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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा

सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा


बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं।

कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।

भुना नमक बनाने की विधि :- 

खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।

जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।

विशेष :-

  • हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह विधि नहीं अपनानी चाहिए।
  • यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को ठण्ड न लगे।
  • अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।
  • इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें।
  • और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

सर्दी, खांसी, और बुखार से छुटकारा पाने के लिए घर पर काढ़ा कैसे बनायें

सर्दी, खांसी, और बुखार से छुटकारा पाने के लिए घर पर काढ़ा कैसे बनायें


भारतीय घर आम तौर पर मसालों और जड़ी-बूटियों से भरे होते हैं जो रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन आप इन मसालों और जड़ी-बूटियों को देसी काढ़े बनाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो न केवल रोगों का इलाज करते हैं बल्कि समग्र स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। काढ़ा एक पेय है जिसमें जड़ी-बूटियों और मसालों को पानी में आम तौर पर लंबे समय के लिए उबाला जाता है। जड़ी बूटियों का चुनाव आप अपनी बीमारी के अनुसार कर सकते हैं। स्वाद भी उसी के अनुसार भिन्न होता है। एक बार जब काढ़ा तैयार हो जाता है तो आप दिन में कई बार काढ़े का सेवन कर सकते हैं। आप इसे स्टोर भी कर सकते हैं और फिर इसे पीने से पहले गर्म कर सकते हैं। यहां पांच ऐसे आयुर्वेदिक काढ़े बताये गए हैं जिनका आपको नीचे दी गई बीमारियों में इस्तेमाल करना चाहिए।

तुलसी का काढ़ा करें बुखार का इलाज:
सर्दियों के महीनों में बुखार काफी आम समस्या होती है लेकिन यह काढ़ा इसके इलाज में मदद कर सकता है। इस काढ़े को बनाना बहुत ही आसान है और इस काढ़े के सेवन के बाद पसीना आता है जिससे बुखार कम हो सकता है।
  • तुलसी के पत्ते और लौंग लें और उन्हें क्रश करें।
  • उन्हें एक गिलास उबलते हुए पानी में डालें
  • इसे तब तक उबालें, जब तक यह आधे से कम नहीं रह जाता है और फिर इसमें एक चुटकी नमक की डाल दें।
  • इस काढ़े को 2-3 दिन के लिए दिन में दो बार पिएं।
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सर्दी खांसी के लिए  उपयोगी है देसी काढ़ा:
वात और कफ को शांत करने के लिए सूखी अदरक और काली मिर्च उत्कृष्ट हैं। ये श्वसन प्रणाली के स्वास्थ्य को बनाए रखने और पाचन और संचलन को बढ़ाने में सहायक होती है। ये सामग्री शरीर में गर्मी उत्पन्न करती हैं।
  • अदरक और काली मिर्च को पानी में मिलाकर तब तक उबालें जब तक कि यह आधे से कम नहीं रह जाता है।
  • इसमें शह डालें और अच्छी तरह मिक्स करें।
  • सर्दी में ठंड और खांसी से राहत पाने के लिए प्रति दिन यह काढ़ा 3-4 बार पिएं।
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इम्युनिटी को मजबूत बनाये आयुर्वेदिक काढ़ा:
यदि आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका इम्युनिटी कमजोर है। आप इस हर्बल काढ़े की मदद से इसे मजबूत कर सकते हैं। इस काढ़े में कई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का मिश्रण है। ये काढ़ा वात और कफ को शांत करता है, पाचन को उत्तेजित करता है, प्रतिरक्षा में वृद्धि करता है।
  • उबलते पानी में हरी इलायची, दालचीनी, अदरक और सफेद मिर्च मिलाएं।
  • उन्हें कुछ समय के लिए उबाल लें और फिर गैस बंद करें।
  • यदि आपको स्वाद पसंद नहीं है, तो आप इस काढ़े कुछ बुँदे शहद की मिला सकते हैं।
  • प्रतिरक्षा को मज़बूत करने के लिए हर दिन इसे पिएं।
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मधुमेह में लाभकारी है ये काढ़ा:
क्या आप प्री डायबिटिक हैं जो लगातार अपने शुगर लेवल पर निगरानी रखते हैं? मेथी और हल्दी से बना काढ़ा आपके लिए उपयुक्त है। जो शरीर में शुगर लेवल को चेक रखने में मदद करता है।
  • बराबर मात्रा में मेथी और हल्दी पाउडर को लें।
  • उन्हें दूध में मिलाएं और उबाल लें।
  • अच्छे परिणाम देखने के लिए हर सुबह एक गिलास पिएं।
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पाचन में सहायक है अजवायन सौंफ काढ़ा:
यदि आप अक्सर पेट की बीमारियों से पीड़ित होते हैं जैसे गैस, अपच, कब्ज, सूजन आदि। यह अक्सर तब होता है जब आपकी पाचन प्रणाली अच्छी तरह से काम नहीं कर रही होती है। इसे सुधारने के लिए आप सौंफ और अजवाइन से बना काढ़े का सेवन कर सकते हैं। दोनों में कार्मिनटिव गुण होते हैं जो गैस को बनने से रोकते हैं और बेहतर पाचन में सहायता करते हैं।
  • उबलते हुए पानी में एक चम्मच अजवायन और एक चम्मच सौंफ डालें।
  • काढ़े को कुछ देर के लिए उबालें और फिर इसमें स्वाद के लिए शहद मिलाएं।
  • पाचन में सुधार के लिए अपने भोजन के बाद इसे पिएं।

बुधवार, 29 नवंबर 2017

इन आसान घरेलू उपायों से पाएं निमोनिया से निजात

इन आसान घरेलू उपायों से पाएं निमोनिया से निजात


निमोनिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जो ज्यादातर सर्दी के मौसम में होती है लेकिन आजकल बारिश के दिनों में भी इसके रोगी देखने को मिलते हैं। बारिश में भिगने के बाद व्यक्ति को ठंड लग जाती है जिस वजह से खांसी-जुकाम और कफ की समस्या हो जाती है। धीरे-धीरे यह बढ़कर निमोनिया का रूप धारण कर लेता है। इसके अलावा यह फेफड़ों में इंफैक्शन की वजह से भी हो जाता है। अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो इससे फेफड़ों में पानी भर जाता है और सूजन आ जाती है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय करके इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। आइए जानिए इसके लक्षण और उपचार के बारे में

लक्षण

  • बलगम वाली खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार
  • सीने में दर्द
  • भूख कम लगना

घरेलू उपाय

1. हल्दी और काली मिर्च
निमोेनिया बुखार होने पर छाती में रेशा जमा हो जाता है और सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। ऐसे में हल्दी, काली मिर्च, मेथी दाना और अदरक का पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें और रोजाना इसका सेवन करें। इससे फेफड़ों की सूजन कम होगी और बुखार में भी आराम मिलेगा।
2. तिल के बीज 
इसके लिए 300 मिलीलीटर पानी में 15 तिल के बीज, 1 चुटकी नमक, 1 चम्मच अलसी और 1 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें। इससे छाती में जमा कफ बाहर निकल जाएगा।
3. अदरक
रोजाना अदरक के रस का सेवन करने से भी फायदा होता है। इसके अलावा आप अदरक के टुकड़े को चूस भी सकते हैं।

4. शहद
खांसी होने पर शहद चाटने से आराम मिलता है। ऐसे में निमोेनिया होने पर गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से फायदा होता है।

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

जानिए चिकनगुनिया के कारण लक्षण और बचाव, जरुर शेयर करें

जानिए चिकनगुनिया के कारण लक्षण और बचाव, जरुर शेयर करें


इस मौसम में जिन बिमारियों के सबसे ज्यादा चर्चा है वह है डेंगू और चिकनगुनिया (chikungunya). यह वो बीमारियाँ है जो बहुत लोगो को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है.

क्या है चिकनगुनिया :
चिकनगुनिया मादा एडिस मच्छर के काटने से होने वाला एक वायरल बुखार है जिससे मरीज़ के जोड़ो में तेज दर्द होता है. यह वायरस मरीज़ के शरीर में ठीक उसी तरह हमला करता है जिस प्रकार डेंगू के विषाणु मरीज़ के शरीर में अपना असर छोड़ते है. हालाकिं यह डेंगू के मुकाबले कम खतरनाक है और इसमें मरीज की जान जाने का कम या बिलकुल खतरा नहीं होता.
चिकनगुनिया के मच्छर भी ज्यादातर दिन में पनपते और काटते है. चिकनगुनिया की शुरुआती पहचान जोड़ो का दर्द है. इसमें मरीज के जोड़ो में काफी तेज दर्द होता है. साथ ही साथ जुकाम बुखार और खासी जैसे लक्षण भी देखने को मिलते है.
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चिकनगुनिया के लक्षण :
चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण करीबन एक जैसे है लेकिन चिकनगुनिया में रोगी को जोड़ो में तेज दर्द रहता है.
  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • तेज बुखार
  • शरीर पर लाल रंग के चकते (रैशेज)
  • सिर दर्द, जुकाम और खांसी
  • आँखों में दर्द और कमजोरी
  • रौशनी से डर लगना
  • नींद न आना, 
आमतौर पर मरीज में यह लक्षण 5 से 7 दिन तक बने रहते है लेकिन जोड़ो का दर्द थोडा लम्बा रहता है.

चिकनगुनिया का उपचार
  • अगर इन लक्षणों में कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर पर जाये. हलाकि चिकनगुनिया के लिए कोई वैक्सीन या टीका उपलब्ध नहीं है लेकिन दवाइयों के जरिये इसके लक्षणों को खत्म किया जा सकता है.
  • आरटी पीसीआर टेस्ट, वायरस आइसोलेशन टेस्ट और सीरोलॉजिकल डायग्नोसि‍स टेस्ट के जरिये पता किया जाता है की रोगी को चिकनगुनिया(chikungunya) हुआ है या नहीं.
  • साथ ही मरीज को डिस्प्रिन या एस्प्रिन की गोली सावधानी के तोर पर बिलकुल नहीं लेनी चाहिए.
  • जितना हो सके तरल प्रदार्थ लें.
रोकथाम के उपाय :
जैसा की आप जानते है की डेंगू और मलेरिया की तरह यह बीमारी भी मच्छरो द्वारा पैदा होती है इसलिए हमें अपना बचाव भी सिर्फ मच्छरो से करना है.
  • बारिश के मौसम यह बीमारी तेजी से पनपती है क्योकि बारिश के जमे हुए पानी में मच्छर तेजी से पैदा होते है इसलिए लापरवाही न बरते. अपने घर के आस पास जैसे छत, पार्को में पानी न जमा होने दे.
  • कूड़ेदान में ज्यादा दिनों तक कूड़ा न जमा होने दे. साथ ही साथ कूड़ेदान को हमेशा ढक कर रखे.
  • बाल्टी, घडो, कूलरो और स्वीमिंग पुल में रोजाना पानी साफ़ करे.
  • क्योकि यह बीमारी बच्चो और बूढों को ज्यादा प्रभावित करती है इसलिए बच्चो को इस मौसम में पूरी बाजू के पड़े पहेनाये.
  • खुद डॉक्टर न बने. अगर दिक्कत ज्यादा है तो तुरन डॉक्टर के पास जाये.
  • इस मौसम में सावधानी के तौर पर घर की खिड़कीयों को हमेशा बंद करके रखे
  • जितना हो सके नदी और स्वीमिंग पुल में नहाने से बचे
अगर आप या आपका कोई करीबी चिकनगुनिया (chikungunya) से पीड़ित है तो घबराये नहीं. यह जानलेवा बीमारी नहीं है. बस सावधानी बरते और लापरवाही न करे. सही से इलाज़ करवाए.

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

15 दिन अगर मेथी दाना खा लिया तो कुछ ऐसा हो जायेगा की सच में चौक जायेंगे

15 दिन अगर मेथी दाना खा लिया तो कुछ ऐसा हो जायेगा की सच में चौक जायेंगे


मेथी के छोटे-छोटे दानों से आपको बड़े- बड़े फायदे हो सकत हैं। यह कई तरीकों से आपको स्वस्थ्य रखने में मदद करता है। मेथी में दानों में विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा नियासिन लाइसिन, ट्रायप्टोिपान और सैपोनिन्सल आदि नाम के कई अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। तो आइए जानते हैं छोटे दानों वाली मेथी आपके स्वास्थ्य को किस तरह फायदा पहुंचाती है।

कोलेस्ट्राल लेवल को संतुलित रखता है
प्रतिदिन 56 ग्राम मेथी दानों का 24 हफ्ते तक प्रयोग करने से कोलेस्ट्राल लेवल 14 प्रतिशत तक कम होता है जिससे हार्ट अटैक की संभावना 25 प्रतिशत कम हो जाती है। इसको आप खाने के साथ प्रयोग कर सकते हैं या मेथी के दानों को रात में पानी में भिगोकर, सुबह उसके पानी को पिएं।
शुगर लेवल को कम करता है
मेथी का प्रयोग आपके ब्लड में शुगर की मात्रा को कम कर टाइप-2 डायबिटीज का उपचार करता है। इसके लिए 500 मिलीग्राम मेथी के दानों का दिन में दो बार प्रयोग करें।
शुगर  में सूजन और जलन दूर करता है
रिसर्च से पता चलता है कि मेथी स्किन रोगों फोड़े-फफोले, खुजली, त्वचा में जलन और गठिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी है। एक चम्मच मेथी के पाउडर को गर्म पानी में मिलाएं और कपड़े का साफ टुकड़ा लेकर मिश्रण में डुबाकर उसे स्किन के प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं या थोड़ी देर बांध कर रखें इससे आपको काफी राहत मिलेगी।
एसिडिटी से राहत
मेथी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ पेट और आंत में होने वाली जलन को रोकता है, जो सीने की जलन और एसिडिटी से बचाता है। इसके पाउडर को खाने में छिड़क कर सकते हैं। दूसरा तरीका इसके बीजों को पानी के साथ निगल सकते या फिर खाने के पहले इसका जूस बना कर भी पी सकते हैं।
बुखार से बचाए
नींबू और शहद के साथ प्रयोग करने पर यह आपको बुखार से आराम दिलाता है। बीमारी के समय यह शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है। बुखार के दौरान दो चम्मच मेथी दाने में एक चम्मच शहद और नीबू का रस मिलाकर हर्बल चाय की तरह दिन में तीन बार प्रयोग करें।

स्तन वृद्धि में असरदार
मेथी के प्रयोग से कई तरह की चाय और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं जो कि स्त्रियों के हार्मोंस को नियंत्रित रखते हैं और स्तनों की वृद्धि में सहायक होते हैं। स्तनों वृद्धि के लिए मेथी को प्रतिदिन अपने डाइट में शामिल करें। 3 ग्राम मेथी के दानों का प्रतिदिन प्रयोग करें। मेथी का प्रयोग गर्भाशय में संकुचन( दबाव) पैदा कर बच्चे के जन्म को आसान बनाने में सहायक होता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस उपाय का उपयोग करना चाहिए।

महिलाओं के दूध को बढ़ाने में फायदेमंद
मेथी स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध बढ़ाने के लिए जाना जाता है। रिसर्च के अनुसार मेथी के प्रयोग से 24 से 72 घंटे के अन्दर 500 प्रतिशत अधिक दूध की वृद्धि देखी गई है। इसलिए जो महिलाएंं बच्चों को नियमित रूप से स्तनपान कराती हैं उनको दूध में वृद्धि के लिए एक-एक मेथी कैप्सूल( 500एम.जी) दिन में तीन बार प्रयोग करें।

शनिवार, 4 नवंबर 2017

इमली के इतने सारे फ़ायदे जानकार हैरान रह जायेंगे आप

इमली के इतने सारे फ़ायदे जानकार हैरान रह जायेंगे आप


खट्टा मिठ्ठा स्वाद होने के कारण इमली का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। इसका इस्तेमाल खाना बनाने, पानीपुरी का पानी और चटनी आदि बनाने के लिए किया जाता है। इमली खाना बनाने के ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद आयरन,फाइबर,मैगनीज,कैल्शियम,फॉस्फोरस से कई तरह की बीमारियां दूर रहती है। तो आइए जानते है रोजाना इमली के गुण किस तरह से शरीर को क्या-क्या फायदे दे सकते है।

कैंसर के लिए फायदेमंद :-
पानी में 2-3 इमली को कुछ देर भिगो दें और रोजाना सुबह इसका सेवन करें। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और टारटरिक एसिड भरपूर मात्रा में होते है। जिससे शरीर में कैंसर सेल्स नहीं बढ़ते और कैंसर जैसी बीमारी दूर रहती है।
बुखार में असरदार :-
बुखार ग्रस्त रोगी को 15 ग्राम इमली के फल का रस देने से फिवर जल्दी उतर जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन ई, बी, सी इम्यून सिस्टम को ठीक रखते है। जिससे पेट से जुड़ी समस्याए नहीं होती।
गले की खराश में लाभकारी :-
इमली की पत्तियों का रस निकालकर पीने पर गले की खराश से राहत मिलती है इस प्रयोग को गले में टॉन्सिल होने की दशा में नही करना चाहिये क्योंकि कई बार इमली गले में टॉन्सिल की समस्या को बढ़ा देती है ।

चेहरे को सलोना बनाने के लिये :-
इमली और साबुत हल्दी को पानी में भिगो कर इसका पेस्ट बना लें। कर इसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को नियमित रुप से चेहरे पर लगाने से सांवलापन दूर होता है।
मोटापे से छुटकारा पाने के लिये :-
रोजाना सुबह एक इमली खाने पर मोटापा दूर होता है। इसमें मौजूद हाइड्रोसिट्रिक शरीर में बनने वाले फैट को धीरे-धीरे कम करते है। इसके साथ ही इसमें आयरन और पोटेशियम होते है जो ब्लड प्रैशर को कंट्रोल में रखते है।

डायबिटीज करे कंट्रोल :-
एक छोटा गिलास इमली का जूस पीने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स को इकट्ठा नहीं होने देती। जिससे शुगर लेवल नहीं बिगड़ता। इसके अलावा इमली रेड ब्लड सेल्स बनाने में भी मदद करती है।

इमली के गुण की भरपूर जानकारी वाला यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से ही किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँचती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख के समबन्ध में आपके कुछ सुझाव हों तो कृपया कमेण्ट के माध्यम से हमको जरूर सूचित करें ।

सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

गिलोय को अमृता कहा गया है क्योंकि यह अमृत कलश से छ्लकी थी और इसके गुण भी अमृत जैसे ही हैं

गिलोय को अमृता कहा गया है क्योंकि यह अमृत कलश से छ्लकी थी और इसके गुण भी अमृत जैसे ही हैं


गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। 

गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है। गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया गया तो वहाँ पर एक नया पौधा बन जाता है।

गिलोय रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है :-
गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।

गिलोय ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी :-
गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है। गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

गिलोय पाचन क्रिया करता है दुरुस्त :-
गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

गिलोय बवासीर का भी इलाज है गिलोय :-
बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

गिलोय अस्थमा का बेजोड़ इलाज :-
अस्थमा एक प्रकार की अत्यंत ही खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से मरीज को भिन्न प्रकार की तकलीफों का सामना करना पडता है, जैसे छाती में कसाव आना, साँस लेने में तकलीफ होना, अत्याधिक खांसी होना तथा सांसो का तेज तेज रूप से चलना। कभी कभी ऐसी परिस्थिती को काबू में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, कि अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गिलोय का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है, तथा इससे अस्थमा की समस्या से छुटकारा भी मिलने लगता है।

गिलोय आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु :-
गिलोय हमारी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह हमारी आंखों की दृष्टी को बढाता है, जिसकी वजह से हमे बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है। यदि गिलोय के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर यह पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है।

गिलोय खून से जुड़ी समस्याओं को भी करता है दूर :-
कई लोगों में खून की मात्रा की कमी पाई जाती है। जिसकी वजह से उन्हें शारीरिक कमजोरी महसूस होने लगती है। गिलोय का नियमित इस्तेमाल करने से शरीर में खून की मात्रा बढने लगती है, तथा गिलोय हमारे खून को भी साफ करने में बहुत ही लाभदायक है।

गिलोय सौंदर्यता के लिए भी है कारगार :-
गिलोय का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने में काफी सहायता मिलती है। यह हमारी त्वचा को युवा बनाए रखने में मदद करता है। गिलोय से हमारी त्वचा का स्वास्थ्य सौंदर्य बना रहता है। तथा उस में एक प्रकार की चमक आने लगती है।

रविवार, 17 सितंबर 2017

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें

कई बीमारियों का काल है सूर्य की लाल किरणें


सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन क्यों जरुरी है ?
सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं कृमियों को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है| सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते | अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है|

ध्यान रहे की सुर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना ना ही शुरू करें। जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है …

1. लाल रंग  :  यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है
2. हरा रंग  :  यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है
3. पीला रंग  :  चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
4. नीला रंग  :  दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है
5. बैंगनी रंग  :   श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर्गी, दाँतो के रोग में सहायक है
6. नारंगी रंग  :  वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है
7. आसमानी रंग  :  स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है |
सूरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है। अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एव कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं। हमे जिस रंग की ज़रूरत हो हम उसका इस्तेमाल करके अपने रोग दूर कर सकते हैं । सुर्य चिकित्सा मे पानी, क्रिस्टल, सुर्य स्नान, सुर्य प्राणायाम, इत्यादि तरीके अपनाये जाते हैं

जो रोगी की बीमारी एवं दशा  देखकर निर्धारित किया जाता है। सूर्य नमस्कार योग तो अपने आपमे संपन्न योग है, इससे मिलने वाले लाभ से कोई भी अनभिज्ञ नही है। अब तो सूर्य मंत्रो को और सुबह जल- अर्घ्य को भी महत्वता मिलती जा रही है। जलार्पण के लिये भी निर्दिष्ट नियम हैं, और इसका पालन करके हम कई तरह के समस्याओ से निजात भी पा सकते हैं।

इस तरह हम कह सकते हैं कि आज के दौर मे सुर्य चिकित्सा हमारे जीवन के हरेक पहलू मे कारगर है, शायद इसी कारण से हमारे पुर्वजो ने सूर्य उपासना पर बल दिया था, ताकि हम रोज ही खुद को सुख समृद्धि के दिशा मे अग्रसित हो। सूर्य से निकलने वाली रोशनी में विटामिन डी होता है जिसकी कमी से शरीर में मेटाबोलिक हड्डियों की बीमारी हो जाती है जो युवाओं में होने वाली गंभीर बीमारी है। यह हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करता है। सूर्य के प्रकाश के लाभ सिर्फ विटामिन डी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके कई अन्‍य लाभ भी होते हैं और कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है।

सूर्य उपासना के लाभ/फायदे

अच्‍छी नींद आती है :- धूप सेंककर आप रात में अच्‍छी नींद ले सकते हैं। दरअसल सूर्य की रोशनी में बैठने से शरीर में मेलाटो‍निन नाम का हार्मोन विकसित होता है जिससे रात में अच्‍छी नींद आती है। इस तरह अनिद्रा की बीमारी भी इससे दूर जाती है। यानी रात में बेहतर नींद के लिए सूर्य से प्‍यार कीजिए।
वजन घटायें :- वजन घटाने के लिए आप कई तरीके आजमाते और बहुत मेहनत भी करते हैं। लेकिन आप यह जानकर हैरान न हों कि वजन कम करने में सूर्य आपकी सहायता कर सकते हैं। दिन में धूप में बैठने से आपको वजन घटाने में सहायता मिल सकती है। एक शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि सूर्य के प्रकाश और बीएमआई के बीच एक अच्‍छा सम्‍बंध होता है।
ठंड दूर भगाये :- अगर आप सर्दी से के मौसम में ठंड से कांप रहे हैं तो सूर्य की रोशनी में जाइये जनाब, यह एक प्राकृतिक अलाव है जो ठंड दूर करेगा और आपको बीमारियों से भी बचायेगा।
हड्डियां मजबूत बनायें :- हड्डियों को सही तरीके से पोषण न मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे – गठिया, गाउट आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियां मजबूत होती हैं क्‍योंकि इसमें विटामिन डी होता है।
इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाये :- इम्‍यून सिस्‍टम अगर कमजोर हो जाये तो पेट संबंधित कई तरह के रोग हो जाते हैं, इसलिए इसे मजबूत बनाये रखना जरूरी है। धूप से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत हो जाता है। सूर्य से निकलने वाली अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें इम्‍यून सिस्‍टम की हाईपरएक्टिविटी को नकारती हैं और सोराईसिस जैसी बीमारियों से बचाव करती हैं।
उम्र बढ़ती है :- अगर आपकी चाहत लंबी उम्र पाने की है तो नियमित रूप से धूप से स्‍नान कीजिए। क्‍योंकि यह खून जमने, डायबिटीज एवं ट्यूमर को ठीक करता है, प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है एवं पैरों में खून जमने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता। ठंडे क्षेत्र में शीतकाल में यह खतरा ज्यादा रहता है। यह डायबिटीज जैसी बीमारी से भी बचाव करता है और अन्‍य बीमारियों से बचाता है। अगर ये सारी समस्‍यायें न हों तो उम्र बढ़ेगी ही।
बांझपन दूर करे :- यदि पुरुष बांझपन के शिकार हैं तो उनके लिए सूर्य धूप रामबाण दवा की तरह है। धूप सेंकने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार आता है। खून में सूर्य धूप से मिले विटामिन डी के बढ़ने के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा यह वियाग्रा दवा की भांति भी काम करता है। यह टेस्टोस्टोरेन हार्मोन के स्राव को भी बढ़ाता है।
दिमाग को स्‍वस्‍थ रखे :- सूर्य से निकलने वाले प्रकाश में मौजूद विटामिन डी से दिमाग स्वस्थ रहता है। विटामिन डी भविष्‍य में होने वाली बीमारी सीजोफ्रेनिया (पागलपन की बीमारी) के खतरे को कम करता है। यह दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके संतुलित विकास में सहायता प्रदान करता है। गर्भवती महिला के धूप सेंकने से यह लाभ बच्‍चे को भी मिलता है।
दिल के रोगों से बचाये :- सूर्य से मिलने वाले विटामिन डी से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती है और कैंसर का खतरा कम होता है। यह मेटाबॉलिज्‍म को सुधारता है जिससे मधुमेह एवं हृदय रोग काबू में रहते हैं। धूप दिल की बीमारियों को रोकने में मददगार होता है।
सूर्य की किरणें मनुष्य के रक्तचाप को कम करने में सहायता प्रदान करती हैं जिससे दिल के दौरे का ख़तरा बहुत सीमा तक कम हो जाता है।

शनिवार, 9 सितंबर 2017

स्वाइन फ्लू ने दी फिर से दस्तक, एेसे रखें खुद का बचाव!

स्वाइन फ्लू ने दी फिर से दस्तक, एेसे रखें खुद का बचाव!


स्वाइन फ्लू एक बार फिर से चर्चा में है। दिनों-दिन स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते जा रहे है। यह इनफ्लुएंजा वायरस से फैलता है। यह एक तरह का संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैलता है। समय रहते इसका इलाज करवाना बहुत जरूरी है। आज हम आपको स्वाइन फ्लू के लक्षणों और बचाव के बारे में बताने जा रहे है। अगर आपको एक भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत जांच करवाएं।  

लक्षण :
- गले में खराश
- बॉडी पेन
- उल्टी
- थकान
- ठंड लगना
- खांसी-जुकाम

ये लोग रहें सावधान :
- प्रेग्नेंट महिलाएं
- एडल्ट्स
- एक साल के कम उम्र के बच्चे
- 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोग 

बचाव :
- खांसते या छीकतें समय मुंह पर रूमाल रखें
- खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं
- मास्क पहन कर ही मरीज के पास जाएं
- खूब पानी पीएं 
- साफ-सफाई का ध्यान रखें
- भीड़-भाड़ वाले इलाकों में न जाएं

शनिवार, 26 अगस्त 2017

आंखें फटी रह जाएंगी तुलसी के पत्तों के यह फायदे जानकर

आंखें फटी रह जाएंगी तुलसी के पत्तों के यह फायदे जानकर


तुलसी के पौधे को एक औषधि के रूप में जाना जाता है। भारत में लोग इसे घर के आंगन में लगाते हैं और इसकी पूजा करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि संसार में तमाम तरह के पौधे हैं लेकिन इसकी ही पूजा क्यों की जाती है? वास्तव में कई अध्ययनों में यह साबित हो गया है कि इस पौधे में कई रोगों को ठीक करने की क्षमता होती है।
अध्ययनों के अनुसार, तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल सर्दी-खांसी, पेट दर्द, पेशाब संबंधी रोगों, पाचन बेहतर करने, आंखों की समस्याओं, हिचकी, मतली, उल्टी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मुंह के छाले, माइग्रेन, कान का दर्द, अवसाद, अनिद्रा, शीघ्रपतन, अल्सर आदि समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं यह त्वचा से जुड़े रोगों के इलाज के लिए भी बेहतर चीज है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। हम आपको तुलसी के कुछ लाभ बता रहे हैं।

1. बुखार कम करते हैं तुलसी के पत्ते
तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जिस वजह से इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम और बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी का काढ़ा पीने से बुखार कम होता है। थोड़े पानी में तुलसी के पत्ते और दालचीनी डालकर उबाल लें। बुखार होने पर इस काढ़े को दिन मई कई बार पिएं।

2. डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक
तुलसी के पत्तों में एंटी-ऑक्सिडेंट्स गुण होते हैं, जिस वजह से यह पैनक्रियाटिक बीटा सेल्स के कामकाज में सुधार करते हैं। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। यह ब्लड शुगर को कम करके डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार हैं।

3. दिल को स्वस्थ रखते हैं
जाहिर है तुलसी के पत्तों में एंटी-ऑक्सिडेंट्स गुण होते हैं जिस वजह से यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके दिल को स्वस्थ रखने में सहायक हैं। अध्ययनों के अनुसार, रोजाना तुलसी के पत्ते चबाने से हृदय संबंधी रोगों से बचा जा सकता है।

4. तनाव कम करने में सहायक
एक अध्ययन के अनुसार तुलसी में तनाव वाले हार्मोन कॉर्टिसॉल को कम करने की क्षमता होती है। जाहिर है इस हार्मोन का लेवल कम होने से आपको तनाव से राहत मिलती है। इसके अलावा तुलसी ब्लूस सर्कुलेशन को कंट्रोल कर और फ्री रैडिकल डैमेज से बचाकर आपको तनाव से बचाती है। तनाव कम करने के लिए इससे नैचुरल तरीका क्या होगा भला।

5. किडनियों के स्वस्थ रखते हैं तुलसी के हरे पत्ते
तुलसी में ड्यूरेटिक और डिटॉक्सिफाइ गुण होते हैं जिस वजह से यह आपकी किडनियों को स्वस्थ रखने में सहायक है। यह खून में युरिक एसिड लेवल को कम करती है। इसके अलावा इसके एसिटिक एसिड और एस्सेंशल ऑयल गुण किडनी की पथरी को कम करते हैं।

6. स्मोकिंग की बुरी आदत छुड़ा सकते हैं तुलसी के चंद पत्ते
अगर आपको स्मोकिंग की बुरी लत है और आप इससे मुक्ति पाना चाहते हैं, तो जब भी आपको सिगरेट पीने की इच्छा करे, तो आप तुलसी के कुछ पत्ते चबा लें। तुलसी में एंटी-स्ट्रेस यौगिक होते हैं, जो स्मोकिंग छोड़ने के बाद महसूस होने वाले तनाव को कम करते हैं।

7. त्वचा के लिए भी फायदेमंद है तुलसी
तुलसी के पत्तों के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है, जो त्वचा संबंधी समस्याओं को ठीक करता है। इसके प्यूरीफाइ गुण खून को साफ करते हैं, जिससे आपके चहरे पर चमक आती है। इसके एंटी ऑक्सिडेंट्स और एंटी बैक्टिरीयल गुण आपको मुहांसों से बचाते हैं।

8. माइग्रेन के इलाज करते हैं तुलसी के पत्ते
तुलसी में पेनकिलर गुण होते हैं जिस वजह से यह माइग्रेन के कारण होने वाले सिर दर्द को कम करती है। रोजाना तुलसी के चार से पांच हरे पत्ते चबाने से माइग्रेन की समस्या में आराम मिलता है।

शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

खाली पेट तुलसी कोे दूध में मिला कर पीने के लाभ!!

खाली पेट तुलसी कोे दूध में मिला कर पीने के लाभ!!


भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है।

तुलसी एक ऐसी हर्ब है जो कई समस्याओं का आसानी से दूर कर सकती है। अगर तुलसी को दूध के साथ मिला लें तो ये कई बीमारियों के लिए रामबाण साबित होगी. आज हम आपको बता रहे हैं कैसे तुलसी की तीन से चार पत्तियां उबलते हुए दूध में डालकर खाली पेट पीने से आप सेहतमंद रह सकते हैं।

1. सांस सम्‍बंधी रोगों में फायदेमंद
अगर किसी व्‍यक्ति को दमा या अन्‍य कोई सांस सम्‍बंधी रोग है तो वह तुलसी और दूध का सेवन प्रतिदिन सुबह करें। इससे उसकी बीमारी कुछ ही दिनों में सही होना शुरू हो जाएगी।

2. सिरदर्द में उपयोगी
अगर‍ किसी को हर कुछ दिन पर सिर में दर्द होने लगता है तो उसे तुलसी और दूध को फेंटकर हर सुबह पी लेना चाहिए। इससे उस व्‍यक्ति को आराम मिलेगा और जल्‍द ही माईग्रेन जैसी बीमारी भी दूर हो जाएगी।

3. फ्लू को ठीक करे
अगर आपको फ्लू हो गया हो, तो यह पेय आपको लाभ देता है और जल्‍द ठीक होने की शक्ति प्रदान करता है।

4. ह्दय को स्वस्थ रखे
जिन लोगों को ह्दय रोग हो चुका हो या उनके परिवार में किसी को पहले हुआ हो और उन्‍हें होने की संभावना हो, तो ऐसे लोगों को रोज सुबह खाली पेट दूध और तुलसी का सेवन करना चाहिए। इससे ह्दय स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा हो जाता है।

5. तनाव घटाए
इस पेय को पीने से मन अच्‍छा हो जाता है और नर्वस सिस्‍टम भी रिलैक्‍स हो जाता है जिससे व्‍यक्ति का तनाव अपने आप कम हो जाता है। अगर कोई डिप्रेशन या चिंता से ग्रस्‍त है तो उसे तुलसी और दूध का सेवन अवश्‍य करना चाहिए।

6. किडनी स्‍टोन
अगर किसी व्‍यक्ति को किडनी में स्‍टोन होने की शुरूआत हुई है तो उसे दूध और तुलसी का सेवन करना चाहिए, इससे किडनी का स्‍टोन धीरे-धीेरे गलने लगता है।

7. कैंसर से बचाए
तुलसी में कई एंटीबायोटिक गुण होते हैं साथ ही इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट भी होते हैं और दूध में सारे अन्‍य पोषक तत्‍व होते हैं जिसकी वजह से कैंसर जैसी घातक बीमारी, शरीर के कमजोर न होने की स्थिति में पनप नहीं पाती है।

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे आसान घरेलू उपाय, जरूर पढ़े!!

स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे आसान घरेलू उपाय, जरूर पढ़े!!


स्वाइन इंफ्लुएंजा को स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है जो कि इंफ्लुएंजा वायरस से होता है और यह वायरस सूअरों के श्वसन तंत्र से निकलता है। इस वायरस में परिवर्तित होने की क्षमता होती हैं जिससे यह आसानी से लोगों में फैल जाता है।

इंसानो में खांसी, थकान, नजला, उल्टी आना, बुखार, दस्त, शरीर में दर्द आदि इसके लक्षण हैं।

स्वाइन फ्लू से बचने के घरेलू उपाय

  • आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
  • 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
  • खट्टे फल और विटामिन सी से भरपूर आंवला जूस आदि का सेवन करें। चूंकि आंवले का जूस हर महीने नहीं मिलता है (खास तौर पर चार महीने) ऐसे में आप पैक्ड आंवला जूस भी ले सकते हैं।
  • गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।

रविवार, 20 अगस्त 2017

भोजन के बाद सौंफ खाने के है इतने सारे फायदे, आप भी जानिए

भोजन के बाद सौंफ खाने के है इतने सारे फायदे, आप भी जानिए


स्‍वस्‍थ शरीर के लिए यह जरूरी है की आपका पाचन सही हो, यदि पाचन तंत्र में कोई गड़बड़ी होती है तो हमारे शरीर में तमाम तरह की समस्‍याएं आने लगती हैं जैसे गैस की समस्या, एसिडिटी, कब्‍ज, डायरिया, अपच आदि। मगर कुछ घरेलु नुस्खों को अपनाकर आप अपने पेट को गैस, अपच जैसी बीमारियों से बेहद आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। यदि आप खाना खाने के बाद कुछ खास चीजों का सेवन से आपका स्वास्थ्य और पेट दोनों को एकदम दुरुस्त रख सकते है।

अक्सर हम जब भी किसी रेस्तरा से खा कर निकलते है तो हम सौंफ खाते है, आप कहते तो जरूर है मगर क्या आपने सोचा है की सौंफ ही क्यू दिया जाता है, उसके अलावा कुछ और क्यो नहीं। इसके पीछे एक बड़ी वजह है, असल मे इससे हमारा पाचन शक्ति मजबूत होता है, मुंह की दुर्गंध कम होता है। सांस और ह्दय संबंधी बीमारी से भी छुटकारा मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ को खाना खाने के बाद हर हाल में लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर में वजन कम करने में भी मददगार साबित होता है। कहा जाता है की सौंफ के साथ मिश्री लेना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि सौंफ में विटामिन सी, पोटेशियम, मैंगनीज, लोहा, फोलेट और फाइबर शामिल है।

सौंफ खाने के फायदे जानकार आप भी हैरान हो जायेंगे क्योंकि इसमे इतनी सारी खूबिया है की आप इसे चाह कर भी मना नहीं कर पायेंगे।अगर देखा जाए तो इसमें जीवाणुरोधी और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पीड़ादायक मसूड़ों को शांत करने में सौंफ काफी सहायक होता है। बात करे तो सौंफ एक तरह से माउथ फ़्रेश्नर की तरह है, इससे मुंह की बदबू दूर होती है। सौंफ के बीज में अपच, सूजन और पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से पेट में दर्द और पेट के अंदर सूजन से राहत मिलती है।

आपको बता दे की सौंफ से पेशाब की रुकावट भी दूर होती है इसलिए कहा जाता है की सौंप की चाय पीने से पेशाब के रास्ते की सभी समस्या दूर हो जाती है। आंखों की सूजन कम करने के लिए भी सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी-खांसी, फ्लू और साइनस से श्वसन तंत्र के संक्रमण से राहत दिलाने में भी यह मददगार साबित होता है। आपको बता दे की यह पोटेशियम का अच्छा स्त्रोत है, बीपी को कम करता है। विटामिन सी एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, यह ह्दय रोग से बचाता है। यह भूख को कम करता है, सौंफ का ताजा बीज प्राकृतिक वसा नाशक के रूप में कार्य करता है इसलिए इसके इस्तेमाल से वजन घटता है।

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

इसके सेवन से बीमारिया पास भी नहीं फटकती, कई प्रकार के स्वास्थ लाभ

इसके सेवन से बीमारिया पास भी नहीं फटकती, कई प्रकार के स्वास्थ लाभ


जीरा और गुड हमारे घरों में होता है। इनका इस्तेमाल हम खाना बनाने के लिए करते है। लेकिन क्या आपको पता है गुड और जीरे का पानी आपको और आपको कई गंभीर छोटी-छोटी बीमारियों से बचा सकता है जिसकी वजह से आप लोग परेशान हो जाते हो।

गुड और जीरे के पानी के फायदे

बदन का दर्द / Body pain
पीठ का दर्द हो या कमर का दर्द। गुड और जीरे का पानी पीने से आपको इन सभी समस्याओं से निजात मिलता है।

बुखार में / Fever
बुखार होने पर जब शरीर गर्म हो जाता है तब आप बीमार इंसान को गुड और जीरे का पानी पिलाएं। इस पानी से सिर दर्द और बुखार में आराम मिलता है।

शरीर के तापमान को कम करता है/Reduce Body Temperature
यह प्राकृतिक पेय शरीर के तापमान को कम करता है और शरीर के तापमान को नियमित करता है जिससे बुखार, सिरदर्द और जलन आदि से राहत मिलती है।

एनीमिया से बचाता है/Prevents Anemia
शरीर में एनीमिया या खून की कमी को पूरा करने का काम करता है गुड़ और जीरे का बना हुआ पानी। साथ ही यह खून को भी साफ करता है।

शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त करता है /Detoxify Body
जीरा और गुड प्राकृतिक गुणों से भरपूर होते हैं जो शरीर के अंदर की गंदगी को साफ करके हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। जिससे कोई भी गंभीर बीमारी शरीर को आसानी से नहीं लग पाती है।

# कब्ज़ को रोकता है :-
आयुर्वेद में भी यह बताया गया है कि यह मिश्रण कब्ज़ से आराम दिलाने तथा उसे रोकने में सहायक होता है क्योंकि यह मल त्याग की प्रक्रिया को नियमित करता है।

पेट की समस्या/Stomach Problems
पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस, पेट फूलना और पेट दर्द की समस्याओं में यदि आप गुड और जीरे से बना हुआ पानी पीते हैं तो आपको फायदा मिलेगा। साथ ही ये रोग भी धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।

मासिक धर्म की गड़बड़ी/Menstrual Disturbances
मासिक धर्म में समस्या होने पर वह अनियमित हो जाते हैं जिससे पेट में दर्द और कई परेशानियां होने लगती है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे गुड और जीरे का पानी जरूर पीएं।

शनिवार, 29 जुलाई 2017

कैसे पाएं बारिश से होने वाली एलर्जी से छुटकारा

कैसे पाएं बारिश से होने वाली एलर्जी से छुटकारा


मानसून में होने वाली झमाझम बारिश सभी को अच्छी लगती है। पर ये स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकती है। ये सिर्फ चाय पकौड़ो की ही दावत नहीं देता बल्कि बीमारियों को भी खुला न्यौता होता है। मानसून में कई तरह की एलर्जी और बुखार आदि की शिकायत आम बात होती है। गौरतलब है कि मानसून के दौरान हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत ही कम हो जाती है। कई तरह के संक्रमण हमारे शरीर में प्रवेश करने लगते हैं, जो कई तरह के रोग उत्पन्न करते है। लेकिन अगर आप पहले से ही सावधानी रखें तो बिना बीमार पड़े बारिश का मजा ले सकते है। और हां बारिश चाहे जितनी भी पंसद क्यों ना हो, भीगने की गलती बिल्कुल भी ना करें। मानसून में होने वाली एलर्जी के बारे में पढ़ें।

सर्दी, जुकाम और बुखार
मानसून में सर्दी, जुकाम और बुखार का होना सामान्य माना जाता है। बरसात के दिनों में कहर बरपाने वाला वायरल बुखार अत्यंत संक्रामक रोग है जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी समय और कहीं भी ग्रस्त हो सकता है। बुखार, गला खराब होना, छींक आते रहना आदि इसके पमुख लक्षण होते है। लेकिन मानसून के इस सामान्य बुखार को भी हल्के में लेना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

वायरल बुखार के इलाज के तौर पर सबसे जरूरी बुखार को कम रखना है। इसके लिए ठंडे पानी की पट्टी का इस्तेमाल करना चाहिये तथा बुखार निवारक दवाईयां लेनी चाहिये। इस बुखार में रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए रोगी को पानी, गर्म सूप, गर्म दूध, जूस आदि का अधिक सेवन करना चाहिए और आराम करना चाहिए।

कंजक्टिवाइटिस
इस मौसम में कंजक्टिवाइटिस की समस्या भी आम होती है।  यह संक्रामक रोग एडीनो वायरस की वजह से होता है। वायरल इंफेक्शन में आंख में लालिमा, पानी निकलने व रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढऩे और कुछ मामलों में मरीज को हल्का बुखार व गला खराब होने की शिकायत रहती है।ज्यादातर मामलों में यदि यह वायरल तरीके से व्यक्ति की एक या दोनों आंखों को प्रभावित करे तो 4-5 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है।

अस्थमा की शिकायत
मानसून में अस्थमा की शिकायत भी ज्यादा हो जाती है। इसलिये इस मौसम में खास तौर पर अस्थमा के मरीजों को सावधानी रखनी चाहिये ताकि अटैक नहीं हो। अस्थमा होने पर सांस लेने में तकलीफ और खांसी जैसी समस्यायें पैदा होती हैं।अटैक से बचने के लिये धूम्रपान से परहेज करें तथा सिगरेट एवं बीड़ी के धुंये से बचें। पानी में भींगने से बचे।

त्वचा मे एलर्जी
मानसून में त्वचा मे एलर्जी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।वातावरण में नमी के बढ़ जाने की वजह से त्वचा की एलर्जी हो जाती है।  नमी अधिक बढ़ जाने की वजह से फंगस वाली बीमारियों होने की संभावना भी बढ़ जाती है। वहीं नमी में कई तरह के बैक्टीरिया भी पैदा होते हैं, साथ ही हाउस डस्ट माइट की वजह से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए इस समय घर और बाथरूम में सीलन न पैदा होने दें।

फूड प्वाइजनिंग का खतरा
बारिश का मौसम में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। बाजार में मिलने वाले चाय पकोड़े में बैक्टीरिया की संभावना बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।  इसलिए ही बारिश के दौरान बाहर का खाना मना किया जाता है। इस एलर्जी का सबसे बड़ा लक्षण होता है खाने के एक से छह घंटे के बीच उल्टी होना। अगर आपको भी ऐसे लक्षण दिख रहें तो सतर्क हो जाए।  

चाहे बुखार हो या फिर मानसून स्किन एलर्जी खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत सही समय पर सही डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

बुधवार, 26 जुलाई 2017

मुनक्का आपके लिए कई रोगों की दवा है, जानें मुनक्का के फायदे

मुनक्का आपके लिए कई रोगों की दवा है, जानें मुनक्का के फायदे


मुनक्का एक आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार मुनक्का में औषधीय गुणों की भरमार है. हमें प्रतिदिन 4 से 7 मुनक्का खाने चाहिए. मुनक्के को खांसी, सर्दी-जुकाम और कफ दूर करने की सबसे अच्छी दवा माना जाता है. इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स कई बीमारियों के इलाज में मदद करते हैं. इसके अलावा भी मुनक्के के कई फायदे हैं. आइए जानते है रोज़ मुनक्का खाने से क्या फायदे होते है –

1. मुनक्का में फाइबर्स होते हैं जो कि डाइजेशन ठीक रखने में मदद करता है.
2. इसमें आयरन होता है जो कि एनीमिया (खून की कमी) दूर करने में फायदेमंद है.
3. इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि सर्दी-खांसी ठीक करने में मदद करते है.
4. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है.
5. इसमें पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जो कि हार्ट अटैक की बीमारियों से बचाने में इफेक्टिव है.
6. मुनक्का खाने से ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव होता है जिससे स्किन की चमक बढ़ती है और रंग निखरता है.

दिखने में छोटी मुनक्का बहुत ही गुणकारी है। इसमें वसा की मात्रा नहीं के बराबर होती है। यह हल्की, सुपाच्य, नरम और स्वाद में मधुर होती है। इसे बड़ी दाख (रेजिन) के नाम से भी जाना जाता है। साधारण दाख और मुनक्का में इतना फर्क है कि यह बीज वाली होती है और छोटी दाख से अधिक गुणकारी होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-   
  • सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें। 
  • मियादी और पुराने ज्वर में दस मुनक्का एक अंजीर के साथ सुबह पानी में भिगोकर रख दें। रात्रि में सोने से पूर्व मुनक्का और अंजीर को दूध के साथ उबालकर लें। ऐसा तीन दिन करें। कितना भी पुराना बुखार हो, ठीक हो जाएगा। 
  • जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पाँच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएँ। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें। 
  • गलकंठ और दमा रोगियों के लिए भी इसका सेवन फायदेकारक है, क्योंकि मुनक्का श्वास-नलियों के अंदर जमा कफ को तुरंत बाहर निकालने की अद्भुत क्षमता रखती है। 
  • कब्ज के रोगियों को रात्रि में मुनक्का और सौंफ खाकर सोना चाहिए। कब्ज दूर करने की यह रामबाण औषधि है। 
  • जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएँ। इस बीच बच्चे को ठंडी चीजों एवं दही, छाछ का सेवन न करने दें। 
  • एक मुनक्का का बीज निकालकर उसमें लहसुन की फाँक रखकर खाने से उच्च रक्तचाप में आराम मिलता है। 
  • पच्चीस ग्राम मुनक्का देशी घी में सेंककर और सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आना बंद हो जाते हैं।
महिलाओं की हर बीमारी का इलाज है ये जादुई पौधा

महिलाओं की हर बीमारी का इलाज है ये जादुई पौधा


एक महिला को एक पुरुष की तुलना में उसके जीवन काल में अधिक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को लगभग हर महीने कुछ न कुछ परेशानी होती है फिर चाहे उनके चेहरे पर दाने हो या उनकी मासिक धर्म की समस्या महिलाओं को पुरुष की तुलना में अधिक जोड़ में दर्द व शरीर के अन्य भागों में दर्द की समस्या का सामना करना होता है। कुछ रोग तो महिलाओं को ऐसे भी होते है की वो हर किसी से उसके बारे में खुल कर बात भी नहीं कर सकती और अपने रोग के साथ ही उन्हें घर का सारा काम भी करना होता है। ऐसे में अगर हम आपको बता दे एक ऐसे पौधे के बारे में जो महिलाओं के सभी रोग का काल है जिसके मात्रा सेवन भर से महिलाओं के सभी रोग अपने आप ठीक होने लगते है।

आज हम बात करने वाले है इसी पौधे के बारे में जिसे महिलाओं के सभी रोग का काल भी कहा जाता है। और ये लगभग हर किसी के घर में मिलने वाला पौधा हैं। इसका उपयोग करके महिलाओं के 100 से भी ज्यादा गंभीर बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकते है। वो पौधा है अपामार्ग का पौधा

इसके सेवन से जो महिलाओं को जो फायदे होते है वह कुछ इस प्रकार हैं।

बुखार ठीक करे :-
अगर आपको किसी भी तरह का बुखारा क्यों ना हो अगर इसमें आपको कोई और दवाई आराम नहीं दे रही तो अपामार्ग के पौधे का रस निकाल ले और उसका सेवन शहद के साथ मिलाकर करे ऐसे करने से कुछ ही मिनट में आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

रतौंधी में लाभदायक :-
रतौंधी रोग में यह पौधा इतना ज्यादा लाभदायक है इससे मात्र तीन दिनों में रतौंधी को ठीक किया जा सकता है इसके लिए इस पौधे के पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में रात को पानी के साथ 3 दिनों तक सेवन करे ऐसा करने से 3 दिनों में रतौंधी रोग ठीक हो जाता हैं।

पेट फूलने की समस्या :-
पेट फूलने की समस्या होने पर इस पौधे के पाउडर का सेवन करने से तुरंत लाभ देखने को मिलता है। इसीलिए पेट के रोगी को इसका सेवन जरूर करके देखना चाहिए।

त्वचा के रोग दूर करे :-
अगर आपको किसी भी तरह के त्वचा के रोग है तो ये पौधा आपके लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है। त्वचा के रोग में इस पौधे को पानी में उबाल कर अगर रोगी उस पानी को सारी त्वचा पर लगाए तो त्वचा के सारे रोग कुछ ही दिनों में ठीक होने लगते है।

ये पौधा महिलाओं की सभी बीमारियों काल की तरह काम करते है इसीलिए महिलाओं के सभी तरह की बीमारियों में इस पौधे सेवन जरूर करना चाहिए।

सोमवार, 3 जुलाई 2017

रोज दूध में मिलाएं ये, आपकी हर बिमारी हो जाएगी छू मंतर

रोज दूध में मिलाएं ये, आपकी हर बिमारी हो जाएगी छू मंतर


बीमारी कभी किसी से पूछकर तो आती नहीं है। आपको तो पता है कि तुलसी कई रोगों को खत्म करती है। लेकिन यदि दूध के साथ तुलसी के पत्तों को सुबह खाली पेट पिया जाए तो आपकी कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं। साथ ही साथ यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है जिससे फिर से रोग लगने की संभावना ना के बराबर हो जाती है। आइये जानते हैं दूध में तुलसी डालकर पीने के फायदों के बारे में।

दिल की बीमारी में
यदि घर में किसी को दिल से सबंधित कोई बीमारी है या हार्ट अटैक पड़ा हो तो आप तुलसी वाला दूध रोगी को सुबह के समय खाली पेट पिलाएं। इससे दिल से संबंधित कई रोग ठीक होते हैं।

किडनी की पथरी में
यदि किडनी में पथरी की समस्या हो गई हो और पहले दौर में आपको इसका पता चलता है तो तुलसी वाला दूध का सेवन सुबह खाली पेट करना शुरू कर दें। इस उपाय से कुछ ही दिनों में किडनी की पथरी गलकर निकल जाएगी। आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

फ्लू
वायरल फ्लू होने से शरीर कमजोर हो जाता है। यदि आप दूध में तुलसी मिलाकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करते हो ता आपको फ्लू से जल्दी से आराम मिल जाएगा।

टेंशन में
अधिक काम करने से या ज्यादा जिम्मेदारियों से अक्सर हम लोग टेंशन में आ जाते हैं एैसे में हमारा नर्वस सिस्टम काम नहीं कर पाता है और हम सही गलत का नहीं सोचते हैं। यदि इस तरह की समस्या से आप परेशान हैं तो दूध व तुलसी वाला नुस्खा जरूर अपनाएं। आपको फर्क दिखने लगेगा।

कैंसर की समस्या
एंटीबायोटिक गुणों की वजह से तुलसी कैंसर से लड़ने में सक्षम होती है। दूध में भी कई तरह के गुण होते हैं जब दोनों आपस में मिलते हैं तो इसका प्रभाव बेहद प्रभावशाली और रोग नाशक हो जाता है। यदि आप नियमित तुलसी वाला दूध पीते हैं तो कैंसर जैसी बीमारी शरीर को छू भी नहीं सकती है।

और माइग्रेन में
सिर में दर्द होना आम बात है। लेकिन जब यह माइग्रेन का रूप ले लेती है तब सिर का दर्द भयंकर हो जाता है। ऐसे में सुबह के समय तुलसी के पत्तों को दूध में डालकर पीना चाहिए। यह माइग्रेन और सिर के सामान्य दर्द को भी ठीक कर देती है।

सांस की तकलीफ में
सांस की सबसे खतरनाक समस्या है दमा। इस रोग में इंसान को सांस लेने में बड़ी परेशानी आती है। खासतौर पर तब जब मौसम में बदलाव आता है। इस समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप दूध और तुलसी का सेवन करें। नियमित इस उपाय को करने से सांस से संबंधित अन्य रोग भी ठीक हो जाएगें।

अक्सर हमारे घर में बहुत सी प्राकृतिक औषधियां होती है जिनके बारे में पता रहने से हम मंहगी दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट से बच सकते हैं।

शुक्रवार, 30 जून 2017

सेहत के लिए फायदेमंद है ये जड़ी बूटिया

सेहत के लिए फायदेमंद है ये जड़ी बूटिया


प्रकृति ने हमें कुछ जड़ी-बूटियां प्रदान की है जिनकी मदद से हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते है इन जड़ी बूटी के इस्तेमाल से बहुत सारी बीमारियों को दूर किया जा सकता है. और इसके साथ ही मानसिक शांति के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता है.

आइये जानते है ऐसी ही कुछ जड़ी बूटियों के बारे में-


तुलसी - तुलसी की पूजा तो हर घर में की जाती है. तुलसी के सेवन से सर्दी-जुकाम, बुखार, सूखा रोग, निमोनिया, कब्ज, जैसी समस्याओ से छुटकारा पाया जा सकता है.

लहसुन - लहसुन में भरपूर मात्रा में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते है.नियमित रूप से लहसुन का सेवन करने से से विटामिन ए, बी, सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पा सकते हैं.

दालचीनी - इसका इस्तेमाल एक मसाले के तौर पर किया जाता है.दालचीनी शरीर में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को खत्म कर देती है.

लौंग - लौंग हमारे शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के साथ यह एक अच्छी एंटीऑक्सीडेंट और बैक्टीरिया को खत्म करने वाली है.

अदरक - अदरक के इस्तेमाल से जी मिचलाने, उल्टी, मोशन सिकनेस आदि समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. यह पाचन क्रिया में भी सहायक है.

शनिवार, 24 जून 2017

खाली पेट तुलसी के पत्ते दूध के साथ पीने के फायदे

खाली पेट तुलसी के पत्ते दूध के साथ पीने के फायदे


कई बीमारियों के लिए हमेशा दादी मां के घरेलू नुस्खे ही काम में आते हैं और यकीन मानिए इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। पीढिय़ों से चले आ रहे ये टिप्स हमेशा कारगर साबित होते हैं और आगे भी होते रहेंगे। ऐसे कई टिप्स, तुलसी के बारे में दिए जाते हैं। सर्दी हो तो तुलसी का काढ़ा काली मिर्च के साथ बनाकर पीने से लाभ मिलता है आदि। लेकिन क्या आपको मालूम है कि सुबह के समय खाली पेट तुलसी के पत्तों को दूध के साथ मिलाकर पीने से किन-किन रोगों से छुटकारा और समस्याओं में लाभ मिलता है।


फ्लू : अगर आपको फ्लू हो गया हो, तो यह पेय आपको लाभ देता है और जल्द ठीक होने की शक्ति प्रदान करता है।
ह्दय स्वास्थ्य को बेहतर करे: जिन लोगों को ह्दय रोग हो चुका हो या उनके परिवार में किसी को पहले हुआ हो और उन्हें होने की संभावना हो, तो ऐसे लोगों को रोज सुबह खाली पेट दूध और तुलसी का सेवन करना चाहिए। इससे ह्दय स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है।
तनाव कम करे : इस पेय को पीने से मन अच्छा हो जाता है और नर्वस सिस्टम भी रिलैक्स हो जाता है जिससे व्यक्ति का तनाव अपने आप कम हो जाता है। अगर कोई डिप्रेशन या भचता से ग्रस्त है तो उसे तुलसी और दूध का सेवन अवश्य करना चाहिए।
किडनी स्टोन को गलाये: अगर किसी व्यक्ति को किडनी में स्टोन होने की शुरूआत हुई है तो उसे दूध और तुलसी का सेवन करना चाहिए, इससे किडनी का स्टोन धीरे-धीेरे गलने लगता है।
कैंसर होने से बचाएं : तुलसी में कई एंटीबायोटिक गुण होते हैं साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं और दूध में सारे अन्य पोषक तत्व होते हैं जिसकी वजह से कैंसर जैसी घातक बीमारी, शरीर के कमजोर न होने की स्थिति में पनप नहीं पाती है।
सांस सम्बंधी रोगों में लाभप्रद : अगर किसी व्यक्ति को दमा या अन्य कोई सांस सम्बंधी रोग है तो वह तुलसी और दूध का सेवन प्रतिदिन सुबह करें। इससे उसकी बीमारी कुछ ही दिनों में सही होना शुरू हो जाएगी।
सिरदर्द बंद करें : अगर किसी को हर कुछ दिन पर सिर में दर्द होने लगता है तो उसे तुलसी और दूध को फेंटकर हर सुबह पी लेना चाहिए। इससे उस व्यक्ति को आराम मिलेगा और जल्द ही माईग्रेन जैसी बीमारी भी दूर हो जाएगी।