अपच लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अपच लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 20 जुलाई 2020

 गिलोय के फायदे, नुक्सान और प्रयोग का तरीका

गिलोय के फायदे, नुक्सान और प्रयोग का तरीका



गिलोय ( giloy ) एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।

इसका वानस्पिक नाम( Botanical name of giloy) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (Tinospora Cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…

गिलोय के फायदे – ( Benefits of Giloy )

गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

Giloy Immunity Booster

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार

Giloy use in Fever

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए

giloy for diabetes

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।

पाचन शक्ति बढ़ाती है


यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।

कम करती है स्ट्रेस

गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायदेमंद

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम

गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

बाहर निकलेगा कान का मैल

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी

गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।

यौनेच्छा बढ़ाती है गिलोय

आप बगैर किसी दवा के यौनेच्छा बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय का सेवन कर सकते हैं। गिलोय में यौनेच्छा बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं, जिससे यौन संबंध बेहतर होते हैं।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….

जवां रखती है गिलोय

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।

बालों की समस्या भी होगी दूर

अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें:-

अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…

गिलोय जूस

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।

काढ़ा

चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।

गिलोय वटी

बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।

साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम

अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान

वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए।पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय का प्रयोग ना करने दें आप .

एक निवेदन :- अभी वर्षाऋतु का काल है अपने घर में, बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें एवं स्वजनों को भी देवें. यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय अवदान है ।

सोमवार, 15 जनवरी 2018

कैंसर से लेकर मोटापे तक कई बिमारियों को खत्म करता है गुलाब

कैंसर से लेकर मोटापे तक कई बिमारियों को खत्म करता है गुलाब


प्यार को इजहार करने या फिर किसी रूठें को मनाने के लिए अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है तो वह है, गुलाब। जी हां गुलाब वो प्यारा सा फूल है, जो शायद दो दिलो को जोड़नें के काम आता है, वैसे तो इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता किसी को गिफ्ट देते समय ही आती है लेकिन क्या आपको पता है गुलाब के कई प्रकार के कार्य है जिनसे लोग अभी भी अनजान है। दुनिया भर में गुलाब की पत्तियों का उपयोग कई प्रकार की डिशेज बनाने में किया जाता है। इसके अलावा भी गुलाब की पत्तियां हेल्थ और शरीर के लिए भी काफी गुणकारी मानी जाती है। सुनकर चैंक गए ना ! लेकिन यह सत्य है। आज हम आपको गुलाब की पत्तियां के हेल्थ से जुड़ें हुए फायदों के बारें में बताने जा रहें है जिनके बारें में शायद आप भी वर्षो से अंजान रहें है.

आज की दुनिया में लोग सबसे ज्यादा मोटापे और उनसें जुड़ी हुई बिमारियों से परेशान है और ना जाने मोटापें को कम करने के लिए कितने ही प्रकार के उपयोग और प्रयोग करते रहते है। लेकिन क्या आपको पता है गुलाब से भी मोटापा कम किया जा सकता है !! दरअसल, गुलाब की पंखुड़ियों को रोजाना खाने से शरीर का मेटाबाॅलिज्म बढ़ता है जो शरीर के अंदर अनावश्यक चर्बी को नष्ट करने का कार्य करता है और इससे वजन कम करने में भी काफी मदद मिलती है।
इंसान सबसे ज्यादा अपने चेहरें से प्यार करता है खासतौर पर लड़कियां। आजकल सभी अपने चेहरें पर होने वालें पिंपल्स, दाग, झुर्रियों से बचना चाहते है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुलाब कि पंखुड़ियों में इन सभी परेशानियों का इलाज छिपा हुआ है। गुलाब की पंखुड़ियों को रोजाना चेहरें पर मलने से बाॅडी में मौजुद टाॅक्सिंस दूर होते है। इससे चेहरें और स्किन से जुड़ी हुई कई बिमारियों को ठीक करने में मदद मिलती है।
कई लोग यूरिन यानि पेशाब से जुड़ी परेशानियों को नजरंदाज कर देते है। जिससे भी कई बड़ी बिमारियों का जन्म लेना स्वभाविक है, ऐसे में किसी को भी यूरिन से जुड़ी बिमारियों को हल्के में नही लेना चाहिए। वैसे अगर इंसान रोज या सप्ताह में कुछ दिन भी गुलाब की पत्तियों का सेवन करें तो वह यूरिन से जुड़ी परेशानियों से बच सकत है, क्योकि गुलाब की पंखु़ि़ड़यों में डाइयूरेटिक गुण मौजूद होते है, जो शरीर पेशाब का पीला होना, पेशाब के दौरान जलन होना जैसी बिमारियों से मदद करता है।
जरा सा भी ज्यादा खाने या फिर किसी भी प्रकार की अपच के कारण शरीर का डाइजेशन खराब हो जाता है। जिससे पाइल्स जैसी बिमारियों का जन्म होता है। लेकिन अगर व्यक्ति रोज कुछ गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें तो वह डाइजेशन बिमारियों से तो बच ही सकता है इसके अलावा कब्ज और पाइल्स से भी अपना बचाव कर सकता है, क्योकि गुलाब की पंखुड़ियों में काफी मात्रा मे फाइबर पाया जाता है, जो इन रोगो को नष्ट करने में मदद करता है।

आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान अपने कामकाज के बोझ में ही दबकर रह जाता है और उसके शरीर की एनर्जी बिलकुल खत्म ही हो जाती है। लेकिन अगर इंसान अपनी एनर्जी को बरकरार रखना चाहता है तो उन्हें गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए। दरअसल, गुलाब की पत्तियों में विटामिन सी पाया जाता है, जिनके रोज खाने से शरीर को एनर्जी मिलती ही है और दिनभर इंसान को एक्टिव बनाए रखने में भी मदद करता है।

वैसे तो आप सभी को भी पता ही होगा कि कैंसर की बिमारी कितनी खतरनाक और जानलेवा है। कैंसर का इलाज संभव है और अगर इंसान अपने इलाज के साथ-साथ गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें तो वह कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। दरअसल, गुलाब की पंखुड़ियों में पाॅलीफेनाॅल्स होते है, जो कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों से बचाने में मदद करती है।

चोट लगने पर शरीर पर होने वालें जख्म जल्दी नही भरते है लेकिन सिर्फ गुलाब की पंखुड़ियों के इस्तेमाल से आप भी जख्मों को जल्दी भर सकते है। क्योकि गुलाब की पंखुड़ियों में एंटीसेप्टिक गुण होते है जो घाव को जल्दी भरने में और ठीक करने में मददगार है।

गुलाब की पंखुड़ियां वैसे तो कई गुणों से भरपूर है लेकिन इसके साथ ही यह कई प्रकार की बिमारियों के बढनें और इन बिमारियों के इनफेक्शन को खत्म करने में भी मदद करता है। दरअसल, गुलाब की पंखुड़ियों को रोज खाने से बाॅडी की इम्यूनिटी बढ़ती है जो शरीर के अंदर के मौजूद किटाणुओं को नष्ट करने और कई प्रकार की बिमारियों से बचाने में इफेक्टिव है।

एक निश्चित आयु सीमा के बाद से इंसान के शरीर में बदलाव शुरू हो जाते है और फिर शरीर ज्यादा जटिल बन जाता है इसके साथ ही अगर ढलती उम्र का सबसे ज्यादा असर कहीं देखने को मिलता है तो वह है पैर के घुटनें। जी हां पैर के घुटनें के साथ-साथ शरीर के किसी भी जोड़ के दर्द को खत्म करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन गुलाब की पंखुड़ियों में एंटी इंफ्लंमेटरी की भरपूर मात्रा होती है तो जोड़ों के दर्द को ठीक करने में काफी मददगार है।

शहरों में बढ़तें प्रदुषण की मार के कारण सांस से जुड़ी हुई कई प्रकार की बिमारियां पैदा होती है। इससे अस्थमा तक होने का डर रहता है। ऐसे में इंसान को गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए क्योकि गुलाब की पंखुड़ियों में एंटी बैक्टिरियल तत्व मौजूद होते है जो सांस से जुड़ी हुई बिमारियों को खत्म करने और उनके इनफेक्शन से बचाने में काफी मदद करता है।

सोमवार, 13 नवंबर 2017

जानिए भोजन के बाद सौंफ खाने के है इतने सारे फायदे

जानिए भोजन के बाद सौंफ खाने के है इतने सारे फायदे


स्‍वस्‍थ शरीर के लिए यह जरूरी है की आपका पाचन सही हो, यदि पाचन तंत्र में कोई गड़बड़ी होती है तो हमारे शरीर में तमाम तरह की समस्‍याएं आने लगती हैं जैसे गैस की समस्या, एसिडिटी, कब्‍ज, डायरिया, अपच आदि। मगर कुछ घरेलु नुस्खों को अपनाकर आप अपने पेट को गैस, अपच जैसी बीमारियों से बेहद आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। यदि आप खाना खाने के बाद कुछ खास चीजों का सेवन से आपका स्वास्थ्य और पेट दोनों को एकदम दुरुस्त रख सकते है।

अक्सर हम जब भी किसी रेस्तरा से खा कर निकलते है तो हम सौंफ खाते है, आप कहते तो जरूर है मगर क्या आपने सोचा है की सौंफ ही क्यू दिया जाता है, उसके अलावा कुछ और क्यो नहीं। इसके पीछे एक बड़ी वजह है, असल मे इससे हमारा पाचन शक्ति मजबूत होता है, मुंह की दुर्गंध कम होता है। सांस और ह्दय संबंधी बीमारी से भी छुटकारा मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ को खाना खाने के बाद हर हाल में लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर में वजन कम करने में भी मददगार साबित होता है। कहा जाता है की सौंफ के साथ मिश्री लेना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि सौंफ में विटामिन सी, पोटेशियम, मैंगनीज, लोहा, फोलेट और फाइबर शामिल है।

सौंफ खाने के फायदे जानकार आप भी हैरान हो जायेंगे क्योंकि इसमे इतनी सारी खूबिया है की आप इसे चाह कर भी मना नहीं कर पायेंगे।अगर देखा जाए तो इसमें जीवाणुरोधी और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पीड़ादायक मसूड़ों को शांत करने में सौंफ काफी सहायक होता है। बात करे तो सौंफ एक तरह से माउथ फ़्रेश्नर की तरह है, इससे मुंह की बदबू दूर होती है। सौंफ के बीज में अपच, सूजन और पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से पेट में दर्द और पेट के अंदर सूजन से राहत मिलती है।

आपको बता दे की सौंफ से पेशाब की रुकावट भी दूर होती है इसलिए कहा जाता है की सौंप की चाय पीने से पेशाब के रास्ते की सभी समस्या दूर हो जाती है। आंखों की सूजन कम करने के लिए भी सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी-खांसी, फ्लू और साइनस से श्वसन तंत्र के संक्रमण से राहत दिलाने में भी यह मददगार साबित होता है। आपको बता दे की यह पोटेशियम का अच्छा स्त्रोत है, बीपी को कम करता है। विटामिन सी एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, यह ह्दय रोग से बचाता है। यह भूख को कम करता है, सौंफ का ताजा बीज प्राकृतिक वसा नाशक के रूप में कार्य करता है इसलिए इसके इस्तेमाल से वजन घटता है।

सोमवार, 3 जुलाई 2017

क्या करें जब हो जाए बदहजमी, शेयर करें

क्या करें जब हो जाए बदहजमी, शेयर करें


एसिडिटी कहें, अपच कहें, बदहजमी कहें या कुछ और, एक बार हो जाए तो फिर कहीं चैन नहीं मिलता। यह कोई ऐसी गम्भीर समस्या नहीं है कि हम तुरंत डॉक्टर के पास भागें। इसलिए ज्यादातर लोग घर पर ही इसके ठीक होने को उचित समझते हैं। इसमें कुछ गलत भी नहीं है, लेकिन स्वयं यह ठीक होने में कुछ वक़्त ले सकती है और तब तक आपको उस अप्रिय फीलिंग को सहन करना पढ़ सकता है। यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताए गए हैं जिन्हे आप घर पर ही अपनाकर इस समस्या से जल्द से जल्द छुटकारा पा सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय हैं 

मसालेदार खाने से परहेज करें 
ऐसा खाना बिलकुल त्याग दें जिनमें तेल, मिर्च और मसाले अधिक मात्रा में हों। ऐसे आहार आपकी एसिडिटी की समस्या को बड़ा सकते हैं और पेट में जलन का कारण भी बन सकते हैं। इसके बजाय हल्के फुल्के भोजन जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया इत्यादि का सेवन करें।

खाने के बीच में पानी पीना या कोई अन्य पदार्थ लेना टालें 
कुछ लोगों की आदत होती है वो खाने के बीच में 1 से 2 गिलास पानी पी जाते हैं, वहीँ कुछ लोग खाने के साथ या तुरंत बाद चाय, कॉफी या सोडा पीना पसंद करते हैं जो बिलकुल गलत है। खाना खाने के तुरंत बाद आपके डायजेशन सिस्टम में खाना पचाने के लिए कुछ ख़ास एंजाइम निकलते हैं और तुरंत या साथ में पानी या अन्य कोई लिक्विड लेने से यह एंजाइम उस तरल में घुल कर पतले हो जाते हैं जिससे खाना या तो पचता ही नहीं है या कठिनाई से पचता है। इसलिए कहा गया है कि खाने के लगभग 30 मिनिट बाद पानी और कुछ तरल लेना चाहिए।

धीरे और खूब चबाकर खायें 
अगर आप जल्दी में खाना खा रहे हैं, या यह आपकी आदत में  है तो इस आदत को तुरंत बदल दें। खाते समय बात करना भी आपकी बदहज़मी का कारण हो सकता है क्योंकि बात करते हुए आप अक्सर बड़े कौर बगैर ठीक चबाये निगलते हैं जो आपकी  इस समस्या को बढ़ा सकता है। इसीलिए आराम से धीरे धीरे एक निवाले को कम से कम 32 बार चबाकर खायें और चबाते वक़्त बात न करें | अगर आप वजन कम करने की कोशिश में हैं वहां यह आदत खूब कारगर है।

रात के खाने और सोने के बीच में कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें 
खाना खाने के बाद लगभग एक घंटा हलकी चहलकदमी करें। कोई भारी एक्टिविटी न करें। कुछ देर के लिए वज्रासन में बैठें।  यही एक ऐसा आसान है जो खाने के बाद किया जा सकता है और खाने को पचने में सहायक है। सोने जाने से कम से कम 2 घंटे पहले खाना खा लें |

कुछ घरेलू उपाय

पेपरमिंट या पुदीना का सेवन  
पुदीना बदहज़मी से तुरंत राहत देता है। इसलिए इस स्थिति में पुदीना की पत्तियों को पानी में उबाल कर उनका सेवन इस समस्या से छुटकारा देता है। यह कैप्सूल या ग्रीन टी के रूप में मार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं। इसे आप कैप्सूल या लिक्विड, दोनों में से किसी भी रूप में ले सकते हैं। यह सीने में जलन और बदहजमी के कारण होने वाली बेचैनी में तुरंत राहत देता है। इसे पीने के 1 से 2 टैब्लेट्स पानी साथ और अगर लिक्विड है तो  कम से कम 1 चम्मच आधे कप पानी में मिलाकर पियें।

हर्बल चाय या काढ़ा पियें 
पिपरमिंट, अदरक और दालचीनी पेट की समस्यायों के लिए बहुत कारगर होती हैं | आप इन्हें दुकान से खरीदे हुए टी बैग के रूप में या फिर सूखे रूप को पानी में उबाल कर भी सेवन कर सकते हैं | बिना चीनी डाले थोड़ा स्वाद बढ़ाने के लिए शहद या नीम्बू भी डाल सकते हैं | बाजार में उपलब्ध कैमोमाइल टी भी आप इस समस्या से निजात पाने के लिए पी सकते हैं।

प्रो-बायोटिक्स का सेवन अधिक करें 
दही प्रोबायोटिक्स का सबसे उम्दा स्त्रोत माना जाता है। यह वो बैक्टीरिया होते हैं जो आपके हाजमे को ठीक रखने में मददगार होते हैं। पेट में इनकी कमी आपके खाने को सही से नहीं पचने देती और आपको बदहजमी महसूस होने लगती है | बदहज़मी होने पर केले के साथ दही का सेवन करें, आराम होगा। फर्मेन्टेड फ़ूड जैसे इडली और आयल फ्री डोसा भी इसके अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं। 

एप्पल साइडर विनेगर पीयें 
हालाँकि एप्पल साइडर विनेगर की प्रकृति एसिडिक होती है लेकिन भर भी इसके PH बैलेंसिंग गुण बदहजमी में राहत दिलाते हैं। यह सीने में जलन और एसिडिटी से भी राहत देता है। इसे लेने के लिए 2 से 3 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को 1 गिलास पानी में मिलायें और भोजन से पहले लें।

बेकिंग सोडा का उपयोग करें 
बदहजमी होने की स्थिति में  बेकिंग सोडा से तैयार सोलुशन पीने से आपको बहुत हद तक आराम मिलता है। यह सोलुशन आपके पेंक्रियाज में स्थित तरल का PH लेवल फिर से नॉर्मल करता है जिससे एसिडिटी से राहत मिलती है। इसे इस्तेमाल करने के लिए 1 गिलास पानी में 1/2 चम्मच बेकिंग सोडा डालें और पी जायें, आपको आराम मिलेगा। दिन में अधिकतम 2 बार पियें।

बदहज़मी में अजवाइन का सेवन 
अगर आपको अक्सर बदहज़मी की शिकायत रहती हो और आपका हाज़मा ठीक न रहता हो तो अजवाइन को सेंक कर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर किसी एयरटाइट कंटेनर में रख लें और खाने के बाद दोनों टाइम एक एक चम्मच अच्छी तरह चबा चबा कर खायें।

सौंफ का सेवन करें 
सौंफ, सदियों से अपच या बदहज़मी की समस्या में उपयोग होती आ रही है। इसलिए खाने के बाद इसका नियमित सेवन करने की आदत डालें। अगर बदहज़मी की शिकायत बहुत बढ़ गई हो तो लगभग 1 चम्मच सौंफ 1 गिलास पानी में उबालें और उसमे थोड़ा सा अदरक किस कर डालें। 5 मिनिट के लिए उबालें। इसके बाद इसे चाय की तरह पियें। अपच की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा।

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

अदरक, हल्दी और दालचीनी की चाय – करती है कई बिमारियों का इलाज

अदरक, हल्दी और दालचीनी की चाय – करती है कई बिमारियों का इलाज


चाय तो आप सभी पीते हैं। लेकिन क्या आपने एैसी प्राकृतिक चाय पी है जो आपकी कई प्रकार के खतरनाक रोगों और लाइलाज बीमारियों को ठीक कर सकती है। वैदिक वाटिका आपको बता रही है एैसी किसी हर्बल प्राकृतिक चाय के बारे में।

प्राकृतिक चाय बनाने का तरीका

सामग्री :
  • चार सौ एमएल पानी
  • आधी चम्मच हल्दी
  • एक छोटा सा दालचीनी का टुकड़ा और
  • आधा चम्मच पिसे हुए अदरक का रस ।

बनाने का तरीका :
  • इस प्राकृतिक चाय का आप आसनी से बना सकते हो। आपको करना क्या है कि—
  • सबसे पहले आप चूल्हे या गैस पर चार सौ एम एल पानी को उबालें।
  • अब उसमें थोड़ी से दालचीनी को डालें और गैस की लपटों को कम कर दें।
  • इसके बाद इसमें अदरक का रस और हल्दी को भी मिलाएं।
  • और एक मिनट के बाद आप चूल्हे का बंद कर दें।
  • अब आपकी चाय तैयार है। इसे छानकर पीएं।

किस समय में इस चाय को लेना बेहतर है:
आप को यह चाय सुबह के समय में खाली पेट लेनी है। एैसे ही रात को सोने से पहले इस प्राकृतिक चाय का सेवन कर सकते हो।
लाइलाज बीमारियों को खत्म करती है अदरक और हल्दी और दालचीनी की चाय-
अब जानते हैं इस प्राकृतिक चाय को पीने के फायदों के बारे में:

घटाए वजन को :
यदि आपको वजन जरूरत से अधिक हो गया हो तो आप इस प्राकृतिक चाय को सेवन सुबह उठने के बाद सेवन करें। और एैसा ही रात में खाना खाने के बाद करें। एैसा करने से आपके शरीर की चर्बी घटेगी और बिना मेहनत आदि के आप अपना वजन आसानी से घटा सकते हो।

डायबिटीज के रोगियों के लिए अचूक औषधि :
घर में यदि किसी को मधुमेह की समस्या हो तो आप इस प्राकृतिक चाय का सेवन उस इंसान को जरूर कराएं। यह चाय शुगर के स्तर को नियंत्रित करती है और डायबिटीज को धीरे—धीरे ठीक भी।

माइग्रेन की समस्या का इलाज :
जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या हो वे इस हर्बल चाय को जरूर पीएं। क्योंकि यह चाय सबसे पहले माइग्रेन से होने वाले सिर के दर्द को ठीक करती है।

अपच की समस्या का घरेलू उपाय :
पेट में अपच व गैस की समस्या हो तो आप इस हर्बल चाय का सेवन जरूर करें। यह पेट के एसिड को कम करती है। जिसकी वजह से आप अपच से होने वाले रोगों से बचते हो।

गर्भवती महिलाओं के लिए :
यदि सुबह के समय में गर्भवती महिला को मतली की समस्या आती हो तो आप इस हर्बल चाय का सेवन करें। इससे आपकी मार्निंग सिकनेस और मतली दोनों ही ठीक हो जाती हैं।

मासिक धर्म की समस्या में :
यदि मासिक धर्म में आपको अधिक दर्द होता हो तो आप इस हर्बल टी का सेवन करें।

शरीर को अंदर से बनाए साफ :
ये हर्बल चाय शरीर को अंदर से साफ करती है। यानि शरीर को डिटॉक्स करती है। जिससे आपका शरीर स्वस्थ रहता है।

इन सभी बीमारियों के अलावा भी यह हर्बल चाय शरीर की सूजन, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, पीसीओडी और गैस एसिडिटी आदि कई जानलेवा बीमारियों को खत्म कर देती है।

सोमवार, 23 जनवरी 2017

हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करे दही को अपने भोजन में इस्तेमाल कर

हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करे दही को अपने भोजन में इस्तेमाल कर


गर्मियों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्रोडक्ट दही। दही आपके रोजाना डाइट में शामिल होता है। लेकिन अगर आप इसे देखकर भी अनदेखा करते हैं एक बार इसके फायदे जान लीजिए। यकीनन आप ये सब बातें जानने के बाद दही को अवॉइड नहीं करेंगे।

1-वजन घटाना : सबसे बड़ा फायदा…जी हां सबसे बड़ा इसलिए क्योंकि आजकल ज्यादातर लोग अपने वजन को लेकर परेशान रहते हैं। इसमें कैल्शियम होता है जो आपकी बॉडी को ज्यादा कोर्टिसोल बनाने से बचाता है। बॉडी में कोर्टिसोल का हार्मोनल इंबैलेंस हाइपरटेंशन, मोटापे और कोलेस्ट्रॉल का कारण बनता है। 

2- दिल को सेहतमंद बनाती है दही : ऐसे समय में जब हार्टअटैक की समस्या आम सी हो गई है। एक दही आपको इस समस्या से दूर रहने में मदद कर सकती है। दही हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल घटाने में भी मदद करती है।

3- दूध नापसंद करने वालों के लिए ऑप्शन : जो लोग दूध पीना पसंद नहीं करते उनके लिए दही एक अच्छा और हेल्दी ऑप्शन है। क्योंकि दही आपकी बॉडी को न्यूट्रिश्नल बूस्ट देता है जो आपको दूध में मिलते हैं।

4- इम्यूनिटी बढ़ाता है दही : दही में मौजूद गुड बैक्टीरिया बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ाते हैं। यह महिलाओं में होने वाले वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन से भी बचाता है।
समझदारी के साथ करे  ब्रेकअप

5- स्किन केयर : दही में विटामिन ई और जिंक होता है। इस वजह से आप इसे होम मेड फेस पैक की तरह स्किन पर भी लगा सकते हैं।

6- डैंड्रफ : दही में लैक्टिक एसिड होता है। इस वजह से इसमें एंटी फंगल प्रॉपर्टीज होती हैं जो डैंड्रफ भगाने में मददगार होती हैं।

7- डाइजेशन : आपका डाइजेस्टिव सिस्टम दही में मौजूद न्यूट्रियंट्स को आसानी से ले लेता है। इतना ही नहीं यह आपके खाई हुई दूसरी चीजों से भी न्यूट्रियंट्स लेने में मदद करता है। जिससे आपको आसानी से खाना पचाने में मदद मिलती है। दही पेट में बने वाली हीट को भी कम करता है। पेट में ऐसी हीट तेज मिर्च वाला खाना खाने से बनती है।

शनिवार, 21 जनवरी 2017

चने के सत्तू से रोगों को भगाए दूर, रहे ठंडा-ठंडा, कूल-कूल

चने के सत्तू से रोगों को भगाए दूर, रहे ठंडा-ठंडा, कूल-कूल


आयुर्वेद से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि चने में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने के कारण यह लीवर के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। चने से सत्तू बनने के बाद उसका गुण भी बदल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सत्तू गैस्ट्रोइंट्रोटाइटिस से पीड़ति व्यक्ति के लिए काफी कारगर होता है। आधुनिक दिनचर्या में तो इस बीमारी से लगभग 90 प्रतिशत लोग पीड़ीत हैं। सत्तू आहार है, औषधि नहीं, इसीलिए इसका साइड इफेक्ट भी नहीं होता।

1. जौ और चने के मिश्रण से बने सत्तू को पीने से मधुमेह रोग दूर करने में मदद मिलती है। इसे पानी में घोल कर पीने से यह तुरंत पचने के बाद ऊर्जा व शक्ति देता है।

2. यह कफ, पित्त, थकावट, भूख, प्यास और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। डॉक्टरों की मानें तो यह पेट के रोगों के लिए भी रामबाण है।

3. चने का सत्तू गरमी में पेट की बीमारी और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

4. अल्पाहार में सत्तू का प्राचीन काल से मुख्य स्थान रहा है। यह शरीर के पोषण के साथ-साथ मोटापा भी नियंत्रित रखता है। मौजूदा समय में सत्तू की उपयोगिता भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन इसके चाहने वाले कम होते जा रहे हैं।

5. फास्ट फूड के दौर में सत्तू का महत्व कम हो रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों में लोग सत्तू का इस्तेमाल खूब करते हैं।

बुधवार, 18 जनवरी 2017

खिचड़ी खाने के ये तीन फायदे आपको चौंका देंगे

खिचड़ी खाने के ये तीन फायदे आपको चौंका देंगे


कहीं आप भी तो उन लोगों में से नहीं जो खिचड़ी के नाम पर ही नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं? ज्यादातर लोग खिचड़ी को बीमारों का खाना मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं खिचड़ी एक ऐसी चीज जिसे खाने के सिर्फ और सिर्फ फायदे ही हैं. अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं तो इससे बेहतर आपके लिए कुछ हो ही नहीं सकता है. एक ओर जहां खिचड़ी बनाना बहुत आसान है वहीं इसमें वो सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है.

चावल और कुछ दालों को मिलाकर बनने वाली खिचड़ी एक सुपाच्य भोजन है. यूं तो खिचड़ी में मसालों का इस्तेमाल न के बराबर ही किया जाता है लेकिन आप चाहें तो स्वाद के लिए चुटकीभर मसाले का प्रयोग कर सकते हैं. खिचड़ी में दही मिलाकर खाने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है

खिचड़ी खाने के तीन बेहतरीन फायदे:

1. पोषक तत्वों से भरपूर
आपकी मां या फिर आपकी दादी ने भी आपको खिचड़ी के फायदे बताएं होंगे. खिचड़ी कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, कैल्शियम, फाइबर्स, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस के गुणों से भरपूर होती है. आप चाहें तो इसमें विभिन्न प्रकार की सब्ज‍ियां मिलाकर इसके पोषक गुणों को और बढ़ा सकते हैं.

2. पचने में आसान
खिचड़ी में तेज मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और न ही इसमें बहुत अधिक तेल, घी का इस्तेमाल होता है. ऐसे में ये आसानी से पच जाती है और यही कारण है कि बीमारी में लोग खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है तो खिचड़ी आपके लिए सबसे फायदेमंद है.

3. शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगार
खिचड़ी के नियमित सेवन से वात, पित्त और कफ का दोष दूर हो जाता है. खिचड़ी शरीर को ऊर्जा तो देने का काम करती ही है, साथ ही ये रोग प्रतिरक्षा तंत्र को भी बूस्ट करने का काम करती है.

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

एलोवेरा (घृतकुमारी) के 23 फायदे, नहीं जानते होंगे आप

एलोवेरा (घृतकुमारी) के 23 फायदे, नहीं जानते होंगे आप


एलोवेरा दुनिया के हर जगह पाया जाने वाला एक बेहद ही उपयोगी पौधा हैं.एलोवेरा ट्रॉपिकल रीज़न में पाया जाता हैं.एलोवेरा की खेती भी की जाती हैं जिससे कई प्रकार की दवाई ,सौन्दर्य प्रशाधन इत्यादी बनाइ जाती हैं.एलोवेरा हमारे जीवन शैली में कई प्रकार से उपयोग में आता हैं

एलोवेरा के स्वास्थ सम्बंधित 23 चमत्कारी फायदे

1. पेट के विकारों को ख़त्म करता हैं : पेट की किसी भी तरह की परेशानी हो, दर्द, ऐठन, कब्ज, अलसर, गैस, अपच, इत्यादी किसी भी प्रकार की रोगों के लिए घृतकुमारी (एलोवेरा ) हमारे लिए एक अदभुत औषधि के रूप में काम आता हैं. एलोवेरा के रस में निम्बू का रस और काली मिर्च मिला के पिने से फयदा होता हैं. पेट में अफारा हो गया हो और आराम नहीं मिल रहा हो तो घृतकुमारी के गुदे २० ग्राम सेवन करने से पेट को आराम मिलत हैं.

2. यकृत या लीवर की समस्याओं के निदान के लिए : यदि आपका लीवर कमजोर हो गाया हो ,दुर्बल हो गया हो ,कितने ही इलाज़ करवाया हो और कोइए फायदा न हुआ हो ,या फिर ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से भी लीवर दुर्बल हो जाता हैं.ऐसे में हमें प्राकृतिक रूप से एलोवेरा का उपयोग करना चाहिए .इसके लिए एलोवेरा के १ किलो ग्राम रस में १० ग्राम, काली मिर्च ,५० ग्राम काला नमक या सिंधा नमक और निम्बू का रस अधिक मात्रा में मिला कर मिश्रण तैयार कर ले और रोज सुबह खाली पेट इसे ले तो किसी भी प्रकार का लीवर की समस्या का समाधान हो जाता है.

3. आर्थराइटिस में उपयोगी हैं : अगर आपको आर्थराइटिस की समस्या हो तो एलोवेरा का उपयोग वैसे ही कर सकते हैं.कैसी भी समस्या हो आर्थराइटिस की आराम मिल जाता हैं. इसके लिए घृतकुमारी के रस या लड्डू का सेवन प्राय करते रहे ,आराम जरुर मिलेगा .

4. कान के दर्द में लाभकारी :  कान में दर्द हो रहा हो तो एलोवेरा का रस के कुछ बूंद जिसमे दर्द हो रहा हो उस कान में ना डाल के दुसरे कान में डाले.इसका फायदा ऐसे भी हो जाता हैं.

5. एलोवेरा शरीर के सूजन को कम करता हैं :  एलोवेरा का प्रतिदिन सेवन से शरीर में कही भी सूजन हो उसे जल्द से जल्द ठीक कर देता हैं.हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढाता हैं.

6. हार्मोनल बदलाव को भी ठीक करता हैं : आज कल महिलाओं में मासिक धर्म में कइ प्रकार की समस्या आती रहती हैं.किसी को स्त्राव ज्यादा होता हैं ,किसी को कम,किसी को देरी से आता हैं,दर्द भी होता ऐसे बहुत प्रकार के तकलीफ़ों से छुटकारा दिलाता हैं एलोवेरा का रस.एलोवेरा के सेवन से तन तंदुरुस्त हो जायेगा ,और हार्मोनल समस्या में भी आराम मिलेगा .एलोवेरा के रस या गुदे का प्रयोग करने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाले परेशानी से छुटकारा मिलत हैं.और मासिक धर्म सामान्य  हो जाता हैं.

7. खून की कमी में लाभदायक :  जिन माताओं ,और बहनों को खून की कमी हो उनको एलोवेरा का सेवन अवश्य करना चाहिए .इसके लिए एलोवेरा के रस में गेहूं का जवारा को लेके के इसका मिश्रण बाने और रोज सुबह इसे ले इससे हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता हैं और खून की कमी में आराम मिलता हैं.

8. खुनी बबासीर ( पाईल्स)  में लाभ :  जिनको भी खुनी बबासीर हो खून अधिक मात्रा में गिरता रहता हो तो उन्हें एलोवेरा का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए .एलोवेरा में इतनी क्षमता है की अगर खून रूक ही ना रहा हो तो एलोवेरा कइ पत्तों के छिलके निकल के उसमे गेरु मिलकर लंगोट की तरह पहने मात्र से खून का निकलना बंद हो जाता है.

9. पुरानी कब्ज को ठीक करता है ; पुराना कब्ज हो कैसा भी कब्ज हो एलोवेरा का जूस प्रतिदिन पिने से लाभ होता हैं .अरंडी के तेल में में घृतकुमारी का जेल मिला कर खाने से या पिने से कितना भी पुराना कब्ज हो आराम मिलता हैं.

10. बच्चों को कब्ज में फायदा : छोटे बच्चो को पॉटी करने में परेशानी हो रही हो ,स्टूल नहीं हो रहा हो,अगर हो भी रहा हो और बहुत तकलीफ से हो रहा हो तो ,ऐसे में एलोवेरा के रस में थोरा हिंग गर्म करके बच्चे के नाभि के आस पास लगाने से ,पॉटी आराम से हो जाता हैं.जब एलोवेरा बाहर से इतना असर करता हैं तो पीने से कितना फायदा हो सकता हैं.

11. खांसी में फायदा : अगर आपको खांसी हो गई हो और आराम नहीं मिल पा रहा हो तो घृतकुमारी के गुदे में काला नमक दाल कर चूसने मात्र से ही खांसी में बहुत आराम मिलता हैं.

12. स्तन में हुए गाँठ को भी ख़त्म करता हैं  : महिलाओं को अगर स्तन में गाँठ बन गइ हो तो घबराए नहीं ,कियूं की एलोवेरा हैं न आपके गाँठ को नष्ट करने के लिए खत्म करने के लिए. आप घृतकुमारी के पत्ते को ले ले उसको एक भाग से छिलका निकाल दे और उसे थोडा गर्म कर दे,और जहां गाँठ हो गया हो वहाँ बांध ले,ऐसा प्रतिदिन करने से आराम मिलत हैं और गाँठ भी नष्ट हो जाता हैं.और आराम मिलता हैं.

13. कमर दर्द में सहायक : कमर के दर्द या स्लिप डिस्क हो जाने पे भी घृतकुमारी के गुदे को खाए या उसकी रोटी बना कर या फिर लड्डू बना कर खाए तो कमर की किसी भी समस्या से निजात मिलता हैं.

14. खुजली में आराम दिलाता हैं ; अगर शरीर में किसी भी प्रकार की खुजली हो रही हो और आपको आराम नहीं मिल रहा हो तो आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं.इसको प्रयोग में कैसे लाना हैं ये बता दूँ ,एलोवेरा का रस निकाल ले उसमे नारियल तेल ,कपूर और गेरु मिलाकर मिश्रण तैयार कर ले और रोज सुबह सुबह पुरे शरीर में लगा ले ,कुछ देर रहने दे फिर पानी से साफ़ करले या नहा ले.शरीर की खुजली से बहुत आराम मिलेगा .चित्त पित्त में भी आराम दिलाता है.किसी भी प्रकार की त्वचा सम्बन्धी समस्या का एक ही इलाज़ हैं एलोवेरा .

15. कटने या जलने पर : अप कही कट फट जाये या जल जाये तो आप उसपे घृतकुमारी के गुदे को या उसके रस को उस जगह पे लगा ले देखिएगा जलन से आराम मिलेगा ही और फोरे भी नहीं आयेंगे .

16. एलर्जी में आराम :  अगर बच्चो को अक्सर एलर्जी की समस्या हमेशा होती हो तो ,आप घृतकुमारी का प्रयोग कर सकते हैं.एलर्जी में आराम दिलाती हैं.घृतकुमारी के रस या गुदा में काला तिल भुना हुआ और गुड लेकर उसका लड्डू बनाकर उसका प्रयोग कीजिये एलर्जी से आराम मिलेगा.

17. मूत्र विकार से भी आराम दिलाता हैं :  मूत्र समस्या आज कल प्रायः देखि जाती हैं.चाहे वो यूरिन इन्फेक्शन हो या बार बार मूत्र करने की इच्क्षा होती हो प्रोस्टेट ग्रैंड बढ़ गाया हो ,इन सबसे छुटकारा के लिए आप घृतकुमारी और गुड और भुने हुए काले तील का लड्डू बनाए और उसका सेवन करते रहे,आराम जरुर मिलेगा .

18. कैंसर के लिए भी बहुत उपयोगी हैं : घृतकुमारी के रस का सेवन सभी प्रकार के कैंसर को ख़त्म करने में हमारे शरीर को मदद करता हैं.घृतकुमारी में जितने भी विटामिन्स हैं सब पानी में घुलनशील होते हैं .जो आसानी से शरीर के द्वारा अबशोषित कर लिए जाते हैं.

19. बच्चो का बिस्तर पे पेशाब करना : कभी कभी बच्चे रात में बिस्तर पे पिशाब कर देते हैं या प्रायः कर देते हैं तो उसके लिए भी आप बच्चो को एलोवेरा का सेवन करने दे या लड्डू बना कर खाने को दे.इससे बच्चे बिस्तर पे पेशाब नहीं करेंगे और उसका पाचन तंत्र भी अच्छा रहता हैं.

20. आतों में संक्रमण या अल्सर में फयदा होता हैं : एलोवेरा आँतों के संक्रमान को नष्ट कर आराम दिलाती हैं.इसका सेवन नितप्रतिदीन करने से बहुत आराम मिलत हैं.इसका कोइए साइड इफ़ेक्ट नहीं होता हैं .

21. फ़ूड पोइसिनिंग या फ़ूड एलर्जी में भी आराम दिलाती हैं : जिसको फ़ूड पोइसिंग की समस्या होती हो या किसी भी खाने से एलर्जी होती हो तो घृतकुमारी के रस का सेवन करने मात्र से ही एन सब विकारों से निजात मिलता हैं.

22. डाइबिटीज भी कम करता हैं :  डाइबिटीज वालोन को एलोवेरा के रस या जेल का प्रयोग करते रहना चाहिए ,प्रयोग एक दिन का नहीं होना चाहिए इसे लगातार उपयोग में करना चाहिए.एलोवेरा डाइबिटीज को नियंत्रित रखता हैं.अतिरिक्त दवाई लेने की भी आवश्यकता भी नहीं होती .

23. एलोवेरा हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं साथ ही साथ H.I.V वायरस को नियंत्रित करती हैं

मंगलवार, 3 जनवरी 2017

क्या आप जानते हैं भोजन करते समय पानी पीना, सेहत के लिए लाभदायक होता है या नहीं?

क्या आप जानते हैं भोजन करते समय पानी पीना, सेहत के लिए लाभदायक होता है या नहीं?


'जल ही जीवन हैं' खैर ये बात तो सभी जानते हैं। कम पानी पीने से कई बीमारियां भी होती हैं यह भी आपने सुना ही होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि एक ऐसा वक़्त भी होता जब आपको पानी पीने से बचना चाहिए? जी हाँ! खाना खाते वक़्त पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। वैसे बहुत से लोग इस बारे में जानते हैं लेकिन उन लोगों को इससे होने वाले नुकसानों के बारे में नहीं पता होता हैं। वहीं कुछ लोग तो बिना पानी पिए खाना खा ही नहीं सकते। इन लोगों को अपनी आदत सुधारने की ज़रुरत है।  

आइए आज हम जानने की कोशिश करते हैं कि खाना खाते वक़्त पानी पीने से आखिर होता क्या हैं?

खाने से आधा घंटा पहले न पिएं पानी 
विशेषज्ञों का मानना है कि खाना खाने से लगभग आधा घंटे पहले और खाना खाने के लगभग आधा घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। साथ ही खाना खाने के दौरान भी एक दो घूँट पानी पिया जा सकता है लेकिन एक-दो ग्लास पानी पीना मुसीबतें खड़ी कर सकता है।  
खाना पचाने का काम करता है पाचक रस  
हम जब कुछ खाते हैं तो हमारा पेट पाचक रसों का उत्पादन करता है जो खाने को छोटे-छोटे कणों में विभाजित करते हैं और उनके पाचन को आसान बनाते हैं।  
पाचन क्रिया होती है बधित 
अध्ययनों में सामने आया है कि हमारे पेट को पहले ही पता चल जाता है कि हम खाना खाने वाले हैं। इसलिए वो पाचक रसों का निर्माण करने लगता है। लेकिन उसी समय अगर हम पानी पीने लगते हैं तो यह रस पतला होने लगता है। जिससे पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ता है।  
बनती है एसिडिटी की प्रक्रिया 
पाचन क्रिया अधूरी रहती है तो खाना पूरी तरह पच नहीं पाता । जिसके परिणाम स्वरुप एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं।  
ब्लड शुगर लेवल में होती है बढ़ोतरी 
खाने से ठीक पहले, पानी पीने से ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ जाता है। जब आपका खाना पचता नहीं है तो उसमें उपस्थित ग्लूकोज़ वसा के रूप में जमा हो जाता है। इस वजह से इन्सुलिन ज़्यादा मात्रा में बनता है और इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।  
नमक खाएं कम 
कुछ लोगों को खाते वक़्त ज़्यादा प्यास लगती है, इसलिए वे बिना पानी पिए खाना खा नहीं सकते हैं। इस बारे में यह किया जा सकता है कि ज़्यादा नमक वाला खाना खाने से बचें। ज़्यादा नमकीन खाना खाने से प्यास लगती है और आपको ज़्यादा पानी पीने की इच्छा होती है।   
चबा-चबा कर ही खाएं खाना
कुछ लोगों से बिना पानी के खाना निगला ही नहीं जाता है।  इसका कारण यह होता है कि वे खाने को चबाने कि बजाए बस निगल जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि जितना हो सके उतना चबाकर खाए। जितना आप खाना चबाते हैं उतना ज़्यादा मात्रा में पाचक रसों का उत्पादन होता है और खाना अच्छे से पच जाता है।   

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

किचन में छिपा है कई बीमारियों का इलाज, जानिये कैसे

किचन में छिपा है कई बीमारियों का इलाज, जानिये कैसे


तबियत जब खराब होती है तो इंसान को बेचैनी हो जाती है की वह अचानक से कहां जाए। कई बार आधी रात को भी तबियत खराब हो जाती है और रोगी परेशान हो जाता है लेकिन कई बीमारियों का इलाज आपके किचन में होता है। जो आपको इन रोगों से तुरंत बचा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको इस बात की जानकारी होना। यदि कुछ छोटी मोटी बीमारियों का उपचार यदि शुरू में ही हो जाए तो इनका गंभीर होने से पहले बचा जा सकता है। क्या आपको पता है किचन में रखें इन मुख्य चीजों से आप किन बीमारियों से बच सकते हो।

खांसी होने पर

किचन में मौजूद काली मिर्च, शहद और तुलसी के पत्तों का प्रयोग। कई बार खांसी से रोगी ज्यादा परेशान हो जाता है तब आप काली मिर्च और शहद के साथ तुलसी के पत्तों का पेस्ट मिलाकर पीएं यह खांसी ही ठीक नहीं करेगा बल्कि गले के रूखेपन और कफ में भी राहत देगा।

सिरदर्द में

सिर के दर्द में आप तुलसी के पत्तों को चाय में डालकर सेवन करें। या नींबू और प्याज के रस में 2 चम्मच अदरक का रस डालकर पी जाएं इससे सिर के दर्द में राहत मिलेगी। आप सरसों के तेल की मालिश भी सिर पर कर सकते हैं।

खाना न पचने पर यानी अपच

खाना खाने के बाद यदि अपच हो तो आप नींबू में काला नमक लगाकर चाटें। या काली राई को 2 से 4 ग्राम प्रतिदिन लें। यह अपच की समस्या को दूर करेगा।

पेट दर्द में

पेट दर्द में व्यक्ति बेचैन हो जात है और वह समझ नहीं पाता की वह क्या करे। एैसी परेशानी में आप पानी में अजवायन और हिंग का पेस्ट बना लें और इस लेप को नाभी के आस पास लगा लें। यह पेट दर्द में राहत देगा। पुदीने के रस का सेवन करने से भी पेट दर्द में राहत मिलती है।

अस्थमा होने पर

इस रोग के अचानक होने पर आप थोडे शहद में आधा चम्मच दालचीनी के पाउडर डालकर पीएं एैसा करने से अस्थमा में राहत मिलती है। और कुछ दिनों तक लगातार पीने से अस्थमा से निजात पाया जा सकता है।

कील मुंहासे होने पर

यदि कील मुंहासे चेहरे पर हो तो आप एक चम्मच गुलाबजल में थोडा नींबू का रस मिलाकर रूई से इसे चेहरे पर मलें  और 20 मिनट बाद इसे ताजे पानी से धो लें एैसा 15 दिनों तक करने से आपको कील मुंहासों से निजात मिलेगा।

गला खराब होने पर

यदि गला खराब हो तो आप तुलसी के पत्तों, लौंग और अदरक को पानी में कुछ देर तक उबालें और फिर इसे छानकर पीं लें। यह गले की समस्या से आपको राहत देगा।

किचन में मौजूद कुछ महत्वपूर्ण चीजों से आप इन रोगों से बच सकते हो। इसलिए जानकारी होना जरूरी है ताकि आप और आपका परिवार अचानक से होने वाली समस्याओं से बच सके। एक बात का ध्यान जरूर रखें यदि इन उपायों से समस्या का हल नहीं हो पा रहा तो आप फिर डाक्टर को जरूर दिखा लें ताकी रोग गंभीर न हो सके। आपकी सेहत आपके किचन और आपके हाथ में है।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

सुबह सुबह निम्बू पानी पीने के चौका देने वाले फायदे

सुबह सुबह निम्बू पानी पीने के चौका देने वाले फायदे


गर्मी ने दस्तक दे दी है, ऐसे में जरूरी है कि आप अपने सेहत का ख्याल पहले से ही रखना शुरू कर दें। गर्मी में लोगों को पानी की प्यास ज्यादा होती है। खाली पानी से बेहतर है कि आप नींबू पानी पीएं। घर-घर में नींबू पानी पीने-पिलाने का चलन अब बस कुछ दिन बाद शुरू ही हो जाएगा।

नींबू पानी ना सिर्फ आपके शरीर के विषाक्त पदार्थ को दूर करता है बल्कि शरीर को साफ करने में मददगार भी है। यूं तो नींबू पानी आप कभी भी पी सकते हैं लेकिन सुबह-सुबह इसको पीना ज्यादा फायदेमंद है, आइए बताते हैं कैसे :
  • नींबू पानी सुबह-सुबह पीने से आपके शरीर की सफाई हो जाती है। नींबू पानी बाइल जूस बनाने में भी मददगार है। आपको बता दें कि बाइल जूस खाने को पचाने का काम करता है।
  • हमारे शरीर के खाने को पचाने में मदद करता है नींबू पानी यही नहीं, यह पाचन क्रिया को भी बेहतर रखता है।
  • विटामिन सी के गुणों से भरपूर होता है नींबू पानी। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण भी मौजूद होते हैं, जिससे हमारे स्कीन के दाग-धब्बे साफ हो जाते हैं और त्वचा पर निखार आता है।
  • जोड़ों के दर्द की शिकायत में भी आप नींबू पानी पी सकते हैं, यह बहुत फायदेमंद रहेगा।
  • अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो आप जरूर सुबह उठते ही नींबू पानी पीएं। मुंह की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है नींबू पानी। साथ ही, इसके इस्तेमाल से ताजगी भी बनी रहती है।
  • शरीर के पीएच लेवल को भी बनाए रखने में भी सहायक है नींबू पानी।
  • नींबू पानी विटामिन सी और पोटैशियम के गुणों से भरपूर होता है, जिसकी वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने का काम करता है।
  • रोज़ सुबह-सुबह नींबू पानी पीने से आप दिनभर ताजगी महसूस करेंगे और आपके शरीर में कभी भी पानी की कमी नहीं होगी।
  • अगर आप मोटे हैं और पतला होना चाहते हैं तो ज़रूर सुबह एक ग्लास नींबू पानी पीएं। नींबू पानी आपके वजन को घटाने में मदद करता है।

सोमवार, 21 नवंबर 2016

इन चीजों को भूलकर भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए, शेयर करें

इन चीजों को भूलकर भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए, शेयर करें


सुबह-सुबह खाली पेट सोच समझकर ही कुछ खाना चाहिए। कुछ चीजें ऐसी हैं जो काफी ज्यादा पौष्टिक होती हैं लेकिन खाली पेट खाने से हमें नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए रोज सुबह कुछ भी खाने से पहले हमें उनका चयन करना बेहद जरूरी है। आइए जाने ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में:

1. टमाटर काफी पौष्टिक होता है लेकिन इसमें काफी मात्रा में विटामिन सी होता है। यही नहीं इसमें काफी मात्रा में टैनिक एसिड भी होता है। अगर आप इसे खाली पेट खाते हैं तो यह पेट में एसिडिटी बढ़ा देता है। जिससे गैसट्रिक अल्सर की भी शिकायत हो सकती है।

2. अधिकतर लोगों में खाली पेट सोडा पीने के बाद पेट में दर्द की शिकायत होने लगती है। दरअसल सोडे में काफी अधिक मात्रा में कोर्बोनेट एसिड पाया जाता है। जब हम इसे खाली पेट पीते हैं तो यह पेट में मौजूद अम्ल के साथ मिलकर कई तरह की परेशानियों का सबब बनता है।

3. चाय और कॉफी को भी खाली पेट नहीं पीना चाहिए। दरअसल इसे पीने से एसिडिटी बढ़ती है और इससे हार्टबर्न और पूरे दिन अपच की समस्या रहती है। कॉफी में मौजूद कैफीन भी पेट के लिए फायदेमंद नहीं होता है। यह कोशिश होनी चाहिए कि जब भी चाय या कॉफी ले रहे हो तो साथ में कुछ खाना चाहिए जैसे बिस्कुट, नमकीन इत्यादि।

4. केले: केले को एक अच्छी डायट में शामिल किया जाता है। केले में काफी ज्यादा मात्रा में मैग्निशियम, पौटेशियम होता है। अगर आप खाली पेट केला खाते हैं तो इससे ब्लड में मैग्नीशियम और पौटेशियम का असंतुलन हो जाता है।


5. अधिकतर एलोपैथिक दवाइयों को खाली पेट नहीं खाना चाहिए। दवाइयों को खाली पेट खाने से पेट में दर्द, अल्सर और अपच की समस्या हो सकती है।

शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2016

कॉफी पीने के फायदे – कॉफी के गुण

कॉफी पीने के फायदे – कॉफी के गुण


दर्द – कहीं भी, कैसा भी दर्द हो, कॉफी पीने से कम होता है। कॉफी में कैफीन तत्व होता है जो मस्तिष्क के अनुभव केन्द्र जिसे सेन्सरी कार्टेक्स कहते हैं, को प्रभावित कर उत्तेजना लाता है। इससे दर्द कम होता है।

कॉफी पेशाब अधिक लाती है। कॉफी पीने से हृदय व साँस की नलियाँ फैलती हैं। यदि तेज खाँसी, दमा का दौरा पड़ा हो तो बिना दूध और चीनी की गर्म काफी पियें।

स्फूर्तिदायक और पाचक – कॉफी पीने से मानसिक और शारीरिक थकान एवं भोजन के बाद पेट में होने वाली गड़बड़ियाँ दूर हो जाती हैं। भोजन के बाद कॉफी लेने से चित्त प्रसन्न और हल्कापन मालूम होता है मानो कि पेट में कुछ खाया ही नहीं है।

खाने-पीने से होने वाला पेट दर्द, अफीम खाने से हुई तेज अपच, भोजन न पचना, पेट दर्द होना, ऐसी स्थिति में तेज कॉफी पीने से स्फूर्ति आती है। अनिद्रा से उत्पन्न थकान भी कॉफी पीने से दूर होती है। कॉफी पीने से मस्ती प्रतीत होती है।

दमा का दौरा - दमा का दौरा पड़ने पर कॉफी पीने से आराम मिलता है। यह बिना चीनी और दूध की पियें।

अफीम (Opium) – आधा-आधा घण्टे के अन्तर से गर्मा-गर्म कॉफी दो बार पीने से अफीम का नशा उतर जाता है। अफीम खाने की आदत छोड़ने वाले यदि कुछ सप्ताह कॉकी पीते रहें तो अफीम खाने की आदत छूट जाती है।

दुर्बलता – कॉफी अधिक पीने से वीर्य पतला होता है, ज्ञानतन्तु दुर्बल होते हैं, भूख बन्द होती है। पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है।

बुढ़ापे में स्मरण- शक्ति कॉफी पीने से अच्छी रहती है। नित्य कॉफी पीने से बुढ़ापे में भूलने की बीमारी (अल्जाइमर्स डिजीज) होने का खतरा 50 प्रतिशत तक घट जाता है।

गर्भवती महिलाओं को कॉफी का कम-से-कम सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण नवजात शिशु का वजन कम हो जाता है।

कॉफी लगातार लम्बे समय तक पीते रहने से स्नायु दुर्बल हो जाते हैं, स्वास्थ्य खराब रहता है। अत: इसे औषधि की तरह आवश्यकता पड़ने पर ही पीना चाहिए। कॉफी पीने से हानियाँ प्रतीत होने लगें तो होम्योपैथिक औषधि नक्स वोमिका-30 की चार खुराक नित्य एक सप्ताह तक लेने से इसके हर प्रकार के दुष्प्रभाव दूर हो जाते हैं।

शनिवार, 15 अक्तूबर 2016

नाश्ते में दही खाने के आश्चर्यजनक फायदे

नाश्ते में दही खाने के आश्चर्यजनक फायदे


नियमित् रूप से नाश्ते में दही का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है और संक्रामक रोग नही होते। दही से हमारे शरीर को भरपूर कैल्शियम, प्रोटीन, जिंक, राइबोफ़्लेविन तथा विटामिन B-12 मिलता है, इसके नियमित सेवन से हमारे शरीर की रोगों से लडने की शक्ति बढती है। 

आइए जानते है दही से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में।अगर आप दही में थोडा सा गुड या आंवला पाउडर मिला कर खाए तो दही अमृत जैसा हो जाता है.
अपच:
दही में भुना हुआ पिसा जीरा, नमक और कालीमिर्च डालकर रोजाना खाने से अपच (भोजन न पचना) ठीक हो जाता है और भोजन जल्दी पच जाता है।
आधासीसी का दर्द:
यदि सिर दर्द सूर्य के साथ बढ़ता और घटता है तो इस तरह के सिर दर्द को आधासीसी (आधे सिर का दर्द) कहते हैं। आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द दही के साथ चावल खाने से ठीक हो जाता है। सुबह सूरज उगने के समय सिर दर्द शुरू होने से पहले रोजाना चावल में दही मिलाकर खाना चाहिए।
बच्चों का भोजन:
दही, मां के दूध के बाद बच्चे का सबसे अच्छा भोजन होता है। बुल्गोरिया में जिन बच्चों को मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन बच्चों को खाने के लिए दही ही दिया जाता है।
वजन करे कम-
दही में मौजूद कैल्शियम शरीर पर फैट नहीं बढ़ने देता। शरीर पर बढ़ा हुआ फैट कई तरह की समस्याओं को साथ ले आता है जैसे उच्च रक्तचाप और मोटापा। एक शोध के मुताबिक हर रोज 5 चम्मच दही पेट कम करने में मदद करता है।
हाई न्यूट्रिशन-
विटामिन ए, डी, और बी-12 से युक्त दही में 100 ग्राम फैट और 98 ग्राम केलोरी है। लगभग सभी लवण दही में मौजूद होते हैं। दही में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है जो हडि्डयों को मजबूत करता है।
पाचन के लिए बेहतर-
किसी भी प्रकार के खाने को दही से हजम किया जा सकता है क्योंकि दही भोजन प्रणाली को दुरूस्त बनाए रखता है। हर रोज एक कटोरी दही आपको एसिडिटी से भी दूर रखेगा और जिन्हें यह परेशानी रहती है उन्हें अपने खाने में दही जरूर शामिल करना चाहिए। दही से पेट की बहुत सारी परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
बालों का झड़ना:
खट्टे दही को बालों की जड़ों में लगाकर थोड़ी देर मालिश करने के बाद उसे ठण्डे पानी से धो लें। इससे बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।
गंजेपन का रोग:
दही को तांबे के बर्तन से ही इतनी देर रगडे़ कि वह हरा हो जाए। इसको सिर में लगाने से सिर की गंजेपन की जगह बाल उगना शुरू हो जाते हैं।
अफारा (पेट में गैस का बनना):
दही की छाछ (दही का खट्टा पानी) को पीने से अफारा (पेट की गैस) में लाभ होता है।
रतौंधी:
दही के पानी में कालीमिर्च को पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी के रोग में आराम आता है।
जीभ की प्रदाह और सूजन:
दही में पानी मिलाकर रोजाना गरारे करने से जीभ की जलन खत्म हो जाती है। 
दही के साथ पका हुआ केला सूर्योदय (सूरज उगने से पहले) से पहले खाने से जीभ में होने वाली फुन्सियां खत्म हो जाती है।
हडि्डयों और दांतों को मजबूत बनाए-
कैल्शियम और फास्फोरस हडि्डयों को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी लवण है और दही में यह भरपूर मात्रा में होते हैं। गठिया की बीमारी से परेशान लोगों के लिए दही बेहतर माना जाता है।
सेहतमंद दिल –
आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली और जंक फूड खाने की आदत से आपके दिल पर काफी असर पड़ता है। हर रोज खाने में दही को शामिल करने से आपका दिल मजबूत रहेगा और कई बीमारियों से बचे रहेंगे। दही शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कोे कम करता है और ब्लड प्रेशर की समस्या से भी दूर रखता है।