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सोमवार, 20 जुलाई 2020

 गिलोय के फायदे, नुक्सान और प्रयोग का तरीका

गिलोय के फायदे, नुक्सान और प्रयोग का तरीका



गिलोय ( giloy ) एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।

इसका वानस्पिक नाम( Botanical name of giloy) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (Tinospora Cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…

गिलोय के फायदे – ( Benefits of Giloy )

गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

Giloy Immunity Booster

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार

Giloy use in Fever

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए

giloy for diabetes

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।

पाचन शक्ति बढ़ाती है


यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।

कम करती है स्ट्रेस

गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायदेमंद

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम

गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

बाहर निकलेगा कान का मैल

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी

गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।

यौनेच्छा बढ़ाती है गिलोय

आप बगैर किसी दवा के यौनेच्छा बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय का सेवन कर सकते हैं। गिलोय में यौनेच्छा बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं, जिससे यौन संबंध बेहतर होते हैं।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….

जवां रखती है गिलोय

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।

बालों की समस्या भी होगी दूर

अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें:-

अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…

गिलोय जूस

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।

काढ़ा

चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।

गिलोय वटी

बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।

साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम

अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान

वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए।पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय का प्रयोग ना करने दें आप .

एक निवेदन :- अभी वर्षाऋतु का काल है अपने घर में, बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें एवं स्वजनों को भी देवें. यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय अवदान है ।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

डॉक्टर के चक्कर लगा कर हो चुके है परेशान, तो इससे शुगर जैसे रोग को करे जड़ से खत्म

डॉक्टर के चक्कर लगा कर हो चुके है परेशान, तो इससे शुगर जैसे रोग को करे जड़ से खत्म


इसमें कोई शक नहीं कि आज के समय में शुगर एक ऐसी बीमारी है, जो हर घर में आसानी से देखने को मिल जाती है. जी हां आज के समय में हर एक घर में किसी न किसी व्यक्ति को ये बीमारी तो होती ही है. ऐसे में इसकी सबसे बड़ी वजह इंसान की बदलती दिनचर्या है. इसके इलावा भोजन में मिलावट इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है, कि इससे बच पाना मुश्किल होता जा रहा है. इसलिए आज हम आपको एक ऐसा उपाय बताने वाले है, जिसे एक बार तो आपको जरूर आजमाना चाहिए. जी हां अगर आप बार बार डॉक्टर के चक्कर नहीं काटना चाहते तो यकीनन इस उपाय को जरूर आजमाएंगे.

बता दे कि इस उपाय से आपकी शुगर की समस्या काफी हद तक खत्म हो जायेगी. अब इसमें तो कोई दोराय नहीं कि शुगर का रोग हर इंसान के लिए किसी नासुर से कम नहीं होता. ऐसे में वो इससे छुटकारा पाने के लिए लाखो रूपये दवाईयों पर खर्च कर देता है. बरहलाल पुरुष हो या स्त्री, लेकिन ये रोग हर किसी में पाया जाता है. तो चलिए अब आपको इस शुगर विनाशक उपाय के बारे में जरा विस्तार से बताते है.

इसमें सबसे पहले आपको 250 ग्राम इन्द्रजौ कड़वा, 250 ग्राम ही बादाम, 250 ग्राम भुने हुए चने आदि सामग्री लेनी है. यहाँ इस बात का ध्यान रखे कि आपको इन्द्रजौ तल्ख यानि कड़वा ही लेना है और अगर आपको इसके बारे में जानकारी न हो तो आप किसी भी दुकान पर जाकर इसके बारे में पूछ सकते है. इसके इलावा भुने हुए चनो में इस बात का ध्यान रखे कि चने छिलके वाले ही लेने है.

बता दे कि इस उपाय की ज्यादा मात्रा लेने से आपका शुगर लेवल कम भी हो सकता है. इसलिए जितनी मात्रा बताई गई है, केवल उतनी ही ले. गौरतलब है कि अब इन तीनो चीजों को अलग अलग कूट लीजिये, यानि इनका धुरधुरा पाउडर बना लीजिये और फिर इन्हे कांच के एक जार में रख दीजिये.

बता दे कि खाने के बाद एक चाय वाला चम्मच लेकर दिन में केवल एक बार ही सादे जल के साथ इसका सेवन करे. जी हां बता दे कि इस उपाय का परिणाम आपको अच्छा ही मिलेगा और अगर आपका कोई दोस्त इस रोग से पीड़ित है तो उसे भी ये उपाय एक बार जरूर आजमाने को कहिएगा.

इसके साथ ही आपके लिए ये जान लेना भी बेहद जरुरी है कि ये उपाय उन लोगो के लिए लाभकारी होगा, जिन्हे इन्सुलिन न लगती हो. जी हां यानि अगर इस समय आप इन्सुलिन लगवा रहे है, तो कृपया इस उपाय को मत कीजियेगा, लेकिन अगर आप इन्सुलिन नहीं लगवा रहे, तो बेझिझक इसका इस्तेमाल कर सकते है.

बरहलाल आज कल शुगर हर उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. ऐसे में आप उन्हें ये चमत्कारी, सरल और सस्ता उपाय बता कर उन्हें एक नया जीवन दे सकते है.

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

हरे प्‍याज से करें डायबिटीज को जड़ से खत्‍म, पहली खुराक से ही असर शुरू

हरे प्‍याज से करें डायबिटीज को जड़ से खत्‍म, पहली खुराक से ही असर शुरू


डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये धीरे-धीरे हमारे शरीर को नासूर की तरह खोखला करती जाती है । ये बीमारी हमारे रक्‍त के जरिए शरीर के हर एक भाग को प्रभावित करती है । एक बार मधुमेह हो जाए तो इससे पीछा छुड़ाना बेहद कठिन है । समय रहते इसको रोक लेने में ही भलाई है, इससे पहले कि आप इस पर हावी हों आप इसकी नब्‍ज पकड़ लें और इसका खात्‍मा कर दें । अच्‍छी जीवनशैली, सही खानपान और मीठे से दूरी आपको इस बीमारी से बचने में मदद करती है। लेकिन तब क्‍या जब आप इस बीमारी के मुहाने पर खड़े हों ।

डायबिटीज से होने वाली बीमारियां
डायबिटीज को अगर समय रहते कंट्रोल न किया जाए तो ये बहुत सारी स्‍वास्‍थ्‍य परेशानियों का कारण बन जाता है | मधुमेह के कारण हाई ब्लड प्रेशर ,थाइरॉयड ,हार्ट डिसीसेस,किडनी फेलियर और अल्झाइमर जैसी बीमारियों हो सकती है | मधुमेह दो वजहों से होता है या तो हमारे शरीर में इन्सुलिन नहीं बन रहा या फिर आपके शरीर में इन्सुलिन तो बन रहा है मगर आपके सेल इस इन्सुलिन पर प्रतिकिर्या नहीं कर रहे है |

अचूक उपाय
अगर आपके खून में शुगर की मात्रा अधिक हो गई है तो निश्‍चय ही ये परेशान होने की बात है । अगर आप इस पर कंट्रोल नहीं करेंगे तो ये आपको धीरे-धीरे कर पूरा खत्‍म कर देगी । डायबिटीज पर असरदार एक अचूक उपाय हम आपको बताने वाले हैं । आयुवेर्दिक गुणों का प्रयोग कर इस उपाय को आजमाया गया है । लेकिन इसका प्रभाव 100 फीसदी सकारात्‍मक रहेगा ये कहना संभव नहीं है ।

इस सब्‍जी का करें प्रयोग
आप हरे प्‍याज को बाखूबी जानते होंगे, जी हां इसे ही स्प्रिंग अनियन कहा जाता है । पत्‍तेदार प्‍याज के कई फायदों में से एक फायदा है कि ये आपको डायबिटीज से बचाता है । इसका प्रयोग आपको किस प्रकार करना है ये हम अापको आगे बताएंगे । प्‍याज के पत्‍तों का ये उपाय मधुमेह को जड़ से मिटाने का दावा करता है, आप भी इसे आजमा सकते हैं क्‍योंकि इसके कोई साइड इफेक्‍ट्स नहीं हैं ।

ऐसे करें प्रयोग
प्‍याज के पत्‍तों का ये उपाय आपको बहुत ही सिंपल से तीन स्टेप में करना है । पहला स्‍टेप 4 से 5 हरे प्‍याज पत्‍ते समेत लें दूसरा स्‍टेप इन्‍हें दो लीटर पानी में रात भर भिगोकर रख दें, तीसरा और अंतिम स्‍टेप सुबह उठकर इस पानी को छानकर पी जाएं । आपको एक बार में सारा पानी नहीं पीना है । दिनभर में ये दो लीटर पानी खत्‍म करना है । इसी तरह ये प्रयोग करते रहें । पहले दिन से ही आपको शुगर नियंत्रण में लगने लगेगी

एक महीने तक लगातार करें सेवन
हरे प्‍याज का ये प्रयोग आपको पहले दिन से ही अपना असर दिखाना शुरू कर देगा । लेकिन इसके बेहतर परिणाम के लिए आप इस उपाय को पूरे एक महीने तक बिना एक भी दिन छोड़ें करें । आपकी शुगर कंट्रोल में आ जाएगी और आपकी हेल्‍थ भी सुधर जाएगी । इस उपाय के साथ दावा किया जाता है कि आपको शुगर की दवाएं लेने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी अगर आप इस तरह से इसका प्रयोग करें तो ।

हरे प्‍याज के अन्‍य फायदे
हरा प्‍याज कई और तरह से भी फायदेमंद है । इसे आप कई प्रकार के खाने के व्‍यंजन में प्रयोग में ला सकते हैं । हरा प्‍याज खाने से कॉलेस्‍ट्रॉल कंट्रोल होता है । यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम बनाए रखता है । जिससे आप मोटापे के शिकार नहीं होते । अगर आप डायट कर रहे हैं तो हरे प्‍याज की सब्‍जी आपको बहुत फायदा पहुंचाती है । इसे खाने से पेट की प्रॉब्‍लम भी नहीं होती ।

एंटी एजिंग है हरा प्‍याज
हरा प्‍याज खाने से व्‍यकित की इम्‍यूनिटी बिल्‍ड होती है, ये आपके चेहरे की झुर्रियों को समय से पहले नहीं आने देता । हरा प्‍याज खाने से आंखों की रौशनी तेज होती हैं । ये शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है । अगर आपके बाल टूट रहे हैं या बेजान हो गए हैं तो हरे प्‍याज को मिक्‍सी में पीस लें अब इस लेन को सिर पर लगाएं। बाल गिरने भी बंद हो जाएंगे और बालों की सफेदी भी नहीं रहेगी ।

और भी हैं फायदे
मिर्गी का रोगी अगर अचानक बेहोश हो जाए तो प्‍याज को कूटकर सुंघाने से उसे तुरंत होश आ जाता है  । इसकी गंध दिमाग के नर्वस सिस्टम पर झटके जैसा असर करता है । यह गठिया और अस्‍थमा के रोगियों के लिए भी लाभदायक होता है । यूरीन ना आने की समस्‍या हो तो 2 चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लें और इसका पेस्‍ट बना लें । इस पेस्‍ट को पेट पर लगाने से यूरीन की समस्‍या खत्‍म हो जाती है ।

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

शुगर जैसी अनेक बीमारियों के लिए रामबाण इलाज़ है भिंडी का पानी

शुगर जैसी अनेक बीमारियों के लिए रामबाण इलाज़ है भिंडी का पानी


आज हम आपको ऐसी खबर बता रहे है जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। भिंडी काफी लोगों की पसंदीदा सब्‍जी है। लेकिन वह आपकी थाली में शायद इसलिए रहती है क्योंकि वह स्वादिष्ट होती है. हालांकि ये लेख पढ़ने के बाद भी भिंडी आपकी थाली में बनी रहेगी, लेकिन उसकी वजह बदल जाएगी. अब सिर्फ स्वाद की वजह से ही नहीं, बल्कि सेहत की वजह से भी भिंडी आपकी पसंदीदा सब्‍जी बन जाएगी। आइये जाने भिंडी खाने के फायदे।

डायबिटीज का इलाज है भिंडी के पास
डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है. भिंडी में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से यह डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है। दो भिंडी लें के दोनों सिरों को काटकर उसे एक गिलास पानी में डालकर रात भर रख दें। सुबह उठकर भिंडी निकालकर इस पानी को पिएं। ये इन्सुलिन को बढ़ाता है साथ ही इसके पानी से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और ब्लड शुगर नियंत्रण में रहेगा। इसका असर आपको 15 दिनों में देखने को मिल सकता है क्योंकि यह ब्लड शुगर के लेवल पर निर्भर करता है। यदि यह ज्यादा है तो कुछ सप्ताह लग सकते है यदि कम है तो कुछ दिनों में परिणाम मिल सकता है।

विटामिन K का है खजाना :
भिंडी में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्त संचार को बनाए रखता है. भोजन में भिंडी खाने से शरीर में विटामिन के की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे रक्‍त के थक्के नहीं बनते।

प्रेग्नेंसी में जरूर खाएं भिंडी :
वे महिलाएं, जो गर्भवती हैं या फिर गर्भधारण करना चाहती हैं, उन्हें भिंडी का सेवन जरूर करना चाहिए. भिंडी में काफी मात्रा में फॉलिक एसिड होता है, जो भ्रूण के विकास के लिए जरूरी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है :
भिंडी में विटामिन सी पाया जाता है, जिसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. शरीर में विटामिन सी की संतुलित मात्रा होने से मौसमी एलर्जी होने का खतरा भी कम रहता है।

आंखों के लिए फायदेमंद है भिंडी :
विटामिन ए और बीटा कैरोटीन आंखों की रौशनी बढ़ाता है. भिंडी में ये दोनों ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

भिंडी के सेवन से वजन नहीं बढ़ता है
भिंडी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर काफी होता है. वजह से यह शरीर को भरपूर ऊर्जा तो देती है, लेकिन इसके सेवन से वजन नहीं बढ़ता है।

कब्‍ज का रामबाण इलाज :
अगर आप कब्‍ज से परेशान हैं तो अपने भोजन में भिंडी को शामिल कर लें. भिंडी में मौजूद फाइबर रोज सुबह पेट साफ करने में मददगार होते हैं।

रविवार, 28 जनवरी 2018

जानिए मधुमेह के ऐसे उपाय जो आपको कही नही मिलेंगे

जानिए मधुमेह के ऐसे उपाय जो आपको कही नही मिलेंगे


मधुमेह यानि डाइबि‍टीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। दुनिया भर में मधुमेह के मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा एक चिंता का विषय बना हुआ है। यहाँ मधुमेह के रोगियों के लिए कुछ देशी नुस्खे पेश किए गए हैं। लेकिन इनमें से किसी भी नुस्‍खे को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक की राय जरूर ले लें।

नींबू से प्यास बुझाइए
मधुमेह के मरीजों को प्यास ज्‍यादा लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने पर पानी में नींबू निचोड़कर पीने से प्यास कम लगती है और वह स्‍थाई रूप से शांत होती है।
भूख मिटाने के लिए खाएँ खीरा
मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन खाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से बार-बार भूख लगती है। ऐसी स्थिति में खीरा खाकर अपनी भूख मिटानी चाहिए।

गाजर और पालक
मधुमेह के रोगियों को गाजर और पालक का रस पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

शलजम
मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का सेवन अधिक करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम हो जाती है। अतः शलजम की सब्जी और विभिन्‍न रूपों में शलजम का सेवन करना चाहिए।

जमकर खाएँ जामुन
मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। यदि कहा जाए कि जामुन मधुमेह के रोगी का ही फल है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में अत्‍यंत लाभकारी हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन करना चाहिए। जामुन की गुठली भी बहुत फायदेमंद होती है। इसके बीजों में जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार तीन ग्राम चूर्ण का पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा की मात्रा कम होती है।

करेले से ना डरें
प्राचीन काल से करेले मधुमेह के इलाज में रामबाण माना जाता रहा है। इसके कड़वे रस के सेवन से रक्‍त में शर्करा की मात्रा कम होती है। मधुमेह के रोगी को प्रतिदिन करेले के रस का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इससे आश्चर्यजनक लाभ प्राप्‍त होता है। नवीन शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी मधुमेह को शीघ्र और स्थाई रूप से खत्‍म करने की क्षमता रखता है।

मेथी भी है इलाज
मधुमेह के उपचार के लिए मेथी के दानों का प्रयोग भी किया जाता है। अब तो बाजार में दवा कंपनियों की बनाई मेथी भी उपलब्‍ध है। मधुमेह का पुराना से पुराना रोग भी मेथी के सेवन से दुरुस्‍त हो जाता है। प्रतिदिन प्रात:काल खाली पेट दो-तीन चम्‍मच मेथी के चूर्ण को पानी के साथ निगल लेना चाहिए।

चमत्कारी है गेहूँ के जवारे
गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड भी कहते हैं। रोगी को प्रतिदिन सुबह और शाम में आधा कप जवारे का ताजा रस दिया जाना चाहिए।

अन्य उपचार
नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस और चार चम्‍मच केले के पत्ते का रस लेना चाहिए। चार चम्मच आँवले का रस, गुडमार की पत्ती का काढ़ा भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

बुधवार, 17 जनवरी 2018

1 रुपये की मूली में है इतनी ताकत कि जड़ से खत्म हो जाएंगी ये बीमारियां

1 रुपये की मूली में है इतनी ताकत कि जड़ से खत्म हो जाएंगी ये बीमारियां


सलाद और सब्जी के रूप में इस्तेमाल होने वाली मूली सेहत के लिए वरदान साबित होती है। मूली से सिर्फ सब्जियां ही नहीं बल्कि इससे पराठे और आचार भी बनाए जाते हैं। मामूली सी दिखने वाली मूली से कई रोगों का इलाज किया जा सकता है। जी हां, मूली कई औषधिय गुणों से भरपूर होती है। तो चलिए आज जानेंगे मूली के फायदों के बारे में-

त्वचा के लिए
मुली का सेवन करना त्वचा के लिए लाभकारी होता है। रोजाना सुबह खली पेट में मुली को खाने से चेहरा साफ और सुन्दर रहता है। मुली को पिस कर खुजली वाली हिसे में लगा कर कम से कम आधे घंटे के बाद धोने से खुजली से भी राहत मिलता है ।

कैंसर की छुट्टी
मूली में भरपूर मात्रा में फॉलिक एसिड, विटामिन C और एंथोकाइनिन पाए जाते हैं। ये तत्वन शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है।

डायबिटीज से छुटकारा
मूली कम ग्लाछइसेमिक इंडेक्स, के लिए जानी जाती है। यानी कि इसे खाने से ब्लहड शुगर पर असर नहीं होता है। रोजाना सुबह खाने में मूली का सेवन करने से डायबिटीज से जल्द छुटकारा मिल सकता है।

सर्दी-जुकाम में राहत
मूली खाने से जुकाम भी नही होता है। कुछ नहीं तो मूली को कम से कम सलाद में तो जरूर खाना चाहिए।

भूख बढाती है
यदि आप को भूख न लगने की शिकायत है तो रोज खाने के समय एक मुली को काली नमक के साथ लगा कर खाने से भूख अच्छी लगती है।

आँखों के लिए
मुली में काफी अच्छी मात्र में Vitamin A, B, C जैसे तत्व पाए जाते है जो की हमारे आँखों की रोशनी को बढाता है । रोजाना सुबह मुली को खाने से आँखों की रौशनी बढती है ।

नींद ना आना
यदि आप नींद न आने से परेशान है, तो रोजान सोने से पहले एक मुली का सेवन करे ऐसा करने से आप को नींद अच्छी आयगी ।

गैस
मुली गैस की समस्या के लिए रामबाण सिद्ध होता है। मुली और टमाटर का सलाद या मुली के juise का सेवन करने से गैस से छुटकारा मिलता है ।

बालों के लिए
यदि आप के बालो में जुएँ हो गये है और कई घरेलु उपाय अपना कर भी इससे छुटकारा नहीं मिल रहा हो तो, मुली के रस से अपने बालो को पूरी तरह से भिन्गों दे और 5 मिनट तक मालिस करे और फिर आधा घंटे के बाद अपने सर को धो ले । इस प्रक्रिया को 3 से 5 दिनों तक उपयोग करने से सारे जुएँ और लिख मर जायंगे ।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल


गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है।

गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया गया तो वहाँ पर एक नया पौधा बन जाता है। गिलोय की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि इसमें गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, अनेक प्रकार की वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाये जाते हैं।
पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है। कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है। इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं। यह क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह इन्सुलिन की उत्पत्ति को बढ़ाकर ग्लूकोज का पाचन करना तथा रोग के संक्रमणों को रोकने का कार्य करती है।
आइये हम गिलोय से होने वाले शारीरिक फायदे की ओर देखें :
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है – गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होनेवाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी – गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है। गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

पाचन क्रिया करता है दुरुस्त – गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

बवासीर का भी इलाज है गिलोय – बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

डॉयबिटीज का उपचार – अगर आपके शरीर में रक्त में पाए जाने वाली शुगर की मात्रा अधिक है तो गिलोय के रस को नियमित रूप से पीने से यह मात्रा भी कम होने लगती है।

अस्थमा का बेजोड़ इलाज – अस्थमा एक प्रकार की अत्यंत ही खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से मरीज को भिन्न प्रकार की तकलीफों का सामना करना पडता है, जैसे छाती में कसाव आना, साँस लेने में तकलीफ होना, अत्याधिक खांसी होना तथा सांसो का तेज तेज रूप से चलना। कभी कभी ऐसी परिस्थिती को काबू में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, कि अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गिलोय का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है, तथा इससे अस्थमा की समस्या से छुटकारा भी मिलने लगता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु – गिलोय हमारी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह हमारी आंखों की दृष्टी को बढाता है, जिसकी वजह से हमे बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है। यदि गिलोय के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर यह पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है।

सौंदर्यता के लिए भी है कारगार – गिलोय का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने में काफी सहायता मिलती है। यह हमारी त्वचा को युवा बनाए रखने में मदद करता है। गिलोय से हमारी त्वचा का स्वास्थ्य सौंदर्य बना रहता है। तथा उस में एक प्रकार की चमक आने लगती है।

दांतों में पानी लगना: गिलोय और बबूल की फली समान मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह-शाम नियमित रूप से इससे मंजन करें इससे आराम मिलेगा।

खुजली: हल्दी को गिलोय के पत्तों के रस के साथ पीसकर खुजली वाले अंगों पर लगाने और 3 चम्मच गिलोय का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर सुबह-शाम पीने से खुजली पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

हिचकी: सोंठ का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

कान का मैल साफ करने के लिए: गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके कान में 2-2 बूंद दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है और कान साफ हो जाता है।

कान में दर्द: गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

संग्रहणी (पेचिश): अती, सोंठ, मोथा और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 20-30 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मन्दाग्नि (भूख का कम लगना), लगातार कब्ज की समस्या रहना तथा दस्त के साथ आंव आना आदि प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

कब्ज : गिलोय का चूर्ण 2 चम्मच की मात्रा गुड़ के साथ सेवन करें इससे कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

एसीडिटी: गिलोय के रस का सेवन करने से ऐसीडिटी से उत्पन्न अनेक रोग जैसे- पेचिश, पीलिया, मूत्रविकारों (पेशाब से सम्बंधित रोग) तथा नेत्र विकारों (आंखों के रोग) से छुटकारा मिल जाता है। गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्तों को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त हो जाती है।

बवासीर, कुष्ठ और पीलिया: 7 से 14 मिलीलीटर गिलोय के तने का ताजा रस शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से बवासीर, कोढ़ और पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।

चेहरे के दाग-धब्बे: गिलोय की बेल पर लगे फलों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।

सफेद दाग : सफेद दाग के रोग में 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के रस को रोजाना 2-3 बार कुछ महीनों तक सफेद दाग के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

पेट के रोग : 18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद और छोटी पीपल, 2 नीम की सींकों को पीसकर 250 मिलीलीटर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में फूलने के लिए रात के समय रख दें तथा सुबह उसे छानकर रोगी को रोजाना 15 से 30 दिन तक पिलाने से पेट के सभी रोगों में आराम मिलता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया) : गिलोय के 2-4 ग्राम का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।

शीतपित्त (खूनी पित्त): 10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।

उल्टी होना (वमन): गिलोय का रस और मिश्री को मिलाकर 2-2 चम्मच रोजाना 3 बार पीने से वमन (उल्टी) आना बंद हो जाती है। गिलोय का काढ़ा बनाकर ठण्डा करके पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।

आंखों की बीमारी: लगभग 11 ग्राम गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद और सेंधानमक मिलाकर, इसे खूब अच्छी तरह से गर्म करें और फिर इसे ठण्डा करके आंखो में लगाने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इसके प्रयोग से पिल्ल, बवासीर, खुजली, लिंगनाश एवं शुक्ल तथा कृष्ण पटल आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं। गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे पीपल के चूर्ण और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है तथा और भी आंखों से सम्बंधित कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।

क्षय (टी.बी.): गिलोय, कालीमिर्च, वंशलोचन, इलायची आदि को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ कुछ हफ्तों तक रोजाना सेवन करने से क्षय रोग दूर हो जाता है। कालीमिर्च, गिलोय का बारीक चूर्ण, छोटी इलायची के दाने, असली वंशलोचन और भिलावा समान भाग कूट-पीसकर कपड़े से छान लें। इसमें से 130 मिलीग्राम की मात्रा मक्खन या मलाई में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से टी.बी. रोग ठीक हो जाता है।

दमा (श्वास का रोग): गिलोय की जड़ की छाल को पीसकर मट्ठे के साथ लेने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है। 6 ग्राम गिलोय का रस, 2 ग्राम इलायची और 1 ग्राम की मात्रा में वंशलोचन शहद में मिलाकर खाने से क्षय और श्वास-रोग ठीक हो जाता है।

बुखार: गिलोय 6 ग्राम, धनिया 6 ग्राम, नीम की छाल 6 ग्राम, पद्याख 6 ग्राम और लाल चंदन 6 ग्राम इन सब को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस बने हुए काढ़े को सुबह और शाम पीते रहने से हर प्रकार का बुखार ठीक हो जाता है।

जीभ की जलन और सूजन: गिलोय, पीपल, तथा रसौत का काढ़ा बनाकर इससे गरारे करने से जीभ की जलन तथा सूजन दूर हो जाती है।

मुंह के अन्दर के छालें (मुखपाक): धमासा, हरड़, जावित्री, दाख, गिलोय, बहेड़ा एवं आंवला इन सब को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। ठण्डा होने पर इसमें शहद मिलाकर पीने से मुखपाक दूर होते हैं।

शारीरिक कमजोरी: 100 ग्राम गिलोय का लई (कल्क), 100 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण, दोनों को एक साथ 1 लीटर उबलते पानी में मिलाकर किसी बंद पत्ते में रख दें। 2 घंटे के बाद मसल-छान कर रख लें। इसे 50-100 ग्राम रोजाना 2-3 बार सेवन करने से बुखार से आयी शारीरिक कमजोरी मिट जाती है।

प्यास अधिक लगना: गिलोय का रस 6 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कई बार लेने से प्यास शांत हो जाती है।

मधुमेह: 40 ग्राम हरी गिलोय का रस, 6 ग्राम पाषाण भेद, और 6 ग्राम शहद को मिलाकर 1 महीने तक पीने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है। या 20-50 मिलीलीटर गिलोय का रस सुबह-शाम बराबर मात्रा में पानी के साथ मधुमेह रोगी को सेवन करायें या रोग को जब-जब प्यास लगे तो इसका सेवन कराएं इससे लाभ मिलेगा। या 15 ग्राम गिलोय का बारीक चूर्ण और 5 ग्राम घी को मिलाकर दिन में 3 बार रोगी को सेवन कराऐं इससे मधुमेह (शूगर) रोग दूर हो जाता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया): गिलोय और सोंठ को एक ही मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से पुराने से पुराना गठिया रोग में फायदा मिलता है। या गिलोय, हरड़ की छाल, भिलावां, देवदारू, सोंठ और साठी की जड़ इन सब को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें तथा छोटी बोतल में भर लें। इसका आधा चम्मच चूर्ण आधा कप पानी में पकाकर ठण्डा होने पर पी जायें। इससे रोगी के घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है। या घुटने के दर्द दूर करने के गिलोय का रस तथा त्रिफुला का रस आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से लाभ मिलता है।

पेट में दर्द : गिलोय का रास 7 मिलीलीटर से लेकर 10 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

पीलिया रोग: गिलोय अथवा काली मिर्च अथवा त्रिफला का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर प्रतिदिन सुबह और शाम चाटने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। या गिलोय का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय की लता गले में लपेटने से कामला रोग या पीलिया में लाभ होता है। या गिलोय का रस 1 चम्मच की मात्रा में दिन में सुबह और शाम सेवन करें।

मानसिक उन्माद (पागलपन): गिलोय के काढ़े को ब्राह्मी के साथ पीने से उन्माद या पागलपन दूर हो जाता है।
शरीर की जलन: शरीर की जलन या हाथ पैरों की जलन में 7 से 10 मिलीलीटर गिलोय के रस को गुग्गुल या कड़वी नीम या हरिद्र, खादिर एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करने से शरीर में होने वाली जलन दूर हो जाती है।

कुष्ठ (कोढ़): 100 मिलीलीटर बिल्कुल साफ गिलोय का रस और 10 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण 1 लीटर उबलते हुए पानी में मिलाकर किसी बंद बर्तन में 2 घंटे के लिये रखकर छोड़ दें। 2 घंटे के बाद इसे बर्तन में से निकालकर मसलकर छान लें। इसमें से 50 से 100 ग्राम की मात्रा प्रतिदिन दिन में 3 बार सेवन करने से खून साफ होकर कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।

खून की कमी: 360 मिलीलीटर गिलोय के रस में घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में खून की वृद्धि होती है। या गिलोय (गुर्च) 24 से 36 मिलीग्राम सुबह-शाम शहद एवं गुड़ के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।

सिर का दर्द: मलेरिया के कारण होने वाले सिर के दर्द को ठीक करने के लिए गिलोय का काढ़ा सेवन करें।

ज्यादा पसीना या दुर्गन्ध आना : 20 से 40 मिलीलीटर गिलोय का शर्बत 4 गुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम के समय में पीने से बदबू वाला पसीना निकलना बंद हो जाता है।

बुधवार, 27 दिसंबर 2017

सिर्फ 1 महीने तक एक्यूप्रेशर थेरेपी से मधुमेह भी घुटने टेक देता है, जरूर आजमाएँ

सिर्फ 1 महीने तक एक्यूप्रेशर थेरेपी से मधुमेह भी घुटने टेक देता है, जरूर आजमाएँ


आज हम आपको जो तरीका बताने जा रहे है उसे एक्यूप्रेशर थेरेपी कहा जाता है, जो आप आसानी से कोई दवां या औषिधि लिए बिना कर सकते है, यह पद्धति उन देशों में प्रचलित है जो गौतम बुद्धा के अनुयायी है जैसे जापान, कोरिया, चीन, वियतनाम आदि। यहां इसी पद्धति से बिना दवाई के उपचार करने में महारत हासिल है तभी इन देशों के लोगो की आयु ज्यादा और शरीर रोग मुक्त होता है बुढ़ापे तक इसे आप भी अपनाएँ और निरोग हो जाये। यह पद्धति थोड़ी धीमी हो सकती है लेकिन परिणाम सत प्रतिशत देती है।

हम जानते हैं कि शरीर को ग्लूकोज से शक्ति प्राप्त होती है इसलिए जल्दी पच जाने वाली ग्लूकोज- शर्करा का सेवन करना चाहिए जो प्राकृतिक रूप से फल, फलों के रस, शहद तथा अनाज में पाई जाती है। इन पदार्थों में लार मिलने पर शरीर में इनका सरलता से पाचन हो जाता है। यदि मधुमेह रोग को नियंत्रण में रखना हो तो प्रत्येक आहार तथा प्रवाही को कम से कम 15 बार चबाना बहुत जरूरी है। बचपन से ही भोजन को चबा-चबाकर खाने की आदत डालनी चाहिए।

मधुमेह (Diabetes) का कारण :

मधुमेह का रोग शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाने के कारण होता है। हम सभी को पता है कि इन्सुलिन खून में शर्करा की मात्रा को बनाये रखता है और इन्सुलिन की मात्रा खून में कम हो जाये तो खून में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण व्यक्ति को मधुमेह रोग हो जाता है। लेकिन मधुमेह रोग केवल इन्सुलिन की कमी के कारण ही नहीं होता है बल्कि शरीर में उन अनेकों प्रकार के परिवर्तनों के कारण भी होता है जो क्लोम ग्रंथि की दोषपूर्ण क्रिया के लिए उत्तरदायी होते हैं।
जब हम शूगर और स्टार्च से युक्त विभिन्न प्रकार के भोजनों को खाते हैं तो हमारे शरीर का पाचनतन्त्र शूगर और स्टार्च को अलग-अलग करके ग्लूकोज में परिवर्तित कर देता है। इसके बाद ग्लूकोज आसानी से खून में मिल जाता है। शरीर में पाये जाने वाले आमाशय के ठीक नीचे की ओर अग्नाशय नामक ग्रंथि से पैदा होने वाला इंसुलिन ग्लूकोज को रक्त के बहाव में सोखने में शरीर की मदद करता है।
ग्लूकोज खून के बहाव में शामिल होकर ही शरीर की पेशियों और शरीर के कई प्रकार के अंगों की कई प्रकार की क्रियाओं को करने के लिए ईंधन उपलब्ध कराता है। इस क्रिया के बाद शूगर की बची हुई मात्रा ग्लूकोज के रूप में जिगर में जमा हो जाती है और बाद में शरीर को चलाने के लिए जब इसकी आवश्यकता पड़ती है तो यह ऊर्जा या वसा के रूप में बदल जाती है और शरीर के काम आ जाती है।
मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के शरीर में अग्न्याशय इतना इंसुलिन पैदा नहीं करता जितना खून में पाई जाने वाले ग्लूकोज के प्रयोग के लिए जरूरी होता है। कुछ क्रियाओं में तो इंसुलिन का बनना बिल्कुल ही बंद हो जाता है।

मधुमेह रोग के होने में आनुवंशिकता की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। उम्र भी कई प्रकार से शरीर के अग्न्याशय को निष्प्रभावी करने का कारण बनती है जिसके कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है। मधुमेह रोग मोटापे के कारण भी हो जाता है क्योंकि मोटा आदमी अधिक खाना खाता है जिसके कारण पाचनक्रिया में चयापचयी परिर्वतन होता है और उस मोटे व्यक्ति को मधुमेह रोग हो जाता है।

इस प्रकार के कई मामलों में शरीर का आकार बढ़ जाने के कारण शरीर में इंसुलिन की मांग भी बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप अग्न्याशय इस अधिक इंसुलिन की मात्रा को पूरी करने में असफल हो जाता है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और मोटे व्यक्ति को मधुमेह रोग हो जाता है। जब शरीर में लिंफ ग्रन्थि बराबर रूप से काम नहीं करती तब आवश्यक मात्रा में शर्करा खून से शोषित होकर मस्तिष्क-मेरूजल में नहीं जा पाती जिसके कारण खून में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है और व्यक्ति को मधुमेह रोग हो जाता है।

मधुमेह (Diabetes) के प्रकार :
  • इंसुलिन निर्भर मधुमेह।
  • गैर-इंसुलिन निर्भर मधुमेह।

1. इंसुलिन निर्भर मधुमेह :
मधुमेह रोग व्यक्ति को तब होता है जब उसके शरीर में इंसुलिन का बनना बिल्कुल रुक जाता है। इस प्रकार का मधुमेह व्यक्ति में किशोरावस्था में होता है और बाद में यह रोग काफी उभर जाता है। अधिकतर यह रोग व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है और कुछ ही दिनों के अन्दर रोगी को कमजोर कर देता है। इस प्रकार के रोग से पीड़ित व्यक्ति को अधिक से अधिक प्यास लगती रहती है और पेशाब बार-बार आता रहता है। पीड़ित रोगी का वजन दिन-प्रतिदिन गिरने लगता है क्योंकि ग्लूकोज का प्रयोग या इंसुलिन को संरक्षित करने में विफल होने पर शरीर वसा के रूप में मौजूद ऊर्जा का प्रयोग करने लगता है जिसके कारण रोगी पर अनिर्णय और ऊनीदापन भी हावी हो जाता है यदि इसका जल्द ही इलाज न किया जाए तो यह अवस्था इतनी अधिक बिगड़ जाती है कि रोगी अपना होशो-हवास गंवा देता है और बेहोशी की स्थिति में चला जाता है।

इस रोग से पीड़ित व्यक्ति सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा कुछ खास तरह के संक्रमण का ज्यादा शिकार होता है क्योंकि शूगर की उपस्थिति में बैक्टीरिया, कवक और वायरस को ज्यादा बढ़ावा मिल जाता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में यदि घाव , फोड़े-फुंसियां आदि हो जाये तो सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा उनके यह घाव, फोड़े-फुंसियां आदि देर से ठीक होते हैं। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के पेशाब में शूगर की मात्रा बढ़ जाती है जिसकी अधिकता के कारण जननांगों में जलन और खुजली जैसी अवस्था पैदा हो जाती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के घाव तथा चोट जल्दी भर नहीं पाते है।

2. गैर-इंसुलिन निर्भर मधुमेह :
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति में शूगर की तेजी कुछ कम होती है क्योंकि इस अवस्था में शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बिल्कुल रुक रुकता नहीं है जाता है जिसके कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति की अधिकतर आयु 40 वर्ष के आस-पास होती है तथा उसका वजन भी सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अधिक होता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है तथा बार-बार पेशाब आने लगता है। इस प्रकार के लक्षणों को उभरने में कुछ समय लगता है।

इस रोग से पीड़ित व्यक्ति में थकावट तथा सुईयां चुभने जैसा अहसास तथा आंखों से कम दिखाई देना जैसे लक्षण भी प्रकट होते हैं। यदि इस रोग से पीड़ित व्यक्ति की अवस्था काफी गंभीर हो जाए तो उसे चिकित्सक की सही सलाह लेनी चाहिए तथा उसके परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराना चाहिए।

मधुमेह (Diabetes) का कारण खानपान :

मधुमेह की दिक्कत उन लोगों को ज्यादा होती जो मेहनत बहुत कम करते हैं और अक्सर बैठे रहते हैं। खाने में ज्यादा मात्रा में दूध, दही, मांस-मछली, नए चावल, आलू, चीनी आदि का सेवन करने से शुगर या मधुमेह का रोग हो जाता है। एक्यूप्रेशर विधि से शुगर के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर के रोगी के पैरों के अंगूठे, एडी, मुंह, टांगे कमजोर पड जाती हैं।

एक्यूप्रेशर तकनीक रोगी की प्रतिरोधक क्षमता बढती है। नर्व और मसल्स स्टिमुलेटर, फेरेडिक जेनेरेटर, एक्यूजप्रेशर प्वांइट मॉर्कर, नर्व जेनरेटर और हैवी वाइब्रेटर जैसे एक्यूप्रेशर थेरेपी के उपकरण हैं। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से शरीर में उन उर्जा केंद्रों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जाती है जो कि किसी कारण से काम करना बंद कर देते हैं या सुस्त हो जाते हैं। एक्यूप्रेशर द्वारा मधुमेह रोगी के शुगर स्तर को कम किया जा सकता है। एक्यूप्रेशर का प्रयोग संवेदनशील त्वचा वाले रोगियों में लालिमा और चोट पहुंचा सकता है।


मधुमेह (Diabetes) का एक्यूप्रेशर थेरेपी से उपचार :

इस चित्र के अनुसार दिए गए सूचीवेदन बिन्दु पर दबाव देने से मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है जिससे मधुमेह रोग जल्दी ठीक हो जाता है।

इस चित्र में निश्चित प्रतिबिम्ब बिन्दु को 5-10 सेकण्ड दबाये और छोड़े यह पुनः दोहराएं
मधुमेह रोग होने में शरीर के जिन अंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, वे हैं गुर्दे, आंते, जिगर , आमाशय और अग्न्याशय। इनकी कार्य क्षमता में कमी आने से मधुमेह की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है इसलिए इनसे सम्बन्धित प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर देने से न केवल इन अंगों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है बल्कि इस रोग को रोकने में आवश्यक मदद मिलती है। 

रोगी द्वारा नियमित रूप से आहार, व्यायाम तथा परहेज के साथ-साथ एक्युप्रेशर पद्धति द्वारा प्रेशर देने से मधुमेह रोग में आराम मिल जाता है।


मधुमेह (Diabetes) में आवश्यक निर्देश :

मधुमेह से पीड़ित रोगी को चीनी मिला हुआ दूध नहीं पीना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो दूध में थोड़ी सी हल्दी डालकर पीने से दूध में स्वाद आ जाता है। हल्दी मिला दूध पीने से रोगी का खून शुद्ध हो जाता और त्वचा में भी ताजगी रहती है। इस रोग में रोगी को शक्कर तथा मिठाई का सेवन बिल्कुल कम कर देना चाहिए।

दो भिंडियों को बीच में से चीरकर आधा गिलास पानी में शाम को भिगो दें और सुबह के समय में उन्हें मसलकर पानी में घोलकर काढ़ा बना लें। इस चिकने पानी को खाली पेट पिएं और इसके बाद कुछ समय तक कुछ न खाए-पिए। यदि रोगी को बार-बार सर्दी हो जाए तो इस पानी को लोहे की कड़ाही में छोंककर पिएं। इसके साथ-साथ एक्यूप्रशर चिकित्सा करने से बहुत लाभ मिलता है।

आम के 5-10 पत्तों को आधे घंटे तक पानी में भिगोकर रखें। कुछ समय बाद इसका रस निकालकर रोगी को 25 से 35 दिन तक पिलाने से मधुमेह रोग में बहुत लाभ मिलता है।

मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए अपने भोजन पर नियंत्रण रखना बहुत ही आवश्यक है अर्थात उसे ऐसे पदार्थों को नहीं खाना चाहिए जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती है जैसे- आलू, आम, चीनी, चावल , दूध, दूध की मिठाइयां, तली-भुनी वस्तुएं, चाय, कॉफी तथा शराब आदि।

मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना सुबह तथा शाम के समय में हल्का व्यायाम करना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज कराते रहने से भी बहुत अधिक लाभ मिलता है।
मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना-फिरना चाहिए।

मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को उठते-बैठते तथा सोते समय सावधानी बरतनी चाहिए तथा हमेशा सीधे बैठने, सोने एवं उठने की आदत डालनी चाहिए।
  • रोगी को अपने भोजन में करेले तथा जामुन का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।
  • करेले का जूस पीने से मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  • मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को भिण्डी तथा धनिये का भोजन में उचित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
  • मधुमेह रोग के रोगी को तुलसी का प्रयोग भी अपने भोजन में करना चाहिए। तुलसी इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए रामबाण औषधि की तरह काम करती है।


शनिवार, 2 दिसंबर 2017

सोडा के पीने से शरीर पर दुष्प्रभाव जिसे पढ़ कर आप सोडा कभी नहीं पियेंगे

सोडा के पीने से शरीर पर दुष्प्रभाव जिसे पढ़ कर आप सोडा कभी नहीं पियेंगे


सोडा शरीर के लिए घातक होता है । इसके दुष्परिणाम थोड़ी  देर में नज़र आने लगते है क्योकि सोडा से शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जो सीधे स्पाइरल के नीचे जाता है।

10 मिनट बाद
12 औंस सोडा में 10 छोटे चम्मच चीनी होती है जो पुरे दिन के चीनी सेवन के बराबर है । इसमें फास्फोरिक एसिड और अन्य प्रकार के रस मिले होते है जो चीनी की मिठास को कम कर देते है और यह पीने में स्वादिष्ठ लगता है  ।


फास्फोरिक एसिड क्या है?
फास्फोरिक एसिड हमारे दांतो की ऊपरी सतह को नष्ट करता है । इसके ज्यादा सेवन से शरीर कैल्शियम (जो हड्डियों को मजबूत करता है) को पूरी तरह से सोख नहीं कर पाता जिससे हड्डिया कमज़ोर होती हैं।

20 मिनट बाद
सोडा बहुत तेज़ी से पेट की आंतो तक पहुचंता है । जिस कारण शुगर बढ़ जाती है । शुगर के स्तर को नियंतरण करने के लिए शरीर में मौजूद इन्सुलिन फट जाती है । लिवर रक्तपर्वाह में ग्लूकोस की मात्रा को बढ़ाता है और इसका संग्रह करता है । शुगर चर्बी को बढ़ाता है । शरीर को मोटा करता है ।

क्या आप जानते  है?
सोडा में मौजूद चीनी या तो उच्च फ्रुक्टोसे कॉर्न सिरप या सुक्रोस है, जो लगभग 50% ग्लूकोस और 50%  फ्रुक्टोसे  में टूट जाते हैं और रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं । जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारिया हो सकती हैं । जैसे मोटापा , ह्रदय रोग, मधुमेह, आदि ।
30 मिनट बाद
धीरे धीरे कैफैने का प्रभाव नज़र आता है । आँखों की पुतली फैलने लगती है । रक्त चाप बढ़ जाता है । जिगर में चीनी की अधिक मात्रा होने से ह्रदय और शवसन दर में वृद्धि होने लगती है । अगर आप थके हुए भी है तो भी आपको थकान महसूस नहीं होती क्योकि कैफैने मस्तिष्क के एडनोसिस रिसेप्टर्स को रोकता है  ।


40 मिनट बाद
आपका डोपामाइन (यह एक दिमागी हॉर्मोन है, जो शरीर में होने वाली गतिविधियों को नियत्रिंत करता है ।) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ता है । यह दिमाग के आनद केन्द्रो पर प्रभाव डालता है । यह एक प्रकार से कोकीन, एम्फ़ैटेमिन और हीरोइन द्वारा उत्पादित जैसा होता है ।

50 मिनट बाद
कैफैन की मूत्रवर्ध्क गूढ़ के कारण पेशाब आता है । यह शरीर को जोड़ने वाले तत्व जैसे मैग्नीशियम, जस्ता और कैल्शियम को खाली करता है । यह तत्व हड्डियों के लिए आवश्यक है । साथ ही साथ एलेक्ट्रोलाइट , सोडियम और पानी की मात्रा भी कम करता है । साधारण पेय की तुलना में कैफैन के सेवन के 2 घंटे बाद शरीर के मूत्र उत्पादन में कैल्शियम , सोडियम मैग्नीशियम, पोटैशियम, क्लोराइड और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।

60 मिनट बाद
पाचक ग्रंथि में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है । रक्त शर्करा को संतुलित करने के लिए इन्सुलिन फटती है । कैफैन भी मूत्राशय में सक्रिय होने के कारण बार बार बाथरूम जाना पड़ता है ।
इन्सुलिन का महत्व
इन्सुलिन शरीर की कोशिकाओं में उपलबध चीनी या ग्लूकोस की मात्रा को नियंत्रित करता है । खून में चीनी की ज्यादा मात्रा होने पर यह ग्लूकोस को सामान्य स्तर पर लता है।

1 घंटे बाद
शरीर थका हुआ, आलसी, कठोर, मुँह सूखने लगता है मानो प्यास लगी है । दोबारा सोडा इन्सुलिन का महत्व पीने की चाह होती है । खास कर तब जब हमने डाइट सोडा पिया हो ।
डाइट सोडा में पायी जाने वाली कृत्रिम चीनी दिमाग की लत केन्द्रो को प्रभावित करती है । जिस कारण बार बार इसके सेवन का मन करता है ।

अतः सोडा का सेवन शरीर को कोई भी पोषक तत्व नहीं देता अपितु शरीर में उपलब्द पोषक तत्वों को नष्ट करता है । इसका स्वाद अच्छा लगता है । धीरे धीरे शरीर को इसकी आदत हो जाती है । शरीर में विभिन्न प्रकार की बिमारियां घर कर लेती है ।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

सर्दी, खांसी, और बुखार से छुटकारा पाने के लिए घर पर काढ़ा कैसे बनायें

सर्दी, खांसी, और बुखार से छुटकारा पाने के लिए घर पर काढ़ा कैसे बनायें


भारतीय घर आम तौर पर मसालों और जड़ी-बूटियों से भरे होते हैं जो रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन आप इन मसालों और जड़ी-बूटियों को देसी काढ़े बनाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो न केवल रोगों का इलाज करते हैं बल्कि समग्र स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। काढ़ा एक पेय है जिसमें जड़ी-बूटियों और मसालों को पानी में आम तौर पर लंबे समय के लिए उबाला जाता है। जड़ी बूटियों का चुनाव आप अपनी बीमारी के अनुसार कर सकते हैं। स्वाद भी उसी के अनुसार भिन्न होता है। एक बार जब काढ़ा तैयार हो जाता है तो आप दिन में कई बार काढ़े का सेवन कर सकते हैं। आप इसे स्टोर भी कर सकते हैं और फिर इसे पीने से पहले गर्म कर सकते हैं। यहां पांच ऐसे आयुर्वेदिक काढ़े बताये गए हैं जिनका आपको नीचे दी गई बीमारियों में इस्तेमाल करना चाहिए।

तुलसी का काढ़ा करें बुखार का इलाज:
सर्दियों के महीनों में बुखार काफी आम समस्या होती है लेकिन यह काढ़ा इसके इलाज में मदद कर सकता है। इस काढ़े को बनाना बहुत ही आसान है और इस काढ़े के सेवन के बाद पसीना आता है जिससे बुखार कम हो सकता है।
  • तुलसी के पत्ते और लौंग लें और उन्हें क्रश करें।
  • उन्हें एक गिलास उबलते हुए पानी में डालें
  • इसे तब तक उबालें, जब तक यह आधे से कम नहीं रह जाता है और फिर इसमें एक चुटकी नमक की डाल दें।
  • इस काढ़े को 2-3 दिन के लिए दिन में दो बार पिएं।
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सर्दी खांसी के लिए  उपयोगी है देसी काढ़ा:
वात और कफ को शांत करने के लिए सूखी अदरक और काली मिर्च उत्कृष्ट हैं। ये श्वसन प्रणाली के स्वास्थ्य को बनाए रखने और पाचन और संचलन को बढ़ाने में सहायक होती है। ये सामग्री शरीर में गर्मी उत्पन्न करती हैं।
  • अदरक और काली मिर्च को पानी में मिलाकर तब तक उबालें जब तक कि यह आधे से कम नहीं रह जाता है।
  • इसमें शह डालें और अच्छी तरह मिक्स करें।
  • सर्दी में ठंड और खांसी से राहत पाने के लिए प्रति दिन यह काढ़ा 3-4 बार पिएं।
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इम्युनिटी को मजबूत बनाये आयुर्वेदिक काढ़ा:
यदि आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका इम्युनिटी कमजोर है। आप इस हर्बल काढ़े की मदद से इसे मजबूत कर सकते हैं। इस काढ़े में कई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का मिश्रण है। ये काढ़ा वात और कफ को शांत करता है, पाचन को उत्तेजित करता है, प्रतिरक्षा में वृद्धि करता है।
  • उबलते पानी में हरी इलायची, दालचीनी, अदरक और सफेद मिर्च मिलाएं।
  • उन्हें कुछ समय के लिए उबाल लें और फिर गैस बंद करें।
  • यदि आपको स्वाद पसंद नहीं है, तो आप इस काढ़े कुछ बुँदे शहद की मिला सकते हैं।
  • प्रतिरक्षा को मज़बूत करने के लिए हर दिन इसे पिएं।
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मधुमेह में लाभकारी है ये काढ़ा:
क्या आप प्री डायबिटिक हैं जो लगातार अपने शुगर लेवल पर निगरानी रखते हैं? मेथी और हल्दी से बना काढ़ा आपके लिए उपयुक्त है। जो शरीर में शुगर लेवल को चेक रखने में मदद करता है।
  • बराबर मात्रा में मेथी और हल्दी पाउडर को लें।
  • उन्हें दूध में मिलाएं और उबाल लें।
  • अच्छे परिणाम देखने के लिए हर सुबह एक गिलास पिएं।
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पाचन में सहायक है अजवायन सौंफ काढ़ा:
यदि आप अक्सर पेट की बीमारियों से पीड़ित होते हैं जैसे गैस, अपच, कब्ज, सूजन आदि। यह अक्सर तब होता है जब आपकी पाचन प्रणाली अच्छी तरह से काम नहीं कर रही होती है। इसे सुधारने के लिए आप सौंफ और अजवाइन से बना काढ़े का सेवन कर सकते हैं। दोनों में कार्मिनटिव गुण होते हैं जो गैस को बनने से रोकते हैं और बेहतर पाचन में सहायता करते हैं।
  • उबलते हुए पानी में एक चम्मच अजवायन और एक चम्मच सौंफ डालें।
  • काढ़े को कुछ देर के लिए उबालें और फिर इसमें स्वाद के लिए शहद मिलाएं।
  • पाचन में सुधार के लिए अपने भोजन के बाद इसे पिएं।

बुधवार, 29 नवंबर 2017

केवल चार दिन पपीते के बीज खाइए, बीमारियों को दूर भगाइए

केवल चार दिन पपीते के बीज खाइए, बीमारियों को दूर भगाइए


पपीता तो एक शानदार फल है ही और इसके गुणों से आप सब बहुत अच्छी तरह से परिचित भी हो । इस लेख में हम आपको बता रहे हैं भोपाल की रहने वाली श्रीमति ज्योति श्रीवास्तव का एक खास अनुभव जो उन्होने पपीते के बीज खाने के बाद महसूस हुआ । उन्होने पपीते के बीजों से मिलने वाले कुछ लाभों का वर्णन हमारे पास इस आग्रह से भेजा कि हम इसको आप सबके पास तक पहुँचायें । चलिये जानते हैं उनके अनुभव के बारे में ।

पपीते के बीज सेवन करने का तरीका :-

पके पपीते का फल काटकर उसमें मौजूद बीजों को थोड़ी देर के लिये पानी में डाल दें ऐसा करने से उसमें लगी झिल्ली फूल जायेगी । फिर इस झिल्ली को हाथों से मसलकर छुटा दें । फिर इन बीजों को तेज धूप में कड़क होने तक पूरी तरह सए सुखा लें । सूखने पर ये बीज काली मिर्च जैसे नजर आयेंगे । अब इन बीजों को मिक्सी में चलाकर बारीक पाउडर तैयार कर लें । यह पाउडर ही आपको सेवन करना है । रोज सुबह और शाम के समय 3-5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण गुनगुने पानी के साथ सेवन करना है । आगे हम बात करते हैं कि पपीते के बीज के इस चूर्ण के सेवन से क्या क्या लाभ प्राप्त होते हैं ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है डाइबिटीज में :-
पपीते के बीजों का लाभ मधुमेह के रोगियों के लिये इन्सुलिन सरीखा होता है । पपीते के बीजों के द्वारा शुगर के लेवल को नियन्त्रित किया जा सकता है । कुछ रिसर्च के अनुसार यदि रोज पपीते के बीजों का सेवन किया जाये तो इससे मधुमेह के रोग की सम्भावनाओं को काफी कम किया जा सकता है ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है फोड़े फुन्सी और एलर्जी में :-
त्वचा पर होने वाले अधिकतर रोगों में पपीते के बीजों का चूर्ण समाधान के लिये बहुत ही लाभकारी होता है। यदि इस पाउडर को पपीते के गूदे के साथ मिलाकर त्वचा पर लेप किया जाये और सेवन भी किया जाये तो यह त्वचा विकारों को दूर करने में बहुत लाभकारी होता है । इसके इस तरह से प्रयोग करने से स्किन के रोग जल्दी ठीक होते हैं और पपीते के गूदे के साथ मिलाकर लगाने से फोड़े-फुन्सी के दाग भी नही रहते हैं । इस तरह से यह फोड़े फुन्सी और दाग मिटाने में बहुत लाभकारी सिद्ध होता है ।
पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है आँखों की रोशनी के लिये :-
पपीते में विटामिन ए, प्रोटीन, प्रोटियोलिटिक एंजाइम पाये जाते हैं और इसके यही गुण इसके बीजों में भी मौजूद रहते हैं । चिकित्सक आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिये पपीते के सेवन की सलाह देते हैं । यदि पपीते के बीज का चूर्ण रोज सुबह और शाम के समय गाय के दूध के साथ सेवन किया जाये तो यह आँखों की माँसपेशियों को मजबूती देकर रोशनी बढ़ाने का काम करता है । यही कारण है कि आँखों के कमजोर हो जाने की समस्या हो जाने पर पपीते के बीजों को उपयोगी माना जाता है ।

पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है गुर्दे की पथरी में :-
गुर्दे में पथरी हो जाये तो पपीते के बीजों का चूर्ण रोज सुबह और शाम के समय गुनगुने पानी में चौथाई ग्राम खाने का सोडा मिलाकर उसके साथ सेवन करना चाहिये । पपीते का बीज पथरी को फोड़ने का काम करता है और पानी में मिला हुआ खाने वाला सोडा पेशाब आने की मात्रा को बढ़ाता है जिससे पथरी टूटकर जल्दी ही पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है । यदि आपके साथ भी मूत्र मार्ग की पथरी की समस्या हो तो एक बार 4-5 दिन के लिये इस प्रयोग को जरूर आजमायें । इसके साथ ही पथरी के रोग में उचित परहेज का भी पालन करें ।

पपीते के बीज का चूर्ण लाभकारी है कैंसर से बचाव में :-
कुछ रिसर्च इस तरफ इशारा करती हैं कि पपीते के बीज का पाउडर सेवन करने से कैन्सर के रोगियों को प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है । कैन्सर के रोग में पपीते के बीजों को साबुत ही निगला जा सकता है अथवा चबाकर खाया जा सकता है और पाउडर बनाकर भी सेवन किया जा सकता है ।

पपीते के बीज के पाउडर से मिलने वाले स्वास्थय लाभों की जानकारी वाला यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँचती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख के समबन्ध में आपके कुछ सुझाव हों तो कृपया कमेण्ट के माध्यम से हमको जरूर सूचित करें ।

शनिवार, 25 नवंबर 2017

पुरुषों को करवाना चाहिए ये 6 टेस्ट, बड़ी बीमारियां रहेंगी दूर

पुरुषों को करवाना चाहिए ये 6 टेस्ट, बड़ी बीमारियां रहेंगी दूर


इस आधुनिक जीवन में हर पुरुष को अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। कब कोई बीमारी आपके शरीर में घर कर जाए उससे पहले आपको सतर्क होना बहुत ही जरूरी है। आप नियमित रूप से न केवल अपने खानपान और व्यायाम पर ध्यान दें बल्कि कुछ जरूरी टेस्ट भी करवाएं।

पुरुषों को करवाना चाहिए ये 6 टेस्ट

डायबिटीज या मधुमेह का करवाएं टेस्ट
मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जो तब होती है जब आपके ब्लड ग्लूकोज, जिसे ब्लड शुगर भी कहते हैं, बहुत अधिक होता है। ब्लड ग्लूकोज आपके ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और आपके द्वारा खाने वाले भोजन से आता है। इंसुलिन जो एक तरह का हार्मोन होता है जो ब्लड ग्लूकोज को उर्जा में तब्दील कर देता है। इससे आपकी कोशिकाओं को भोजन मिलता रहता है। लेकिन आपको मधुमेह ना हो इस बात की सावधानी बरतनी होगी। इसके लिए आप नियमित रूप से अपनी जांच करवाइए और व्यायाम करना मत भूलिए। आपको अपने वजन पर भी ध्यान देना होगा।

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन की भी जांच जरूरी
एक पुरुष होने के नाते अगर आप किसी से सालों से शारीरिक संबंध बना रहे हैं और आप चाहते हैं कि आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज ना हो तो आप नियमित रूप अपना टेस्ट करवाइए। इस तरह से आप बड़े से बड़े रोग से छुटकारा पा सकते हैं।

बॉडी मास इंडेक्स टेस्ट
बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वयस्क महिलाओं-पुरुषों की हाइट और वजन के आधार पर शरीर में वसा को मापने एक उपाय है। बॉडी में कितना फैट है हर पुरुष को इसकी जांच करवानी बहुत ही जरूरी है। इस जांच से पता चलेगा कि आप स्वस्थ्य है या अस्वस्थ। बीएमआई अच्छे स्वास्थ्य का एक पूर्ण उपाय नहीं है, यह औसत व्यक्ति के लिए काफी सटीक है। बॉडी मास इंडेक्स कैलकुलेटर (बीएमआई) उन लोगों के लिए सटीक नहीं है जिनके शरीर में मास ज्यादा है। यदि आप बीएमआई स्वस्थ श्रेणी में नहीं आते हैं, तो आप कई गंभीर बीमारियों से गुजर सकते हैं।
पुरुष करवाएं कोलेस्ट्रॉल की जांच
कोलेस्ट्रॉल शरीर के हर कोशिका में पाए जाते हैं। यह आहार पचाने, हार्मोन पैदा करने और विटामिन डी पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक कार्य करता है। कोलेस्ट्रॉल हमारे लिए दोस्त और दुश्मन दोनों ही है। सामान्य स्तर पर, यह शरीर के लिए एक आवश्यक पदार्थ है। हालांकि, अगर रक्त में सांद्रता बहुत अधिक हो जाती है, तो यह साइलेंट किलर की तरह है जिसकी वजह से दिल का दौरा हो सकता है। इसलिए पुरुषों को इसकी जांच करवाना बहुत ही जरूरी हो जाता है। आपको बता दें कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में हृदय रोग के जोखिम ज्यादा है।
जरूरी ब्लड प्रेशर का टेस्ट
उच्च रक्तचाप एक सामान्य बीमारी है जिसमें रक्त वाहिकाओं (धमनियों) के माध्यम से रक्त प्रवाह सामान्य दबाव से अधिक होता है। पुरुषों को इसकी भी जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा उन्हें लो ब्लड प्रेशर की भी जांच करवानी चाहिए।

आवश्यक है प्रोस्टेट टेस्ट
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रन्थि होती है इसमें वो द्रव्य बनती है जिसमें शुक्राणु होते हैं। यह पुरुष प्रजनन तंत्र का एक भाग है। यह अखरोट के आकार की तरह होता है और यह मूत्राशय के नीचे स्थित होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही इसकी इसकी बढ़ने की भी संभावना भी बढ़ने लगती है। अगर आज के समय की बात की जाए तो यह किसी भी पुरुष को हो सकता है। इसलिए इसकी जांच करवाना बहुत ही जरूरी है। 

लेकिन जब हम इसमें लापरवाही करते हैं, तब यह कैंसर में बदलकर जानलेवा साबित हो सकता है। आपको बता दें कि प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में पाया जाने वाला एक सामान्य रोग है।

रविवार, 19 नवंबर 2017

शुगर को करना है जड़ से खत्म तो रोज खाएं ये चार दाने

शुगर को करना है जड़ से खत्म तो रोज खाएं ये चार दाने


डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी। बदलते लाइफस्टाइल में यह रोग इतनी तेजी से फैल रहा है कि ज्यादातर लोग इसकी चपेट में आते चले जा रहे है। यह रोग ऐसा है कि इससे खून में शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह बीमारी काफी गंभीर है जो आगे चलकर कई बीमारियों की जड़ बनती है। अगर शुगर के मरीज को कोई घाव भी लग जाए तो वह जल्दी से भरने का नाम नहीं लेता।


शुगर के मरीज को दवाईयों और टीकों के सहारे जीना पड़ता है लेकिन इस रोग के कुछ घरेलू नुस्खे भी है जिससे इस रोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है। जी हां, आप मखाने के चार दानों का सेवन करके शुगर से हमेशा के लिए निजात पा सकते है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। फिर धीरे-धीरे शुगर रोग भी खत्म हो जाता है। 

सेवन की विधि

अगर आप जल्द से जल्द मधुमेह को खत्म करना चाहते है तो सुबह खाली पेट चार दाने मखाने खाएं। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें। इससे मधुमेह का रोग तेजी से खत्म होगा। 
दिल के लिए फायदेमंद
मखाना केवल शुगर के मरीज के लिए ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदेमंद है। इनके सेवन से दिल स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है।


तनाव कम 
मखाने के सेवन से तनाव दूर होता है और अनिद्रा की समस्या भी दूर रहती है। रात को सोने से पहले दूध के साथ मखानों का सेवन करें।

जोड़ों का दर्द दूर
मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इनका सेवन जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।

पाचन में सुधार
मखाना एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आसानी से पच जाता है। इसके अलावा फूल मखाने में एस्ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मददगार है। 
किडनी को मजबूत 
फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्सीफाइ करता है। किडनी को मजबूत बनाने और ब्लड को बेहतर रखने के लिए खानों का नियमित सेवन करें। 

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

15 दिन अगर मेथी दाना खा लिया तो कुछ ऐसा हो जायेगा की सच में चौक जायेंगे

15 दिन अगर मेथी दाना खा लिया तो कुछ ऐसा हो जायेगा की सच में चौक जायेंगे


मेथी के छोटे-छोटे दानों से आपको बड़े- बड़े फायदे हो सकत हैं। यह कई तरीकों से आपको स्वस्थ्य रखने में मदद करता है। मेथी में दानों में विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा नियासिन लाइसिन, ट्रायप्टोिपान और सैपोनिन्सल आदि नाम के कई अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। तो आइए जानते हैं छोटे दानों वाली मेथी आपके स्वास्थ्य को किस तरह फायदा पहुंचाती है।

कोलेस्ट्राल लेवल को संतुलित रखता है
प्रतिदिन 56 ग्राम मेथी दानों का 24 हफ्ते तक प्रयोग करने से कोलेस्ट्राल लेवल 14 प्रतिशत तक कम होता है जिससे हार्ट अटैक की संभावना 25 प्रतिशत कम हो जाती है। इसको आप खाने के साथ प्रयोग कर सकते हैं या मेथी के दानों को रात में पानी में भिगोकर, सुबह उसके पानी को पिएं।
शुगर लेवल को कम करता है
मेथी का प्रयोग आपके ब्लड में शुगर की मात्रा को कम कर टाइप-2 डायबिटीज का उपचार करता है। इसके लिए 500 मिलीग्राम मेथी के दानों का दिन में दो बार प्रयोग करें।
शुगर  में सूजन और जलन दूर करता है
रिसर्च से पता चलता है कि मेथी स्किन रोगों फोड़े-फफोले, खुजली, त्वचा में जलन और गठिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी है। एक चम्मच मेथी के पाउडर को गर्म पानी में मिलाएं और कपड़े का साफ टुकड़ा लेकर मिश्रण में डुबाकर उसे स्किन के प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं या थोड़ी देर बांध कर रखें इससे आपको काफी राहत मिलेगी।
एसिडिटी से राहत
मेथी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ पेट और आंत में होने वाली जलन को रोकता है, जो सीने की जलन और एसिडिटी से बचाता है। इसके पाउडर को खाने में छिड़क कर सकते हैं। दूसरा तरीका इसके बीजों को पानी के साथ निगल सकते या फिर खाने के पहले इसका जूस बना कर भी पी सकते हैं।
बुखार से बचाए
नींबू और शहद के साथ प्रयोग करने पर यह आपको बुखार से आराम दिलाता है। बीमारी के समय यह शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है। बुखार के दौरान दो चम्मच मेथी दाने में एक चम्मच शहद और नीबू का रस मिलाकर हर्बल चाय की तरह दिन में तीन बार प्रयोग करें।

स्तन वृद्धि में असरदार
मेथी के प्रयोग से कई तरह की चाय और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं जो कि स्त्रियों के हार्मोंस को नियंत्रित रखते हैं और स्तनों की वृद्धि में सहायक होते हैं। स्तनों वृद्धि के लिए मेथी को प्रतिदिन अपने डाइट में शामिल करें। 3 ग्राम मेथी के दानों का प्रतिदिन प्रयोग करें। मेथी का प्रयोग गर्भाशय में संकुचन( दबाव) पैदा कर बच्चे के जन्म को आसान बनाने में सहायक होता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस उपाय का उपयोग करना चाहिए।

महिलाओं के दूध को बढ़ाने में फायदेमंद
मेथी स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध बढ़ाने के लिए जाना जाता है। रिसर्च के अनुसार मेथी के प्रयोग से 24 से 72 घंटे के अन्दर 500 प्रतिशत अधिक दूध की वृद्धि देखी गई है। इसलिए जो महिलाएंं बच्चों को नियमित रूप से स्तनपान कराती हैं उनको दूध में वृद्धि के लिए एक-एक मेथी कैप्सूल( 500एम.जी) दिन में तीन बार प्रयोग करें।