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गुरुवार, 2 नवंबर 2017

अगर आप ब्लड प्रेशर से हैं परेशान तो रोजाना आहार मे लें ये रामबाण चीजें

अगर आप ब्लड प्रेशर से हैं परेशान तो रोजाना आहार मे लें ये रामबाण चीजें


चाहे मेट्रो सिटी हो या छोटे शहर हर जगह आज युवावर्ग तनावपूर्ण और तेज रफ्तार जिंदगी ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा हो गई है। काम के दबाव में लोगों के अंदर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जो धीरे धीरे ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो जितना घातक हाई ब्लड प्रेशर होता है उतना ही नुकसानदेह लो ब्लड प्रेशर। ऐसे में लो ब्लड प्रेशर को हल्के में लेने और टालने की गलती कतई न करें। लो ब्लड प्रेशर की स्थिति वह होती है कि जिसमें रक्तवाहिनियों में खून का दबाव काफी कम हो जाता है। सामान्य रूप से 90/60 एमएम एचजी को लो ब्लड प्रेशर की स्थिति माना जाता है।लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें।

अगर आप भी ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या से जूझ रहे हैं तो ये ख़बर आपके लिए रामबाण साबित होगी। क्योंकि ये फूड्स वो हैं जिनको खाकर आप आसानी से समस्या को पार पा सकते हैं और आपको किसी दवा की भी जरूरत नहीं होगी।
ड्राईफ्रूट
50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। यदि देशी चने न मिल पाएं तो सिर्फ किशमिश ही लें। इस विधि से कुछ ही सप्ताह में ब्लेड प्रेशर सामान्य हो सकता है।
बादाम
रात को बादाम की 3-4 गिरी पानी में भिगों दें और सुबह उनका छिलका उतारकर कर 15 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर बादाम-गिरी को खाने से लो ब्लड प्रेशर नष्ट होता है।
आंवला
यूं तो हम हर रोज अचार खाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है। अचार अगर आंवले का हो तो रोज खाना चाहिए। साथ ही आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन लो ब्लेड प्रेशर में बहुत उपयोगी होता है।
पोषक तत्वों की मात्रा के साथ लें दूध
प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं। ये पोषक तत्व एड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों के स्राव में वृद्धि कर लो ब्लड प्रेशर को तेजी से सामान्य करते हैं।लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें।
चुकंदर बना सकता है आपको सिकंदर
लो ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में चुकंदर का जूस काफी कारगर होता है। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें रोजाना दो बार चुकंदर का जूस पीना चाहिए। हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।

जटामांसी
जटामानसी नामक एक आयुर्वेदिक औषधि भी लो ब्लड प्रेशर का निदान करने में मददगार है। जटामानसी का कपूर और दालचीनी के साथ मिश्रण बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा जटामानसी के अर्क, पानी के साथ उबालकर पीने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

एप्सम नमक
एप्सम नमक मैग्नीशियम सल्फेट से स्नान लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने का सबसे सरलतम इलाज है। इसके लिए पानी में करीब आधा किलो एप्सम नमक मिलाएं और करीब आधा घंटा पानी में बैठें। बेहतर होगा कि सोने के पहले यह स्नान करें।

रविवार, 24 सितंबर 2017

बड़ी-बड़ी बीमारियों को दूर करेगी छोटी-सी काली मिर्च

बड़ी-बड़ी बीमारियों को दूर करेगी छोटी-सी काली मिर्च


काली मिर्च का इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे की काली मिर्च सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद विटामिन ए, विटामिन बी, सेलेनियम और बीटा कैरोटीन जैसे तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाती है। आपको कैंसर, पेट में अल्सर, डिप्रेंशन, डायरिया, हृदय रोग, आर्थराइटिस और दांतों में दर्द से बचाता है। रोजाा काली मिर्च का प्रयोग करके आप कई तरह की प्रॉब्लम को दूर कर सकते है। तो आइए जानते है किस तरह काली मिर्च आपको इन बीमारियों से दूर रखती है।

1. कैंसर और गठिए की समस्या
काली मिर्च में मौजूद पिपेराइन में आर्थराइटिस और कैंसर से लड़ने के एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते है। इसमें हल्दी मिला कर खाने से इसका असर और भी ज्यादा होता है। इसके अलाव इसमें पोलीफिनोल्स शरीर की रक्त कोशिशकाओं को बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। इससे महिलाएं बैस्ट कैंसर से बची रहती है। इसके अलावा पीसी काली मिर्च में हल्का गर्म तेल मिला कर मालिश करने से मांसपेशियों के दर्द से राहत मिलती है।

2. पेट का अल्सर
ये पेट के अल्सर के लिए ड्रग की तरह काम करती है। काली मिर्च पेट की सूजन को घटा कर गैस्ट्रिक स्त्राव को रोकने के बाद अंदरुनी लाइंनिग को खुरचती है। जिससे आपके पेट का अल्सर ठीक हो जाता है। एक चुटकी पिसी हुई काली मिर्च का सेवन करने से अल्सर के दर्द से  तुरंत राहत मिलेगी। इसके अलावा इसको 1 गिलास छाछ में मिला कर पीने से पेट में कीड़े भी मर जाते है।

3. उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए काली मिर्च औषधि का काम करती है। इसमें मौजूद पिपेराइन और कैल्शियम शरीर के ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करते है। रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से ये पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को नम्र बनाता है। काली मिर्च हाईपरटैंशन के रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है।

4. दातों के दर्द से राहत
दातों के क्सी भी तरह के दर्द में इसका सेवन करने से आपकी प्रॉब्लम दूर हो जाएगी। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल तत्व दात दर्द, सड़न, मुंह के छालों, मसूड़ों की सूजन और सांस की बदबू को दूर करता है। काली मिर्च, नमक और लौंग के तेल को मिला कर सुबह इससे कुल्ली करें। इससे कुछ ही समय में आपको इन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

5. डिप्रेंशन में फायदेमंद
अक्सर लोगों को काम के प्रैशर के कारण डिप्रेंशन का समस्या हो जाती है। इसकी मदद से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बनता है, जो आपको डिप्रेंशन की समस्या से दूर रखता है। रोजाना सुबह इसका सेवन करने से आप दिन-भर ताजा महसूस करते है।

बुधवार, 22 मार्च 2017

रोजाना सुबह-सुबह खाली पेट थोड़ा सा कच्चा लहसुन खाने के, ये होते है जबरदस्त फायदे

रोजाना सुबह-सुबह खाली पेट थोड़ा सा कच्चा लहसुन खाने के, ये होते है जबरदस्त फायदे


लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसे खाने के अनेक हेल्दी फायदे भी हैं। आप सोच भी नहीं सकते कि लहसुन की एक कली कितने रोगों को खत्म कर सकती है। यह कई बीमारियों की रोकथाम और उपचार में प्रभावी है। कुछ भी खाने या पीने से पहले लहसुन खाने से ताकत बढ़ती है। यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह काम करता है। आयुर्वेद में लहसुन को जवान बनाए रखने वाली औषधि माना गया है। साथ ही, यह जोड़ों के दर्द की भी अचूक दवा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सुबह-सुबह खाली पेट लहसुन खाने से होने वाले ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में…


हाई बीपी से बचाए : कई लोगों का मानना है कि लहसुन खाने से हाइपरटेंशन के लक्षणों से आराम मिलता है। यह न केवल ब्लड सर्कुलेशन को नियमित करता है, बल्कि दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। साथ ही, लीवर और मूत्राशय को भी सुचारू रूप से काम करने में सहायक होता है।

डायरिया दूर करे : पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे डायरिया आदि के उपचार में भी लहसुन रामबाण का काम करता है। कुछ लोग तो यह दावा भी करते हैं कि लहसुन तंत्रिकाओं से संबंधित बीमारियों को दूर करने में बहुत लाभकारी होता है, लेकिन केवल तभी जब इसे खाली पेट खाया जाए।

भूख बढाए : यह डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करता है और भूख भी बढ़ाता है। जब भी आपको घबराहट होती है तो पेट में एसिड बनता है। लहसुन इस एसिड को बनने से रोकता है। यह तनाव को कम करने में भी सहायक होता है।

वैकल्पिक उपचार : जब डिटॉक्सिफिकेशन की बात आती है तो वैकल्पिक उपचार के रूप में लहसुन बहुत प्रभावी होता है। लहसुन शरीर को सूक्ष्मजीवों और कीड़ों से बचाता है। अनेक तरह की बीमारियों जैसे डाइबिटीज़, ट्युफ्स, डिप्रेशन और कुछ प्रकार के कैंसर की रोकथाम में भी यह सहायक होता है।

श्वसन तंत्र को मजबूत बनाएं : लहसुन श्वसन तंत्र के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह अस्थमा, निमोनिया, ज़ुकाम, ब्रोंकाइटिस, पुरानी सर्दी, फेफड़ों में जमाव और कफ आदि की रोकथाम व उपचार में बहुत प्रभावशाली होता है।

ट्यूबरकुलोसिस (TB) में लाभकारी : ट्यूबरकुलोसिस (तपेदिक) में लहसुन पर आधारित इस उपचार को अपनाएं। एक दिन में लहसुन की एक पूरी गांठ खाएं। टी.बी में यह उपाय बहुत असरदार साबित होता है।

शनिवार, 18 मार्च 2017

हरा नमक का सेवन आपकी इन बीमारियों को दूर कर देगा !

हरा नमक का सेवन आपकी इन बीमारियों को दूर कर देगा !


घरों में ज्यादातर सफेद नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है। थोड़ा बहुत काला नमक सलाद बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं नमक के इन दो प्रकारों के अलावा, और एक प्रकार है, जिसका प्रयोग बहुत कम घरों में होता है, जो इस नमक के बारे में जानते हैं। वैसे आपको बता दें कि ये नमक घर में तैयार किया जाता है। जिसका प्रयोग खाने में टेस्ट और भी बढ़ा देता है। इस नमक को बनाना बहुत ही आसान है। और इस हरे नमक के खाने के बहुत से फायदे भी हैं। आईए जानते हैं ये बनता कैसे हैं। और इस नमक के सेवन से कौन सी बीमारियां छूमंतर हो जाती हैं।

1. हरी मिर्च
हरा नमक में हरी मिर्च का प्रयोग होता है। हरी मिर्च का प्रयोग एक तरफ नमक को हरा रंग देने के लिये उपयोग में लिया जाता है तो दूसरी ओर हरी मिर्च आंखों को दोषों से बचाती भी है। कई बार डॉक्टर लाल मिर्च का सेवन करने से मना करते हैं और उसके बदले हरी मिर्च को आहार में शामिल होने की सलाह देते हैं

2. लहसुन
लहसुन, पेट की परेशानी जैसे एसिडिटी व कब्ज की दिक्कत से छुटकारा दिलाता है। अक्सर भोजन का सेवन करने बाद शरीर में एसिडिटी की समस्या हो जाती है यदि खाने के साथ, सलाद में हरा नमक का प्रयोग किया जाएगा तो नमक बनाने में यूज लहसुन एसिडिटी व कब्ज की परेशानी को दूर कर देगा।

3. कोरिएंडर लीव्स
भोजन में धनिया का प्रयोग, खाने को आकर्षित दिखाने में प्रयोग होता है इसके साथ धनिया से मिलने वाला हरा रंग व खुशबू खाने को ज़ायकेदार बनाती है धनिया की इन खुबियों से हरा नमक बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है मगर धनिया से शरीर में ताजगी बनी रहती है जिससे शरीर तंदुरुस्त रहता है।

4. सफेद नमक
हरा नमक में सफेद नमक का यूज सिर्फ नमक को नमकीन बनाने के लिए किया जाता है, मगर हरा नमक, सफेद नमक की तरह सेहत को हानि नहीं पहुंचाता है  जैसे कि सफेद नमक खाने से अक्सर हाईब्लड़ प्रेशर की शिकायत होती है। मगर हरा नमक हाईब्लड़ प्रेशर को संतुलित रखता है

5. जीरा
शरीर को ठण्ड़क पहुंचाता है जीरा। व जीरा, नमक में हरी मिर्च व लहसुन के बीच बेलेंस बनाने का कार्य करता है। जिससे नमक में संतुलन बना रहे व शरीर में हरी मिर्च व लहसुन से समस्या न उत्पन्न हों। ये है हरा नमक खाने के फायदे – इस तरह से हरा नमक- अन्य नमक की तुलना में भिन्न है। जिसे घरेलु सामग्रियों से तैयार किया जाता है व यह नमक अन्य नमक की तुलना में अधिक लाभकारी भी है जो बाजारों में नहीं मिलता है।

शनिवार, 11 मार्च 2017

भूख बढ़ाने के साथ-साथ टीबी का जड़ से सफाया करता है लहसुन!

भूख बढ़ाने के साथ-साथ टीबी का जड़ से सफाया करता है लहसुन!


लहसुन खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ अपनी कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है।  इसमें मौजूद एक विशेष प्रकार की गंध भी होती है जो थोड़ी अप्रिय होती है। लहसुन  में यह तीखा स्वाद व तीखी गंध इसके सल्फर तत्व एलीसिन के कारण होती है। लहसुन को काटने या पीसने पर ही फायदेमंद एलीसिन प्राप्त होता है। इसी के कारण लहसुन औषधि का काम करता है।



1. रोगों का रामबाण
लहसुन की एक कली हमारे अंदर पैदा होने वाले अनेको रोगों का नाश कर सकती है।  यह कई बीमारियों की रोकथाम तथा उपचार में प्रभावी है।  जब आप कुछ भी खाने या पीने से पहले लहसुन खाते हैं तो आपकी ताकत बढ़ती है, तथा यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करता है।  सुबह खाली पेट लहसुन खाने से यह अधिक प्रभावकारी होता है।  इससे बैक्टीरिया ओवरएक्सपोज्ड हो जाते हैं तथा लहसुन की शक्ति से वे अपनी रक्षा नहीं कर पाते।  इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों की सूची कभी खत्म न होने वाली है।  यह बवासीर, कब्ज और कान दर्द के उपचार में भी सहायक है।  यदि आप बवासीर और कब्ज के उपचार में इसका प्रयोग करना चाहते हैं तो कुछ पानी उबालें तथा इसमें अच्छी मात्रा में लहसुन डालें।

2. वैकल्पिक उपचार
जब डिटॉक्सीफिकेशन की बात आती है तो वैकल्पिक उपचार के रूप में लहसुन बहुत प्रभावी होता है।  लहसुन इतना अधिक शक्तिशाली है कि यह शरीर को परजीवियों और कीड़ों से बचाता है, विभिन्न बीमारियों जैसे डायबिटीज, ट्युफ्स, डिप्रेशन तथा कुछ प्रकार के कैंसर की रोकथाम में सहायक होता है।

3. हाई बीपी से बचाए
कई लोगों का मानना है कि लहसुन खाने से हाइपरटेंशन के लक्षणों से आराम मिलता है।  यह न केवल रक्त के प्रवाह को नियमित करता है बल्कि यह हृदय से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है तथा लीवर और मूत्राशय को भी सुचारू रूप से काम करने में सहायक होता है।

4. श्वासन तंत्र मजबूत बनाए
लहसुन श्वासन तंत्र के लिए बहुत लाभदायक होता है।  यह ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक), अस्थमा, निमोनिया, जुकाम, ब्रोंकाइटिस, पुरानी सर्दी, फेफड़ों में जमाव और कफ आदि रोकथाम तथा उपचार में बहुत प्रभावशाली होता है।

5. भूख बढ़ाए
यह पाचन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है तथा भूख भी बढ़ाता है. लहसुन आपके तनाव को भी कम करने में सहायक होता है. जब भी आपको घबराहट होती है तो पेट में एसिड बनता है. लहसुन इस एसिड को बनने से रोकता है.

6. ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक) में लाभकारी
ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक) में लहसुन पर आधारित इस उपचार को अपनाएं।  एक दिन में लहसुन की एक पूरी गांठ खाएं।  इसे कुछ भागों में बांट लें तथा आपको जिस प्रकार भी पसंद हो इसे खाएं। यदि आप इसे कच्चा या ओवन में हल्का सा भूनकर खाएंगे तो अधिक अच्छे परिणाम मिलेंगे।

7. सावधानी बरतें
यदि आपको लहसुन से किसी प्रकार की एलर्जी है तो दो महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें, कभी भी इसे कच्चा न खाएं तथा फिर भी यदि आपको त्वचा से संबंधित कोई समस्या आती है, बुखार आता है या सिरदर्द होता है तो इसका सेवन करना छोड़ दें।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

रोज खाएं लहसुन की 1 कली, इन 7 बीमारियों का नहीं होगा असर, ताकत भी बढ़ेगी

रोज खाएं लहसुन की 1 कली, इन 7 बीमारियों का नहीं होगा असर, ताकत भी बढ़ेगी


धर्म-ग्रन्थों में भले ही लहसुन और प्याज को खराब माना गया है लेकिन आयुर्वेद में लहसुन को एक ऐसी औषधि माना गया है जो शरीर के सिर से लेकर पांव तक हर अंग की बीमारी को सही कर सकता है। इसके एंटीबैक्टिरियल तथा एंटीफंगल गुण जहां शरीर को बैक्टीरिया से बचाते हैं वही शरीर की कई बीमारियों को भी जड़ से खत्म कर देते हैं। आइए जानते हैं लहसुन के ऐसे ही कुछ फायदे...

(1) हाई बीपी को करता है कंट्रोल
रोज सुबह एक कच्ची कली लहसुन की खाने से हाई बीपी की बीमारी पूरी तरह सही हो जाता है। इसके सेवन से न केवल ब्लड सर्कुलेश सही रहता है वरन दिल की बीमारियों को भी कोसों दूर रखता है।

(2) दांत दर्द से तुरंत मिलती है राहत
अगर आपके दांतों में बहुत तेज दर्द हो रहा है तो लहसुन की एक कली छिल कर प्रभावित दांत के नीचे रख लें। लहसुन के एनटीबैक्टिरीअल और पेनकिलर गुण तुरंत ही आपके दांत का दर्द दूर कर देंगे।

(3) श्वसन तंत्र को मजबूत करता है
नियमित रूप से लहसुन खाने से श्वसन तंत्र मजबूत होता है। इसके प्रयोग से अस्थमा, निमोनिया, ज़ुकाम, ब्रोंकाइटिस, पुरानी सर्दी, फेफड़ों में जमाव और कफ आदि से निजात और बचाव होता है।

(4) दिल को स्वस्थ रखता है
लहसुन में मौजूद सल्फर रक्त कोशिकाओं को बंद होने से बचाता है साथ ही इसके हीलिंग प्रोपर्टीज शरीर में मौजूद फ्री ऑक्सीजन रेडिकल्स से लड़कर शरीर को युवा बनाए रखती है।

(5) नसों की झनझनाहट दूर करता है
खाली पेट लहसुन खाने से नसों में झनझनाहट की समस्या दूर हो जाती है। और शरीर की इन्द्रियां भी समुचित रूप से कार्य करने लगती है।

(6) भूख बढ़ाने के लिए
खाली पेट लहसुन के प्रयोग से एसीडिटी खत्म होकर डायजेस्टिव सिस्टम सही होता है। इससे भूख बढ़ती है और पाचन तंत्र संबंधी सभी बीमारियों से भी छुटकारा मिल जाता है।

(7) कामशक्ति बढ़ाता है
धर्मग्रन्थों में लहसुन को तामसिक माना गया है। इसके प्रयोग से शरीर में कामेच्छा तथा कामशक्ति दोनों बढ़ जाती है। कामेच्छा का बढ़ना सन्यास और ब्रह्मचर्य के हिसाब से गलत है अतः इसे सन्यासियों तथा पूजा-पाठ करने वालों के लिए निषेध कर दिया गया है परन्तु आयुर्वेद में गृहस्थ लोगों के लिए इसे संजीवनी मान कर खाने की अनुमति दी गई है।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

कभी नहीं होगा हार्टफेल और उच्च रक्तचाप सिर्फ 3 अचूक उपाय

कभी नहीं होगा हार्टफेल और उच्च रक्तचाप सिर्फ 3 अचूक उपाय

अगर आप चाहते हैं के आपको कभी भी हार्ट फेल ना हो और कभी भी ब्लड प्रेशर बढ़ने की दिक्कत ना आये तो आप नियमित रूप से इन तीन चीजो का सेवन करे। आइये जाने कौन सी हैं वो तीन चीजे जो हैं हृदय के लिए अमृत समान।

1. आंवला :
आंवला आयुपर्यन्त खाते रहने से अचानक हृदयगति रुकने की संभावना नही रहती और न उच्च रक्तचाप का रोग होता है।

2. मोसम्बी/निम्बू :
मोसम्बी के नित्य अथवा निम्बू के नियन्त्रित सेवन से भी हार्ट-फेल का भय नही रहता, क्योंकि इससे रक्तवाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा नही होने पता।

3. लहसुन :
दिल का दौरा पड़ते ही लहसुन की चार कलियों को तुरंत चबा लेने से ह्रदय फेल नही होगा। दौरा समाप्त हो जाने के बाद नित्य कुछ दिन तक लहसुन की दो कलियों दूध में उबालकर लें। नंगे पैर फिरने वालों को रक्तचाप की शिकायत प्राय: नही होती।

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

यह 10 चमत्कारिक सब्जियां खाकर बनो तंदरूस्त और बीमारी रहे आपसे दूर

यह 10 चमत्कारिक सब्जियां खाकर बनो तंदरूस्त और बीमारी रहे आपसे दूर


सब्जियां खाना अमृततुल्य है। सब्जियां 3 प्रकार की होती हैं, जैसे- जड़ीय सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां और मूल सब्जियां। हम यह भी जानते हैं कि आपने सेंव की सब्जी, चने की भाजी, बेसन, रायता, कढ़ी और पनीर पर भी खूब हाथ साफ किए हैं, हम आपको उपरोक्त से अलग ऐसी सब्जियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपने शायद ही कभी खाई होगी। आपके लिए हम ढूंढकर लाए हैं ऐसी ही 10 चमत्कारिक सब्जियों की जानकारी जिन्हें जानकर आप रह जाएंगे हैरान…

1. कोझियारी भाजी :
कोझियारी भाजी की भाजी साल में एक बार जरूर खाएं। इससे खाने से हर तरह के रोग दूर हो जाते हैं। अधिकतर आदिवासी इस भाजी को खाते हैं। माना जाता है कि इसे खाने वाला कभी बीमार नहीं पड़ता।

छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी लोग इस भाजी को खाकर हमेशा स्वस्थ और तंदुरुस्त बने रहते हैं। बैगा आदिवासी मानते हैं कि जंगलों में पाई जाने वाली कोझियारी भाजी को साल में एक बार जरूर खाना चाहिए। कोझियारी भाजी यानी जंगल में होने वाली सफेद मूसली का पत्ता। ये सभी जानते हैं कि सफेद मूसली शक्तिवर्धक औषधि है।

2. कुंदरु :
कुंदरू का नाम तो आपने कम ही सुना होगा। कुंदरु को टिंडॉरा नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि 100 ग्राम कुंदरू में 93.5 ग्राम पानी, 1.2 ग्राम प्रोटीन, 18 के. कैलोरी ऊर्जा, 40 मिलीग्राम कैल्शियम, 3.1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 30 मिलीग्राम पोटैशियम, 1.6 ग्राम फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। कहते है कि इसमें बीटा कैरोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

कुंदरू के पत्ते और फूल भी उतने ही गुणकारी हैं जितना इसका फल है। हाल में एक शोध में यह माना गया है कि खाने में रोज 50 ग्राम कुंदरू का सेवन करने से हाई बीपी के मरीजों को आराम मिलता है।

3. चौलाई का साग :
चौलाई का साग तो आपने खाया ही होगा लेकिन बहुत कम, कभी-कभार। यह सब्जी बहुत ही आसानी से मिल जाती है। यह हरी पत्तेदार सब्जी है जिसके डंठल और पत्तों में प्रोटीन, विटामिन ए और खनिज की प्रचुर मात्रा होती है। चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-ए, मिनरल्स और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

इस सब्जी को खाने से आपके पेट और कब्ज संबंधी किसी भी प्रकार के रोग में लाभ मिलेगा। पेट के विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए सुबह-शाम चौलाई का रस पीने से भी लाभ मिलता है। चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं।
चौलाई को तंदुलीय भी कहते हैं।

चौलाई दो तरह की होती है- एक सामान्य पत्तों वाली तथा दूसरी लाल पत्तों वाली। कटेली चौलाई तिनछठ के व्रत में खोजी जाती है। भादौ की कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह व्रत होता है। चौलाई को खाने से आंतरिक रक्तस्राव बंद हो जाता है। यह सब्जी खूनी बवासीर, चर्मरोग, गर्भ गिरना, पथरी रोग और पेशाब में जलन जैसे रोग में बहुत ही लाभदायक सि‍द्ध हुई है।

4. खुम्ब (Mushroom) :
इसे हिन्दी में खुम्ब और वर्तमान में इस पौधे को मशरूम कहा जाता है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में यह स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी सैकड़ों सालों से बैगा आदिवासी लोग खाते आ रहे हैं। आदिवासी लोग इसे चिरको पिहरी कहते हैं।

भारत के कुछ इलाकों में ऐसी मान्यता है कि यह कुत्तों के मूत्र त्याग के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है, लेकिन यह बिलकुल गलत धारणा है इसीलिए कई लोग इसे कुकुरमुत्ता कहते हैं। स्वाद में यह आलू की तरह ही लगती है लेकिन इसमें भरपूर शारीरिक ताकत पैदा करने की क्षमता होती है। इसके साथ ही कई और भी सब्जियां हैं जैसे पुट्पुरा, बोड़ा, पुटू इनके अलग-अलग इलाके में अलग-अलग नाम हैं।

मशरूम के सेवन से शरीर में सर्विकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) खत्म हो सकता है जिससे इस कैंसर से निजात संभव हो सकती है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी त्वचा, मुंह और गले के जर‌िए सबसे तेजी से फैलने वाले वायरसों में से एक है जिसकी वजह से सर्विकल, मुंह व गले का कैंसर हो सकता है। मशरूम के और भी कई फायदे हैं। इससे पाचनक्रिया सही बनी रहती है और त्वचा में निखार आता है।

मशरूम कई प्रकार होते हैं। भारत के मैदानी भागों में श्वेत बटन मशरूम को शरद ऋतु में नवंबर से फरवरी तक, ग्रीष्मकालीन श्वेत बटन मशरूम को सितंबर से नवंबर व फरवरी से अप्रैल तक, काले कनचपडे़ मशरूम को फरवरी से अप्रैल तक, ढींगरी मशरूम को सितंबर से मई तक, पराली मशरूम को जुलाई से सितंबर तक तथा दूधिया मशरूम को फरवरी से अप्रैल व जुलाई से सितंबर तक उगाया जा सकता है।

5. गोंगुरा :
गोंगुरा की सब्जी भी बनती है और चटनी व अचार भी। यह बहुत ही स्वादिष्ट होती है। इसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स की प्रचुर मात्रा होती है। पालक पत्ते की तरह बनाई जाने वाली गोंगुरा की सब्जी सेहत और पाचन के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसके अलावा इसका अचार भी बनाया जाता है। गोंगुरा को मराठी में अंबाडीची कहते हैं।

6. बथुआ :
बथुआ सब्जी का नाम बहुत कम लोगों ने नहीं सुना होगा। बथुआ एक वनस्पति है, जो खरीफ की फसलों के साथ उगती है। बथुए में लोहा, पारा, सोना और क्षार पाया जाता है। बथुए में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है।ग्रामीण क्षेत्र में इसकी अधिकतर सब्जी बनाई जाती है। इसका रायता भी बनता है। इसका शरबत के रूप में भी उपयोग होता है। जैसे मैथी या गोभी के पराठे बनाए जाते हैं उसी तरह बथुए का पराठा भी स्वादिष्ट होता है।

यह गोंगुरा या पालक के पत्तों की तरह दिखने वाला छोटा-सा हरा-भरा पौधा काफी लाभदायक है। बथुआ न सिर्फ पाचनशक्ति बढ़ाता बल्कि अन्य कई बीमारियों से भी छुटकारा दिलाता है। सर्दियों में इसका सेवन कई बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है।

यह शाक प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। कब्ज और पेटरोग के लिए तो यह रामबाण है। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। इसकी प्रकृति तर और ठंडी होती है तथा यह अधिकतर गेहूं के खेत में गेहूं के साथ उगता है और जब गेहूं बोया जाता है, उसी सीजन में मिलता है।

7. जिमिकंद :
जिमिकंद को संस्कृत में सूरण, हिन्दी में सूरन, जिमिकंद, जिमीकंद व मराठी में गोडा सूरण, बांग्ला में ओल, कन्नड़ में सुवर्ण गडड़े, तेलुगु में कंडा डूम्पा और फारसी में जमीकंद कहा जाता है। हाथी के पंजे की आकृति के समान होने के कारण इसे अंग्रेजी में एलीफेंट याम या एलीफेंटफुट याम कहते हैं।

जिमिकंद एक गुणकारी सब्जी है। इसके पत्ते 2-3 फुट लंबे, गहरे हरे रंग के व हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं। इसकी पत्तियां अनेक छोटी-छोटी लंबोतरी गोल पत्तियों से गुच्छों में घिरी होती हैं। इसका कंद चपटा, अंडाकार और गहरे भूरे व बादामी रंग का होता है। अनेक संप्रदायों में प्याज-लहसुन के साथ-साथ जिमिकंद से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह कामुकता बढ़ाने वाला होता है।

इसमें विटामिन ए व बी भी होते हैं। यह विटामिन बी-6 का अच्‍छा स्रोत है तथा रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है। इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है। यह खून के थक्के जमने से रोकता है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है, जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकलों से लड़ने में सहायक होता है। इसमें पोटैशियम होता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है। इसमें तांबा पाया जाता है, जो लाल रक्‍त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में रक्त के बहाव को दुरुस्त करता है।

8. अजमोद :
अजमोद को कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है। इसकी सब्जी भी बनाई जाती है, चूर्ण भी, शरबत भी और चटनी भी। यह कोथमीर या धनिये जैसा होता है। अजमोद में इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करने की क्षमता होती है, क्योंकि यह विटामिन ए, बी और सी से परिपूर्ण है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीज, मैग्‍नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन, सोडियम और फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है।

अजमोद खासकर किडनी की सफाई करने के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालकर यह आपको स्वस्थ रखता है। अजमोद पेट की समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है। श्वास संबंधी रोग में भी यह लाभकारी है। किसी भी तरह की शारीरिक कमजोरी हो तो अजमोद की जड़ के चूर्ण का सेवन करें।

9. ताजा हरा लहसुन :
जैसे हरा प्याज होता है, उसी तरह हरा लहसुन होता है। प्याज के लंबे पत्तों की तरह लहसुन के पत्ते भी लंबे होते हैं। इनको काटकर सब्जी बनाई जाती है, जैसे मूली के पत्तों की सब्जी बनाई जाती है उसी तरह।

इसका स्वाद बढ़ाने के लिए लहसुन के पत्तों को किसी अन्य सब्जी जैसे गोभी या आलू के साथ मिलाकर भी बना सकते हैं। यह सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

10. केल की सब्जी :
केले की नहीं, केल की सब्जी के बारे में सभी लोग जानते होंगे। केल की सब्जी में विटामिन्स, खनिज और रेशे सब कुछ बहुतायत में पाए जाते हैं। वैसे केल का प्रयोग सलाद, स्टिर फ्राई, स्मूदी, पास्ता आदि के रूप में किया जाता है लेकिन इसकी भाजी और भूजी भी बनाई जाती है। वनस्पति विज्ञान के अनुसार यह मूली और सरसों परिवार का सदस्य है।

इसके अलावा आप परंपरागत सब्जियों के साथ समय-समय पर उक्त और निम्न सब्जियों का भी सेवन करते रहेंगे ‍तो जीवनपर्यंत निरोगी और तंदुरुस्त बने रहेंगे।

ये सब्जियां हैं : तोटाकुरा, सोया, हरी अजवाइन, हरे प्याज की घास, अरबी पत्ता, अरबी जड़, पेठा, ब्रोकली, गांठ गोभी, रवल, कच्चे केले की सब्जी, कच्चे केले का तना, कच्चे केले का फूल, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, फ्रेंच बीन्स, ग्वार फली, सहजन की फली, पेठा, कमल ककड़ी, सुरतीकंद, अंवलामकाई, मूंगे की फली आदि।

बुधवार, 30 नवंबर 2016

चावल खाने से शरीर में इस प्रकार के होते है फायदे, शेयर करें

चावल खाने से शरीर में इस प्रकार के होते है फायदे, शेयर करें


अक्सर देखा जाता है कि चावल का सेवन करने से काफी लोग हिचकते है, उनका मानना होता है कि इससे मोटापा बढ़ता है और साथ ही इससे शरीर को नुकसान भी पहुंचाता है। इसके साथ ही जो लोग डायटिंग पर होते हैं वो तो इसका सेवन करने से कोसों दूर भाग जाते है। पर शायद आप नहीं जानते होंगे कि चावल का सेवन आपके शरीर के लिए काफी आवश्यक होता है। इसमें पाए जानें वाले पौष्टिक तत्व ना जानें कितनी बीमारियों से शरीर की रक्षा करते है। इसमें पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल्स काफी फायदेमंद होते है इसलिए डॉक्टर भी पेट खराब होने के बाद इसका सेवन करने की हिदायत देते हैं। यदि आप सफेद चावल खाना पसंद नहीं करती हैं तो इसकी जगह आप ब्राउन राइस का उपयोग कर सकती हैं। इसके सेवन से हमें कई तरह के फायदे देखने को मिलते है, आइये डालते है एक नजर चावल के सेवन से होने वाले फायदों पर…

1. एनर्जी

सफेद चावल की अपेक्षा यदि आप ब्राउन चावल का सेवन करेगीं तो इससे आपको सफेद चावल से कहीं ज्यादा एनर्जी मिलती है। इससे शरीर को कई तरह के पौष्टिक तत्वों के साथ कार्बोहाइड्रेट्स मिलता है, जिससे ब्रेन को मजबूती मिलती है और यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

2. कैंसर से बचाव

ज्यादातर घरों में सफेद चावलों का उपयोग किया जाता है, पर ब्राउन राइस में पाए जानें वाले पौष्टिक तत्व सफेद चावल से ज्यादा होते हैं। इसमें फाइबर की मात्रा पाई जाती है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत होती है, साथ ही इससे कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे से भी बचा जा सकता है।

3. हाई ब्लड प्रेशर

अक्सर देखा जाता है कि कोई भी शारीरिक बीमारी हो जाने के बाद से लोग सबसे पहले चावल को खाना छोड़ देते हैं, क्योंकि हर बीमारी के बढ़ने का कारण चावल को खाना बताया जाता है, पर हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए रोज एक कटोरी चावल खाना सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है। इसमें सोडियम की मात्रा नहीं होती है। जो शरीर के लिए फायदेमंद साबित होती है।

4. त्वचा में आए निखार

चावल का सेवन करने से यह शरीर के लिए तो फायेदमंद साबित होता ही है, साथ ही ये हमारी त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इससे कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं दूर हो जाती है। चावल के माढ में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा की झुर्रियों को दूरकर उसमें कसाव लाने का काम करता है। जिससे त्वचा निखरी नजर आती है।

5. शरीर को रखें ठंडा

चावल का सेवन सर्दी में कम और गर्मियों में ज्यादा करना चाहिए। क्योंकि चावल हमारे शरीर को ठंडक देने का काम करता है और गर्मियों में ये सेहत के लिए भी सही रहते हैं।

सोमवार, 28 नवंबर 2016

ज्यादा नमक का सेवन शरीर के लिए हो सकता हानिकारक

ज्यादा नमक का सेवन शरीर के लिए हो सकता हानिकारक


नमक हमारे खाने को स्वादिष्ट बनाने वाली सामग्रियों में से एक माना जाता है जिसके बिना कोई भी भोजन अधुरा रहता है। ये खाने के स्वाद को बढ़ाने का काम करता है। पर क्या आप जानते है कि खाने में नमक का सेवन एक सीमित मात्रा में करना ही अच्छा होता है, इसको ज्यादा मात्रा में लेने से ये हमारे स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। ज्यादा नमक का सेवन करने से होती है ये बिमारियां।

1. सूजन :

आप सूजन से पीड़ित हैं, तो इससे यही संभावना होती है कि आपके शरीर में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक बन रही है, क्योंकि ज्यादा नमक का सेवन शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाने का काम करता है। जिससे शरीर में सूजन आने लगती है। हालांकि सूजन का आना कोई बड़ी या गंभीर समस्या नहीं है फिर भी इन बातों से हमें सचेत होने की आवश्यकता है। जो आपके स्वास्थ के लिए बेहतर है।

2. उच्च रक्तचाप को बढ़ाता है :

अत्याधिक नमक का सेवन करने से शरीर का रक्त चाप बढ़ने लगता है। जिससे दिल की बीमारी के खतरे बढ़ जाते है। बताया जाता है कि शरीर में सोडियम की मात्रा के बढ़ने से इसका सीधा संबंध हमारे रक्त चाप के स्तर पर पड़ता है। इसलिए रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने के लिए आप कम से कम मात्रा में सोडियम का सेवन करें।

3. हृदय रोग का खतरा :

नमक के सेवन से होने वाले खतरे हमारे शरीर के लिए घातक होते हैं, जो एक गंभीर बीमारी को जन्म देकर शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। अत्याधिक मात्रा में नमक का सेवन करने से कोरोनरी हृदय रोग और स्ट्रोक होने के खतरे की भी संभावना बढ़ जाती है।

4. किडनी की समस्या :

हमारे शरीर में गुर्दे की अहम भूमिका होती है, यह शरीर के अवांछित पदार्थों को छानने में मदद करता है। पर यदि आप ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करते है तो सबसे ज्यादा असर हमारे गुर्दे पर पड़ता है। जिससे विषाक्त पदार्थ भी बाहर नहीं निकल पाते और शारीरिक परेशानिया बढ़ने लगती है। इससे किड़नी जैसे भयंकर रोग के होने की भी संभावना बढ़ जाती है।

5. त्वचा संबंधी समस्याएं :

ज्यादा नमक का सेवन करने से आपकी त्वचा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसका अत्याधिक सेवन इडीमा बीमारी को जन्म दे सकता है। इडीमा से पीड़ित व्यक्ति के पैरों, टखनों और हाथों में सूजन हो सकती है। इसके अलावा बहुत ज्यादा नमक का सेवन करने से मुंहासों के साथ ही त्वचा में रेशेस जैसी समस्या बढ़ने लगती है।

शनिवार, 26 नवंबर 2016

नारियल पानी से ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक उपचार, शेयर करें

नारियल पानी से ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक उपचार, शेयर करें


नारियल बाहर से दिखने में जितना हार्ड होता है उतना ही सॉफ्ट वह अंदर से होता है। किसी ने सही कहा है कि इंसान को अपना व्यक्तित्व भी एक नारियल के समान ही बनाना चाहिए, बाहर से शख्त और अंदर से नरम। नारियल का पानी भी ठीक उसी तरह है, यह पीने में तो फीका लगेगा लेकिन इसका फायदा आपके शरीर को बहुत मजबूत बनाएगा। जो लोग नारियल पानी पीने से बचते हैं वह इसे पीना शुरू कर दें क्योंकि तभी आपको फायदे से भरपूर इस पानी का लाभ मिल पाएगा।

नारियल पानी आपके शरीर को ठंडा तो करती ही है साथ ही डायजिस्टिव सिस्टम को भी स्ट्रांग बनाती है। इस पानी के कारण आपका हार्ट भी सही ढंग से काम करता है। नारियल पानी की मदद से शरीर के हर दाग-धब्बे मिटाए जा सकते हैं। जो लोग किसी कारण आग की चपेट में आकर जल जाते हैं या फिर किसी एक्सीडेंट के कारण उन्हें दाग को झेलना पड़ता है, ऐसे लोगों को नारियल पानी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यह हर तरह के नए-पुराने निशान मिटाने में सक्षम है।

1. नारियल पानी की मदद से हम अपने शरीर को हाइड्रेट करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए कहते हैं कि तप-तपाती गर्मी के मौसम में नारियल का पानी किसी अमृत से कम नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर जाकर तुरंत उसे ठंडा बनाता और एनर्जी देता। सादा पानी की जगह इस पानी को रोज़ पिएं और फायदा देखें।

2. ध्यान रहें, सिर्फ एक या दो दिन ही नहीं, बल्कि रोजाना एक ग्लास नारियल पानी पिएं। एक हफ्ते में शरीर का ब्लड प्रेशर बहुत नॉर्मल हो जाएगा और भविष्य में दोबारा इसके लिए दवा लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

3. मोटे लोगों के लिए नारियल पानी सबसे बेस्ट मानी जाती है अपना वजन कम करने के लिए। मोटापा में घंटों-घंटों भर अपना पसीना बहाने के बजाय इस पानी को पीया करें और फिर देखें कमाल, आपका वजन बड़ी तेज़ी से घटता चला जाएगा। नारियल पानी को अगर हम ‘कैलोरी-फ्री’ ड्रिंक कहे तो गलत नहीं होगा।

4. नारियल पानी में पोटैशियम की मात्रा मौजूद होती है। यह तो हम सभी जानते हैं कि पोटैशियम हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी मिनरल होती है। अगर रोजाना नारियल पानी पिएं तो यह कमी भी पूरी हो सकती है।

5. बता दें कि अगर आप एक हफ्ते भी नारियल पानी को पिएंगे, तो आपके शरीर में मैग्निशियम की कमी पूरी भी हो जाएगी। इससे इतना मैग्निशियम मिल सकता है कि आने वाले कई सालों तक बड़ी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।

गुरुवार, 24 नवंबर 2016

अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं तो कभी ना करें इन चीज़ों का सेवन

अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं तो कभी ना करें इन चीज़ों का सेवन


हाई ब्लड प्रेशर आजकल एक आम समस्या बन गई है लेकिन इसके होने का मुख्य कारण होता है हमारा खान पान और जीवन शैली ! अक्सर हम हाई ब्लड प्रेशर को एक आम समस्या समझकर इस पर ध्यान नहीं देते और लापरवाही बरतते हैं ! लेकिन हाई ब्लड प्रेशर होने पर हमें खान पान का काफी हद तक ध्यान रखना चाहिए क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर दूसरी कई बिमारियों का कारण बन सकती है जैसे तेज़ सिर दर्द, थकावट, पैरों में दर्द, जी घबराना और चिड़चिडा़पन !

लेकिन अगर हम हमारे खान पान और जीवन शैली पर थोड़ा ध्यान दें तो हाई ब्लड प्रेशर पर काबू पाया जा सकता है ! आइये आपको भी बताते हैं हाई ब्लड प्रेशर होने पर किन किन चीजों से दूर रहना चाहिए ! अगर आपको भी हाई ब्लड प्रेशर है तो ये जानकारी आपके लिए काफी मददगार होगी !

सोडियम/नमक से सेवन से करें परहेज
अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं तो जहाँ तक हो सके अपने भोजन में सोडियम/नमक का इस्तेमाल ना करें ! दिन में 2.3 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम ना खाएं, अगर आपकी उम्र 50 या उससे ज़्यादा है तो दिन में 1,500 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम/नमक खाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है !

मदिरा सेवन ना करें
शराब हाई ब्लड प्रेशर को और ज्यादा बढाती है इसलिए अगर आप शराब पीने के आदि हैं तो इसका सेवन बंद करें ! इस बात का ख़ास ख्याल रखें की एक साथ लगातार 4-5 ड्रिंक ना लें वरना आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है ! इस बात का भी ख्याल रखें की अगर आप रोज शराब पीने के आदि हैं तो अचानक शराब ना छोड़ें क्योंकि ऐसे में आपका ब्लड प्रेशर कई दिन तक बढ़ा रह सकता है. इसके लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें !

अंडे के पीले भाग को ना खाएं
अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है और अगर आप अंडे का सेवन करते हैं तो ध्यान रखें अंडे की जर्दी जो की अंडे का पीला हिस्सा होता है उसे ना कहें क्योंकि उसमे काफी अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है जो हाई ब्लड प्रेशर के लिए नुकसानदायक है !

फास्ट फूड से करें परहेज
चिप्स, पनीर, बिस्कुट सहित फास्ट फूड में बहुत ज्यादा मात्रा में कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है जो हाई ब्लड प्रेशर में बेहद नुकसानदायक है ! इसलिए अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं तो फास्ट फूड के सेवन से बचें !

आइसक्रीम ना खाएं
शायद आपको पता ना हो लेकिन आइसक्रीम में हैमबर्गर से भी ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है इसलिए हाई ब्लड प्रेशर होने पर आइसक्रीम से दूर रहें !

अचार से परहेज करें
अचार में भी सोडियम की अत्यधिक मात्रा होती है इसलिए हाई ब्लड प्रेशर होने पर अचार खाने से परहेज करें !

मांस और चिकन ना खाएं

वैसे चिकन में वसा की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन इसे पकाने के बाद इसमें कोलेस्ट्रॉल और फैट की मात्रा बढ़ जाती है जो हाई ब्लड प्रेशर में बहुत नुकसानदायक है ! तो अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं तो जहाँ तक हो सके मांस और चिकन से परहेज करें !

रविवार, 13 नवंबर 2016

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है ककड़ी

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है ककड़ी


ककड़ी जो कि सभी भारतीय सब्जियों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किये हुए है और फैमिली का हिस्सा है. ककड़ी को संस्कृत भाषा में “कर्कटी” कहा जाता है. यह गर्मी की ऋतु में खूब पैदा होती है और इसमें 90% पानी की मात्रा पाई जाती है जिसकी वजह से यह शरीर की गर्मी और उससे उत्पन्न होने वाली परेशानियों को समाप्त करती है. इसकी तासीर ठंडी होती है.

ककड़ी में कुछ मात्रा में प्रोटीन और काफी अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है. कैल्शियम, आयरन और फास्फोरस इसमें पाए जाने वाले मिनिरल्स हैं और विटामिन “सी” का भी यह एक उत्तम स्तोत्र है. ककड़ी की खासियत की बात की जाये तो इसमें वसा, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम नहीं पाया जाता है.

इसमें छीलने या बीज अलग करने जैसा कुछ नहीं होता है. इसे आसानी से धोकर सलाद के रूप खाया जाता है या फिर इसकी सब्जी बनाकर भी खाया जाता है. इसके अलावा खीरे की तरह इसका भी रायता बनाकर खाया जा सकता है जो कि बहुत स्वादिष्ट और न्यूट्रीशीयस होता है.

1 : मूत्र स्त्रावक

ककड़ी में बहुत अधिक पानी होता है इसलिये ये गर्मी में होने वाली पेशाब संबंधी समस्याओं जैसे पेशाब कम आना, पेशाब में जलन होना, पेशाब रुक-रुक कर होना आदि में बहुत लाभकारी है.

  • इसके लिए एक ककड़ी की गोल स्लाइसेस काट कर इन पर थोड़ी सी चीनी डालिए.
  • फिर इन पर नीबू का रस निचोड़ कर खाइए.
  • रोजाना दिन में 2 बार ऐसा करने से गर्मी में होने वाली पेशाब सम्बन्धी समस्याओं से कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता है.

2 : लू और तापघात से बचाने के लिए

तेज गर्मी में जिनको अक्सर घर या ऑफिस से बाहर निकलना पड़ता है उनके लू की चपेट में आने और तापघात होने की बहुत अधिक सम्भावना रहती है.

  • ऐसे में यदि धूप में निकलने से पहले ककड़ी का रायता खाया जाए तो लू और तापघात से बचा जा सकता है.
  • इसके लिए 1 कप दही अच्छी तरह फेंट लीजिये.
  • इसमें छोटे टुकड़ों में कटी हुई 1 ककड़ी, 1/2 प्याज़ और 1 बड़ा चम्मच ताजा पोदीने का पेस्ट मिलाइए.
  • इसे रोज़ाना धूप में निकलने से पहले खाने से लू और तापघात से बचाव मिलता है.

3 : कब्ज़ और डिहाइड्रेशन का उपचार

ककड़ी पाचन तंत्र को ठीक करती है, कब्ज़ दूर करती है और गर्मी से होने वाले डिहाइड्रेशन को भी दूर करती है.

  • इसके लिए आप आधा गिलास ककड़ी के रस में आधा गिलास टमाटर का रस मिला लीजिये.
  • इसमें स्वाद अनुसार नमक और पिसा हुआ जीरा डालकर रोजाना दिन में एक बार पीने से कुछ दिनों में कब्ज़ दूर हो जाती है और शरीर में पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन भी दूर होता है.

4 : खून साफ़ करने, डायबिटीज कंट्रोल करने, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और वजन पर नियंत्रण करने के लिए


  • यदि दोपहर का खाना खाने से आधा घंटे पहले रोजाना 2 ककड़ी खूब चबा-चबाकर खायी जाए तो ये खून साफ़ करती है जिससे पिम्पल्स नहीं होते, गर्मी में फोड़े-फुंसी नहीं होते, पित्त और एसिडिटी की शिकायत नहीं होती.
  • खाना अच्छी तरह पचता है, डायबिटीज कंट्रोल रहती है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है और वजन नहीं बढ़ता है.

शनिवार, 12 नवंबर 2016

रोजाना खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से होते हैं ये जबरदस्त फायदे

रोजाना खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से होते हैं ये जबरदस्त फायदे


रोजाना खाली पेट सुबह-सुबह लेसन की दो तीन कलियां खाने के बहुत जबरदस्त फायदे देखे गए हैं, लहसुन खाने से सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ता बल्कि इसके अनेक औषधीय गुण भी आप को स्वस्थ रखने में भरपूर मदद करते हैं, आप सोच भी नहीं सकते कि लहसुन की एक कली आपके शरीर के कितने लोगों को खत्म कर सकती है. यह बहुत सी बीमारियों की रोकथाम और उपचार करने में बेहद सक्षम होता है .यह एक विशेष प्रकार की प्राकृतिक एंटीबायोटिक दवा के तौर पर कार्य करता है, आयुर्वेद में भी लहसुन को सदा जवान बनाए रखने वाली औषधि का दर्जा दिया गया है.

हाई ब्लड प्रेशर और हाइपर टेंशन में लहसुन का उपयोग :

लहसुन खाने के हाई ब्लड प्रेशर में बहुत फायदे होते हैं हाई बी पी के लोगों के लिए रोजाना सुबह दो से तीन कलियां लहसुन की कच्ची खाना चाहिए इसके बाद भी अपनी दिनचर्या चालू करें क्योंकि रास्ता लोगों का मानना है लहसुन खाने से हाईपरटेंशन के लक्षणों में भी आप को भरपूर सुकून मिलता है लहसुन खाने से आपका ब्लड सर्कुलेशन नियमित होता है और इससे दिल के रोग संबंधी समस्याओं से भी निजात मिलती है और इसके अलावा आपका लीवर और मूत्रतंत्र भी सही तरीके से काम करते हैं.

डायरिया में लहसुन के उपयोग :

पेट की समस्याओं का जैसे कि डायरिया कब्ज मरोड़ा इन सब में भी लहसुन बहुत अच्छी तरह से काम करता है जबकि कुछ लोगों का इस तरह से मानना है कि अगर सुबह खाली पेट लहसुन खा लिया जाये तो तंत्रिकाओं से संबंधित बीमारियां भी दूर हो जाती है अगर किसी को डायरिया की दिक्कत है तो वह लहसुन का उपयोग कर सकता है.

अरुचि या भूख न लगना रोग में लहसुन का उपयोग :

रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन की दो से 3 कलियां खाने से आपका डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतरीन तरीके से काम करता है इसके अलावा यह आपकी भूख को भी खूब बढ़ाता है. और जैसे खाना देख कर खाने का मन नहीं होता जिसको अरुचि बोलते हैं याने खाने के प्रति रुचि नहीं दिखाना तो यह रोग भी आपको लहसुन का लगातार सेवन करने से ठीक हो जाता है और आप अच्छी तरह से खाना खाने लग जाते हैं, इसके अलावा यह आपके मानसिक तनाव को भी कम करने में बहुत सहायक होता है.

श्वसन तंत्र के रोग लहसुन खाने से दूर हो जाते हैं :

लहसुन के फायदे प्रतिदिन 3 से 4 सप्ताह तक रोजाना सुबह खाली पेट 3-4 लहसुन की कच्ची कलियां खाने से आपका श्वसन तंत्र मजबूत होता है इसके अलावा अगर आपको नजला जुखाम या निमोनिया या फिर बहुत पुराना सर्दी जुखाम अथवा फेफड़ों में कफ का जमाव और अस्थमा जैसी बीमारियां हो तो लगातार लहसुन का सेवन करने से इनमें बहुत लाभ देखा गया है.

लहसुन के औषधीय गुण :

  • लहसुन में सल्फर और यौगिक प्रचुर मात्रा में होने के कारण इसका स्वाद कड़वा होता है.
  • इसमें एलीसीन यौगिक होने के कारण यह एंटी-बैक्टिरीअल, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल और एंटी-ऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर होता है. इस वजह से लहसुन को काटकर या पीसकर  बनाकर खाना अच्छा माना जाता है.
  • लहसुन में एलीसीन तत्व के अलावा एजोइन तत्व और एलीन जैसे यौगिक पदार्थ भी होते हैं, जिसके कारण लहसुन और भी असरदार औषधि बन जाती है।
  • इसमें बैक्टिरीअल और वायरल संक्रमण को दूर करने की अदबुध क्षमता होती है.
  • लहसुन में बैक्टिरीअल और वायरल संक्रमण को रोकने की विशेषता के कारण यह स्किन फंगस, यीस्ट और कीड़ा से इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है।
  • झड़ते बालों की रोकथाम के लिए भी आप लहसुन का उपयोग किस तरह से कर सकते हैं लहसुन की पूरी गांठ को सरसों के तेल में हल्की आंच पर जब तक पकाएं जब तक की वह पूरी रात अच्छी तरह काली ना पड़ जाए इसके बाद उसके अंको का प्रयोग करें जिससे आपके झड़ते हुए बालों को रोकने में काफी मदद मिलेगी.
  • जहरीले कीटों की रोकथाम हेतु आप लहसुन की कलियां उनके आने वाले रास्ते पर जैसे के खिड़की दरवाजे अथवा नालियों पर लहसुन की कलियों को छील कर रख दें जिससे आपके घर में कीड़े मकोड़े अथवा सांप बिच्छू प्रवेश नहीं कर पाते हैं.
  • लहसुन वीर्यवर्धक भी होता है इसके लिए एक तोला लहसुन का रस एक तोला शहद बराबर मात्रा में मिला लें और ऐसे दिन में दो बार चाटें इससे पुरुषों में वीर्य वृद्धि होती है और शुक्राणुओं मैं भी वृद्धि होगी और धातु पहले से अधिक प्रबल और पुष्टिवर्धक हो जाता है.
  • अगर आपका मोटापा थुलथुल होने तक बढ़ गया है तो आपके लिए लहसुन से अच्छी कोई चीज नहीं हो सकती है इसके लिए आप लहसुन की दो कलियों को अच्छी तरह भून लें फिर उसमें सफेद जीरा सौंफ और सेंधा नमक नमक लगाकर इसका सेवन सुबह शाम खाली पेट करें.
  • मुंह में छाले हो जाने पर कच्ची लहसुन की कलियों को अच्छी तरह चबाएं अब पूरी तरह अपने मुंह में जीभ द्वारा फहरे ले जब लहसुन की कलियों से रस का तरल प्रवाह होगा आप की लार के साथ मिलकर छालों को ठीक कर देता है.

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

बीपी - ब्लड प्रेशर की समस्या, कारण और बचाव के उपाय

बीपी - ब्लड प्रेशर की समस्या, कारण और बचाव के उपाय

बीपी ब्लड प्रेशर  क्या होता है ? 

बीपी का नाम तो आपने सुना ही होगा, बीपी का पूरा नाम ब्लड प्रेशर इसको हिंदी में रक्तचाप भी कहते है। उच्च रक्तचाप यानि हाइपरटेंशन इसे आम भाषा में उच्च रक्तचाप कहते है यह एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है जो की इंसान की जान तक ले सकता है आज इस पोस्ट में हम निम्न टॉपिक पर बात करेंगे।

हमारी रक्त धमनियों में रक्त का जो दबाव रहता है उसे अंग्रेजी और सामान्य बोलचाल की भाषा में बीपी यानि ब्लॅड प्रेशर कहते है।

सामान्यतः बीपी कितना रहना चाहिए?

बीपी को एक उपकरण से मापा जाता है जिसे (Sphygmomanometer) कहते है एक सेहतमंद आदमी के लिए रक्तचाप सिकुड़ने के समय Systolic Blood Pressure 120 MMHG होता है और आराम की इस्थिति में Diastolic Blood Pressure 80 MMHG होता है इसे आमतोर पर 120/80 MMHG लिखा जाता है|

बीपी की समस्या कितने प्रकार की होती है ?

हाई बीपी (हाई ब्लड प्रेशर) : उच्च रक्तचाप - इसमें व्यक्ति का रक्तचाप नियत सीमा से ज्यादा हो जाता है।
लो बीपी (लो ब्लड प्रेशर) : निम्न रक्तचाप - इसमें व्यक्ति का रक्तचाप नियत सीमा से काम हो जाता है।

बीपी की समस्या के क्या क्या कारण है?

बीपी की समस्या के मुख्य कारण और प्रकार निम्न है:

जब इंसान के शरीर में रक्त दाब अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है तो उसे उच्च रक्तचाप का रोग कहा जाता है, जिसकी वजह से दिल की धमनिया मोटी हो जाती है और इस वजह से रक्त प्रवाह में अवरोध होता है, उच्च रक्तचाप के मुख्य कारण है- मोटापा, तनाव, मादक पदार्थो का सेवन करना, डायबिटीज आदि.

बीपी (उच्च रक्तचाप) के लक्षण क्या होते है

इस रोग में रोगी को सर दर्द का अधिक होना, दिल की धडकनों का बढ़ना, अजीर्ण आना, नींद नहीं आना, तोडा से काम से सांसे फूलना, बार-बार पेशाब आना आदि.

उच्च रक्तचाप दो तरह का होता है – स्थाई और अस्थाई.

स्थाई – स्थाई रक्तचाप में नकसीर बहना , ऐसा लगना की सांस बंद हो रही है, घबराहट आदि.
अस्थाई – अस्थाई रक्तचाप में सर भरी होना , नींद न आना, दिल धडकनों का तेज होना आदि.

बीपी की समस्या हो जाए तो क्या करें?

यदि किसी को उच्च रक्तचाप है तो इसको तभी नियन्त्रण किया जा सकता है जब रोगी उचित परहेज करे. आइये जानते है की कैसे उच्च रक्तचाप को नियन्त्रण किया जा सकता है.
  • 7 से 10 मुनक्को को रात को 1 कप पानी में भिगो ले और फिर सुबह खली पेट इसका सेवन करे, साथ ही मुनक्को के बचे पानी को भी पीते रहे, कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से उच्च रक्तचाप दूर हो सकता है
  • उच्च रक्तचाप को दूर करने में फलों और सब्जियों की भूमिका एहम रहती है, आप इन फलों और सब्जियों का प्रयोग कर सकते है जैसे – पपीता, टमाटर, आमला, पुदीना, शहद, छाछ, अरबी, पेठा, आलू, टिंडा, ककड़ी, आदि. इन का प्रयोग अधिक से अधिक करें इससे भी उच्च रक्तचाप को दूर किया जा सकता है.
  • सुबह उठकर खली पेट नीम की 20 से 25 ग्राम पत्तियों का रस पिटे रहने से उच्च रक्तचाप दूर हो सकता है.
  • लहसुन उच्च रक्तचाप को नियंत्रि करने में एहम भूमिका निभाता है, 6 से 7 बूंद लहसुन के रस में 3 चम्मच पानी मिलाकर दिन में 4 बार पीते रहने से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है.
  • थोड़े से पानी में आधा कप लौकी का रस मिलाकर दिन में 3 बार लेने से कुछ ही समय में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है.
  • सुबह उठकर खाली पेट पानी गर्म करे फिर उसमे नींबू के रस को मिलाये और रोज कुछ दिनों तक ऐसा करे, यह एक कारगर वैदिक उपाय है.
  • उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में केले का तना भी एहम भूमिका निभाता है. आप केले के तने का आधा कप रस रोजाना दिन में 2 बार पिए, यह कुछ दिनों में आपके ब्लड प्रेशर को लेवल कर देगा.
  • दूध भी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है. गाय का दूध का सेवन रोजाना सुबह और शाम करें.
  • बाजार में मिलने वाले जंक फ़ूड से हमेशा दूर रहें. 
  • नमक की मात्र कम करें 
  •  नियमित रूप से व्यायाम करें और स्वास्थयवर्धक भोजन करें। 

बीपी (ब्लड प्रेशर) का बढ़ना खतरे का संकेत होता है, यदि सही समय पर परहेज नहीं किया गया तो आपको दिल का दौरा भी पद सकता है, इन अयूर्वेदिक उपायों से आप इस बीमारी को नियंत्रित कर सकते है लेकिन ध्यान रखें परहेज जरुर करे. तो बस देर किस बात की आज से बताये गए टिप्स के द्वारा अपने उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कीजिये और हमेशा स्वस्थ रहिये।  

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अगर आपकी ज़िन्दगी में है इन 5 रोगों का गम, तो रोज दबाकर खाओ सलजम, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

अगर आपकी ज़िन्दगी में है इन 5 रोगों का गम, तो रोज दबाकर खाओ सलजम, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

➡ शलजम खाने के फायदे :

शलजम की सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। विटामिन ए, सी और के से भरपूर इस हरे पत्तेदार को सलाद के रूप में भी खाया जाता है। इसमें कम कैलोरी होती है, जिस वजह से ये वजन कम करने वालों के लिए एक बेहतर विकल्प है। फाइबर से भरपूर ये सब्जी पाचन को बेहतर करने और आपको कब्ज जैसी गंभीर समस्या से बचाने में भी सहायक है। 

पाचन बढ़ाने में सहायक- 

शलजम में भरपूर मात्रा में फाइबर होते हैं, जिस वजह से ये मल त्याग में सुधार करने में सहायक है। अगर आप कब्ज की समस्या से पीड़ित हैं, तो ये सब्जी जरूर खाएं।

इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक- 

अगर आप बार-बार सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित होते हैं, तो शलजम को अपनी डायट में जरूर शामिल करें। ये इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक है। पोषक तत्वों और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर ये सब्जी आपको स्वस्थ रखती है।

हड्डियों के लिए बेहतर- 

विटामिन और पोटेशियम के अलावा शलजम कैल्शियम का भी एक समृद्ध स्रोत है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है। 

खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार– 

शलजम में पित्त या बाइल को अधिक अवशोषित करने की क्षमता होती है, जिससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होने में मदद मिलती है। इस तरह ये सब्जी हृदय रोगों के खतरे को भी कम करने में मदद करती है।

ब्लड प्रेशर कम करती है- 

एक अध्ययन के अनुसार, शलजम में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है, जिस वजह से ये आपकी धमनियों को फैलाने और शरीर से सोडियम जारी करने में सहायक है।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

शिमला मिर्च के इन फायदों को जानकर, आप रोज़ खाएंगे ये हरी सब्ज़ी

शिमला मिर्च के इन फायदों को जानकर, आप रोज़ खाएंगे ये हरी सब्ज़ी


शिमला मिर्च को कौन नहीं जानता? हर हिन्दुस्तानी रसोई में इसे देखा जा सकता है और इसे बड़े चाव से सब्जी के तौर पर खाया जाता है। शिमला मिर्च को अन्य सब्जियों में मिलाकर न सिर्फ सब्जियों की रंगत बेहतर की जाती है बल्कि इसे अन्य सब्जियों में बतौर सहायक मिलाने पर सब्जियों का जायका भी जबरदस्त हो जाता है। मजे की बात ये भी है कि आदिवासी अंचलों में इसे अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है। यहाँ तक कि आधुनिक विज्ञान भी इसके औषधीय गुणों के भरपूर पैरवी करता है। हमारे हर्बल साइंस एक्सपर्ट डॉंक्टर दीपक आचार्य ने हमें शिमला मिर्च के फायदों के बारे में बता रहे हैं।

कॉलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल करे :

शिमला मिर्च को आदिवासी कोलेस्ट्राल कम करने के अति उत्तम मानते हैं। आधुनिक शोधों से ज्ञात होता है कि शिमला मिर्च शरीर की मेटाबोलिक क्रियाओं को सुनियोजित करके ट्रायग्लिसेराईड को कम करने में मदद करती है।

हॄदय और सांस की समस्याओं में फायदेमंद :

आधुनिक शोधों के अनुसार शिमला मिर्च में बीटा केरोटीन, ल्युटीन और जिएक्सेन्थिन और विटामिन सी जैसे महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं। शिमला मिर्च के लगातार सेवन से शरीर बीटा केरोटीन को रेटिनोल में परिवर्तित कर देता है, रेटिनोल वास्तव में विटामिन ए का ही एक रूप है। इन सभी रसायनों के संयुक्त प्रभाव से हॄदय की समस्याओं, ओस्टियोआर्थरायटिस, ब्रोंकायटिस, अस्थमा जैसी समस्याओं में जबरदस्त फायदा होता है।

वज़न कम करने में मददगार :

पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार शिमला मिर्च वजन कम करने के लिए एक बेहतर उपाय है। वसा और कार्बोहाईड्रेड्स की कम मात्रा के पाए जाने के कारण यह शरीर के लिए उत्तम होती है।

जोड़ों के दर्द में आराम :

माना जाता है कि जो लोग अक्सर शिमला मिर्च का सेवन करते हैं उन्हें कमर दर्द, सायटिका और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं कम होती है। शिमला मिर्च में पाया जाने वाला प्रमुख रसायन केप्सायसिन दर्द निवारक माना जाता है।

शारीरिक शक्ति बढ़ाए :

आदिवासी हर्बल ज्ञान पर भरोसा किया जाए तो शिमला मिर्च शारीरिक शक्ति को मजबूत बनाने के लिए एक मददगार उपाय है। शिमला मिर्च में भरपूर मात्रा में विटामिन्स, खास तौर पर विटामिन ए, बी और सी। इसमें पाए जाने वाले रसायन शारीरिक मजबूती प्रदान करते हैं।

तनाव दूर करे :

शिमला मिर्च में एक प्रमुख रसायन के तौर पर लायकोपिन भी पाया जाता है जिसे माना जाता है कि यह शारीरिक तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए बड़ा कारगर होता है।

ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल :

डाँग- गुजरात के हर्बल जानकार शिमला मिर्च को उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर) को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। इनके अनुसार सब्जी के तौर पर शिमला मिर्च का ज्यादा से ज्यादा सेवन बड़ा कारगर होता है।

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

छुहारा और खजूर के उपचार और चमत्कारिक फ़ायदे

छुहारा और खजूर के उपचार और चमत्कारिक फ़ायदे


छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है। 
  • छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है। 
  • छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है। 
  • छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है। 
  • छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं। 
  • साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है। 
  • खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है। 
  • लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है। 
  • भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है। 
  • प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुआरे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है। 
  • छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी। 
  • अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें। 
  • जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा। 
  • दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है। 
  • घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाएं,घाव तुरंत भर जाएगा। 
  • अगर शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो तीन महीने तक छुहारे का सेवन आपको समस्या से मुक्ति दिला देगा। इसके लिए प्रात: खाली पेट दो छुहारे टोपी समेत दो सप्ताह तक खूब चबा-चबाकर खाएं। तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे खाएं और चौथे सप्ताह से 12वें सप्ताह तक चार-चार छुहारों का रोज सेवन करें। इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी 

अति लाभकारी है खजूर :

शीतकाल में खजूर सबसे अधिक लोकप्रिय मेवा माना जाता है। घर घर में प्रयोग किया जाने वाला यह खाद्य फल है, जिसे अमीरगरीब ब़डे चाव से खाते हैं। होली के पर्व पर इसकी खूब मनुहार चलती है। खजूर रेगिस्तानी सूखे प्रदेश का फल है। प्रकृति की यह अनुपम देन खास ऐसे प्रदेशों के लिए ही है, जहां जिन्दगी ब़डी कठिन होती है और जहां बरसात या पीने के पानी की कमी होती है। इसके प़ेड हमें जीवन से ल़डना सिखाते हैं, इसीलिए इसके खाने का प्रचलन ज्यादातर सूखे रेगिस्तानी इलाकों में ही होता है। सूखे खजूर को छुहारा या खारकी कहते हैं। पिंड खजूर भी इसका दूसरा नाम है। 
खजूर ताजा व सूखे को ही खाया जाता है। अरब प्रदेशों में आम की तरह खजूर भी रस भरे होते हैं, पर वे हाथ लगाते ही कुम्हला जाते हैं। सूखे किस्म की खजूर को पूरा सुखाया जाता है। इसके टुक़डों को मुखवास व खटाई में पचाकर तथा साग बनाकर भी खाया जाता है। अरब लोगों के लिए खजूर लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है और वे रोज इसे थ़ोडा बहुत खाते ही हैं। 
खाने के अलावा अन्य मिष्ठान्न व बेकरी में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसका मुरब्बा, अचार व साग भी बनता है। खजूर से बना द्रव्य शहद खूब लज्जतदार होता है और यह शहद दस्त, कफ मिटाकर कई शारीरिक प़ीडाआें को दूर करता है। 
श्वास की बीमारी में इसका शहद अत्यन्त लाभप्रद होता है। इससे पाचन शक्ति ब़ढती है तथा यह ठंडे या शीत गुणधर्म वाला फल माना जाता है। सौ ग्राम खजूर में ०४ ग्राम चर्बी, १ २ ग्राम प्रोटीन, ३३८ ग्राम कार्बोदित पदार्थ, २२ मिली ग्राम कैल्शियम, ३८ मिलीग्राम फास्फोरस प्राप्त होती है। 
विटामिन ए बी सी, प्रोटीन, लौह तत्व, पोटेशियम और सोडियम जैसे तत्व मौजूद रहते हैं। बच्चों से लेकर ब़ूढे, बीमार और स्वस्थ सभी इसे खा सकते है। 
खजूर खाने के पहले इसे अच्छी तरह से धो लेना चाहिए, क्योंकि प़ेड पर खुले में पकते हैं तथा बाजार में रेहडी वाले बिना ढके बेचते हैं, जिस पर मक्खी मच्छर बैठने का अंदेशा रहता है। आजकल खजूर छोटी पैकिंगों में भी मिलते हैं। वे दुकानदार स्वयं पोलीथीन में पैक कर अपनी दुकान का नाम लगा देते हैं। वे इतने साफ नहीं होते।
वैज्ञानिक ढंग से पैक किए खजूर ही खाने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार १०० ग्राम से अधिक खजूर नहीं खाने चाहिए। इससे पाचन शक्ति खराब होने का भय रहता है। अगर कोई बहुत ही दुबला पतला हो, तो खजूर खाकर दूध पीने से उसका वजन भी ब़ढ जाता है। यद्यपि खजूर हर प्रकार से गुणकारक है, परन्तु इसमें विरोधाभास भी पाया जाता है। 
शीतकाल में जो इसे खाते हैं, वे इसे गरम मानते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में इसे शीतल गुण वाला माना है, इसलिए गरम तासीर वालों को यह खूब उपयोगी व माफिक आता है। 
ठंडा आहार जिनके शरीर के अनुरूप नहीं होता, उन्हें खजूर नहीं खाना चाहिए। कुछ लोग घी में रखकर उसका पेय बनाकर पीते हैं। ये अति ठंडा होता है। जिन्हें खजूर न पचता हो, उन्हें नहीं खाना चाहिए। 
यह वायु प्रकोप को मिटाता है, पित्तनाशक है। पित्त वालों को घी के साथ खाने से असरदायक होता है। यह मीठा स्निग्ध होने से थ़ोडे प्रमाण में पित्त करता है, परन्तु ग़ुड, शक्कर, केले व अन्य मिठाइयों से कम पित्त करता है। 
कफ के रोगी को चने के दलिये (भुने हुए चने) के साथ खाना चाहिए। धनिए के साथ खाने से कफ का नाश होता है। यह औषधि का काम तो करता ही है, व्रण, लौह विकार, मूर्च्छा, नशा च़ढना, क्षय रोग, वार्धक्य, कमजोरी, गरमी वगैरह के साथ कमजोर मस्तिष्क वालों के लिए भी यह दवा का काम करता है। 
खजूर मांसवर्धक होने के कारण शाकाहारी लोगों की अच्छी खुराक माना जाता है। यह भी माना जाता है कि खजूर को दूध में उबाल कर उस दूध को पीने से नुकसानदायक होता है, इसलिए खजूर खाने व दूध पीने के बीच २३ घंटों का अंतर रखना चाहिए। 
बच्चों को पूरा खजूर न देकर उसकी गुठली निकाल टुक़डे कर खिलाना चाहिए। खजूर एक तरह से अमृत के समान है। यह आंखों की ज्योति व याददाश्त भी ब़ढाता है। 
दांतों से लहू निकले या मसूडे खराब हों, तो यह दवा का काम करता है। इसके खाने से बाल कम झ़डते हैं। खजूर व उसका शहद एक तरह से कुदरत की अनुपम देने हैं, इसलिए खूब खाएं व खूब खिलाएं।

खजूर विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। सदियों से यह मध्यपूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानी इलाकों का प्रमुख भोजन बना हुआ है क्योंकि वहाँ इसके सिवा और कुछ उत्पन्न नहीं होता। यह ताज़ा और सूखा, दोनों तरह के फलों में गिना जा सकता है। पेड़ पर पके खजूर ज़्यादा स्वादिष्ट होते हैं। लेकिन जल्दी खराब हो जाने की वजह से इसे धूप में सुखाया जाता है। सूखे हुए खजूर का वजन करीब ३५ प्रतिशत कम हो जाता है। ताज़े खजूर के मुकाबले सूखे खजूर में रेशों की मात्रा अधिक होती है। खजूर में पौष्टिक तत्व काफी मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से ग्लुकोज और फ्रुक्टोज के रूप में नैसर्गिक शक्कर हमारे शरीर को मिलती है। इस तरह की शक्कर शरीर में शोषण के लिए तैयार रहती है, इसलिए यह आम शक्कर से अच्छी होती है। रमज़ान के पवित्र महिने में खजूर खा कर ही उपवास की समाप्ति की जाती है। खजूर अपने आप में एक टॉनिक भी है। खजूर के साथ उबला हुआ दूध पीने से ताकत मिलती है। खजूर को रात भर पानी में भीगो कर रखिये। फिर इसी में थोड़ा मसल कर उसका बीज निकाल दीजिए। यह हफ्ते में कम से कम दो बार सुबह लेने से अपने दिल को मजबूती मिलती है। यदि कब्ज की शिकायत है तो रात भर भीगाया हुआ खजूर सुबह महीन पीस कर लेने से यह शिकायत दूर हो सकती है। बकरी के दूध में खजूर को रात भर भीगो कर रखिए। सुबह इसी में पीस कर थोड़ी दालचिनी पावडर और शहद मिलाइए। इसके सेवन से बांझपन दूर हो सकता है। खजूर के पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी होता है। इसकी पत्तियाँ और तना घर के लिए लकड़ी बाड़ और कपड़े बनाने के काम आते हैं। पत्तियों से रस्सी, सूत और धागे बनाए जाते हैं जिनके प्रयोग से सुंदर टोकरियों और फर्नीचरों का निर्माण होता है। फल की डंडियों और पत्तियों के मूल हिस्से इंधन के काम आते हैं। खजूर से अनेक खाद्यपदार्थों का निर्माण होता है जिनमें सिरका, तरह-तरह की मीठी चटनियाँ और अचार प्रमुख हैं। अनेक प्रकार के बेकरी उत्पादों के लिए इसके गूदे का प्रयोग होता है। अरबी व्यंजन कानुआ और भुने हुए खजूर के बीज सारे अरबी समाज में लोकप्रिय हैं। यहाँ तक कि इसकी कोपलों को शाकाहारी सलाद में अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक समझा जाता है। विश्व भोजन एवम कृषि संस्थान के अनुसार विश्व में लगभग ९ करोड़ खजूर के वृक्ष हैं। हर खजूर का जीवन एक सौ सालों से अधिक होता है। इनमें से साढ़े छे करोड़ खजूर के वृक्ष केवल अरब देशों में हैं जिनसे प्रतिवर्ष २ करोड़ टन खजूर के फल हमें प्राप्त होते है। खजूर का फल चार-पाँच साल में फलना प्रारंभ हो जाता है और दस बारह सार में पूरी उत्पादन क्षमता पा लेता है। खजूर की ऊपरी सतह चिकनी होने से धूल मिट्टी बैठने की संभावना होती है। इसलिए खजूर खरीदते समय सही पैकिंग वाला ही खरीदना चाहिए और प्रयोग में लाने से पहले साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। सर्दियों में खजूर खाओ, सेहत बनाओ सर्दियों में खजूर खाओ, सेहत बनाओ : खजूर मधुर, शीतल, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देने वाला है। यह रक्त, मांस व वीर्य की वृद्धि करता है। हृदय व मस्तिष्क को शक्ति देता है। वात-पित्त व कफ इन तीनों दोषों का शामक है। यह मल व मूत्र को साफ लाता है। खजूर में कार्बोहाईड्रेटस, प्रोटीन्स, कैल्शियम, पौटैशियम, लौह, मैग्नेशियम, फास्फोरस आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। 

खजूर के उपयोग : 

मस्तिष्क व हृदय की कमजोरीः 
रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है। मलावरोधः रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है। कृशताः खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है। 
रक्ताल्पताः 
खजूर रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता है। 
शुक्राल्पता : 
खजूर उत्तम वीर्यवर्धक है। गाय के घी अथवा बकरी के दूध के साथ लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है। 
नशे का जहर : 
किसी को नशा करने से शरीर में हानी हो गयी है ... नशे का जहर शरीर मै है...हॉस्पिटल मै भर्ती होने की नौबत आ रही हो ...ऐसे लोग भी खजूर के द्वारा जहर कों भगा कर स्वास्थ्य पा सकते है 5 से 7 खजूर अच्छी तरह धोकर रात को भिगोकर सुबह खायें। बच्चों के लिए 2-4 खजूर पर्याप्त हैं। दूध या घी में मिलाकर खाना विशेष लाभदायी है। होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है। 
पोषक तत्वों से भरपूर खजूर: 
प्रकृति ने मनुष्य को यूं तो बहुत कुछ दिया है पर हम प्रकृति की दी हुई इस अनमोल सम्पदा को ठीक प्रकार से उपयोग करना नहीं जानते। सर्दियों की मेवा के रूप में प्रकृति ने हमें बहुत सी चीजें दी हैं, जिनमें खजूर की मिठास का भी प्रमुख स्थान रहा है। यह दिल, दिमाग, कमर दर्द तथा आंखों की कमजोरी के लिए बहुत गुणकारी है। खजूर खाने से शरीर की आवश्यक धातुओं को बल मिलता है। यह छाती में एकत्रित कफ को निकालता है। खजूर में 60 से 70 प्रतिशत तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी वस्तु है। खाने में तो खजूर बहुत स्वादिष्ट होती ही है, सेहत की दृष्टि से भी यह बहुत गुणकारी है। इसके अलावा विभिन्न बीमारियों में भी खजूर का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है। डालते हैं, 
खजूर के गुणों पर एक नजर : 
कमजोरी : खजूर 200 ग्राम, चिलगोजा गिरी 60 ग्राम, बादाम गिरी 60 ग्राम, काले चनों का चूर्ण 240 ग्राम, गाय का घी 500 ग्राम, दूध दो लीटर और चीनी या गुड़ 500 ग्राम। इन सबका पाक बनाकर 50 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है। 
बिस्तर पर पेशाब : 
छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं। 
मासिक धर्म : 
छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है। 
दांतों का गलना : 
छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं। 
रक्तचाप : 
कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगी। 
कब्ज : 
सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए। 
मधुमेह : 
मधुनेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं। 
पुराने घाव : 
पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं। 
आंखों के रोग : 
खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं। 
खांसी : 
छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है। 
जुएं : 
खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

आखिर क्यों दी जाती है बादाम भिगोकर खाने की सलाह.!!

आखिर क्यों दी जाती है बादाम भिगोकर खाने की सलाह.!!




आपके घर के बड़े बुज़ुर्गों ने कभी न कभी आपको ये बात ज़रूर बताई होगी, कि बादाम भिगोकर खाने से बहुत फायदे होते हैं। हालांकि, शायद ही आपको इसके फायदे विस्तार से बताए गए हों। इसलिए हम आपके लिए लाए हैं ऐसे 6 कारण जिनकी वजह से भीगे हुए बादाम खाने से आपके पूरे शरीर को फायदा पहुंचेगा। लेकिन उससे पहले हम आपको बताएंगे भीगे बादाम में ऐसा क्या ख़ास होता है।

भीगे बादाम क्‍यों बेहतर हैं?

बादाम अपने असीम स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के लिए जाना जाता है। और सबसे ज्‍यादा यह याद्दाश्‍त को बढ़ने में मदद के लिए जाना जाता है। बादाम आवश्‍यक विटामिन और मिनरल जैसे विटामिन ई, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। लेकिन इन सभी पोषक तत्‍वों को अवशोषित करने के लिए, बादाम को खाने से पहले रात भर पानी में भिगोना चाहिए। ऐसा इसलिए क्‍योंकि बादाम के भूरे रंग के छिलके में टनीन होता है जो पोषक तत्‍वों के अवशोषण को रोकता है। एक बाद बादाम को पानी में भिगोने से छिलका आसानी से उतर जाता है और नट्स को पोषक तत्‍वों को रिहा करने की अनुमति देता है। भीगा हुआ बादाम पाचन में भी मदद करता है। यह लाइपेज नामक एंजाइम की विज्ञप्ति करता है जो वसा के पाचन के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा भीगे हुए बादाम आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अन्‍य कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता हैं।

1. वजन घटाने में मददगार :
बादाम वजन घटाने में भी मददगार होते हैं। इसमें मोनोअनसेचुरेटेड फैट आपकी भूख को रोकने और पूरा महसूस करने में मदद करता है। भीगा हुआ बादाम एंटीऑक्‍सीडेंट का भी अच्‍छा स्रोत हैं। यह मुक्‍त कणों के नुकसान से बचाकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकता है। भीगे बादाम में विटामिन B17 और फोलिक एसिड कैंसर से लड़ने और जन्‍म दोष को दूर करने के लिए महत्‍वपूर्ण होता हैं।

2. दिल को स्वस्थ रखें :
जर्नल ऑफ न्‍यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्‍ययन के अनुसार, बादाम एक बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट एजेंट हैं, जो एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल के ऑक्‍सीकरण को रोकने में मदद करता है। बादाम के ये गुण दिल को स्‍वस्‍थ रखने और पूरे हृदय प्रणाली को नुकसान और ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस से बचाने में मदद करता है। अगर आप दिल की बीमारी के किसी भी रूप से पीड़ि‍त हैं तो स्‍वस्‍थ रहने के लिए अपने आहार में भीगे हुए बादाम को शामिल करें।

3. हाई ब्‍लड प्रेशर को नियंत्रित करें :
बादाम ब्‍लड प्रेशर के लिए भी अच्‍छे होते हैं। जर्नल फ्री रेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने पाया कि बादाम का सेवन करने से ब्‍लड में अल्‍फा टोकोफेरॉल की मात्रा बढ़ जाती है, जो किसी के भी रक्‍तचाप को बनाये रखने के लिए महत्‍वपूर्ण होता है। अध्‍ययन से यह भी पता चला कि नियमित रूप से बादाम खाने से एक व्‍यक्ति का ब्‍लड प्रेशर नीचे लाया जाता है। और यह 30 से 70 वर्ष की उम्र के बीच के पुरुषों में विशेष रूप से प्रभावी था।

4. गर्भस्थ शिशु के विकास में मदद :
भीगे हुए बादाम में फॉलिक एसिड काफी होता है, ये पोषक तत्व गर्भ के शिशु के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के विकास में मददगार साबित होता है। इसके अलावा, जब बादाम को भिगा दिया जाता है तो उन्हें खाना आसान हो जाता है, गर्भवती महिलाओं की कमज़ोर पाचन क्रिया के लिए ये खाना अच्छा होता है।

5. पाचन क्रिया बनाएं बेहतर :
भीगे हुए बादाम पाचन क्रिया को मज़बूत और स्वस्थ बनाता है। जर्नल ऑफ फूड साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में ये पाया गया कि भीगे कच्चे बादाम खाने से पेट जल्दी साफ होता है और प्रोटीन पचाना आसान हो जाता है। बादाम का छिलका निकल जाने से उसके छिलते में मौजूद एंजाइम अलग हो जाते हैं और इस वजह से फैट तोड़ने में आसानी होती है। ऐसे में पाचन क्रिया और पोषक तत्वों का अवशोषण आसान हो जाता है।

6. बैड’कॉलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण :
उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या हमारे देश में सबसे आम बीमारियों में से एक होती जा रही है। उच्च कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग और दिल की धमनियों में रुकावट समेत कई प्रकार के रोगों का एक बड़ा कारण है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए बादाम आपकी मदद कर सकता है। बादाम शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाने में ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में बहुत मदद करता है।

रात में पानी में भिगोकर सुबह छिलका उतार कर खाना से पढ़ने वाले बच्चों के लिए तो यह बहुत ही फायदेमंद सिद्ध होता हैं। बादाम खाना खाने के बाद शुगर और इंसुलिन का लेवल बढ़ने से रोकता है। जिससे डायबिटीज से बचा जा सकता है। तो फिर किस बात की देरी है, रोज सुबह भीगे बादाम खाकर आप भी अपने शरीर को पोषण से भरपूर करें।

रविवार, 11 सितंबर 2016

हाई ब्‍लड प्रेशर के लिए घरेलू नुस्‍खे

हाई ब्‍लड प्रेशर के लिए घरेलू नुस्‍खे


हाई ब्लड प्रेशर आजकल सामान्य हो चला है। इसकी बड़ी वजह अनियमित दिनचर्या और आधुनिक जीवन शैली है। ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी लोग अधिक तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं।

हाई ब्लड प्रेशर में चक्कर आने लगते हैं, सिर घूमने लगता है। रोगी का किसी काम में मन नहीं लगता। उसमें शारीरिक काम करने की क्षमता नहीं रहती और रोगी अनिद्रा का शिकार रहता है। इस रोग का घरेलू उपचार भी संभव है, जिनके सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने से बिना दवाई लिए इस भयंकर बीमारी पर पूर्णत: नियंत्रण पाया जा सकता है। जरूरत है संयमपूर्वक नियम पालन की। आइए जानें हाई ब्लड प्रेशर के लिए घरेलू उपाय।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए घरेलू उपाय :

1) नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए यह बात सबसे महत्वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए।
2) उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।
3) एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।
4) जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है।
5) तरबूज के बीज की गिरि तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें।
6) बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।
7) पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं। 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा।
8) हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है, इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा-चबाकर खाएं।
9) नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट चलें। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है।
10) सौंफ़, जीरा, शक्कर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें।
11) पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीयें, लाभ होगा।
12) करेला और सहजन की फ़ली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।
13) गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खाएं, आटे से चोकर न निकालें।
14) ब्राउन चावल उपयोग में लाए। इसमें नमक, कोलेस्टरोल और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है।
15) प्याज और लहसुन की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्शियम युक्त मैल पैदा करता है
जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।

16) तीन ग्राम मेथीदाना पावडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ मालूम होता है।