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सोमवार, 5 मार्च 2018

शुभ संकेत माना जाता है ऐसे समय पर छींक आना

शुभ संकेत माना जाता है ऐसे समय पर छींक आना


बहुत पुराने समय से ही लोग शकुन-अपशकुन शास्त्र को मानते आये है। बिल्ली का रास्ता काटना, दूध गिर जाना, शीशा टूटना आदि। दैनिक जीवन में कुछ क्रिया ऐसी होती है,जिन पर हमारा बस नहीं चलता लेकिन जिनका हमारे जीवन से बहुत महत्व होता है। सभी धर्मों की इस प्रकार की अलग-अलग मान्यताएं होती है।

हिंदू धर्म में कुछ क्रियाओं को लेकर शुभ अशुभ का संकेत माना जाता है और यह प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा है। शास्त्रों में भी इनके बारे में पढ़ने को मिलता है। वैसे तो हमने सुना है कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले अगर छींक आ जाए, तो वह अशुभ माना जाता है, तो दोस्तों आज हम कुछ ऐसी ही विडंबनाओं के बारे में बताने जा रही है, जो हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। छींकने से जुड़े शकुन अपशकुन के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं छींक आना हमेशा अशुभ नहीं होता। कभी कभी छींक आना भविष्य में घटने वाली शुभ घटना का संकेत देती है। आज हम आपको बताएँगे कि छींक का प्रभाव कब शुभ होता है और कब अशुभ।

छींक के शुभ-अशुभ प्रभाव


  • घर से किसी कार्य के लिए निकलते समय अगर छींक आ जाए, तो इसे अशुभ माना जाता है, लेकिन अगर 2 छींक साथ आ जाएं, तो यह शुभ माना जाता है। 
  • खाना खाने बैठते वक्त अगर छींक आ जाए, तो कुछ समय रुक कर ही खाना खाएं। ऐसा अशुभ माना जाता है।
  • अगर किसी बीमार व्यक्ति को दवाई लेते वक्त छींक आ जाए, तो यह उसके लिए शुभ संकेत है और वह जल्दी ठीक होने की संभावना रहती है। अतः ये एक शुभ संकेत है।
  • अगर किसी वस्तु को खरीदते समय हमें छींक आ जाए, तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। आपके लिए ये फायदे का सौदा है।
  • पीछे की तरफ या बायीं ओर से छींक सुनाई दे तो ये बहुत शुभ होता है।
  • दायीं ओर छींक होने का अर्थ धन का नुक्सान होता है।
  • शराबी की छींक, बच्चों की छींक, बूढ़ों की छींक तथा हठ पूर्वक छींकना निष्फल माना जाता है।
  • कोशिश करने पर भी यदि छींक न रूके तो मनुष्य जिस कार्य के लिए जा रहा हो, उसमें विघ्न अवश्य पड़ता है।
  • अगर कोई नया व्यापार या काम शुरू करते समय छींक आ जाए, तो यह शुभ संकेत है।
  • अगर आप सोने जा रहे हैं या फिर सोकर उठते ही छींक आ जाए, तो यह अशुभ माना जाता है। अतः कुछ देर रुक कर और पानी पीकर सोना चाहिए।


रविवार, 26 नवंबर 2017

छींक का आना कब होता है शुभ और कब अशुभ, जरुर जानिए

छींक का आना कब होता है शुभ और कब अशुभ, जरुर जानिए


छींक को प्राय: अशुभ माना जाता है, लेकिन ज्योतिष तथा पौराणिक शास्त्रों के अनुसार छींक बहुत शुभ मानी जाती है। शुभ कार्य के लिए गमन के समय यदि कोई छींक मार दे तो अपशकुन होता है, ऐसा कहा जाता है।जनमानस में यह भी विश्वास है कि एक से अधिक छींक आने पर अपशकुन नहीं होता। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार छींक आना एक सामान्य मानवीय प्रक्रिया है। सर्दी, जुकाम के कारण छींक आए या रोगी मनुष्य यदि बार-बार छींकता है तो भी इस पर अपशकुन नहीं होता। लेकिन कई ऐसी बातें है जो इस बा‍त को ‍सिद्ध करती है कि छींक सिर्फ अ‍शुभ ही नहीं, अपितु शुभ भी होती है... 

जानिए कैसे :- 

* रसोई में दूध उबलते समय यदि गृहिणी छींक दे तो आपत्तिजनक है।

* यदि शुभ कार्य के लिए जाते समय गाय या उसका बछड़ा छींक दे तो निश्चित कार्य सिद्धि होती है। यह शकुन धन वृद्धि का भी सूचक है।
* रास्ते में अथवा घर के बाहर यदि कुत्ता छींक दे तो विघ्न/विपत्ति की सूचना देता है, लेकिन यदि कुत्ता एक से अधिक बार छींक दे तो विपत्ति के टल जाने की संभावना है।

* दवाई का सेवन करते समय यदि छींक आए और औषधि गिर जाए तो रोग का निवारण शीघ्र होता है तथा बीमार व्यक्ति शीघ्र ही अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है। 

* यदि आपके मार्ग में गजराज छींक दे तो राज्य लाभ होता है।
* श्मशान, दु:स्थान तथा किसी दुर्घटना स्थल पर कोई व्यक्ति छींक मार देता है तो इसे वैदिक साहित्य में शुभ माना जाता है।

* सामने की छींक लड़ाई-झगड़े को बतलाती है। 

* पीछे की छींक से सुख से सुख मिलता है। 
* दाईं तरफ की छींक धन को नष्ट करती है। 

* बाईं तरफ की छींक से सुख मिलता है। 

* ऊंची छींक बड़ी ही उत्तम होती है। 

* नीची छींक बड़ी दुखदायिनी होती है। 

* चलते समय अपनी छींक बड़ा दुख देने वाली होती है।

* महामारी, दुर्भिक्ष या भूकम्प की सूचना पर यदि जीव-जंतु तथा मनुष्य छींक दे तो अनिष्ट के दूर होने की संभावना रहती है।

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

अगर आपको भी सुबह उठते ही आती हैं 10-15 छींके तो अपनाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खे!

अगर आपको भी सुबह उठते ही आती हैं 10-15 छींके तो अपनाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खे!


आपने बहुत सारे लोगों को सुबह उठते ही लगातार 10 से 15 छींके लगाते देखा होगा। ऐसा नाक में होने वाली एलर्जी की वजह से होता है जिसे एलर्जिक राइनाइटिस कहते हैं। ये एलर्जी घर की धूल और पालतू या अन्य जानवरों की वजह से हो सकती है।

वैसे यह एलर्जी आम समस्या है। वैसे तो यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन आपकी सामान्य दिनचर्या इससे काफी प्रभावित हो सकती है। इसका सही समय पर उपचार किया जाए तो यह परेशानी जल्द खत्म हो सकती है। दरअसल, हमारी नाक श्वास के साथ प्रवेश करने वाले धूल कण व अन्य पदार्थों को रोकती है लेकिन जब किसी तरह यह धूल और पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो इम्‍यूनिटी इनके प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करती है जो एलर्जी के रूप में सामने आते है।

प्रमुख लक्षण :

-लगातार छींके आना
-नाक से पानी जैसा तरह पदार्थ बहना
-नाक, आंख व तालू में खुजली होना। 
-नाक या गले में खराश
-हल्का बुखार या सिरदर्द 
-आंखों से आंसू
-नाक बंद होना

क्यों होती है एलर्जी?

वैसे इसका प्रमुख कारण धूल मिट्टी या हानिकारक पदार्थ का सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करना है। इसके अलावा बदलते मौसम, तापमान में आए अचानक परिवर्तन, नमी, प्रदूषण, जानवरों के बाल व गंध हैं और शरीर में प्रवेश करने या स्किन पर लगने से कोई प्रतिक्रिया से यह एलर्जी राइनाइटिस के रूप में सामने आती है।

क्या है नेजल पॉलिप व साइनसाइटिस?  

एलर्जिक राइनाइटिस के अलावा नेजल पॉलिप,साइनसाइटिस भी नाक की इंफैक्शन का ही महत्वपूर्ण कारण है। दरअसल नाक के अंदर का मांस बढ़ने को नेजल पॉलिप कहते हैं जबकि साइनसाइटिस की प्रॉब्लम तब होती है जब नाक के आसपास हड्डियों में हवा का आवागमन सही से नहीं हो पाता और संक्रमण फैलने लगता है।

बरतें सावधानियां

-धूल और धुएं से बचें।
- अगर इफैक्शन के शिकार जल्द हो जाते हैं तो झाड़ू की जगह वेक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें।
- कपड़ों बेडशीट और कालीन में नमी ना रहने दें। समय-समय पर इन्हें धूप लगाएं।
-एलर्जी ज्यादा है तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।

राहत पाने के आयुर्वेदिक उपचार

यह जरूरी नहीं है कि आप छुटकारा सिर्फ एंटीबॉयोटिक दवाओं से पा सकते हैं बल्कि कुछ आयुर्वेदिक दवाएं भी बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है।
1. तुलसी : 
तुलसी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसलिए आप तुलसी के पत्तों की चाय बनाकर पी सकते हैं।

2. हल्दी
इसमें एंटी एलर्जिक, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण राइनाइटिस से लड़ने में मदद कर सकते हैं। शहद और हल्दी का मिश्रण ले सकते हैं अगर यह उपचार कठिन है तो आप एक गिलास दूध में एक स्पून हल्दी का सेवन कर सकते हैं।

3. घी
एलर्जी से होने वाली बुखार से राहत पाने के लिए आप सोने से पहले रात में नाक के दोनों तरफ 2 बूंदें घी की डाल सकते हैं।

4. पुदीना
पुदीने में सूजन कम करने के गुण शामिल होते हैं। पुदीने के 2 से 3 पत्ते चबाएं। पुदीने की चाय पीने से भी आपको राहत मिलेगी।

5. अदरक
एक गिलास पानी में अदरक का छोटा टुकड़ा उबाल लें फिर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाकर पीएं।

सोमवार, 19 सितंबर 2016

छींक से निजात पाने के घरेलू उपाए

छींक से निजात पाने के घरेलू उपाए


अगर आपको  सुबह-सुबह उठते ही छीके शुरू हो जाती है, और यह प्रक्रिया कुछ समय तक लगातार चलती रहती है, और आप चाहते हैं कि इससे आपको जल्द ही मुक्ति मिले, तो इन घरेलू उपचारों की मदद लें।

शहद और नीम्बू : 

अगर आप छींक से तुरंत राहत चाहते हैं तो शहद और नीम्बू को मिलाकर लें, शहद में  एंटी बैक्टीरियल होता है और नीम्बू में विटामिन सी होता है, इन दोनों को गुनगुने पानी में मिलाकर पीएं, इससे आपकी छींक कम हो जायेगी।

सौंफ की चाय : 

सौंफ में एंटी वायरल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, खौलते पानी में एक चम्मच सौंफ पाउडर डाल कर इस चाय को बनाते हैं, इससे छींक में आराम मिलता है।

हल्दी : 

हल्दी में करक्यूमिन होता है जो असरदार सर्दी खांसी की दवा होती है, इससे एलर्जी और छींक से छुटकारा मिल जाता है, इसे आप सब्ज़ी बनातेवक़्त करी में भी डाल सकते हैं या पाउडर की तरह भी ले सकते हैं।

हींग : 

अगर आप लगातार छींक और बहते नाक से परेशान हैं तो थोड़ा हींग लेकर इसके गंध को अंदर लें, इससे छींक में आराम मिलेगा।

अजवाइन : 

पानी उबाल कर उसमें एक चम्मच आजवाइन डालें, अब इसे छान कर इसमें एक चम्मच शहद मिला लें और इसे पीएं, इससे छींक और बहती नाक पर असर दिखेगा।

काली मिर्च :  

छींक से कॉफिन परेशान हैं तो आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर को  गुनगुने पानी के साथ लें, इससे ज़ुकाम और छींक में आराम मिलेगा।

लहसुन  : 

लहसुन  में एंटी बैक्टीरियल होता है, लहसुन को कूच कर पानी में डाल कर उबाल लें, अब पानी में से लहसुन छान लें और पानी ले, आप लहसुन को कूच कर उसकी सुगंध भी ले सकते हैं।