वायरल फीवर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वायरल फीवर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 13 अगस्त 2016

24 घंटे एसी के सामने बैठने से हो सकती हैं ये बीमारियां

24 घंटे एसी के सामने बैठने से हो सकती हैं ये बीमारियां

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एसी वाले ऑफिस में काम करके खुद को खुशनसीब समझते हैं? क्या आप जब घर में होते हैं तो उस वक्त भी एसी ऑन ही रहता है और आप ठीक उसके सामने बैठना ही पसंद करते हैं? अगर आप भी ऐसा करने वालों में से हैं तो आपको बता दें कि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है और आपको अपनी इस आदत के बारे में एकबार और सोचने की जरूरत है.

एक अध्ययन में पाया गया है कि भले ही लोग एसी को लक्जरी लाइफस्टाइल से जोड़कर देखते हों लेकिन सच्चाई ये है कि एसी में 24 घंटे बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. बीते कुछ समय में एसी का इस्तेमाल अचानक से बढ़ गया है. गर्मियों में प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से धरती का तापमान इतना अधिक हो जाता है कि एसी के बिना काम भी नहीं चलता. ऐसे में जो लोग अफोर्ड कर पाते हैं वो एसी लगवाने में जरा भी देर नहीं करते हैं. रही बात ऑफिसों की तो आज के समय में ज्यादातर दफ्तरों में एसी लगा ही होता है. ये मूलभूत जरूरत हो चुकी है.

पर सोचने वाली बात ये है कि एक आर्टिफिशियल टेंपरेचर में बहुत देर तक रहना किस हद तक खतरनाक हो सकता है, इस ओर कभी भी हमारा ध्यान ही नहीं जाता है. इस टेंपरेचर के बदलाव का सबसे बुरा असर हमारे इम्यून सिस्टम पर पड़ता है. अगर आपको लगता है कि आप अक्सर ही बीमार पड़ने लगे हैं, तो हो न हो आपकी इस आदत ने आपके इम्यून सिस्टम को कमजोर कर दिया है.

एसी के सामने ज्यादा वक्त बिताने वालों को हो सकती हैं ये हेल्थ प्रॉब्लम्स-

1. साइनस की प्रॉब्लम 
प्रोफेशनल्स की मानें तो जो लोग एसी में चार या उससे अधिक घंटे रहते हैं , उनमें साइनस इंफेक्शन होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है. दरअसल, बहुत देर तक ठंड में रहने से मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं.

2. थकान 
अगर आप एसी को बहुत लो करके सोते हैं या उसके सामने बैठते हैं तो आपको हर समय कमजोरी और थकान रहने लगेगी.

3. वायरल इंफेक्शन 
बहुत अधिक देर तक एसी में बैठने से, फ्रेश एयर सर्कुलेट नहीं हो पाती है. ऐसे में फ्लू, कॉमन कोल्ड जैसी बीमारियां होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

4. आंखों का ड्राई हो जाना
एसी में घंटों बिताने वालों में ये प्रॉब्लम सबसे ज्यादा कॉमन है. एसी में बैठने से आंखों ड्राई हो जाती हैं. एसी में बैठने का ये असर स्क‍िन पर भी नजर आता है.

5. एलर्जी 
कई बार ऐसा होता है कि लोग एसी को टाइम टू टाइम साफ करना भूल जाते हैं, जिससे एसी की ठंडी हवा के साथ ही डस्ट पार्टिकल भी हवा में मिल जाते हैं. सांस लेने के दौरान ये डस्ट पार्ट‍िकल शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है. 


शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

वायरल फीवर के लक्षण और बचने के आयुवेर्दिक उपचार

वायरल फीवर के लक्षण और बचने के आयुवेर्दिक उपचार



वायल फीवर यानि कि मौसमी बुखार ये बुखार मैसम में आए बदलाव की वजह से होता है। वायल बुखार की वजह से शरीर बीमारियों से नहीं लड़ पाता है। क्योंकि यह बुखार हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर बना देता है। वायरल फीवर बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाता है जिससे यह बुखार एक साथ कई लोगों को हो जाता है। वायरल फीवर दूसरे बुखारों की तरह होता है लेकिन समय पर ध्यान न देने से यह बुखार खतरनाक रूप ले सकता है। वैदिक वाटिका आपको बता रही है वायरल बुखार से बचने के आयुवेर्दिक उपाय।

वायरल फीवर के मुख्य लक्षण
  • खांसी होना
  • गला दर्द करना
  • सिर दर्द होना
  • थकान होना
  • हाथ और पैरों के जोड़ों का कमजोर होना और उनमें दर्द होना
  • उल्टी और दस्त होना।
  • बदन में दर्द।
  • आंखों का लाल होना।
  • माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि।

यदि इन लक्षणों में से कोई सा भी लक्षण आपको लगता है तो समझें इंसान को वायरल फीवर हो गया है। बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है।

वायल फीवर से बचने के आयुवेर्दिक उपचार

हल्दी और सौंठ यानि अदरक का पाउडर
अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं।

एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण
एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और
एक चम्मच सौंठ यानि अदरक का पाउडर।
एक कप पानी।
और हल्की सी चीनी।

इन सभी को किसी बर्तन में डालकर तब तक उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए।

इसके बाद इस पानी को थोड़ा ठंडा करके रोगी को पिलाएं। इससे वायरल फीवर से आराम मिलता है।

तुलसी का इस्तेमाल

एंटीबायोटिक गुण होते हैं तुलसी में जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं।

कैसे करें तुलसी का प्रयोग वायरल बुखार में
तुलसी एक गुणकारी औषधी है, एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में मिला लें।
और इसे इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाये। इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को पिलायें।

धनिया
धनिया सेहत का धनी होता है। इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है।
वायरल फीवर के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असर कारक औषधि का काम करती है।

धनिया की चाय बनाने की विधि
एक बड़ी चम्मच धनिया के दानों की लें और इसे एक गिलास या कप पानी में डालकर उबालें। फिर इसमें थोड़ी सी मात्रा में दूध और कम मात्रा में चीनी डालकर इसे उबालें।
अब गरम-गरम चाय को रोगी को पिलाएं।

इस कारगर घरेलू नुस्खे से वायर फीवर में आराम मिलेगा। सोआ, काली मिर्च और कलौंजी का प्रयोग
सोया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जिससे वायरल बुखार कम होने के साथ.साथ पूरी तरह से उतर जाता है।

एक छोटी चम्मच काली मिर्च का चूर्ण
एक बड़ी चम्मच सोआ के ताजे दाने
एक चुटकी दालचीनी का चूर्ण
और आधा चम्मच कलौंजी को एक कप पानी में डालकर पंद्रह मिनट तक उबालें।

जब यह अच्छी तरह से उबल जाए तब इसे साफ कपड़े से छानकर किसी बर्तन में रख दें। और थोड़ा ठंडा होने पर वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को देते रहें।

मेथी का पानी
आपके किचन में मेथी तो होती ही है। मेथी में वायरल बुखार को रोकने की क्षमता होती है।
मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें। और सुबह के समय इसे छानकर रोगी को हर एक घंटे में पिलाते रहें।

नींबू और शहद
नींबू का रस और शहद भी वायल फीवर के असर को कम करते हैं। आप रोगी को शहद और नींबू का रस का सेवन भी करा सकते हैं।

यदि उपर लिखी गए आयुवेर्दिक घरेलू नुस्खों से रोगी में कोई असर न दिख रहा हो तो यह समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए बिना किसी देर के रोगी को चिकित्सक के पास ले जाएं।