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बुधवार, 24 जनवरी 2018

नीम की दातुन से दांत साफ़ करने के फायदे

नीम की दातुन से दांत साफ़ करने के फायदे


दांतों को मनुष्य का अनमोल रत्न माना जाता है। इसलिए इनकी देखभाल करना भी बेहद जरुरी है। आजकल बाजार में बहुत से ऐसे प्रोडक्ट मौजूद है जो दावा करते है की इसे यूज करने के बाद आपके दांत मजबूत और चमकीले बनेंगे। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो ये चीजें केवल परेशानी का कारण बनती है। भले ही एक दो दिन ये आपको कोई समस्या नहीं दें लेकिन लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद होने वाले नुकसान आपके दांतों के लिए काफी दुखदायी होते है।

ये बात तो आप सभी जानते होंगे, पुराने जमाने में कोई ब्रांडेड टूथपेस्ट और मंजन नहीं हुआ करते थे लेकिन उस समय भी लोगों के दांत बुढ़ापे तक सही सलामत रहते थे। जिसका कारण उनके द्वारा यूज की जाने वाली आयुर्वेदिक चीजें हुआ करती थी। लेकिन वर्तमान में अधिकतर लोग दांतों से संबंधित समस्यायों से परेशान दिखाई पड़ते है। जिसका सीधा अर्थ ये है की दांत साफ करने के लिए गलत चीजों का इस्तेमाल बहुत नुकसानदायक हो रहा है।
ऐसे में प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है। दातुन के बारे में तो आप सभी भली-भांति जानते होंगे। क्योंकि शहरों में न सही लेकिन गावों में आज भी बहुत से लोग है जो अपने दांतों को साफ़ करने के लिए टूथपेस्ट नहीं बल्कि दातुन का प्रयोग करते है। दातुन करने से न केवल आपके दांत साफ़ होते है बल्कि उन्हें कई बिमारियों से सुरक्षा भी मिलती है।
दातुन करने से केवल दांत ही नहीं अपितु आपको जीभ भी अच्छी तरह साफ़ होती है और उस पर मौजूद कीटाणु भी नष्ट हो जाते है। लेकिन आजकल के ब्रांडेड टूथपेस्ट के समक्ष कोई भी व्यक्ति इसे पूछता तक नहीं। क्योंकि वे इसे केवल समय की बर्बादी और पेड़ का तना ही समझते है। जबकि वे नहीं जानते की ये पेड़ का तना भी उनके दांतों के लिए कितना लाभकारी है। यहाँ हम आपको दातुन करने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हें जानकर हो सकता है आप भी इस प्राकृतिक वस्तु का इस्तेमाल करने लगें।

आयुर्वेद के अनुसार दांतों के लिए वरदान है दातुन :-
आयुर्वेद के अनुसार अर्क, न्यग्रोध, खदिर, करज्ज, नीम बाबुल आदि के पेड़ों के तने से दातुन करने के लिए कहा जाता है। इस वेद के मुताबिक, मुंह को कफ की सबसे बड़ा वजह माना जाता है। जब आप रात्रि के बाद सुबह जागते है तो आपके मुंह में कफ जमा हो जाता है जिसमे कई बैक्टीरिया और हानिकारक विषाणु भी होते है। इन विषाणुओं को समाप्त करने के लिए नियमित रूप से दातुन करने की सलाह दी जाती है।

जिसमे सबसे अधिक महत्व नीम की दातुन को दिया जाता है। क्योंकि इससे न केवल आपके दन्त स्वस्थ होते है अपितु आपकी पाचन क्रिया भी सुधरती है और आपके फेस पर एक नया ग्लो भी आता है। इसलिए आज भी बहुत से लोग नीम की दातुन का इस्तेमाल दांत साफ़ करने के लिए करते है।

टूथपेस्ट से बेस्ट होता है दातुन :-
आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकतर टूथपेस्ट को बनाने में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता जो दांतों को साफ करते है। लेकिन मसूड़ों तक पहुंचने के बाद ये टूथपेस्ट काफी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा कई बच्चे टूथपेस्ट निगल भी लेते है जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

जबकि दातुन न केवल आपको दांतों की सफाई करता है अपितु आपकी जीभ को भी बैक्टीरिया मुक्त करता है। साथ ही यह मसूड़ों से संबंधित समस्यायों को भी दूर करता है। और गलती से आप अगर इसके रस को निगल भी लें तो उसका स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव भी नहीं होता।

नीम की दातुन करने के क्या-क्या फायदे होते है?
दांतों को साफ़ करने के लिए सबसे अधिक नीम की दातुन का ही इस्तेमाल किया जाता है। ये न केवल आपके दांतों को स्वस्थ बनाती है। बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए बभी अच्छी होती है। इसके फायदे कुछ इस प्रकार है –

1. दांतों का पीलापन :
नियमित रूप से नीम की दातुन करने से दांतों का पीलापन दूर किया जा सकता है। आज के समय में अधिकतर लोगों के दांतों पीले नजर आते है। ऐसे में अगर आप नीम की दातुन करते है तो आपके दांतों का पीलापन दूर हो जाएगा साथ ही वे सफ़ेद, मजबूत और चमकदार बनेंगे।

2. मुंह के छालें :
नीम में मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण और एंटी ओक्सिडेंट तत्व मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते है। ये मुंह में मौजूद सभी बैक्टीरिया को समाप्त करते समस्या को दुबारा पनपने नहीं देते।

3. फेस की कसरत :
अक्सर अपने देखा होगा की ब्रश तो आप सामान्य रूप से करते है लेकिन जब दातुन किया जाता है तो दांतों की सफाई के साथ साथ आपके फेस की भी कसरत होती है। जिससे फेस की नियमित एक्सरसाइज होती रहती है। ऐसे में आपका फेस सुन्दर और स्लिम भी बनता है।

4. दांतों का दर्द :
नीम की दातुन से निकलने वाला रस न केवल दांतों की समस्यायों को दूर करता है अपितु आपके दांतों के दर्द को भी ठीक करता है। इसमे मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल गुण दांतों की नसों को आराम दिलाकर दर्द ठीक करने में मदद करते है। साथ ही इससे मसूड़े भी मजबूत होते है। नीम की दातुन करने से बुढ़ापे तक दांतों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

5. दांत में कीड़ा :
चॉकलेट आदि खाने की वजह से अक्सर छोटे बच्चों के दांतों में कीड़ा लग जाता है। जिसकी वजह से दांतों में तो दर्द होता ही है साथ-साथ खाने पीने में भी समस्याएं होने लगती है। ऐसे में यदि आप अपने बच्चे को नियमित रूप से नीम की दातुन कराते है तो उसके दांतों में कीड़ा नहीं लगेगा। और वे अच्छी तरह से साफ़ होंगे। इस दातुन से मुंह में मौजूद कीटाणु भी समाप्त हो जाएँगे।

6. सांसों की बदबू :
अक्सर खाने पीने या किसी अन्य कारण की वजह से सांसों से बदबू आने लगती है। ऐसे में यदि आप नियमित रूप से नीम का दातुन का इस्तेमाल करते है तो आपके मुंह से कभी बदबू नहीं आएगी। और आपकी सांसे फ्रेश और ताजगी भरी रहेंगी।

7. सेंसिटिविटी :
दांतों में सेंसिटिविटी होना आज के समाज की आम समस्या बनता जा रहा है। इए में अगर आप नीम की दातुन का इस्तेमाल करते है तो आपके दांतों से सेंसिटिविटी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और आपके दांत स्वस्थ और अच्छे रहेंगे।

तो ये थे नीम के कुछ फायदे जिन्हें जानकार आप भी इस प्राकृतिक देन का इस्तेमाल करने के बारे में जरुर सोचेंगे। एक बात और, नीम की दातुन को हमेशा ताजा तोड़कर ही प्रयोग में लाना चाहिए। स्वाद में यह काफी कडवा होता है तो छोटे बच्चों को इस्तेमाल कराते समय विशेष ध्यान रखें।

मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

दांत में ठंडा गरम लगने पर ये करें ठीक हो जाएगा

दांत में ठंडा गरम लगने पर ये करें ठीक हो जाएगा


दुनिया में करीब 90 प्रतिशत लोगों को दांतों से जुड़ी किसी न किसी तरह की समस्या होती है, लेकिन अधिकतर लोग ज्यादा दिक्कत होने पर ही डेंटिस्ट के पास जाना पसंद करते हैं। ज्यादा जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक का दांतों पर बुरा असर पड़ता है। इस कारण दांतों में कैविटी बढ़ती है और वे अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। इस कारण दांतों में ठंडा-गर्म लगने लगता है।

दांतों में ठंडा-गर्म लगना एक आम बात होती जा रही है। खाने-पीने की गलत आदतों के कारण दांतों की सुरक्षा परत नष्ट हो जाती है, जिससे दांतों में ठंडा-गरम लगने की समस्या सामने आती है। ‘दांत के भीतर के संवेदनशील भागों की सुरक्षा के लिए सबसे ऊपर एक परत होती है, जिसे एनामेल कहते हैं, लेकिन खान-पान की बुरी आदतों और कई अन्य वजहों से यह परत पतली हो जाती है और दांतों में प्लॉक जमने लगता है।


ऐसे दांतों में सेंसिटिविटी की समस्या ज्यादा होती है। प्लॉक बैक्टीरिया और खाने-पीने के कणों की एक परत होती है, जो आमतौर पर रात का खाना खाने के बाद ब्रश न करने से जमा हो जाती है। ये प्लॉक दांतों के एनामेल पर प्रतिकूल असर डालती है, जिससे दांत कमजोर और संवेदनशील हो जाते हैं।’

दांतों की संवेदनशीलता बढ़ने के कारण

पायरिया: जिन लोगों को पायरिया की शिकायत होती है, उनके दांतों में ठंडा-गरम लगने की समस्या बहुत ज्यादा होती है। पायरिया में दांत बहुत कमजोर हो जाते हैं, जिससे उनमें सेंसिटिविटी बढ़ जाती है।

मसूढ़ों की बीमारी: मसूढ़ों में बीमारी होने पर भी दांतों को ठंडा-गरम ज्यादा लगता है। मसूढ़ों में किसी भी तरह की बीमारी होने पर वह कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे दांत मसूढ़ों से बाहर आ जाते हैं और मसूढ़े खुल जाते हैं। ऐसे में इस तरह की परेशानी बढ़ जाती है।
एसीडिटी: दांतों की सेंसिटिविटी की बहुत बड़ी वजह है एसीडिटी। जब एसिडिटी बहुत अधिक बढ़ जाती है तो अम्ल खट्टे पानी के रूप में मुंह में आने लगता है। अम्ल के सम्पर्क में आने पर कैल्शियम से बनी दांतों की परत एनामेल गलने लगती है। दांत का सुरक्षा कवच गल कर निकल जाने से दांतों में ठंडा या गरम महसूस होता है।

कॉर्बेनिक एसिड: कोल्ड ड्रिंक और सभी एयरेटेड ड्रिंक में भी अम्ल होता है। ये भी एनामेल को एसिडिटी की तरह ही नुकसान पहुंचाता है। आजकल छोटे बच्चों में सेंसटिविटी की समस्या सबसे ज्यादा आने लगी है। इसकी वजह है बच्चों में कोल्ड ड्रिंक्स पीने की लत लगना।


खाने-पीने की गलत आदतें: खाने-पीने की गलत आदतों के कारण दातों में कैविटी बढ़ती चली जाती है। ऐसी आदतें एसिडिटी को भी जन्म देती हैं।

सुपारी या तंबाकू: सुपारी, पान या तंबाकू खाने की आदत के कारण भी दांतों का एनामेल घिस जाता है। बहुत अधिक पान खाने वाले लोग जब पान खाना छोड़ देते हैं तो उनके दांतों में ठंडा लगने लगता है। लगातार सुपारी चबाते रहने से उनकी नसें बाहर निकल आती हैं।

च्यूंगम या अन्य चीजें: हमेशा च्यूंगम या कुछ भी चबाते रहने की आदत से भी एनमेल को क्षति पहुंचती है।

नींद में दांत किटकिटाना: कुछ लोगों को नींद में दांत किटकिटाने की आदत होती है। इससे भी दांतों का एनामेल झड़ जाता है।

रात में बिना ब्रश किए सोना: रात को ब्रश किए बगैर सोने की आदत भी दांतों में सेंसिटिविटी को बढ़ाती है, क्योंकि इससे दांतों में कैविटी बढ़ती है। इसके अलावा बहुत दबाव के साथ ब्रश करने से भी दांत घिस जाते हैं और संवेदनशील बन जाते हैं।
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इलाज


औषधियुक्त टूथपेस्ट
आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए औषधियुक्त टूथपेस्ट की सलाह ही देते हैं। जैसे, सेंसोडाइन, थर्मोसील रैपिड एक्शन, सेंसोफॉर्म, कोलगेटि सेंसिटिव आदि। इन्हें आप बिना डॉक्टर की सलाह के भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन समस्या दूर न हो तो डॉक्टर की सलाह लेने में न हिचकें। 60 प्रतिशत लोगों की समस्या औषधियुक्त टूथपेस्ट के इस्तेमाल से समाप्त हो जाती है। ये टूथपेस्ट कैल्शियम, फॉस्फेट और पोटेशियम युक्त होते हैं, जो दांतों की सेहत को सही करने में मदद करते हैं। इनका असर लगभग दो हफ्ते बाद नजर आता है।

माउथवॉश
इसके अलावा माउथवॉश भी दिया जाता है। लेकिन माउथवॉश की सलाह कम ही दी जाती है, क्योंकि इसमें फ्लोराइड होता है और पानी में भी फलोराइड की मात्र ज्यादा रहती है। फ्लोराइड की ज्यादा मात्र नुकसानदेह होती है।

फिलिंग
डेंटीन (दंत धातु) के बाहर आ जाने पर फिलिंग करना जरूरी हो जाता है। फिलिंग न कराने पर दांत में ठंडा-गरम व खट्टा-मीठा लगता रहता है, जिससे दांत में दर्द होने लगता है और पस बन जाती है। दांतों में तात्कालिक, सिल्वर, कंपोजिट, जीआईसी फिलिंग करवा सकते हैं। डॉक्टर दांतों की स्थिति देखने के बाद ही निर्णय लेते हैं कि कौन-सी फिलिंग करनी है।

रूट कैनाल
जब डेंटीन की परत भी खत्म हो जाए और नस बाहर आ जाए तो रूट कैनाल कराना पड़ता है। जब दांत में कीड़ा गहरा सुराख कर देता है और संक्रमण जड़ों तक फैल जाता है तो रूट कैनाल किया जाता है। जिन टिश्यू में संक्रमण हो जाता है, उन्हें स्टरलाइज्ड करके दांत में एक मैटीरियल भर दिया जाता है। इसमें दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है, लेकिन दांत की रक्त आपूर्ति काट दी जाती है। इससे दांत में किसी भी तरह की बीमारी या संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है।
सरसों का तेल और सेंधा नमक
दांतों के स्वास्थ्य के लिये सरसों का तेल और सेंधा नमक एक पुराना और असरदार घरेलू नुस्खा है। इसे प्रयोग करने के लिये 1 चम्‍मच सरसों के तेल में 1 छोटा चम्‍मच सेंधा नमक मिलाएं। फिर इस मिश्रण से दांतों और मसूढ़ों की हल्‍के-हल्‍के मसाज करें। 5 मिनट के बाद कुल्ला कर लें। जल्द ही समस्या में आराम होने लग जाएगा।

नमक और पानी उपचार:
हल्‍के गरम पानी में 2 चम्‍मच नमक मिक्‍स करें। इस घोल से सुबह और रात को सोने जाने के वक्‍त कुल्‍ला करें। यह एक आयुर्वेदिक उपचार है जो काफी काम आता है।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

जानिये कैसे नीम का पानी आपकी सेहत को कर सकता है बेहतर

जानिये कैसे नीम का पानी आपकी सेहत को कर सकता है बेहतर


नीम कड़वा तो जरूर होता है लेकिन इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। कड़वा होने की वजह से इसका सीधा सेवन करना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए नीम के पानी का सेवन करें। नीम के पानी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल के साथ-साथ और भी कई पोषक तत्व होते हैं जो स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व पेट संबंधी समस्या, बालों और सूजन को कम करने के लिए एक बहुत बेहतर विकल्प होते हैं। आइए नीम के पानी के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानते हैं।

नीम का पानी कैसे बनाएं: नीम के पत्तों को पानी में उबालें और इसे छान लें। थोड़ी देर उसे ठंडा होने दें और फिर उसका सेवन करें।
डैंड्रफ के लिए: नीम के पानी में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो स्कैल्प को डिहाइड्रेटेड रखता है और डैंड्रफ को खत्म करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो हेयर फॉलिकल्स को सुधारने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व सिर की त्वचा पर होने वाली खुजली को भी दूर करने में सहायता करते हैं।
मुंहासों के लिए: एस्ट्रिंजेंट और विटामिन-ई के गुण होने की वजह से नीम का पानी त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए अच्छा होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होतो हैं जो त्वचा के बैक्टीरिया को नष्ट करता है और पिंपल्स, मुंहासे और काले-धब्बों को दूर करने में मदद करता है। यह मृत-कोशिकाओं को भी दूर रखता है जो त्वचा को रूखी होने से बचाता है और त्वचा को कोमल और मुलायम बनाता है।
दांतों के लिए: नीम के पानी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं जिससे मुंह की दुर्गंध को खत्म करने में मदद करते हैं। दांतों में होने वाली सड़न और दर्द से भी निजात दिलाने में मदद करता है और साथ ही दांतों के पीलेपन को भी कम करता है।

पेट की समस्या के लिए: नीम का पानी सीधे गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट में सूजन में कमी के साथ जुड़ा हुआ है, जो अल्सर को कम करने में मदद करता है और अन्य पेट संबंधी समस्या जैसे कब्ज, पेट का फूलना और ऐंठन को कम करता है। यह एक एंटीडॉट की तरह काम करता है जो पेट के फ्लू और संक्रमण के लिए त्वरित उपचार के इलाज के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है जो पेट के बैक्टीरिया को नष्ट कर सकते हैं।

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

दांतों और मसूड़ो की समस्या से परेशान हैं तो अपनाएं ये टिप्स

दांतों और मसूड़ो की समस्या से परेशान हैं तो अपनाएं ये टिप्स


भारत में दांतों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता है. हाल ही में किए गए एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि लगभग 95 प्रतिशत भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी है, 50 प्रतिशत लोग टूथब्रश का उपयोग नहीं करते और 15 वर्ष से कम उम्र के 70 प्रतिशत बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, भारतीय लोग नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जाने की बजाय, कुछ खाद्य और पेय पदार्थो का परहेज करके स्वयं-उपचार को प्राथमिकता देते हैं. दांतों की सेंस्टिविटी एक और बड़ी समस्या है, क्योंकि इस समस्या वाले मुश्किल से चार प्रतिशत लोग ही दंत चिकित्सक के पास परामर्श के लिए जाते हैं. 

दांतों पर गंभीर प्रभाव
तनाव का दांतों की सेहत पर बुरा असर होता है. तनाव के चलते कई लोग मदिरापान और धूम्रपान शुरू कर देते हैं, जिसका आगे चलकर दांतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. जागरुकता की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों में दांतों की समस्या अधिक मिलती है. शहरों में जंक फूड और जीवनशैली की अन्य कुछ गलत आदतों के कारण दांतों में समस्याएं पैदा हो जाती हैं. प्रसंस्कृत भोजन में चीनी अधिक होने से भी नई पीढ़ी में विशेष रूप से दांत प्रभावित हो रहे हैं. 
दांतों में सेंस्टिविटी
दांतों में थोड़ी सी भी परेशानी को अनदेखी नहीं करनी चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, दंत चिकित्सक से मिलना चाहिए. दांत दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव और दांतों में सेंस्टिविटी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. वयस्कों के अलावा, दांतों की समस्याएं बच्चों में भी आम होती है. दूध की बोतल का प्रयोग करने वाले शिशुओं के आगे के चार दूध के दांत अक्सर खराब हो जाते हैं."
दूध की बोतल से हो सकते हैं दांत खराब 
दूध की बोतल से बच्चों के दांत खराब हो सकते हैं. माताओं को हर फीड के बाद एक साफ कपड़े से शिशुओं के मसूड़े और दांत पोंछने चाहिए. अगर अनदेखा छोड़ दिया जाए तो दंत संक्रमण से हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं."
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दांतों की देखभाल के उपाय : 

* दिन में दो बार ब्रश करें. 

* फ्लॉसिंग उन दरारों को साफ करने में मदद करता है जहां ब्रश नहीं पहुंच पाता है.

* बहुत अधिक चीनी खाने से बचें. स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ भी दांतों के क्षय का कारण बन सकते हैं, क्योंकि चीनी लार में जीवाणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड बनाती है जो दांतों के इनेमल को नष्ट कर देता है.

* जीभ को भी नियमित रूप से साफ करें. 

* किसी भी असामान्य संकेत की उपेक्षा न करें. यदि मसूड़ों में सूजन हो या खून आ जाए तो दंत चिकित्सक से परामर्श करें. 

* दांतों की जांच हर छह महीने में कराएं. दांतों की सफाई और एक वर्ष में दो बार जांच-पड़ताल आवश्यक है.

बुधवार, 1 नवंबर 2017

सीताफल जहॉ भी दिख जाये खाना जरूर कारण हम आपको बता रहे हैं

सीताफल जहॉ भी दिख जाये खाना जरूर कारण हम आपको बता रहे हैं


सीताफल एक ऐसा फल है जो सर्दी के मौसम में बाजारों में मिलता है । सीताफल को इंग्लिश में कस्टर्ड एप्पल कहते है और शरीफा नाम से भी ये फल जाना जाता है । सीताफल ये अनगिनत औषधियों में शामिल है ये फल पकी हुई अवस्था में बहार से सख्त और अंदर से नरम और बहुत ही मीठा होता है । इसका अंदर का क्रीम सफ़ेद रंग का और मलाईदार होता है । इसके बीज काले रंग के होते है । मार्किट में आजकल सीताफल की बासुंदी शेक और आइसक्रीम भी मिलते है । यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है । इसमें विटामिन होता है इसके अलावा इसमें नियासिन विटामिन ए राइबोफ्लेविन थियामिन ये तत्व होते है इसके इस्तेमाल से हमें आयरन कैल्शियम मॅग्नीज़ मैग्नेशियम पोटैशियम और फोस्फरस मिलते है । खास बात यह है कि सीता फल में आयरन अधिक मात्रा में होता है । इसके अन्दर मौजूद पोटैशियम और मैग्नेशियम ह्रदय के लिए बहोत ही अच्छा होता है मैग्नेशियम शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता इसके फाइबर की प्रचुर मात्रा से ब्लड प्रेशर अच्छा रहता है । इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है । इसमें विटामिन और आयरन खून की कमी को दूर करके हीमोग्लोबिन बढ़ता है ।

1. अगर आपको कब्ज की समस्या हो तो सीता फल से ये दूर हो सकती है । सीता फल में पर्याप्त मात्रा में कॉपर तथा फायबर होते होते हैं जो मल को नरम करके कब्ज की समस्या को मिटा सकते है । इसके उपयोग से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है ।
2. गर्भवती महिला के लिए सीता फल खाना लाभदायक होता है इससे कमजोरी दूर होती है, उल्टी व जी घबराना ठीक होता है । सुबह की थकान में आराम मिलता है, शिशु के जन्म के बाद सीताफल खाने से ब्रेस्ट दूध में वृद्धि होती है ।
3. यदि आप कमजोर हो या आपको वजन बढ़ाना हो तो सीताफल का भरपूर उपयोग करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शक्कर अच्छी मात्रा में होती है। जो बिना किसी नुकसान के वजन बढ़ाकर व्यक्तित्व आकर्षक दे सकती है । इसके नियमित सेवन से पिचके हुए गाल और कूल्हे पुष्ट होकर सही आकार में आ जाते हैं और व्यक्तित्व में निखार आता है ।
4. सीता फल के पेड़ की छाल में पाए जाने वाले टैनिन के कारण इससे दांतों और मसूड़ों को लाभ मिलता है । सीता फल दांत और मसूड़ों के लिए फायदेमंद होता है । इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम दांत मजबूत बनाता है।। इसकी छाल को बारीक पीस कर मंजन करने से मसूड़ों और दांत के दर्द में लाभ होता है । यह मुंह की बदबू भी मिटाता है ।
5. सीता फल में पाए जाने वाले विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, तथा राइबोफ्लेविन के कारण यह आँखों के लिए फायदेमंद होता है। यह नेत्र शक्ति को बढ़ाता है तथा आँखों के रोगों से भी बचाव करता है । जिन लोगों का काम ज्यादा लैपटोप प्रयोग वाला होता है उनके लिये इस फल का नियमित सेवन करना बहुत ही अच्छा लाभकारी रहता है ।

6. यह मानसिक शांति देता है तथा डिप्रेशन तनाव आदि को दूर करता है । कच्चे सीताफल के क्रीम खाने से दस्त व पेचिश में आराम आता है। कच्चे क्रीम को सूखा कर भी रख सकते है। जरुरत पड़ने पर इसे भिगो कर खाने पर यह दस्त मिटाने में उपयोगी होता है ।

रविवार, 8 अक्तूबर 2017

नीम की पत्तियां और दातुन के फायदे जानकार चौंक जाएंगे आप

नीम की पत्तियां और दातुन के फायदे जानकार चौंक जाएंगे आप


नीम सिर्फ एक पेड़ का नाम नहीं, बल्कि सेहत का खज़ाना भी है लेकिन शायद ही आपको यह मालूम हो की नीम आपके आंतरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ बाहरी सुन्दरता के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है चाहे पिम्पल्स, ब्लैकहैडस या फिर फाइन लाइस की समस्या हो या फिर डेड्रफ़ या हेयरफॉल से परेशान हो, नीम आपको मदद कर सकता है नीम की पत्तियां घरों में कई तरह से काम आती है. लेकिन जरुरत है तो इसके गुणों को समझकर इस्तेमाल करने की. इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं गुणों की खान नीम की पत्तियों के बारे में.

नीम की दातून दांतों के लिए फायदेमंद
नीम की दातून हमारे दांतों के लिए काफी फायदेमंद होती है नीम की दातून एक माउथफ्रेशनर का काम करती है, जिससे मुंह से आने वाली दुर्गन्ध से राहत पाई जा सकती है इसका प्रयोग करके हम अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं इसके लिए मार्केट में मिलने वाली दातून की बजाय नीम के पेड़ से तोड़कर तुरंत बनाई गई दातून का प्रयोग करना ज्यादा उचित होता है.

रूखी त्वचा हो तो करें यह उपाय
अगर स्किन बहुत ड्राई है तो नीम फेसपैक लगायें इसमें कुछ मोइश्चराइजिंग तत्व होते हैं जो ड्राई स्किन को खुरदुरी होने से बचाते हैं थोडा सा नीम का पावडर लें और उसमे कुछ बूंदे ग्रेपसीड आयल की मिला लें. इसे अपने चेहरे पर लगाएं और दो से तीन मिनट के बाद ठन्डे पानी से धो लें. एक हफ्ते में एक या दो बार दोहराएं और फिर फ़र्क देखें.

स्किन के लिए उपयोगी होता है नीम
नीम की पत्तियां त्वचा की सुंदरता बढ़ाने में मददगार हो सकती है नीम की पिसी हुई पत्तियां और हल्दी मिलकर लगाने से मुहांसे, फुंसी आदि ठीक होते हैं नीम की पत्तियां डालकर उबाला हुआ पानी स्किन टोनर की तरह काम करता है. इसका फेस पेक भी बनाया जा सकता है इसके लिए थोड़े से पानी में कुछ नीम की पत्तियां और संतरे के छिलके उबाल लें. छानकर पानी ठंडा कर लें इसमें मुल्तानी मिटटी, दही, शहद और दूध मिलाकर मुलायम पेस्ट बना लें इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें फिर धो लें इससे चेहरे पर चमक आ जाती है और फोड़े फुंसी, ब्लैकहेड्स आदि दूर होते हैं अगर आप खाना बनाते वक़्त या किसी दुसरे कारण से अपना हाथ जला बैठी है तो तुरंत उस जगह पर नीम की पत्तियों को पीसकर लगाएं.

संक्रमण को फ़ैलने से रोकती हैं
त्वचा के रोगों में नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से नहाने से बहुत लाभ होता है इससे त्वचा की खुजली या जलन आदि में भी आराम मिलता है यह पानी पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और आँतों की कार्यविधि सुधरती है लेकिन अगर किसी प्रकार का रोग हो तो बिना डॉक्टरी सलाह के नीम का प्रयोग करने से बचना चाहिए नीम की सूखी हुई पत्तियों का धुंआ करने से मच्छर दूर भागते है इनका प्रयोग गमलों में खाद के लिए भी किया जा सकता है.

यह भी हैं लाभ :

1. नीम की पत्तियों को अलमारी में रखने से कपड़ों में कीड़े नहीं लगते. इन्हें गेंहू या चावल आदि के ड्रम या पीपे में नीचे बिछाने से उनमे भी कीड़े लगने का डर नहीं रहता.

2. नीम की सूखी हुई पत्तियों से तैयार खाद का प्रयोग करने से फसल को कई प्रकार के कीटों से बचाव होता है.

3. घर में गमलों में लगाए जाने वाले पौधे पर पानी में नीम का तेल डालकर छिड़काव करने से पौधे पर लगे कीट नष्ट हो जाते हैं.

4. नीम का तेल लगाने से मासपेशियों के दर्द तथा जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.

5. नीम एक औषधि है किसी भी औषधि को लेने के कुछ नियम परहेज आदि होते है अन्यथा औषधि नुकसानदेह भी हो सकती है.

6. अगर नीम की पत्तियों को इस्तेमाल करने के बाद आपको उलटी, दस्त, चक्कर आना, बेहोशी आदि लक्षण हो तो इस्तेमाल फ़ौरन बंद कर देना चाहिए.

सोमवार, 25 सितंबर 2017

नीम के ये पांच फायदे हैरत में डाल देंगे आपको

नीम के ये पांच फायदे हैरत में डाल देंगे आपको


अगर आपके घर के सामने नीम का पेड़ है तो आप वाकई बहुत भाग्यशाली हैं. गर्मी में ठंडी हवा देने के साथ ही ये एक ऐसा पेड़ है जिसका हर हिस्सा किसी न किसी बीमारी के इलाज में कारगर है. इतना ही नहीं विभि‍न्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी नीम को प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जाता है.

✔नीम के फायदे:

अगर आप खाना बनाते वक्त या किसी दूसरे कारण से अपना हाथ जला बैठी हैं तो तुरंत उस जगह पर नीम की पत्तियों को पीसकर लगा लें. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घाव को ज्यादा बढ़ने नहीं देता है.

2. कान दर्द में
अगर आपके कान में दर्द रहता है तो नीम का तेल इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद रहेगा. कई लोगों में कान बहने की भी बीमारी होती है, ऐसे लोगों के लिए भी नीम का तेल एक कारगर उपाय है.
3. दांतों के लिए
कुछ वक्त पहले तक नीम की दातुन, ब्रश की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय थी. एक ओर जहां दांतों और मसूड़ों की देखभाल के लिए हम तरह-तरह के महंगे टूथपेस्ट इस्तेमाल करते हैं वहीं नीम की दातुन अपने आप में पर्याप्त होती है. नीम की दातुन पायरिया की रोकथाम में भी कारगर होती है.

4. बालों के लिए भी है फायदेमंद
नीम एक बहुत अच्छा कंडीशनर है. इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर उसके पानी से बाल धोने से रूसी और फंगस जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

5. फोड़े और दूसरे जख्मों पर लगाने के लिए
कई बार ऐसा होता है कि खून साफ न होने की वजह से समय-समय पर फोड़े हो जाते हैं. ऐसे में नीम की पत्ती को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से फायदा होगा. साथ ही इसके पानी से चेहरा साफ करने पर मुंहासे नहीं होते हैं.

सोमवार, 18 सितंबर 2017

अनानास से वज़न घटाऐं, सुंदरता बढ़ाएं

अनानास से वज़न घटाऐं, सुंदरता बढ़ाएं


गर्मियों की चिलचिलाती धूप से हर कोई परेशान रहता है और इसी के साथ आपको कमजोरी और चक्कर भी आते है। धूप शरीर का ग्लूकोज छिन लेता है। ऐसे में अपने शरीर में पानी की मात्रा का सही बनाए रखने के लिए आपको इस मौसम में किसी फल का जूस जरुर पीना चाहिए। अगर बात अनानास की करें, तो आपको अनानास का जूस पीना चाहिए इसके ऐसे कई फायदे है जो हमारे शरीर का चुस्त और सेहतमंद बनाते है

1- अनानास फल आपके शरीर के वजन को कम करने में भी कारगर है। इसका रोजाना सेवन करने से आप सुंदर और स्वस्थ शरीर पा सकती है।
2- इस फल में अधिक मात्रा में मैग्निशियम पाया जाता है जिसके चलते आपके शरीर की हड्डियों और टिशूज को ताकत मिलती है। आपको बता दें कि एक कप अनानास के रस में 73 प्रतिशत मैग्निशियम मौजूद होता है। जो किसी और फल के मुकाबले ये कहीं ज्यादा है।
3- अनानास सिर्फ शरीर की बीमारियों को ही दूर नहीं करता बल्कि ये आपके मसूड़ो और दातों को भी स्वस्थ रखने में कारगर साबित होता है। इससे आपके दांत मजबूत बनते है और गाठिया जैसे रोग में भी फायदेमंद होते है। इसके अलावा अनानास सूजन कम करने के लिए भी लाभदायक साबित होता है।
4- अनानास का जूस मैक्यूलर डीजेनेरश को रोकने की क्षमता रखता है। मैक्यूलर डीजेनेरश की बीमारी में 60 या 60 से ज्यादा उम्र के लोंगो में आंखों से देखने की क्षमता खत्म हो जाती है। इसमें हल्के हल्के आंखों के रेटीना के सेंट्रल विजन खत्म हो जाता है।
5- अनानास में विटामिन सी मौजूद होता है जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसके अलावा भी आपको कई बीमारियों से बचाकर रखता है। ये आपके शरीर के रोगों को रोकने की क्षमता में सुधार लाता है।
6- अगर आप हाई ब्लड प्रेशर जैसी परेशानी से पीड़ित है तो आप अपनी डाइट में अनानास को जरुर शामिल करें। क्योंकि इसमें पोटेशियम अधिक मात्रा में होता है लेकिन सोडियम बहुत कम मात्रा में होता है।
7- आपके नाखून विटामिन की कमी के कारण कमजोर और सूख जाते है। दरअसल, विटामिन बी की कमी आपके नाखूनों में दरारें डाल देती है जिसकी वजह से नाखून बेजान होकर टूट जाते है। अनानास का सेवन करने से नाखून स्वस्थ और खूबसूरत रहते हैं।
8- गर्मी हो या सर्दी कुछ लोगों के होंठ सूखते है और उस पर परतें पड़ने लगती है तो आप अनानास को खाएं या इसका जूस पिएं। ये आपके चेहरे की खूबसूरती बढ़ाता है और आपके चेहरे पर पड़ी झुर्रियों को दूर करता है।

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

जामुन तो फायदेमंद होता ही है, इसकी गुठलियां के फायदे जानकार आप कभी गुठलियां भी नहीं फेकेंगे

जामुन तो फायदेमंद होता ही है, इसकी गुठलियां के फायदे जानकार आप कभी गुठलियां भी नहीं फेकेंगे


गर्मियों के मौसम में कुछ फल ऐसे होते हैं जो लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। आम तो फलों का राजा होता है इसके साथ ही जामुन भी कुछ कम नहीं है। एक बार जो जामुन के मजे ले लेता है वह इसे भूलता नहीं है। जामुन के सेवन से शरीर को कई फायदे होते हैं। यकीन मानिये जामुन में ऐसे-ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिनके बारे में जानकर इसे ना खाने वाले भी इसका सेवन शुरू कर देंगे।

गुठलियों में मौजूद होते हैं कई तत्व:
हालांकि जो लोग जामुन का सेवन करते हैं, वह जामुन तो खा लेते हैं लेकिन इसकी गुठलियों को फेंक देते हैं। शायद उन्हें पता नहीं होता है कि जामुन के साथ ही उसकी गुठलियों में भी कई तत्व मौजूद होते हैं, जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। जामुन की गुठलियों में विटामिन ए और सी पाया जाता है जो पाचनक्रिया को सही रखता है। इसके साथ ही जामुन की गुठलियों के कई और भी फायदे होते हैं।

इस तरह इस्तेमाल करें जामुन की गुठलियों को:
जामुन खाने के बाद उसकी गुठलियों को फेंके नहीं बल्कि उन्हें इकठ्ठा कर लें। इसके बाद अच्छी तरह धो लें। धोने के बाद गुठलियों को धूप में सूखने के लिए रख दें। जब गुठलियां अच्छी तरह सूख जाए तो इसका छिलका उतारकर इसे छोटे-छोटे टुकड़े में करके पीस लें। इसे पीसने के बाद किसी कांच की शीशी में भरकर रख दें।

जामुन की गुठलियों के फायदे:

*- मधुमेह के रोगी के लिए जामुन के गुठलियों से बना हुआ पाउडर बहुत ही फायदेमंद होता है। इसे हर रोज खाली पेट एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। इससे मधुमेह नियंत्रित होता है।

*- जिन लोगों को पेचिश की समस्या होती है, उन्हें एक-एक चम्मच इस पाउडर का सेवन दिन में 2 से 3 बार करना चाहिए।

*- जिन महिलाओं को पीरियड के समय अधिक ब्लीडिंग हो रही हो वह इस पाउडर में 25% पीपल की छाल का चूर्ण मिलाकर दिन में 2-3 बार ठंढे पानी से एक-एक चम्मच लें। कुछ ही समय में आराम दिखना शुरू हो जायेगा।

*- दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से बचने के लिए इस पाउडर से मंजन करें। आपके दांत और मसूड़े मजबूत हो जायेंगे।

*- कई छोटे बच्चे रात के समय बिस्तर पर ही पेशाब कर देते हैं। बच्चे की इस समस्या को दूर करने के लिए उन्हें दिन में 2-3 बार आधा-आधा चम्मच इस पाउडर को पानी के साथ पिलायें।

बुधवार, 30 अगस्त 2017

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है सुपारी का सेवन

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है सुपारी का सेवन


सुपारी का प्रयोग गुटखे या पान-मसाला के तौर पर करने से ये स्वास्थ्य को गंभीर समस्यायें हो सकती हैं, किसी भी रूप में सुपारी से होने वाली स्वास्थ्य समस्‍याओं के बारे में विस्तार से पढ़ें।

नुकसानदायक होती है सुपारी
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट और मिनरल से भरपूर सुपारी वैसे तो एक आयुर्वेदिक औषधि होती है। लेकिन पान-मसाला और मीठी सुपारी मे इसका सेवन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो जाता है। अगर औषधि के रूप मे इसका प्रयोग करेंगे तो ये आपको कई बीमारी से निजात दिला सकती है वहीं गुटखे के तौर पर इसका सेवन कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकती है।

मीठी सुपारी के नुकसान
इसके खाने से थ्री-फोर वेज पायरिया होता है। इससे दूध के दांत ही खराब नहीं होते बल्कि आगे चलकर ये कैंसर का रूप धारण कर लेता है। बताया कि खास तौर से जीभ का कैंसर ज्यादा होता है। हर मीठी सुपारी बच्चों के लिए हानिकारक होती है।  यह केमिकल से तैयार की जाती है। इसके खाने से मुंह में जकड़न आना शुरू हो जाती है तथा धीरे-धीरे मुंह बंद होने लगता है।

महिलाओं के लिए खतरनाक
सुपारी का ज्यादा सेवन करने से महिलाओं को स्तन रोग, स्तन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, बांझपान, मानसिक धर्म का अचानक बंद हो जाना, अनियमित मासिक धर्म, कम उम्र में रजोनिवृत्ति, काम शिथिलता, सेक्स के प्रति अरुचि या अत्यधिक सेक्स आदि में से कोई एक या कई समस्याएं एक साथ उत्पन्न हो सकती हैं।

म्यूकस फाइब्रोसिस
मुंह के ना खुलने को म्यूकस फाइब्रोसिस कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण सुपारी -तम्बाकू उत्पादों का सेवन करना होता है। मुंह नहीं खुलेगा तो दांतों और मसूड़़ों की सफाई कैसे होगी। मुंह नहीं खुलना कैंसर से ठीक पहले के लक्षण हैं। दांतों पर लगा इनेमल घिस जाता है और दांत संवेदनशील बन जाते हैं। दांतों के पेरिओडोंटल टिश्यू (दांत की हड्डी) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और दांत ढीले हो जाते हैं।

सेक्स हार्मोन प्रभावित
गुटखे में मौजूद कई किस्म के रसायन हमारे डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते है।इसके अलावा हमारे सेक्स हार्मोन भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।  हमारे शरीर के हर अंग में पाए जाने वाले साइप-450 नामक एंजाइम की कार्यक्षमता पर इसका बुरा असर पड़ता है। हमारे शरीर में ये एंजाइम हार्मोंस के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

छाले चिंताजनक
सुपारी चबाना एक बहुत बुरी लत है। अगर आप सुपारी को तंबाखू के बिना कभी-कभी चबाते हैं तो ज़्यादा नुकसान की आशंका नहीं है। एक शोध के अनुसार चिंताजनक बात तब है जब मुँह में छाले हो जाएँ जो ठीक ही नहीं हो रहे हों, या फिर मुँह के भीतर लाल या सफेद रंग के धब्बे हों और मुँह खोलने में दिक्कत आ रही हो।

कैंसर
कैंसर से सुपारी और तंबाकू का गहरा संबंध है। तंबाकू, जर्दा तथा सुपारी चबाने से कैंसर के होने का रास्ता आसान हो जाता है। ये पदार्थ मुंह, गले व भोजन की नली तथा पाचन संस्थान में पहुँचकर पतली तह के रूप में जम जाते है। ये धीरे-धीरे सूजन का रूप धारण कर आंतरिक त्वचा पर जम जाते है जो आसानी से साफ नहीं होती। ये आंतों में भी जम जाते है और धीरे-धीरे कैंसर में बदल जाते है।

अन्य रोग
इसका अत्यधिक सेवन करने के  अन्य दुष्प्रभाव होते है,पाचन तंत्र को प्रभावित करने में ,जिसके चलते भूख नहीं लगती। ह्रदय रोग,फेफड़ों के रोग,दमा,मानसिक अवसाद आदि व्याधियां अपना शिकार बनाती हैं। खाने में जलन यहाँ तक कि ताजे पानी से भी जलन, रक्तचाप बढ़ना,  छाती का दर्द जैसी प्रारम्भिक शिकायतों के बाद में स्थायी बन जाती है।

मंगलवार, 29 अगस्त 2017

कुछ ही मिनटों में दाँत के दर्द से राहत पाएं!!

कुछ ही मिनटों में दाँत के दर्द से राहत पाएं!!


सबसे बुरा और परेशान करने वाला दर्द दाँत का दर्द माना जाता है, जो के बर्दाश्त से बाहर होता है। यह दर्द आपकी मनोदशा को खराब कर देता है इस की वजह से आप कुछ खा पी नहीं सकते।

दाँत के दर्द के कारण

  • मसूढ़ो की बीमारियाँ
  • दाँत संक्रमण
  • प्लाक
  • दाँत पर चोट
  • दाँत निकलना
  • गलत भराई
अगर आप को दाँत में दर्द है तो आपको तुरन्त दाँत चकित्सक को दिखाना चाहिए वह आपका सही इलाज़ कर सके।लेकिन दाँत का दर्द कभी भी हो सकता है, कई बार दाँत का दर्द बहत गलत समय पर उत्पन्न होता है जैसे के रात को, इस सूरत में हम दाँत चकित्सक के पास जा कर इलाज़ भी नहीं करवा सकते। दर्द भी इतना तेज और परेशान करने वाला होता है जिस की वजह से हम सुबह का इंतजार भी नहीं कर सकते।
  • ½ चमच लौंग का पाउडर
  • ½ चमच नारियल तेल
बताई गई सामग्री को एक साथ मिला कर पेस्ट तयार करने के बाद , ड्रापर या टूथब्रश की सहायता से दर्द ग्रस्त जगह पर दिन में तीन बार लगाने से रहत मिलती है।

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

केवल दो मिनट में दूर करेगा ये तेल दांतों का पीलापन

केवल दो मिनट में दूर करेगा ये तेल दांतों का पीलापन


लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए खिलखिलाती मुस्कान बहुत जरूरी होती है। और खिलखिलाती मुस्कान के लिए मोतियों जैसे सफेद दांतों की जरूरत पड़ती है। लेकिन अधिकतर लोग दांतो में पीलापन या कालापन होने के कारण किसी के सामने खुल कर ना तो बात कर पाते हैं और ना ही हंस पाते हैं। अगर दांतों के पीलापन होने पर भी व्यक्ति खुलकर हंसता है तो कोई ना कोई जरूर टोक देता है। जिसके चलते व्यक्ति की पर्सनेलिटी तो खराब होती ही है साथ ही उस व्यक्ति को भारी शर्म भी महसूस होती है। अगर आप भी अपनी रोममर्रा की जिंदगी में दांतों को लेकर इस तरह की शर्मिंदगी का सामना कर रहे हैं तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको दांतों का पीलापन दूर करने के लिए एक ऐसा घरेलू नुस्खा बता रहे हैं जिसके प्रयोग से आप सिर्फ 2 मिनट में सफेद और चमकदार दांत पा लेंगे।

लोगों को दांतों से संबंधित कई तरह की समस्याएं होती हैं। किसी के दांतों में पीलापन और कालापन होता है तो कुछ लोगों को दांतों में कीड़ा लगने की समस्या होती है। जो लोग दूषित खानपान, अधिक चाय या कॉफी का सेवन या दांतों की सफाई नहीं करते हैं उन्हें दांतों से संबंधित अधिक समस्याएं होती हैं। आज हम 2 मिनट में पीले दांतों को सफेद करने के लिए जिस घरेलू नुस्खे की बात कर रहे हैं उसका नाम है सरसों का तेल। जी हां, सब्जी छौंकने और सिर पर लगाने के अलावा सरसों का तेल दांतों का पीलापन चुटकियों में दूर करता है।

सरसों के तेल से दांत चमकाने के लिए आपको लगभग 2 चम्म्च सरसों का तेल, 1 चम्मच नमक और 1 चम्मच बेकिंग पाउडर की जरूरत होती है। सरसों का तेल और नमक का मिश्रण दांतों का पीलापन और दांतों से संबंधित हर समस्या को दूर करने के लिए वरदान है। इसे उपयोग में लाने के लिए 1 चम्मच सरसों के तेल में आधा चम्मच नमक मिलाकर लगभग 10 मिनट तक हल्के हाथों से दांतों की मालिश करें।
इस नुस्खे का असर आपको अपने पीले दांतों पर तुरंत दिख जाएगा। इसके अलावा आप सरसों के तेल में बेकिंग सोडा मिलाकर भी अपने दांतों को साफ कर सकत हैं। अगर आपको दांतों में दर्द और पीलापन दोनों परेशानियां है तो आप रोजाना सुबह सरसों के तेल में नमक मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे अपने ब्रश में रखकर दातुन करें। इससे आपकी दांतों से संबंधित सभी बीमारियां तो दूर होंगी ही साथ ही आपके दांत स्वस्थ, मजबूत और चमकदार भी होंगे।

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

गूलर करता है कई रोगों को जड़ से ख़त्म, जानें कैसे ?

गूलर करता है कई रोगों को जड़ से ख़त्म, जानें कैसे ?


गूलर का पेड़ भारत में हर जगह मौजूद है| यह लंबाई 50 से 60 फुट होती है। गूलर पेड़ के फल से सफेद दूध आता है। जब इस पेड़ को पकाया जाता है तो यह लाल रंग का हो जाता है। यह स्वाद में काफी मीठा होता है और मार्च से जून के महीने में पाया जाता है। इसको उम्बरो, अम्बर, उदम्बर आदि नामो ने लोग जानते है| आज हम आपको बता रहे है इस पेड़ के आयुर्वेद फायदों के बारे में –

निमोनिया के रोग को दूर करे :
निमोनिया से जूझ रहे रोगी को गूलर का काढ़ा बना कर इसका सेवन करना चाहिए| इससे बहुत आराम मिलेगा|

डायबिटीज में असरदार :
डायबिटीज के मरीज़ों को गूलर के फल को पीसकर इसका इस्तेमाल पानी के साथ करना चाहिए। ऐसा रोज़ाना करने से आपकी डायबिटीज कंट्रोल रहेगी|

दांतों की समस्या में फायदेमंद :
गूलर का फल दांत से जुडी समस्याओं में असरदार होता है| इसके फलों को पानी में डालकर उबालें और काढ़ा बनाए| फिर इस पानी से कुल्ला करें। ऐसा करने से दांत सी जुडी समस्या खत्म हो जाएगी और साथ ही मसूढ़े और दांत भी हैल्दी रहेंगे|

नकसीर में लाभदायक :
गूलर का फल नकसीर की परेशानी को दूर करने में फायदेमंद होता है| इसके फलों को सुखाएं, पीसें और छान कर उसमे चीनी डाल लें| इस मिक्सचर का सेवन करने से आप की नकसीर की समस्या खत्म हो जाएगी|

मुंह के छाले से दिलाए छुटकारा :
गूलर की पत्तियों को चबाने से मुंह के छाले आसानी से दूर हो जाते है।

फोड़ा फुंसी दूर करे :
अगर आप फोड़े फुंसी की समस्या से जूझ रहे तो आप गूलर के दूध को उस जगह पर लगा सकते है। ऐसा करने से फोड़े फुंसी गायब हो जाएंगे|

बुधवार, 2 अगस्त 2017

अब घर बैठे करे पायरिया का खात्मा इन घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल से

अब घर बैठे करे पायरिया का खात्मा इन घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल से


आज की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में हमे इतनी भी फुरसत नहीं मिलती की खाना खाने के बाद हम अपनी दांतो की सफाई कर सके जिसके कारण मुह में गंदगी रह जाती हैं और पायरिया जैसी शिकायत हो जाती हैं, क्योंकि हमारे दांतो को सुंदरता और स्वस्थ्य का प्रतीक माना जाता हैं, लेकिन अगर आपको पायरिया जैसी बिमारी हैं तो यह आपके सुंदरता पर ग्रहण लगा देते हैं.पायरिया के बारे में कई प्रकार के तथ्य होते हैं, आईये जाने क्या होते हैं पायरिया के कारण वा उससे बचने के उपाय.

क्या है पायरिया:

पायरिया दांतो की बिमारी होती हैं, जिसमे खून निकलना वा साँसों की बदबू की शिकायत होती हैं, पायरिया के कारण ठंडा, गरम भी बहुत ज़्यादा दांतो में लगता हैं जिसके कारण कोई भी ठंडी चीज़ खाने में मुसीबत हो जाती हैं.
इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है, इस प्रकार यह हमारे दांतो के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं माना जाता हैं. यह बिमारी आमतौर पर लोगो को हो जाती हैं इससे कम से कम 80 प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं.

क्यों होता हैं पायरिया:

हमारे मुह में पाए जाने वाले हज़ारो की तादाद में बैक्टेरिया तब दांतो और मसूड़ो को नुक्सान पहुँचाते हैं जब इनकी साफ़ सफाई अच्छे से ना हो रही हो.
  • दांतो की साफ़ सफाई ना करने के कारण होता हैं पायरिया.
  • जीभ ना साफ़ करना वा मुह की उचित सफाई ना करना.
  • कैल्शियम की कमी कारण भी पायरिया हो जाता हैं.
  • आनुवंशिकता भी हैं एक कारण पायरिया होने का.

पायरिया के लिए घरेलू इलाज:

पायरिया का इलाज मुमकिन हैं अगर आप अपने दांतो की साफ़ सफाई नियमित रूप से करे वा अपने खाने पीने का ध्यान रखे तो पायरिया से छुटकारा मिल सकता हैं. पायरिया का इलाज निम्न उपायो से मुमकिन हैं.
  • मुंह की अंदरुनी साफ-सफाई का ध्यान रखें इससे पायरिया ख़त्म होने की पूरियो गुंजाइश होती हैं.
  • दांतों को अच्छी तरह से साफ सफाई करें, खाना खाने के बाद दानो तो साफ़ करे वा दो टाइम ब्रश करे.
  • जीभ को अच्छी तरह साफ करें, इसके लिए कई जेल आते हैं उनका इस्तेमाल करे.
  • हार्ड टूथब्रश का इस्तेमाल नहीं करें, बेबी टूथब्रश या साफ्ट ब्रश वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करे.
  • रात को सोने से पहले भी ब्रश करें, रात को सोने से पहले ब्रश करना ज़रूरी हैं
करे आवलाँ का उपयोग: आवला का उपयोग दांतो को मज़बूत बनाता हैं, आवला को जलाकर सरसो के तेल में मिलाकर दांतो पर रगड़े ऐसा करने पर पायरिया की शिकायत दूर हो जायेगी.
नीम की पत्ती हैं उपयोगी: नीम की पत्ती काली मिर्च और काला नमक ले कर उसका पेस्ट बना लें और इसका सेवन नियमित तौर पर करे इस करने पर पायरिया की परेशानी ख़त्म हो जायेगी.
लौंग का तेल: लौंग दांतो को मज़बूत बनाने का काम करता हैं, लौंग खाना दांतो के लिए अच्छा होता हैं इसी प्रकार खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं. इसका नियमित तौर पर सेवन किया जा सकता हैं.
दालचीनी का पेस्ट दूर करे पायरिया को: जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी, दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें कर इसे , बंद बर्तन में जलाकर अच्छी तरह से पीस लें. फिर इस मंजन का प्रयोग नियमित तौर पर दो टाइम करे इससे पायरिया ख़त्म हो जाएगा वा साँसों की बड़बो भी ख़त्म हो जायेगी.
करे फिटकरी का इस्तेमाल: फिटकरी का इस्तेमाल दांतो के लिए अच्छा होता हैं , इस प्रकार फिटकरी और काला नमक बारीक पीस लें इस पिसे हुए पेस्ट को दांतो पर मलने से पायरिया ख़त्म हो जाता है.

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

हिलते दांतों के लिए घरेलू उपाय, जरुर शेयर करें.

हिलते दांतों के लिए घरेलू उपाय, जरुर शेयर करें.


दांतों की ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडोंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइब्रस टिश्‍यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्‍यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्‍या होने लगती है। यह समस्‍या दांतों को बहुत ज्‍यादा रगड़ने, गम क्‍लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है। 

1. काली मिर्च और हल्‍दी का पेस्ट --
इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्‍या होने पर काली मिर्च और हल्‍दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्‍ट बनाना लें। इस पेस्‍ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्‍ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्‍या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें। 

2. पुदीने का तेल
पुदीने के तेल में दांतों की समस्‍याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्‍टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्‍या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्‍छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्‍ला करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। 

3. सरसों का तेल और नमक
प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्‍ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्‍द ही आराम मिलने लगेगा। 

4. आंवला
आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्‍ला कर लें या इसे पी लें।

5. लौंग के तेल के प्रयोग
लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्‍तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्‍यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।

6. अजवायन की पत्तियों का तेल
आजवाइन की पत्‍ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है। 

7. नमक का प्रयोग करें
नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्‍मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

शनिवार, 29 जुलाई 2017

इन घरेलू नुस्खों से झट से पा सकते हैं पीले दांतों से छुटकारा

इन घरेलू नुस्खों से झट से पा सकते हैं पीले दांतों से छुटकारा


आपकी हंसी चाहे जितनी मोहक हो लेकिन अगर आपके दांतों में पीलापन है तो वो ना सिर्फ आपकी हंसी को बल्कि आपके चेहरे को बदसूरत बना सकता है। इसलिए अपने चेहरे की साफ सफाई और सुंदरता को लेकर आप जितना फिक्रमंद होते हैं उतनी ही चिंता दांतो की भी करनी चाहिए। दरअसल दांतो के पीलेपन की मुख्य वजह उसकी ठीक तरीके से साफ सफाई ना होना है लेकिन आजकल जिस तरह से तंबाकू, सिगरेट और शराब का सेवन बढ़ रहा है वो हमारे दांतो के लिए बहुत नुकसान देह साबित हो रहा है।

जानते हैं दांतों की सफाई के कुछ घरेलू नुस्खे:

हम सभी के किचन में एक ऐसा सामान मौजूद होता है जो हमारे बाल, त्वचा और शरीर तीनों के लिए फायदेमंद है। हर घर में आसानी से मिल जाने वाला बेकिंग सोडा सिर से लेकर पांव तक की खूबसूरती को बनाए रखने में मदद करता है। इसके प्रयोग से आप पीले दांतो को झट से सफ़ेद और चमकीला बना सकते हैं। बेकिंग सोडा का प्रयोग एक ब्‍लीच की तरह होता है जो दांतो को आसानी से साफ कर सकता है। ब्रश पर थोड़ा सा बेकिंग सोड़ा डाल कर पानी के साथ 4-5 मिनट तक दांतो को कुछ दिन तक साफ करें। कुछ ही दिनों में आप अपने दांतो को सफ़ेद और चमकीला पाएंगे।

1. स्‍ट्राबेरी का थोड़ा सा गुदा निकाल लें और इस पर थोडा सा बेकिंग सोडा छिड़क कर अपने दांतो को अच्छे से थोड़ी देर साफ़ करें। लेकिन बेकिंग सोडा का उपयोग लम्बे समय तक ठीक नहीं होता है इसलिए इसका प्रयोग कुछ दिन ही करना चाहिए।

2. सफ़ेद दांतो के लिए दिन में दो बार अपने दांतो को नींबू के रस से मालिश करें या फिर आप थोड़े से सरसों के तेल में एक नींबू की स्‍लाइस को डूबो कर उसमें थोड़ा सा नमक डाल लें और कुछ देर तक अपने दांतो को साफ करें बाद में दांतो को ब्रश कर लें।

3. सेब में मैलिक एसिड की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। जो की हमारे टूथपेस्ट में भी पाया जाता है। स्पेन के ग्रेनेडा विश्वविद्यालय में किये गए रिसर्च से पता चला है कि मैलिक एसिड हमारे मुंह में लार पैदा करता है। यह मैलिक एसिड दांतो को साफ़ और दाग को दूर करता है जिसकी वजह से हमारे दांत साफ़ और सफ़ेद दिखते हैं। सेब अच्छी तरह से चबाकर खाने से हमारे मसूड़े स्वस्थ रहते हैं और लार का उत्पादन भी अच्छे से होता है। जिसकी वजह से लार में मौजूद मैलिक एसिड अच्छी मात्रा में निकलकर हमारे दांतो को साफ़ करता है।

4. पुराने समय से ही हल्दी को दांतों के लिए वरदान माना जाता है। आधा चम्मच पीसी हुई हल्दी लेकर उसमे कुछ बूंदे पानी की मिलाकर पेस्ट बना लें और अपने टूथब्रश से दांतों को अच्छे से साफ करें। हो सकता है आपके दांत कुछ देर तक पीले दिखें लेकिन ठीक तरह से कुल्ला करने के बाद आपके दांतो में चमक आ जाएगी। दंत चिकित्सा में भी हल्दी को दांतों की सुरक्षा के लिए बहुत ही बेजोड़ नुस्खा माना गया है।

5. केले में पोटेशियन, मैग्नीशियम और मैग्नीज काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो की दांतो के लिए बहुत फायदेमंद होता है। केले का प्रयोग दांतो की गंदगी को हटाने में बहुत ही कारगर होता है। इसके लिए एक पके हुए केले को छील लें, फिर इसके छिलके को दो मिनट तक दांतों पर रगड़ें। दो से तीन सप्ताह तक इस प्रयोग को करने से आपके दांत चमक उठेंगे। छिलके को इस तरह दांतों पर घिसने से दांतो के ऊपर की परत पर जमी गंदगी साफ़ हो जाती है।

6. प्राचीन काल से ही जब टूथपेस्ट और टूथब्रश नहीं होते थे तब से ही लोग नीम की टहनी का प्रयोग दातुन के रूप में करते आये हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि नीम में कई तरह के एस्ट्रिंजेंट और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं,जो दांतो को सफ़ेद और मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके प्रयोग से साँसों में बदबू की समस्या भी दूर हो जाती है। ये स्वाद में ज़रूर कड़वा होता है, पर इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है।

बुधवार, 12 जुलाई 2017

पीपल के पेड़ के औषधीय गुण जानकार आप रह जायेगे हैरान

पीपल के पेड़ के औषधीय गुण जानकार आप रह जायेगे हैरान


आयुर्वेद में पीपल को औषधियों का खजाना माना गया है। आयुर्वेद में पीपल के औषधीय गुणों के कारण इसे कई बीमारियों को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । पीपल का बूटा-बूटा और पत्ता-पत्ता हमें निरोग बनाता है, स्वस्थ रखता है और लम्बी आयु प्रदान करता है | पीपल के अलग-अलग हिस्सों जैसे पत्तों से लेकर छाल तक का उपयोग करके बुखार, अस्थमा, खांसी, स्किन डिजीज जैसी कई  बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। आज हेर कोई ऐसे स्वस्थ शरीर की कमाना करता है जो लम्बे समय तक जीवित रह सकता है | तो आइये जानते हैं प्रकृति के ऐसे ही एक उपहार के बारे में जिसका नाम है पीपल का पेड़ |

क्या हैं पीपल के स्वास्थ्यवर्धक लाभ और उससे होने वाले घरेलु उपचार  … जानिये  

दांतों के लिए फायदेमंद होता है :- पीपल के उपयोग से मुँह की बदबू, दांतों की जडें कमजोर होना और मसूड़ों के दर्द को आसानी से दूर किया जा सकता है | इसके लिए 2 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम पीपल की छाल और कत्था को बारीक पीसकर उसका पाउडर बना लें और इससे दांतों को साफ करें। आपको इन रोगों से अवश्य मुक्ति मिलेगी।

सांस की तकलीफ दूर करे :- पीपल का पेड़ सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें। सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर रोज़ कोसे पानी के साथ एक छोटा चम्मच चूर्ण का सुबह शाम सेवन करें | इससे आपको अवश्य फायदा होगा |

दन्तकांति प्रदान करे :- पीपल की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं और दांतों में चमक आती है | इस दातुन से दन्त सम्बन्धी सभी समस्या समाप्त हो जाती हैं ।

पाचन शक्ति बढाए :- आठ लौंग,  दो हरड़, पीपल के चार फल तथा दो चुटकी सेंधा नमक को पीसकर चूर्ण बना लें और फिर इस चूर्ण को सुबह-शाम भोजन के बाद कोसे पानी के साथ लें | इससे आपकी पाचन शक्ति में सुधार होगा |

अजीर्ण रोग में दे फायदा :- पीपल की छाल, लौंग के चार नग, दो हरड़ तथा एक चुटकी हींग चारों चीजों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से अजीर्ण रोग दोर्र हो जाता है |

खट्टी डकार को दूर करे :- यदि आपको खट्टी डकारें आती हों तो पीपल के पत्तों को जलाकर उसकी भस्म में आधा नीबू निचोड़ कर सेवन करने आपको फायदा मिलेगा और खट्टी डाकर की शिकायत खत्म हो जाएगी ।

पेट के रोग दूर करे :- पीपल की छाल, जामुन की छाल तथा नीम की छाल तीनों छालों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर अच्छे से कूट लें और फिर इसका काढ़ा बनाकर सेवन करें। यह काढ़ा पेट के हर रोग के लिए उत्तम औषधि का काम करेगा |

नपुंसकता का दोष दूर करे :- यदि व्यक्ति में नपुंसकता का दोष मौजूद है और वह सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ है तो उसे शमी वृक्ष की जड़ या आसपास उगने वाला पीपल के पेड़ की जटा को औटाकर उसका क्वाथ (काढ़ा) पीना चाहिए। पीपल के जड़ तथा जटा में पुरुषत्व प्रदान करने के गुण पाए जाते हैं |

दाद और खुजली को दूर करे :- दाद, खाज और खुजली दूर करने के लिए पीपल के 4 पत्तों को चबाकर सेवन करें।  या फिर पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बना कर पियें इससे दाद व खुजली की शिकायत दूर हो जाएगी |

मंगलवार, 4 जुलाई 2017

गुड़ और चना खाने से पुुरुषों को मिलते हैं ये चमत्कारी लाभ

गुड़ और चना खाने से पुुरुषों को मिलते हैं ये चमत्कारी लाभ


आजकल युवा अपनी फिटनेस को लेकर सर्तक रहते हैं। अक्सर पुरूष बॉडी बनाने के लिए जिम में जाकर कसरत करते हैं। ऐसे में भूने गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए। सेहत के लिए गुड़ और चने काफी फायदेमंद होते हैं। पुरुषों के लिए इसे खाना बहुत बढ़िया होता है। आइए आपको बताते हैं लड़कों को इसे खाने से क्या होते हैं फायदे...

1. चेहरा पर निखार
गुड़ और चने से त्वचा में निखार आता है। मर्दों को रोजाना इसका सेवन करना चाहिए जिससे उनके चेहरे की चमक बढ़ेगी और वे पहले से ज्यादा स्मार्ट भी लगेंगे।

2. मसल्स बनाने के लिए

गुड़ और चने में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है। मर्दों को हर रोज इसका सेवन करना चाहिए।

3. वजन कम

गुड़ और चने को एक साथ खाने से शरीर का मैटाबॉलिज्म बढ़ता है जो मोटापा कम करने में मदद करता है। कई मर्द वजन कम करने के लिए जिम जाकर एक्सरसाइज करते हैं उन्हें गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए।

4. कब्ज दूर

शरीर का डाइजेशन सिस्टम खराब होने की वजह से कब्ज और एसिडिटी की समस्या हो जाती है। ऐसे में गुड़ और चने खाएं, इसमें फाइबर होता है जो पाचन शक्ति को ठीक रखता है।

5. दिमाग तेज

गुड़ और चने को मिलाकर खाने से दिमाग तेज होता है। इसमें विटामिन-बी6 होता है जो याददाश्त बढ़ाता है।

6. दांत मजबूत

इसमें फॉस्फोरस होता है जो दांतो के लिए काफी फायदेमंद है। इसके सेवन से दांत मजबूत होते हैं और जल्दी नहीं टूटते।

7. हार्ट के लिए

जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई समस्या होती है। उनके लिए गुड़ और चने का सेवन काफी फायदेमंद है। इसमें पोटाशियम होता है जो हार्ट अटैक होने से बचाता है।

बुधवार, 28 जून 2017

इन 7 अचूक तरीको से हटाएं दांतो से तंबाकू के दाग!

इन 7 अचूक तरीको से हटाएं दांतो से तंबाकू के दाग!


आज के समय में युवाओं में गुटखा-तंबाकू खाना ट्रेंड सा बन गया है, जबकि उन्हें मालूम है कि यह उनके सेहत के लिए बेहद ही हानिकारक हो सकता है। तंबाकू से हमारे दांत और स्वास्थ्य दोनों को ही नुकसान पहुंचाता है। लेकिन फिर भी कुछ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जिससे उनके दांत खराब हो जाते हैं। तंबाकू खाने से इसमें मौजूद निकोटीन, दांतों के चारों ओर जमा हो जाते हैं और दांत पीले पड़ने लगते हैं।
तंबाकू की वजह से दांतों में कई समस्याएं तो बढ़ जाती ही है, इसके अलावा कैंसर होने के भी संभावना हो सकती है। आइए बताते हैं कि दांत से तंबाकू के दाग को कैसे आसानी से हटाया जा सकता है.....

1. रोजाना ऐसे करें दांतों की सफाई
ओरल सफाई का मतलब सिर्फ ब्रशिंग नहीं है। मुंह की पूरी सफाई मतलब दिन में दो बार ब्रश, माउथ वॉश और दिन में एक बार मुंह में फ्लास करना होता है। अगर आप नियमित रूप यह सब करेंगे तो जल्द ही आपको दांतों पर पड़े तंबाकू या किसी भी प्रकार के दागों से मुक्ति मिल जाएगी।

2. दांतों को रखें क्लीन और स्मूद
दांतों पर कोई भी चीज़ तभी जमती है जब दांतों की सतह रफ होती है। इसलिए दांतों पर कुछ जमने ना देने के लिए, दांतों की सतह को हमेशा स्मूथ और साफ रखना चाहिए। इसके लिए आपको रोजाना सुबह करें और शाम को सोने से पहले ब्रश जरूर करें। खाने-पीने के बाद पानी से मुंह को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।

3. मुंह को रखें बैक्टीरिया से मुक्त
दांतों को सफेद बनाए रखने के लिए दांतों में किसी भी प्रकार की कैविटी नहीं होने देनी चाहिए। दांतों को बैक्टीरिया फ्री रखना बेहद जरूरी है।

4. बेकिंग सोडा का करें इस्तेमाल
बेकिंग सोडा दांतों पर से धब्बे हटाने का सबसे कारगर नुस्खा है। रोज़ाना ब्रश करने के बाद थोड़ा-सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमे दाग-धब्बे धीरे-धीरे साफ हो जाते हैं।

5. गाजर का करें सेवन
गाजर का दांतों के दाग-धब्बे दूर करने में मदद इसलिए मिलती है क्योंकि गाजर खाने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं। दांतों को कोनों की गंदगियों को जल्द दूर करने में सहायक होती है।

6. दांतों का कराएं चेकअप
घरेलू नुस्खे के साथ-साथ डॉक्टर की सलाह बहुत ज़रूरी है। दांतों का चेकअप कराने से आपको लंबी अवधि के दागों से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है। इसलिए एक निश्चित अंतराल पर दांतों का चेकअप कराना बहुत ज़रूरी है।

7. हल्दी का अचूक नुस्खा
यह भी उपाय कारगर साबित हो सकता है कि हल्दी में सरसों का तेल और नमक मिलाकर दांतों मे मंजन की तरह मलने से भी दांतों का पीलापन ठीक होगा। यदि आपके दांतों में पीलापन हो तो यह बेहद ही फायदेमंद हो सकता है।

सोमवार, 26 जून 2017

दांतों के पस को ठीक करने के घरेलू उपचार

दांतों के पस को ठीक करने के घरेलू उपचार


दांतों में पस मुख्य रूप से मसूड़ों में जलन और टूटे हुए दांत के कारण होता है। दांतों में पस मुख्य रूप से एक प्रकार का संक्रमण होता है जो मसूड़ों और दांतों की जड़ों के बीच होता है तथा इसके कारण बहुत अधिक दर्द होता है। इसके कारण दांत के अंदर पस बन जाता है जिसके कारण दांत में दर्द होता है। जिस दांत में पस हो जाता है उसमें बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है और वही बढ़ता रहता है जिससे उन हड्डियों में संक्रमण हो जाता है जो दांतों को सहारा देती हैं। यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो इसके कारण जीवन को खतरा हो सकता है। 

दांतों में पस होने के कारण जो दर्द होता है वह असहनीय होता है तथा इस दर्द को रोकने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं परंतु अंत में दर्द बढ़ जाता है। यदि आप भी मसूड़ों की इस बीमारी से ग्रसित हैं तो हम आपको बताएँगे कि आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं। पहले आपको इस बीमारी के लक्षण तथा कारण पहचानने होंगे।

दांतों में पस होने के कारण

  • मसूड़ों की बीमारी
  • मुंह की सफाई ठीक से न करना
  • प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना
  • टूटा हुआ दांत
  • मसूड़ों में सूजन और जलन
  • दांतों में संक्रमण
  • बैक्टीरिया
  • कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाना

उपचार दांतों में पस होने के लक्षण

  • जब भी आप कुछ खाएं तो संक्रमित जगह पर दर्द
  • संवेदनशील दांत
  • मुंह में गंदे स्वाद वाले तरल पदार्थ का स्त्राव
  • साँसों में बदबू
  • मसूड़ों में लालिमा और दर्द
  • अस्वस्थ महसूस करना
  • मुंह खोलने में तकलीफ होना
  • प्रभावित क्षेत्र में सूजन
  • चेहरे पर सूजन
  • दांतों में अनपेक्षित दर्द होना
  • अनिद्रा
  • कुछ निगलने में परेशानी होना
  • बुखार
1. लहसुन
लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक हथियार है। कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद करता है। यदि वास्तव में आपके दांत में बहुत अधिक दर्द हो रहा हो तो आप ऐसा कर सकते हैं। कच्चे लहसुन की एक कली लें। इसे पीसें और निचोड़ें तथा इसका रस निकालें। इस रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम करता है।

2. लौंग का तेल
लौंग का तेल भी संक्रमण रोकने में सहायक होता है तथा दांतों के दर्द में तथा मसूड़ों की बीमारी में अच्छा उपचार है। थोड़ा सा लौंग का तेल लें तथा इस तेल से धीरे धीरे ब्रश करें। जब आप प्रभावित क्षेत्र में इसे लगायें तो अतिरिक्त सावधानी रखें। बहुत अधिक दबाव न डालें तथा अपने मसूड़ों पर धीरे धीरे मालिश करें अन्यथा अधिक दर्द होगा। मसूड़ों पर लौंग के तेल की कुछ मात्रा लगायें तथा धीरे धीरे मालिश करें।

3. आईल पुलिंग
यह घरेलू उपचार बहुत ही सहायक है। इसमें आपको सिर्फ नारियल के तेल की आवश्यकता होती है। एक टेबलस्पून नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें। इसे निगले नहीं, इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह में रखें रहें। फिर इसे थूक दें और मुंह धो लें। आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा।

4. पेपरमिंट आईल
दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम करता है। अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें। आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।

5. नमक
यदि आप तुरंत आराम पाना चाहते हैं तो नमक से आप तुरंत आराम पा सकते हैं। इसके लिए थोड़ा सा नमक गुनगुने पानी में मिलाएं और इस पानी से गरारे करें। पहले थोड़ा दर्द महसूस होगा परंतु उसके बाद कुछ आराम मिलेगा। इसे कई बार दोहरायें और आपका दर्द लगभग 90% तक कम हो जाएगा।

6. टी बैग
टी बैग एक अन्य घरेलू उपचार है। हर्बल टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। इससे पस के कारण होने वाले दर्द से आपको तुरंत आराम मिलेगा।

7. एंटी बायोटिक्स 
दांतों में पस होने पर एक अन्य घरेलू उपचार एंटीबायोटिक्स हैं। आईबूप्रोफेन संक्रमण को ख़तम करने में सहायक है तथा इससे सूजन से भी राहत मिलती है। पैरासिटामॉल एक अन्य दर्द निवारक दवा है। अमोक्स़ीसिलीन भी एक अच्छा एंटीबायोटिक है तथा सामान्यत: डॉक्टर इसकी सलाह देते हैं।