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शनिवार, 7 अप्रैल 2018

दिन में 2 चम्मच दही का सेवन करने से कुछ ही दिनों में जड़ से खत्म हो जायेंगी ये बीमारियां!

दिन में 2 चम्मच दही का सेवन करने से कुछ ही दिनों में जड़ से खत्म हो जायेंगी ये बीमारियां!


दही खाना बहुत लोगों को पसंद होता है. पहले के समय में जब कोई घर से बाहर कोई शुभ काम करने के लिए जाता था तो घर के बड़े-बूढ़े उस व्यक्ति को बाहर जाने से पहले दही खिलाते थे, क्योंकि दही खाकर काम पर जाने से काम में सफलता मिलती है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दही खाकर घर से बाहर जाना शुभ ही नहीं होता, बल्कि दही खाने के बहुत से फायदे भी होते हैं. शायद आपको ना पता हो कि दही में कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं जिसकी वजह से दही बहुत जल्दी व्यक्ति के शरीर में पच जाता है.

जिस भी व्यक्ति को पेट से जुड़ी हुई कोई समस्या होती है जैसे एसिडिटी,कब्ज़ रहता है अगर वो लोग इन समस्याओं से निजात पाना चाहते हैं, तो उन्हें हर रोज कम से कम 2 बार दही का सेवन करना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति के पेट में मौजूद गर्मी दूर हो जाती है. दही में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, राइबोफ्लेविन, विटामिन-B पाए जाते हैं. आज हम आपको दही के कुछ और ऐसे फायदे बताने जा रहे हैं जिनसे आप अभी तक अनजान होंगे.
हृदय रोगों से निजात
एक दिन में 2 बार दही का सेवन करने से व्यक्ति के दिल की धड़कन सही रहती है. दही का सेवन करने से व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, दिल से जुड़े हुए रोग और गुर्दों की बीमारियों से निजात मिलती है. वहीँ दही कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने से भी रोकता है.


बवासीर
बवासीर के मरीज अगर दिन में खाना खाने के बाद 1 गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीते है तो उन्हें बवासीर की बीमारी से छुटकारा मिलता है.


जोड़ों में दर्द
जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे उसके जोड़ों में दर्द होने लगता है. जिस भी व्यक्ति को जोड़ों में दर्द रहता है उन्हें हर रोज दही में हिंग का छोंका लगाकर खाना चाहिए. ऐसा कुछ दिनों तक करने से व्यक्ति के जोड़ों में दर्द की समस्या से निजात मिलती है.


हड्डियों को करता है मजबूत
ये तो आपको भी पता होगा कि दही में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है. जो व्यक्ति के शरीर में मौजूद हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. वहीँ दही के सेवन से दांतों और हदियाओं में भी मजबूती आती है.

शनिवार, 17 मार्च 2018

इन उपायों को करने के बाद जड़ से खत्म हो जाएगी बवासीर

इन उपायों को करने के बाद जड़ से खत्म हो जाएगी बवासीर


जिस भी  व्यक्ति को  बवासीर हो जाती है तो वह शर्म से इस बीमारी का नाम तक नहीं लेता है. बवासीर के बारे में काहा जाता है कि यह बीमारी दो तरह की होती हैं एक तो होती है अंदरूनी मस्से जिसमे आपको खून नहीं आता है और मस्से अन्दर ही रहते है | दूसरा है बाहरी मस्से जिसमे मस्से बाहर लटकने लगते है और सुबह के समय शौच करते समय दर्द और ब्लीडिंग होता है, यह बीमारी जिसे भी मनुष्य को होती हैं उसके अंदर खून की कमी हो जाती हैं जिसके कारण इंसान को कमजोरी होनी लगती हैं, आज हम आपको बतायगे  इस बिमारी के कुछ घरेलु उपाय के बारे में जिसे करने से आपको इस बिमारी से बिल्कुल जड़ से छुटकारा मिला जाएगा…

आइये जानते हैं इसके घरेलु उपाय
सबसे पहले नारियल की जटा ले फिर उसे पूरी तरह से जला दें  जब वह पूरी तरह से भस्म बन जायें तो उसे छान कर रख लें फिर रात को ही गाय के 2 किलो दूध का दही जमा दीजिये  पिर सुबह -सुबह खाली पेट क कटोरी में में दही ले लीजिये और उसमे 5 ग्राम नारियल की भष्म मिलाकर खा जाइये | आपको हो सकता स्वाद अच्छा नहीं लगे लेकिन अगर आपको बवासीर को जड़ से ख़त्म करना है तो खाना ही पड़ेगा 

इस तरह से करें उपाय :
एक बार दोपहर में और एक बार रात को सोने से पहले इस औषधि का सेवन करना है|बता दें कि आपको दिन में जब भी भूख लगे आपको सिर्फ दही खाना है इसके अलावा और कुछ नहीं खाना है |

यह एक आयुर्वेदिक उपचार है ,इसके बार-बार प्रयोग करने से आपकी बवासीर एक ही दिन में खत्म हो जाएगी. आयुर्वेदिक के अनुसार कोई भी किसी भी तरह की बवासीर हो इस उपाय से आपकी यह बीमारी बिल्कुल खत्म हो जाेगी, इसके अलावा आपको लगातार हर रोज ज्यादा से ज्यादा छाछ व दही को खाते रहना है.  मिर्च मसालों से बिल्कुल दूर रहें,. हमें पूरा यकीन हैं अगर आप इस तरह से उपाय करेगें तो आप जल्द से जल्द इस बीमारी से छुटकारा मिलेगा.

सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

अनेक रोगों का जड़ से नाश करता है सत्यनाशी का पौधा

अनेक रोगों का जड़ से नाश करता है सत्यनाशी का पौधा



आर्युवेद में सत्यनाशी पौधा एक बहुउपयोगी औषधि रूप है। सत्यनाशी यानि कि सभी प्रकार के रोगों का नाश करने वाला खास वनस्पति। सत्यनाशी पौधा बंजर, नदी किनारे, जगलों, खाली जगहों में पाये जाते हैं। सत्यनाशी पौधा लगभग 3 फीट तक लम्बा होता है। फूल पीले और पत्ते हरे तेज नुकीले होते हैं। और बीज सरसों दानों की तरह होते हैं। कोमल पत्ते-तने तोड़ने पर दूध जैसा तरल निकलता है। सत्यनाशी पौधा भारत में लगभग सभी राज्यों में पाया जाता है। जिसे अलग-अलग नामों  स्वर्णक्षीरी, कटुपर्णी, पीला धतूरा, स्याकांटा, फिरंगीधूतरा, भड़भांड़, काटे धोत्रा, मिल धात्रा, दारूड़ी, चोक, कटसी, भटकटैया पौधा, सोना खिरनी, कुश्मक, शियालकांटा, कुडियोटिट, और अंग्रेजी में Argemone mexicana, Prickly Poppy, Mexican Poppy, Satyanashi से पुकारा जाता है। सत्यनाशी औषधि और तेल रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पीलिया रोग में उपयोगी
सत्यनाशी के पौधे का उपयोग पीलिया रोग में बहुत कारगर साबित होता हैं। पीलिया के रोगी को आधा चम्मच सत्यनाशी तेल गन्ने के जूस के साथ पीने से पीलिया रोग में जल्दी छुटकारा मिल जाता हैं।

जलोदर में सत्यनाशी का उपयोग
जलोदर यानि पेट, फेफड़ो और शरीर के अंगो में पानी भरने की समस्या में सत्यनाशी को रामबाण औषधि माना जाता हैं। इसके लीये 1 चम्मच सत्यनाशी तेल और चुटकी भर सेंधा नमक को एक गिलास गुनगुने पानी में डालकर रोज सुबह पिया जाए तो, कुछ ही दिनों में इस समस्या से छुटकारा मिल जाता हैं।

मुंह के छाले की समस्या
मुंह में छाले होने पर सत्यनाशी के कोमल डंठल और पत्तियां चबानी चाहिए। और कुछ देर बाद थोड़ा दही और चीनी खाने से मुंह के छालों में तुरंत रहत मिलती हैं।

बवासीर में सत्यनाशी 
बवासीर को ठीक करने में सत्यनाशी एक खास औषधि रूप है। सत्यनाशी जड़, चक्रमरद बीज और सेंधा नमक बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। रोज सुबह शाम चुटकी भर सत्यनाशी मिश्रण चूर्ण दही के साथ खाने से बवासीर घाव ठीक करने और बवासीर जड़ से मिटाने में सहायक है। सत्यनाशी जड़, चक्रमरद बीज और सेंधा नमक मिश्रण गुड़ पानी के साथ भी सेवन कर सकते हैं।

चोट घाव में सत्यनाशी पौधा 
चोट घाव ठीक करने में सत्यनाशी फूल, पत्तियों का रस अचूक औषधि मानी जाती है। सत्यनाशी फूल पत्तियों का रस घाव जल्दी भरने में सहायक और घाव को संक्रमित होने से बचाने सहायक है।

दमा रोग में सत्यनाशी 
सत्यनाशी फूल, कोमल पत्तों से कांटे अलग करे, फिर फूल और कांटे बिने पत्तों को बरीक पीसकर फंक बना लें। रोज सुबह शाम सत्यनाशी आधा चम्मच से कम फंक गर्म पानी के साथ सेवन करने से दमे की खांसी से जल्दी आराम मिलता है। और 1 चम्मच सत्यनाशी तेल मिश्री, गुड़ के साथ खाने से दमा रोग से जल्दी छुटकारा मिलता है।

कुष्ठ रोग रोकथाम में सत्यनाशी 
कुष्ठ रोग फैलने से रोकने में सत्यनाशी सहायक है। सत्यनाशी के फूल, पत्तों और नींम के पत्तों को बारीक कूटकर पानी में उबालें। फिर पानी गुनगुना ठंड़ा होने पर नहायें। आधा चम्मच सत्यनाशी फूल रस दूध के साथ सेवन करें। सत्यनाशी तेल खाने में इस्तेमाल, और कुष्ठ ग्रसित त्वचा पर लगायें। सत्यनाशी पौधा कुष्ठ रोगी के लिए फायदेमंद है।

आंखों के विकारों के लिए सत्यनाशी 
नजर कमजोर होने पर, मोतियाबिन्दु होने पर सत्यनाशी के दूध को मिश्री, कच्चे दूध के साथ सेवन करना फायदेमंद है। सत्यनाशी दूध और ताजा मक्खन या फिर गाय के घी के साथ मिलाकर आंखों पर सुरमे - काजल की तरह लगाने से अंधापन्न, रतौंदी, आंखों जलन समस्या दूर करने में सहायक है।

तुतलाने-हकलाने पर सत्यनाशी  
हकलाने तुतलाने की समस्या में सत्यनाशी पत्तों - तनों के दूध को जीभ कर लगाना फायदेमंद है। और सत्यनाशी पत्तों का रस बरगद के पत्तों पर लगाकर हल्का 5-7 मिनट सुखायें। फिर खाने के दौरान थाली की जगह बरगद के पत्तों का इस्तेमाल करें। और बरगद के पत्तों पर लगे सत्यनाशी रस पर शहद लगाकर चाटने से बच्चों की तुतलाने-हकलाने की समस्या जल्दी ठीक करने में सहायक है।

दांतों के लिए सत्यनाशी 
दांतों में कीड़ा लगने पर सत्यनाशी तने और नींम तने से लगातार रोज दांतून करने से दांतों के कीड़ा, दांत दर्द से जल्दी छुटकारा मिलता है। दांतों के लिए सत्यनाशी तना और नींम तना से एक साथ मिलाकर दांतुन करना खास फायदेमंद है। 

गैस कब्ज में सत्यनाशी 
गैस कब्ज समस्या में सत्यनाशी जड़ और अजवाइन उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। रोज सुबह शाम सत्यनाशी काढ़ा पीने से गैस कब्ज की समस्या मात्र 10-15 दिनों में ठीक करने में सहायक है।

पेट कीड़ साफ करे सत्यनाशी  
पेट में कीड़ों की समस्या होने पर सत्यनाशी जड़ और आधे से थोड़ा कम मात्रा में कलौंजी मिलाकर पीसकर फंक गुनगुने पानी के साथ पीने से पेट के कीड़े शीध्र नष्ट करने में सहायक है।

खाज खुजली में सत्यनाशी 
सत्यनाशी बीज और सत्यनाशी दूध मिश्रण कर ग्रसित खाज खुजली वाली त्वचा पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है। सत्यनाशी फूल पत्तों का आधा-आधा चम्मच रस रोज सुबह शाम पीयें। खाज खुजली ठीक करने में सत्यनाशी फायदेमंद है।

गठिया जोड़ों के दर्द में सत्यनाशी तेल 
सत्यनाशी तेल में लहसुन पकाकर अच्छे से मालिश मसाज करने से गठिया जोड़ों के दर्द में असरदार दर्द निवारण है।

पुरूर्षों महिलाओं की अन्दुरूनी कमजोरी दूर करे सत्यनाशी 
पुरूर्षों महिलाओं दोनों की अन्दुरूनी गुप्त बीमारी नपुंसकता, धातुरोग, वीर्य कमजोरी, शुक्राणुओं की गड़बड़ी और निसंतान कलंक दूर करने में सत्यनाशी पौधा एक अचूक प्राचीनकालीन औषधि है। महिलाओं पुरूर्षों के गुप्त रोगों में सत्यनाशी के फूल रस, पत्तियों का रस  आधा चम्मच सुबह शाम कच्चे दूध के साथ सेवन करना फायदेमंद है। सत्यनाशी बीज तेल से मालिश और 50 ग्राम सत्यनाशी जड़ों 1 लीटर पानी में हल्की आंच में उबाल कर काढ़ा तैयार करें और रोज सुबह शाम 2-2 चम्मच पीने से जल्दी फायदा होता है। निसंतान दंम्पतियों के लिए सत्यनाशी पौधा अचूक औषधि मानी जाती है। पुरूर्षों महिलाओं के लिए सत्यनाशी Libido Boosters  है। 

लिंग कमजोरी दूर करे सत्यनाशी तेल मालिस 
सत्यनाशी बीज तेल मालिस मसाज पुरूर्षों की लिंग स्थिलिता कमजोरी दूर करने में खास सहायक है। सत्यनाशी तेल मालिस कमजोर नसों में रक्त संचार तीब्र और सुचारू बनाये रखने में और लिंगवर्धक में सक्षम है।

पेशाब जलन में सत्यनाशी 
पेशाब में जलन, संक्रामण होने पर सत्यनाशी जड़ों को उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। रोज सुबह शाम पीने से पुरानी से पुरानी पेशाब जलन - दर्द समस्या दूर करने में सहायक है।

सावधानियां 
  • सत्यनाशी सेवन गर्भावस्था के दौरान मना है।
  • गम्भीर सर्जरी में सत्यनाशी सेवन मना है।
  • सत्यनाशी सेवन 2 साल से छोटे बच्चों के लिए मना है।
दोस्तों अगर आपको हमारी यह खबर अच्छी लगे तो कमेंट करके बताएं और लाइक और शेयर जरूर कीजिए और आगे भी ऐसे ही खबर पढ़ते रहने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें।

शनिवार, 27 जनवरी 2018

नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर का एक दिन में इलाज

नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर का एक दिन में इलाज


अगर आप बवासीर से परेशान हैं चाहे वो खूनी हो चाहे बादी, तो ये प्रयोग आपके लिए रामबाण से कम नहीं हैं। इस प्रयोग से पुरानी से पुरानी बवासीर 1 से 3 दिन में सही हो जाएगी। इस इलाज से एक दिन में ही रक्तस्राव बंद हो जाता है। बड़ा सस्ता व सरल उपाय है। एक बार इसको ज़रूर अपनाये। आइये जाने ये प्रयोग।

तैयार करने की विधि :

नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर का एक दिन में इलाज, सर्वप्रथम आप नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए।
ये भी पढ़िए : बाबा रामदेव के इन उपायों से बवासीर को हमेशा के लिए भूल जाओ

सेवन करने का तरीका और इसके अन्य लाभ :

  • कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे
  • दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
  • यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है। महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है।
  • हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए। ऐसे कितने ही नुस्खे हिन्दुस्तान के मंदिरों और मठों में साधु संन्यासियों द्वारा आजमाए हुए हैं। इन पर शोध किया जाना चाहिए।
  • दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो चलेगा। अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।

सावधानियां : 

एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद परहेजी जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से परम आवश्यक है।

बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।

हम आपके लिए भारत के कोने कोने से आयुर्वेद के अनसुने चमत्कार ले कर आते हैं, आप भी इनको शेयर कर के ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंचाए।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल

सिर से लेकर पैर तक हर बीमारियों का रामबाण इलाज़ है इसकी बेल


गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है।

गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया गया तो वहाँ पर एक नया पौधा बन जाता है। गिलोय की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि इसमें गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, अनेक प्रकार की वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाये जाते हैं।
पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है। कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है। इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं। यह क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह इन्सुलिन की उत्पत्ति को बढ़ाकर ग्लूकोज का पाचन करना तथा रोग के संक्रमणों को रोकने का कार्य करती है।
आइये हम गिलोय से होने वाले शारीरिक फायदे की ओर देखें :
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है – गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होनेवाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी – गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है। गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

पाचन क्रिया करता है दुरुस्त – गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

बवासीर का भी इलाज है गिलोय – बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

डॉयबिटीज का उपचार – अगर आपके शरीर में रक्त में पाए जाने वाली शुगर की मात्रा अधिक है तो गिलोय के रस को नियमित रूप से पीने से यह मात्रा भी कम होने लगती है।

अस्थमा का बेजोड़ इलाज – अस्थमा एक प्रकार की अत्यंत ही खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से मरीज को भिन्न प्रकार की तकलीफों का सामना करना पडता है, जैसे छाती में कसाव आना, साँस लेने में तकलीफ होना, अत्याधिक खांसी होना तथा सांसो का तेज तेज रूप से चलना। कभी कभी ऐसी परिस्थिती को काबू में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, कि अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गिलोय का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है, तथा इससे अस्थमा की समस्या से छुटकारा भी मिलने लगता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु – गिलोय हमारी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह हमारी आंखों की दृष्टी को बढाता है, जिसकी वजह से हमे बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है। यदि गिलोय के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर यह पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है।

सौंदर्यता के लिए भी है कारगार – गिलोय का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने में काफी सहायता मिलती है। यह हमारी त्वचा को युवा बनाए रखने में मदद करता है। गिलोय से हमारी त्वचा का स्वास्थ्य सौंदर्य बना रहता है। तथा उस में एक प्रकार की चमक आने लगती है।

दांतों में पानी लगना: गिलोय और बबूल की फली समान मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह-शाम नियमित रूप से इससे मंजन करें इससे आराम मिलेगा।

खुजली: हल्दी को गिलोय के पत्तों के रस के साथ पीसकर खुजली वाले अंगों पर लगाने और 3 चम्मच गिलोय का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर सुबह-शाम पीने से खुजली पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

हिचकी: सोंठ का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

कान का मैल साफ करने के लिए: गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके कान में 2-2 बूंद दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है और कान साफ हो जाता है।

कान में दर्द: गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

संग्रहणी (पेचिश): अती, सोंठ, मोथा और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 20-30 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मन्दाग्नि (भूख का कम लगना), लगातार कब्ज की समस्या रहना तथा दस्त के साथ आंव आना आदि प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

कब्ज : गिलोय का चूर्ण 2 चम्मच की मात्रा गुड़ के साथ सेवन करें इससे कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

एसीडिटी: गिलोय के रस का सेवन करने से ऐसीडिटी से उत्पन्न अनेक रोग जैसे- पेचिश, पीलिया, मूत्रविकारों (पेशाब से सम्बंधित रोग) तथा नेत्र विकारों (आंखों के रोग) से छुटकारा मिल जाता है। गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्तों को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त हो जाती है।

बवासीर, कुष्ठ और पीलिया: 7 से 14 मिलीलीटर गिलोय के तने का ताजा रस शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से बवासीर, कोढ़ और पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।

चेहरे के दाग-धब्बे: गिलोय की बेल पर लगे फलों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।

सफेद दाग : सफेद दाग के रोग में 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के रस को रोजाना 2-3 बार कुछ महीनों तक सफेद दाग के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

पेट के रोग : 18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद और छोटी पीपल, 2 नीम की सींकों को पीसकर 250 मिलीलीटर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में फूलने के लिए रात के समय रख दें तथा सुबह उसे छानकर रोगी को रोजाना 15 से 30 दिन तक पिलाने से पेट के सभी रोगों में आराम मिलता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया) : गिलोय के 2-4 ग्राम का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।

शीतपित्त (खूनी पित्त): 10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।

उल्टी होना (वमन): गिलोय का रस और मिश्री को मिलाकर 2-2 चम्मच रोजाना 3 बार पीने से वमन (उल्टी) आना बंद हो जाती है। गिलोय का काढ़ा बनाकर ठण्डा करके पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।

आंखों की बीमारी: लगभग 11 ग्राम गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद और सेंधानमक मिलाकर, इसे खूब अच्छी तरह से गर्म करें और फिर इसे ठण्डा करके आंखो में लगाने से आंखों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इसके प्रयोग से पिल्ल, बवासीर, खुजली, लिंगनाश एवं शुक्ल तथा कृष्ण पटल आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं। गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे पीपल के चूर्ण और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है तथा और भी आंखों से सम्बंधित कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।

क्षय (टी.बी.): गिलोय, कालीमिर्च, वंशलोचन, इलायची आदि को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ कुछ हफ्तों तक रोजाना सेवन करने से क्षय रोग दूर हो जाता है। कालीमिर्च, गिलोय का बारीक चूर्ण, छोटी इलायची के दाने, असली वंशलोचन और भिलावा समान भाग कूट-पीसकर कपड़े से छान लें। इसमें से 130 मिलीग्राम की मात्रा मक्खन या मलाई में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से टी.बी. रोग ठीक हो जाता है।

दमा (श्वास का रोग): गिलोय की जड़ की छाल को पीसकर मट्ठे के साथ लेने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है। 6 ग्राम गिलोय का रस, 2 ग्राम इलायची और 1 ग्राम की मात्रा में वंशलोचन शहद में मिलाकर खाने से क्षय और श्वास-रोग ठीक हो जाता है।

बुखार: गिलोय 6 ग्राम, धनिया 6 ग्राम, नीम की छाल 6 ग्राम, पद्याख 6 ग्राम और लाल चंदन 6 ग्राम इन सब को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस बने हुए काढ़े को सुबह और शाम पीते रहने से हर प्रकार का बुखार ठीक हो जाता है।

जीभ की जलन और सूजन: गिलोय, पीपल, तथा रसौत का काढ़ा बनाकर इससे गरारे करने से जीभ की जलन तथा सूजन दूर हो जाती है।

मुंह के अन्दर के छालें (मुखपाक): धमासा, हरड़, जावित्री, दाख, गिलोय, बहेड़ा एवं आंवला इन सब को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। ठण्डा होने पर इसमें शहद मिलाकर पीने से मुखपाक दूर होते हैं।

शारीरिक कमजोरी: 100 ग्राम गिलोय का लई (कल्क), 100 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण, दोनों को एक साथ 1 लीटर उबलते पानी में मिलाकर किसी बंद पत्ते में रख दें। 2 घंटे के बाद मसल-छान कर रख लें। इसे 50-100 ग्राम रोजाना 2-3 बार सेवन करने से बुखार से आयी शारीरिक कमजोरी मिट जाती है।

प्यास अधिक लगना: गिलोय का रस 6 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कई बार लेने से प्यास शांत हो जाती है।

मधुमेह: 40 ग्राम हरी गिलोय का रस, 6 ग्राम पाषाण भेद, और 6 ग्राम शहद को मिलाकर 1 महीने तक पीने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है। या 20-50 मिलीलीटर गिलोय का रस सुबह-शाम बराबर मात्रा में पानी के साथ मधुमेह रोगी को सेवन करायें या रोग को जब-जब प्यास लगे तो इसका सेवन कराएं इससे लाभ मिलेगा। या 15 ग्राम गिलोय का बारीक चूर्ण और 5 ग्राम घी को मिलाकर दिन में 3 बार रोगी को सेवन कराऐं इससे मधुमेह (शूगर) रोग दूर हो जाता है।

जोड़ों के दर्द (गठिया): गिलोय और सोंठ को एक ही मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से पुराने से पुराना गठिया रोग में फायदा मिलता है। या गिलोय, हरड़ की छाल, भिलावां, देवदारू, सोंठ और साठी की जड़ इन सब को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें तथा छोटी बोतल में भर लें। इसका आधा चम्मच चूर्ण आधा कप पानी में पकाकर ठण्डा होने पर पी जायें। इससे रोगी के घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है। या घुटने के दर्द दूर करने के गिलोय का रस तथा त्रिफुला का रस आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से लाभ मिलता है।

पेट में दर्द : गिलोय का रास 7 मिलीलीटर से लेकर 10 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

पीलिया रोग: गिलोय अथवा काली मिर्च अथवा त्रिफला का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर प्रतिदिन सुबह और शाम चाटने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। या गिलोय का 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय की लता गले में लपेटने से कामला रोग या पीलिया में लाभ होता है। या गिलोय का रस 1 चम्मच की मात्रा में दिन में सुबह और शाम सेवन करें।

मानसिक उन्माद (पागलपन): गिलोय के काढ़े को ब्राह्मी के साथ पीने से उन्माद या पागलपन दूर हो जाता है।
शरीर की जलन: शरीर की जलन या हाथ पैरों की जलन में 7 से 10 मिलीलीटर गिलोय के रस को गुग्गुल या कड़वी नीम या हरिद्र, खादिर एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करने से शरीर में होने वाली जलन दूर हो जाती है।

कुष्ठ (कोढ़): 100 मिलीलीटर बिल्कुल साफ गिलोय का रस और 10 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण 1 लीटर उबलते हुए पानी में मिलाकर किसी बंद बर्तन में 2 घंटे के लिये रखकर छोड़ दें। 2 घंटे के बाद इसे बर्तन में से निकालकर मसलकर छान लें। इसमें से 50 से 100 ग्राम की मात्रा प्रतिदिन दिन में 3 बार सेवन करने से खून साफ होकर कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।

खून की कमी: 360 मिलीलीटर गिलोय के रस में घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में खून की वृद्धि होती है। या गिलोय (गुर्च) 24 से 36 मिलीग्राम सुबह-शाम शहद एवं गुड़ के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।

सिर का दर्द: मलेरिया के कारण होने वाले सिर के दर्द को ठीक करने के लिए गिलोय का काढ़ा सेवन करें।

ज्यादा पसीना या दुर्गन्ध आना : 20 से 40 मिलीलीटर गिलोय का शर्बत 4 गुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम के समय में पीने से बदबू वाला पसीना निकलना बंद हो जाता है।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

सिर्फ 7 दिन लगातार खाइए छुहारे, होगा ऐसा चमत्कार जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा

सिर्फ 7 दिन लगातार खाइए छुहारे, होगा ऐसा चमत्कार जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा


गर्म तासीर होने की वजह से छुहारा सर्दियों में ज्यादा खाया जाता है. आपको बता दें जब खजूर सूख जाता है तो वो छुहारा बन जाता है. छुहारा खाने से हमारे शरीर में बहुत से फायदे होते हैं. एक छोटा से छुहारे में इतने चमत्कारिक गुण होते हैं जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा. छुहारा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसके सेवन से आप कई बिमारियों को जड़ से खत्म कर सकते हो. चलिए आज हम आपको बताते हैं छुहारे के चमत्कारी फायदे.

छुहारा एक ड्राई फ्रूट है जिसे खाने से हमारे शरीर को बहुत से लाभ मिलते हैं. अगर छुहारे का लगातार सेवन किया जाये तो हमारा शरीर शक्तिशाली और मजबूत बनता है. छुहारा खाने में स्वादिष्ट और मीठा होता है. अगर आप लगातार 7 दिन छुहारे खाएंगे तो आपको बहुत से फायदे मिलेंगे.

छुहारों के चमत्कारी फायदे 

  • हर दिन आधा लीटर दूध में 4 छुहारे खौलाकर पीने से शरीर की कमजोरी दूर होती है.
  • साँस के मरीज अगर हर दिन छुहारे खाएंगे तो उन्हें फायदा मिलेगा.
  • रोजाना छुहारे खाने से गैस की समस्या दूर होती है.
  • छुहारे में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है इसलिए रोजाना छुहारे खाने से आपकी हड्डियाँ मजबूत होंगी.
  • दूध में छुहारे उबालकर पीने से भूख बढ़ती है.
  • अगर किसी के फोड़े फुंसी हो तो उसे छुहारे की गुठली पीसकर लगानी चाहिए.
  • छुहारे से छोटे बच्चों की सोते समय पेशाब करने की समस्या दूर हो जाती है.
  • दूध के साथ छुहारा खाने से बवासीर की शिकायत दूर होती है.
  • मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद होता है छुहारा.

रविवार, 3 दिसंबर 2017

जानिए बवासीर (पाइल्स) होने पर क्या खाएं, क्या न खाएं और निवारण के उपाय

जानिए बवासीर (पाइल्स) होने पर क्या खाएं, क्या न खाएं और निवारण के उपाय


यह बीमारी व्यक्ति को काफी पीड़ा पहुंचाती है। मलद्वार की शिराओं के फूलने से मटर के दाने जैसे मांस के अंकुर निकलना आयुर्वेद में अर्श और आम भाषा में बवासीर के नाम से जाना जाता है। यह रोग बादी और खूनी,बवासीर के नाम से दो प्रकार का होता है। बादी बवासीर में गुदा में पीड़ा, खुजली और सूजन होती है, जबकि खूनी बवासीर में मस्सों से मल के टकराने से रक्तस्राव होता है।

कारण : बवासीर होने के प्रमुख कारणों में कब्ज अजीर्ण की शिकायत, अत्यधिक मद्यपान, नशीली चीजें खाना, मिर्च-मसालेदार, तले हुए गरिष्ठ पदार्थों का अधिक सेवन, अनियमित भोजन, मांस, मछली, अंडा खाना, बैठे रहने का कार्य करना, श्रम व व्यायाम न करना, धूम्रपान, रात में जागरण, यकृत की खराबी, घुड़सवारी, गुदा मैथुन करना आदि होते हैं।

लक्षण : इस रोग के लक्षणों में पाखाना सख्त और कम मात्रा में होना, गुदा में कांटे चुभने जैसा दर्द, सृजन, खुजली होना, खून गिरना, अधिक रक्तस्राव से शरीर पीला पड़ना, दुर्बलता, चक्कर, घबराहट होना, चिंता, क्रोध, अपानवायु का अवरोध, जोर लगाकर वायु निकालना पड़े, आंखों में शोथ, भोजन में अरुचि आदि देखने -को मिलते हैं।

क्या खाएं (What to eat during Piles?)
  • गेहूं, ज्वार के आटे की चोकर सहित बनी रोटी, दलिया, जौ, पुराने चावल, अरहर, मूंग की दाल भोजन में खाएं।
  • फलों में अंजीर, बेल, अनार, कच्चा नारियल, केला, आंवला सेवन करें।
  • सब्जी में तुरई, चौलाई, परवल, कुलथी, टमाटर, गाजर, जिमीकंद, पालक, चुकंदर नियमित खाएं।
  • प्रतिदिन भोजन के साथ मूली खाएं। भोजन के बाद 2-3 अमरूद खाएं। दोपहर में नियमित रूप से पपीता खाएं।
  • करेले का रस या छाछ (थोड़ा नमक व अजवाइन मिला) या दही की लस्सी पिएं।
  • खून जाने की तकलीफ हो, तो धनिए के रस में मिस्री मिलाकर सुबह-शाम पिएं।
  • पानी का सेवन अधिक करें।

क्या न खाएं (What not to eat during Piles?)
  • भारी, उष्ण, तीक्ष्ण, गरिष्ठ, मिर्च-मसालेदार, चटपटे पदार्थ भोजन में न खाएं।
  • बासी भोजन, उड़द की दाल, मांस, मछली, अंडा, चना, खटाई का सेवन न करें।
  • बैगन, आलू, सीताफल, गुड, डिब्बा बंद आहार से परहेज करें।
  • अधिक चाय, कॉफी, शराब न पिएं, तंबाकू, अफीम न खाएं।
क्या करें (What to do during Piles?)
  • कब्ज की शिकायत दूर करें।
  • प्रतिदिन सुबह-शाम घूमने जाएं। सामर्थ्य के अनुसार व्यायाम करें।
  • गुदा द्वार की पीड़ा दूर करने के लिए रोजाना शौच के बाद एरण्ड या जैतून का तेल लगाएं।
  • स्वमूत्र से रोज गुदा द्वार धोएं।
  • सप्ताह में एक बार एनिमा अवश्य लगाएं।
  • शौच के बाद और सोने से पहले मध्यमा अंगुली से शुद्ध सरसों का तेल गुदा द्वार के अंदर 2-3 बार लगाते रहें।
  • आसनों में पादांगुष्ठासन एवं उत्तानपादासन नियमित रूप से करें।
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क्या न करें (What not to do during Piles?)
  • मैल, मूत्र आदि के वेगों को न रोकें।
  • कठोर आसन पर बहुत देर तक न बैठें और न बहुत देर तक खड़े ही रहें।
  • साइकिल अधिक न चलाएं। ऊंट, घोड़े की सवारी न करें।
  • अधिक स्त्री प्रसंग में रस न लें।
  • रात्रि में अधिक जागरण न करें। उपवास से परहेज करें।

रविवार, 26 नवंबर 2017

अगर ये रत्न पहनेंगे तो बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

अगर ये रत्न पहनेंगे तो बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर


रत्न हमारे जीव व स्वास्थ्य दोनों पर ही बहुत गहरा प्रभाव डालते हैं क्योंकि रत्नों में भिन्न-भिन्न ग्रहों का समावेश है। माणिक में सूर्य, मोती में चंद्र, फिरोजे में बुध, पन्ने में बृहस्पति, हीरे में शुक्र , नीलम में शनि और वैडूर्य में राहु का वास होता है। शुद्ध प्रकार के दोषरहित रत्न धारण करने से ग्रहों की शांति होती है।रोग भी दूर होते हैं। इन सभी रत्नों की भस्म बनाकर विधि अनुसार लेने पर भी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।


गोमेद- कांतिवाला, भारी, चिकना, अच्छे वर्ण वाला, दिप्तिमान, गोमेद की तरह उत्तम होता है। इसे धारण करने से आयु, सुख और धन की वृद्धि होती है। औषधि के रूप में यह विष को खत्म करने वाला, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला, दाद व कुष्ट और बवासीर को नष्ट करता है। 
हीरा- हीरा चार रंग का होता है- सफेद, लाल, पीला, और काला, मोटा चिकना, पानी से भरे पीतल के बर्तन में डालकर हिलाने से उसमें लकीर करने वाला व चमकदार ही अच्छा माना जाता है। यह बल को बढ़ाने वाला, वीर्यवद्र्धक, सुखदायक व सभी रोगों का नाशक होता है।
मोती- रासायन ग्रंथों में लिखा है कि मोटा गोलाकर, चिकना, मोती अच्छा होता है मोती से शरीर में होने वाली किसी भी तरह की जलन की समस्या का निवारण होता है। जो मोती साफ, प्रभावान होता है व पित्त से होने वाले रोगों को भी नियंत्रित करता है। मोती शुद्ध है इसीलिए यह स्वच्छता व नम्रता का प्रतीक है।

लहसुनियां या वैडूर्य- शुभ छाया वाला, भारी, चिकना, साफ, और श्याम कांति वाला वैडूर्य उत्तम होता है। यह कांतिकार व कल्याणकारक है यह खून से जुड़ी प्रॉब्लम्स को मिटाने वाला, पित्त की समस्या को खत्म करता है साथ गुल्म विकारों को भी नष्ट करता है।

नीलम- नीलम धारण करने से शनि की बाधा दूर होती है। इसकी भस्म के सेवन से दमा, खांसी व वात, कफ व पित्त तीनों से होने वाली समस्याओं को मिटाता है यह विशेषकर वात का नाश करने वाला, पाचन शक्ति बढ़ाने वाला व बुद्धि को बढ़ाने वाला होता है।

माणिक्य- मणियों के 4 प्रकार होते हैं- माणिक्य, वैडूर्य, स्फटिक और एक अन्य, जिन मणियों का रंग गहरा हो, जो निर्मल व चिकनी हो और अपने प्रभाव से आसपास की वस्तुओं को प्रभावित करती हो उन्हें अच्छा फल देने वाला माना जाता है। माणिक पित्त संबंधित रोगों को खत्म करता है।

सर्दी में करें तिल का सेवन, रहेंगे कई परेशानियों से दूर

सर्दी में करें तिल का सेवन, रहेंगे कई परेशानियों से दूर


सर्दियों में आपको कई तरह से सावधान रहना पड़ता हैं। इस मौसम में खासकर भोजन का खास ख्याल रखना पड़ता हैं। आपको सर्दियों में कई ऐसी चीजों को खाना चाहिए जो आपके शरीर के लिए फायदेमंद हो और इससे आपके शरीर को ऊर्जा मिलती रहें। ऐसे में आपको प्रतिदिन तिल का सेवन चाहिए। इससे आपको अन्य बीमारियों से भी छुटकरा मिलता हैं। आइए जानते हैं सर्दी के मौसम में तिल से होने वाले फायदों के बारे में।

तिल खाने के फायदे :

1. इस मौसम में प्रतिदिन तिल को गुड़ के साथ या इसके लड्डू को दूध के साथ सेवन करने से थकावट, सांस फूलना और बालों की झड़ने की समस्या से छुटकरा मिलता हैं।

2. तिल में काला नमक मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से बवासीर की समस्या ठीक हो जाती हैं।
3. सुबह तिल के लड्डू खाने से चर्बी कम होती हैं और साथ ही दिमाग भी तेज होता हैं।

4. पेट दर्द और इन्फेक्शन की समस्या को ठीक करने में यह काफी फायदेमंद होते हैं। रोजना गर्म पानी के साथ 20 से 25 ग्राम तिल डाल कर इसका सेवन करें। इसके अलावा इसे भून कर चीनी या गुड़ के साथ खाने से कब्ज भी दूर हो जाती हैं।
5. सर्दी–खांसी की समस्या को ठीक करने के लिए 4–5 चम्मच मिश्री को इसके साथ उबाल कर सेवन कर सकती हैं।

6. तनाव की समस्या होने पर इसे दूध में उबाल कर पिएँ। इससे तनाव और सिर दर्द जल्द ही ठीक हो जाएगा।
7. शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए इसमें देसी घी मिलाकर खाएं। इससे आपके शरीर में पूरे दिन एनर्जी बनी रहेगी।

रोज़ाना एक गिलास पानी में चुटकीभर काली मिर्च मिलाकर पीने के अद्भुत फ़ायदे

रोज़ाना एक गिलास पानी में चुटकीभर काली मिर्च मिलाकर पीने के अद्भुत फ़ायदे


काली मिर्च एक ऐसा मसाला है जो स्वाद के साथ ही औषधिय गुणों से भी भरपूर है। इसे सलाद, कटे फल या दाल शाक पर बुरक कर उपयोग लिया जाता है। इसका उपयोग घरेलु इलाज में भी किया जा सकता है। काली मिर्च खाने के बड़े ही फायदे हैं, (ब्लॅक पेपर) के कई घरेलू नुस्खे और उपाय हैं, जिससे आपको कई बीमारियो और समस्याओं में बहुत लाभ मिलता हैं। काली मिर्च के तीखे स्वाद के कारण इसका बहुत ही कम इस्तेमाल किया जाता हैं, लेकिन अनेक प्रकार की बीमारियो में काली मिर्च का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता हैं। पेट, स्किन और हड्डियो से जुड़ी प्रॉब्लम्स को डोर करने में काली मिर्च बहुत ज़्यादा असरदार होती हैं। आज जाँएंगे की इसका कैसे और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करके रोगो को दूर किया जा सकता हैं।

काली मिर्च खाने के स्वाद को बढ़ाने का काम करती है|पर क्या आपको पता है की काली मिर्च ना सिर्फ आपके खाने के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि आपकी सेहत का भी विशेष ख्याल रखती है|आयुर्वेद में काली मिर्च को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है|कई बीमारियों के इस्तेमाल में काली मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है| काली मिर्च का पानी पीने से शरीर को हर बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है|अगर आप स्वस्थ रहना चाहते है तो रोज़ाना एक गिलास पानी में काली मिर्च को मिलाकर पिए, इसे पीने से आपका शरीर कई बीमारियों से बचा रहेगा।
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काली मिर्च को पानी में मिलाकर पीने के 4 फ़ायदे :

  • एक गिलास गर्म पानी में थोड़ी सी काली मिर्च डालकर पीने से बॉडी की इम्युनिटी पावर बढ़ती है|इसके अलावा ये हमारे बॉडी सेल्स को पोषण देने का काम भी करती है। इससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।
  • काली मिर्च के पानी को पीने से बॉडी को भरपूर पोषण मिलता है| इसके अलावा इस पानी के सेवन से हमारे शरीर में होने वाली पानी की कमी दूर हो जाती है|गर्म पानी के साथ कालीमिर्च के सेवन से स्किन हाइट्रेट होती है|साथ ही शरीर में पानी की कमी ना होने से थकान का अनुभव भी नहीं होता है।
  • काली मिर्च के पानी का सेवन करने से हमारी बॉडी का स्टेमिना मजबूत बनता है|इसके अलावा इसके सेवन से बॉडी का मेटॉलिज्म लेवल भी बढ़ता है। जिससे शरीर को मजबूती मिलती है।
  • अगर आपको कब्ज़ की समस्या है तो काली मिर्च का सेवन गर्म पानी के साथ करने से आपको इस समस्या से छुटकारा दिला सकता है। इसके सेवन से हमारे शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते है जिससे बवासीर और कब्ज जैसे रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

काली मिर्च के अन्य अद्भुत फायदे :

  • उम्र बढ़ने के साथ ही होने वाला गठिया रोग काली मिर्च का इस्तेमाल बहुत ही फयदेमंद होता हैं। इसे तिल के तेल में जलने तक गरम करे। उसके बाद इस तेल को ठंडा होने पर दर्द वाली जगह आदि पर लगाए आपको बहुत ही आराम मिलेगा।
  • जंक फुड के कारण बवासीर की समस्या आजकल ज़्यादातर लोगो को रोग कर रही हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए जीरा, काली मिर्च और चीनी या मिशरी को पीस कर एक साथ मिला ले। सुबह-शाम दो से तीन बार इसे लेने से बवासीर में राहत मिलती हैं।
  • पेट दर्द का कारण सिर्फ़ खराब ख़ान-पान ही नही होता हैं, बल्कि कीड़े भी इसकी वजह हो सकते हैं। इससे भूख कम लगती हैं और वजन तेज़ी के साथ घटने लगता हैं। इन्हे डोर करने के लिए च्छच्छ में काली मिर्च का पाउडर मिला कर पिए इसके अलावा काली मिर्च को किसमिस के साथ मिला कर खाने से भी पेट के कीड़े दूर होते हैं।
  • त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर, काली मिर्च पानी के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी बैठ जाती है।
  • काली मिर्च को सुई से छेद कर दीये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी चलना भी बंद हो जाती है।
  • ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो दिन में दो-तीन बार पांच दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करें।
  • काली मिर्च 20 ग्राम, जीरा 10 ग्राम और शक्कर या मिश्री 15 ग्राम कूट पीस कर मिला लें। इसे सुबह शाम पानी के साथ फं।क लें। बावासीर रोग में लाभ होता है।
  • आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े से घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  • काली मिर्च 20 ग्राम, सोंठ पीपल, जीरा व सेंधा नमक सब 10-10 ग्राम मात्रा में पीस कर मिला लें। भोजन के बाद आधा चम्मच चूर्ण थोड़े से जल के साथ फांकने से मंदाग्रि दूर हो जाती है।
  • शहद में पिसी काली मिर्च मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से खांसी बंद हो जाती है।
  • बुखार में तुलसी, कालीमिर्च तथा गिलोय का काढ़ा लाभ करता है।
  • चार-पांच दाने कालीमिर्च के साथ 15 दाने किशमिश चबाने से खांसी में लाभ होता है।
  • कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है।
  • हर साल अप्रैल के दूसरे सप्ताह की शुरुआत में निम के कोमल 7 ताजा पत्ते, 7 कालिमिर्ची और चुटकी भर सेंधा नमक पानी डालकर पीसकर 5 चम्मच पानी में घोलकर सुबह भूखे पेट एक बार एक दिन में पियें। इसके बाद 2 घंटो तक कुछ न खाएं। यह एक व्यक्ति की खुराक हैं ऐसे लेने से साल भर बुखार नहीं आएगा। हर साल इसी तरह लेते रहे और बुखार से बचें रहे।
  • कालिमिर्ची में मौजूद पाईपरिन नामक तत्व कीटाणुनाशक होता हैं। यह मलेरिया और वायरस जैसे ज्वरो के विषाणुओं को नष्ट कर देता हैं। 60 ग्राम पीसी हुई कालिमिर्ची 2 ग्लास पानी में इतना उबालें की आधा ग्लास पानी रह जाये फिर इसे छानकर हर 4 घंटे से उसके 3 भाग करके पियें। इससे मलेरिया बुखार ठीक हो जाता हैं।
  • सिर में डेंड्रफ और खुजली के वजह से बाल गिरते हो तो कालिमिर्ची, प्याज, नमक सबको पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। बालो का झड़ना बंद हो जायेगा।

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

इस पौधे का हर अंग दवा है गठिया को तो ये 21 दिन में समाप्त कर सकता है

इस पौधे का हर अंग दवा है गठिया को तो ये 21 दिन में समाप्त कर सकता है


वैसे तो ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है तो यहाँ हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है. आक-अर्क के पौधे, शुष्क, ऊसर और ऊँची भूमि में प्राय: सर्वत्र देखने को मिलते हैं।

इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फेंली हुई है कि आक का पौधा विषेला होता है तथा यह मनुष्य के लिये घातक है। इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योकि आयुर्वेद संहिताओं मे भी इसकी गणना उपविषों में की गई है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उलटी दस्त होकर मनुष्य यमराज के घर जा सकता है।
इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बडा फायदा होता है। इसका हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है एवं यह सूर्य के समान तीक्ष्य। तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायन धर्मा हैं।
इसका रूप, रंग, पहचान : यह पौधा अकौआ एक औषधीय पादप है। इसको मदार, मंदार, आक, अर्क भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं। हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं.
इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है। फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है। आक की शाखाओं में दूध निकलता है। वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है। चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है।

इसके 9 अद्भुत फ़ायदे :

1. आक के पौधे की पत्ती को उल्टा (उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग) कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें. सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें। एक सप्ताह में आपका शुगर लेवल सामान्य हो जायेगा। साथ ही बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है।

2. आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है। यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं। कहीं-कहीं इसे ‘वानस्पतिक पारद’ भी कहा गया है। आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है।

3. इसके कोमल पत्तों के धुंए से बवासीर शाँत होती है. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिला ले और छोटी छोटी गोलियाँ बना कर खाने से खाँसी दूर होती है।

4. आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है. आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे सिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है।

5. आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है। आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है। उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये। आक ही के काडे से घाव धोवे।

6. आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है. आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.

7. आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है। बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है।

8. आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है। बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं। बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता। चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है।

9. जहाँ के बाल उड़ गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसका दूध आँख में नहीं जाना चाहिए वर्ना आँखें खराब हो जाती है। उपरोक्त कोई भी उपाय अपनी ज़िम्मेदारी पर सावधानी से ही करें।

मंगलवार, 31 अक्तूबर 2017

कई बीमारियों का रामबाण इलाज़ है गेंदे का फूल

कई बीमारियों का रामबाण इलाज़ है गेंदे का फूल


आपने काफी बार सुना होगा की इस फल या फूल से इस रोग में लाभ होता है और तो और कई लोगो ने तो इसे अजमाया भी होगा पर क्या आप को पता है की गेंदे के फूल से भी कई प्रकार के लाभ होते है आज हम आप के उन्ही लाभों के बारे में बतायेगे जो आप और आप के जानने वालो को बहुत लाभ देगा ।

1. जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया की शिकायत हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए। इन फूलों का रस निकालने के लिए फूलों की ताजी पँखुड़ियों को लेकर पानी से धोकर उनको मिक्सी में चला लें लगभग 50 ग्राम पँखुड़ियॉ । उनमें 30 मिलीलीटर पानी भी मिला दें । फिर जो पेस्ट बने उसको सूती कपड़े में रखकर रस निचोड़ लें और ताजा ही सेवन करें रोज एक बार ।

2. गेंदा के पँखुड़ियों का रस कान में डाला जाए तो यह कान दर्द को कम कर है अत: इसकी पत्तियों को पीस कर रस निकाल लें और इस रस की 2 बूंदों को कान में डालने से दर्द कम हो जाता है । इसके लिये एक फूल की पँखुड़ियों को सिल बट्टे पर मसलकर उसका रस निचोड़ कर कान में डाला जाता है ।
3. सूखे हुए गेंदा के फूल को मिश्री के साथ खाने की सलाह दमा और खाँसी की शिकायत वाले मरीज को दिया जाता है । यदि रोगी को मधुमेह की भी शिकायत है तो उसको यह प्रयोग मिश्री के साथ नही करना चाहिये । मिश्री की जगह गेंदे के फूल के साथ गुनगुने पानी का सेवन किया जा सकता है ।

4. पैर और एडियॉ फटने की समस्या में गेंदा बहुत लाभकारी रहता है । गेंदा के पत्तों को मोम में गर्म कर लें व ठंडा होने के बाद पैरों की बिवाई पर लगाने से दर्द में आराम मिल जाता है तथा इससे तालु चिकने हो जाते है और 4-5 दिन में ही फटी हुई बिवाईयॉ भरने लगती हैं ।
5. चाहे सूखी हो या खूनी बवासीर यह दोनों ही समस्याओं में लाभ करता है । बवासीर के रोगी को यदि गेंदा की पत्तियों का रस काली मिर्च और नमक का घोल साथ मिला कर पिलाया जाए तो बावासीर में आराम मिलता है । बवासीर के रोगी को मिर्च और मसालेदार चीजों का सेवन नही करना चाहिये और पानी खूब पीना चाहिये ।

6. गेंदा के फूल की पंखुडियों को इक्टठा कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन कम हो जाती है । सूजन के रोगी को यह ध्यान रखना चाहिये कि यदि सूजन की समस्या ज्यादा है तो चिकित्सक से परामर्श जरूर करना चाहिये । कई बार सूजन का कारण कोई गम्भीर रोग भी हो सकता है ।
7. जिन्हें सिर में फोड़े फ़ुन्सियाँ और घाव हो जाए उन्हें मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिला कर लगाना चाहिए और इसे सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए ऐसा करने से फोड़े फुन्सियाँ और घाव होना कम हो जाता है ।

सोमवार, 30 अक्तूबर 2017

जामुन के पत्तों का सेवन कर लिया तो कई बीमारियाँ हो जाएगीं रफूचक्कर

जामुन के पत्तों का सेवन कर लिया तो कई बीमारियाँ हो जाएगीं रफूचक्कर


जामुन का फल तो आपने जरूर खाया होगा लेकिन इतना भी तय है कि जामुन के पत्तों का कभी भी सेवन नही किया होगा । इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि किस प्रकार जामुन के पेड़ के पत्ते हमारे स्वास्थय के लिये अनमोल सिद्ध हो सकते हैं यदि उनको उचित प्रकार से सेवन किया जाये । चलिये जानते हैं एक बहुत ही अच्छी जानकारी के बारे में ।

1. यदि किसी को बवासीर की बीमारी हो तो जामुन के पत्तो को पीसकर गाय के ताजा दूध के साथ मिलाकर पीने से बवासीर की समस्या दूर हो जाती है।
2. जामुन के पत्तो का उपयोग हमारी पाचन क्रिया को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

3. यदि किसी को दाँतो या मसूड़ों से सम्बंधित कोई समस्या हो तो इसके लिए जामुन के पत्तों को सूखाकर जला लें फिर इसकी राख को मंजन के रूप में दाँतों और मसूड़ों पर हल्के हाथों से मालिश करें इससे दाँत और मसूड़े मजबूत हो जाएगें।
4. यदि किसी व्यक्ति को अफीम का नशा हो गया हो और उतर नहीं रहा हो तो उस व्यक्ति को जामुन के पत्तो का रस पानी में मिला कर पिलाने से नशा जल्दी ही उतर जाता है।

5. जामुन के पत्तो को यदि चबा-चबाकर खाया जाए तो इससे मुँह की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

शनिवार, 28 अक्तूबर 2017

बाबा रामदेव के इन उपायों से बवासीर को हमेशा के लिए भूल जाओ

बाबा रामदेव के इन उपायों से बवासीर को हमेशा के लिए भूल जाओ


अगर बार बार बवासीर होती हैं और मस्से बाहर आ कर बहुत कष्ट देते हो तो ये घरेलु उपचार और मस्सो पर लगाने के लिए ये तेल घर पर बनाये बहुत ही लाभदायक हैं। दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दे। इनको सुबह खाने के एक घंटे के बाद खाएं. और सुबह भी 2 अंजीर पानी में भिगो दें. सवेरे के भगोये दो अंजीर शाम चार-पांच बजे खाएं। एक घंटा आगे पीछे कुछ न लें। आठ दस दिन के सेवन से बादी और खुनी हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।


बवासीर को जड़ से दूर करने के लिए और पुन: न होने के लिए छाछ सर्वोत्तम है। दोपहर के भोजन के बाद छाछ में डेढ़ ग्राम ( चौथाई चम्मच ) पीसी हुई अजवायन और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है और नष्ट हुए बवासीर के मस्से पुन: उत्प्न्न नही होते। इसके साथ में मूली बहुत रामबाण है बवासीर में, मूली को पत्तो सहित हर रोज़ खाने से बवासीर का इलाज में तुरंत आराम मिलता है
बवासीर का इलाज : आज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में कई लोग बवासीर से पीड़ित हैं. बवासीर का मुख्य कारण अनियमित खानपान और कब्ज है. आइये जानते हैं बवासीर के लिए  बाबा रामदेव के नुस्खे 

बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं. यह दो तरह का होता है : 1. अंदरूनी बवासीर- इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता है, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है. 2. बाहरी बवासीर- इसमें सूजन को बाहर से महसूस किया जा सकता है. इसकी पहचान बहुत हीं आसान है.
अगर आपको भी मल त्यागते वक्त बहुत दर्द होता है, मलद्वार से खून आता है या खुजली होती है, तो आपको बवासीर है. तो आइए कुछ घरेलू कारगर उपाय और बवासीर का इलाज जानते हैं, जिनसे आप बवासीर से मुक्ति पा सकते हैं.


बवासीर का देशी ( घरेलू ) इलाज : 
  • रेशेदार चीजें नियमित खाना शुरू कीजिए, इन्हें अपने दैनिक भोजन का एक आवश्यक अंग बना लीजिए.
  • हर दिन 8-10 ग्लास पानी जरुर पिएँ
  • खाना समय से खाएँ.
  • रात में 100 gram किशमिश पानी में फूलने के लिए छोड़ दें. और फिर सुबह में जिस पानी में किशमिश को फुलाया है, उसी पानी में किशमिश को मसलकर खाएँ. कुछ दिनों तक लगातार इसका उपयोग करना बवासीर का इलाज में अत्यंत लाभ करता है.
  • 50 gram बड़ी इलायची लीजिए और इसे भून लीजिए. जब यह ठंडी हो जाए, तो इसे अच्छी तरह से पीस लीजिए. और फिर हर दिन सुबह खाली पेट में इसे कुछ दिनों तक नियमित पिएँ. यह आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा.
  • बवासीर के ऊपर अरंडी का तेल लगाने से राहत मिलती है
*एक चम्मच मधु में ¼ चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर खाने से फायदा पहुँचता है.
*अगर आपको बवासीर है, तो आपको खट्टे, मिर्ची वाले, मसालेदार और चटपटे खाने से कुछ दिनों के लिए परहेज करना पड़ेगा. जबतक कि आपका बवासीर पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है.
*डेढ़ से दो लीटर मट्ठा लीजिए और इसमें 50 gram जीरा पाउडर और थोड़ा सा नमक मिला लीजिए.और जब-जब आपको प्यास लगे तो पानी की जगह इस मट्ठे को पिएँ. कुछ दिनों तक ऐसा करने से बवासीर का मस्सा कम हो जाता है.

बवासीर ठीक करने के घरेलू नुस्खे :
शरीर के निचले रेक्टम की तरफ गूदे में सूजन हो जाए तो यह बवासीर का रूप ले सकती है। इन्हें पाइल्स या हेमोर्रोइड्स भी कहा जाता है। बवासीर दो तरह की होती है-भीतरी एवं बाहरी। भीतरी बवासीर की दशा में अंदरूनी रक्तपात होता है जिसमें दर्द नहीं होता। बाहरी बवासीर में इंसान को दर्द महसूस होता है क्योंकि इसमें गूदे में सूजन की वजह से काफी पीड़ा होती है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं जिनमें प्रमुख हैं वंशानुगत दशा,खानपान सही न होना, फाइबर की कमी गूदे की कैविटी में असामान्य बढ़ोत्तरी ,लम्बे समय तक बैठे रहना और कब्ज़ की समस्या। बवासीर को ठीक करने के लिए नीचे दिए गए घरेलू उपचारों में से किसी का भी सहारा लिया जा सकता है।
बवासीर के मस्से या खुनी बवासीर का रामबाण इलाज
पुरानी बवासीर का इलाज बहुत कठिन होता लेकिन नारियल कि जटाओं के प्रयोग से दोनों ही तरह की बवासीर का इलाज संभव है. बादी या खुनी बवासीर जो भी हो, दोनों में ही नारियल की जटाओं का भस्म बहुत कारगर उपाय है. ताज़े मट्ठे में एक नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें और इस ताज़े मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेस्ट 3 दिन नियमित रूप से पियें. यह बवासीर का शर्तिया इलाज है
अंजीर से पाइल्स का प्राकृतिक उपचार :
अंजीर शरीर के लिए बहुत फायदेमंद मेवों में से एक है, अगर आपको बवासीर के साथ मस्सों की भी शिकायत हो तो रात में 3 अंजीर पानी में भिगों दें और सुबह खली पेस्ट इसका सेवन कर पानी को भी पी लें. इसके आधे घंटे कुछ ना खाएं. रोजाना किया गया यह प्रयोग बवासीर के मस्से में भी लाभ पहुंचाता है

खूनी बवासीर का उपचार :
अगर आपको बवासीर के मस्से हैं और इसकी वजह से बेचैनी महसूस होती है तो जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें और इसे मस्सों वाली जगह पर लगायें. इससे जलन और पीड़ा शांत होती है. अगर आपको खुनी बवासीर का इलाज घर पर करना है जो जीरे को भुनकर मिश्री के साथ पीस लें और इसे दिन में 2 से 3 बार फांकें

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज :
एलोवेरा में काफी जलनरोधी गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने का काफी बेहतरीन तरीका साबित होता है। यह काफी आसान तरीकों से बवासीर के लक्षणों से आपको निजात दिलाता है। एलो वेरा की एक पत्ती लें तथा इसके सारे काँटों को तोड़कर फेंक दें। इसके बाद इसे फ्रिज में रख दें। इसके बाद ठंडी सेंक का दोगुना प्रभाव प्राप्त करने के लिए इसका प्रयोग प्रभावित भाग पर करें। एलो वेरा जलन और सूजन को कम करने में आपकी मदद करता है। आप सूजी हुई धमनियों को ठीक करने के लिए एलो वेरा की पत्तियों से निकाले गए जेल का प्रयोग कर सकते हैं।

बवासीर के घरेलू उपचार छाछ से :
छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है। एक चौथाई अजवाइन का पाउडर और 1 ग्राम काला नमक 1 गिलास छाछ में मिश्रित करें। रोजाना दोपहर का खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ का सेवन करें। इससे आपको बवासीर की समस्या से काफी आराम मिलेगा। छाछ आपको दर्द से बचाता है और शरीर में नमी का संचार करता है।

बाबा रामदेव का नुस्खा
जो बवासीर का रोग हैं, पिछले 20 सालों में हमने लाखो लोगों पर प्रयोग किया हैं. नींबू को ठन्डे दूध (धारोष्ण दूध) के साथ सुबह सुबह खाली पेट पीला दें, एक नींबू, ठंडा दूध (ठंडा दूध यानी उसका तापमान ठंडा होना चाहिए) एक बात और याद रखे फ्रिज का ठंडा दूध इस्तेमाल न करे, वैसे तो आपको इस बात का हमेशा ही विशेष ध्यान रखना चाहिए की फ्रिज में रखे ठन्डे दूध का सेवन बिलकुल भी न किया जाए

इसके बदले अगर किन्ही को ठंडा दूध पीना पसंद हैं तो वहां दूध को थाली या बड़े बर्तन में रख कर ठंडा कर के सेवन कर सकते हैं. तो हम बात कर रहे थे बवासीर के घरेलु नुस्खे की, तो एक नींबू को एक कप ठन्डे दूध में सुबह खाली पेट पीजिये.

बवासीर का इलाज
ऐसे लगातार 7 दिन प्रयोग करने से, (वैसे तो तीन ही दिन में लोगों की बवासीर अच्छी हो जाती हैं, लेकिन 7 दिन यह प्रयोग करने से हमने देखा करीब-करीब 99% लोगों की बवासीर अच्छी हो जाती हैं (अगर आपका बवासीर 7 दिन में पूरी तरह ठीक न हो तो इन नुस्खों का प्रयोग आप लम्बे समय तक कर सकते हैं जब तक आपका पाइल्स ठीक न हो जाए)

बवासीर के लिए रामदेव बाबा का उपचार :
घरेलु उपचार के तौर पर आप 100 ग्राम हरड़, 100 शुद्ध रसोत इन सभी का पाउडर कर 1-2 ग्राम सुबह शाम छाछ के साथ लें, बहुत लाभ होगा. नारियल की दाढ़ी (यानी नारियल का छिलका) का पाउडर कर 1-2 ग्राम को छाछ के साथ नियमित रूप से कुछ दिनों तक ले. खुनी बवासीर का इलाज में 100% लाभ होगा. आंवला ओलिवेरा जूस नियमित रूप से पिने से भी बवासीर, फीटसूला पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. तली हुई चीजों से बचे, गरम चीजों से भी बचे, हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करे, सुबह उठकर के पानी जरूर पिए, बेंगन गरम मसाले ज्यादा मिर्च, अचार इन से बचेंगे तो आपको बवासीर की बीमारी से जल्द ही छुटकारा मिलेगा

सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

गिलोय को अमृता कहा गया है क्योंकि यह अमृत कलश से छ्लकी थी और इसके गुण भी अमृत जैसे ही हैं

गिलोय को अमृता कहा गया है क्योंकि यह अमृत कलश से छ्लकी थी और इसके गुण भी अमृत जैसे ही हैं


गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। 

गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है। गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया गया तो वहाँ पर एक नया पौधा बन जाता है।

गिलोय रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है :-
गिलोय में हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण पाए जाते है। गिलोय में एंटीऑक्सीडंट के विभिन्न गुण पाए जाते हैं, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है, तथा भिन्न प्रकार की खतरनाक बीमारियाँ दूर रखने में सहायता मिलती है। गिलोय हमारे लीवर तथा किडनी में पाए जाने वाले रासायनिक विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य भी करता है। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली बीमारीयों के कीटाणुओं से लड़कर लीवर तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं से हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।

गिलोय ज्वर से लड़ने के लिए उत्तम औषधी :-
गिलोय की वजह से लंबे समय तक चलने वाले बुखार को ठीक होने में काफी लाभ होता है। गिलोय में ज्वर से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय हमारे शरीर में होने वाली जानलेवा बीमारियों के लक्षणों को उत्पन्न होने से रोकने में बहुत ही सहायक होता है। यह हमारे शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाता है जो कि किसी भी प्रकार के ज्वर से लड़ने में उपयोगी साबित होता है। डेंगु जैसे ज्वर में भी गिलोय का रस बहुत ही उपयोगी साबित होता है। यदि मलेरिया के इलाज के लिए गिलोय के रस तथा शहद को बराबर मात्रा में मरीज को दिया जाए तो बडी सफलता से मलेरिया का इलाज होने में काफी मदद मिलती है।

गिलोय पाचन क्रिया करता है दुरुस्त :-
गिलोय की वजह से शारीरिक पाचन क्रिया भी संयमित रहती है। विभिन्न प्रकार की पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में गिलोय बहुत ही प्रचलित है। हमारे पाचनतंत्र को सुनियमित बनाने के लिए यदि एक ग्राम गिलोय के पावडर को थोडे से आंवला पावडर के साथ नियमित रूप से लिया जाए तो काफी फायदा होता है।

गिलोय बवासीर का भी इलाज है गिलोय :-
बवासीर से पीडित मरीज को यदि थोडा सा गिलोय का रस छांछ के साथ मिलाकर देने से मरीज की तकलीफ कम होने लगती है।

गिलोय अस्थमा का बेजोड़ इलाज :-
अस्थमा एक प्रकार की अत्यंत ही खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से मरीज को भिन्न प्रकार की तकलीफों का सामना करना पडता है, जैसे छाती में कसाव आना, साँस लेने में तकलीफ होना, अत्याधिक खांसी होना तथा सांसो का तेज तेज रूप से चलना। कभी कभी ऐसी परिस्थिती को काबू में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है, कि अस्थमा के उपर्युक्त लक्षणों को दूर करने का सबसे आसान उपाय है, गिलोय का प्रयोग करना। जी हाँ अक्सर अस्थमा के मरीजों की चिकित्सा के लिए गिलोय का प्रयोग बडे पैमाने पर किया जाता है, तथा इससे अस्थमा की समस्या से छुटकारा भी मिलने लगता है।

गिलोय आंखों की रोशनी बढ़ाने हेतु :-
गिलोय हमारी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह हमारी आंखों की दृष्टी को बढाता है, जिसकी वजह से हमे बिना चश्मा पहने भी बेहतर रूप से दिखने लगता है। यदि गिलोय के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर यह पानी ठंडा होने पर आंखों की पलकों पर नियमित रूप से लगाने से काफी फायदा होता है।

गिलोय खून से जुड़ी समस्याओं को भी करता है दूर :-
कई लोगों में खून की मात्रा की कमी पाई जाती है। जिसकी वजह से उन्हें शारीरिक कमजोरी महसूस होने लगती है। गिलोय का नियमित इस्तेमाल करने से शरीर में खून की मात्रा बढने लगती है, तथा गिलोय हमारे खून को भी साफ करने में बहुत ही लाभदायक है।

गिलोय सौंदर्यता के लिए भी है कारगार :-
गिलोय का उपयोग करने से हमारे चेहरे पर से काले धब्बे, कील मुहांसे तथा लकीरें कम होने लगती हैं। चेहरे पर से झुर्रियाँ भी कम होने में काफी सहायता मिलती है। यह हमारी त्वचा को युवा बनाए रखने में मदद करता है। गिलोय से हमारी त्वचा का स्वास्थ्य सौंदर्य बना रहता है। तथा उस में एक प्रकार की चमक आने लगती है।

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

खूनी और बादी बवासीर के लिए घरेलू उपचार

खूनी और बादी बवासीर के लिए घरेलू उपचार


बवासीर मुख्यत दो प्रकार की होती हैं। खुनी बवासीर और बादी बवासीर। खुनी बवासीर में मस्से सुर्ख होते हैं, और उनसे खून गिरता हैं, जबकि बादी बवासीर में मस्सो में खाज, पीड़ा और सूजन बहुत होती हैं। अतिसार, संग्रहणी और बवासीर-ये तीनो एक दूसरे को पैदा करते हैं। जो लोग बवासीर से बहुत परेशान हैं, वो शौच करने के बाद मलद्वार में ऊँगली डाल कर सफाई करे तो कभी बवासीर नहीं होगी। ये थोड़ा अटपटा लगता हैं, मगर ऐसा करने से आप तारो ताज़ा महसूस करेंगे, और आपको बवासीर की शिकायत नहीं होगी। इसके बाद आप सरसों का तेल भी ऊँगली की सहायता से अंदर लगाये, इसको गणेश किर्या भी कहा जाता हैं।

बवासीर के रोगी को बादी और तले पदार्थ नहीं खाने चाहिए, जिनसे पेट में कब्ज हो। बवासीर के रोगी को चाहिए के वो कब्ज ना रहने दे। इसलिए वो रात को दूध में एक चम्मच गाय का घी या बादाम रोगन डाल कर पिए। और इसके साथ हर सुबह नित्य कर्म से निर्व्रत हो कर 15 मिनट कपाल भाति प्राणायाम ज़रूर करे। भोजन हल्का और सुपाच्य ले।

आइये जाने बवासीर को ख़त्म करने के आयुर्वेदिक सरल उपचार। 

केला और कत्था
पके केले को बीच में से चीरकर दो टुकड़े कर ले और उस पर कत्था पीसकर, थोड़ा थोड़ा बुरक ले। कत्था बाजार से पिसा पिसाया मिल जाता हैं। इस के बाद केले के उन टुकड़ो को खुली जगह पर आसमान के नीचे रख दे। सुबह होने पर खाली पेट  उन टुकड़ो का सेवन करे। एक हफ्ते ये प्रयोग करे, कैसी भी बवासीर हो, नष्ट हो जाती हैं।
तुरई
आधा किलो तुरई को बारीक काटकर २ लीटर पानी में उबाल लिया जाए और छान लिया जाए और प्राप्त पानी में 1 बैंगन को पका लें। बैंगन पक जाने के बाद इसे घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से बवासीर में बने दर्द तथा पीड़ा युक्त मस्से झड़ जाते हैं। ये प्रयोग ३ से 5 दिन तक करे। और इस को करने से पहले और बाद में एक घंटे तक कुछ न खाए।
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नारियल की जटा
नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
जीरा
जीरे को भूनकर उसमे ज़रूरत अनुसार मिश्री मिलाकर मुंह में डालकर चूसे और बिना भूने जीरे को पानी के साथ पीसकर बवासीर के मस्सो पर लेप करे। इन दोनों उपचारो से बवासीर की पीड़ा में निश्चित शांति मिलती हैं।

नीम्बू
खुनी बवासीर में नीम्बू को बीच में चीरकर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दे और उसे रात में छत पर रख दे। सुबह इनको चूस लीजिये। ये प्रयोग पांच दिन करे। खुनी बवासीर के लिए ये उत्तम प्रयोग हैं।
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रीठा और सफ़ेद मूसली
पचास ग्राम रीठे तवे पर रख कर कटोरी से ढक दीजिये और तवे के नीचे आग जल दे। एक घंटे में रीठे जल जाएंगे। ठंडा होने पर रीठो को खरल कर ले या सिल पर बारीक पीस ले। इसके बाद सफ़ेद कत्थे का चूर्ण बीस ग्राम और कुश्ता फौलाद तीन ग्राम ले कर उसमे रीठे का बीस ग्राम भस्म मिला दे। उसे सुबह शाम एक एक ग्राम मक्खन के साथ खाए। ऊपर से गर्म दूध पी ले। दोनों ही प्रकार की बवासीर में दस पंद्रह दिनों में आराम आ जाएगा। गुड, गोश्त, शराब, आम और अंगूर का परहेज करे।

प्याज
प्याज के छोटे छोटे टुकड़े कर के धुप में सुखा ले। सूखे टुकड़ो में से एक तोला प्याज ले कर गाय के घी में तले। बाद में एक माशा तिल और दो तोले मिश्री उसमे मिला कर रोज़ सुबह खाए। ये भी बवासीर का शर्तिया इलाज हैं।

मूली
मूली का नियमित सेवन दोनों बवासीर को ठीक कर देता हैं।

मट्ठा
बवासीर में मट्ठा अमृत सामान हैं। लेकिन बिना सेंधा नमक मिलाये इसको नहीं पीना चाहिए। यदि बवासीर के रोगी को अपच हो तो उसको मट्ठा नियमित नियमपूर्वक पीना चाहिए।

गुड हरड़
गुड के साथ हरड़ खाने से बवासीर का तत्काल नाश होता हैं।

बकरी का दूध।
सुबह सवेरे रोज़ बकरी का दूध पीने से बवासीर का नाश होता हैं।

बवासीर के मस्सो पर लेप।
बवासीर के मस्सो पर लेप करने के लिए निम्नलिखित उपचार अपनाने चाहिए, ताकि शीघ्र ही इस कष्ट से मुक्ति मिले।
  • हल्दी और कड़वी तोरई का लेप सभी प्रकार के मस्सो के लिए लाभदायक है। ये मस्सो को नष्ट करता हैं।
  • आक और सहजन के पत्तो का लेप भी मस्सो को नष्ट करता हैं।
  • नीम और कनेर के पत्तो का लेप मस्सो को खत्म करता हैं।
  • कड़वा घीया और गुड को कांजी में पीसकर लेप करे। इस से मस्से नष्ट होते हैं।
  • तम्बाकू के पत्ते महीन पीसकर मस्सो पर लगाने से ये शीघ्र ही नष्ट होते हैं।
  • नीम और पीपल के पत्तो का लेप करने से मस्से नष्ट होते हैं।
  • बड़ (बरगद) के पीले पत्ते जलाकर उनकी ६ मासे राख सरसों के तेल में मिलकर लेप करने से बवासीर के मस्से नष्ट होते हैं।
  • गाय के घी में कुचला घिसकर लेप करने से, बवासीर के घाव ठीक हो जाते हैं।
  • नीम के तेल की चार से पांच बूंदों को बवासीर के मस्सों पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है। साथ ही आप नींम के तेल की दो बूंदे पी भी सकते हैं।