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सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

अनेक रोगों का जड़ से नाश करता है सत्यनाशी का पौधा

अनेक रोगों का जड़ से नाश करता है सत्यनाशी का पौधा



आर्युवेद में सत्यनाशी पौधा एक बहुउपयोगी औषधि रूप है। सत्यनाशी यानि कि सभी प्रकार के रोगों का नाश करने वाला खास वनस्पति। सत्यनाशी पौधा बंजर, नदी किनारे, जगलों, खाली जगहों में पाये जाते हैं। सत्यनाशी पौधा लगभग 3 फीट तक लम्बा होता है। फूल पीले और पत्ते हरे तेज नुकीले होते हैं। और बीज सरसों दानों की तरह होते हैं। कोमल पत्ते-तने तोड़ने पर दूध जैसा तरल निकलता है। सत्यनाशी पौधा भारत में लगभग सभी राज्यों में पाया जाता है। जिसे अलग-अलग नामों  स्वर्णक्षीरी, कटुपर्णी, पीला धतूरा, स्याकांटा, फिरंगीधूतरा, भड़भांड़, काटे धोत्रा, मिल धात्रा, दारूड़ी, चोक, कटसी, भटकटैया पौधा, सोना खिरनी, कुश्मक, शियालकांटा, कुडियोटिट, और अंग्रेजी में Argemone mexicana, Prickly Poppy, Mexican Poppy, Satyanashi से पुकारा जाता है। सत्यनाशी औषधि और तेल रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पीलिया रोग में उपयोगी
सत्यनाशी के पौधे का उपयोग पीलिया रोग में बहुत कारगर साबित होता हैं। पीलिया के रोगी को आधा चम्मच सत्यनाशी तेल गन्ने के जूस के साथ पीने से पीलिया रोग में जल्दी छुटकारा मिल जाता हैं।

जलोदर में सत्यनाशी का उपयोग
जलोदर यानि पेट, फेफड़ो और शरीर के अंगो में पानी भरने की समस्या में सत्यनाशी को रामबाण औषधि माना जाता हैं। इसके लीये 1 चम्मच सत्यनाशी तेल और चुटकी भर सेंधा नमक को एक गिलास गुनगुने पानी में डालकर रोज सुबह पिया जाए तो, कुछ ही दिनों में इस समस्या से छुटकारा मिल जाता हैं।

मुंह के छाले की समस्या
मुंह में छाले होने पर सत्यनाशी के कोमल डंठल और पत्तियां चबानी चाहिए। और कुछ देर बाद थोड़ा दही और चीनी खाने से मुंह के छालों में तुरंत रहत मिलती हैं।

बवासीर में सत्यनाशी 
बवासीर को ठीक करने में सत्यनाशी एक खास औषधि रूप है। सत्यनाशी जड़, चक्रमरद बीज और सेंधा नमक बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। रोज सुबह शाम चुटकी भर सत्यनाशी मिश्रण चूर्ण दही के साथ खाने से बवासीर घाव ठीक करने और बवासीर जड़ से मिटाने में सहायक है। सत्यनाशी जड़, चक्रमरद बीज और सेंधा नमक मिश्रण गुड़ पानी के साथ भी सेवन कर सकते हैं।

चोट घाव में सत्यनाशी पौधा 
चोट घाव ठीक करने में सत्यनाशी फूल, पत्तियों का रस अचूक औषधि मानी जाती है। सत्यनाशी फूल पत्तियों का रस घाव जल्दी भरने में सहायक और घाव को संक्रमित होने से बचाने सहायक है।

दमा रोग में सत्यनाशी 
सत्यनाशी फूल, कोमल पत्तों से कांटे अलग करे, फिर फूल और कांटे बिने पत्तों को बरीक पीसकर फंक बना लें। रोज सुबह शाम सत्यनाशी आधा चम्मच से कम फंक गर्म पानी के साथ सेवन करने से दमे की खांसी से जल्दी आराम मिलता है। और 1 चम्मच सत्यनाशी तेल मिश्री, गुड़ के साथ खाने से दमा रोग से जल्दी छुटकारा मिलता है।

कुष्ठ रोग रोकथाम में सत्यनाशी 
कुष्ठ रोग फैलने से रोकने में सत्यनाशी सहायक है। सत्यनाशी के फूल, पत्तों और नींम के पत्तों को बारीक कूटकर पानी में उबालें। फिर पानी गुनगुना ठंड़ा होने पर नहायें। आधा चम्मच सत्यनाशी फूल रस दूध के साथ सेवन करें। सत्यनाशी तेल खाने में इस्तेमाल, और कुष्ठ ग्रसित त्वचा पर लगायें। सत्यनाशी पौधा कुष्ठ रोगी के लिए फायदेमंद है।

आंखों के विकारों के लिए सत्यनाशी 
नजर कमजोर होने पर, मोतियाबिन्दु होने पर सत्यनाशी के दूध को मिश्री, कच्चे दूध के साथ सेवन करना फायदेमंद है। सत्यनाशी दूध और ताजा मक्खन या फिर गाय के घी के साथ मिलाकर आंखों पर सुरमे - काजल की तरह लगाने से अंधापन्न, रतौंदी, आंखों जलन समस्या दूर करने में सहायक है।

तुतलाने-हकलाने पर सत्यनाशी  
हकलाने तुतलाने की समस्या में सत्यनाशी पत्तों - तनों के दूध को जीभ कर लगाना फायदेमंद है। और सत्यनाशी पत्तों का रस बरगद के पत्तों पर लगाकर हल्का 5-7 मिनट सुखायें। फिर खाने के दौरान थाली की जगह बरगद के पत्तों का इस्तेमाल करें। और बरगद के पत्तों पर लगे सत्यनाशी रस पर शहद लगाकर चाटने से बच्चों की तुतलाने-हकलाने की समस्या जल्दी ठीक करने में सहायक है।

दांतों के लिए सत्यनाशी 
दांतों में कीड़ा लगने पर सत्यनाशी तने और नींम तने से लगातार रोज दांतून करने से दांतों के कीड़ा, दांत दर्द से जल्दी छुटकारा मिलता है। दांतों के लिए सत्यनाशी तना और नींम तना से एक साथ मिलाकर दांतुन करना खास फायदेमंद है। 

गैस कब्ज में सत्यनाशी 
गैस कब्ज समस्या में सत्यनाशी जड़ और अजवाइन उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। रोज सुबह शाम सत्यनाशी काढ़ा पीने से गैस कब्ज की समस्या मात्र 10-15 दिनों में ठीक करने में सहायक है।

पेट कीड़ साफ करे सत्यनाशी  
पेट में कीड़ों की समस्या होने पर सत्यनाशी जड़ और आधे से थोड़ा कम मात्रा में कलौंजी मिलाकर पीसकर फंक गुनगुने पानी के साथ पीने से पेट के कीड़े शीध्र नष्ट करने में सहायक है।

खाज खुजली में सत्यनाशी 
सत्यनाशी बीज और सत्यनाशी दूध मिश्रण कर ग्रसित खाज खुजली वाली त्वचा पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है। सत्यनाशी फूल पत्तों का आधा-आधा चम्मच रस रोज सुबह शाम पीयें। खाज खुजली ठीक करने में सत्यनाशी फायदेमंद है।

गठिया जोड़ों के दर्द में सत्यनाशी तेल 
सत्यनाशी तेल में लहसुन पकाकर अच्छे से मालिश मसाज करने से गठिया जोड़ों के दर्द में असरदार दर्द निवारण है।

पुरूर्षों महिलाओं की अन्दुरूनी कमजोरी दूर करे सत्यनाशी 
पुरूर्षों महिलाओं दोनों की अन्दुरूनी गुप्त बीमारी नपुंसकता, धातुरोग, वीर्य कमजोरी, शुक्राणुओं की गड़बड़ी और निसंतान कलंक दूर करने में सत्यनाशी पौधा एक अचूक प्राचीनकालीन औषधि है। महिलाओं पुरूर्षों के गुप्त रोगों में सत्यनाशी के फूल रस, पत्तियों का रस  आधा चम्मच सुबह शाम कच्चे दूध के साथ सेवन करना फायदेमंद है। सत्यनाशी बीज तेल से मालिश और 50 ग्राम सत्यनाशी जड़ों 1 लीटर पानी में हल्की आंच में उबाल कर काढ़ा तैयार करें और रोज सुबह शाम 2-2 चम्मच पीने से जल्दी फायदा होता है। निसंतान दंम्पतियों के लिए सत्यनाशी पौधा अचूक औषधि मानी जाती है। पुरूर्षों महिलाओं के लिए सत्यनाशी Libido Boosters  है। 

लिंग कमजोरी दूर करे सत्यनाशी तेल मालिस 
सत्यनाशी बीज तेल मालिस मसाज पुरूर्षों की लिंग स्थिलिता कमजोरी दूर करने में खास सहायक है। सत्यनाशी तेल मालिस कमजोर नसों में रक्त संचार तीब्र और सुचारू बनाये रखने में और लिंगवर्धक में सक्षम है।

पेशाब जलन में सत्यनाशी 
पेशाब में जलन, संक्रामण होने पर सत्यनाशी जड़ों को उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। रोज सुबह शाम पीने से पुरानी से पुरानी पेशाब जलन - दर्द समस्या दूर करने में सहायक है।

सावधानियां 
  • सत्यनाशी सेवन गर्भावस्था के दौरान मना है।
  • गम्भीर सर्जरी में सत्यनाशी सेवन मना है।
  • सत्यनाशी सेवन 2 साल से छोटे बच्चों के लिए मना है।
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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

पीलिया का आयुर्वेद में है अचूक और रामबाण इलाज

पीलिया का आयुर्वेद में है अचूक और रामबाण इलाज


Remedies for Jaundice in Hindi

पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।


जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है।

👱  नाश्ते में अंगूर, सेवफल पपीता, नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।
👱  मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।
👱  करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।
👱  रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।
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👱  रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।
👱  सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।

👱  दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।
👱  मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।
👱  धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।
👱  एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
👱  जौ आपके शरीर से लीवर से सारी गंदगी को साफ करने की शक्ति रखता है।
👱  टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्वस्थ्य बनाने में लाभदायक होता है।
👱  इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।
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👱  आमला मे भी बहुत सारा विटामिन सी पाया जाता है। आप आमले को कच्चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं। इसके अलावा इसे लीवर को साफ करने के लिये जूस के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।
👱  यह एक प्राकृतिक उपाय है जिसेस लीवर साफ हो सकता है। सुबह सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्तियां खानी चाहिये।
👱  जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।
👱  गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।

👱  रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
👱  टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।
नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे पीलिया में बहुत सुधार आएगा।
👱  पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।

पीलिया में परहेज :

👱  पीलिया के रोगियों को मैदा, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया, मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।
👱  पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।

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एक और प्रयोग…
👱  सरसों के तेल की खली १०० ग्राम का चूर्ण बना लें
👱  इस चूर्ण की १ चम्मच मात्रा १०० ग्राम दही में मिलाकर सुबह ८ – ९ बजे लें
👱  स्वाद अनुसार नमक या चीनी भी डाल सकते है

एक सप्ताह लगातार लेने से पीलिया मल मार्ग से बाहर निकलजायेगा..लेकिन घी तेल में तली चीजो से १० दिनो तक परहेज करें एक सप्ताह में पीलिया जड से समाप्त हो जायेगा.

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

पपीता खाने के इन साइड इफेक्ट्स के बारे में नहीं जानते होंगे आप, ज्यादा सेवन से हो सकता है पीलिया

पपीता खाने के इन साइड इफेक्ट्स के बारे में नहीं जानते होंगे आप, ज्यादा सेवन से हो सकता है पीलिया


तमाम तरह के पोषक तत्वों से भरपूर पपीते का सेवन कई तरह की बीमारियों से निजात दिलाने में काफी फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी का भंडार होता है। इसे कच्चा और पके हुए दोनों रूपों में खाया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल कम करने, वजन घटाने में, इम्यूनिटी और आंखों की रोशनी बढ़ाने में इसके काफी फायदे होते हैं। इन सबके अलावा पपीता खाने के कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। कई बार पपीते का सेवन हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह भी होता है। आज हम आपको पपीते के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में बताने वाले हैं।

पीलिया होने की संभावना – पपीते में पाए जाने वाले पपाइन और बीटा कैरोटीन नामक पदार्थ की वजह से शरीर में पीलिया और अस्‍थमा जैसी खतरनाक बीमारियों की संभावना काफी बढ़ जाती है। पपीते में इन दोनों पदार्थों की काफी मात्रा पाई जाती है।

गर्भपात की संभावना – कच्चे पपीते की वजह से गर्भपात के बारे सब जानते हैं। कच्‍चे पपीते में मौजूद लैटेक्‍स नाम के तत्व की वजह से गर्भाशय के सिकुड़ने की संभावना बनी रहती है, जिसके कारण गर्भपात या फिर समय से पहले प्रसव की संभावना बढ़ जाती है। यदि कच्‍चा पपीता प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में खाया जाए तो लेबर पेन का भी खतरा रहता है।

किडनी में पथरी – यूं तो पपीते के सेवन से कैंसर, हाइपरटेंशन, ब्‍लड वेसेल डिस्‍ऑर्डर से सुरक्षा मिलती है लेकिन एक अध्‍ययन में यह बात भी सामने आई है कि पपीते के अत्‍यधिक सेवन से किडनी में पथरी की समस्‍या पैदा हो सकती है। पपीते में बहुतायत मात्रा में पाया जाने वाला विटामिन सी इसके लिए जिम्मेदार है।

स्किन को नुकसान – अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने की वजह से स्किन के रंग में पीलापन दिख आ जाता है। इसमें मौजूद बीटा केरोटीन त्वचा के रंग को प्रभावित करता है।

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बुधवार, 13 सितंबर 2017

पीलिया से निजात पाने के ये हैं आसान घरेलु उपाए, जो शायद ही आपको पता हो

पीलिया से निजात पाने के ये हैं आसान घरेलु उपाए, जो शायद ही आपको पता हो


पीलिया लीवर से सम्बंधित रोग है .. वैसे तो ये साधारण सी बीमारी लगती है, मगर इसका सही समय पर इलाज ना हो तो ये बहुत भयंकर परिणाम दे सकती है और रोगी की जान तक जा सकती है। लेकिन राहत की बात है कि पीलिया पुराना हो या नया घरेलू देसी नुस्खे और आयुर्वेदिक दवा से आप इसका उपचार कर सकते है…साथ ही इस बीमारी से छुटकारा पाने में इलाज के साथ परहेज करना भी जरुरी है और जैसे ही पीलिया के लक्षण आपको दिखने लगे इसका उपचार शुरू कर देना चाहिए । हम आपको ऐसे ही कुछ घरेलु और आसान से उपाए बता रहे हैं जो पीलिया से निजात पाने में बेहद कारगर होते हैं….

पीलिया के लक्षण :

इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते पर ये रोग जब बढ़ जाता है, तब मरीज की आँखे और नाख़ून पीले पड़ जाते है, इसके इलावा पेशाब पीले रंग का आने लगता है और खाना ठीक से नहीं पचता। इसके इलावा कुछ और लक्षण भी है जिनसे पीलिया की पहचान कर सकते है, जैसे बुखार आना, सिर दर्द होना, आँखे दर्द होना, भूख कम लगना, उल्टी आना और जी मचलन, कमज़ोरी आना और जल्दी थकान आना ।

पीलिया के कारण :

इंफेक्शन होने से लिवर कमज़ोर होने से, शरीर में ब्लड की कमी होने से, सड़क किनारे कटी, खुली और दूषित चीज़े खाने से, तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें आदि सभी वसा जैसे घी, क्रीम और तेल।

पीलिया से निजात पाने के घरेलू उपाय:

1. प्याज छील कर इसे बारीक़ काटे फिर पीसी हुई काली मिर्च, थोड़ा काला नमक और नींबू का रस इसमें मिलाकर हर रोज दिन में सुबह शाम सेवन करे।

2. ताजा मुल्ली के हरे पत्ते पीस कर रस निकाले और इसे छान कर पिए.इस उपाय से मरीज के जिगर की कमजोरी दूर होती है, पेट की आंते साफ़ होती है और भूख लगने लगती है।

3. जॉन्डिस के मरीज को प्रतिदिन ताज़ा गन्ने का जूस पीना चाहिए इससे पीलिया से जल्दी राहत मिलती है,।

4. लहसुन की तीन से चार कलियाँ पीस कर इसे दूध के साथ ले, इससे पीलिया का जड़ से इलाज होता है और लिवर को ताकत मिलती है।

5. चने की दाल रात को पानी में भिगो कर रखे. सुबह इसमें से पानी निकाल ले और गुड़ मिलाकर खाए…लगातार कुछ दिन इस नुस्खे को करने पर जॉन्डिस में राहत मिलती है।

6. पीलिया के मरीज को गाजर और गोभी का रस बराबर बराबर मिलाकर एक गिलास पिए… इस जूस को कुछ दिन लगातार पीने पर पीलिया से जल्दी आराम मिलता है।

7. निम्बू का रस पीलिया में काफी फायदेमंद है…पीलिया से ग्रसित मरीज को प्रतिदिन नींबू का रस पंद्रह से बीस एम एल दो से तीन बार पीना चाहिए, नींबू की शिकंजी बना कर पीना भी अच्छा है।

बुधवार, 23 अगस्त 2017

गिलोय कर सकता है आपके शरीर की 5 बड़ी बीमारियों को पल-भर में दूर, जानें कैसे!!

गिलोय कर सकता है आपके शरीर की 5 बड़ी बीमारियों को पल-भर में दूर, जानें कैसे!!


गिलोय के बारे में तो आप जानते ही होंगे। यह कई गुणकारी तत्वों को अपने अन्दर समेटे हुए है। यह दिखने में पान के पत्ते जैसा लगता है। हालांकि इसका पान से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अन्दर कैल्शियम, फास्फोरस, प्रोटीन और स्टार्च काफी मात्रा में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही गिलोय आपके शरीर में खून की कमी को भी पूरा करने में काफी मददगार होता है। इसके अलावा गिलोय कई अन्य शारीरिक परेशानियों को दूर करके आपको निरोग बनाता है।

जलन
शरीर के किसी भी हिस्से की जलन को कम करने में गिलोय काफी सहायक होता है। शरीर के किसी भी हिस्से में जलन होने पर आप बेफिक्र होकर गिलोय का सेवन कर सकते हैं। इसका काढ़ा बनाकर आप दिन में 2 या 3 बार पीएं, कुछ ही दिनों में जलन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

पीलिया
पीलिया में गिलोय रामबाण इलाज है। पीलिया होने पर गिलोय के पत्ते लेकर उसे अच्छी तरह से पीस लें और उसका रस निकाल लें। गिलोय का रस निकालने के बाद एक गिलास मट्ठे के साथ इसे मिलाकर इसका सेवन करें।

मोटापा कम करने में
मोटापा कम करने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल होता है। अगर आपको भी मोटापे की समस्या है तो आप गिलोय और त्रिफला चूर्ण को शहद के साथ हर रोज सुबह-शाम ले सकते हैं।

खुजली
बहुत लोगों को खुजली की समस्या होती है। ऐसे में गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। गिलोय खुजली दूर करने में काफी सहायक होता है। गिलोय के पत्ते लेकर उसे हल्दी के साथ मिलाकर पीस लें और खुजली वाली जगह पर लगाइए। खुजली होने पर आप हर रोज सुबह-शाम गिलोय के रस को शहद के साथ भी ले सकते हैं।

कान दर्द
कान के दर्द को ठीक करने में भी गिलोय काफी मददगार होता है। जब भी आपके कान में दर्द हो तो आप गिलोय के पत्ते से रस निकालकर इसे हल्का गुनगुना कर लें। गुनगुना हो जाने के बाद आप गिलोय के रस को कान में डालें। कुछ ही समय में आपको कान के दर्द से आराम मिलेगा।

शनिवार, 15 जुलाई 2017

परवल खाने के है अनेको स्वास्थ से जुड़े फायदे

परवल खाने के है अनेको स्वास्थ से जुड़े फायदे


हरी सब्जि‍यों में मशहूर परवल, भोजन में कई लोग पसंद के साथ खाते है और कई लोग इसको खाना बिल्कुल पसंद नहीं करते। अतः जो लोग इसको खाना नहीं चाहते उनको इससे होने वाले स्वास्थ लाभ के बारे में नहीं पता होता है। परवल पौष्टिक सब्ज‍ियों में से एक है। इसमें बहुत प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

आइये जानते है कि यह सब्जी हमारी सेहत को किस प्रकार फायदा पहुँचाती है :

परवल में विटामिन-A, विटामिन-B1, विटामिन B2 और विटामिन-C के अतिरिक्त कैल्शियम उचित मात्रा में उपस्थित होता है, जो कि हमारे शरीर में कैलोरी की मात्रा को कम करके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है। परवल पचाने में बहुत ही आसान होता है। इसमें पाया जाने वाला फाइबर, लीवर और पेट के स्‍वास्‍थ्‍य के लिये बहुत लाभकारी होता है।
  • परवल के बीज कोलेस्‍ट्रॉल और ब्‍लड शुगर लेवल को कम करने में मददगार होते हैं।
  • आयुर्वेद के अनुसार परवल की सब्जी खाने से आपके शरीर में खून की सफाई होती है। जिससे हमारा चेहरा कांतिमान बनता है ।
  • परवल के बीजों या उसकी पत्त‍ियों को पीस कर इसका पेस्ट सिरदर्द या शरीर के किसी भाग में होने वाले दर्द पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।
  • परवल में उचित मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते है, जो बढ़ती उम्र के निशानों जैसे झाइयो, झुर्रियों और बारीक रेखाओं को कम करके त्वचा में कसाव लाकर सुंदरता प्रदान करता हैं।
  • परवल खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं साथ ही इसका सेवन पीलिया जैसी बीमारी में भी बहुत लाभकारी होता है।
  • परवल हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे हमको बीमा‍रियों से लड़ने में मदद मिलती है। इसके सेवन से बुखार, खांसी, सर्दी, त्वचा के संक्रमण और घावों के उपचार करने में लाभ होता है।
  • यदि आप पेट में होने वाले सूजन से परेशान है तो नियमित रूप से एक महीने तक परवल कि सब्जी को अपने भोजन में शामिल करें इससे पेट के सूजन और पेट में पानी भरने की गंभीर समस्या में लाभ होगा।
  • परवल के पत्तों को पीस कर इसका लेप फोड़े और फुंसी पर लगाने से इन समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

बुधवार, 5 जुलाई 2017

जामुन की मात्र 1 गुठली खाने से होते है ये 101 चमत्कारी फायदे

जामुन की मात्र 1 गुठली खाने से होते है ये 101 चमत्कारी फायदे


यह खट्टा, रुचिकर, शीतल व वायु का नाश करने वाला होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है। जामुन में लौह और फास्फोरस काफी मात्रा में होता है। जामुन में कोलीन तथा फोलिक एसिड भी होता है। जामुन के बीच में ग्लुकोसाइड, जम्बोलिन, फेनोलयुक्त पदार्थ, पीलापल लिए सुगन्धित तेल काफी मात्रा में उपलब्ध होता है। जामुन मधुमेह (डायबिटीज), पथरी, लीवर, तिल्ली और खून की गंदगी को दूर करता है। यह मूत्राशय में जमी पथरी को निकालता है। जामुन और उसके बीज पाचक और स्तम्भक होते हैं। आइये जानते है जामुन से होने वाले 101 फायदों के बारे में।

जामुन के अद्भुत फायदे :


मधुमेह के रोग : जामुन की सूखी गुठलियों को 5-6 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ दिन में दो या तीन बार सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है। 30 ग्राम जामुन की नई कोपलें (पत्तियां) और 5 काली मिर्च, पानी के साथ पीसकर सुबह-शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है।
जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
जामुन की गुठली का चूर्ण और सूखे करेले का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। 3 ग्राम चूर्ण रोजाना सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह के रोग में फायदा होता है।
जामुन की भीतरी छाल को जलाकर भस्म (राख) बनाकर रख लें। इसे रोजाना 2 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा कम होता है। 10-10 ग्राम जामुन का रस दिन में तीन बार लेने से मधुमेह मिट जाता है।
12 ग्राम जामुन की गुठली और 1 ग्राम अफीम को पानी के साथ मिलाकर 32 गोलियां बना लें। फिर इसे छाया में सुखाकर बोतल में भर लें। 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ खायें। खाने में जौ की रोटी और हरी सब्जी खाएं। चीनी बिल्कुल न खायें। इससे मधुमेह में लाभ होता है।
60 ग्राम जामुन की गुठली की गिरी पीस लें। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह-शाम सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है।
8-10 जामुन के फलों को 1 कप पानी में उबालें। फिर पानी को ठण्डा करके उसमें जामुन को मथ लें। इस पानी को सुबह-शाम पीयें। यह मूत्र में शूगर को कम करता है।
1 चम्मच जामुन का रस और 1 चम्मच पके आम का रस मिलाकर रोजाना सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है। जामुन के 4-5 पत्तों को सुबह के समय थोडे़-से सेंधा नमक के साथ चबाकर खाने से कुछ दिनों में ही मधुमेह का रोग मिट जाता है।
जामुन के 4 हरे और नर्म पत्ते खूब बारीक कर 60 मिलीलीटर पानी में मिलाकर छान लें। इसे सुबह के समय 10 दिनों तक लगातार पीयें। इसके बाद इसे हर दो महीने बाद 10 दिन तक लें। जामुन के पत्तों का यह रस मूत्र में शक्कर जाने की परेशानी से बचाता है। मधुमेह रोग के शुरुआत में ही जामुन के 4-4 पत्ते सुबह-शाम चबाकर खाने से तीसरे ही दिन मधुमेह में लाभ होगा।
60 ग्राम अच्छे पके जामुन को लेकर 300 मिलीलीटर उबले पानी में डाल दें। आधा घंटे बाद मसलकर छान लें। इसके तीन भाग करके एक-एक मात्रा दिन में तीन बार पीने से मधुमेह के रोगी के मूत्र में शर्करा आना बहुत कम हो जाता है, नियमानुसार जामुन के फलों के मौसम में कुछ समय तक सेवन करने से रोगी सही हो जाता है।
जामुन की गुठली को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रोजाना सुबह-शाम 3 ग्राम ताजे पानी के साथ लेते रहने से मधुमेह दूर होता है और मूत्र घटता है। इसे करीब 21 दिनों तक लेने से लाभ होगा।
जामुन की गुठली और करेले को सुखाकर समान मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ फंकी लें। इससे मधुमेह मिट जायेगा। 125 ग्राम जामुन रोजाना खाने से शुगर नियन्त्रित हो जाता है।

पेट में दर्द : जामुन का रस 10 मिलीलीटर, सिरके का रस 50 मिलीलीटर पानी में घोलकर पीने से पेट की पीड़ा में लाभ होता है। जामुन के रस में सेंधानमक खाने से पेट का दर्द, दस्त लगना, अग्निमान्द्य (भूख का न लगना) आदि बीमारियों में लाभ होता है। पके हुए जामुन के रस में थोड़ा-सी मात्रा में काला नमक मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। जामुन में सेंधा नमक मिलाकर खाने से भी पेट की पीड़ा से राहत मिलती है। पेट की बीमारियों में जामुन खाना लाभदायक है। इसमें दस्त बांधने की खास शक्ति है।

योनि का संकोचन : जामुन की जड़ की छाल, लोध्र और धाय के फूल को बराबर मात्रा में लेकर शहद में मिलाकर योनि की मालिश करने से यो*नि संकुचित हो जाती है।

बिस्तर पर पेशाब करना : जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस 2-2 ग्राम चूर्ण को दिन में 2 बार पानी के साथ खाने से बच्चे बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते हैं।

त्वचा के रोग : जामुन के बीजों को पानी में घिसकर लगाने से चेहरे के मुंहासे मिट जाते हैं।

पीलिया का रोग : जामुन के रस में जितना सम्भव हो, उतना सेंधानमक डालकर एक मजबूत कार्क की शीशी में भरकर 40 दिन तक रखा रहने दें। इसके बाद आधा चम्मच पियें। इससे पीलिया में लाभ होगा।

फोड़े-फुंसियां : जामुन की गुठलियों को पीसकर फुंसियों पर लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाती हैं।

बच्चों का अतिसार और रक्तातिसार : आम्रातक, जामुन फल और आम के गूदे के चूर्ण को बराबर मात्रा में शहद के दिन में 3 बार लेना चाहिए। बच्चों का अतिसार (दस्त) में जामुन की छाल का रस 10 से 20 ग्राम सुबह और शाम बकरी के दूध के साथ देने से लाभ होता है।

बच्चों की हिचकी : जामुन, तेन्दू के फल और फूल को पीसकर घी और शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की हिचकी बंद हो जाती है। नोट : जहां घी और शहद एक साथ लेने हो, वहां इनको बराबर मात्रा में न लेकर एक की मात्रा कम और एक की ज्यादा होनी चाहिए।

गले की आवाज बैठना : जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना लें। रोजाना 4 बार 2-2 गोलियां चूसें। इससे बैठा हुआ गला खुल जाता है। भारी आवाज भी ठीक हो जाती है और ज्यादा दिन तक सेवन करने से बिगड़ी हुई आवाज भी ठीक हो जाती है जो लोग गाना गाते हैं उनके लिये यह बहुत ही उपयोगी है।
जामुन की गुठलियों को बिल्कुल बारीक पीसकर शहद के साथ खाने से गला खुल जाता है और आवाज का भारीपन भी दूर होता है।

गले की सूजन : जामुन की गुठलियों को सुखाकर बारीक-बारीक पीस लें। फिर इसमें से दो चुटकी चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें। इससे गले की सूजन नष्ट हो जाती है। पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है। जामुन के बीज सुखाकर पीस लें। इस पाउडर को खाने से मधुमेह में काफी फायदा होता है। मधुमेह के अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाव में कारगर होते हैं। इसके अलावा पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है। इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेना चाहिए।

अगर किसी को दस्त हो रहे जामुन को सेंधा नमक के साथ खाना फायदेमंद रहता है। खूनी दस्त होने पर भी जामुन के बीज बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेषतौर पर फायदेमंद होता है। इसके बीज को पीस लीजिए। इससे मंजन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

रक्तातिसार : जामुन के पेड़ की छाल को दूध में पीसकर शहद के साथ पीना चाहिए या जामुन के पत्तों के रस में शहद, घी और दूध मिलाकर लेना चाहिए। जामुन का रस गुलाब के रस में मिलाकर दिन में 2-3 बार पिलायें। इससे जल्द लाभ नज़र आयेगा।

गर्मी की फुंसियां : जामुन की गुठली को घिसकर लगाना चाहिए।

बिच्छू के दंश पर : जामुन के पत्तों का रस लगाना चाहिए। इससे बिच्छू का दंश ठीक हो जाता है।

पित्त पर : 10 मिलीलीटर जामुन के रस में 10 ग्राम गुड़ मिलाकर आग पर तपायें। तपाकर उसके भाप को पीना चाहिए।

गर्भवती स्त्री का दस्त : ऐसे समय में जामुन खिलाना चाहिए या जामुन की छाल के काढ़े में धान और जौ का 10-10 ग्राम आटा डालकर चटाना चाहिए।

मुंह के रोग : जामुन, बबूल, बेर और मौलसिरी में से किसी भी पेड़ की छाल का ठण्डा पानी निकालकर कुल्ला करना चाहिए और इसकी दातून से रोज दांतों को साफ करना चाहिए इससे दांत मजबूत होते हैं और मुंह के रोग भी ठीक हो जाते हैं। जामुन की गुठली को 1 ग्राम चूरन के पानी के साथ लेना चाहिए। चार-चार घंटे के बाद यह औषधि लेनी चाहिए। लगभग 3 दिन के बाद इसका असर दिखाई देने लगेगा।

वमन (उल्टी) : जामुन के पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को शहद के साथ खिलाने से खट्टी उल्टी आना बंद हो जाती है।

विसूचिका (हैजा) : हैजा से पीड़ित रोगी को 5 ग्राम जामुन के सिरके में चौगुना पानी डालकर 1-1 घण्टे के अन्तर से देना चाहिए। पेट के दर्द में भी सुबह-शाम इस सिरके का उपयोग करना चाहिए।

मुंहासे : जामुन की गुठली घिसकर लगाना चाहिए। इससे मुंहासे नष्ट हो जाते हैं। 

पसीना ज्यादा आना : जामुन के पत्तों को पानी में उबालकर नहाने से पसीना अधिक आना बंद हो जायेगा।

जलना : जामुन की छाल को नारियल के तेल में पीसकर जले हिस्से पर 2-3 बार लगाने से लाभ मिलता है।

पैरों के छाले : टाईट, नया जूता पहनने या ज्यादा चलने से पैरों में छाले और घाव बन जाते हैं। ऐसे में जामुन की गुठली पानी में घिसकर 2-3 बार बराबर लगायें। इससे पैरों के छाले मिट जाते हैं।

स्वप्नदोष : 4 जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष ठीक हो जाता है।

वीर्य का पतलापन : वीर्य का पतलापन हो, जरा सी उत्तेजना से ही वीर्य निकल जाता हो तो ऐसे में 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण रोज शाम को गर्म दूध से लें। इससे वी*र्य का पतलापन दूर हो जाता है तथा वी*र्य भी बढ़ जाता है।

पेशाब का बार-बार आना : 15 ग्राम जामुन की गुठली को पीसकर 1-1 ग्राम पानी से सुबह और शाम पानी से लेने से बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना) के रोग में लाभ होता है।

नपुंसकता : जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से न*पुंसकता दूर होती है।

दांतों का दर्द : जामुन, मौलश्री अथवा कचनार की लकड़ी को जलाकर उसके कोयले को बारीक पीसकर मंजन बना लें। इसे प्रतिदिन दांतों व मसूढ़ों पर मालिश करने से मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है।

बुखार : जामुन को सिरके में भिगोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से पित्ती शांत हो जाती है।

दांत मजबूत करना : जामुन की छाल को पानी में डालकर उबाल लें तथा छानकर उसके पानी से रोजाना सुबह-शाम कुल्ला करें। इससे दांत मजबूत होते हैं।

पायरिया : जामुन के पेड़ की छाल को आग में जलाकर तथा उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक व फिटकरी मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इससे रोजाना मंजन करने से पायरिया रोग ठीक होता है।

कांच निकलना (गुदाभ्रंश) : जामुन, पीपल, बड़ और बहेड़ा 20-20 ग्राम की मात्रा में लेकर 500 ग्राम जल में मिलाकर उबाल लें। रोजाना शौच के बाद मलद्वार को स्वच्छ (साफ) कर बनाये हुए काढ़ा को छानकर मलद्वार को धोएं। इससे गुदाभ्रंश ठीक होता है।

मुंह के छाले : मुंह में घाव, छाले आदि होने पर जामुन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से लाभ होता है।जामुन के पत्ते 50 ग्राम को जल के साथ पीसकर 300 मिलीलीटर जल में मिला लें। फिर इसके पानी को छानकर कुल्ला करें। इससे छाले नष्ट होते हैं।

दस्त : जामुन की गिरी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी बने चूर्ण को छाछ के साथ मिलाकर प्रयोग करने से टट्टी का लगातार आना बंद हो जाता है। जामुन के ताजे रस को बकरी के दूध के साथ इस्तेमाल करने से दस्त में आराम मिलता है। जामुन की गिरी (गुठली) और आम की गुठली को पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे भुनी हुई हरड़ के साथ सेवन करने से दस्त में काफी लाभ मिलता है।
जामुन का सिरका 40 ग्राम से लेकर 80 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।
जामुन का शर्बत बनाकर पीने से दस्त का आना समाप्त हो जाता हैं।
जामुन के रस में कालानमक और थोड़ी-सी चीनी को मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
जामुन को पीसने के बाद प्राप्त हुए रस को 2 चम्मच की मात्रा में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर पीने से दस्त का आना बंद हो जाता है।
जामुन की गुठलियों को पीसकर चूर्ण बनाकर चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से दस्त का आना बंद हो जाता है।
जामुन की 4 पत्तियां को पीसकर उसमें सेंधानमक मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।
जामुन के 3 पत्तियों को सेंधानमक के साथ पीसकर छोटी-छोटी सी गोलियां बना लें। इसे 1-1 गोली के रूप में रोजाना सुबह सेवन करने से लूज मोशन (दस्त) का आना ठीक हो जाता हैं।
जामुन के पेड़ की छाल का काढ़ा शहद के साथ पीने से दस्त और पेचिश दूर हो जाती है।

गर्भवती की उल्टी : जामुन और आम की छाल को बराबर की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से पित्त के कारण होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।

कान का दर्द : कान में दर्द होने पर जामुन का तेल डालने से लाभ होता है।

कान का बहना : जामुन और आम के मुलायम हरे पत्तों के रस में शहद मिलाकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद बहना बंद हो जाता है।

कान के कीड़े : जामुन और कैथ के ताजे पत्तों और कपास के ताजे फलों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर निचोड़ कर इसका रस निकाल लें। इस रस में इतना ही शहद मिलाकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना और कान का दर्द ठीक हो जाता है।

मूत्ररोग : पकी हुई जामुन खाने से मूत्र की पथरी में लाभ होता है। इसकी गुठली को चूर्णकर दही के साथ खाना भी इस बीमारी में लाभदायक है। इसकी गुठली का चूर्ण 1-2 चम्मच ठण्डे पानी के साथ रोज खाने से पेशाब के धातु आना बंद हो जाता है।

बवासीर (अर्श) : जामुन की गुठली और आम की गुठली के भीतर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ पीने से बवसीर ठीक होती है तथा बवासीर में खून का गिरना बंद हो जाता है। जामुन के पेड़ की छाल का रस निकालकर उसके 10 ग्राम रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से अर्श (बवासीर) रोग ठीक होता है तथा खून साफ होता है।

जामुन के पेड़ की जड़ की छाल का रस 2 चम्मच और छोटी मधुमक्खी का शहद 2 चम्मच मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से खूनी बवासीर में खून का गिरना रुक जाता है। जामुन की कोमल पत्तियों का 20 ग्राम रस निकालकर उसमें थोड़ा बूरा मिलाकर पीयें। इससे खूनी बवासीर ठीक होती है।

खूनी अतिसार : जामुन के पत्तों के रस का सेवन करने से रक्तातिसार के रोगी को लाभ मिलता है।
20 ग्राम जामुन की गुठली को पानी में पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से खूनी दस्त (रक्तातिसार) के रोगी का रोग मिट जाता है

आंव रक्त (पेचिश होने पर) : 10 ग्राम जामुन के रस को प्रतिदिन तीन बार सेवन करने से पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

प्रदर रोग : जामुन की ताजी छाल को छाया में सुखाकर कूट-पीस छान लें। इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में दूध या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर में आराम मिलता है।
जामुन के पत्ते का रस 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर नष्ट होता है। इसके बीजों का चूर्ण मधुमेह में लाभकारी होता है।
छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूरन 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लेने से कुछ दिनों में ही श्वेतप्रदर का रोग नष्ट हो जाता है।

अपच : जामुन का सिरका 1 चम्मच को पानी में मिलाकर पीने से अपच में लाभ होता है।

जिगर का रोग : जामुन के पत्तों का रस (अर्क) निकालकर 5 ग्राम की मात्रा में 4-5 दिन सेवन करने से यकृत वृद्धि मिट जाती है। 200-300 ग्राम बढ़िया पके जामुन रोजाना खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर होती है।

घाव : जामुन की छाल के काढ़े से घाव को धोना फायदेमंद माना गया है।

पथरी : जामुन की गुठलियों को सुखा लें तथा पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम लें। इससे गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है। पका हुआ जामुन खाने से पथरी रोग में आराम होता है। गुठली का चूर्ण दही के साथ खाएं। इससे पथरी नष्ट हो जाती है। रोज जामुन खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे खत्म होती है।

अम्लपित्त : जामुन के 1 चम्मच रस को थोड़े-से गुड़ के साथ लेने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

यकृत का बढ़ना : 5 ग्राम की मात्रा में जामुन के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसको कुछ दिनों तक पीते रहने से यकृत वृद्धि से छुटकारा मिलता है। आधा चम्मच जामुन का सिरका पानी में घोलकर देने से यकृत वृद्धि से आराम मिलता है।

प्यास अधिक लगना : जामुन के पत्तों का रस निकालकर 7 से 14 मिलीलीटर पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है। जामुन के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार पीने से बुखार में प्यास का लगना कम हो जाता है। जामुन का मीठा गूदा खाने से या उसका रस पीने से अधिक आराम मिलता है।

जामुन के हानिकारक प्रभाव :

जामुन का अधिक मात्रा में सेवन करने से गैस, बुखार, सीने का दर्द, कफवृद्धि व इससे उत्पन्न रोग, वात विकारों के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इसके रस को दूध के साथ सेवन न करें।

जामुन खाने का उचित तरीका :

जामुन को हमेशा खाना खाने के बाद ही खाना चाहिए। जामुन खाने के तुरन्त बाद दूध नहीं खाना चाहिए।

जामुन खाने के दोषों को दूर करने का तरीका :

कालानमक, कालीमिर्च औरसोंठ का चूर्ण छिड़ककर खाने से उसके सारे दोषों दूर हो जाते हैं। साथ ही आम खाने से वह शीघ्र पच जाता है।

शनिवार, 13 मई 2017

घोड़े जैसा मजबूत बनाता है चना, कई बीमारियों का रामबाण इलाज

घोड़े जैसा मजबूत बनाता है चना, कई बीमारियों का रामबाण इलाज


हम अपने दादा- परदादा से यही से सुनते आ रहे हैं कि जो खाए चना वो रहे बना। चना सदियों से मेहनकश की खुराक का अहम हिस्‍सा रहा है। चने में प्रोटीन,फाइबर, विटामिन, आयरन और कैल्शियम अच्छी खासी मात्रा में होते हैं। आयुर्वेद में भी चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है।
चने के सेवन से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स आदि पाये जाते हैं। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हें अंकुरित करके खाने से होते है।

हाजमा दुरुस्त करता है
चने को दस्तावर कहा जाता है। कब्ज के शिकार लोगों के लिए यह अच्छी चीज है। इसमें ढेर सारा फाइबर होता है जो आपको पेट साफ करने में मदद करता है। फाइबर आपकी आंतों की सफाई का काम करता है। चने में कई तरह के मिनरल्स और विटामिन होते हैं। सौ ग्राम काले चने में करीब 20 ग्राम फाइबर होता है। यह आपकी रोज की जरूरत का 80 फीसदी है। पेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी कुछ हद तक आप चने पर छोड़ सकते हैं।

ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर रखता है
डायबिटीज के मरीजों को चना अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसकी एक वजह यह है कि यह काफी धीमी रफ्तार से ग्लूकोज को बॉडी में रिलीज करता है। इससे अचानक बॉडी का शुगर लेवल नहीं बढ़ता।

वजन कम करने में मददगार
चना दो तरह से वेट कम करने में मदद करता है। एक तो उसमें फाइबर खूब होता है और दूसरा उसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस करता है। जो लोग वेट कम करने की कोशिश कर रहे हैं वो अपनी डाइट में कच्‍चे, भुने या अंकुरित चने जरूर शामिल करें।

एनीमिया से बचाता है
काला चना आयरन का सबसे सस्ता स्रोत है। 100 ग्राम में करीब 3 एमजी आयरन होता है। यह आपकी रोज की जरूरत का करीब 20 फीसदी है। यही नहीं चने में पोटेशियम,मैगनीशियम और कैल्शियम की भी अच्छी मात्रा होती है।

कसरत करने वालों के लिये फायदेमंद
चना शाकाहारी प्रोटीन और कैलोरी का सस्ता और उम्दा स्रोत है। 100 ग्राम चने में करीब 15 ग्राम प्रोटीन और करीब 347 कैलोरी होती है। कसरत करने वालों को ताकत के लिए कैलोरी और बदन में हुई टूट फूट की मरम्‍मत और मसल्‍स के लिए प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है।

भिगोए कच्चे चने फायदेमंद
चने को पचाना आसान नहीं होता। अगर भिगोए हुए कच्चे चने खा रहे हैं तो उसे खूब चबाकर खाएं। ये मानकर चलें कि उसे जितना आपने अपने दांतों से पीस दिया, वही हजम होगा। वैसे उबाल कर खाएंगे तो उसे पचाना जरा आसान हो जाएगा। उबालते वक्त ध्यान रखें कि उसमें उतना ही पानी डालें, जिसमें वो उबल जाए और पानी फेंकना न पड़े। जिस कटोरे में चने उबालें उसमें इतना पानी डालें कि चने का सिर हल्का-हल्का पानी के ऊपर दिखता रहे। एक दो बार पकाने पर आपको बिल्कुल सही अंदाजा हो जाएगा।

पेट दर्द से राहत
रातभर भीगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है। चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मियों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है। शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।

पथरी की समस्या में चना
पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लेडर और किडनी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। ऐसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करने से आपको आराम हो सकता है। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।

शरीर की गंदगी साफ करना
काला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज,एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए
चना ताकतवर होता है। यह शरीर में ज्यादा मात्रा में ग्लूकोज को कम करता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। इसलिए अंकुरित चनों को सेवन डायबिटीज के रोगियों को सुबह-सुबह करना चाहिए।

मूत्र संबंधी रोग
मूत्र से संबंधित किसी भी रोग में भुने हुए चनों का सेवन करना चाहिए। इससे बार-बार पेशाब आने की दिक्कत दूर होती है। भुने हुए चनों में गुड़ मिलाकर खाने से यूरीन की किसी भी तरह समस्या में राहत मिलती है।

पुरूषों की कमजोरी दूर करना
अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। ऐसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है और नपुंसकता दूर होती है।

पीलिया के रोग में
पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा।

चेहरे की चमक के लिए चना
चेहरे की रंगत को बढ़ाने के लिए नियमित अंकुरित चनों का सेवन करना चाहिए। साथ ही आप चने का फेस पैक भी घर पर बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। चने के आटे में हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम होती है। महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड जरूर खाना चाहिए। नियमित रूप से यदि आप अंकुरित चनों का सेवन करते हो तो आप के उपर बुढ़ापा भी बहुत देर में आता है। त्वचा की समस्या में चने के आटे का नियमित रूप से सेवन करने से थोड़े ही दिनों में खाज, खुजली और दाद जैसी त्वचा से संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं।

धातु पुष्ट होती है
दस ग्राम शक्कर और दस ग्राम चने की भीगी हुई दाल को मिलाकर कम से कम एक महीने तक खाने से धातु पुष्ट होती है।

शुक्रवार, 12 मई 2017

प्याज के इतने गुण जानकर अाप राेज खाने लगेंगे इसे

प्याज के इतने गुण जानकर अाप राेज खाने लगेंगे इसे


प्याज का प्रयोग लगभग प्रत्येक भारतीय रसोई में कच्चे एवं पक्के दोनों रूप में किया जाता है। इसका लैटिन नाम ऐलियम सिफा है। यह जमीन के अंदर उगती है। इसकी ऊपरी शक्ल गहरे कत्थई, लाल तथा सफेद रंगों में होती है। प्याज की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है। रसोई में इसकी पैठ मध्य तथा उत्तर भारत में बहुतायत से है। इसे गरीबों की कस्तूरी कहा जाता है। इसका उत्पादन गर्मी में ज्यादा होता है। यही कारण है कि गर्मी में लगने वाली लू का इलाज भी यही प्याज है। 

प्याज में विटामिन सी, लोहा, गंधक, तांबे जैसे बहुमूल्य खनिज पाए जाते हैं, जिनसे शारीरिक शक्ति बढ़ती है। खाने के साथ कच्चे प्याज का सेवन लाभदायक होता है। जहां पर इसका उपयोग शाकाहार अथवा मांसाहार व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है, वहीं पर प्याज के कई औषधीय फायदे भी हैं-
  • प्याज का रस कनपटियों और छाती पर मलने से लू नहीं लगती। खाने के साथ कच्चे प्याज का सेवन लाभदायक होता है।
  • कान में दर्द अथवा मवाद बहने की शिकायत होने पर प्याज के रस की (5-6 बूंदें) हल्का गर्म करके कान में डालने से आराम मिलता है।
  • गाय के ताजे दही के साथ कच्चा प्याज काटकर खाने से खून के दस्त में आराम मिलता है। प्याज का रस नाभि पर लेप करने से दस्त बंद हो जाते हैं।
  • आधा कप सफेद प्याज के रस में गुड़ और पिसी हल्दी मिलाकर प्रात: व शाम को पीने से पीलिया में लाभ होता है। छोटे प्याज को छीलकर चौकोर काटकर सिरके या नींबू के रस में भिगो दें, ऊपर से नमक व काली मिर्च डाल दें। पीलिया का यह शर्तिया इलाज है।
  • प्याज से हृदय-धमनियों में रुधिर के थक्के नहीं बनते और इस प्रकार हृदय संभावित क्षतियों से बचा रहता है।
  • यदि किसी कुत्ते ने काट लिया हो, तो कटे हुए स्थान पर प्याज को पीसकर शहद के साथ मिलाकर लगाने से विष का प्रभाव जाता रहता है। सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया के रोगी को लाभ पहुंचता है। प्याज को कूटकर सूंघने से खांसी, सांस-गले के रोग, टॉन्सिल व फेफड़े के कष्ट दूर होते हैं। प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से दमा और खांसी में आश्चर्यजनक सुधार होता है।
  • प्याज का रस नाक व गले के संक्रमण को दूर करता है।
  • यह जुकाम की सर्वोत्तम औषधि है। कच्चा प्याज खाने से जुकाम का पानी नाक से बहना बंद हो जाता है। दांत या मसूड़ों में दर्द होने पर कच्चे प्याज का टुकड़ा उस जगह पर रख देने से दर्द कम हो जाता है। प्याज में अदरक का रस मिलाकर देने से उल्टी बंद हो जाती है।

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

हृदय रोग और कैंसर जैसी बिमारियों में भी फायदेमंद है गाजर का जूस

हृदय रोग और कैंसर जैसी बिमारियों में भी फायदेमंद है गाजर का जूस



विटामिन A, विटामिन C, B6, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और सोडियम का मेल गाजर हमारी सेहत के लिहाज से एक बहुत लाभकारी आहार है। गाजर को जिस चीज के लिए सबसे फायदेमंद माना जाता है, वह है आँखों के लिए। अक्सर सुना जाता है कि गाजर खाओ, या  गाजर का जूस पियो आँखों की रौशनी बढ़ेगी। यह महज एक कहने भर की बात नहीं है। बल्कि गाजर में विटामिन A इतनी मात्रा में मौजूद होता है कि महज गाजर के जूस के द्वारा पर्याप्त मात्रा में विटामिन A, प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, गाजर में मौजूद पोषक तत्व अलग-अलग बीमारियों पर अलग-अलग तरह से काम करते हैं। चलिए जानते हैं गाजर हमारे लिए कैसे फायदेमंद है।

गाज़र के जूस के फ़ायदे-

  • हमारे शरीर को रोगों से बचे रहने के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा आवश्यक्ता होती है वह है इम्मयूनिटी (रोग प्रति रोधक क्षमता) और गाजर इम्मयूनिटी बढ़ाने के लिए सही आहार है। यदि आपको आए दिन सर्दी-जुकाम या अन्य संक्रमण या एलर्जी जैसी समस्या रहती है तो इसका मतलब है कि आपकी रोग प्रति रोधक क्षमता खराब है और गाजर का जूस आपकी बहुत हद तक मदद कर सकता है।
  • गाजर में मौजूद विटामिन ए आँखों की ज्योति के लिए बहुत अच्छा है। जिन व्यक्तियों को लगता है कि उनकी नजरें कमजोर हो रहीं हैं, उन्हें गाजर का जूस पीना शुरू कर देना चाहिए। इससे यदि आँखों का तौर कम हो रहा होगा तो वह वहीँ रुक जाएगा। साथ ही रोजाना जूस पीते रहने से रौशनी भी बढ़ जाएगी।
  • जिन लोगों को चोट लगने पर खून न थमने की समस्या (हिमोफिलिया) होती है, गाजर उनके लिए भी बेहतर है। ऐसा इसलिए क्योंकि गाजर में विटामिन K भी होता है और विटामिन K रक्त के थक्के जमने में फायदेमंद  होता है।
  • गाजर का जूस, लिवर (जिगर) की सफाई के लिए भी एक बेहतर चुनाव है। यह लिवर से सभी हानिकारक तत्वों को बहार निकाल कर उसे और बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।
  • अध्ययनों में पाया गया है कि कैरोटीनॉयड कैंसर से लड़ने में फायदेमंद है और गाजर में भी यह तत्व पाया जाता है। यानी गाजर कैंसर को रोकने में भी फायदेमंद है। गाजर, कोलोन, ब्रैस्ट और प्रोस्टेट कैंसर में फायदेमंद मानी जाती है।
  • गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन हृदय रोगों और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में सहायक है। यह ब्लड प्रैशर को भी कम करती है।
  • गाजर में पाया जाने वाला पोटेशियम हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है।
  • गाजर का जूस पीने से जहाँ शरीर में लगी चोट से होने वाला रक्तस्त्राव जल्दी रुक जाता है, वहीं दूसरी और घाव भी जल्दी भारत है।  
  • गाजर पीलिया के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है।
  • कॉलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए भी गाजर फायदेमंद होती है। दिन में कम से कम एक बार खाने के आधे से एक घंटे के बाद गाजर के जूस का सेवन करें।

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

घरेलू उपचार अपनाने से पहले एक बार ये भी जान लीजिये !

घरेलू उपचार अपनाने से पहले एक बार ये भी जान लीजिये !

कई बार हम स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्‍याओं के लिए घरेलू उपायों की मदद लेते हैं और ये हमें इन समस्‍याओं से छुटकारा भी दिला देते हैं. लेकिन क्‍या हर बार ऐसा करना सही होता है. शायद नहीं क्‍योंकि अगर इनके उपयोग में जरा सी भी असावधानी बरती तो ये हमारे लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. आइए जानें ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्‍खों के बारे में जिनका इस्‍तेमाल हमारे लिए घातक भी हो सकता है…



1. मुंहासों पर टूथपेस्ट का इस्‍तेमाल: टूथपेस्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं और अगर मुंहासों पर इसे लगाया जाए तो ये बैक्टीरिया को बढ़ा सकते हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें.

2. पीलिया की बीमारी में चूने का पानी: पीलिया की बीमारी ठीक करने के लिए कई लोग घरेलू उपचार का सहारा लेते हैं और उसके लिए मरीज को चूने का पानी पिलाया जाता है. ऐसा करने से बचें क्‍योंकि इसमें मौजूद केमिकल्स पीलिया ठीक नहीं करते बल्कि स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं को और बढ़ा देते हैं.

3. मस्सा हटाने के नुस्‍खे: चेहरे और शरीर के अन्‍य हिस्‍सों में अगर मस्‍सा हो जाए तो उसे धागे, पतले तार या ब्लेड से काटकर हटाने से बचें. ऐसा करने से धागे और तार में मौजूद बैक्टीरिया स्किन के अंदर पहुंचकर इंफेक्शन पैदा करते हैं.

4. जले पर मक्खन लगाना: बहुत से लोग जलने पर मक्खन लगा लेते हैं. अगर आप भी ऐसा ही कुछ उपाय करते हैं तो जान लें कि स्किन बहुत सेंसिटिव होती है और मक्खन लगाने से घाव में मौजूद बैक्टीरिया आसपास भी फैल सकते हैं.

5. घाव पर कपड़ा बांधना: कई बार चोट लगने पर लोग उसे कपड़े से बांध देते हैं जबकि ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से चोट में हवा नहीं लग पाती और बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. इससे घाव ठीक होने में ज्यादा समय लगता है.

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

एलोवेरा के फायदे जो आपको नहीं होंगे पता, जरुर शेयर करें

एलोवेरा के फायदे जो आपको नहीं होंगे पता, जरुर शेयर करें


एलोवेरा का इस्तेमाल एक औषधि की तरह किया जा रहा है। एलोवेरा में काफी मात्रा में विटामिन C, A, E, और फ़ॉलिक एसिड मौजूद होता है। जो हर तरह से हमारी बॉडी के लिए काफी स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। अभी तक हमने एलोवेरा से होने वाले सुंदरता संबंधी फायदों के बारे में जाना, आइये अब हम इससे होने वाले स्वास्थ्य सम्बंधी फायदों की ओर नजर डालते हैं।

अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें 

एलोवेरा  में पाये जाने वाले पॉलीसेकेराइड्स, मैक्रोफेजेस या वाइट ब्लड सेल्स, जो कि हमारी बॉडी की बाहरी इन्फेक्शन से रक्षा करते हैं; के बढ़ने को बढ़ावा देते हैं। साथ ही इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडैंट्स इसे एक अच्छी क्वालिटी का इम्युनिटी बूस्टर बनाते हैं। इसलिए इसका नियमित सेवन आपकी छोटे-मोटे संक्रमण, हल्का बुखार इत्यादि से रक्षा करता है।

डायबिटीज के रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को कम करे 

डायबिटीज के रोगियों के लिए तो एलोवेरा एक वरदान की तरह साबित हुआ है। ये इंसुलिन के बनने को कम करता है। एक स्टडी के अनुसार टाइप 2 डायबिटीज रोगियों पर एलोवेरा के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके साथ ही यह हाई ब्लडप्रेशर और हाई कोलेस्ट्रोल से लड़ने में प्राकृतिक रूप से मदद करता है। यदि आपको डायबिटीज है तो आप समान मात्रा में एलोवेरा जूस और करेले के जूस को मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें और देखें कि किस तरह आपको डायबिटीज से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही एलोवेरा जूस में दोगुनी मात्रा में आंवले का रस मिलाकर इस्तेमाल करने से ब्लड शुगर लेवल भी कम हो जाता है। यह बात भी सामने आई है कि एलोवेरा कोलेस्ट्रोल को कम करने में भी सहायता करता है और इसके साथ ही ये ब्लड से ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है।

पाचन संबंधी लाभ

एलोवेरा में मौजूद एमिनो एसिड्स, एंजाइम्स, विटामिंस और मिनरल्स की प्रचुरता के कारण यह पाचन में एक महत्पूर्ण भूमिका अदा करता है। एलोवेरा में मौजूद ये तत्व पाचन तंत्र में मौजूद ऐसे भोजन को साफ करने में भी मदद करते हैं, जो कि इसके कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं। इसके साथ ही एलोवेरा ज्यूस का नियमित सेवन कब्ज़ और एसिडिटी से राहत दिलाता है।

बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन

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हमारी लाइफस्टाइल, जंक फ़ूड, धूल-मिट्टी, स्मोकिंग और प्रदूषण हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव डालते हैं, और जिसके कारण हमारे शरीर में विषैले तत्व भी जमा हो जाते हैं। एलोवेरा ज्यूस बॉडी में मौजूद टोक्सिंस को को बाहर निकालने में मदद करता है। ये टोक्सिंस पेट में दर्द या फिर शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण की कमी जैसी समस्याओं के मुख्य कारण होते हैं।

इसके साथ ही एलोवेरा शरीर के लिए एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल एजेंट की तरह भी काम करता है। इसमें पोलीफेनॉल्स नाम का पदार्थ पाया जाता है, जो कि एलोवेरा में मौजूद अन्य पदार्थों के साथ मिलकर एक एंटी-बैक्टीरियल की तरह काम करता है। इसमें पाए जाने वाले एंजाइम बॉडी के सर्क्युलेट्री सिस्टम को मजबूत बनाकर इन्फेक्शन्स से लड़ने वाली सेल्स को बढ़ाता है। जिस से शरीर में होने वाल इन्फेक्शन्स की समस्याओं से भी राहत मिलती है।

वजन कम करने में मददगार

एलोवेरा में कई तरह के विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, एमिनो एसिड, सैलिसिलिक एसिड और भी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो वजन घटाने में भी कई तरीकों से मददगार साबित हुए है। इसके लिए आप चाहें तो नींबू के रस में एलोवेरा ज्यूस मिलाकर पी सकते हैं या फिर मैथी की पत्तियों का रस और लहसुन के साथ एलोवेरा का ज्यूस मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं। एलोवेरा के पत्तों के सेवन से भी मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है। काफी पौष्टिक एलोवेरा में भरपूर मात्रा में विटामिन B1, B2, B6, विटामिन C, विटामिन E, फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, जिंक, मैंगनीज, कॉपर, जरूरी एंजाइम, ग्लाइकोसाइड, और इसके साथ ही लगभग 200 से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, जो पूरे शरीर को पोषित करते हैं। इसके सेवन से आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी।

सूजन कम करने में सहायक 

चूँकि एलोवेरा में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, इसी कारण से एलोवेरा ज्यूस का सेवन सूजन को काफी हद तक कम कर देता है।

दांतों की कैविटी हटाए

एलोवेरा जैल अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण बिल्कुल एक टूथपेस्ट की ही तरह दांतों पर काफी असरदार साबित हुआ है। यह दांतों में कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ता है और इसके साथ ही मसूड़ों में होने वाली सूजन से भी राहत दिलाता है। इसके साथ ही इसका एंटी-माइक्रोवाईल गुण दांतों को साफ और कीटाणु मुक्त रखने में मदद करता है। एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर की तरह भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

जोड़ों के दर्द में राहत दिलाये 

ऐसी कई स्टडीज सामने आ चुकी हैं जो एलोवेरा में नेचुरली एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों के साथ साथ प्लांट स्टीरोल्स होने का दावा करती हैं। ये प्लांट स्टीरोल्स ठीक उसी तरह असर करते हैं जिस तरह दर्द और सूजन के लिए ली जाने वाली स्टेरॉयड दवायें करती हैं। इसमें पाये जाने वाले ग्लूकोसेमाइन और B-सिस्टरॉल आर्थराइटिस के कारण होने वाले दर्द और सूजन में काफी राहत पहुंचाते हैं। इसलिए अपने डेली रूटीन में एलोवेरा को शामिल कर आप इन परेशानियों से काफी हद तक राहत पा सकते हैं।

मुँह के छालों में आराम

मुँह में छाले होने की स्थिति में थोड़ा सा ताज़ा एलोवेरा जेल लें और इसे अपने छालों पर हलके हाथों से दिन में 3 से 4 बार मलें। इससे न सिर्फ छाले ठीक होंगे बल्कि तुरंत दर्द में आराम भी मिलेगा। साथ ही अगर आपको बार बार मुँह में छाले होने की समस्या हो तो एलोवेरा का जूस नियमित रूप से पियें, आराम होगा।

पीलिया (Jaundice) का इलाज

पीलिया से निजात पाने के लिए तो एलोवेरा का ज्यूस एक रामबाण इलाज साबित हुआ है। यदि आप सुबह शाम एलोवेरा के ज्यूस का सेवन करते हैं तो आपको काफी राहत मिलेगी।

आइये जानते हैं एलोवेरा से होने वाले कुछ और फायदों के बारे में:

*नजले-खांसी पर असरदार।
*इसके जूस के सेवन से खून की कमी को दूर किया जा सकता है।
*फटी एडियों पर एलोवेरा लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
*जोड़ों के दर्द में असरदार।
*खून में हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने में मददगार।
*एलोवेरा जूस बवासीर (piles) में होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करता है।
*त्वचा संबंधी रोगों से निजात दिलाता है।
*शरीर में कहीं भी जलने या कटने पर एलोवेरा में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण घाव को जल्दी भरता है।
नाखूनों की रंगत को देखकर पहचाने बीमारी

नाखूनों की रंगत को देखकर पहचाने बीमारी


अगर बदल रहा है नाखूनों का रंग तो समझें कुछ गड़बड़ है! अक्सर हम अपने नाखूनों को सुंदर और आकर्षक बनाने में जुटे रहते हैं। लेकिन नाखूनों में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों पर हमारा ध्यान नहीं जाता। जबकि नाखूनों के लक्षण हेल्थ की कहानी कहते है


जब आपके नाखून लम्बे होने के बाद उंगलियों की तरफ ही मुड़ने लगें, तो इसे नेल क्लबिंग कहते हैं। कई बार शरीर में ऑक्सीजन की कमी से नाखूनों को यह शेप मिलती है। अगर नाखून ड्राई और नाजुक हैं तो यह नाखूनों पर बहुत ज्यादा केमिकल्स के प्रयोग की वजह से हो रहा है। यह कई तरह के लंग कार्डियोवस्कुलर से जुड़ी बीमारी की तरफ भी इशारा करते हैं।

नाखून पर एक से ज्यादा सफेद धारियां किडनी से जुड़ी बीमारियों और शरीर में पोषक तत्वों की कमी की ओर इशारा करती हैं। इसी तरह अगर नाखून बहुत सॉफ्ट हैं और अंदर से खोखले नजर आते हैं, तो यह लीवर संबंधी समस्या या फिर शरीर में आयरन की कमी का संकेत माना जाता है। आयरन की कमी से नाखून टूटने भी लगते हैं।

नाखूनों में चमक भी जरूरी है। अगर नाखूनों में चमक न हो, तो समझ लें कि आपको एनीमिया की समस्या है। इस तरह के नाखून वालों को डायबिटीज और लीवर से जुड़ी समस्याएं होने की भी संभावना होती हैं।

काली रेखा या धब्बे नाखूनों पर नजर आ रहे हैं, तो आपको मेलेनोमा हो सकता है। इस तरह के धब्बे आमतौर पर किसी एक ही नाखून पर या पैर के नाखून में देखने को मिलते हैं।

हल्का नीला रंग 
अगर आपके नाखूनों का रंग हल्का नीला पड़ गया है, तो यह शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने का संकेत है। आपको फेफड़ों की समस्या हो सकती है।

फीके नाखून
अगर आपके नाखूनों का रंग फीका पड़ गया है और वो बहुत ही बुरे या भयानक दिख रहे हैं तो आपको एनीमिया और खून की कमी की शिकायत हो सकती है। ऐसे में आयरन लेने की बेहद जरूरत है। आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, बीनस शामिल करना चाहिए। फीके रंग के नाखून डायबिटीज और लिवर से जुड़ी बीमारियों की ओर भी इशारा करते हैं।

सफेद नाखून
कई बार नाखूनों पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे नाखूनों पर सफेद धब्बे इतने बढ़ जाते हैं कि नाखून सफेद दिखने लगते हैं। यह धब्बे शरीर में जिंक और विटामिन बी की कमी को दर्शाते हैं। चना इन दोनों का बड़ा ही बेहतर स्त्रोत है। ज्वार, बाजरा से भी इसकी कमी को पूरा किया जा सकता है। सफेद रंग के नाखून लिवर से संबंधित बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस की ओर भी इशारा करते हैं।

पीले नाखून
पीले पड़ते नाखून अगर मोटे भी हो रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि यह फंगल इंफेक्शन का लक्षण है। ऐसे में नाखून कमजोर होकर टूटने भी लगते हैं। ये थायरॉयड, डायबिटीज, सिरोसिस और फेफड़ों से संबंधित जैसी गंभीर बीमारियों का लक्षण हो सकते हैं। अगर नाखूनों का रंग पीला है या उनकी पर्त सफेद है, तो यह शरीर में एनीमिया का लक्षण है। नाखूनों का पीलापन पीलिया के लक्षण को भी बताता है।

सबसे अहम बात यह कि आपका आहार ही आपके नाखूनों की सही पहचान है। अच्छे नाखूनों के लिए आपकी डाइट में कैल्शियम की मात्रा अधिक होनी चाहिए। सबसे पहले नाखूनों पर एक हफ्ते से ज्यादा देर के लिए नेल पॉलिश को न लगा रहने दें। अगर नेल पॉलिश ज्यादा समय के लिए नाखून पर रहती हैं तो वह नाखूनो की सतह को खराब बना देती है। साथ ही नाखून बदरंग और अस्वस्थ्य हो जाते हैं।

क्यूटिकल्स को साफ रखें। ये नाखूनों के दोनों ओर होते हैं, जिनमें गंदगी तब जाती हैं। यह इतने प्रभावशाली होते हैं कि इसकी वजह से नाखून सड़ भी जाते हैं। इसलिए समय-समय पर क्यूटिकल्स को काटते रहें।

सेहतमंद शरीर का आईना होते हैं हमारे नाखून, इन पर जरूर गौर करें…

गुरुवार, 30 मार्च 2017

बवासीर से लेकर कई बीमारियों का इलाज है फूल गोभी

बवासीर से लेकर कई बीमारियों का इलाज है फूल गोभी


गोभी भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा है। आसानी से उपलब्ध होने वाली गोभी में कई औषधीय गुण भी हैं। पत्ता गोभी में दूध के बराबर कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। गोभी का बीच उत्तेमजक, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला और पेट के कीड़ों को नष्टै करने वाला है। गोभी का रस मीठा होता है।

फूल गोभी और मटर की सब्जी बड़ी ही स्वादिष्ट होती है, पर क्या आप जानते है कि फूल गोभी खाने में जितनी ज्यादा स्वादिष्ट होती है यह उतनी ही ज्यादा हमारे स्वास्थ के लिए भी गुणकारी होती है।
इसमें ऐसे कई गुण छिपे होते है जो हमें कई बीमारियों से बचा सकते हैं। साथ ही आप इसका सेवन करके कई बीमारियों का उपचार भी घर बैठे कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि यह गोभी हमारे लिए कितनी फायदेमंद होती है।

गोभी के घरेलू उपचार-

1. पेट दर्द होने पर गोभी की जड़, पत्तीस, तना फल और फूल को चावल के पानी में पकाकर सुबह-शाम लेने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

2. गोभी खाने से खून साफ होता है। गोभी का रस पीने से खून की खराबी दूर होती है और खून साफ होता है।

3. हड्डियों का दर्द दूर करने के लिए गोभी के रस को गाजर के रस में बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से हड्डियों का दर्द दूर होता है।

4. पीलिया के लिए भी गोभी का रस बहुत फायदेमंद है। गाजर और गोभी का रस मिलाकर पीने से पीलिया ठीक होता है।

5. बवासीर होने पर जंगली गोभी का रस निकालकर, उसमें काली मिर्च और मिश्री मिलाकर पीने से मस्सों से खून निकलना बंद हो जाता है।

6. खून की उल्टीस होने पर गोभी का सेवन करने से फायदा होता है। गोभी की सब्जी या कच्चीस गोभी खाने से खून की उल्टियां होना बंद हो जाती हैं।

7. बुखार होने पर गोभी की जड़ को चावल में पकाकर सुबह-शाम सेवन करने से फायदा होता है।

8. पेशाब में जलन होने पर गोभी का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाइए। इससे तुरंत आराम मिलता है।

9. गले में सूजन होने पर गोभी के पत्तों का रस निकालकर दो चम्मरच पानी मिलाकर खाने से फायदा होता है।

10. दिल के लिए बहुत फायेदमंद होती है। यह दिल और कार्डियोवस्कु लर प्रणाली को सही प्रकार से काम करने में मदद करती है।

11. गोभी गोभी फाइबर का उच्च स्रोत होती है। फाइबर हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और साथ कोलेस्ट्रॉ ल के स्तरच को भी कम करता है।

12. गोभी में एंटी ऑक्सीसडेंट्स होते हैं। एंटी ऑक्सीपडेंट्स के काफी लाभ होते हैं। ये हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।

13. गर्भावस्था में भी गोभी काफी फायदेमंद होती है। इसमें फोलेट काफी उच्च मात्रा में होते हैं। इसके साथ ही यह विटामिन ए और विटामिन बी से भी भरपूर होती है। यह कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करती है। इससे गर्भ में पल रहे भ्रूण को काफी लाभ होता है। गोभी विटामिन सी का भी उत्त म स्रोत है। यह भी गर्भावस्थाक के दौरान काफी फायदेमंद होता है। इसलिए हर गर्भवती महिला को रोजाना कम से कम एक कप गोभी जरूर खानी चाहिए।

14. गोभी में कैल्शियम की मात्रा भी काफी होती है। जो हमारे नर्वस सि‍स्टकम को मजबूत बनाता है। कैल्शियम हमारे दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही यह शरीर की कई अन्यि प्रणालियों को भी सही प्रकार से काम करने में मदद करता है।

15. गोभी में जिंक, मैग्नीोशियम, मैन्गिनीज, फास्फोारस और सेलेनियम तथा सोडियम जैसे लाभकारी तत्व होते हैं।

16. गोभी कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद करती है। फेफड़े का कैंसर, स्तिन कैंसर, ब्लै.डर कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा गोभी के नियमित सेवन से कम हो जाता है। गोभी के जैविक परिवार में शामिल अन्यं सब्जियां जैसे- ब्रोकली, कैल आदि भी कैंसर को दूर रखने में मदद करतीं हैं।

17. वजन कम करने में गोभी काफी फायदेमंद होती है। गोभी में मौजूद विटामिन सी अतिरिक्तव वसा को कम करने में काफी महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही इसमें फोलेट की मौजूदगी भी मोटापे से निजात दिलाने में मददगार होता है। एक कप गोभी में लगभग 30 कैलोरी होती है। इसमें स्टाेर्च नहीं होता इसलिए आप इसका जितना चाहें उतना सेवन कर सकते हैं।

18. गोभी लिवर में मौजूद एंजाइम्स को एक्टिवेट करने में मदद करती है। इससे लिवर बेहतर काम करता है और शरीर से विषैले पदार्थ अधिक मात्रा में बाहर निकलते हैं। इससे शरीर के कई अंगों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

19. अपने शरीर में विटामिन के की मात्रा बढ़ाने के लिए अपने आहार में गोभी शामिल करें। विटामिन के अस्थि कोशिकाओं के निर्माण में महती भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं, अगर आपके शरीर में विटामिन के की पर्याप्त मात्रा न हो, तो चोट अथवा जख्मश लगने की स्थिति में आपके शरीर से अधिक मात्रा में रक्तू बहेगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंथकि विटामिन के रक्ता के थक्केम जमाने में काफी मदद करता है।

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

सुबह खाली पेट भीगे चने खाने से होते हैंं ये 20 हैरान कर देेने वाले फायदे

सुबह खाली पेट भीगे चने खाने से होते हैंं ये 20 हैरान कर देेने वाले फायदे


आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवने से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें कई सारे प्रोटीन और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है।

सुबह खाली पेट चने से मिलते है कई फायदे-

1. सर्दियों में चने के आटे का हलवा अस्थमा में फायदेमंद होता है।
2.  चने के आटे की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं।
3.  भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
4. शहद मिलाकर पीने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
5. पीलिया में चने की दाल खाना फायदेमंद रहता है।
6. चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
7. पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा।
8. रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।
9. दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।
10. 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
11. रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।
12. गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।
13. मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें।
14. शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।
15. चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।
16. गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं।
17. पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।
18. चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
19. अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और नपुंसकता दूर होती है।
20. काला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज, एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

हींग के सेवन से दूर होती है कई तरह की बीमारियां

हींग के सेवन से दूर होती है कई तरह की बीमारियां


हींग का इस्तेमाल हर घर में आम होता है। यह सब्जी का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ  पेट के लिए भी अच्छी रहती है। इसके सेवन से कई तरह की बीमारियां और परेशानियां दूर होती है। आइए डानते है हींग से कौन-कौन से फायदे होते है।  

1. पेट दर्द 
अगर कभी अचानक से पेट में दर्द होने लगे तो थोड़ी सी हींग को पानी में घोलकर हल्का सा गर्म करके नाभि पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है। इस लेप से पेट दर्द, पेट फूलना व पेट का भारीपन दूर हो जाता है।
2. दांत दर्द 
दांत दर्द की समस्या होने पर हींग में थोड़ा सा कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाने से दांत में दर्द होना बंद हो जाता है।
3. कान दर्द 
कान में दर्द होने पर तिल के तेल में हींग को मिलकार उस तेल की बूंदों को कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
4. पीलिया  
पीलिया होने पर हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ मिलाकर खाने से राहत मिलती है। साथ ही पीलिया होने पर  हींग को पानी में घिसकर आंखों पर लगाने से कापी फायदा होता है। 
5. ब्लड शुगर में राहत 
हींग के सेवन से शरीर में इंसुलिन बनता है और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गिरता है। 
6. कैंसर में रोकथाम 
हींग में वह शक्ति होती है, जो कैंसर रोग को बढ़ावा देने वाले सेल को शरीर में पनपने से रोकता है।
7. ब्लड प्रैशर 
हींग के चूर्ण में थोडा सा नमक मिलाकर पानी के साथ लेने से लो ब्लड प्रैशर में आराम मिलता है।

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

रविवार, 20 नवंबर 2016

आइए जानते है कि कौन-कौनसी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या-क्या लाभ और हानियाँ होती हैं

आइए जानते है कि कौन-कौनसी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या-क्या लाभ और हानियाँ होती हैं

*​सोना*​ ---->


सोना एक उष्ण/गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*​चाँदी​* --->

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*​काँसा*​ --->

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*​ताँबा​* --->

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*​पीतल*​ :--->

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*​लोहा*​ :--->

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*​इस्पात यानि स्टील​* :-->

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

*​एलुमिनियम​* :--->

एल्युमिनिय को बोक्साईट से अलग करके बरतन बनाने में प्रयुक्त किया जाता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*​मिट्टी​* :--->

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है। पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है कि पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।