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रविवार, 22 अप्रैल 2018

पैंट के पिछली जेब में रखते हैं बटूआ तो संभल जाइये, नहीं तो हो सकती है ये बड़ी बीमारी

पैंट के पिछली जेब में रखते हैं बटूआ तो संभल जाइये, नहीं तो हो सकती है ये बड़ी बीमारी


आज आपको आपके बटूआ से जुड़े ऐसी बात बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि आपका बटूआ रखने का स्टाइल आपको बीमार कर सकता है। अगर आप भी अपना पर्स रखने के लिए अपनी पैंट की पीछे वाली जेब का इस्तेमाल करते हैं तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डाले। जी हां आपकी यह आदत आपको मुसीबत में डाल सकती हैं। जिसकी वजह से आपका चलना फिरना तक दूभर हो जाएगा।

मैक्स अस्पताल की डॉक्टर रजनी बताती हैं कि लोग अक्सर अपनी सहूलियत के लिए पर्स को पैंट के पीछे की पॉकेट में रख लेते है। लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर रजनी बताती हैं कि कई घंटो तक पर्स को पैंट के पीछे की जेब में रखकर बैठे रहने से पायरी फोर्मिस नाम की मसल्स के साथ साइटिका नाम की नस दबने लगती है जो हमारे कूल्हों से लेकर पैर तक की मूवमेंट तक को प्रभावित करती हैं। 

डॉक्टर का कहना हैं कि पायरी फोर्मिस नाम की मसल्स के साथ साइटिका नाम की नस दबने से व्यक्ति को पैरों में असहनीय दर्द शुरू हो जाता है। इसमें मरीज को पैरों में तेज दर्द होने के साथ उसके पैर भी सुन पड़ जाते हैं और उसका चलना फिरना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर रजनी बताती हैं कि आज के समय में कई घंटे एक ही जगह बैठकर काम करने की वजह से ज्यादातर युवा लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं।  

मेंसहेल्थ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के प्रोफ़ेसर ऑफ स्पाइन बायोमेकेनिक्स स्टुअर्ट मैकगिल ने बताया कि पीछे रखे पर्स के कार्ड, बिल और सिक्कों के गठ्ठर पर अगर आप कई घंटे बैठेंगे तो इससे हिप जॉइंट और कमर के निचले हिस्से में दर्द होने लगेगा। ये दिक्कत शुरू होती है सियाटिक नर्व के साथ, जो ठीक हिप जॉइंट के पीछे होती है। मोटा पर्स रखने की वजह से यही तंत्रिका बटुए और हिप के बीच में दबती है और मुसीबत खड़ी हो सकती है।

दर्द से कैसे निपटने के उपाय
घुटने मोड़ें और जमीन पर लेट जाएं। घुटने नीचे ले जाते वक़्त दायीं तरफ ले जाएं जबकि कंधे और हिप जमीन पर बनाए रखें और बायीं ओर ले जाएं। इससे आपको कमर के निचले हिस्से काफी आराम महसूस होगा।

इसके अलावा जमीन पर लेट जाएं और घुटनों को छाती से लगा लें और पैरों का बाहरी हिस्सा पकड़ लें। कमर के ऊपरी हिस्से को आधार बनाकर रोल करें और आप देखेंगे कि पीठ का दर्द काफी हद तक ठीक हो रहा है।

एक बार ये पायरी फोर्मिस सिंड्रोम नामक की बीमारी होने पर व्यक्ति को इसे ठीक करने के लिए फिजियोथेरेपी की सहयता लेनी पड़ती है। लेकिन अगर हालत ज्यादा बिगड़ जाएं तो सर्जरी ही इसका एक मात्र इलाज है।

बटुआ कैसे रखना चाहिए
पैसे रखने वाली क्लिप या फिर पतले स्टाइल वाला वॉलेट रख सकते हैं, जो आसानी से आगे वाली पॉकेट में समा जाए। ऐसा बटुआ भी खरीद सकते हैं जिसके साथ चाबियां जोड़कर रखी जा सकें। ऐसा करने से जब कभी आप बटुआ पीछे वाली जेब में रखकर बैठना चाहेंगे तो चाबी चुभेंगी और आप उसे आगे रखने के लिए मजबूर होंगे।

अगर आप खाकी पेंट या ड्रेस पेंट पहनते हैं तो उसका बटन बंद कर लीजिए ताकि पीछे वॉलेट रखने की आदत ही न बने।

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

कपालभाति एड़ी से लगाकर चोटी तक लगभग 100 रोगों का करती है जड़ से खात्मा

कपालभाति एड़ी से लगाकर चोटी तक लगभग 100 रोगों का करती है जड़ से खात्मा


कपालभाति वास्तव में प्राणायाम का ही एक अंग है। परंतु कुछ योगियों ने इसे क्रिया को षटकर्म का भी अंग माना है। कपालभाति के अभ्यास से धारणा शक्ति का विकास होता है और कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। इससे मन प्रसन्न और शांत रहता है तथा व्यक्ति में धार्मिक ज्ञान की वृद्धि होती है। कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में अधिक अंतर नहीं है। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि कपालभांति में सांस छोड़ने की क्रिया तेज होती है जिससे पेट की वायु झटके के साथ बाहर निकलती है तथा पेट अपनी स्वभाविक अवस्था में धीरे-धीरे आता है। इस क्रिया से मस्तिष्क का अगला भाग साफ होता है और श्वसन क्रिया में सुधार होता है। इस क्रिया में सांस लेने व छोड़ने की क्रिया जल्दी-जल्दी की जाती है।

कपालभाति के अभ्यास की विधि :
कपालभाति का अभ्यास स्वच्छ हवा वाले स्थान पर करें। अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठकर सांस को नियंत्रित करें। अब सांस को अंदर खींचते हुए वायु को फेफड़ों में भर लें। जब पूर्ण रूप से वायु अंदर भर जाए तो आवाज के साथ तेज गति से नासिका छिद्र से सांस बाहर छोड़ें। सांस छोड़ते समय नासिका छिद्र (नाक के छेद) से आवाज आना चाहिए। सांस छोड़ते हुए बीच में बिल्कुल सांस न लें। फिर सांस लें और आवाज के साथ तेज गति से सांस बाहर छोड़ें। इस तरह इस क्रिया को 10 से 15 बार करें। इस क्रिया में सांस लेने व छोड़ने की गति को जितना तेजी से कर सकें उतना लाभकारी होता है। पहले 1 सैकेंड में एक बार सांस ले और छोड़ें और बाद में इस क्रिया को बढ़ाते हुए 1 सैकेंड में 2 से 3 बार सांस लेने व छोड़ने की कोशिश करें। इस तरह 1 मिनट में 100 से 120 बार सांस लेने व छोड़नें का अभ्यास करें। इस क्रिया में सांस लेने में जितना समय लगे, उसका आधा समय सांस छोड़ने में लगाना चाहिए।
विशेष :
इस क्रिया को करते समय मन को तनाव मुक्त रखें और अच्छे विचारों के साथ इसका अभ्यास करें। शुरू-शुरू में कपालभाति का अभ्यास 3 से 5 मिनट तक करें। इसके अभ्यास के क्रम में थकान अनुभव हो तो बीच में थोड़ा आराम कर लें। अभ्यास के क्रम में जुकाम होने से श्वास नलिका द्वारा कफ बार-बार बाहर आ रहा हो तो अभ्यास से पहले कपालभाति का अभ्यास करें। इससे नाक साफ हो जाएगी। इसके अभ्यास के लिए नाक को साफ करने के लिए सूत्रनेति या धौति क्रिया भी की जाती है, परंतु इसके लिए योग गुरू से सलाह लें।
सावधानी :
पीलिया या जिगर के रोगी को तथा हृदय रोग के रोगी को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस क्रिया को करने से हृदय पर दबाव व झटका पड़ता है, जो व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। गर्मी के दिनों में पित्त प्रकृति वाले इसे 2 मिनट तक ही करें। इस क्रिया के समय कमर दर्द का अनुभव हो सकता है, परंतु धीरे-धीरे वह खत्म हो जाएगा।
क्रिया से रोगों में लाभ :
इस प्राणायाम से आध्यात्मिक लाभ अधिक मिलता है और मन में धारणा शक्ति की वृद्धि होती है। इस क्रिया को करने से सिरदर्द , सांस की बीमारी तथा मानसिक तनाव दूर होता है। इससे मन शांत, प्रसन्न और स्थिर होता है और यह मन से बुरे विचारों को नष्ट करता है, जिससे डिप्रेशन आदि रोगों से छुटकारा मिल जाता है। इस क्रिया से कफ का नाश होता है। इसके अभ्यास से फेफड़ों की कोशिकाओं की शुद्धि होती है और फेफड़े मजबूत होकर उनके रोग दूर होते हैं। यह सुषुम्ना, मस्तिष्क साफ करता है और चेहरे पर चमक, तेज, आभा व सौन्दर्य बढ़ाता है। यह आमाशय को साफ करके पाचनशक्ति को बढ़ाता है, जिससे आंतों की कमजोरी दूर होती है। यह पेट के सभी रोगों को दूर करता है तथा पेट की अधिक चर्बी को कम कर मोटापे को घटाता है। यह अजीर्ण , पित्त वृद्धि, पुराना बलगम, कृमि आदि को खत्म करता है। इसके अलावा यह रक्त विकार , आमवात (गठिया) विष विकार, त्वचा आदि रोगों को दूर करता है।

इसको करने से दमा, श्वास, एलर्जी , मधुमेह, गैस, कब्ज , अम्लपित्त, किडनी तथा प्रोस्टेट संबन्धी सभी रोग खत्म होते हैं। सर्दी के मौसम में इसका अभ्यास करने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। इस प्राणायाम से हृदय की शिराओं में आई रुकावट दूर हो जाती हैं। इस प्राणायाम से गले के ऊपर के सभी रोग जैसे सिरदर्द, अनिद्रा , अतिनिद्रा, बालों का झड़ना व पकना, नाक के अंदर फोड़े और बढ़ा मांस, नजला, जुकाम, आंखों के विकार , कम सुनना, मिर्गी आदि रोग दूर होते हैं।

योग ग्रन्थ में कपालभांति प्राणायाम के अभ्यास को अन्य 4 प्रकार से करने की विधि बताई गई है- 1. बाहरी प्राणायाम 2. वात्क्रम क्रिया 3. व्युत्क्रम क्रिया 4. शीमक्रम क्रिया।

बाहरी प्राणायाम :
इस क्रिया में सिद्धासन या पद्मासन में बैठ जाएं। फिर पूर्ण शक्ति के साथ सांस को बाहर छोड़ दें। इसके बाद अपने सिर को आगे की ओर झुकाकर ठोड़ी को कंठ में सटाकर रखें और कंधों को ऊपर की ओर भींचकर आगे की ओर करें। फिर मूलबंध करें और उसके बाद उड्डीयान बंध लगाएं। इस स्थिति में तब तक रहें, जब तक आप सांस को बाहर रोक सकें। जब सांस रोकना सम्भव न हो तो तीनों बंध को हटाते हुए सिर को ऊपर उठाकर धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेकर पुन: सांस बाहर छोड़ दें और सांस को बाहर ही रोककर पहले की तरह ही तीनों बंधों को लगाकर रखें। इस तरह इस क्रिया को 3 बार करें और धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 21 बार तक इसका अभ्यास करें।

रोगों में लाभ :
इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होती है और जठराग्नि प्रदीप्त होती है। यह पेट के सभी रोगों को दूर करता है। इससे बुद्धि सूक्ष्म और तेज होती है। यह वीर्य को ऊर्ध्वगति (ऊपर की ओर) करके स्वप्नदोष, शीघ्रपतन , धातुविकार आदि को खत्म करता है। कपालभाति प्राणायाम करने से पेट की सभी मांसपेशियों की मालिश हो जाती है। इसके प्रारम्भिक अभ्यास के क्रम में पेट के कमजोर भाग में हल्के दर्द का अनुभव होता है। दर्द के समय आराम करना चाहिए तथा रोगों को खत्म करने के लिए सावधानी से यह प्राणायाम करना चाहिए।

वात्क्रम की विधि :
इस क्रिया को सुखासन में बैठकर करना चाहिए। सुखासन में बैठने के बाद शरीर को सीधा करते हुए आंखों को बंद करके रखें। दाहिने हाथ के अंगूठे को नाक के दाईं ओर रखें और अन्य सारी अंगुलियों को बाईं ओर रखें। फिर शरीर को हल्का करते हुए नाक के दाएं छिद्र को बंद करके बाएं छिद्र से सांस खींचें और बाएं छिद्र को बंद कर दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। फिर दाएं छिद्र से सांस लें और दाएं छिद्र को बंद कर बाएं से सांस को छोड़ें। इस तरह इस क्रिया को 3 से 5 मिनट तक करें। यहां सांस लेने व छोड़ने की क्रिया सामान्य रूप से करनी चाहिए। इस अभ्यास के द्वारा बलगम संबंधी सभी विकार व रोग दूर हो जाते हैं।

व्युत्क्रम क्रिया की विधि :
इस क्रिया में पहले की तरह ही बैठें और शरीर को तान कर रखें। अपने पास किसी बर्तन में पानी भरकर रखें। फिर पानी को अंजुली में डालकर सिर को हल्का नीचे झुकाकर नाक के दोनों छिद्रों से पानी को अंदर खींचें। यह पानी नाक के रास्ते धीरे-धीरे मुंह में आ जाएगा। इसे बाहर निकाल दें। इस क्रिया का अभ्यास सावधानी से करें, क्योंकि असावधानी से पानी मस्तिष्क में जाने पर अधिक हानि पहुंचा सकता है। यह क्रिया नाक के मार्ग व गुह्य से श्लेष्मा को निकालकर नाक के गुहा को साफ व स्वच्छ बनाता है।

शीमक्रम की विधि :
इस क्रिया में भी बैठने की मुद्रा पहले की तरह ही बनाएं रखें और मुंह से आवाज के साथ पानी को मुंह में चूसें। फिर पानी को नाक के रास्ते आवाज के साथ छींकने के साथ नाक से बाहर निकाल दें। यह अभ्यास शरीर की प्रतिरक्षा की क्षमता को बढ़ाता है तथा बलगम संबंधी सभी समस्याओं को दूर करता है।

सावधानी :
यह 4 विधियां अत्यंत कठिन क्रिया है। इसलिए इसका अभ्यास सावधानी से करें तथा किसी योग शिक्षक की देख-रेख में करें। गीली विधि द्वारा कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करते समय अचानक आई परेशानी का मुकाबला करने के लिए फेफड़ों में भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन होनी चाहिए। ताकि पानी अंदर खींचते हुए वायु मार्ग में चला जाए तो उसे आसानी से निकाल सकें।

विशेष :
कपालभांति की ´सूखी´ और ´गीली´ विधि द्वारा मस्तिष्क गुहारों की शुद्धि होती है। इस अभ्यास से रोगों को रोकने की क्षमता को बढ़ाया जाता है। सूखा या वायु प्राणायाम, प्राणायामों के अभ्यासों के आधार का कार्य करता है। यह नाड़ियों को साफ करके पूरे शरीर को शुद्ध बनाता है।

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

कमर दर्द होने के कारण और इससे निपटने के घरेलू उपचार

कमर दर्द होने के कारण और इससे निपटने के घरेलू उपचार


आज के समय में हर कोई किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं। लोगों में अक्सर बहुत से लोग कमर दर्द से पीड़ित रहते हैं। कई घंटों तक लगातार बैठने या गलत दिनचर्या के कारण ये परेशानी शुरू हो जाती हैं और यह समस्या ऐसी हैं जो लंबे वक्त तक बनी रहती हैं। इससे पूरी तरह से छुटकारा पाना कठिन होता हैं, लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि आज हम आपको इसका आसान उपाय बताने जा रहे हैं जिसका इस्तेमाल कर आप इससे निजात पा सकती हैं तो चलिए जानते हैं उन घरेलू उपायों के बारे में जो कमर दर्द से छुटकारा दिलाने में असरदार हैं।

कमर दर्द होने के कारण :

  • बढ़ती उम्र
  • पोषण की कमी
  • रात को देर तक जागना
  • ठंडी चीजों का बहुत अधिक प्रयोग व सेवन
  • भारी वजन उठाना
  • किसी कठोर सीट पर बैठने से
  • ज्यादा देर तक झुक कर या लेटे हुए काम करना
  • मासिक धर्म की वजह से इत्यादि।
1. अजवाइन का सेवन करें –
अजवाइन आपके लिए बहुत असरदार दवा हैं। अगर आप कमर दर्द की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे में आप अजवाइन का सेवन कर सकती हैं। इसके लिए आप पहले इसे गर्म करें फिर ठंडा होने पर इसका सेवन करें। इससे आप दर्द से राहत पा सकती हैं।
2. सरसों का तेल और लहसुन –
अगर आपको कमर दर्द की हमेशा शिकायत रहती हैं तो सरसों का तेल एवं लहसुन का इस्तेमाल आपको इससे छुटकारा दिलाने में असरदार उपाय हैं। इसके लिए आप तीन – पांच चम्मच सरसों का तेल और पांच लहसुन की कलियाँ को एक साथ गर्म कर लें और इसको तब तक गर्म करें जब तक कि कलियाँ काली न हो जाएं। अब इसे ठंडा होने दें फिर इस तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करें। इसे प्रतिदिन सोते समय इस्तेमाल करें। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपको दर्द से छुटकारा मिलेगा।
3. तिल के तेल का इस्तेमाल –
आपको बता दें इसको ठीक करने के लिए आप तिल के तेल से भी मालिश कर सकती हैं। इसके लिए आप तिल के तेल को धीमी आंच पर गर्म कर लें और फिर इस तेल से दर्द वाली जगह पर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे पीठ दर्द से जल्द ही राहत मिलेगी।
4. मेथी का इस्तेमाल –
मेथी का इस्तेमाल खाने में करते रहने से भी कमर दर्द से राहत मिलती हैं। इसके अलावा मेथी के लड्डू को नियमित रूप से सेवन करने से भी दर्द नहीं होता हैं।

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

बेल्ट पहनते समय क्या आप भी करते हैं लाइफ को खतरे में डालने वाली ये गलती?

बेल्ट पहनते समय क्या आप भी करते हैं लाइफ को खतरे में डालने वाली ये गलती?


ज्यादातर लोगों की रोज कमर पर बेल्ट बांधने की आदत होती है। लेकिन ये आदत तब मुसीबत बन जाती है जब हम रोज टाइट बेल्ट बांधते हैं। इसके कारण दिनभर पेट की नर्व्स दबी रहती हैं। ऐसा लंबे समय तक करने से पेल्विक रीजन से निकलने वाली आर्टरी, वेन्स, मसल्स और आंतों पर प्रेशर पड़ता है। इसके कारण स्पर्म काउंट कम हो सकता है, जिससे पुरुषों की फर्टीलिटी घटने की आशंका बढ़ जाती है।

आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. अबरार मुल्तानी का कहना है कि अगर जरूरी नहीं है तो बेल्ट न पहनें और अगर पहनना ही है तो बेल्ट ढ़ीला करके पहनें। डॉ. मुल्तानी बता रहे हैं रोज बेल्ट पहनने के कुछ नुकसानों के बारे में।

रिसर्च क्या कहती है?

कोरियाई रिसर्चर्स ने 12 पुरुषों पर रिसर्च की जिसमें यह बात सामने आई कि कमर पर टाइट बेल्‍ट बांधने से एब्डॉमिनल मसल्स के काम करने का तरीका बदल जाता है। रिसर्च में यह भी साबित हुआ कि लंबे समय तक टाइट बेल्ट बांधने से रीढ़ की हड्डी में अकड़न आ सकती है। साथ ही सेंटर ऑफ ग्रेविटी में भी बदलाव आता है। इसके कारण घुटनों के जोड़ों पर भी जरूर से ज्यादा प्रेशर पड़ता है, जिससे ज्वाइंट पेन की प्रॉब्लम बढ़ती है।
  • खाने का पाचन ठीक तरीके से नही हो पाता
  • एसिडिटी और कब्ज़ की प्रॉब्लम हो सकती है
  • पैरों की हड्डियाँ कमजोर होने लगती है
  • स्पर्म काउंट कम हो सकता है
  • पैरों में स्वेलिंग आ सकती हैं
  • कमर दर्द की प्रॉब्लम बढ़ सकती है 

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

सिर्फ 2 मिनट तक रोजाना दबाएँ हाथ-पैर के ये पॉइंट्स जो कई रोगों का रामबाण उपाय है

सिर्फ 2 मिनट तक रोजाना दबाएँ हाथ-पैर के ये पॉइंट्स जो कई रोगों का रामबाण उपाय है


हाथ पैर के 38 बिंदु लगभग सैकड़ो रोगों का कारगर उपाय (एक्यूप्रेशर चिकित्सा) हमारे शरीर में जो चुम्बकीय प्रवाह बहता है उसके स्विच बोर्ड दोनों हथेलियों एवं पैर के दोनों तलुओं में है। ऊपर चित्र में ये अलग-अलग स्पर्शबिन्दु कहाँ-कहाँ है यह दर्शाया गया है।
  • मस्तिष्क
  • मानसिक नर्वस
  • पीटयुटरी
  • पीनीअल
  • मस्तिष्क की नर्वस
  • गला
  • कण्ठ
  • थाइरोइड और पेराथाइरोइड
  • मेरुदण्ड
  • अर्श-मस्सा
  • प्रोस्टेट
  • योनिमार्ग
  • जननेन्द्रिय
  • गर्भाशय
  • अंडाशय
  • कमर, रीढ़ का नीचे का भाग, लिम्फ और ग्लेंड
  • जाँघ
  • ब्लेडर
  • आँतें
  • गुदा
  • एपेण्डिक्स
  • पित्ताशय
  • लीवर
  • कंधे
  • पेन्क्रियास
  • गुर्दा (किडनी)
  • जठर
  • आड्रेनल
  • सूर्यकेन्द्र
  • फेफड़े
  • कान
  • शक्तिकेन्द्र
  • नर्वस और कान
  • नर्वस और जुकाम
  • आँखें
  • हृदय
  • तिल्ली (स्पलीन, यकृत, प्लीहा)
  • थाइमस
एक्यूप्रेशर चिकित्सा में दबाव डालने का तरीका :इसमें हथेलियों एवं पैरों के तलुओं के 38 बिन्दुओं एवं उनके आसपास दबाव दिया जाता है। ऐसा करने से बिन्दुओं के साथ जुड़े हुए अवयवों की ओर चुम्बकीय प्रवाह बहने लगता है। जैसे कि जब अँगूठे में स्थित मस्तिष्क के बिन्दु पर दबाव डाला जाये तो चुंबकीय प्रवाह मस्तिष्क में बहने लगता है जो कि मस्तिष्क को अधिक क्रियाशील बनाता है।
अँगूठे अथवा पहली उँगली अथवा बिना नोंक की हुई पेन्सिल से बिन्दुओं के ऊपर दबाव दिया जा सकता है। किसी भी बिन्दु पर 4 से 5 सेकेन्ड तक दबाव डालें। इसी प्रकार 1-2 मिनट तक पंपिंग पद्धति से दबाव डालें या फिर भारपूर्वक मालिश करें। बिन्दु पर दबाव का भार अनुभव हो उतना ही दबाव डालें, ज्यादा नहीं। नरम हाथ होंगे तो कम दबाव डालने से भी दबाव का अनुभव होगा। अंतःस्रावी ग्रंथियों के बिन्दुओं के सिवाय प्रत्येक बिन्दु पर आड़े अँगूठे द्वारा भार डालने से आवश्यक दबाव डल जायेगा जबकि अंतः स्रावी ग्रंथियों के बिन्दुओं पर अधिक दबाव देने के लिए अँगूठे, पेन्सिल या पेन का उपयोग किया जा सकता है।
शरीर के दायें भाग के अवयवों में तकलीफ अथवा दर्द हो तो दाँयें हाथ की हथेली या दायें पैर के तलुए के दबाव बिन्दुओं पर दबाव डालें। उसी प्रकार शरीर के बाँयें भाग की तकलीफों के लिए तत्संबंधी बायें हाथ की हथेली या बायें पैर के तलुए के दबाव-बिन्दुओं पर दबाव डाला जाना चाहिए।
शरीर के पीछे के भाग, रीढ़ की हड्डी, ज्ञानतंतुओं, कमर, सायटिका नस, जाँघ वगैरह आते हैं उसके लिए हथेली के पीछे के भाग में या पैर के ऊपर के भाग में दबाव दिया जाता है। किसी भी रोग अथवा अवयव की खराबी के लिए हथेलियों के बिन्दुओं पर दिन में तीन बार 1 से 2 मिनट तक दबाव दिया जा सकता है और पैर के तलुओं के बिन्दुओं पर एक साथ पाँच मिनट तक दबाव डाला जा सकता है। जब तक बिन्दुओं का दर्द न मिटे तब तक इस प्रकार उपचार चालू रखें।

अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ : ये ग्रंथियाँ शरीर के समस्त अवयवों का संचालन करती हैं। उनके बिन्दुओं पर अधिक दबाव दिया जाना चाहिए। यदि कोई ग्रंथि कम कार्य करती हो तो दबाव देने से उसकी कार्यशक्ति बढ़ती है और वह ठीक से कार्य करने लगती है। किन्तु यदि कोई ग्रंथि अधिक (आवश्यकता से अधिक) क्रियाशील हो तो दबाव डालने से उस ग्रंथि का कार्य कम अर्थात् आवश्यकतानुसार हो जाता है। इस प्रकार दबाव देने से अंतःस्रावी ग्रंथियों का नियमन हो सकता है।

इस चिकित्सा से लगभग सैकड़ो रोगों से मुक्ति : दोनों हथेलियों एवं पैरों के तलुओं के बिन्दुओं पर रोज दस मिनट तक दबाव डालकर उन्हें सँभाल लिया जाये तो समस्त अवयव बैटरी की तरह रीचार्ज होकर क्रियाशील हो उठते हैं, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ ठीक से कार्य करने लगती है, रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है और रोग होने की सम्भावना कम हो जाती है। इस प्रकार हाथ की हथेली और पैरो के तलवो पर इन 38 बिंदु पर दबाव डालने से एक्यूप्रेशर चिकित्सा आपको लगभग 100 से अधिक रोगों से मुक्ति दिलाएगी।

सूर्य बिन्दु : सूर्यबिन्दु छाती के परदे (डायाफ्राम) के नीचे आये हुए समस्त अवयवों का संचालन करता है। नाभि खिसक जाने पर अथवा डायाफ्राम के नीचे के किसी भी अवयव के ठीक से कार्य न करने पर सूर्यबिन्दु पर दबाव डाला जाना चाहिए।

शक्तिबिन्दु : जब बहुत थकान हो या रात्रि को नींद न आयी हो तब इस बिन्दु को दबाने से वहाँ दुःखेगा। उस समय वहाँ दबाव डालकर उपचार करें।

शनिवार, 30 सितंबर 2017

इसे दूध के साथ सेवन करने से 80 प्रकार के वात रोगों से मुक्ति मिलती है

इसे दूध के साथ सेवन करने से 80 प्रकार के वात रोगों से मुक्ति मिलती है


आज हम आपको 80 प्रकार के वातरोगों से निजात पाने के लिए औषधियों का अद्भुत योग बताएँगे। होने वाले सभी प्रकार के वातरोगों में लहसुन का उपयोग करना चाहिए। इससे रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त हो जाता है तथा उसके शरीर की वृद्धि होती है।'

इससे 80 प्रकार के वात रोग जैसे :  पक्षाघात (लकवा), अर्दित (मुँह का लकवा), गृध्रसी (सायटिका), जोड़ों का दर्द, हाथ पैरों में सुन्नता अथवा जकड़न, कम्पन, दर्द, गर्दनकमर का दर्द, स्पांडिलोसिस आदि तथा दमा, पुरानी खाँसी, अस्थिच्युत (डिसलोकेशन), अस्थिभग्न (फ्रेक्चर) एवं अन्य अस्थिरोग दूर होते हैं। इसका सेवन माघ माह के अंत तक कर सकते हैं। व्याधि अधिक गम्भीर हो तो आश्रम से वैद्यकीय सलाह ले एक वर्ष तक भी ले सकते हैं। लकवाग्रस्त लोगों तक भी इसकी खबर पहुँचायें।

बनाने विधि :  

200 ग्राम लहसुन छीलकर पीस लें। 4 लीटर दूध में ये लहसुन व 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर दूध गाढ़ा होने तक उबालें। फिर इसमें 400 ग्राम मिश्री, 400 ग्राम गाय का घी तथा सोंठ, काली मिर्च, पीपर,  दालचीनी, इलायची, तमालपात्र,  नागकेशर, पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी, दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना, देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा, नीम, सोआ व कौंचा के बीज का चूर्ण प्रत्येक 3-3 ग्राम मिलाकर धीमी आँच पर हिलाते रहें। मिश्रण में से घी छूटने लग जाय, गाढ़ा मावा बन जाय तब ठंडा करके इसे काँच की बरनी में भरकर रखें।

ये भी पढ़िए: किस-किस चीज को साथ नहीं खाना चाहिए और क्यों, जानते हैं ।

सेवन करने का तरीका :

10 से 20 ग्राम यह मिश्रण सुबह गाय के दूध के साथ लें पाचनशक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः ले सकते हैं।भोजन में मूली, अधिक तेल व घी तथा खट्टे पदार्थों का सेवन न करें। स्नान व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

ज़मीन पर सोने के फायदे जानकर बिस्तर पर सोना छोड़ देंगे आप

ज़मीन पर सोने के फायदे जानकर बिस्तर पर सोना छोड़ देंगे आप


ज़मीन पर बैठे कितने साल हो गये है आपको ? आप भी बैठने और खाना खाने के लिए आरामदायक कुर्सी का ही चुनाव करते है ना ! ऐसे में ये सवाल थोड़ा अजीब ही है कि आख़िरी बार आप कब ज़मीन पर सोये थे ,शायद सालों पहले। पहले के ज़माने में जहाँ ज़मीन पर बैठ कर ही सारे काम निपटाए जाते थे वहीँ आज ज़मीन पर बैठने को अच्छा नहीं माना जाता है साथ ही ऊँचे और आरामदायक फर्नीचर को प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखा जाता है। ऐसे में जब दिन भर की मेहनत के बाद आप अपने नरम मुलायम बिस्तर पर लेटते है तो एक मीठी और अच्छी नींद के साथ साथ शरीर के आराम की भी आस लगाते है
लेकिन आपको ये जान कर हैरानी होगी कि इन्हीं गद्दीदार नरम बिस्तरों के कारण आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता है और आपको डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है कभी कमर दर्द तो कभी गर्दन दर्द को लेकर। लेकिन इस मुश्किल का हल आप ज़मीन पर सो कर ही जान सकते है। तो चलिए, आज आपको बताते है ज़मीन पर सोने के हैरान कर देने फ़ायदे –

कमर दर्द में राहत –
कमर दर्द आजकल एक आम समस्या हो गयी है जो किसी भी उम्र में अपनी दस्तक दे देती है। अगर आप भी कमर के इस दर्द से हैरान परेशान है तो ज़मीन पर सोने की आदत डालिये और अपने शरीर की क्षमता के अनुसार ज़मीन पर लेटना शुरू कीजिये। ऐसा करने से आपको कमर दर्द में राहत महसूस होने लगेगी।


कंधों और गर्दन के दर्द में आराम –
कंधों और गर्दन में दर्द रहने के कई कारण हो सकते है जैसे लगातार कंप्यूटर पर काम करना, झुक कर चलना, सही पोजीशन में नहीं बैठना और सोने का ग़लत तरीका होना। इनमें से कोई भी मुश्किल का सामना अगर आप भी कर रहे हैं तो अपने कंधों को सीधा करने और गर्दन और कंधों को आराम पहुंचाने के लिए ज़मीन पर सोना शुरू कीजिये।


रक्त का सही संचार –
अगर आप चाहते है कि आपके शरीर में रक्त का संचार सही तरीके से होता रहे तो ज़मीन पर सोने का विकल्प आज़माइये। ऐसा करने से शरीर और दिमाग का तालमेल सही रहता है और आपकी सेहत दुरुस्त होती है।


तनाव से दूरी –
दिन भर की थकान और तनाव को दूर करने का बेहतरीन तरीका है ज़मीन पर सोना क्यूँकि ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है, मन खुश रहता है और तनाव के साथ थकान भी दूर हो जाती है।


अनिद्रा का समाधान –
अगर आपको थकने के बाद भी अच्छी नींद नहीं आ पाती है तो आप ज़मीन पर सोना शुरू कीजिये। ऐसा करके आप एक बढ़िया नींद ले सकेंगे और उठने पर थकान और सिर दर्द की बजाये सुबह की ताज़गी महसूस करेंगे।


हो सकता है कि आपने आज तक ज़मीन पर सोने का विकल्प आज़माया न हो लेकिन अब आप जान चुके है कि ज़मीन पर सोना न केवल सेहत को अच्छा बनाता है बल्कि तनाव को दूर करके मन को भी शांत और खुश बनाता है। तो बस, देर किस बात की ! आज ही अपने शरीर की क्षमता के अनुसार ये तरीका अपनाकर देखिये और एक अच्छी सेहत पाइए।

मंगलवार, 8 अगस्त 2017

कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है

कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है


आपका लगातार वजन बढ़ रहा है तो सावधान हो जाइए। आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे छोटे-छोटे नुस्खे, जिन्हें अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत किए वजन को नियंत्रित कर सकते हैं:--
* पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर चपाती के साथ खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है।
* आधा चम्मच सौंफ को एक कप खौलते पानी में डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा तीन माह तक लगातार करने से वजन कम होने लगता है।
* पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।
* दही का खाने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
* छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
* ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
* केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
* सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है।
* आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं।‪#‎कमर‬ एकदम पतली हो जाएगी।
* मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
* लटजीरा या चिरचिटा के बीजों को एकत्र कर लें। किसी मिट्टी के बर्तन में हल्की आंच पर भूनकर पीस लें। एक-एक चम्मच दिन में दो बार फांकी लें, बहुत फायदा होगा।
* दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं। ऐसा करने से 1 माह के बाद ‪मोटापा‬ कम होने लगेगा।
* मालती की जड़ को पीसकर शहद मिलाकर खाएं और छाछ पिएं। प्रसव के बाद होने वाले मोटापे में यह रामबाण की तरह काम करता हैै।
* खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
* रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।
* गुग्गुल गोंद को दिन मे दो बार पानी में घोलकर या हल्का गुनगुना कर सेवन करने से‪#‎वजन‬ कम करने में मदद मिलती है।
* हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण 50 ग्राम परवल के जूस (1 गिलास) के साथ मिलाकर रोज लें, वजन तेजी से कम होने लगेगा।
* करेले की सब्जी खाने से भी वजन कम करने में मदद मिलती है। सहजन के नियमित सेवन से भी वजन नियंत्रित रहता है।
* सौंठ, दालचीनी की छाल और काली मिर्च (3 -3 ग्राम) पीसकर चूर्ण बना लें। सुबह खाली पेट और रात सोने से पहले पानी से इस चूर्ण को लें, मोटापा कम होने लगेगा।

मंगलवार, 9 मई 2017

पित्त की पथरी हो या कमर का दर्द, अपनाएं ये चमत्कारी उपाय!

पित्त की पथरी हो या कमर का दर्द, अपनाएं ये चमत्कारी उपाय!


स्वस्थ शरीर कड़ी मेहनत और सही खान पान से तो मिलता ही है, लेकिन कई बार चंद गलतियों हम पर भारी पड़ जाती हैं, जिसके कारण हमें ताउम्र परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आजकल लोगों में पथरी व कमर दर्द की समस्या आम हो गई है, ऐसे में जहां परेशानियों में इजाफा हुआ है, वहीं लोगों में थोड़ी बहुत सजगता भी बड़ी है। क्या आप जानते हैं? हम थोड़ा सा सजग रहकर इन समस्याओं से निजाद पा सकते हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सक राजकुमार के अनुसार इन दोनों समस्याओं के कई घरेलू उपाय हैं, जिनके प्रयोग से इस तरह की समस्याओं से आराम मिल सकता है। यहां हम आपको बता रहे हैं डॉ. राजकुमार द्वारा बताए गए घरेलू चमत्कारी उपचार...

पित्त की पथरी के घरेलू उपाय: 

1. गाजर और ककडी के रस को सौ मिलीलीटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
2. सुबह खाली पेट पचास मिली लीटर नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है। 
3. शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी व शकर युक्त पेय हानिकारक हैं। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
4) नाशपती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाए जाने वाले रसायनिक तत्वों से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।
5) विटामिन-सी यानि एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
6) पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रोल कम मात्रा में होता है और यह प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
7) तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
8) खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन सी गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है। 
9) रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है ।

कमर दर्द से बचने के ये हैं घरेलू उपाय:

1. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
2. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
3. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
4. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
5. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
6. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुजंगासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देखरेख में ही करने चाहिए।

शुक्रवार, 5 मई 2017

आपने नहीं सुना होगा लहसुन के दूध का ये चमत्कारी फायदा

आपने नहीं सुना होगा लहसुन के दूध का ये चमत्कारी फायदा


कमर दर्द से अक्सर लोग परेशान रहते हैं. साइटिका पेन में कमर से पैर की नसों तक दर्द जाता है और इससे अक्सर लोग परेशान रहते हैं.
इसके लिए लोग पेन किलर्स खाते हैं. हालांकि इस कमर दर्द को दूर करने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय हैं और इन्हीं में से एक है लहसुन के दूध का उपचार. यह एक पुराना तरीका है और नसों में आई सूजन को कम करके दर्द में राहत देता है.

कैसे काम करता है गार्लिक मिल्क 
लहसुन के दूध में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. यह दरअसल एक प्राकृतिक पेय है, जो कई वर्षों से आंत के परजीवियों को मारने और संक्रमण से लड़ने के लिए इस्तेमाल होता था. गार्लिक मिल्क में जरूरी पौष्ट‍िक तत्व जैसे विटामिन (A, B1 और C) मिनरल, पॉलीसैक्‍राइड्स, प्रोटीन, फ्लेवोनॉइड्स और एंजाइम्‍स होते हैं. ये चीजें बैक्‍टीरिया की वजह से शरीर की नसों में आई सूजन को कम करके कमर दर्द में राहत देती हैं.

कैसे करें तैयार 
लहसुन की बड़ी कलियां लेकर इनको छोटे टुकड़ों में काटें और एक गिलास दूध में उबाल लें. इससे लहसुन का अर्क दूध में मिल जाएगा. आप चाहें तो दूध में थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं. हालांकि इससे दूध का स्‍वाद नहीं बदलेगा.

अगर आप को दूध नहीं पचता है तो चावल, बादाम या सोया मिल्‍क का भी प्रयोग किया जा सकता है.

कैसे करें सेवन 
कमर के दर्द से तुरंत राहत के लिए लहसुन के दूध को रोज एक कप (250 ml) पिएं. एक साथ न ले सकें तो थोड़ा-थोड़ा करके लें. दर्द कम होने तक इसका रोज सेवन करें.

गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

लगातार हाई हील पहनने से शरीर को होने वाले ख़तरे

लगातार हाई हील पहनने से शरीर को होने वाले ख़तरे


“हाई हील पहनने से शरीर को होने वाले ख़तरे“ शायद इस वाक्य को महिलाएं गम्भीरता से न लें। यह इसलिए, क्योंकि हाई हील महिलाओं के फुटवियर का एक अहम हिस्सा है। अलग-अलग मौकों और ज़रुरत के अनुसार महिलाएं हील की चप्पल, सैंडल और जुतियां पहनती हैं। हालांकि, हील पहनने से पैरो समेत शरीर के कई अंगो पर क्या असर पड़ता है या उन्हें क्या समस्याएं हो सकती हैं, इसके बारे में महिलाओं को जानकारी नहीं होती। इस बात को अब डॉक्टर भी मानते हैं कि हील के नियमित प्रयोग से महिलाओं को घुटनों की समस्या समेत अनेकों प्रकार की समस्याएं होनी शुरू हो जाती है।

लगातार हाई हील पहनने से शरीर को होने वाले ख़तरे, निम्न हैं-

पैर- व्यक्ति के पैरों की बनावट शरीर का भार सहने और उन्हें खड़ा रखने के हिसाब से बनाई गई है। पैर पूरे शरीर को संतुलित रखते हैं। पैरों की मदद से चलने, दौड़ने, उचकने आदि कामो में हड्डी के ढाँचे (कंकाल) को झटके झेलने और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। जितनी लंबी हील होती है, पैरों पर उतना ही दबाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर; 4 इंच की हील पैर के अगले हिस्से पर शरीर के वज़न का 30% से अधिक दबाव डालती है। नियमित रूप से हील पहनने से, पैर को टेढ़ी स्थिति में रखना पड़ता है जिससे पैरों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। यहाँ तक कि इससे नाखूनों की बनावट भी बिगड़ने का डर रहता है।

टखने और पिंडलियां- हील पहनने की वजह से पैर अपनी प्राकृतिक स्थिति से कहीं अधिक कोण पर मुड़ जाते हैं। इस कारण पैरों और आस-पास के अंगो में रक्त संचार कम हो जाता है। लंबे समय तक हील पहनने से यह दबाव खून का सचार लगभग पूरी तरह रोक देता है, जिससे वहां मौजूद स्पेल स्पाइडर नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। हील पहन कर अधिक समय तक चलने से एचिलिस टैंडन पर जोर पड़ता है जिस से वह कड़ी हो सकती हैं।

घुटने- इंसान के शरीर में उसके घुटने सबसे बड़े जोड़ होते हैं। किसी शारीरिक काम में यह झुक कर एक शॉक एब्जॉर्बर (झटका सहन करने वाले) स्प्रिंग की तरह काम करते हैं। हाई हील से घुटनो पर अंदर की तरफ दबाव पड़ता है। अगर ऐसा लगातार होता रहे तो घुटनो को होने वाला नुक्सान ठीक नहीं किया जा सकता।

कूल्हे और कमर- हाई हील पहनने से महिला के कूल्हे और कमर पर अप्राकृतिक जोर पड़ता है। साथ ही हील पहनी महिला को एक ख़ास पोज़ में खड़ा रहना या चलना पड़ता है, जिनसे स्थाई कमर दर्द की समस्या हो सकती है।

हाई हील का इस्तेमाल करके मिली अतिरिक्त लंबाई हड्डियों के ढाँचे को नुक्सान करती है। जिस से हड्डी उतरने (डिसलोकेट) होना, टूटना और मांसपेशीयों को नुक्सान हो सकता है।

रविवार, 2 अप्रैल 2017

पीठ दर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो करें ये उपाय

पीठ दर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो करें ये उपाय


क्या आप पीठ दर्द की वजह से जमीन पर गिरी चीजें नहीं उठा पाते? क्या आपको देर तक बैठने में दिक्कत होती है? अगर हां तो आपको जरूरत है तुरंत अपने पीठ के दर्द की तरफ ध्यान देने की और इस परेशानी का इलाज ढूंढने की क्योंकि इन सर्दियों में आपकी पीठ का दर्द आपका जीना भी मुहाल कर सकता है। लेकिन घबराइए मत क्योंकि हम आपको बताएंगे कि कैसे आप इस बिन बुलाई बीमारी से आसानी से पीछा छुड़ा सकते हैं। 

तेज रफ्तार से बदलती जिंदगी ने सबकी लाइफस्टाइल बदल दी और इससे मिला पीठ का दर्द। पीठ का दर्द एक आम समस्या के रूप में देखा जाता है लेकिन शायद आप ये नहीं जानते कि अगर सर्दियों में इसे नजरअंदाज किया जाए तो ये बड़ी मुसीबत भी बन सकता है। 

मालूम हो कि रोजमर्रा के काम गलत ढंग से करने से कमर और पीठ का दर्द होता है। एक स्टडी के मुताबिक हर चार में से एक महिला और हर दस में से एक पुरुष कमर दर्द से पीड़ित है। जब हम गलत तरीके से लेटते हैं या बैठते हैं, तो संवेदनशील नाड़ियों और अन्य अंगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और बार-बार या लगातार इसके गलत प्रभाव के कारण पीठ के दर्द की शिकायत हो जाती है। पीठ का दर्द अपने आप में कोई रोग नहीं हैं, बल्कि कई रोगों या गलत आदतों से पैदा हुआ एक लक्षण मात्र है। इसलिए पीठ के दर्द को कभी भी नजर अंदाज न करें।


क्यों होता है पीठ का दर्द :
- सीधे न बैठना या चलना 
- जोड़ों का घिस जाना 
- किसी प्रकार की चोट लगने के कारण 
- अधिक बोझ पीठ पर लादकर चलना 
- रीढ़ की हड्डी का खिसक जाना 
- अधिक मोटापा 
- कमर में मोच आ जाना, खेलकूद या यात्रा करते समय बार-बार झटके लगना 
- बहुत अधिक मानसिक दबाव, तनाव, चिन्ता और थकावट। इससे पीठ की पेशियों में तनाव पैदा हो जता है जो कि पीठ दर्द का कारण बनता है 
- व्यायाम की कमी के कारण 
- ठीक ढंग से न सोना, फोम के गद्दे पर सोना व घंटों एक ही जगह बैठे रहना 
- संतुलित भोजन के अभाव में आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ शुरू होने वाले पीठ दर्द की शिकायत अब 20-40 वर्ष के उम्र में ही लोगों को होने लगी है। डॉक्टरों के अनुसार पीठ दर्द पीठ की मांसपेशियों, डिस्क और लिगमेंट्स से जुड़ी 26 हडि्डयों में से किसी पर भी असर डाल सकता है।


पीठ दर्द के लक्षण :
-पीठ के नीचले हिस्से या कमर में लगातार हल्का
-हल्का दर्द होना 
-शरीर में बहुत अधिक अकड़न तथा दर्द होता है -हल्की सी भी चोट लगने पर बहुत तेज दर्द होना ।

रोगी के कमर के नीचे के भाग में एक समान दर्द वाली अवस्था बनी रहती है डॉक्टरों की मानें तो आमतौर पर शारीरिक व्यायाम और सही मुद्रा का ध्यान रखकर पीठ दर्द की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन पीठ दर्द से निपटने के लिए शरीर को उचित पोषण मिलना भी जरूरी है। डॉक्टरों की राय में शारीरिक व्यायाम के साथ आहार का ध्यान रखना भी जरूरी है।

कैसे पाएं पीठ दर्द से छुटकारा :
-हमेशा सीधे बैठना और चलना चाहिए 
-आगे झुकने वाले आसन न करें और ज्यादा दर्द होने पर योग या व्यायाम न करें 
-ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर न बैठें। आधे-आधे घंटे के अंतराल पर उठकर थोड़ी देर टहल लेना चाहिए।
-कोई वजनदार चीज न उठाएं। अगर कभी कुछ वजनदार चीज उठाएं भी तो घुटनों को मोड़कर उठाएं ताकि कमर पर जोर न पड़े। 
-अपने भोजन में मछली, अनाज, लौकी, तिल और हरी सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद साबित हो सकता है। 
-इसके साथ ही विटामिन डी3 और विटामिन सी, कैल्सियम और फास्फोरस से भरपूर आहार भी पीठ दर्द में लाभकारी होता है।

पीठ में ज्यादा दर्द हो तो व्यक्ति को काम नहीं करना चाहिए और उसे आराम करना चाहिए। रोगी को ठोस बिस्तरे पर सोना चाहिए और उस अवस्था में बिल्कुल नहीं सोना चाहिए, जिस अवस्था उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ी रहे। इसके अलावा कभी भी अपनी मर्जी से दर्द निवारक दवाईयां न लें। लापरवाही न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

सोमवार, 13 मार्च 2017

जायफल के घरेलु उपचार आपको हैरान कर देंगे

जायफल के घरेलु उपचार आपको हैरान कर देंगे


आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है।

  1. सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।
  2. सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
  3. आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।
  4. दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
  5. फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।
  6. प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
  7. फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
  8. जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
  9. अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
  10. अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
  11. जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
  12. इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
  13. यह शक्ति भी बढाता है।
  14. जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
  15. जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।
  16. किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।
  17. बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
  18. चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
  19. चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
  20. आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
  21. अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
  22. कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
  23. जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  24. दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।
  25. पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आ जाएगा।
  26. जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।
  27. जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।
  28. एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।
  29. सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
  30. जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।
  31. दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें। इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।
  32. नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ दूर होती है।
  33. शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

एलोवेरा (घृतकुमारी) के 23 फायदे, नहीं जानते होंगे आप

एलोवेरा (घृतकुमारी) के 23 फायदे, नहीं जानते होंगे आप


एलोवेरा दुनिया के हर जगह पाया जाने वाला एक बेहद ही उपयोगी पौधा हैं.एलोवेरा ट्रॉपिकल रीज़न में पाया जाता हैं.एलोवेरा की खेती भी की जाती हैं जिससे कई प्रकार की दवाई ,सौन्दर्य प्रशाधन इत्यादी बनाइ जाती हैं.एलोवेरा हमारे जीवन शैली में कई प्रकार से उपयोग में आता हैं

एलोवेरा के स्वास्थ सम्बंधित 23 चमत्कारी फायदे

1. पेट के विकारों को ख़त्म करता हैं : पेट की किसी भी तरह की परेशानी हो, दर्द, ऐठन, कब्ज, अलसर, गैस, अपच, इत्यादी किसी भी प्रकार की रोगों के लिए घृतकुमारी (एलोवेरा ) हमारे लिए एक अदभुत औषधि के रूप में काम आता हैं. एलोवेरा के रस में निम्बू का रस और काली मिर्च मिला के पिने से फयदा होता हैं. पेट में अफारा हो गया हो और आराम नहीं मिल रहा हो तो घृतकुमारी के गुदे २० ग्राम सेवन करने से पेट को आराम मिलत हैं.

2. यकृत या लीवर की समस्याओं के निदान के लिए : यदि आपका लीवर कमजोर हो गाया हो ,दुर्बल हो गया हो ,कितने ही इलाज़ करवाया हो और कोइए फायदा न हुआ हो ,या फिर ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से भी लीवर दुर्बल हो जाता हैं.ऐसे में हमें प्राकृतिक रूप से एलोवेरा का उपयोग करना चाहिए .इसके लिए एलोवेरा के १ किलो ग्राम रस में १० ग्राम, काली मिर्च ,५० ग्राम काला नमक या सिंधा नमक और निम्बू का रस अधिक मात्रा में मिला कर मिश्रण तैयार कर ले और रोज सुबह खाली पेट इसे ले तो किसी भी प्रकार का लीवर की समस्या का समाधान हो जाता है.

3. आर्थराइटिस में उपयोगी हैं : अगर आपको आर्थराइटिस की समस्या हो तो एलोवेरा का उपयोग वैसे ही कर सकते हैं.कैसी भी समस्या हो आर्थराइटिस की आराम मिल जाता हैं. इसके लिए घृतकुमारी के रस या लड्डू का सेवन प्राय करते रहे ,आराम जरुर मिलेगा .

4. कान के दर्द में लाभकारी :  कान में दर्द हो रहा हो तो एलोवेरा का रस के कुछ बूंद जिसमे दर्द हो रहा हो उस कान में ना डाल के दुसरे कान में डाले.इसका फायदा ऐसे भी हो जाता हैं.

5. एलोवेरा शरीर के सूजन को कम करता हैं :  एलोवेरा का प्रतिदिन सेवन से शरीर में कही भी सूजन हो उसे जल्द से जल्द ठीक कर देता हैं.हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढाता हैं.

6. हार्मोनल बदलाव को भी ठीक करता हैं : आज कल महिलाओं में मासिक धर्म में कइ प्रकार की समस्या आती रहती हैं.किसी को स्त्राव ज्यादा होता हैं ,किसी को कम,किसी को देरी से आता हैं,दर्द भी होता ऐसे बहुत प्रकार के तकलीफ़ों से छुटकारा दिलाता हैं एलोवेरा का रस.एलोवेरा के सेवन से तन तंदुरुस्त हो जायेगा ,और हार्मोनल समस्या में भी आराम मिलेगा .एलोवेरा के रस या गुदे का प्रयोग करने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाले परेशानी से छुटकारा मिलत हैं.और मासिक धर्म सामान्य  हो जाता हैं.

7. खून की कमी में लाभदायक :  जिन माताओं ,और बहनों को खून की कमी हो उनको एलोवेरा का सेवन अवश्य करना चाहिए .इसके लिए एलोवेरा के रस में गेहूं का जवारा को लेके के इसका मिश्रण बाने और रोज सुबह इसे ले इससे हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता हैं और खून की कमी में आराम मिलता हैं.

8. खुनी बबासीर ( पाईल्स)  में लाभ :  जिनको भी खुनी बबासीर हो खून अधिक मात्रा में गिरता रहता हो तो उन्हें एलोवेरा का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए .एलोवेरा में इतनी क्षमता है की अगर खून रूक ही ना रहा हो तो एलोवेरा कइ पत्तों के छिलके निकल के उसमे गेरु मिलकर लंगोट की तरह पहने मात्र से खून का निकलना बंद हो जाता है.

9. पुरानी कब्ज को ठीक करता है ; पुराना कब्ज हो कैसा भी कब्ज हो एलोवेरा का जूस प्रतिदिन पिने से लाभ होता हैं .अरंडी के तेल में में घृतकुमारी का जेल मिला कर खाने से या पिने से कितना भी पुराना कब्ज हो आराम मिलता हैं.

10. बच्चों को कब्ज में फायदा : छोटे बच्चो को पॉटी करने में परेशानी हो रही हो ,स्टूल नहीं हो रहा हो,अगर हो भी रहा हो और बहुत तकलीफ से हो रहा हो तो ,ऐसे में एलोवेरा के रस में थोरा हिंग गर्म करके बच्चे के नाभि के आस पास लगाने से ,पॉटी आराम से हो जाता हैं.जब एलोवेरा बाहर से इतना असर करता हैं तो पीने से कितना फायदा हो सकता हैं.

11. खांसी में फायदा : अगर आपको खांसी हो गई हो और आराम नहीं मिल पा रहा हो तो घृतकुमारी के गुदे में काला नमक दाल कर चूसने मात्र से ही खांसी में बहुत आराम मिलता हैं.

12. स्तन में हुए गाँठ को भी ख़त्म करता हैं  : महिलाओं को अगर स्तन में गाँठ बन गइ हो तो घबराए नहीं ,कियूं की एलोवेरा हैं न आपके गाँठ को नष्ट करने के लिए खत्म करने के लिए. आप घृतकुमारी के पत्ते को ले ले उसको एक भाग से छिलका निकाल दे और उसे थोडा गर्म कर दे,और जहां गाँठ हो गया हो वहाँ बांध ले,ऐसा प्रतिदिन करने से आराम मिलत हैं और गाँठ भी नष्ट हो जाता हैं.और आराम मिलता हैं.

13. कमर दर्द में सहायक : कमर के दर्द या स्लिप डिस्क हो जाने पे भी घृतकुमारी के गुदे को खाए या उसकी रोटी बना कर या फिर लड्डू बना कर खाए तो कमर की किसी भी समस्या से निजात मिलता हैं.

14. खुजली में आराम दिलाता हैं ; अगर शरीर में किसी भी प्रकार की खुजली हो रही हो और आपको आराम नहीं मिल रहा हो तो आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं.इसको प्रयोग में कैसे लाना हैं ये बता दूँ ,एलोवेरा का रस निकाल ले उसमे नारियल तेल ,कपूर और गेरु मिलाकर मिश्रण तैयार कर ले और रोज सुबह सुबह पुरे शरीर में लगा ले ,कुछ देर रहने दे फिर पानी से साफ़ करले या नहा ले.शरीर की खुजली से बहुत आराम मिलेगा .चित्त पित्त में भी आराम दिलाता है.किसी भी प्रकार की त्वचा सम्बन्धी समस्या का एक ही इलाज़ हैं एलोवेरा .

15. कटने या जलने पर : अप कही कट फट जाये या जल जाये तो आप उसपे घृतकुमारी के गुदे को या उसके रस को उस जगह पे लगा ले देखिएगा जलन से आराम मिलेगा ही और फोरे भी नहीं आयेंगे .

16. एलर्जी में आराम :  अगर बच्चो को अक्सर एलर्जी की समस्या हमेशा होती हो तो ,आप घृतकुमारी का प्रयोग कर सकते हैं.एलर्जी में आराम दिलाती हैं.घृतकुमारी के रस या गुदा में काला तिल भुना हुआ और गुड लेकर उसका लड्डू बनाकर उसका प्रयोग कीजिये एलर्जी से आराम मिलेगा.

17. मूत्र विकार से भी आराम दिलाता हैं :  मूत्र समस्या आज कल प्रायः देखि जाती हैं.चाहे वो यूरिन इन्फेक्शन हो या बार बार मूत्र करने की इच्क्षा होती हो प्रोस्टेट ग्रैंड बढ़ गाया हो ,इन सबसे छुटकारा के लिए आप घृतकुमारी और गुड और भुने हुए काले तील का लड्डू बनाए और उसका सेवन करते रहे,आराम जरुर मिलेगा .

18. कैंसर के लिए भी बहुत उपयोगी हैं : घृतकुमारी के रस का सेवन सभी प्रकार के कैंसर को ख़त्म करने में हमारे शरीर को मदद करता हैं.घृतकुमारी में जितने भी विटामिन्स हैं सब पानी में घुलनशील होते हैं .जो आसानी से शरीर के द्वारा अबशोषित कर लिए जाते हैं.

19. बच्चो का बिस्तर पे पेशाब करना : कभी कभी बच्चे रात में बिस्तर पे पिशाब कर देते हैं या प्रायः कर देते हैं तो उसके लिए भी आप बच्चो को एलोवेरा का सेवन करने दे या लड्डू बना कर खाने को दे.इससे बच्चे बिस्तर पे पेशाब नहीं करेंगे और उसका पाचन तंत्र भी अच्छा रहता हैं.

20. आतों में संक्रमण या अल्सर में फयदा होता हैं : एलोवेरा आँतों के संक्रमान को नष्ट कर आराम दिलाती हैं.इसका सेवन नितप्रतिदीन करने से बहुत आराम मिलत हैं.इसका कोइए साइड इफ़ेक्ट नहीं होता हैं .

21. फ़ूड पोइसिनिंग या फ़ूड एलर्जी में भी आराम दिलाती हैं : जिसको फ़ूड पोइसिंग की समस्या होती हो या किसी भी खाने से एलर्जी होती हो तो घृतकुमारी के रस का सेवन करने मात्र से ही एन सब विकारों से निजात मिलता हैं.

22. डाइबिटीज भी कम करता हैं :  डाइबिटीज वालोन को एलोवेरा के रस या जेल का प्रयोग करते रहना चाहिए ,प्रयोग एक दिन का नहीं होना चाहिए इसे लगातार उपयोग में करना चाहिए.एलोवेरा डाइबिटीज को नियंत्रित रखता हैं.अतिरिक्त दवाई लेने की भी आवश्यकता भी नहीं होती .

23. एलोवेरा हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं साथ ही साथ H.I.V वायरस को नियंत्रित करती हैं

शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

इन योगासन से पाएं कुछ ही दिनों में कमर दर्द से निजात

इन योगासन से पाएं कुछ ही दिनों में कमर दर्द से निजात


आजकल की दिनचर्या में हम लोग 90 फ़ीसदी काम झुककर करते है जिसके कारण पीठ दर्द, सरवाइकल, कमर दर्द जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। इससे राहत पाने के लिेए हमलोग दवाओं का सहारा लेते है जिनसे हमें आराम तो मिल जाती है लेकिन दवा का प्रभाव खत्म होते ही दर्द पहले की भांति होने लगता है और इनका ज्यादा सेवन करने से हमे नुकसान भी पहुंचाती है। सामान्य दर्द को दूर करने के लिए दवा से बेहतर उपाय है योगा। सरवाइकल, कमर दर्द जैसी बीमारियां मकरासन और शयनासन योग के द्वारा आसानी से छुटकारा पा सकते है। इन योगा को हर उम्र के लोग कर सकते है।

मकरासन

मकरासन पेट के बल लेटकर किया जाता है। इस आसन में हमारे शरीर की आखिरी अवस्था की आकृति मगर यानि मगरमच्छ की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे मकरासन कहते है।

ऐसे करें
सबसे पहले पेट के बल लेट जाइए। दोनों हाथ को कोहनियों को मिलाकर स्टैंड बनाते हुए हथेलियों को ठोडी के नीचे लगाइए। छाती को ऊपर उठाइए। कोहनियों और पैरों को मिलाकर रखें। अब श्वास भरते हुए पैरो को क्रमशः पहले एक-एक तथा बाद में दोनों पैरों को एक साथ मोड़ना है। इसके बाद श्वास बाहर निकालते हुए पैरों को सीधा करें। यह आसान 20-25 बार करें।

फायदे
इस आसन से दमा रोग में काफी फायदा मिलता है क्योकि इसे करने से फेफड़े फैलते है जिससे इनके अंदर प्राणवायु अधिक मात्रा में अंदर जाती है और दूषित वायु बाहर निकलती है।
मकरासन सरल होते हुए भी स्लिप डिस्क, श्याटिका और सरवाइकल के दर्द में अच्छे परिणाम देता है क्योंकि मकरासन दो कशेरुकाओं के बीच के दबाव को कम करता है।

शयनासन

सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और दाएं पैर के घुटने को दाई तरफ मोड़ें जिससे घुटना छाती के पास आ जाए। अब दाई बाजू को भी कोहनी से मोड़ें और दाई हथेली को चेहरे के करीब रखें और गर्दन को भी दाई ओर मोड़ें और ज़मीन पर टिकाकर आंखें बंद कर लें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए। कुछ समय इसी अवस्था में रहने के बाद यही क्रिया बाई तरफ से करें और सांस सामान्य रखें।

फायदे
यह आसन करने से आंतों में हल्का खिंचाव महसूस होगा जिससे आंतों की हरकत बढ़ जाती है और कब्ज दूर हो जाएगा।
जब भी हम लेटकर पीछे झुकने वाले आसन करते हैं तो हर आसन के अंतराल में हमें शयनासन करना चाहिए। ऐसा करने से संतुलन बना रहता है।

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

इन 5 दर्द को भूल कर भी न करें इग्नोर, हो सकती है सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम

इन 5 दर्द को भूल कर भी न करें इग्नोर, हो सकती है सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम


कंधों में दर्द :

लम्‍बे समय तक कंधों में दर्द होना हार्ट डिजीज का संकेत हो सकता है। ऐसे में चक्‍कर आना और जबड़ों में दर्द जैसी प्रॉब्‍लम्‍स भी हो सकती है।

चेस्‍ट पेन :

कई बार ब्‍लड में ऑक्‍सीजन की कमी या एसिडिटी के कारण चेस्‍ट पेन होने लगता है। लेकिन यह प्रॉब्‍लम लंबे समय तक बनी रहे तो हार्ट डिजीज का संकेत हो सकता है।

सिर दर्द :

लम्‍बे समय तक पूरे सिर में दर्द होना माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन हेम्‍ब्रेज का संकेत हो सकता है। इसके साथ उल्‍टी भी हो सकती है।

पेट दर्द :

अगर पेट में नीचे की ओर दांई तरफ हो तो अपेन्डिक्‍स, उपर तरफ हो तो गॉल ब्‍लॉडर, बीच में दर्द हो तो पेन्क्रियाज, लोअर और बैक में दर्द हो तो किडनी स्‍टोन का संकेत हो सकता है।

कमर दर्द

लंबे समय तक कमर दर्द की शिकायत होना ट्यूमर किडनी स्‍टोन या स्लिप डिस्‍क का संकेत हो सकता है।

सोमवार, 28 नवंबर 2016

दर्द जिन्हें आपको अनदेखा नहीं करना चाहिये, शेयर करें

दर्द जिन्हें आपको अनदेखा नहीं करना चाहिये, शेयर करें


शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द और पीड़ा होना जीवन का अंग है। दर्द के प्रकार, लोग इन दर्दों से मुक्ति के लिये विभिन्न उपाय करते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इनसे मुक्ति के कई उपाय ढूढ़े गये है लेकिन कुछ लोग इस दर्द को जानबूझकर अनदेखा करते हैं। कुछ दर्द इस प्रकार के होते है कि जिन्हे अंदेखा नहीं करना चाहिये। यह शुरूआती हो सकता है जो बाद में भयानक हो जायेगा। दर्द के घरेलू उपाय, अगर कोई दर्द नियमित तकलीफ दे रहा है तो तुरंत सतर्क हो जायें।

दर्द के कुछ प्रकार :

बिजली की कड़क जैसा दर्द 

यह सभी को होने वाला सामान्य दर्द है। कुछ ही घण्टों में यह खत्म हो जाता है। इस स्थिति में बाम का प्रयोग होता है अगर लम्बे समय तक रुकता है तो नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर सम्पर्क करें।

दांत दर्द 

आजकल कई लोग दांतों की समस्या से परेशान होते हैं। आपके दांतों को उखाड़ने की प्रक्रिया तब पूरी की जानी चाहिए जब आपका दांत बिल्कुल भी काम ना कर रहा हो और इसे बदलना आवश्यक हो। सबसे पहले अपने दन्त चिकित्सक से संपर्क करें और इसके बाद ही दांत निकलवाने की सोचें।

दांतों से चबाने के दौरान हो रही समस्या का भी ख्याल रखा जाना काफी ज़रूरी है। अगर आप अपने दांतों का अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो दांतों का दर्द बढ़ेगा और आपको रात में चैन से नींद नहीं आएगी। बिना किसी समस्या के स्वस्थ दांत पाने के लिए अपने दन्त चिकित्सक से नियमित रूप से जांच करवाएं।

दांत के दर्द को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिये। कभी कभी दांत दर्द के कारण आपके पूरे मुंह में सूजन आ जाती है। इसके कारण सुरक्षा करने वाले एनैमल भी खत्म हो जाता है और दांत जड़ से  टूट जाता है। इस समस्या का पता केवल दंत चिकित्सक के पास जाने से होगा।

मासिक धर्म ऐंठन 

नियमित रजोधर्म में सभी लड़कियों और महिलाओं में यह प्राकृतिक दर्द सामान्य है। किंतु असहनीय दर्द गर्भाशय के असामान्य वृद्धि के कारण हो सकता है। इससे एंडोमेट्रिऑसिस का खतरा उत्पन्न हो सकता है जो जनन क्षमता को प्रभावित करता है। डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां उपलब्ध करा देगा अगर आप ऐसी शारीरीक परिस्थिति को बताते हैं।

अगर यह दर्द असहनीय हो जाए तो आपको दवाई की आवश्यकता होती है। कई बार गर्भाशय के अपनी सामान्य जगह से अलग दूसरी जगह बढ़ने से भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। शोध के अनुसार 40% से ज़्यादा महिलाएं जिन्हें मासिक धर्म की दर्दभरे ऐंठन का शिकार होना पड़ता है, इस खतरनाक समस्या से ही पीड़ित होती हैं। आप चाहें तो शल्य क्रिया के दौरान यह कोशिका निकाली जा सकती है।

कंधों पर तेज़ दर्द 

यह बात सही है कि दिल का दौरा आने से पहले लोगों की छाती में दर्द होता है। पर करीब 30% लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें छाती में दर्द हुए बिना ही ह्रदय का दौरा पड़ जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि उन्हें दिल के दौरे के कोई भी लक्षण पता नहीं चलते।

कंधों पर उठने वाले दर्द को प्राय: लोग तनाव का कारण बतलाते हैं। लेकिन यह विपत्तीयों को आने का मौका देती है। शोधों में यह पाया गया है कि ये हृदय आघात होने का कारण हो सकते हैं। दर्द का इलाज, महिलाओं में भी कंधों का दर्द प्राय: पाया जाता है। इसके साथ चक्कर, जबड़ों में दर्द हो सकता है। अगर आपको ऐसे कुछ लक्षण है तो तुरंत देखभाल आवश्यक होगी।

निचले पेट में दर्द 

पेट दर्द के शुरू होने के कई कारण हो सकते है जो आंतों की अनियमित गति से लेकर किडनी की पथरियों के कारण हो सकता है। किसी भी पेट दर्द को हल्का नही समझना चाहिये, कुछ विशेष पेट दर्द के लिये चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। अगर आपको निचले पेट के दाहिनी तरफ दोहरा दर्द हो तो यह अपेंडिक्स की समस्या हो सकती है। अगर आप प्रारम्भिक स्तर पर ध्यान नहीं देते है तो अपेंडिक्स फटने का मौका हो जायेगा। इससे आपका खून भी प्रभावित हो सकता है।

दर्द के कारण, अपेंडिक्स का पता पेट के नीचले हिस्से को दबाने या घुटने को सिर के पास लाने पर दर्द होने के द्वारा चलता है।

बुखार के साथ पीठ दर्द 

अगर आपको बुखरा के साथ पीठ दर्द हो रहा है तो यह समय इस बात का अनुमान लगाने का है कि आप किडनी के संक्रमण से पीड़ित है। इसके अन्य लक्षण चक्कर आना है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बैक्टीरिया व्यक्तियों की पेशाब नली में चला जाता है और संक्रमण को और भयंकर बना देता है। दर्द से राहत, आपको पेशाब करते समय  बहुत दर्द की अनुभूति होती है। अगर ऐसा दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाकर इलाज़ के लिये पूछना चाहिये।

पिंडलियों पर टहलने वाला दर्द 

अगर आपको पैरों की पिंडलियों की मांसपेशियों पर बार बार दर्द हो रहा है तो यह डीवीटी या डीप वेन थ्रोम्बॉसिस बिमारी का लक्षण हो सकता है। ऐसा तब होता है जब आपकी नसों में खून के थक्के उपस्थित हो जाते हैं। अगर आपको लाल निशान के साथ गर्म स्पर्श मह्सूस होता है तो यह ऐसा होने का एक कारण हो सकता है। ऐसा देखा गया है कि डीवीटी ऐसे लोगों के ऊपर प्रभाव छोड़ता है जिन्होंने हाल ही में हवाई सफर, जन्म को नियंत्रित करने वाली गोलियों का उपभोग या एक लम्बी कार यात्रा किया हो। दर्द से छुटकारा, लेकिन, आप एक या दो दिनों तक रूक सकते है जब तक कि आपका पैर बहुत अधिक सूजे और हिलाने पर लगातार दर्द बना रहे। लेकिन अगर आपको लगातार दर्द बना रहे तो यह समय डॉक्टर से तुरंत मिलने का है। अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया गया तो इससे थक्के का आकार बढ़ सकता है और एवं यह फट भी सकता है।

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

जानिए किस रोग में कौन सा आसन करें, शेयर करें

जानिए किस रोग में कौन सा आसन करें, शेयर करें


रोग मुक्त होना है, तो हमें योग की शरण में जाना ही होगा। योग का मतलब है योगासन। इसलिए बच्चों से अनुरोध है कि वे आसन करें, निरोग रहें और खुश रहें 
  1. पेट की बिमारियों में- उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन।
  2. सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन।
  3. मधुमेह- पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन।
  4. वीर्यदोष- सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा।
  5. गला- सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन।
  6. आंखें- सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन।
  7. गठिया- पवनमुक्तासन, पद्ïमासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन।
  8. नाभि- धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन।
  9. गर्भाशय- उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन।
  10. कमर दर्द - हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन।
  11. फेफड़े- वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन।
  12. यकृत- लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन।
  13. गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में- उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन।
  14. दमा- सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन।
  15. अनिद्रा- शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रासन।
  16. गैस- पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन।
  17. जुकाम- सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन।
  18. मानसिक शांति के लिए- सिद्धासन, योगासन, शतुरमुर्गासन, खगासन योगमुद्रासन।
  19. रीढ़ की हड्डी के लिए- सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, शतुरमुर्गासन करें।
  20. गठिया के लिए- पवनमुक्तासन, साइकिल संचालन, ताड़ासन किया करें।
  21. गुर्दे की बीमारी में- सर्वांगासन, हलासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन करें।
  22. गले के लिए- सर्पासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा करें।
  23. हृदय रोग के लिए- शवासन, साइकिल संचालन, सिद्धासन किया करें।
  24. दमा के लिए- सुप्तवज्रासन, सर्पासन, सर्वांगासन, पवनतुक्तासन, उष्ट्रासन करें।
  25. रक्तचाप के लिए- योगमुद्रासन, सिद्धासन, शवासन, शक्तिसंचालन क्रिया करें।
  26. सिर दर्द के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, शतुरमुर्गासन करें।
  27. पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए- यानासन, नाभि आसन, सर्वांगासन, वज्रासन करें।
  28. मधुमेह के लिए- मत्स्यासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, हलासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन करें।
  29. मोटापा घटाने के लिए- पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, नाभि आसन करें।
  30. आंखों के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
  31. बालों के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, शतुरमुर्गासन, वज्रासन करें।
  32. प्लीहा के लिए- सर्वांगासन, हलासन, नाभि आसन, यानासन करें।
  33. कमर के लिए- सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रासन करें।
  34. कद बड़ा करने के लिए- ताड़ासन, शक्ति संचालन, धनुरासन, चक्रासन, नाभि आसन करें।
  35. कानों के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
  36. नींद के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, नाभि आसन करें।

 विशेष- प्रत्येक आसन खुली हवा में सुन्दर और सुहावने स्थान पर नियमित किया करें।

योग कहां और कैसे करें?

यह तथ्य तो हजारों वर्षों से प्रमाणित होता आ रहा है कि योग हमें स्वस्थ तन और सुंदर मन देता है। योगासन इसी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज तो सारा विश्व की योगमय होता जा रहा है। योग हो या भोग- रोग दोनों में ही बाधक होता है। इन दोनों क्रियाओं को करने के लिए हमारे शरीर का रोगमुक्त होना परम आवश्यक है। रोग मुक्त होना है, तो हमें योग की शरण में जाना ही होगा। योग का मतलब है योगासन। इसलिए बच्चों से अनुरोध है कि वे आसन करें, निरोग रहें और खुश रहें। खुली एवं ताजी हवा में योगासन करना सबसे अच्छा माना जाता है। अगर ऐसा न हो, तो किसी भी खाली जगह पर आसन किए जा सकते हैं। जहां योगासन करें, वहां का माहौल शांत होना चाहिए। वहां शोर-शराबा न हो। उस स्थान पर मन को शांत करने वाला संगीत भी हल्की आवाज में चलाया जा सकता है। सीधे फर्श पर बैठकर योगासन न करें। योगा मैट, दरी या कालीन जमीन पर बिछाकर योगासन कर सकते हैं। योगासन करते समय सूती के या थोड़े ढीले कपड़े पहनना बेहतर रहता है। टी-शर्ट या ट्रैक पैंट पहनकर भी योगासन कर सकते हैं। आसन धीरे या फिर तेजी से दोनों तरह से करना फायदेमंद होता है। जल्दी करें तो वह दिल के लिए अच्छा रहता है। और धीरे करेंगे तो वह मांसपेशियों के लिए बेहतर रहता है। तथा इससे शरीर को भी काफी मजबूती मिलती है। ध्यान आंखें बंद करके करें। ध्यान शरीर के उस हिस्से पर लगाएं जहां आसन का असर हो रहा है।, जहां दबाव पड़ रहा है। पूरे भाव से करेंगे, तो उसका अच्छा प्रभाव आपके शरीर पर पड़ेगा। योग में सांस लेने एवं छोड़ने की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसका सीधा-सा मतलब यही होता है। कि जब शरीर फैलाए या पीछे की तरफ जाएं, सांस लें और जब भी शरीर सिकुड़े या फिर आगे की तरफ झुकें तो सांस छोड़ते हुए ही झुकें। 

रविवार, 23 अक्तूबर 2016

नंगे पैर सैर करने के ये 5 फायदे जानकार आप जूते पहनना भूल जायेगे !

नंगे पैर सैर करने के ये 5 फायदे जानकार आप जूते पहनना भूल जायेगे !


जब भी हम वॉक करने के लिए या फिर पैदल चलने के लिए घर से निकलते हैं तो अपने पैरों में जूते या फिर चप्पल पहनते हैं. घर से बाहर निकलते वक्त हम हमेशा अपने पैरों में जूते-चप्पल पहनकर ही निकलते हैं ताकि सड़क की धूल-मिट्टी हमारे पैरों को गंदा न कर दे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नंगे पैर सैर करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. इतना ही नहीं हमारे बड़े बुजुर्ग भी यही कहते हैं कि नंगे पैर घास पर टहलने से आंखों की रौशनी बढ़ती है और ये सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. अगर हम रोज़ाना थोड़ा सा वक्त निकालकर नंगे पैर सैर करने की आदत को अपना लें तो बहुत सी बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं.

आइए हम आपको बताते हैं नंगे पैर सैर के फायदे –


1 – पैरों को मिलता है ऑक्सीजन :

दिनभर पैरों को जूते या चप्पलों में पैक रखने से पैरों में थकान और दर्द महसूस होने लगती है. ऐसे में नंगे पैरों से खुली हवा में थोड़ी देर सैर करने से पैरों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है और उनमें रक्त का संचार भी बेहतर तरीके से होता है.

2 – कई बीमारियों से मिलती है निजात :

जब भी हम नंगे पैर पैदल चलते हैं तब हमारे पैरों के पंजों का निचला भाग सीधे धरती के संपर्क में आता है, जिससे एक्युप्रेशर के ज़रिए सभी भागों की एक्सरसाईज होती है और कई तरह की बीमारियों से निजात मिलती है.

3 – मांसपेशियां होती हैं सक्रिय :

नंगे पैर पैदल चलने से हमारे शरीर की वो सारी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं, जिनका इस्तेमाल जूते-चप्पल पहनने के दौरान नहीं होता है. नंगे पैर सैर करने से पैरों के अलावा, उससे जुड़े सभी शारीरिक भाग सक्रिय हो जाते हैं.

4 – बॉडी पोश्चर रहता है ठीक :

नंगे पैर ज़मीन पर चलने से बॉडी पोश्चर सही रहता है. इससे कमर भी सीधी रहती है, जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बहुत सी परेशानियां दूर हो जाती हैं.

5 – जवानी रहती है बरकरार :

रोज सुबह कुछ दूर नंगे पैर टहलकर हम खुद को लंबे समय तक जवान बनाए रख सकते हैं. नंगे पैर चलने से शरीर में प्राकृतिक रूप से उर्जा बनी रहती है. जिससे मानसिक तनाव कम होता है और दिमाग भी शांत होता है.

ये है नंगे पैर सैर के फायदे – गौरतलब है कि नंगे पैर सैर करने से प्राकृतिक तौर पर धरती की उर्जा पैरों के जरिए हमारे पूरे शरीर तक पहुंचती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इसलिए अपने डेली रूटीन में नंगे पैर कुछ देर तक पैदल चलने की आदत को हमें ज़रूर शामिल करना चाहिए.

शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

10 मुनक्का रोज खाएंगे तो ये बीमारियां खत्म हो जाएंगी

10 मुनक्का रोज खाएंगे तो ये बीमारियां खत्म हो जाएंगी


मुनक्का यानी बड़ी दाख को आयुर्वेद में एक औषधि माना गया है। बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-
  • शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।

  • 250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।
  • मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।
  • जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।
  • जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।
  • सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें |