जल्द न होगी।

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए फायदेमंद
इसमें भरपूर मात्रा में फोलिड एसिड पाया जाता है। जो कि प्रेग्नेंट महिला के लिए काफी फायदेमंद है। प्रेग्नेंसी के समय कम से कम 400 से 600 माइक्रोग्राम फोलिड एसिड की जरुरत होती है, क्योंकि इससे होने वाले बच्चे का मस्तिष्क का विकास होता है।

आएं भरपूर नींद
एक रिसर्च के अनुसार कीबी में ऐसे गुण पाएं जाते है जो एंटी ऑक्सिडेंट्स और सेरोटोनिन स्लीपिंग डिसऑर्डर के इलाज में मदद करता है। अगर आपको भी ये समस्या है, तो आप दो फलों का सेवन सोने से पहले करें। इससे आपको अच्छी नींद आएगी।

मोटापा से बचाएं
इसमें ग्लाइकेमिक इंडेक्स की मात्रा कम पाएं जाने के कारण आपको शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक नहीं हो पाती है। जिसके कारण आप मोटापा से निजात पा सकते है।

पाचन को रखें ठीक
कीवी में ऐक्टिनीडेन नाम का एंजाइम पाया जाता है। जो कि प्रोटीन को पाचन करने में मदद करता है। खासतौर में यह फल कब्ज की समस्या से निजात दिला देता है।

ओस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए फायदेमंद
अगर कोई ओस्टियोपोरोसिस का मरीज है, तो उसको कीवी का सेवन करना चाहिए।

तनाव से दिखाएं निजात
कीवी में भरपूर मात्रा में विटामिनA, B6, B12, E और पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व पाएं जाते है। जो कि शरीर में मौजूद हर समस्या से निजात दिलाते है। इसके अलावा ब्लड सर्कुलेशन, दांतों की समस्या और तनाव से भी निजात दिलाते है।

ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोल
अगर आपको ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो आप कीवी का सेवन करें। 100 ग्राम कीवी में 312 मिलीग्राम पोटैशियम मौजूद होता है। जो कि इसको कंट्रोल रखता है।

सूजन को करें कम
कीवी एक पावरफुल इन्फ्लेमेटरी एजेंट है। अगर आपको अर्थराइटिस की प्राब्लम है, तो इसका सेवन करना शुरु कर दें। इसके सेवन करने से आपके जोड़ों में सूजन भी खत्म हो जाएगी।

पाएं खूबसूरत स्किन
कीवी आपकी सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसके कुछ स्लाइड काटकर स्किन में रखने से आपकी स्किन में निखार आएगा।

शनिवार, 7 जनवरी 2017

मुनक्का : नजला एलर्जी,सर्दी-जुकाम,वीर्य विकार,खून विकार

मुनक्का : नजला एलर्जी,सर्दी-जुकाम,वीर्य विकार,खून विकार

मुनक्का :

मुनक्का यानी बड़ी दाख को आयुर्वेद में एक औषधि माना गया है। बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है।

मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-

- शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है।
मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।

- 250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।

- मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।

- जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।

- जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।

- सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें।
सुबह-सुबह अदरक का जूस पीना इन 10 भयंकर रोगों का रामबाण उपाय है, कृपया शेयर जरूर करे

सुबह-सुबह अदरक का जूस पीना इन 10 भयंकर रोगों का रामबाण उपाय है, कृपया शेयर जरूर करे

  • अदरक का इस्तेमाल आप चाय व खाना बनाने के लिए करते हो। आपकी उम्र चाहे जो भी हो आपकी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है अदरक का रस। उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर और बीमार होता चला जाता है ऐसे में यदि आप पहले से ही अपने शरीर के बारे में चिंता करेगें तो आपको आगे चलकर बहुत फायदें हो सकते हैं।
  • सुबह-सुबह अदरक का जूस पीने से कई तरह की बीमारियां ठीक होती हैं। इसके अलावा डायबिटीज और गठिया के दर्द से भी राहत मिलती है। अदरक का जूस पीने से कोलस्ट्रोल कम होता है। यदि आप रोज अदरक का जूस पीएगें तो आपको गले की बीमारी, बुखार, जुकाम और सर्दी, सिर दर्द और कैंसर जैसी 10 भयंकर बीमारियां नहीं लगेंगी।
  • अदरक के जूस के अन्य फायदों को जानने से पहले हम आपको बताते हैं कैसे बनता है अदरक का जूस।
➡ आवश्यक सामग्री :
  1. एक छोटा कटा हुआ अदरक
  2. एक नींबू
  3. शहद (कार्बनिक शहद अवश्यकतानुसार)
➡ अदरक जूस  बनाने का तरीका :
  • सबसे पहले आप अदरक को अच्छे से धो कर के साफ कर करें और इसे काट लें। फिर इन कटे हुए अदरक के टुकड़ों को मिक्सर में अच्छे से पीस लें। अब इसके जूस को किसी गिलास में निकाल लें और इसमें उपर से शहद और थोड़ा नींबू निचोड़ दें। लीजिए ये तैयार है आपका अदरक का रोगनाशक आयुर्वेदीक जूस।
➡ सुबह-सुबह अदरक के जूस को पीने के फायदे :
  • कैंसर की बीमारी में : अदरक का जूस पीने से कैंसर की समस्या से इंसान बच सकता है। अदरक में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं। अदरक कैंसर के सैल्स को बढ़ने नहीं देता है। 
  • गठिया और जोड़ों का दर्द : अक्सर गठिया और जोड़ों के दर्द से बहुत लोग परेशान रहते हैं। अदरक का जूस पीने से आपको इन बीमारियों से राहत मिलती है।
  • डायबिटीज (मधुमेह) में अदरक : यदि आपका या आपके परिवार में किसी का ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ है तो एक गिलास अदरक का जूस रोज पीएं। एक महीने नियमित पीने से बढ़ा हुआ शुगर लेवल सामान्य हो सकता है।

मंगलवार, 3 जनवरी 2017

जुकाम में चमत्कारी है सरसों का तेल

जुकाम में चमत्कारी है सरसों का तेल


हमारे घर में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जिसे हम रोज खाते हैं। पर हम ये नहीं सोचते होगें की इनसे हमें रोगों से बचने में भी सहायता मिलती है। खांसी और जुकाम ये दोनों ऐसे रोग हैं जो हर मौसम में कभी भी हो जाते हैं।

आइये जानते हैं खांसी और जुकाम में सरसों के तेल को कैसे उपयोग करें:

1. पीली सरसों के तेल को किसी साफ कपड़े में छानकर रख लें। इस तेल की 2-3 बूंदे नाक के दोनों छिद्रों में डालने से जुकाम में आराम आता है। थोड़े दिनों तक लगातार ऐसा करने से नया या पुराना किसी भी प्रकार का जुकाम दूर हो जाता है।

2. जुकाम में जब नाक से बदबू आती हो, रक्तरंजित या रक्तहीन पीले से छिछडे़ गिरते हों तो रात को सोते समय 15 बूंद सरसों के तेल में 7 बूंद पानी मिलाकर रगड़े और झाग आने पर सूंघे। इसे नाक में भी लगाने से लाभ होता है।

3. नाक के नथुनों में सरसों के तेल की 1-1 बूंद डालकर सोने से बंदनाक खुल जाती है और जुकाम भी नहीं होता है।

4. पैरों के तलुवों में और नाक के नथुनों में सरसों के तेल की मालिश करने से जुकाम ठीक हो जाता है।

5. सरसों के तेल और अलसी के तेल की मालिश करने से छाती और पसली का दर्द ठीक हो जाता है।

6. आधा चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच प्याज का रस और इसमें कुछ बूंदे सरसों का तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें। और इसका सेवन करें। इस उपाय को करने से सुबह और शाम में होने वाले जुकाम से निजात मिल जाता है।

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

2 दिनों में सर्दी जुकाम से पाना चाहती हैं राहत, तो पिएं यह चमत्कारी काढ़ा

2 दिनों में सर्दी जुकाम से पाना चाहती हैं राहत, तो पिएं यह चमत्कारी काढ़ा


आजकल मौसम के बदलने के कारण कई सारी बीमारियां पैदा हो रही हैं, लेकिन लोग सबसे अधिक सर्दी जुकाम से परेशान हैं। ऐसे में आप चाहें तो इस सर्दी जुकाम में किसी दवा का सेवन करें बिना भी राहत पा सकती हैं। जानना चाहती हैं कैसे ? आप ऐसी सामग्री का इस्तेमाल करके अपने लिए दवा बना सकती हैं, जो कि आपके किचन में आसानी से मिल जाती है। आइए आपको बताते हैं कि आप किस तरह से इस चमत्कारी काढ़े को बना सकती हैं।

काढ़ा बनाने के लिए सामग्री

  •  प्याज -1/2
  •  नींबू का रस- 2 चम्मच
  •  लहसुन की कलियां- 4
  •  पानी -2 कप

काढ़ा बनाने की विधि

ऊपर बताई गई इन सारी सामग्रियों को एक मिक्सर में डाल कर पीस लें। इसके बाद पैन में 2 कप पानी डाल कर गर्म होने दें और फिर खौलते हुए पानी में पीसे हुए मिश्रण को डालें। इसके बाद इस पानी को छानकर रोजाना सुबह और रात में इसका सेवन करें।

इस काढ़े को पीने से आप आसानी से अपने सीने में जमे हुए कफ को दूर कर सकती हैं। इसका सेवन करने से आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अगर आप बुखार, वायरल फ्लू और जुखाम से ग्रस्त हैं, तो आप इस काढ़े का सेवन कर सकती हैं।

इस बात का ख्याल रखें कि आप इस प्राकृतिक औषधि का सेवन करते समय कोल्ड ड्रिंक या किसी भी तरह की तली हुई चीजों का सेवन ना करें।

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

लौंग से विभिन्न रोगों में उपचार, शेयर करें

लौंग से विभिन्न रोगों में उपचार, शेयर करें



बेहोशी: लौंग घिसकर अंजन करने से बेहोशी दूर होती है।लौंग को घी या दूध में पीसकर आंखों में लगाने से हिस्टीरियाकी बेहोशी दूर हो जाती है।

जुकाम: लौंग का काढ़ा पीने से जुकाम ठीक हो जाता है। 2 बूंद लौंग के तेल की लेकर 25-30 ग्राम शक्कर में मिलाकर सेवन करने से जुकाम समाप्त हो जाता है।लौंग के तेल को रूमाल पर डालकर सूंघने से जुकाम मिटता है। 100 मिलीलीटर पानी में 3 लौंग डालकर उबाल लें। उबलने पर जबपानी आधा बाकी रह जाये तो इसके अन्दर थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से जुकाम दूर हो जाता है। पान में 2 लौंग डालकर खाने से जुकाम ठीक हो जाता है।

रतौंधी: 1 लौंग को बकरी के दूध के साथ पीसकर सुरमे की तरह आंखों में लगाने से धीरे-धीरे लगाने से रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है।

बुखार: 1 लौंग पीसकर गर्म पानी से फंकी लें। इस तरह रोज 3 बार यह प्रयोग करने से सामान्य बुखार दूर होता है।

आंख पर दाने का निकलना: आंखों में दाने निकल जाने पर लौंग को घिसकर लगाने से वह बैठ जाती है।

दांतों के रोग: दांत में कीड़े लगने पर लौंग को दांत के खोखले स्थान में रखने से या लौंग का तेल लगाने से लाभ मिलता है।रूई को लौंग के तेल में भिगोकर दर्द वाले दांत के नीचे रखें तथा लार को नीचे गिरने दें।लौंग को आग पर भूनकर दांतों के गड्ढे में रखने से दांतों का दर्द खत्म होता है।लौंग के तेल में कपूर का चूर्ण मिलाकर दर्द वाले दांतों पर लगाने से दर्द में आराम रहता है।5 लौंग पीसकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर दांतों पर मलने से दांतों के दर्द में लाभ होता है अथवा 5 लौंग 1 गिलास पानी में उबालकर इससे रोजाना 3 बार कुल्ला करने से लाभ होता है।

प्रमेह: लौंग, जायफल और पीपल को 5 ग्राम लेकर 20 ग्राम कालीमिर्च और 160 ग्राम सोंठ मिलाकर पाउडर बना लें। बाद में पाउडर में उसी के बराबर शक्कर डालकर खायें। इससे खांसी, बुखार, भूख का न लगना, प्रमेह, सांस रोग और ज्यादा दस्त का आना खत्म होता है।

सूखी या गीली खांसी: सुबह-शाम दो-तीन लौंग मुंह में रखकर रस चूसते रहना चाहिए। लौंग या विभीतक फल मज्जा को घी में तलकर रख लेना चाहिए। इसे खांसी आने पर चूसना चाहिए इससे सूखी खांसी में लाभ होता है।लौंग और अनार के छिलके को बराबर पीस लें, फिर इसे चौथाई चम्मच भर लेकर आधे चम्मच शहद के साथ दिन में 3 बार चाटें। इससे खांसी ठीक हो जाती है।

भूख न लगना: आधा ग्राम लौंग का चूर्ण 1 ग्राम शहद के साथ रोज सुबह चाटना चाहिए। थोडे़ ही दिनों में भूख अच्छी तरह लगने लगती है।

गर्भवती स्त्री की उल्टी: गर्भवती स्त्रियों की उल्टी पर 1 ग्राम लौंग का पाउडर अनार के रस के साथ देना चाहिए।गर्भवती की मिचली में लौंग का चूर्ण शहद के साथ बार-बार चाटने से जी मिचलाना, उल्टी आदि सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसे प्रतिदिन 120 ग्राम से 240 ग्राम की मात्रा में दो बार चाटना चाहिए।लौंग एक ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर दिन में 3 बार चटाने से गर्भवती की उल्टी बंद हो जाती है।

बुखार में खूब प्यास लगना: थोड़े से पानी में चार लौंग डालकर पानी को उबालें, जब आधा शेषबचे तो इसे बार-बार पीने से बुखार दूर होता है।

पेट दर्द और सफेद दस्त: लौंग के पाउडर को शहद के साथ चाटने से लाभ मिलता है।

जीभ कटने पर: पान खाने से अगर जीभ कट गई हो तो एक लौंग को मुंह में रखने सेजीभ ठीक हो जाती है।

सिर दर्द: लौंग को पीसकर लेप करने से सिरदर्द तुरन्त बंद हो जाता है। इसका तेल भी लगाया जाता है या 5 लौंग पीसकर 1 कप पानी में मिलाकर गर्म करें जब आधा बच जाये तो उसे छानकर चीनी मिलाकर पिलायें। इसका सेवन शाम को और सोते समय 2 बार करते रहने से सिरदर्द ठीक हो जाता है।6 ग्राम लौंग को पानी में पीसकर गर्मकर गाढ़ा लेप कनपटियों पर लेप करने से सिर का दर्द दूर होता है।लौंग के तेल को सिर और माथे पर लगायें या नाक के दोनों ओर के नथुनों में डालें। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है।2 से 3 लौंग के साथ लगभग 480 मिलीग्राम अफीम को जल में पीसकर गर्म करके सिर पर लेप करने से हवा और सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर हो जाता है।1 या 2 ग्राम लौंग और दालचीनी को मैनफल के गूदे के साथ देने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। इसको अधिक मात्रा में सिर दर्द के रोगी को नहीं देना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में लेने से रोगी को उल्टी हो सकती है।लगभग 5 लौंग लेकर उसको एक कप पानी में पीसकर गर्म करें और आधा कप पानी रहने पर छानकर चीनी मिला दें। इसे सुबह और शाम को दो-चार बार पिलाने से सिर का दर्द खत्म हो जाता है।

पेट की गैस: 2 लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डालें। फिर कुछ ठंडा होने पर पी लें। इस प्रकार यह प्रयोग रोजाना 3 बार करने से पेट की गैस में फायदा मिलेगा।आधे कप पानी में 2 लौंग डालकर पानी में उबाल लें। फिर ठंडा करके पीने से लाभ होगा।

अम्लपित्त: अम्लपित्त से पाचनशक्ति खराब रहती है। बूढ़े होने से पहले दांत भी गिरने लगते हैं। आंखे दुखने लगती हैं और बार-बार जुकाम लगा रहता है। इस प्रकार अम्लपित्त से अनेक रोग पैदा होते हैं। अम्लपित्त के रोगी को चाय काफी नुकसान दायक होती है। इस अवस्था में खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह-शाम खाने से या शर्बत में लेने से अम्लपित्त से पैदा होने वाले सारे रोगों में फायदा होता है और अम्लपित्त ठीक हो जाता है अथवा 15 ग्राम हरे आंवलों का रस 5 पिसी हुई लौंग, 1-1 चम्मच शहद और चीनी मिलाकर रोगी को सेवन करायें। ऐसे रोज सुबह, दोपहर और शाम को 3 बार खाने से कुछ ही दिनों में फायदा होता है।सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 लौंग खाने से आराम आता है। लौंगको खाना खाने के बाद गोली के रूप में चूसने से पेट की अम्लपित्त की शिकायत समाप्त होती है।

नासूर: लौंग और हल्दी पीसकर लगाने से नासूर के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

हैजा: लौंग का पानी बनाकर रोगी को देने से प्यास और उल्टी कम होती है और पेशाब भी खुलकर आता है। लौग के तेल की 2-3 बूंदे चीनी या बताशे में देने से हैजा की उल्टी और दस्तों में लाभ होता है। इसके तेल के सेवन करने से पेट की पीड़ा, अफरा, वायु और उल्टी दूर होती है।

पित्तज्वर: 4 लौंग पीसकर पानी में घोलकर रोगी को पिलाने से तेज ज्वर कम होता है।

आन्त्रज्वर (टायफाइड): इसमें लौंग का पानी पिलाना फायदेमंद है। 5 लौंग 2 किलो पानी में उबालकर आधा पानी शेष रहने पर छान लें। इस पानी को रोगी को रोज बार-बार पिलायें। सिर्फ पानी भी उबालकर ठंडा करके पिलाना फायदेमंद है।

रविवार, 18 दिसंबर 2016

जानें कैसे कच्ची हल्दी खाने से घट जाएगा वज़न, हल्दी के और भी हैं कई फायदे

जानें कैसे कच्ची हल्दी खाने से घट जाएगा वज़न, हल्दी के और भी हैं कई फायदे


हर रसोई घर में हल्दी आमतौर पर पाई जाती है और हम भारतीयों का खाना तो मानो हल्दी बिन अधूरा ही है। हल्दी सर्वगुण संपन्न एंटीबायोटिक्स तो है ही, साथ ही साथ प्राकृतिक चमत्कार के रूप में भी इसकी ख्याति है।

हल्दी के पीले चटकीले रंग के कारण इसे "भारतीय केसर" का भी नाम दिया गया है। हल्दी रसोई घर की शान तो होती ही है साथ ही साथ इसमें पौष्टिक गुण भी पाए जाते हैं। यह स्किन, पेट और शरीर के कई रोगों के उपचार के लिए कारगर साबित होती है।

आइए जानते हैं हल्दी के अन्य फायदे।

प्रोस्टेट कैंसर से करता है रोकथाम :
हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण भी पाए जाते है। पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की सम्भावना ज़्यादा होती है। कच्ची हल्दी का सेवन करने से प्रोस्टेट सेल्स को रोका जा सकता है अथवा कच्ची हल्दी इन सेल्स को ख़त्म भी करती है।
सर्दी-जुक़ाम के लिए है रामबाण :
यह एक आम सी बात है कि जब भी ज़ुकाम होता है अक्सर हल्दी का दूध पीने की सलाह दी जाती है। हल्दी के एंटीबायोटिक गुणों के कारण, यह सर्दी के इलाज में रामबाण साबित होती है। यह युक्ति रेडिकल्स से लड़ने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्त्रोत है।
मधुमेह रोगियों के लिए होती है फायदेमंद :
हल्दी में अनेक प्रकार के गुण होते हैं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ गुण यह भी है कि हल्दी हमारे शरीर में इन्सुलिन और ग्लूकोज़ की मात्रा को संतुलित रखती है। इन्सुलिन और ग्लूकोज़ के संतुलन से मधुमेह का इलाज आसानी से किया जा सकता है।
मोटापा भी कम करती है हल्दी :
मोटापा आज कल आम समस्या बन चुका है, ऐसे में कच्ची हल्दी का उपयोग वरदान के समान है। कच्ची हल्दी को दूध में डालकर रख दिया जाए और फिर दूध को गुनगुना करके पी लिया जाए। यह उपाय मोटापा कम करने में कारगर साबित होता है।
हल्दी से होती हैं हड्डियां मज़बूत :
कच्ची हल्दी का सेवन करने से हड्डियां भी मज़बूत होती हैं। जोड़ों के दर्द के लिए हल्दी का सेवन बहुत फायदेमंद साबित होता है। कच्ची हल्दी, हड्डियों से सम्बंधित बीमारियाँ होने से भी रोकती है।
हल्दी से पाएं निखार :
त्वचा के लिए भी हल्दी रामबाण के समान है। ज़्यादातर सौन्दर्य उत्पादों में हल्दी शामिल की जाती है। रोज़ाना कच्ची हल्दी को दूध में मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार बना रहता है। इसके उपयोग से त्वचा पर पड़े धब्बे भी ठीक होने लगते हैं।
हल्दी में होते हैं एंटीसेप्टिक गुण :
हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं। यदि चोट लगने पर खून आने लगे तो हल्दी लगाई जा सकती है। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी को ब्लड प्यूरीफायर माना गया है। हल्दी, शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को मज़बूत करती है। इसमें एंटीबैक्टेरियल गुण भी पाए जाते हैं।
गठिया के मरीज़ों के लिए है लाभदायक :
हल्दी वाले दूध के वैसे तो अनेक फायदे हैं लेकिन सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह गठिया के मरीजों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह जोड़ों और मांसपेशियों को लचीला बनाती हैं और गठिया में होने वाले दर्द का भी निवारण करती है।
चुटकी बजाते सेकण्ड्स में ज़ुकाम हो जायेगा छू मंतर।

चुटकी बजाते सेकण्ड्स में ज़ुकाम हो जायेगा छू मंतर।

जुकाम कैसा भी हो, ये प्रयोग ऐसा है के इसको करते ही ऐसे असर आएगा जैसे कोई जादू. और अगर आपको अक्सर ही ज़ुकाम रहता हैं और आप ज़ुकाम की दवा खा खा कर परेशान हो गए हैं तब तो आपके लिए ये जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हैं। आप इस घरेलु नुस्खे से चुटकी बजाते ही जुकाम से आराम पा सकते हैं। आइये जाने इसके बारे में।


जुकाम को दूर भगाने की चमत्कारिक औषिधि आपकी रसोई में ही मौजूद हैं। ये हैं रोज़ाना भोजन में इस्तेमाल होने वाला एक छोटा सा मसाला – जीरा। जी हाँ जीरा।

इस छोटे से जीरे में न सिर्फ ज़ुकाम और सिर दर्द भगाने के गुण हैं – यह फंगस और बैक्टीरिया से भी लड़ता है – जीरा इन्फेक्शन्स से भी बचाता है और इससे आपका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रॉन्ग रहता है। जीरे में विटामिन ए और विटामिन सी भी हैं, ये सर्दी – ज़ुकाम से बचाते हैं।

जाने ज़ुकाम होने पर कैसे करे जीरे का इस्तेमाल :-

ज़ुकाम होने पर आप एक चम्मच जीरा कच्चा ही धीरे धीरे चबा चबा कर खाए। आपको तुरंत आराम मिल जायेगा। ज़ुकाम होने पर दिन में 3-4 बार खा सकते हैं। इसके साथ आप जीरा चाय भी पी सकते हैं।

जीरा चाय
दो कप पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबालें – जब पानी उबल जाए तो उसमें पिसी हुई अदरक चाय वाला आध पौन चम्मच और तुलसी की 8 – 10 पत्तीयां डालकर फिर से उबालें। इस पानी को छाने और फिर इसे धीरे – धीरे पिएं। जीरा डाल कर पानी की गर्म स्टीम भी ली जा सकती हैं।

इसे भी पढ़ें : रोज 15 मिनट ताली बजाइए, बीमारियों को दूर भगाइए

जीरा स्टीम
पानी में जीरा उबालकर स्टीम भी ले सकते हैं – इसमें थोड़ी लौंग मिला लें !इससे आपकी बंद नाक खुल जाएगी और ज़ुकाम से राहत मिलेगी। ध्यान रहे कि स्टीम लेने के बाद थोड़ी देर अपना सिर और छाती चादर से ज़रूर ढक लें। अगर स्टीम लेने के बाद बाहर गए व ठंड लग गई – तो चेस्ट कन्जेशन के चांसेस होते हैं।

अगर आपको ज़ुकाम के साथ ठंड भी लग रही है – तो रात में गर्म दूध में थोड़ी हल्दी डालकर पिएं। इससे आपको ज़ुकाम के साथ – साथ खांसी से भी राहत मिलेगी। हल्दी के लिए ज़्यादा जानकारी के लिए आप हमारी ये पोस्ट पढ़ सकते हैं।

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

इस सर्दी दालचीनी से बढ़ाये अपनी सेक्स पावर, जाने इसके अन्य फायदे!

इस सर्दी दालचीनी से बढ़ाये अपनी सेक्स पावर, जाने इसके अन्य फायदे!


वजन कम करना हो, सेक्स पावर बढ़ानी हो या सर्दी-जुकाम से निजात पाना हो, इन सब के लिए दालचीनी का प्रयोग काफी फायदेमंद रहता है. आइए जानते हैं कि ये मसाला आपके लिए और किस तरह से लाभकारी हो सकता है. ठंड आते ही लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत होने लगती है. ज्यादातर बुजुर्ग इस समस्या से परेशान रहते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए गुनगुने पानी में शहद और दालचीनी पाउडर डालकर पेस्ट बना लें और इसे जोड़ों पर लगाए.

दालचीनी में होने वाले फायदे :

कैंसर रोगियों के लिए भी दालचीनी लाभकारी होती है. एक महीने तक शहद के साथ इसका सेवन करने से कैंसर ठीक हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि सेक्स पावर बढ़ानी हो तो दालचीनी का नुस्खा आजमाएं. इसके लिए सुबह-शाम दूध के साथ दो ग्राम दालचीनी पाउडर का सेवन करें. इससे यौन शक्ति में इजाफा होगा और शरीर भी स्वस्थ होगा.

जो लोग मोटापे से परेशान हैं उनके लिए दालचीनी बहुत फायदेमंद है. चाय में एक चम्मच दालचीनी मिलाकर पीने से मोटापे से निजात मिलती है. इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए आधा लीटर गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद के साथ एक चम्मच दालचीनी मिलाकर पिएं. दिन में तीन बार अगर इसे लेते हैं तो आपको जल्द ही फर्क महसूस होगा.

सर्दी की वजह से होने वाले सिर दर्द में दालचीनी का लेप फायदा देता है. अगर दर्द गर्मियों में होता है तो दालचीनी और तेज पत्ते को मिश्री के साथ चावल के पानी में पीसकर सिर्फ सूंघने से ही दर्द ठीक हो जाता है. इसके अलावा इसके तेल की कुछ बूंदे डालकर आप सिर की मालिश भी कर सकते हैं. अगर किसी को कम सुनाई पड़ता है तो उसे दालचीनी के तेल की कुछ बूंदे कान में डालनी चाहिए. इससे सुनने की क्षमता बढ़ती है. दालचीनी और काली मिर्च को एक साथ खाने से जमे हुए कफ से राहत मिलती है. इसके अलावा गुनगुने पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर आप भी सकते हैं. ये त्वचा को भी सौन्दर्य प्रदान करती है. दालचीनी को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से मुंहासे और ब्लैकहेड्स दूर हो जाते हैं.

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

रोज 15 मिनट ताली बजाइए, बीमारियों को दूर भगाइए

रोज 15 मिनट ताली बजाइए, बीमारियों को दूर भगाइए


आज के समय में काम ही जरूरी है। इसी काम के कारण हम अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाते। जिसके कारण हमें बहुत से रोगों का सामना करना पड़ता है, इसी में अगर हम बात करें ताली की तो हमें इस बात पर हंसी आ जाती है। लेकिन यह सच है कि ताली बजाने से हमें कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।


ताली बजाना कोई मुश्किल कार्य नहीं होता आप इसे कभी भी और किसी भी समय पर बजा सकते हो। वैसे हम देखते हैं जब भी कोई धार्मिक कार्य हो रहा हो या कोई किसी तरह का महोत्सव हो तो हम अक्सर ताली बजाते हैं, लेकिन हम यह नहीं जानते कि इससे हमारे शरीर को कितना फायदा हो रहा है। जब भी हम लगातार ताली बजाते हैं तो हमारे ब्लड में कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिससे हमें हार्ट का खतरा कम रहता है।

ताली बजाने के लाभ या फायदे

ताली बजाना कोई कठिन काम नहीं होता। यह जितना आसान होता है उतना ही इसके हमें लाभ भी होते हैं। जब भी हम खुश होते हैं तो हम अक्सर ताली बजाते हैं। ताली बजाने से हमारे दोनों हाथों के बिंदु दब जाते हैं जिसके कारण हमारे शरीर को बहुत ही लाभ पहुंचता है। ताली बजाने से हमारे शरीर को कई तरह के लाभ होते हैं जो कुछ इस प्रकार से है :-

हार्ट का खतरा कम
जब भी हम लगातार दस से पन्द्रह मिनट तक ताली बजाते हैं, तो हमारा ब्लड कोलेस्ट्रोल कम होता है, जिससे हमारा ब्लड तेज़ी से काम करता है। इससे हार्ट का खतरा कम होता है।

मोटापा कम करे
लगातार ताली बजाने से हमारे शरीर में जो एक्स्ट्रा चर्बी है वो धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिसके कारण हमारा मोटापा भी कम होने लगता है।

बीपी को कम करे
जिन लोगों को बीपी है उन्हें ताली बजानी चाहिए, क्योंकि ताली बजाने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन तेजी से काम करता है जिससे हमें बपी का खतरा कम होता है।

सर्दी खांसी से राहत
ताली बजाने से हमारे शरीर में इम्युनिटी बढ़ती है। जिसका हमें सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हम सर्दी, जुकाम, बुख़ार से दूर रहते हैं।

सिर दर्द से राहत
जब हम लगातार ताली बजाते हैं तो हमारा तनाव कम हो जाता है जिसके कारण हमें सिर दर्द का सामना नहीं करना पड़ता।

अच्छी नींद का आना
कई लोग हैं जिन्हें रात को नींद नहीं आती, उन्हें चाहिए कि वो हर रोज ताली बजाना शुरू कर दे, क्योंकि ताली बजाने से हमारे शरीर में कई तरह के हार्मोन पैदा होते हैं, जो अच्छी और गहरी नींद के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

बालों के झड़ने को रोके
ताली बजाने से हमारे बालों को बहुत ही फायदा मिलता है, इससे हमारे बाल झड़ने बंद हो जाते हैं। इसके साथ ही हमारे बाल लम्बे और घने होते हैं।

हेल्दी लंग्स
जब हम लगातार ताली बजाते हैं, तो हमारी ऑक्सीजन का फ्लो सही तरीके से काम करता है, हमारे फेफड़ों में ऑक्सीजन सही तरीके से पहुंचती है, जिसके कारण हम हेल्दी रहते हैं।

इसके आलावा जब हम दिन में लगभग 1500 बार ताली बजाते हैं, तो हम बिल्कुल स्वस्थ रहते हैं। ताली बजाने से पहले हमें सरसों या नारियल का तेल अपने हाथों पर लगा लेना। जब बच्चे लगातार ताली बजाते हैं तो उनकी लिखावट साफ हो जाती है। इसके अलावा हृदय रोग, मधुमेह, अस्थमा, गठिया आदि बीमारियों से हमें राहत मिलती है।

सोमवार, 21 नवंबर 2016

दूध में गुड़ डालकर पीने से नहीं होती ये 5 बीमारी

दूध में गुड़ डालकर पीने से नहीं होती ये 5 बीमारी


आपके किचन में कई ऐसी चीजें होती है जो बड़ी सी बड़ी बीमारी को आसानी से दूर कर सकता है। घरेलू नुस्खे से अनजान होने के कारण हम छोटी-छोटी चीजों के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं। जहां आप हजारों रुपए खर्च करने को तैयार होते है। तो आइए आज हम आपको दूध और गुड़ के बारे में बताते हैं। गुड़ खाने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। वहीं दूध पीने से कैल्शियम की पूर्ति होती है। अगर दूध में गुड़ मिलाकर पीया जाएं तो इसका फायदा और भी अधिक बढ़ जाता है। ज्यादा नहीं, बस 50 ग्राम गुड़ ही आपको सेहतमंद बनाने के लिए काफी है।

किन चीजों में दूध-गुड़ है आपके लिए फायदेमंद


  • अगर आपके जोड़ों में दर्द है तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद है। दूध में गुड़ मिलाकर पीने से खून साफ होता है, जिससे फोड़े-फुंसी और घाव होने की आशंका कम हो जाती है। हर रोज गुड़ की छोटा सा पीस अदरक के साथ मिलाकर खाएं और गरम दूध पीएं. ऐसा करने से आपके जोड़ मजबूत होंगे और दर्द भी दूर हो जाएगा. 
  • दूध में गुड़ मिलाकर पीने से शरीर में खून की कमी, थकान नहीं रहती है। अगर आप भी खुद को सेहतमंद बनाने चाहते हैं दूध में गुड़ मिलाकर पीना शुरू कर दीजिए।
  • इसे खाने से हमारी पाचन क्रिया से जुड़ी सारी समस्याएं दूर हो जाती है. साथ ही इसका सेवन करने से पेट में गैस नहीं बनती. अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है तो ग़ुड़ में दूध मिलाकर पीएं। पाचन क्रिया के लिए गुड़ से बेहतर कुछ भी नहीं है।
  • मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी दूध में गुड़ मिलाकर पीना सेहत के लिहाज से अच्छा माना जाता है। डॉक्टर हमेशा गर्भवती महिलाओं को थकावट और कमजोरी को दूर करने से लिए गुड़ का सेवन करने के सलाह देते हैं. अगर गर्भवती महिला हर रोज गुड़ खाती है तो उन्हें एनीमिया नहीं होता. 
  • सर्दी खांसी होने पर भी गुड़-दूध का सेवन अच्छा माना गया है।
  • गुड़ का सेवन करने से बाल अच्छे होते हैं और त्वचा मुलायम बनती है. अगर आपके चेहरे पर मुंहासे और एक्ने हैं तो इसे खाने से वह भी ठीक हो जाएंगे.
  • महिलाओं को पीरियड्स के दर्द से बचने के लिए गरम दूध में गुड़ डालकर कर जरूर पीना चाहिए. 
  • अगर आप को अस्थमा की दिक्कत है तो घर में गुड़ और काले तिल के लड्डू बना कर खाएं और इसके बाद एक ग्लास गरम दूध का सेवन करें. 
  • अगर आप मोटापे के शिकार हैं तो इसे बचने के लिए गुड़ को शक्कर की जगह दूध या चाय में डाल कर पीएं.

बुधवार, 16 नवंबर 2016

अदरक में छुपा है कैंसर का इलाज, जरुर पढ़ें यह जानकारी

अदरक में छुपा है कैंसर का इलाज, जरुर पढ़ें यह जानकारी


खाने का स्वाद बढ़ाने वाला या फिर सर्दी-जुकाम और गले में दर्द से राहत दिलाने वाला अदरक। इन सभी के अलावा चेहरे की झुर्रियों से निजात दिलाकर कसाव लाने वाला अदरक। अदरक के ऐसे ही कई फायदे हैं जो हमारे घरेलू और आयुर्वेदि‍क नुस्खों के रूप में जीवन का अभि‍न्न अंग है। लेकिन हाल ही में अदरक के एक और गुण के बारे में पता चला है, जो आपके लिए बेहद फादेमंद हो सकता है।  


कैंसर कोशि‍काओं पर अदरक के प्रभाव को देखने के लिए किए गए शोध में यह पाया गया है, कि इसमें कैंसर रोधी गुण मौजूद हैं, जो खास तौर से महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर से बचाने में कारगर साबित होते हैं। यह शरीर में कैंसर पैदा करने वाली कोशि‍काओं को ब्लॉक करता है और कैंसर को फैलने से रोकता है। 

इस शोध में शोधकर्ताओं द्वारा इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि कैंसर के इलाज के तौर पर अपनाई जाने वाली कीमो थैरेपी, मरीज को राहत पहुंचाने के बजाए उसके पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। वहीं कैंसर की दवा के रूप में अदरक केवल कैंसर जनित अंगों या कोशि‍काओं को ही प्रभावित करता है और मरीज के पूरे शरीर को राहत पहुंचाता है।  

इस शोध के परिणाम बताते हैं कि प्रतिदिन अपनी डाइट में किसी भी तरह से अदरक को शामिल कर हम कैंसर को जड़ से समाप्त कर सकते हैं। स्तन कैंसर के मामले में अदरक का सेवन ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है और कैंसर बनने की संभावनाओं को कम करता है।  

शोधकर्ताओं के अनुसार अदरक में पाया जाने वाला कैंसर रोधी तत्व क्षतिग्रस्त कोशि‍काओं को भी पुन: संरक्षि‍त करने में सक्षम रहा, वह भी कीमो से 10 हजार गुना बेहतर और मजबूत तरीके से।  

हालांकि‍ कैंसर कोशि‍का पर किए गए इस शोध के बाद शोधकर्ताओं का मानना है कि, असल में मानव कोशि‍का पर यह कितना प्रभावकारी सिद्ध होगा यह देखने वाल बात होगी। फिलहाल यह तो तय है, कि अदरक में कैंसर को खत्म करने और उससे बचने के बेहतरीन गुण मौजूद हैं।  

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

क्या आप जानते हैं तुलसी से जुडी ये 10 बातें

क्या आप जानते हैं तुलसी से जुडी ये 10 बातें


"तुलसी वृक्ष ना जानिए। गाय ना जानिये ढोर।। गुरू मनुज ना जानिये। ये तीनों नन्दकिशोर।।" अर्थात- तुलसी को कभी पेड़ ना समझें गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात् भगवान के रूप हैं। " तुलसी के औषधीय गुण तो हैं ही, साथ ही तुलसी दैवीय शक्ति के रूप में घर-घर पूजी जाती हैं। आज हम आपकों तुलसी के संबंध में 10 खास बातें बताएगे जिन्हें शायद ही आप जानते होगे।  
  1. तुलसीजी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहीहे इससे पाप लगता है
  2. शिव पूजन और गणेश पूजन में तुलसी का प्रयोग वर्जित है
  3. तुलसी का सूखा पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है
  4. सायंकाल के बाद तुलसीजी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए तुलसीजी लीला करने जाती है
  5. रविवार को तुलसी पत्र नहीं तोड़ने चाहिए और न ही उनकी पूजा करनी चाहिए 
  6. जो स्त्री तुलसीजी की पूजा करती है उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है 
  7. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए 
  8. तुलसीजी पौध नहीं है साछात राधाजी का अवतार है
  9. तुलसी के पत्तों को चबाए नहीं, बल्कि इन्हें निगल लेना चाहिए इससे कई रोगों में लाभ मिलता है तुलसी में पारा धातु होती है जो की हमारे दांतों के लिए फायदेमंद नहीं है 
  10. सर्दी जुकाम में तुलसी औषधि है 

शनिवार, 5 नवंबर 2016

सुबह-सुबह लौंग की चाय पीने से होते है ये 7 अद्भुत फायदे.!!!

सुबह-सुबह लौंग की चाय पीने से होते है ये 7 अद्भुत फायदे.!!!


सुबह की चाय पीने से शरीर मे ताजगी आती है। जो पूरे दिन आपको तरोजाता बनाती है। यूं तो बाजार में अलग-अलग तरह की चाय की पत्ती उपल्ब्ध होती है लेकिन जो चाय आपको कई फायदे दे सकती है वो है लौंग की चाय। सर्दियों में खासतौर से लौंग की चाय पीने से आप कई तरह की बीमारियों से मुक्त हो सकते हो। सबसे पहले जानते है कैसे बनती है लौंग की चाय –

कैसे बनाएं लौंग की चाय :

  • लौंग को पीस कर एक छोटी चम्मच चूर्ण बना लें।
  • अब इस चूर्ण को एक कप पानी में मिलाकर 10 मिनट तक उबलने दें।
  • उबलने के बाद इसमें चाय की पत्ती को भी डालकर उबलने के लिए छोड़ दें। और थोड़ी सी चीनी भी आप इसमें डाल सकते हो।
  • इसके बाद इसे छाने और इसका सेवन करें।

लौंग की चाय के फायदे :

1. बुखार : 
यदि बुखार आ गया हो तो एैसे में चाय में लौंग को डालकर पीने से बुखार से राहत मिलती है। बुखार को प्राकृतिक व घरेलू तरीके से ठीक करने की कारगर दवा है लौंग।

2. त्वचा संबधी परेशानी : 
लौंग की चाय पीने से त्वचा संबंधी रोग जैसे स्किन इंफेक्शन आदि ठीक होते हैं। लौग की चाय शरीर से टाक्सिन्स को बाहर निकाल देती है। लौंग की चाय को आप त्वचा के संक्रमण वाली जागह पर भी लगा सकते हैं।


3. मांसपेशियों का दर्द : 
सर्दियों में ठंड लगने की वजह से शरीर की मांसपेशियों में अकड़न और दर्द होने लगता है। जिस वजह से काफी परेशानी होती है। एैसे में आप लौंग वाली चाय का सेवन करें। लौंग मांसपेशियों के दर्द को खत्म करती है। इसके अलावा आप लौंग के पानी से मांसपेशियों की सिकाई भी कर सकते हो।

4. जुकाम : 
लौंग की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका सेवन करने से सर्दी से होने वाले रोग आसानी से नहीं लगते। लौंग आपको जुकाम और खांसी से भी राहत दिलाती है। सर्दियों में दो से तीन बार लौंग को चाय में डालकर जरूर पीएं।

5. पाचन समस्या व एसिडिटी : 
यदि खाना न पचता हो। या पाचन संबंधी कोई परेशानी हो लौंग की चाय का सेवन करें। लौंग एसिडिटी व पेट की गैस को भी ठीक करती है। 

6. दांत दर्द : 
दांतों में सिरहन व दर्द का होना कष्टकारी होता है। ऐसे में लौंग की चाय आपके लिए फायदा कर सकती है। इस चाय को पीने से दांतों का दर्द व सिरहन खत्म होने लगती है।

7. गले के रोग : 
लौंग की चाय पीने से गले संबंधी रोग जैसे कफ व गले का संक्रमण आदि रोग भी ठीक होते हैं।

शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

10 मुनक्का रोज खाएंगे तो ये बीमारियां खत्म हो जाएंगी

10 मुनक्का रोज खाएंगे तो ये बीमारियां खत्म हो जाएंगी


मुनक्का यानी बड़ी दाख को आयुर्वेद में एक औषधि माना गया है। बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-
  • शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।

  • 250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।
  • मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।
  • जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।
  • जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।
  • सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें |

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

आंवला एक दैवीय पेड़ होने के साथ–साथ एक औषधीय पौधा भी है

आंवला एक दैवीय पेड़ होने के साथ–साथ एक औषधीय पौधा भी है


आंवले की करामात: ये है लंबी उम्र और जवान बने रहने का राज ।
आयुर्वेद में दवाइयों, च्यवन प्राश, ब्राह्म रसायन, धात्री रसायन, अनोशदारू, त्रिफला रसायन, आमलकी रसायन, त्रिफला चूर्ण, धात्र्यरिष्ट, त्रिफलारिष्ट, त्रिफला घृत आदि के साथ मुरब्बे, शर्बत, केश तेल आदि निर्माण में आंवला प्रयुक्त होता है। दरअसल आंवले को आयुर्वेद में गुणों की खान माना गया है। यह कई बीमारियों को दूर करता है। इसका अपना पौष्टिक महत्व भी है। संतरे से बीस गुना ज्यादा विटामिन सी इसमें पाया जाता हैं। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता।
  • आंवले के जूस में शहद मिलाकर पीएं। यह मोतियाबिंद की परेशानी में भी फायदेमंद रहता है।
  • आंवला बॉडी की इम्युनिटी पावर बढ़ाकर उसे इंफेक्शंस से लडऩे की स्ट्रेंथ देता हैं।
  • सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने से आप स्वस्थ बने रह सकते हैं।
  • आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है।
  • आंवला अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।
  • आंवला हमारे शरीर की त्वचा और हमारे बालों के लिए बहुत लाभकारी होता है।
  • आंवला खाने से सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी, जिससे दिल शरीर को ज्यादा व साफ खून सप्लाई कर पाएगा। बेशक इससे आप सेहतमंद रहेंगे।
  • आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को मजबूत करता है और बालों का झडऩा भी काफी हद तक रोकता है।
  • आंवला खाने से कब्ज दूर होती है। यह डायरिया जैसी परेशानियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।
  • खाना खाने से पहले आंवले का पाउडर, शहद और मक्खन मिलाकर खाने से भूख अच्छी लगती है।
  • एसीडिटी की समस्या है, तो एक ग्राम आंवला पाउडर और थोड़ी-सी चीनी को एक गिलास पानी या दूध में मिलाकर लें।
  • आंवला खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है, जिससे आपको खाने के तमाम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं।

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

लगातार 7 दिन लहसुन और शहद का सेवन करने के फायदे जान हैरान रह जाएगे आप, ये बरसात और ठंड में तो स्पेशल है

लगातार 7 दिन लहसुन और शहद का सेवन करने के फायदे जान हैरान रह जाएगे आप, ये बरसात और ठंड में तो स्पेशल है


लहसुन और शहद के बारें में तो आप अच्छी तरह जानते होगे। लहसुन का इस्तेमाल मसाले के रुप में किया जाता हैं। लेकिन आप जानते है कि इसतका सेवन करने से आप कई बीमारियों से भी बच जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्स करके हर तरह के इंफेक्शन को भी खत्म करता है। साथ ही इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता हैं।
अगर आप लगातार सात दिन शहद और लहसुन का बना पेस्ट का सेवन करेगे, तो कुछ ही दिनों में आपको सेहत संबंधी ऐसे प्रभाव नजर आएगे, कि आप देखते रह जाएगे। जानिए इसे बनाने की विधि और इसका सेवन करने के फायदों के बारें में।

सर्दी-जुकाम से दिलाए निजात : 

इसमें भरपूर मात्रा में ऐसे तत्व पाएं जाते हैं। इसका सेवन करने से शरीर में गर्मी आती हैं। जिसके कारण आपको सर्दी-जुकाम जैसी समस्या से निजात मिल जाता है। 

दिल को रखें हेल्दी : 

लहसुन और शदह के पेस्ट का सेवन करना आपके दिल के लिए काफी फायदेमंद हैं। इसका सेवन करने से आपके दिल की धमनियों में जमा वसा बाहर निकल जाता है। जिसके कारण ब्लड सर्कुलेशन ठीक ढंग से होने लगता हैं। जो कि दिल के लिए फायदेमंद हैं।

इम्यूनिटी सिस्टम को करें मजबूत : 

अगर आपका इसका सेवन करते है तो आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा। जिसके कारण आपको कभी कोई बीमारी नहीं हो पाएगी। 

डीटॉक्स : 

यह एक प्राकृतिक डीटॉक्स का पेस्ट है। जिसका सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद गंदगी और बेकार की चीजों को बाहर निकाल देता है। जिसके कारण आप सेहतमंद रहते है।

बचाए डायरिया से : 

अगर आपको बार-बार डायरिया की समस्या हो रही है, तो इस पेस्ट का सेवन काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं। इसका सेवन करने से आपका पाचन तंत्र ठीक ढंग से काम करता हैं। जिसके कारण आपको पेट संबंधी किसी भी प्रकार का संक्रमण नहीं होता हैं।

गले के इंफेक्शन को करें दूर : 

इस पेस्ट में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है। जिसके कारण इसका सेवन करने से आपके गले में खराश और सूजन से आपको आराम मिल जाएगा।

➡ बनाने की विधि :

2-3 बड़ी लहसुन की कली को हल्का सा दबा कर कूट लीजिए और फिर उसमें शुद्ध कच्ची शहद मिलाइए। इसे कुछ देर के लिये ऐसे ही रहने दीजिये, जिससे लहसुन में पूरा शहद समा जाए। फिर इसे सुबह खाली पेट 7 दिनों तक खाएं। फिर इसका फायदा देखे।