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मंगलवार, 20 जून 2017

बरसाती घाव और फोड़े फुंसी ठीक करने के घरेलू उपाय

बरसाती घाव और फोड़े फुंसी ठीक करने के घरेलू उपाय


स्किन से जुडी परेशानियां जैसे दाद, खाज, खुजली, फोड़े, फुंसियों से जुडी परेशानी के होने का मुख्य कारण आपके रक्त का दूषित होना होता है, साथ ही बाहरी प्रदूषण से भी आपकी स्किन बहुत जल्दी प्रभावित है, बाहरी और भीतरी प्रदूषण के कारण आपकी स्किन पर इसका असर साफ़ दिखाई देता है, और बारिश में तो प्रदूषण होना आम बात होती है, जिसके कारण बारिश में आपको ये समस्या होने लगती है, और आपको फोड़े फुंसी होने लगती है, साथ ही यह समस्या संक्रमण के रोग की तरह होती है जो किसी दूसरे के होने पर उसके संपर्क में आने से आपको भी हो सकती है।

बरसात के मौसम के आने का जहां इंतज़ार बारिश की बूंदों में नहाने से खत्म होता है, वहीँ त्वचा पर इसका बुरा प्रभाव भी साफ़ दिखाई देता है, और यह आपकी स्किन पर कहीं भी हो जाते है जिसके कारण आपको शर्मिंदगी का अहसास होता है, क्योंकि यह चेहरे, हाथ, पैर, गर्दन, कूल्हे आदि कही भी हो जाते है, अजीब से दिखने के साथ कई बार इनमे आपको दर्द का अहसास भी होता है, परन्तु यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसका कोई समाधान नहीं है, आइये आज हम आपको बताते है की इस समस्या के समाधान के लिए आप क्या कर सकते है, ये नुस्खे सस्ते होने के साथ काफी असरदार भी है।

सरसों के तेल का इस्तेमाल करें:-
इस उपाय को करने के लिए आप एक रुई के टुकड़े को पानी में भिगो दें, उसके बाद उसे पानी में से निकाल कर अच्छे से निचोड़ दें, और तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर रुई को अच्छे से पकाएं, उसके बाद आप इसे घाव या फोड़े फुंसी पर रखकर पट्टी बाँध दें, ऐसा करने से वो पक जाएगा, और इसे ठीक होने में मदद मिलेगी, आप सरसों के तेल की जगह शुद्ध देसी घी का भी इस्तेमाल कर सकती है, और आप इसे दिन में दो बार जरूर करें।

बरगद के पत्तों का इस्तेमाल करें:-
बरगद के पत्तों का इस्तेमाल करने से भी आपको फोड़े फुंसी की समस्या को तेजी से खत्म करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप बरगद के पत्तों को गरम करके अच्छे से उस स्थान पर रखें जहां आपको परेशानी है, और उसके बाद पट्टी या किसी सूती कपडे की मदद से अच्छे से बाँध दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है।

नीम की सूखी छाल का इस्तेमाल करें:-
नीम की सूखी छाल को पानी के साथ के साथ घिसकर एक लेप के रूप में तैयार करें, उसके बाद इस लेप को उस स्थान पर लगाएं जहां आपको फोड़े फुंसी या घाव है, पर लगाएं ऐसा दो से तीन बार करें, आपको इसका असर दिखाई देगा, और आपको इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी।

करेले का इस्तेमाल करें:-
करेला में मौजूद गुण आपकी इस समस्या का आसानी से समाधान करने में मदद करता है, स्वाद में कड़वे करेले के रस में निम्बू का रस मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से आपको बहुत फायदा मिलता है, और यह केवल आपको न केवल फोड़े फुंसी बल्कि बवासीर, शुगर, खांसी जैसी समस्या से भी निजात पाने में आपको मदद मिलती है।

नीम के तेल का इस्तेमाल करें:-
नीम भी प्राकृतिक औषधि है जो की आपको त्वचा सम्बन्धी समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम की पत्तियों या छाल का इस्तेमाल कर सकते है, और इसका प्रयोग करने के लिए आप नीम की पत्तियों या छाल को पीस कर एक लेप तैयार करें, उसके बाद इस लेप को प्रभावित स्थान पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद पानी से साफ़ कर दें, और अच्छे से उसे कपडे की मदद से साफ़ करके उस स्थान पर अरंडी का तेल लगाएं, आपको दो या तीन बार के इस्तेमाल से ही फ़र्क़ दिखाई देगा।

प्याज़ का प्रयोग करें:-
प्याज़ के एंटीसेप्टिक गुण भी आपको फोड़े फुंसी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है, क्योंकि जब आप इसे घाव पर रखकर पट्टी से कांधते है तो यह गर्मी बनाकर आपके घीस को भरने और फोड़े फुंसी की ठीक करने में मदद करते है, आप इसके लिए एक प्याज लेकर उसे गोल गोल स्लाइसेस में काट लें, उसके बाद एक स्लाइस को पट्टी की मदद से बाँध लें, दिन में दो बार इस तरीके का इस्तेमाल करें आपको फायदा मिलेगा।

टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें:-
फोड़े फुंसियों की समस्या से राहत के लिए टूथपेस्ट सबसे आसान और सस्ता उपचार है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अपने घाव, फोड़े फुंसी पर इसका प्रयोग करें, और इसे जब तक लगाते रहे जब तक की आपके घाव अच्छे से ठीक न हो जाएँ, एक हफ्ते में आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

दही का प्रयोग करें:-
दही आपकी स्किन की कोमलता को बरकरार रखने के साथ आपको फोड़े फुंसियों की समस्या से राहत दिलाने में भी मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप मलमल के कपडे में एक कटोरी दही को बाँध कर लटका दें, और उसे तब तक लटके रहने दे, जब तक की उसका पानी अच्छे से निकल न जाएँ, उसके बाद उसे निकाल कर उसमे कुछ बूंदे ग्लिसरीन की मिलाएं, और इसे अपने घाव, फोड़े फुंसी आदि पर लगाएं, ऐसा करने के बाद उसे रात भर के लिए छोड़ दें, और सुबह उठकर उस स्थान को साफ़ करें, और इस उपाय को जब तक करें जब तक की आपकी समस्या का हल न हो जाएँ।

सेंधा नमक का इस्तेमाल करें:-
सेंधा नमक का इस्तेमाल करने से भी आपको फोड़े फुंसियों की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप पानी में सेंधा नमक मिलाएं, और उससे नियमित स्नान करें, या फिर पानी को हल्का गुनगुना करके उसमे सेंधा नमक मिलाएं, और किसी कपडे की मदद से अपने घाव को अच्छे से साफ़ करें, इस उपाय को करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप बरसाती घाव और फोड़े फुंसियों की समस्या से राहत पा सकते है, इन तरीको का इस्तेमाल करने से आपको बहुत जल्दी ही राहत मिलती है, साथ ही आयुर्वेदिक होने के कारण यह आपकी स्किन पर किसी तरह का दुष्प्रभाव भी नहीं डालते है, तो यदि आपको भी ये समस्या होती है तो इन टिप्स का इस्तेमाल करके इन परेशानियों से राहत पाएं, इसके अलावा आपको साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यदि आप इनकी अच्छे से ढक कर नहीं रखते है तो इसके कारण आपको इन्फेक्शन का भी खतरा रहता है, इसीलिए आप इन्हें ढक कर रखें।

मंगलवार, 6 जून 2017

फोड़े-फुंसी को जड़ से खत्‍म करता है करेला, जानें और फायदे!

फोड़े-फुंसी को जड़ से खत्‍म करता है करेला, जानें और फायदे!


गर्मी और बारिश के मौसम में अक्‍सर लोगों की त्‍वचा में संक्रमण होने का खतरा रहता है। हानिकारक बैक्‍टीरिया की वजह फोड़े-फुंसी की समस्‍या हो जाती है जो काफी दर्दकारक होती है। तो अगर आप भी फोड़े-फुंसी की समस्‍या से जूझ रहे हैं तो आपको कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। आप अपने घर के किचन में जाइए और वहां रखा करेला लीजिए और उसका इस्‍तेमाल कीजिए। इससे आपकी समस्‍या का जड़ से समाधान होगा!

फोड़े-फुंसी को ऐसे करें ठीक

अगर आपकी स्किन में कहीं फोड़े-फुंसी हैं, तो आप करेले की जड़ को घिसकर फोड़े या घाव वाली जगह लगा लें। इससे कुछ ही दिनों में फोड़ा ठीक हो जाएगा। अगर करेले की जड़ ना मिले तो करेले के पत्ते को पीसकर थोड़ा गर्म करके पट्टी में बांधकर घाव पर लगा दें, इससे पस निकल जाएगा और घाव में होने वाले दर्द में भी आराम मिलेगा।

...और भी हैं करेले के फायदे

1. करेले का जूस और फल के अलावा इसकी पत्तियां भी फायदेमंद होती है। इसका सेवन करने से पेट संबंधी समस्या दूर होती है।


2. इससे पथरी की शिकायत भी दूर होती है। इसलिए नियमित रूप से इसका सेवन करना चाहिए। करेले के अलावा खाली पेट इसका जूस पीना फायदेमंद होता है। लेकिन ताजे करेले के रस का ही सेवन करना चाहिए।

3. करेला कान में होने वाले दर्द को भी दूर करता है। इसके रस की 4-4 बूंदें कान में डालते रहें, इससे कान दर्द में आराम मिलेगा।

4. रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्यों कि करेले में मौजूद एंटी-कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं।  

5. भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं। इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है जिससे भूख बढ़ती है|

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

तुलसी से निकल जाती है पथरी, जानें इसके 9 और काम के नुस्खे

तुलसी से निकल जाती है पथरी, जानें इसके 9 और काम के नुस्खे


तुलसी ऐसा पौधा है जो अमूमन हर घर में पाया जाता है। तुलसी को बेसिल लीव्स के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि तुलसी के पौधे में कई दिव्य गुण हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं तुलसी से कई गंभीर समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। इसका पौधा बड़ा पेड़ नहीं बनता, केवल ड़ेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तुलसी को हिन्दू संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं और यह हवा को भी शुद्ध बनाने का काम करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं, चलिए आज जिक्र करेंगे तुलसी से जुडे आदिवासियों के ऐसे 10 जबरदस्त हर्बल नुस्खों का जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो..

1. किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।

2. आदिवासी अंचलों मे पानी की शुद्धता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है। इन्हें कम से कम एक सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा जाता है। फिर कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और यह पीने योग्य माना जाता है। 

3. औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। 

4. दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राॅल को नियंत्रित करती है। जिन्हें दिल की बीमारी हुई हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सेवन कर सकता है।

5. तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। इसे रात को चेहरे पर लगाने से फोड़े-फुंसियां ठीक हो जाती हैं और चेहरे की रंगत में निखार आता है।

6. तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि भी माना जाता है, ज्यादा थकान या तनाव होने पर तुलसी के पत्तियों और मंजरी का सेवन करें थकान दूर हो जाएगी।

7. फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लू के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।

8. इसके नियमित सेवन से "क्रोनिक-माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। रोजाना दिन में 4- 5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।

9. शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो उसे जल्द ही संतान सुख मिलता है।

10. घमाैरियों के इलाज के लिए डांग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लेते हैं। इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते हैं, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

फोड़ा फुंसी के कारण और घरेलु इलाज, अपनाइए

फोड़ा फुंसी के कारण और घरेलु इलाज, अपनाइए


लोग अकसर पिंपल्स और मुंहासों से बचने की बात तो खूब करते हैं लेकिन फोड़ा से कैसे बचें? है ना यह बड़ा सवाल… फोड़ा आपके त्वचा का एक विकार ही है जो शुरू में लाल गांठ की तरह आपको नज़र आता है। गौरतलब है कि जब फोड़ा अपना रूप ले रहा होता है तो सबसे पहले आपको सिर्फ खुजली सी महसूस होगी और यह भी हो सकता है कि कभी-कभी खुजली आपको हो भी नहीं। बता दें कि जैसे-जैसे फोड़ा आपके शरीर में बड़ा होता जाएगा, इसका रंग भी बदलता दिखाई देखा। खुजली के कुछ दिन बाद से ही इसमें दर्द भी होने लगता है।

क्या है फोड़े होने के कारण, यहां जानें –

  • साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखने से
  • शरीर को शक्ति देने वाली चीज़ें नहीं खाने से
  • डायबिटीज़ या फिर त्वचा की सतह से चमड़ी निकल जाना भी

ध्यान रहें : 

वैसे लोग या बच्चे जो कुपोषित का शिकार होते हैं या हमेशा स्वच्छ और स्वस्थ नहीं रहते हैं उन्हें भी फोड़ा होने की संभावना बहुत अधिक होता है। यही नहीं, स्ट्रांग स्मेल (गंध) वाले डियोडरेंट के इस्तेमाल से भी आपकी स्कीन खराब हो सकती है और फोड़े की समस्या आपको अपने घेरे में ले सकता है।

यूं तो गर्म सेंकाई फोड़े को अंदर से पका देती है और दर्द खत्म कर देती है। वहीं अगर फोड़े के पकने की प्रक्रिया तीव्र हो जाए तो मरहम और एंटीबैक्टीरियल दवाई लगाकर इसका उपचार आप कर सकते हैं। इस टिप्स से आपको फोड़े के आकार को बढ़ने से रोकने में काफी मदद मिलेगा।
संक्रमण से बचना है तो अपने फोड़े पर पट्टी बांधकर ही हमेशा रखें। बार-बार आने वाले फोड़े विटामिन या मिनरल की कमी या अस्वच्छता की ओर संकेत करते हैं।

फोड़ा होने पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमे चोट ना आए वरना वह एक बड़ा घाव का रूप ले सकता है। यही नहीं, जब आपके फोड़े में पानी जैसा कुछ आने लगे जिसे हम पस भी बोलते हैं, तो कोशिश करें उसके संपर्क में अपना कोई दूसरा बॉडी पार्ट ना लाए क्योंकि यह फोड़ा और भी दूसरी जगह अपना घर बना सकता है जो काफी तकलीफदेह साबित होता है।

एक बात का और ध्यान रखें कि रोजाना अपना पहना हुआ कपड़ा बदल लें क्योंकि फोड़े का अंश आपके कपड़े से भी चिपक सकता है जो आपके शरीर के और भी भाग में फोड़े को पनपने में मदद कर सकता है।

बुधवार, 21 सितंबर 2016

जानें फोड़े होने का कारण लक्षण और उपचार

जानें फोड़े होने का कारण लक्षण और उपचार

फोड़ा त्वचा का एक विकार है जो शुरू में लाल गाँठ की तरह दिखाई देता है।
लक्षण :-
जब फोड़ा बनता है तो पहले आपको सिर्फ खुजली महसूस होती है; हालाँकि कभी कभी खुजली नहीं होती। जैसे जैसे फोड़ा बड़ा होता जाता है इसका रंग बदलता जाता है तथा इसमें पस दिखाई देने लगता है। इस समय इसमें दर्द और खुजली होना शुरू हो जाता है।

फोड़े होने के कारण :-
फोड़े होने के कारण स्वच्छता न रखना, अपर्याप्त पोषक तत्व, विशिष्ट प्रतिरोध प्रणाली बीमारियाँ, डाइबिटीज़ या त्वचा की सतह से चमड़ी निकल जाना आदि हो सकते हैं। ऐसे लोग या बच्चे जो कुपोषित हैं या स्वच्छ और स्वस्थ नहीं रहते उन्हें त्वचा संबंधी विकार होने की संभावना अधिक होती है। बहुत अधिक तीव्र गंध वाले डियोडरेंट के इस्तेमाल से भी त्वचा संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं।फोड़ा बैक्टीरिअल इंफैक्शन के कारण होता है, जो कि त्वचा में बहुत अंदर तक पहुंच जाता है। शुरुआत लाल रंग की फुंसी से होती है जो बाद में बड़ी हो जाती है और इसमें सफेद पीप भर जाता है। यह काफी तकलीफदेह होता है। फोड़ा डिहाइड्रेशन या फिर किसी तरह के स्किन इंफैक्शन के कारण होता है।
फोड़े का इलाज
फोड़े का इलाज आसान है तथा घर भी इसका उपचार किया जा सकता है परन्तु आपको कई ऐसे मामले देखने मिलेंगे जहाँ एक प्रमाणित चिकित्सक की राय की आवश्यकता भी पडी है। त्वचा की समस्याएं घातक नहीं होती तथा उचित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। जब गाँठ बनने की शुरुआत हो तथा खुजली महसूस होने लगे तभी इसका उपचार प्रारंभ कर देना चाहिए। दर्द को दूर करने के लिए फोड़े के पास की जगह पर गर्म सेंक करना चाहिए। गर्म सेंक से फोड़े के पकने की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है। मरहम और एंटीबैक्टीरियल दवाई लगाकर इसका उपचार किया जा सकता है तथा फोड़े के आकार को बढ़ने से बचाया जा सकता है। कई डॉक्टर फोड़े पर एंटीबैक्टीरियल मरहम लगाने की सलाह देते हैं तथा फोड़े के सूख जाने पर उसके आसपास की जगह को एंटी बैक्टीरियल साबुन से धोने की सलाह देते हैं। संक्रमण से बचने के लिए फोड़े पर पट्टी बांधकर रखनी चाहिए। बार बार आने वाले फोड़े विटामिन या मिनरल की कमी या अस्वच्छता की ओर संकेत करते हैं।आइए हम आपको फोड़े के कुछ ऐसे उपचार के बारे में बताते हैं, जो पूरी तरह से नेचुरल है और इससे नुकसान भी नहीं होता है। फोड़े को उंगली की मदद से फोड़ने की कोशिश न करें। इससे आपकी त्वचा पूरी तरह से नष्ट हो सकती है।


1.चैत्र मास में (मार्च -अप्रैल ) जब नीम की नयी -नयी कोपले (कोमल लाल पत्तिया ) खिलती है ,तब 21 ताज़ी 15 कोपले (बच्चो के लिए 7 ) प्रतिदिन दातुन कुल्ली करने के बाद चबाकर खाने या गोली बना कर पानी के साथ निगलने या घोंटकर पिने से साल भर फोड़े फुन्सिया नहीं निकलती .
विशेष :-
1. इसे खाली पेट सेवन करें और इसके बाद कम से कम 2 घंटे तक कुछ न खाएं.
2. इससे खून की बहुत सारी खराबी खुजली आदि चर्म रोग तथा वात पित्त और कफ के रोग जड़ से नष्ट होते हैं.
3. इससे मधुमेह की बीमारी कम हो जाती है.
4. इससे मलेरिया और विषम ज्वर की उत्पत्ति की संभावना भी नहीं रहती.
सवधानी :-
21 कोपले और 7 पत्तियों से ज्यादा और लगातार बहुत लंबे समय तक नहीं खाएं वरना मर्दाना शक्ति कमजोर हो सकती है.
परहेज:-तेल, मिर्च, खटाई, तली चीजें का त्याग करें

2. नीम का लें सहारा
फोड़े के लिए नीम सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इससे एंटी बैक्टीरिअल और एंटी माइक्रोबिअल गुण पाया जाता है, जो फोड़े के उपचार में फायदेमंद होता है। वास्तव में नीम हर तरह की त्वचा संबंधित समस्या के लिए फायदेमंद होता है। नीम को पीस कर इसका पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा के संक्रमित हिस्से पर लगाएं। अगर आप चाहें तो नीम की पत्ती को उबाल कर भी इसका पेस्ट तैयार कर सकते हैं। पेस्ट को कुछ देर के लिए लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।

3. ब्रेड पुटलिस से करें उपचार
क्या आपको पता है कि आप ब्रेड पुटलिस से भी फोड़े का उपचार कर सकते हैं। यह एक प्रभावशाली तरीका है। ब्रेड के एक टुकड़े को गर्म दूध या पानी में डुबा लें। अब इस ब्रेड को संक्रमित त्वचा पर लगाएं। इससे जलन कम होगी और जल्द ही फोड़ा भी ठीक हो जाएगा। अच्छे परिणाम के लिए ऐसा दिन में दो बार करें।

4. टी ट्री आयल ट्रीटमेंट
टी ट्री आयल में एंटी माइक्रोबिअल और एंटी बैक्टीरिअल गुण पाया जाता है। लंबे समय से इसका इस्तेमाल त्वचा के संक्रमण के उपचार में किया जा रहा है। ये न सिर्फ त्वचा के संक्रमण से आपको राहत दिलाएगा, बल्कि भविष्य में फोड़ा होने की संभावना को भी खत्म करेगा। आप रूई को इस तेल में भिगाकर फोड़े पर लगा सकते हैं। अगर आप कुछ दिनों तक दिन में पांच-छह बार इस तेल का इस्तेमाल करेंगे तो फोड़ा ठीक हो जाएगा। ब्लैक सीड आयल की तरह टी ट्री आयल का आप सेवन नहीं कर सकते हैं।

5. हल्दी भी करे कमाल
हल्दी खून को साफ करता है और इसमें एंटी-इंफ्लामैटॉरी गुण पाया जाता है। गर्म दूध के साथ हल्दी मिलाकर पीने से फोड़ा ठीक हो जाता है। साथ ही आप हल्दी और अदरक का पेस्ट बनाकर फोड़े पर लगा सकते हैं। कुछ दिन तक ऐसा करने पर फोड़ा ठीक हो जाएगा।

6. प्याज भी कम नहीं
प्याज में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाने के कारण यह फोड़े का एक बेहतरीन उपचार है। प्याज का एक टुकड़ा लेकर उसे फोड़े पर रखें और कपड़े के एक टुकड़े से ढंक दें। इससे पैदा होने वाली गर्मी से फोड़ा ठीक हो जाएगा।