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शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

कपालभाति एड़ी से लगाकर चोटी तक लगभग 100 रोगों का करती है जड़ से खात्मा

कपालभाति एड़ी से लगाकर चोटी तक लगभग 100 रोगों का करती है जड़ से खात्मा


कपालभाति वास्तव में प्राणायाम का ही एक अंग है। परंतु कुछ योगियों ने इसे क्रिया को षटकर्म का भी अंग माना है। कपालभाति के अभ्यास से धारणा शक्ति का विकास होता है और कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। इससे मन प्रसन्न और शांत रहता है तथा व्यक्ति में धार्मिक ज्ञान की वृद्धि होती है। कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में अधिक अंतर नहीं है। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि कपालभांति में सांस छोड़ने की क्रिया तेज होती है जिससे पेट की वायु झटके के साथ बाहर निकलती है तथा पेट अपनी स्वभाविक अवस्था में धीरे-धीरे आता है। इस क्रिया से मस्तिष्क का अगला भाग साफ होता है और श्वसन क्रिया में सुधार होता है। इस क्रिया में सांस लेने व छोड़ने की क्रिया जल्दी-जल्दी की जाती है।

कपालभाति के अभ्यास की विधि :
कपालभाति का अभ्यास स्वच्छ हवा वाले स्थान पर करें। अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठकर सांस को नियंत्रित करें। अब सांस को अंदर खींचते हुए वायु को फेफड़ों में भर लें। जब पूर्ण रूप से वायु अंदर भर जाए तो आवाज के साथ तेज गति से नासिका छिद्र से सांस बाहर छोड़ें। सांस छोड़ते समय नासिका छिद्र (नाक के छेद) से आवाज आना चाहिए। सांस छोड़ते हुए बीच में बिल्कुल सांस न लें। फिर सांस लें और आवाज के साथ तेज गति से सांस बाहर छोड़ें। इस तरह इस क्रिया को 10 से 15 बार करें। इस क्रिया में सांस लेने व छोड़ने की गति को जितना तेजी से कर सकें उतना लाभकारी होता है। पहले 1 सैकेंड में एक बार सांस ले और छोड़ें और बाद में इस क्रिया को बढ़ाते हुए 1 सैकेंड में 2 से 3 बार सांस लेने व छोड़ने की कोशिश करें। इस तरह 1 मिनट में 100 से 120 बार सांस लेने व छोड़नें का अभ्यास करें। इस क्रिया में सांस लेने में जितना समय लगे, उसका आधा समय सांस छोड़ने में लगाना चाहिए।
विशेष :
इस क्रिया को करते समय मन को तनाव मुक्त रखें और अच्छे विचारों के साथ इसका अभ्यास करें। शुरू-शुरू में कपालभाति का अभ्यास 3 से 5 मिनट तक करें। इसके अभ्यास के क्रम में थकान अनुभव हो तो बीच में थोड़ा आराम कर लें। अभ्यास के क्रम में जुकाम होने से श्वास नलिका द्वारा कफ बार-बार बाहर आ रहा हो तो अभ्यास से पहले कपालभाति का अभ्यास करें। इससे नाक साफ हो जाएगी। इसके अभ्यास के लिए नाक को साफ करने के लिए सूत्रनेति या धौति क्रिया भी की जाती है, परंतु इसके लिए योग गुरू से सलाह लें।
सावधानी :
पीलिया या जिगर के रोगी को तथा हृदय रोग के रोगी को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस क्रिया को करने से हृदय पर दबाव व झटका पड़ता है, जो व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। गर्मी के दिनों में पित्त प्रकृति वाले इसे 2 मिनट तक ही करें। इस क्रिया के समय कमर दर्द का अनुभव हो सकता है, परंतु धीरे-धीरे वह खत्म हो जाएगा।
क्रिया से रोगों में लाभ :
इस प्राणायाम से आध्यात्मिक लाभ अधिक मिलता है और मन में धारणा शक्ति की वृद्धि होती है। इस क्रिया को करने से सिरदर्द , सांस की बीमारी तथा मानसिक तनाव दूर होता है। इससे मन शांत, प्रसन्न और स्थिर होता है और यह मन से बुरे विचारों को नष्ट करता है, जिससे डिप्रेशन आदि रोगों से छुटकारा मिल जाता है। इस क्रिया से कफ का नाश होता है। इसके अभ्यास से फेफड़ों की कोशिकाओं की शुद्धि होती है और फेफड़े मजबूत होकर उनके रोग दूर होते हैं। यह सुषुम्ना, मस्तिष्क साफ करता है और चेहरे पर चमक, तेज, आभा व सौन्दर्य बढ़ाता है। यह आमाशय को साफ करके पाचनशक्ति को बढ़ाता है, जिससे आंतों की कमजोरी दूर होती है। यह पेट के सभी रोगों को दूर करता है तथा पेट की अधिक चर्बी को कम कर मोटापे को घटाता है। यह अजीर्ण , पित्त वृद्धि, पुराना बलगम, कृमि आदि को खत्म करता है। इसके अलावा यह रक्त विकार , आमवात (गठिया) विष विकार, त्वचा आदि रोगों को दूर करता है।

इसको करने से दमा, श्वास, एलर्जी , मधुमेह, गैस, कब्ज , अम्लपित्त, किडनी तथा प्रोस्टेट संबन्धी सभी रोग खत्म होते हैं। सर्दी के मौसम में इसका अभ्यास करने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। इस प्राणायाम से हृदय की शिराओं में आई रुकावट दूर हो जाती हैं। इस प्राणायाम से गले के ऊपर के सभी रोग जैसे सिरदर्द, अनिद्रा , अतिनिद्रा, बालों का झड़ना व पकना, नाक के अंदर फोड़े और बढ़ा मांस, नजला, जुकाम, आंखों के विकार , कम सुनना, मिर्गी आदि रोग दूर होते हैं।

योग ग्रन्थ में कपालभांति प्राणायाम के अभ्यास को अन्य 4 प्रकार से करने की विधि बताई गई है- 1. बाहरी प्राणायाम 2. वात्क्रम क्रिया 3. व्युत्क्रम क्रिया 4. शीमक्रम क्रिया।

बाहरी प्राणायाम :
इस क्रिया में सिद्धासन या पद्मासन में बैठ जाएं। फिर पूर्ण शक्ति के साथ सांस को बाहर छोड़ दें। इसके बाद अपने सिर को आगे की ओर झुकाकर ठोड़ी को कंठ में सटाकर रखें और कंधों को ऊपर की ओर भींचकर आगे की ओर करें। फिर मूलबंध करें और उसके बाद उड्डीयान बंध लगाएं। इस स्थिति में तब तक रहें, जब तक आप सांस को बाहर रोक सकें। जब सांस रोकना सम्भव न हो तो तीनों बंध को हटाते हुए सिर को ऊपर उठाकर धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेकर पुन: सांस बाहर छोड़ दें और सांस को बाहर ही रोककर पहले की तरह ही तीनों बंधों को लगाकर रखें। इस तरह इस क्रिया को 3 बार करें और धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 21 बार तक इसका अभ्यास करें।

रोगों में लाभ :
इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होती है और जठराग्नि प्रदीप्त होती है। यह पेट के सभी रोगों को दूर करता है। इससे बुद्धि सूक्ष्म और तेज होती है। यह वीर्य को ऊर्ध्वगति (ऊपर की ओर) करके स्वप्नदोष, शीघ्रपतन , धातुविकार आदि को खत्म करता है। कपालभाति प्राणायाम करने से पेट की सभी मांसपेशियों की मालिश हो जाती है। इसके प्रारम्भिक अभ्यास के क्रम में पेट के कमजोर भाग में हल्के दर्द का अनुभव होता है। दर्द के समय आराम करना चाहिए तथा रोगों को खत्म करने के लिए सावधानी से यह प्राणायाम करना चाहिए।

वात्क्रम की विधि :
इस क्रिया को सुखासन में बैठकर करना चाहिए। सुखासन में बैठने के बाद शरीर को सीधा करते हुए आंखों को बंद करके रखें। दाहिने हाथ के अंगूठे को नाक के दाईं ओर रखें और अन्य सारी अंगुलियों को बाईं ओर रखें। फिर शरीर को हल्का करते हुए नाक के दाएं छिद्र को बंद करके बाएं छिद्र से सांस खींचें और बाएं छिद्र को बंद कर दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। फिर दाएं छिद्र से सांस लें और दाएं छिद्र को बंद कर बाएं से सांस को छोड़ें। इस तरह इस क्रिया को 3 से 5 मिनट तक करें। यहां सांस लेने व छोड़ने की क्रिया सामान्य रूप से करनी चाहिए। इस अभ्यास के द्वारा बलगम संबंधी सभी विकार व रोग दूर हो जाते हैं।

व्युत्क्रम क्रिया की विधि :
इस क्रिया में पहले की तरह ही बैठें और शरीर को तान कर रखें। अपने पास किसी बर्तन में पानी भरकर रखें। फिर पानी को अंजुली में डालकर सिर को हल्का नीचे झुकाकर नाक के दोनों छिद्रों से पानी को अंदर खींचें। यह पानी नाक के रास्ते धीरे-धीरे मुंह में आ जाएगा। इसे बाहर निकाल दें। इस क्रिया का अभ्यास सावधानी से करें, क्योंकि असावधानी से पानी मस्तिष्क में जाने पर अधिक हानि पहुंचा सकता है। यह क्रिया नाक के मार्ग व गुह्य से श्लेष्मा को निकालकर नाक के गुहा को साफ व स्वच्छ बनाता है।

शीमक्रम की विधि :
इस क्रिया में भी बैठने की मुद्रा पहले की तरह ही बनाएं रखें और मुंह से आवाज के साथ पानी को मुंह में चूसें। फिर पानी को नाक के रास्ते आवाज के साथ छींकने के साथ नाक से बाहर निकाल दें। यह अभ्यास शरीर की प्रतिरक्षा की क्षमता को बढ़ाता है तथा बलगम संबंधी सभी समस्याओं को दूर करता है।

सावधानी :
यह 4 विधियां अत्यंत कठिन क्रिया है। इसलिए इसका अभ्यास सावधानी से करें तथा किसी योग शिक्षक की देख-रेख में करें। गीली विधि द्वारा कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करते समय अचानक आई परेशानी का मुकाबला करने के लिए फेफड़ों में भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन होनी चाहिए। ताकि पानी अंदर खींचते हुए वायु मार्ग में चला जाए तो उसे आसानी से निकाल सकें।

विशेष :
कपालभांति की ´सूखी´ और ´गीली´ विधि द्वारा मस्तिष्क गुहारों की शुद्धि होती है। इस अभ्यास से रोगों को रोकने की क्षमता को बढ़ाया जाता है। सूखा या वायु प्राणायाम, प्राणायामों के अभ्यासों के आधार का कार्य करता है। यह नाड़ियों को साफ करके पूरे शरीर को शुद्ध बनाता है।

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

एक चुटकी हींग से होता है कई रोगों का नाश

एक चुटकी हींग से होता है कई रोगों का नाश


हींग का प्रयोग खाने में इस्तेमाल करने से पेट संबंधी बीमारियाँ जैसे अपच, आंत संबंधी रोग, आंत की गैस की समस्या से आपको दूर रखेगा हींग सांस संबंधी समस्याओं को भी ठीक रखता है काली खांसी हो या सूखी खांसी, आप अदरक और हींग को शहद मैं मिलाकर लेने से इन रोगों से निज़ात पाया जा सकता है. वायु रोग के कारण यदि पेट में दर्द हो, चाहे छोटे बच्चे हो या फिर बुज़ुर्ग आप हींग को गरम पानी में घोलकर नाभि में या इसके आस पास लेप लगाने से पेट दर्द में तुरंत राहत मिलती है यह उच्च रक्तचाप को कम करता है यह बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कम करता है.

हींग मधुमेह के प्रभाव को कम करता है यह ब्लड शुगर के स्तर को नीचा लाता है हींग का प्रयोग यदि आप हमेशा करते हैं तो यह आपको सिरदर्द नहीं होने देगा, यदि सिर में दर्द है तो आप हींग को पानी में मिलाकर पीने से सिरदर्द से राहत मिलती है

#पेट और अपच संबंधी बीमारियों का नाश –
अपच और पेट की समस्याओं के लिए हींग का इस्तेमाल प्राचीन काल से किया जा रहा है। इसके एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्व खराब-पेट, एसिडिटी, पेट के कीड़े, इरीटेबल बोवेल सिंड्रोम (irritable bowel syndrome) आदि समस्याओं में राहत पहुंचाते हैं। पेट के दर्द को दूर करने के लिए हींग को किसी कॉटन के कपड़े में रख कर गांठ बांध ले और उसे नाभि पर रख ले इससे आराम मिलेगा |

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#मधुमेह में उपयोगी –
क्या आप अपना ब्लड शुगर लेवल कम करना चाहते हैं? फिर तो आपको अपने खाने में हींग डाल ही लेनी चाहिए। तभी ये अपना एंटी-डायबिटिक प्रभाव दिखा पाएगा। हींग इंसुलिन को छिपाने के लिए अग्नाशय की कोशिकाओं को उत्तेजित करता है जिससे कि ब्लड शुगर लेवल कम होता है।

# हाई बीपी में हेल्पफुल-
हींग में कोमरिन्स (coumarins) नाम का एक तत्व होता है जो खून को पतला करके ब्लड फ्लो बढ़ाता है। इसकी वजह से खून के थक्के भी नहीं जमते। इससे ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल और शरीर में ट्राइग्लिसराइड (triglycerides) घटता है, जिनकी वजह से हाइपरटेंशन से बचाव होता है।

#पुरूषों की यौन समस्याओं में फायदा-
हींग का इस्तेमाल पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्पर्म की कमी का उपचार करने के लिए भी किया जाता है अपने खाने में थोड़ी सी हींग ज़रूर मिलाएं ताकि बहुत सारी सेक्स से जुड़ी समस्याओं से आप अपना बचाव कर सकें। इसके अलावा एक गिलास गर्म पानी में हींग मिलाकर पीने से खून का दौरा तेज़ हो जाता है जिससे कि लिबिडो (libido) बढ़ता है।

महिलाओं की समस्या में हेल्पफुल –
हींग में मौजूद तत्व पीरियड्स से जुड़ी सभी तकलीफों जैसे कि क्रैंमप्स, अनियमित पीरियड्स या ज्यादा तकलीफ में राहत पहुंचाती है। इसके अलावा, ल्यूकोरिया और कैंडिडा इंफेक्शन (candida infection) जल्दी ठीक करने में भी हींग मदद करती है।

सांस से संबंधी रोग में हेल्पफुल –
हींग प्राकृतिक रूप से बलगम को दूर करके छाती के कंजेस्शन को ठीक करता है। यह एक शक्तिशाली श्वसन उत्तेजक है। इसे शहद, अदरक के साथ मिलाकर खाने से खांसी व ब्रोंकाइटिस की समस्या में आराम मिलता है।

कैंसर के जोखिम को कम करता है हींग –
हींग में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। जब आप इसे लगातार खाते हैं तो ये फ्री रेडिकल्स से शरीर की कोशिकाओं को बचाव प्रदान करती है। हींग की कैंसर-विरोधी गतिविधि कैंसर कोशिकाओं का विकास अवरूद्ध करती है।

दर्द में राहत
हींग के सेवन से पीरियड्स, दांत, माइग्रेन आदि का दर्द भी ठीक किया जा सकता है दरअसल, हींग में एंटीऑक्सीडेंट्स और दर्द निवारक तत्व मौजूद होते हैं, जो आपको दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं। दर्द होने पर एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी हींग मिलाकर पी लें। दांत के दर्द में हींग और नींबू के रस का पेस्ट बनाकर लगाएं।

त्वचा की समस्याओं से रहत –
हींग में उच्च मात्रा में एंटी-इनफ्लैमोटरी तत्व होते हैं जिसकी वजह से इसे स्किन केयर उत्पादों में मिलाया जाता है। ये त्वचा की जलन जैसी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखती है। त्वचा पर लगाने पर हींग अपना ठंडा प्रभाव दिखता है और साथ ही त्वचा की समस्याओं के लिए उत्तरदायी बैक्टीरिया का भी सफाया करती है।

काली खांसी या सूखी खांसी में उपयोगी –
अदरक और हींग को शहद में मिलकर खाने से काली खांसी और सूखी खांसी में आराम मिलता है और हींग के इस्तेमाल का सबसे बढ़िया तरीका है कि आप इसे हर रोज़ अपने खाने में मिलाकर खाएं।

हींग को इस्तेमाल करने का सबसे बढ़िया तरीका-
एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच हींग मिलाएं और इसे खाली पेट पी लें। आप बटरमिल्क में थोड़ी सी हींग डालकर भी पी सकते हैं। एक कप गर्म पानी में एक चम्मच हींग मिलाएं। इसमें सूती कपड़ा भिगोकर उससे सिकाई करें, दर्द में आराम होगा।हींग का इस तरह प्रयोग करके आप अनेक बीमारियो में राहत पा सकते है |

दोस्तों इस जानकारी को समाज हित में अधिक से अधिक शेयर करे ताकि इस जानकारी से वे लोग भी इससे फायदा उठा सके जिन लोगो को इस जानकारी की जरूरत है |

बुधवार, 13 सितंबर 2017

सत्तू खाने के लाज़वाब फायदे...

सत्तू खाने के लाज़वाब फायदे...


सत्तू अपने आप में एक समपूर्ण आहार माना जाता है। क्या आपने कभी सत्तू का स्वाद चखा है? इसके कई गुणों के कारण गर्मी के दिनों में सत्तू का सेवन कई स्थानों पर किया जाता है। बिहार के लोगों के अलावा भी अन्य लोग भी इसे काफी खुश होकर खाते हैं। सत्तू को लोग कई तरह से खाते हैं। कोई इसका शरबत बनाकर पीता है तो कोई इसके स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर खाते हैं। आपको बता दें कि सत्तू को इतना पसंद किए जाने का कारण सिर्फ इसका स्वाद ही नहीं है बल्कि सेहत से जुड़े यह अनमोल फायदे भी हैं।

सत्तू के फायदे-

1- जौ और चने के मिश्रण से बने सत्तू को पीने से मधुमेह रोग में लाभ होता है।
2- सत्तू कफ, पित्त, थकावट, भूख, प्यास और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। डॉक्टरों की मानें तो यह पेट के रोगों के लिए फायदेमंद होता है।
3-  विशेषज्ञों के अनुसार सत्तू आहार है, औषधि नहीं इसीलिए इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।
4- चने का सत्तू गर्मी में पेट की बीमारी और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
5- सत्तू में फाइबर, कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, स्टार्च और अन्य खनिज पदार्थ होते हैं।
6- इसे पानी के साथ लेने से पेट ठंडा रहता है। चने के सत्तू में मूंग और सोया मिला लेने से सत्तू सेहत के लिए और फायदेमंद हो जाता है।
7- सत्तू में रक्तसाफ करने का गुण होता है जिससे खून की गड़बडियां दूर होती हैं।

कैसे करें सेवन-

1- सत्तू को ताजे पानी में घोलना चाहिए, गर्म पानी में नहीं।
2- सत्तू सेवन के बीच में पानी न पिएं।
3- इसे रात्रि में नहीं खाना चाहिए।
4- सत्तू का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। इसका सेवन सुबह या दोपहर में एक बार ही करना चाहिए। सत्तू का सेवन दूध के साथ नहीं करना चाहिए।
5- कभी भी गाढे सत्तू का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गाढा सत्तू पचाने में भारी होता है। पतला सत्तू आसानी से पच जाता है ।
6- इसे ठोस और तरल, दोनों रूपों में लिया जा सकता है।
7- यदि आप चने के सत्तू को पानी, काला नमक और नींबू के साथ घोलकर पीते हैं, तो यह आपके पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद होता है।
8- सत्तू के सेवन से ज्यादा तैलीय खाना खाने से होने वाली तकलीफ खत्म हो जाती है और तेल निकल जाता है।
9- इसमें बहुत पोषण होता है इसलिए बढ़ते बच्चों को जरूर दे ।

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

ये हैं कुछ पुराने नुस्खे, जो रोज आ सकते हैं आपके काम

ये हैं कुछ पुराने नुस्खे, जो रोज आ सकते हैं आपके काम


हमारे घर की रसोई औषधियों का खजाना है। कई घरेलू चीजें ऐसी हैं जिनका उपयोग करके हम छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स को आसानी से ठीक कर सकते हैं। बस जरूरत है तो किचन में या हमारे आसपास उपस्थित इन चीजों के गुणों व उपयोगों की सही जानकारी की। हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही घरेलू चीजों का उपयोग इलाज के लिए करते आए है। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही प्राचीन समय से घरेलू नुस्खों के बारे में जो कि दोहों के रूप में हैं.....

1. मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना लगाने से काले होंठ भी गुलाबी होने लगते हैं।
2. मुंह की बदबू से परेशान हों तो दालचीनी का टुकड़ा मुंह में रखें। मुंह की बदबू तुरंत दूर हो जाती है।
3. लहसुन के तेल में थोड़ी हींग और अजवाइन डालकर पकाकर लगाने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है।
4. लाल टमाटर और खीरा के साथ करेले का जूस लेने से मधुमेह दूर रहता है
5. अजवाइन को पीसकर उसका गाढ़ा लेप लगाने से सभी तरह के चमड़ी के रोग दूर हो जाते हैं।
6. ऐलोवेरा और आंवला का जूस मिलाकर पीने से खून साफ होता है और पेट की सभी बीमारियां दूर होती हैं।
7. बीस ग्राम अांवला और एक ग्राम हल्दी मिलाकर लेने से सर्दी और कफ की तकलीफ में तुरंत आराम होता है
8. शहद आंवले का जूस और मिश्री सभी दस - दस ग्राम मात्रा में लेकर बीस ग्राम घी के साथ मिलाकर लेने से यौवन हमेशा बना रहता है।
9. अजवाइन को पीसकर और उसमें नींबू का रस मिलाकर लगाने से फोड़े-फुंसी दूर हो जाते हैं।
10. बहती नाक से परेशान हों तो युकेलिप्टस का तेल रूमाल में डालकर सूंघे। आराम मिलेगा।
11. बीस मिलीग्राम आंवले के रस में पांच ग्राम शहद मिलाकर चाटने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
12. रोज सुबह खाली पेट दस तुलसी के पत्तों का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
13. यदि आप कफ से पीड़ित हों और खांसी बहुत परेशान कर रही हो तो अजवाइन की भाप लें। कफ बाहर हो जाएगा।
14. अदरक का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर लेने से सर्दी दूर हो जाती है
15. थोड़ा सा गुड़ लेने से कई तरह के रोग दूर होते हैं, लेकिन इसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए चाहे ये कितना ही अच्छा लगता हो।
16. रोज खाने के बाद छाछ पीने से कोई रोग नहीं होता है और चेहरे पर लालिमा आती है।
17. छाछ में हींग, सेंधा नमक व जीरा डालकर पीने से हर तरह के रोग दूर हो जाते हैं।
18. नीम के सात पत्ते खाली पेट चबाने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
19. 20 ग्राम गाजर के रस में 40 ग्राम आंवला रस मिलाकर पीने से ब्लड प्रेशर और दिल के रोगों में अाराम मिलता है।
20. बेसन में थोड़ा सा नींबू का रस, शहद और पानी मिलाकर लेप बनाकर लगाने से चेहरा सुंदर और आकर्षक लगता है।
21. चौलाई और पालक की सब्जी भरपूर मात्रा में खाने से जवानी हमेशा बनी रहती है।
22. शहद का सेवन करने से गले की सभी समस्याएं दूर होती हैं और आवाज मधुर होती है।
23. सर्दी लग जाए तो गुनगुना पानी पिएं। राहत मिल जाएगी।
24. छाछ में पांच ग्राम अजवाइन का चूर्ण मिलाकर लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
25. सुबह- शाम खाली पेट जामुन की गुठली का रस पीने से डायबिटीज में आराम मिलता है।
26. पित्त बढ़ने पर घृतकुमारी और आंवले का रस मिलाकर पिएं। राहत मिलेगी।
27. दालचीनी का पाउडर पानी के साथ लेने पर दस्त में आराम हो जाता है।
28. गुड़ में थोड़ी अजवाइन मिलाकर लेने से एसिडिटी में राहत मिलती है।

बुधवार, 5 जुलाई 2017

जामुन की मात्र 1 गुठली खाने से होते है ये 101 चमत्कारी फायदे

जामुन की मात्र 1 गुठली खाने से होते है ये 101 चमत्कारी फायदे


यह खट्टा, रुचिकर, शीतल व वायु का नाश करने वाला होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है। जामुन में लौह और फास्फोरस काफी मात्रा में होता है। जामुन में कोलीन तथा फोलिक एसिड भी होता है। जामुन के बीच में ग्लुकोसाइड, जम्बोलिन, फेनोलयुक्त पदार्थ, पीलापल लिए सुगन्धित तेल काफी मात्रा में उपलब्ध होता है। जामुन मधुमेह (डायबिटीज), पथरी, लीवर, तिल्ली और खून की गंदगी को दूर करता है। यह मूत्राशय में जमी पथरी को निकालता है। जामुन और उसके बीज पाचक और स्तम्भक होते हैं। आइये जानते है जामुन से होने वाले 101 फायदों के बारे में।

जामुन के अद्भुत फायदे :


मधुमेह के रोग : जामुन की सूखी गुठलियों को 5-6 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ दिन में दो या तीन बार सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है। 30 ग्राम जामुन की नई कोपलें (पत्तियां) और 5 काली मिर्च, पानी के साथ पीसकर सुबह-शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है।
जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
जामुन की गुठली का चूर्ण और सूखे करेले का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। 3 ग्राम चूर्ण रोजाना सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह के रोग में फायदा होता है।
जामुन की भीतरी छाल को जलाकर भस्म (राख) बनाकर रख लें। इसे रोजाना 2 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा कम होता है। 10-10 ग्राम जामुन का रस दिन में तीन बार लेने से मधुमेह मिट जाता है।
12 ग्राम जामुन की गुठली और 1 ग्राम अफीम को पानी के साथ मिलाकर 32 गोलियां बना लें। फिर इसे छाया में सुखाकर बोतल में भर लें। 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ खायें। खाने में जौ की रोटी और हरी सब्जी खाएं। चीनी बिल्कुल न खायें। इससे मधुमेह में लाभ होता है।
60 ग्राम जामुन की गुठली की गिरी पीस लें। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह-शाम सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है।
8-10 जामुन के फलों को 1 कप पानी में उबालें। फिर पानी को ठण्डा करके उसमें जामुन को मथ लें। इस पानी को सुबह-शाम पीयें। यह मूत्र में शूगर को कम करता है।
1 चम्मच जामुन का रस और 1 चम्मच पके आम का रस मिलाकर रोजाना सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है। जामुन के 4-5 पत्तों को सुबह के समय थोडे़-से सेंधा नमक के साथ चबाकर खाने से कुछ दिनों में ही मधुमेह का रोग मिट जाता है।
जामुन के 4 हरे और नर्म पत्ते खूब बारीक कर 60 मिलीलीटर पानी में मिलाकर छान लें। इसे सुबह के समय 10 दिनों तक लगातार पीयें। इसके बाद इसे हर दो महीने बाद 10 दिन तक लें। जामुन के पत्तों का यह रस मूत्र में शक्कर जाने की परेशानी से बचाता है। मधुमेह रोग के शुरुआत में ही जामुन के 4-4 पत्ते सुबह-शाम चबाकर खाने से तीसरे ही दिन मधुमेह में लाभ होगा।
60 ग्राम अच्छे पके जामुन को लेकर 300 मिलीलीटर उबले पानी में डाल दें। आधा घंटे बाद मसलकर छान लें। इसके तीन भाग करके एक-एक मात्रा दिन में तीन बार पीने से मधुमेह के रोगी के मूत्र में शर्करा आना बहुत कम हो जाता है, नियमानुसार जामुन के फलों के मौसम में कुछ समय तक सेवन करने से रोगी सही हो जाता है।
जामुन की गुठली को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रोजाना सुबह-शाम 3 ग्राम ताजे पानी के साथ लेते रहने से मधुमेह दूर होता है और मूत्र घटता है। इसे करीब 21 दिनों तक लेने से लाभ होगा।
जामुन की गुठली और करेले को सुखाकर समान मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ फंकी लें। इससे मधुमेह मिट जायेगा। 125 ग्राम जामुन रोजाना खाने से शुगर नियन्त्रित हो जाता है।

पेट में दर्द : जामुन का रस 10 मिलीलीटर, सिरके का रस 50 मिलीलीटर पानी में घोलकर पीने से पेट की पीड़ा में लाभ होता है। जामुन के रस में सेंधानमक खाने से पेट का दर्द, दस्त लगना, अग्निमान्द्य (भूख का न लगना) आदि बीमारियों में लाभ होता है। पके हुए जामुन के रस में थोड़ा-सी मात्रा में काला नमक मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। जामुन में सेंधा नमक मिलाकर खाने से भी पेट की पीड़ा से राहत मिलती है। पेट की बीमारियों में जामुन खाना लाभदायक है। इसमें दस्त बांधने की खास शक्ति है।

योनि का संकोचन : जामुन की जड़ की छाल, लोध्र और धाय के फूल को बराबर मात्रा में लेकर शहद में मिलाकर योनि की मालिश करने से यो*नि संकुचित हो जाती है।

बिस्तर पर पेशाब करना : जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस 2-2 ग्राम चूर्ण को दिन में 2 बार पानी के साथ खाने से बच्चे बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते हैं।

त्वचा के रोग : जामुन के बीजों को पानी में घिसकर लगाने से चेहरे के मुंहासे मिट जाते हैं।

पीलिया का रोग : जामुन के रस में जितना सम्भव हो, उतना सेंधानमक डालकर एक मजबूत कार्क की शीशी में भरकर 40 दिन तक रखा रहने दें। इसके बाद आधा चम्मच पियें। इससे पीलिया में लाभ होगा।

फोड़े-फुंसियां : जामुन की गुठलियों को पीसकर फुंसियों पर लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाती हैं।

बच्चों का अतिसार और रक्तातिसार : आम्रातक, जामुन फल और आम के गूदे के चूर्ण को बराबर मात्रा में शहद के दिन में 3 बार लेना चाहिए। बच्चों का अतिसार (दस्त) में जामुन की छाल का रस 10 से 20 ग्राम सुबह और शाम बकरी के दूध के साथ देने से लाभ होता है।

बच्चों की हिचकी : जामुन, तेन्दू के फल और फूल को पीसकर घी और शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की हिचकी बंद हो जाती है। नोट : जहां घी और शहद एक साथ लेने हो, वहां इनको बराबर मात्रा में न लेकर एक की मात्रा कम और एक की ज्यादा होनी चाहिए।

गले की आवाज बैठना : जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना लें। रोजाना 4 बार 2-2 गोलियां चूसें। इससे बैठा हुआ गला खुल जाता है। भारी आवाज भी ठीक हो जाती है और ज्यादा दिन तक सेवन करने से बिगड़ी हुई आवाज भी ठीक हो जाती है जो लोग गाना गाते हैं उनके लिये यह बहुत ही उपयोगी है।
जामुन की गुठलियों को बिल्कुल बारीक पीसकर शहद के साथ खाने से गला खुल जाता है और आवाज का भारीपन भी दूर होता है।

गले की सूजन : जामुन की गुठलियों को सुखाकर बारीक-बारीक पीस लें। फिर इसमें से दो चुटकी चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें। इससे गले की सूजन नष्ट हो जाती है। पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है। जामुन के बीज सुखाकर पीस लें। इस पाउडर को खाने से मधुमेह में काफी फायदा होता है। मधुमेह के अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाव में कारगर होते हैं। इसके अलावा पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है। इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेना चाहिए।

अगर किसी को दस्त हो रहे जामुन को सेंधा नमक के साथ खाना फायदेमंद रहता है। खूनी दस्त होने पर भी जामुन के बीज बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेषतौर पर फायदेमंद होता है। इसके बीज को पीस लीजिए। इससे मंजन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

रक्तातिसार : जामुन के पेड़ की छाल को दूध में पीसकर शहद के साथ पीना चाहिए या जामुन के पत्तों के रस में शहद, घी और दूध मिलाकर लेना चाहिए। जामुन का रस गुलाब के रस में मिलाकर दिन में 2-3 बार पिलायें। इससे जल्द लाभ नज़र आयेगा।

गर्मी की फुंसियां : जामुन की गुठली को घिसकर लगाना चाहिए।

बिच्छू के दंश पर : जामुन के पत्तों का रस लगाना चाहिए। इससे बिच्छू का दंश ठीक हो जाता है।

पित्त पर : 10 मिलीलीटर जामुन के रस में 10 ग्राम गुड़ मिलाकर आग पर तपायें। तपाकर उसके भाप को पीना चाहिए।

गर्भवती स्त्री का दस्त : ऐसे समय में जामुन खिलाना चाहिए या जामुन की छाल के काढ़े में धान और जौ का 10-10 ग्राम आटा डालकर चटाना चाहिए।

मुंह के रोग : जामुन, बबूल, बेर और मौलसिरी में से किसी भी पेड़ की छाल का ठण्डा पानी निकालकर कुल्ला करना चाहिए और इसकी दातून से रोज दांतों को साफ करना चाहिए इससे दांत मजबूत होते हैं और मुंह के रोग भी ठीक हो जाते हैं। जामुन की गुठली को 1 ग्राम चूरन के पानी के साथ लेना चाहिए। चार-चार घंटे के बाद यह औषधि लेनी चाहिए। लगभग 3 दिन के बाद इसका असर दिखाई देने लगेगा।

वमन (उल्टी) : जामुन के पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को शहद के साथ खिलाने से खट्टी उल्टी आना बंद हो जाती है।

विसूचिका (हैजा) : हैजा से पीड़ित रोगी को 5 ग्राम जामुन के सिरके में चौगुना पानी डालकर 1-1 घण्टे के अन्तर से देना चाहिए। पेट के दर्द में भी सुबह-शाम इस सिरके का उपयोग करना चाहिए।

मुंहासे : जामुन की गुठली घिसकर लगाना चाहिए। इससे मुंहासे नष्ट हो जाते हैं। 

पसीना ज्यादा आना : जामुन के पत्तों को पानी में उबालकर नहाने से पसीना अधिक आना बंद हो जायेगा।

जलना : जामुन की छाल को नारियल के तेल में पीसकर जले हिस्से पर 2-3 बार लगाने से लाभ मिलता है।

पैरों के छाले : टाईट, नया जूता पहनने या ज्यादा चलने से पैरों में छाले और घाव बन जाते हैं। ऐसे में जामुन की गुठली पानी में घिसकर 2-3 बार बराबर लगायें। इससे पैरों के छाले मिट जाते हैं।

स्वप्नदोष : 4 जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष ठीक हो जाता है।

वीर्य का पतलापन : वीर्य का पतलापन हो, जरा सी उत्तेजना से ही वीर्य निकल जाता हो तो ऐसे में 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण रोज शाम को गर्म दूध से लें। इससे वी*र्य का पतलापन दूर हो जाता है तथा वी*र्य भी बढ़ जाता है।

पेशाब का बार-बार आना : 15 ग्राम जामुन की गुठली को पीसकर 1-1 ग्राम पानी से सुबह और शाम पानी से लेने से बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना) के रोग में लाभ होता है।

नपुंसकता : जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से न*पुंसकता दूर होती है।

दांतों का दर्द : जामुन, मौलश्री अथवा कचनार की लकड़ी को जलाकर उसके कोयले को बारीक पीसकर मंजन बना लें। इसे प्रतिदिन दांतों व मसूढ़ों पर मालिश करने से मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है।

बुखार : जामुन को सिरके में भिगोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से पित्ती शांत हो जाती है।

दांत मजबूत करना : जामुन की छाल को पानी में डालकर उबाल लें तथा छानकर उसके पानी से रोजाना सुबह-शाम कुल्ला करें। इससे दांत मजबूत होते हैं।

पायरिया : जामुन के पेड़ की छाल को आग में जलाकर तथा उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक व फिटकरी मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इससे रोजाना मंजन करने से पायरिया रोग ठीक होता है।

कांच निकलना (गुदाभ्रंश) : जामुन, पीपल, बड़ और बहेड़ा 20-20 ग्राम की मात्रा में लेकर 500 ग्राम जल में मिलाकर उबाल लें। रोजाना शौच के बाद मलद्वार को स्वच्छ (साफ) कर बनाये हुए काढ़ा को छानकर मलद्वार को धोएं। इससे गुदाभ्रंश ठीक होता है।

मुंह के छाले : मुंह में घाव, छाले आदि होने पर जामुन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से लाभ होता है।जामुन के पत्ते 50 ग्राम को जल के साथ पीसकर 300 मिलीलीटर जल में मिला लें। फिर इसके पानी को छानकर कुल्ला करें। इससे छाले नष्ट होते हैं।

दस्त : जामुन की गिरी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी बने चूर्ण को छाछ के साथ मिलाकर प्रयोग करने से टट्टी का लगातार आना बंद हो जाता है। जामुन के ताजे रस को बकरी के दूध के साथ इस्तेमाल करने से दस्त में आराम मिलता है। जामुन की गिरी (गुठली) और आम की गुठली को पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे भुनी हुई हरड़ के साथ सेवन करने से दस्त में काफी लाभ मिलता है।
जामुन का सिरका 40 ग्राम से लेकर 80 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।
जामुन का शर्बत बनाकर पीने से दस्त का आना समाप्त हो जाता हैं।
जामुन के रस में कालानमक और थोड़ी-सी चीनी को मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
जामुन को पीसने के बाद प्राप्त हुए रस को 2 चम्मच की मात्रा में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर पीने से दस्त का आना बंद हो जाता है।
जामुन की गुठलियों को पीसकर चूर्ण बनाकर चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से दस्त का आना बंद हो जाता है।
जामुन की 4 पत्तियां को पीसकर उसमें सेंधानमक मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।
जामुन के 3 पत्तियों को सेंधानमक के साथ पीसकर छोटी-छोटी सी गोलियां बना लें। इसे 1-1 गोली के रूप में रोजाना सुबह सेवन करने से लूज मोशन (दस्त) का आना ठीक हो जाता हैं।
जामुन के पेड़ की छाल का काढ़ा शहद के साथ पीने से दस्त और पेचिश दूर हो जाती है।

गर्भवती की उल्टी : जामुन और आम की छाल को बराबर की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से पित्त के कारण होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।

कान का दर्द : कान में दर्द होने पर जामुन का तेल डालने से लाभ होता है।

कान का बहना : जामुन और आम के मुलायम हरे पत्तों के रस में शहद मिलाकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद बहना बंद हो जाता है।

कान के कीड़े : जामुन और कैथ के ताजे पत्तों और कपास के ताजे फलों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर निचोड़ कर इसका रस निकाल लें। इस रस में इतना ही शहद मिलाकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना और कान का दर्द ठीक हो जाता है।

मूत्ररोग : पकी हुई जामुन खाने से मूत्र की पथरी में लाभ होता है। इसकी गुठली को चूर्णकर दही के साथ खाना भी इस बीमारी में लाभदायक है। इसकी गुठली का चूर्ण 1-2 चम्मच ठण्डे पानी के साथ रोज खाने से पेशाब के धातु आना बंद हो जाता है।

बवासीर (अर्श) : जामुन की गुठली और आम की गुठली के भीतर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ पीने से बवसीर ठीक होती है तथा बवासीर में खून का गिरना बंद हो जाता है। जामुन के पेड़ की छाल का रस निकालकर उसके 10 ग्राम रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से अर्श (बवासीर) रोग ठीक होता है तथा खून साफ होता है।

जामुन के पेड़ की जड़ की छाल का रस 2 चम्मच और छोटी मधुमक्खी का शहद 2 चम्मच मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से खूनी बवासीर में खून का गिरना रुक जाता है। जामुन की कोमल पत्तियों का 20 ग्राम रस निकालकर उसमें थोड़ा बूरा मिलाकर पीयें। इससे खूनी बवासीर ठीक होती है।

खूनी अतिसार : जामुन के पत्तों के रस का सेवन करने से रक्तातिसार के रोगी को लाभ मिलता है।
20 ग्राम जामुन की गुठली को पानी में पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से खूनी दस्त (रक्तातिसार) के रोगी का रोग मिट जाता है

आंव रक्त (पेचिश होने पर) : 10 ग्राम जामुन के रस को प्रतिदिन तीन बार सेवन करने से पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

प्रदर रोग : जामुन की ताजी छाल को छाया में सुखाकर कूट-पीस छान लें। इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में दूध या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर में आराम मिलता है।
जामुन के पत्ते का रस 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर नष्ट होता है। इसके बीजों का चूर्ण मधुमेह में लाभकारी होता है।
छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूरन 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लेने से कुछ दिनों में ही श्वेतप्रदर का रोग नष्ट हो जाता है।

अपच : जामुन का सिरका 1 चम्मच को पानी में मिलाकर पीने से अपच में लाभ होता है।

जिगर का रोग : जामुन के पत्तों का रस (अर्क) निकालकर 5 ग्राम की मात्रा में 4-5 दिन सेवन करने से यकृत वृद्धि मिट जाती है। 200-300 ग्राम बढ़िया पके जामुन रोजाना खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर होती है।

घाव : जामुन की छाल के काढ़े से घाव को धोना फायदेमंद माना गया है।

पथरी : जामुन की गुठलियों को सुखा लें तथा पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम लें। इससे गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है। पका हुआ जामुन खाने से पथरी रोग में आराम होता है। गुठली का चूर्ण दही के साथ खाएं। इससे पथरी नष्ट हो जाती है। रोज जामुन खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे खत्म होती है।

अम्लपित्त : जामुन के 1 चम्मच रस को थोड़े-से गुड़ के साथ लेने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

यकृत का बढ़ना : 5 ग्राम की मात्रा में जामुन के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसको कुछ दिनों तक पीते रहने से यकृत वृद्धि से छुटकारा मिलता है। आधा चम्मच जामुन का सिरका पानी में घोलकर देने से यकृत वृद्धि से आराम मिलता है।

प्यास अधिक लगना : जामुन के पत्तों का रस निकालकर 7 से 14 मिलीलीटर पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है। जामुन के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार पीने से बुखार में प्यास का लगना कम हो जाता है। जामुन का मीठा गूदा खाने से या उसका रस पीने से अधिक आराम मिलता है।

जामुन के हानिकारक प्रभाव :

जामुन का अधिक मात्रा में सेवन करने से गैस, बुखार, सीने का दर्द, कफवृद्धि व इससे उत्पन्न रोग, वात विकारों के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इसके रस को दूध के साथ सेवन न करें।

जामुन खाने का उचित तरीका :

जामुन को हमेशा खाना खाने के बाद ही खाना चाहिए। जामुन खाने के तुरन्त बाद दूध नहीं खाना चाहिए।

जामुन खाने के दोषों को दूर करने का तरीका :

कालानमक, कालीमिर्च औरसोंठ का चूर्ण छिड़ककर खाने से उसके सारे दोषों दूर हो जाते हैं। साथ ही आम खाने से वह शीघ्र पच जाता है।

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

हींग में छुपे हैं एैसे तत्व जो आपको बनाएं रोगमुक्त

हींग में छुपे हैं एैसे तत्व जो आपको बनाएं रोगमुक्त


हींग हमारे शरीर के लिए अति उत्तम माना गया है। हींग में भूख बढ़ाने वाले और भोजन को पचाने वाले अनोखे गुण होते हैं। यह एक उत्तम घरेलु औषधि है। जिसका सेवन करने से आप पेट संबंधी बीमारियों से दूर हो सकते हो। आइये जानते हैं हींग में छिपे हुए पोषक तत्वों को।

1- भोजन करने के बाद यदि आप हींग की 1 से 2 गोली लें तो इससे आपका खाना जल्दी पचेगा और अर्जीण से आपको मुक्ति मिलेगी।

2- हींग का प्रयोग खाने में इस्तेमाल करने से पेट संबंधी बीमारियां जैसे अपच, आंत संबंधी रोग, आंत की गैस की समस्या से आपको दूर रखेगा।

3- हींग सांस संबंधी समस्याओं को भी ठीक रखता है। काली खांसी हो या सूखी खांसी, आप अदरक और हींग को शहद में मिलाकर लेने से इन रोगों से निजात पाया जा सकता है।

4- वायु रोग के कारण यदि पेट में दर्द हो, चाहे छोटे बच्चे हो या फिर बुजुर्ग आप हींग को गरम पानी में घोलकर नाभि में या इसके आस पास लेप लगाने से पेट दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

5- यह उच्च रक्तचाप को कम करता है। यह बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कम करता है।

6- हींग मधुमेह के प्रभाव को कम करता है। यह ब्लड शुगर के स्तर को नीचा लाता है।

7- हींग, सफेद जीरा, सोंठ, पीपल और सेंधा नमक को 10-10 ग्राम कूट कर चूर्ण तैयार करें और एक शीशी में भरकर रख लें। और 1-1 चम्मच सुबह, दिन और रात को गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इस तरह से आपको दस्त से भी राहत मिलेगी।

8- हींग का प्रयोग यदि आप हमेशा करते हैं तो यह आपको सिर दर्द नहीं होने देगा, यदि सिर में दर्द है तो आप हींग को पानी में मिलाकर पीने से सिर दर्द से राहत मिलती है। यह वैदिक औषधी है।

हींग आपके जीवन के लिए एक आयुर्वेदिक दवाई है। यदि आपका पेट ठीक है तो आपका शरीर हमेशा स्वस्थ रहेगा। हींग में छिपे हैं वे सभी राज जो आपके जीवन को रोगमुक्त और स्वस्थ बनाएगें। अतः हींग का सेवन अपने भोजन में अवश्य करें।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

सिर्फ 1 महीने पीएं मेथी का पानी शरीर में आएगा चमत्कारिक बदलाव

सिर्फ 1 महीने पीएं मेथी का पानी शरीर में आएगा चमत्कारिक बदलाव


घर पर आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण है कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें हर बीमारी को खत्म करने का दम है। आइए आज हम आपको मेथी के पानी के कुछ चमत्कारिक तरीके बताते हैं।

करें ये काम
एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्‍मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे शरीर की तमाम बीमारियां चुटकियों में खत्म हो जाती है। आइए आपको बताते है कौन सी है वो खतरनाक 7 बीमारियां जो भाग जाएंगी इस पानी को पीने से।
वजन होगा कम
यदि आप भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्‍ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।
गठिया रोग से बचाए
इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के नातेए मेथी का पानी गठिया से होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है।
कोलेस्‍ट्रॉल लेवल घटाए
बहुत सारी स्‍टडीज़ में प्रूव हुआ है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।
ब्लड प्रेशर होगा कंट्रोल
मेथी में एक galactomannan नामक कम्‍पाउंड और पोटैशियम होता है। ये दो सामग्रियां आपके ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बड़ी ही सहायक होती हैं।
कैंसर से बचाए
मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्‍वों को निकाल फेंकती है और पेट के कैंसर से बचाती है।

किडनी स्‍टोन
अगर आप भिगोई हुई मेथी का पानी 1 महीने तक हर सुबह खाली पेट पियेंगे आपकी किडनी से स्‍टोन जल्‍द ही निकल जाएंगे।

मधुमेह
मेथी में galactomannan होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्‍पाउंड है। इससे रक्‍त में शक्‍कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मधुमेह नहीं होता।

रविवार, 8 जनवरी 2017

पपीता खाने से वजन कम होने के साथ मिलते है ये अनोखे लाभ, जानिए

पपीता खाने से वजन कम होने के साथ मिलते है ये अनोखे लाभ, जानिए


पपीता बहुत ही पौष्टिक फल है। इसका सेवन करने से आपक कई बीमारियों से बच सकते है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, ए, बी और कुछ मात्रा में विटामिन डी और कैल्शियम और कैरोटीन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में होता है। 

पपीता एक ऐसा फल है जिसे आप कच्चा या पक्का दोनों तरह खा सकते है। पपीता पेप्सिन नामक पाचन तंत्र का एक प्राकृतिक स्त्रोत है। पपीता को खाने से काफी फायदे है। इसे खाने से शरीर मजबूत रहता है। जिसके कारण कई बीमारियां पास भी नही आती है। कुछ लोग कच्चे पपीते की सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल करते है। जो बहुत ही स्वादिष्ट रेसिपी बनती है। यह बाजार में आपको आसानी से मिल जाएगा। पपीता के बीज भी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते है। यह पपीता को काटने पर छोटे-छोटे काले रंग के निकलते है। इसे खाने से कई फायदे है। जानिए पपीता खाना हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है।

वज़न घटाएं
अगर आप अपने वजन को लेकर बहुत परेशान है। आपको समझ नही आ रहा है कि क्या करें, तो आज से ही अपनी डाइट में शामिल करें पपीतें को, क्योंकि पपीता में कैलोरी बहुत ही कम मात्रा में पाई जाती है। इसमें मौजूद फाइबर आपको तरोताजा रखेगा। जिससे आपकी आंत का मूवमेंट ठीक रहेगा। जिससे आप अपना वजन आसानी से घटा सकते है।

मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद
पपीता मधुमेह रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही यह ज्यादा मीठा न होने के कारण शुगर की मात्रा कम होती है। जिससे यह मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है।

डिप्रेशन से दिलाएं निजात
दिन भर भाग-दौड की वजह से कभी-कभी हमें तनाव से महसूस होने लगता है। जिसके कारण हम कोई दूसरा काम ठीक ढंग से नही कर पाते है। इससे बचने के लिए पपीता का सेवन करें। पपीता में विटामिन सी पाया जाता है, जो स्ट्रेस हारमोन को संचालित करने में सक्षम होता है। जिसके कारण आप तनाव से बच सकते है।

आंखों को करें तेज
पपीता में विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो आपकी आंखों की रोशनी को कम होने से बचाता है। इसे खाने से आपकी उम्र बढ़ने के बाद भी आंखों का रोशनी पहले की तरह बनी रहेगी।

पीरियड्स के दर्द से दिलाएं निजात
पपीता महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद है। पीरियड्स के समय के दर्द से यह निजात दिलाता है। पपीता में पापिन नाम एंजाइम पाया जाता है। जिसके कारण पीरियड्स के समय के रक्त के प्रवाह को दर्द से दूर रखता है।

कोलेस्ट्रोल कम करें
पपीता में अधिक मात्रा में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्के नहीं बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और हाई ब्लेड प्रेशर सहित कई हार्ड से संबंधित रोगों का कारण बनता है।

कैंसर होने से बचाएं
पपीते में एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे कई पदार्थ अधिक मात्रा में पाए जाते है। जिसके कारण आप कोलन और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे से बच जाते है।

गठिया से बचाएं
पपीता में कैल्शियम पाया जात है जिससे यह हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही इसमें विचामिन सी और कई गुण होते है। जिससे यह आपको गठिया जैसे रोग से लड़ता है। एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-सी युक्त भोजन न लेने वाले लोगों में गठिया का खतरा विटामिन-सी का सेवन करने वालों के मुकाबले तीन गुना होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
पपीता खानें से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढेगी। जिससे आप कई बीमारियों से लड़ सकते है। इसमें इतनी ज्यादा मात्रा में विटामिन सी होती है कि यह आपकी आवश्यकता की पूर्ति करता रहता है। जिससे आपकी तांत्रिका मजबूत बनी रहती है।

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

बकरी के दूध के फायदे

बकरी के दूध के फायदे

बकरी का दूध हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह बात अक्सर पुराने समय से ही कही आ रही है जिसे आज  डॉक्टर भी सच मानते हैं। आप को कई बीमारियों से बचा लेता है बकरी का दूध। छोटे बच्चों से लेकर बड़े और बूढों तक में कैल्शियम की कमी को दूर करता है बकरी का दूध। यह शरीर को कैल्शियम का उच्च स्तर प्रदान करता है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बकरी के दूध को पीने से शरीर में पाचन संबंधी दिक्कतें तो दूर होती ही हैं साथ ही साथ यह शरीर के विकास में भी फायदेमंद होता है।

अक्सर बकरी का दूध पीने से कई लोग परहेज करते हैं क्योंकि इस दूध से विशेष प्रकार की गंध आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये गंध इसमें मौजूद औषधीय गुणों की वजह से आती है। जो शरीर में घटी हुई प्लेटलेटस को तुरंत बढ़ा देती है।

डेंगू जैसे खतरनाक वायरल बुखार जिसमें इंसान का शरीर टूट जाता है एैसे समय में बकरी का दूध पीना बेहद फायदेमंद और जीवनदायक साबित होता है।

मधुमेह के रोग में
बकरी के दूध का सेवन करने से शरीर में मौजूद एसिड आसानी से पच जाता है जिससे उच्च रक्तचाप, कैंसर और मुधमेह आदि का इलाज आसानी से हो सकता है।

शरीर के रोग
बकरी के दूध में कई गुण होते हैं जो शरीर के आलस्य को दूर करने के साथ-साथ थकान, मांसपेशियों का खिचाव, सिर दर्द और वजन का बढ़ना आदि की समस्याओं को आसानी से ठीक कर देता है।

फैटी एसिड

बकरी के दूध में फैटी एसिड अधिक होता है। जो कि गाय के दूध से दोगुना होता है। और बकरी के दूध में प्रोटीन के अणु अति सूक्ष्म होते हैं जिस वजह से छोटे बच्चे को आसानी से ये दूध पच जाता है।

जो लोग दूध में मौजूद लैक्टोज को नहीं पचा पाते हैं वे बकरी के दूध का सेवन करें। इससे दूध में मौजूद लैक्टोज उन्हें आसनी से पच सकता है जिससे शरीर हर बीमारी से लड़ने में मजबूत बन जाता है।

सेलेनियम की मात्रा को अधिक होना
शोध में पता चला है कि बकरी के दूध में सेलेनियम की अधिक मात्रा होती हैं जिससे यह दूसरे दुधारू पशुओं की तुलना में तीन गुना अधिक सेलेनियम बनाती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है।

एचआईवी के रोग में
बकरी के दूध में मौजूद गुण से एचआईवी एड्स से पीडि़त मरीजों को लंबे समय तक बचाया जा सकता है। सीडी 4 काउन्टस को बढ़ाता है बकरी का दूध। जो एचआईवी पीडि़त रोगीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

पियें 1 कप अदरक का जूस, मिलेगा गठिया, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल से छुटकारा

पियें 1 कप अदरक का जूस, मिलेगा गठिया, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल से छुटकारा


अदरक का प्रयोग भोजन बनाने में प्रयोग करते हैं क्योंकि यह ना केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि बीमारियों से भी छुटकारा दिलाती है। पर क्या आपने कभी सोंचा है कि अदरक खाने की बजाए अगर इसका एक कप जूस पिया जाए तो कितनी बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है?
अदरक का जूस आपको सर्दी-जुखाम, पेट की खराबी, गले के दर्द, जोड के दर्द, मधुमेह, बढे हुए कोलेस्ट्रॉल को कम करने तथा कैंसर तक जैसी बीमारी से मुक्ती दिला सकता है। अगर आपको जानना है कि यह कैसे बनाया जाता है तो आखिरी प्वाइंट देखना ना भूले.

मधुमेह को कंट्रोल करे : 

इसमें एंटी डायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। एक गिलास अदरक का जूस आपके फास्टिंग ग्लूकोज लेवल को भी कंट्रोल कर सकता है।

कैंसर से मुक्ती : 

साबुत अदरक में कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, जिसमें एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं और वह कैंसर होने से रोकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल कम करे : 

अदरक का जूस जहां ग्लूकोज़ लेवल पर नज़र रखता है वहीं, यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम करने का काम करता है।

गठिया के दर्द से राहत : 

स्टडी के अनुसार, अदरक में दर्द से मुक्ती दिलाने का भी गुण छुपा है। इसलिये यह उनके लिये अच्छा है जिन्हें गठिया रोग है और जोड़ों का दर्द होता है।

कैसे बनाएं : 

अदरक के टुकडे धुल कर काट लें और मिक्स में डाल कर पीस लें और जूस निकाल लें। इस जूस में चाहें तो नींबू का रस और शहद मिक्स कर के सेवन किया जा सकता है।

सोमवार, 26 सितंबर 2016

मधुमेह (शुगर) के घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज़

मधुमेह (शुगर) के घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज़


बदलता परिवेश और रहन-सहन शहर में मधुमेह के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा कर रहा है। खान-पान पर नियंत्रण न होना भी इसके लिए जिम्मेदार है। डायबिटीज के मरीज को सिरदर्द, थकान जैसी समस्याएं हमेशा बनी रहती हैं। मधुमेह में खून में शुगर की मात्रा बढ जाती है। वैसे इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। परंतु जीवनशैली में बदलाव, शिक्षा तथा खान-पान की आदतों में सुधार द्वारा रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

मधुमेह लक्षण :

1. बार-बार पेशाब आना।
2. बहुत ज्यादा प्यास लगना।
3. बहुत पानी पीने के बाद भी गला सूखना।
4. खाना खाने के बाद भी बहुत भूख लगना।
5. मितली होना और कभी-कभी उल्टी होना।
6. हाथ-पैर में अकड़न और शरीर में झंझनाहट होना।
7. हर समय कमजोरी और थकान की शिकायत होना।
8. आंखों से धुंधलापन होना।
9. त्वचा या मूत्रमार्ग में संक्रमण।
10. त्वचा में रूखापन आना।
11. चिड़चिड़ापन।
12. सिरदर्द।
13. शरीर का तापमान कम होना।
14. मांसपेशियों में दर्द।
15. वजन में कमी होना।

यहाँ मधुमेह को नियंत्रण करने के कुछ आसन से घरेलू उपाय:

*तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इनसुलिन के लिये सहायक होते है । इसलिए शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।
*10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
*काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है। मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
*लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने के साथ वजन को भी नियंत्रण करने में मदद मिलेगी।
*करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है।अत: इसका रस रोज पीना चाहिए। उबले करेले के पानी से मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त किया जा सकता है।
*मधुमेह के उपचार के लिए मैथीदाने का बहुत महत्व है, इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून पानी के साथ लेना चाहिए ।
*काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में 5-6 भिंडियाँ काटकर रात को गला दीजिए, सुबह इस पानी को छानकर पी लीजिए।
*मधुमेह मरीजो को नियमित रूप से दो चम्मच नीम और चार चम्मच केले के पत्ते के रस को मिलाकर पीना चाहिए।
*ग्रीन टी भी मधुमेह मे बहुत फायदेमंद मानी । जाती है ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।
*सहजन के पत्तों में दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित सेवन से भी लाभ प्राप्त होता है ।
*एक टमाटर, एक खीरा और एक करेला को मिलाकर जूस निकाल लीजिए। इस जूस को हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट लीजिए। इससे डायबिटीज में बहुत फायदा होता है।
*गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर प्रतिदिन सेवन करने से भी मुधमेह नियंत्रण में रहता है।
*मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में खीरा नींबू निचोड़कर खाकर भूख मिटाना चाहिए।
*मधुमेह उपचार मे शलजम का भी बहुत महत्व है । शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग भी ज्यादा करना चाहिए।
*6 बेल पत्र , 6 नीम के पत्ते, 6 तुलसी के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, 3 साबुत काली मिर्च ताज़ी पत्तियाँ पीसकर खाली पेट, पानी के साथ लें और सेवन के बाद कम से कम आधा घंटा और कुछ न खाएं , इसके नियमित सेवन से भी शुगर सामान्य हो जाती है ।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

सत्तू खाने से शरीर को होते हैं ये 7 फायदे

सत्तू खाने से शरीर को होते हैं ये 7 फायदे


सत्तू में भरपूर मात्रा में फाइबर और सोडियम की मात्रा कम होती है। इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीज और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में होते हैं

भुने हुए चनों को पीसकर सत्तू को तैयार होने वाले सत्तू का इस्तेमाल भारत में वर्षों से होता आ रहा है। भारत के राज्य बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सत्तू काफी प्रचलित है। ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर अब शहरी क्षेत्रों में भी सत्तू का इस्तेमाल बढ़ा है। सत्तू का परांठे, लड्डू और लिट्टी-चोखा बनाने में उपयोग किया जाता है। गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने के अलावा इसके बहुत से दूसरे फायदे भी हैं, जिनकी जानकारी हम आपको दे रहे हैं।

शरीर में ठंडक पहुंचाए :

लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सत्तू सबसे बेहतरीन उपाय होगा। एक गिलास ठंडा सत्तू ड्रिंक आपके पाचन को ठीक रखता है और पेट को भीतर से ठंडक पहुंचाता है। गर्मी में कोल्ड ड्रिंक पाने की बजाय सत्तू ड्रिंक पिएं ये हेल्दी होने के साथ साथ आपकी जेब पर भी बोझ नहीं बनेगा।

थकान मिटाए :

गर्मियों में हम जल्दी थक जाते हैं और कमजोरी महसूस करने लग जाते हैं। सत्तू ड्रिंक एक अच्छा एनर्जी बूस्टर है, जो आपको अंदर से ताकत देता है और आप जल्दी थकते नहीं हैं और आप स्वस्थ्य रहते हैं।

त्वचा बने चमकदार :

दमकती हुई सुंदर त्वचा कौन नहीं चाहता, लेकिन अपनी त्वचा का खास खयाल न रखने और पोषक तत्व ठीक से न मिल पाने की वजह से आपकी त्वचा रूखी सूखी और अस्वस्थ्य हो जाती है। हर रोज सत्तू ड्रिंक पीने से आपकी त्वचा हाइड्रेट रहती है और नई कोशिकाओं को बनने में भी मदद मिलती है। यह भी पढ़ें: ठंडा पानी पीने से हो सकते हैं ये नुकसान

बालों के लिए :

अगर आप लंबे, घने, सुंदर और काले बाल चाहते हैं, तो आपको अपनी रोज की डाइट में सत्तू ड्रिंक का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए। पोषक तत्वों की कमी की वजह से बाल पतले होना, बालों का झड़ना और वक्त से पहले सफेद हो जाना जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं। हमारे शरीर की ही तरह हमारे बालों को भी पोषक तत्वों का आवश्यकता होती है और सत्तू में मौजूद प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट इस कमी को पूरा कर देते हैं।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर :

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सत्तू वरदान की तरह है। सत्तू शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को सत्तू को पानी में घोलकर उसमें नमक डालकर लेने की सलाह दी जाती है। यह भी पढ़ें: स्वास्थ्य के लिहाज से आंवला से बेहतर कुछ भी नहीं

बूढ़े व्यक्तियों के लिए :

बूढें व्यक्तियों के लिए सत्तू अमृत के समान है। बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति को कई समस्याएं घेर लेती हैं जिनमें खराब पाचन, पेट फूलना, कब्ज, एसिडिटी और दिल से जुड़ी कई बीमारियां हो जाती हैं इनमें सत्तू काफी लाभदायक होता है।

महिला स्वास्थ्य के लिए :

प्रेग्नेंसी दौरान और माहवारी के दिनों में महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए सत्तू एक बेहतरीन औषधि है। सत्तू में मौजूद विटामिन्स और प्रोटीन्स शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर देते हैं।
आयुर्वेद बताता है कैसे पानी से नहाना है बेहतर

आयुर्वेद बताता है कैसे पानी से नहाना है बेहतर


बीमारियों को दूर रखने के और तरोताजा महसूस रहने के लिए हर रोज नहाना बहुत जरूरी होता है। कई बार लोग नहाने को लेकर इस कन्फ्यूजन में रहते हैं कि वे इसके लिए कैसे पानी का चुनाव करें? तो चलिए आज हम आपकी इस उलझन को दूर किए देते हैं

ठंडे पानी से नहाने के फायदे :

  • सुबह के समय ठंडे पानी से नहाने से आलस दूर हो जाता है।
  • ठंडे पानी से नहाने से डिप्रेशन को दूर करने वाले बीटा एंडोर्फिन नामक केमिकल के रिलीज होता है।
  • अध्‍ययन के अनुसार ठंडे पानी से नहाने से टेस्‍टोस्‍टेरोन के रिलीज में मदद होती है जिससे पुरुषों में प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार होता है
  • ठंडे पानी से नहाने से फेफड़ों को कार्य करने की छमता का विकास होता है।
  • ठंडा पानी प्रतिरक्षा प्रणाली और लसीका को उत्तेजित करता है जिससे संक्रमण के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर में नई कोशिकाएं बनती हैं।

गर्म पानी से नहाने के फायदे :

  • गर्म पानी से शरीर पर पसीने और गंदगी से जमा कीटाणुओं को तेजी से मारता है। इस तरह गर्म पानी से नहाने से शरीर साफ होता है।
  • गर्म पानी मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार और मांसपेशियों में दर्द होने पर आराम देता है।
  • गर्म पानी से नहाने से शरीर में शुगर के स्‍तर को कम करने और डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिलती है है।
  • खांसी और सर्दी होने पर गर्म पानी से नहाना फायदेमंद होता है।

आयुर्वेद के अनुसार ठंडे या गर्म पानी के बीच चयन कैसे करें ?

आयुर्वेद के अनुसार आपको शरीर के लिए गर्म पानी और आंखों और बालों के लिए ठंडे पानी का इस्‍तेमाल करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार पानी के तापमान का निर्धारण निम्‍नलिखित कारकों के आधार पर किया जाना चाहिए। 

ठंडा पानी पीने से हो सकते हैं ये नुकसान :

उम्र पर आधारित

युवाओं और बुजुर्ग लोगों को ‍गर्म पानी से नहाने का सु‍झाव दिया जाता है। लेकिन अगर आप छात्र है और अपना ज्‍यादातर समय पढ़ने में लगाते हैं तो आपके ठंडे पानी से नहाना ज्‍यादा फायदेमंद होगा इससे दिमाग शांत रहता है।

शारीरिक प्रकार पर आधारित

अगर आपके शरीर का प्रकार पित्‍त है तो आपके लिए ठंडे पानी से नहाना बेहतर रहता है और अगर आपके शरीर का प्रकार कफ या वात है तो गर्म पानी का उपयोग करें।

रोगों पर आधारित

अगर आप पित्‍त से संबंधित किसी रोग जैसे अपच या लीवर संबंधित विकार से पीडि़त हैं, तो ठंडे पानी से नहाना आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होगा। और अगर आप कफ या वात से संबंधित विकारों से पीड़ि‍त हैं तो गर्म पानी से नहाना चाहिए। अगर आप मिर्गी रोगी हैं, तो गर्म और ठंडे पानी दोनों से नहाने के लिए मना किया जाता है इसकी बजाय, गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। यह भी पढ़ें: स्वास्थ्य के लिहाज से आंवला से बेहतर कुछ भी नहीं

समय पर आधारित

अगर आप सुबह के समय नहाते हे तो ठंडे पानी से नहाना बेहतर रहता है। लेकिन अगर आप रात में नहाते हैं तो आराम महसूस करने के लिए गर्म पानी से नहाना चाहिए। चूंकि शाम के समय वात का प्रभाव शरीर पर ज्यादा होता है इसलिए गर्म पानी से नहाना फायदेमंद होगा।

आयुर्वेद के अनुसार कैसे नहायें 

आयुर्वेद के अनुसार, “जल्‍दबाजी में नहाना जल्‍दबाजी में भोजन करने की तरह होता है और आपके शरीर को सभी लाभ नहीं मिल पाते। और आप जल्‍दी में नहाते है तो ठीक से शरीर की सफाई भी नहीं होती।“ ताजगी पाने के लिए नहाने का अच्‍छा अनुभव करना जरूरी होता है। आप इस प्रक्रिया का धीरे-धीरे का पालन करें।
डाइबिटीज में कद्दू खाने के फायदे

डाइबिटीज में कद्दू खाने के फायदे


डायबटीज एक कॉम्प्लीकेटेड बीमारी है जिसमें हर बार एतहियात बरतनी पड़ती है। यह बीमारी साइलेंट किलर होती है, इसमें शरीर में ब्लड़ सुगर की मात्रा, नियंत्रण में नहीं रहती है। डायबटीज से ग्रसित व्यक्तियों को खाने-पीने के मामले में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर प्रीर्जवेटिव फूड खाने से बचना चाहिए। 
अगर आप डायबटीज से ग्रसित है तो मसूर की दाल, ब्रोकली, सॉल्मन, चिया सीड और सारडीनाइस आदि का सेवन करें, जो आपके लिए फायदेमंद होता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताना चाहते है कि कद्दू का सेवन, डायबटीज के रोग में फायदेमंद होता है। आप इसे कई तरीके से सेवन कर सकते हैं, इसको भाप में पकाकर खाने से अधिक लाभ मिलता है, आप चाहें तो इसे लोहे की कढ़ाई में पकाकर खाएं, इससे आपको आयरन भी मिलेगा और आपको सब्जी में स्वाद भी आएगा। कद्दू का सूप, पाइस और पूरी भी बनती है। 
कद्दू का सेवन करने से विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में मिलता है। इससे शरीर को पौटेशियम भी अच्छी मात्रा में मिलता है। इसके सेवन से शरीर में वसा की मात्रा नहीं बढ़ती है। 

डायबटीज मरीजों को कद्दू के सेवन के निम्नलिखित लाभ हैं:

1) भरपूर मात्रा में विटामिन सी कद्दू में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है। इससे शरीर में इंसुलिन की मात्रा अच्छी हो जाती है और बढ़ी हुई डायबटीज नियंत्रण में आ जाती है। 
2) आयरन और असंतृप्त वसा कद्दू के बीजों में आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है और इसमें वसा भी नहीं होता है जो दिल के लिए भी अच्छा होता है। अगर आप इसके क्रंची स्नैक भी बनाकर खाएं, तब भी आपको किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। 
3) एंटीऑक्सीडेंट शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम होने पर डायबटीज की शिकायत हो जाती है, ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मिलने पर इस कमी की भरपाई की जा सकती है। कई शोध अध्ययनों से ये बात सामने आई है कि कदृदू खाने से उपापचय दुरूस्त रहता है और कुछ हद तक बीमारी सही भी हो जाती है। 
4) फॉलिक एसिड कद्दू में फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर में नाईट्रिक एसिड की मात्रा को घटाता है। यह आपके शरीर की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है। यह कद्दू का विशेष लाभ है।

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

क्या आप तिल के ये चमत्कारिक लाभ जानते हैं

क्या आप तिल के ये चमत्कारिक लाभ जानते हैं


• ठंड में तिल गुड़ दोनो समान मात्रा में लेकर मिला लें। उसके लड्डू बना ले। प्रतिदिन 2 बार 1-1 लड्डू दूध के साथ खाने से मानसिक दुर्बलता एंव तनाव दूर होते है। शक्ति मिलती है। कठिन शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना जल्दी बुढ़ापा आना बन्द हो जाता है। तिल व तिल के तेल के सेवन से व सिर में इसकी मालिश करने से न केवल बाल घने और चमकदार होते हैं बल्कि बालों का गिरना भी कम हो जाता है। 

• प्रतिदिन दो चम्मच काले तिल को चबाकर खाइए और उसके बाद ठंडा पानी पीजिए। इसका नियमित सेवन करने से पुराना बवासीर भी ठीक हो जाता है। बच्चा सोते समय पेशाब करता हो़ तो भुने काले तिलों को गुड़ के साथ मिलाकर उसका लड्डू बना लीजिए। बच्चे को यह लड्डू हर रोज रात में सोने से पहले खिलाइए, बच्चा सोते वक्त पेशाब नही करेगा। 

• तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। वाइरस, एजिंग और बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करता है। इसीलिए ठंड में तिल का सेवन जरूर करना चाहिए। यदि सर्दी के कारण सूखी खांसी हो तो 4-5 चम्मच मिश्री एंव इतने ही तिल मिश्रित कर ले। इन्हे एक गिलास मे आधा पानी रहने तक उबाले। इसे दिनभर में तीन बार लें।एक स्टडी के मुताबिक ठंड में तिल व तिल के तेल का सेवन डायबिटीज के पेशेन्ट्स के लिए दवा का काम करता है। 

• पेट दर्द- 20-25 ग्राम साफ चबाकर उपर से गर्म पानी पिलाने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।कब्ज होने पर 50 ग्राम तिल भूनकर उसे कूट लीजिए, इसमें चीनी मिलाकर खाइए। इससे कब्ज दूर हो जाती है। खांसी आने पर तिल का सेवन कीजिए खांसी ठीक हो जाएगी। तिल व मिश्री को पानी में उबाल कर पीने से सूखी खांसी भी दूर हो जाती है। 

• रोज सुबह अच्छे से चबा चबाकर काले तिल खाने से दांत और मसुड़े स्वस्थ रहते हैं। तिल खांसी से भी निजात दिलाता है। अदरक वाली चाय में दो ग्राम तिल मिलाकर कुछ देर उबालें। इस चाय के सेवन से खांसी ठीक हो जाती है। 

• तिल, सोंठ, मेथी, अश्वगंधा सभी बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। रोज सुबह इस चूर्ण के सेवन से आर्थराइटिस की समस्या ठीक हो जाती है। ठंड में तिल के सेवन से कफ व सूजन से भी राहत मिलती है। 

गुरुवार, 22 सितंबर 2016

सुबह एक-दो मुट्ठी काले चने खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है.... !

सुबह एक-दो मुट्ठी काले चने खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है.... !


● एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना हमारे सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हम इस पोस्ट में जानने का प्रयास करेगे. काले चने भुने हुए हों, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं। 
● शरीर को सबसे ज्यादा फायदा अंकुरित काले चने खाने से होता है, क्योंकि अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियमऔर मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं। साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती। रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मुट्ठी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है।

चने ज्यादा महंगे भी नहीं होते और इसमें बीमारियों से लड़ने के गुण भी छिपा हुए हैं।

1) कब्ज से राहत मिलती हैचने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है। रातभर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है। लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं।
2) ये एनर्जी बढ़ाता है कहा तो यहाँ तक जाता है इंस्टेंट एनर्जी चाहिए, तो रातभर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। आप चने का सत्तू भी खा सकते हैं। यह बहुत ही फायदेमंद होता है।गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।
3) पथरी की प्रॉब्लम दूर करता है दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडरमें पथरी की समस्या आम हो गई है। हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रहीहै। इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं। रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है। इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।
4) काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है ।

अन्य लाभ :

एनर्जी बढ़ाता है, डायबिटीज से छुटकारा मिलता है,एनीमिया की समस्या दूर होती है, बुखार में पसीना आने की समस्या दूर होती है, पुरुषों के लिए फायदेमंद, हिचकी में राहत दिलाता है, जुकाम में आराम मिलता है, मूत्र संबंधित रोग दूर होते हैं, त्वचा की रंगत निखारता है।
● डायबिटीज से छुटकारा दिलाता है 
चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खालीपेट करनाचाहिए। चने का सत्तू डायबिटीज़ से बचाता है। एक से दो मुट्ठी ब्लड चने का सेवन ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करने के साथ ही जल्द आराम पहुंचाता है।
● एनीमिया की समस्या दूर होती है
शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है। चने में शहद मिलाकर खाना जल्द असरकारक होता है। आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। चने में 27 फीसदी फॉस्फोरस और 28 फीसदी आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।
● हिचकी में राहत दिलाए
हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। साथ ही चना आंतों/इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
● बुखार में पसीना आने पर
बुखार में ज्यादा पसीना आने पर भुने हुए चने को पीसकर, उसमें अजवायन मिलाएं। फिर इससे मालिश करें। ऐसा करने से पसीने की समस्या खत्म हो जाती है।
● मूत्र संबंधित रोग में आराम
भुने हुए चने का सेवन करने से बार-बार पेशाब जाने की बीमारी दूर होती है। साथ ही गुड़ व चना खाने से यूरीन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने हुए चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाती है।
● पुरुषों के लिए फायदेमंद
चीनी-मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोए हुए चने को चबा-चबाकर खाना पुरुषों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पुरुषों की कई प्रकार की कमजोरी की समस्या खत्म होती है। जल्द असर के लिए भीगे हुए चने के साथ दूध भी पिएं। भीगे हुए चने के पानी में शहद मिलाकर पीने से पौरुषत्व बढ़ता है।
● त्वचा की रंगत निखारता है चना 
केवल हेल्थ के लिए ही नहीं, स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है। चना खाकर चेहरे की रंगत को बढ़ाया जा सकता है। वैसे चने की फॉर्म बेसन को हल्दी के साथ मिलाकर चेहरे पर लगा

बुधवार, 21 सितंबर 2016

मखाना खाने के जबरदस्त फायदे, रोज बस एक मुट्ठी खाएं

मखाना खाने के जबरदस्त फायदे, रोज बस एक मुट्ठी खाएं


मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाना स्वास्थ्य के लिये भी काफी फायदेमंद है। मखाने के बीज किडनी और हृदय के लिये लाभप्रद हैं। मखाने में 9.7 प्रतिशत आसानी से पचनेवाला प्रोटीन, 76 प्रतिशत कार्बोहाईड्रेट , 12.8 प्रतिशत नमी, 0.1 प्रतिशत फैट, 0.5 प्रतिशत मिनरल लवण, 0.9 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 1.4 मिलीग्राम आयरन पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होते है। साथ ही मखाने में कैल्शियम, अम्ल और विटामिन बी भी पाया जाता है। यह शीघ्रपतन से बचाता है, वीर्य की गुणवत्ता और मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है जिससे कामेच्छा बढ़ जाती है। इसके अलावा यह महिलाओं में बांझपन को भी दूर करने में मदद करता है।

1) डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद :

डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। इससे इंसुलिन हार्मोंन का स्राव करने वाले अग्न्याशय के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। लेकिन मखाने मीठा और खट्टा बीज होता है। और इसके बीज में स्टार्च और प्रोटीन होने के कारण यह डायबिटीज के लिए बहुत अच्छा होता है।

2) बढ़ती उम्र को रोकता है: एंटी-एजिंग गुण :

मखाने में बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने की क्षमता होती है। मखाना एंटी-एजिंग के साथ एंटी-आक्सीडेट से भी भरपूर होता हैं जो उम्र को रोकने में सहायता करता है। जिस वजह से आप लंबे समय तक जवां बने रहते हो।
झुर्रियां और बालों का सफेद होना भी मखाने से कम हो जाते हैं।


3) किडनी को मजबूत बनाये :

मखाने का सेवल किडनी और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्सीफाइ करने, किडनी को मजबूत बनाने और ब्लड का पोषण करने में मदद करता है। साथ ही मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।

4) दिल की बीमारी में मखाना :

मखाने में एस्ट्रीजन गुण होते हैं जो आपको दिल के रोगों से बचाता है। मखाना दिल की सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं है।

5) दर्द से छुटकारा दिलाय :

मखाना कैल्शियम से भरपूर होता है इसलिए जोड़ों के दर्द, विशेषकर अर्थराइटिस के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द जैसे से कमर दर्द और घुटने में हो रहे दर्द से आसानी से राहत मिलती है।
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6) पाचन में सुधार करे :

मखाना एक एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा आसानी से पच जाता है। बच्चों से लेकर बूढे लोग भी इसे आसानी से पचा लेते हैं। इसका पाचन आसान है इसलिए इसे सुपाच्य कह सकते हैं। इसके अलावा फूल मखाने में एस्ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मदद करता है। मखानों को देसी घी में भूनकर खाने से दस्त जैसे रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।

अन्य लाभ :

मखाने के सेवन से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। रात में सोते समय दूध के साथ मखाने का सेवन करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है।

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

मधुमेह की रामबाण औषिधि – काला जीरा

मधुमेह की रामबाण औषिधि – काला जीरा


भारतीय पाक कला में मसालों के इस्तेमाल का अलग ही महत्व है। मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बेजोड़ होते हैं। ये मसाले अपने आप में हमारे लिए बेहतरीन दवा का काम करते हैं। इन्ही मसालो में एक विशेष हैं काला जीरा। हर रोज़ सिर्फ दो ग्राम की मात्रा में काला जीरा खाने से मधुमेह में विशेष लाभ होता हैं। काला जीरा शरीर के सभी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से मधुमेह यानी शुगर में होने वाले लाभो पर चर्चा करेंगे

काला जीरा अर्थात कलौंजी दो प्रकार से मधुमेह को नियंत्रित करता हैं :

काला जीरा पैंक्रियास को उत्तेजित कर के अधिक इन्सुलिन का निर्माण करवाता हैं। जिस से शरीर में मौजूद ग्लूकोस शरीर के cell (उत्तकों) द्वारा आसानी से ग्रहण कर लिए जाते हैं। ऐसा इसमें मौजूद थायमोक़्यीनॉन के कारण होता हैं। जिस से प्राकृतिक रूप से शरीर में रक्त शर्करा का लेवल कम हो जाता हैं।

काला जीरा के कुछ अन्य विशेष गुण :

1. खून की कमी यानी एनीमिया :
जीरे में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जिससे यह खून की कमी यानी एनीमिया को दुरुस्त करता है और रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है।
2. दमा (अस्थमा) में :
यह शरीर में ऑक्सीजन का सभी हिस्सों में पहुंचना सुचारु करता है। दमे के मरीजों को इसके भरपूर लाभ मिलते हैं। इसमें थायमोक़्यीनॉन नामक एक खास तत्व होता है जो दमे को रोकने बहुत कारगर है।
3. शरीर की गंदगी बाहर निकालने में :
हमारे शरीर में विभिन्न कारणों से गंदगी आ जाती हैं जिन्हें शरीर पसीने और फुंसियों के रूप में बाहर निकालता है। जीरे का नियमित इस्तेमाल शरीर की शोधन करने की प्रक्रिया को तेज करता है और गंदगी मुंहासों और फुंसियों के तौर पर बाहर नहीं आती। आपकी त्वचा साफ और सुंदर बनी रहती है।
4. एग्ज़िमा और सोराइसिस में :
जीरे में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है जिससे यह त्वचा को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर होता है। इसमें प्राकृतिक तेल होने के साथ साथ एंटी फंगल गुण होते हैं जिनसे त्वचा इंफेक्शन से बची रहती है। इसमें त्वचा संबंधी बीमारियों जैसे एग्ज़िमा और सोराइसिस को ठीक करने के गुण होते हैं। जीरा पाउडर को आप अपने फेसपैक में भी मिला सकते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन ई त्वचा पर होने वाले उम्र के असर को कम करता है।
5. जीरा फेस पैक :
जीरे के उपयोग से बना फेसपैक बहुत फायदेमंद होता है। इसे हल्दी के साथ मिक्स करके बनाया जाता है। जीरा पावडर और हल्दी को शहद के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर सूखने तक रखना होता है। इससे त्वचा नर्म और उजली बनती है। जीरे के उपयोग से रूसी से भी छुटकारा पाया जा सकता है। इसे आप अपने तेल में थोड़ा गर्म करके इस गुनगुने तेल से सिर पर मसाज कीजिए और रूसी से छुटकारा पा लीजिए।