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सोमवार, 25 सितंबर 2017

एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के घरेलु उपचार

एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के घरेलु उपचार


महिलाओं में एक आम समस्या देखी जाती है वह है एडियों में दरारें पडऩा। इन दरारों के कारण कई बार उन्हें अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ता है।आइए जानते हैं एडियों के दर्द से छुटकारा पाने के कुछ टिप्स-

- पैरों की उंगलियों को प्वाइंट करने जैसी साधारण कसरत बहुत प्रभावी सिद्ध होती है। सिर्फ अपनी टांग उठाएं और अपने पैरों को तब तक घुमाएं जब तक इनकी उंगलियां नीचे की ओर प्वाइंट न करें। थोड़ी देर रुकें और रिलैक्स करें। अब ऐसा ही दूसरी टांग के साथ भी करें।इस क्रिया से टांगों की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा होता है और एड़ी के दर्द से राहत मिलती है।

- एक अन्य उपाय है पैर के नीचे एक गेंद को घुमाना।यह आपके पांव को एक बेहतर मसाज देता है।एक टैनिस या एंटी स्ट्रैस बॉल लें और हल्के दबाव के साथ पैर के नीचे इसे घुमाएं। 2 मिनट के बाद ऐसा ही दूसरे पैर के साथ भी करें। इससे आपको एकदम उठने वाली ऐंठन तथा एड़ी के दर्द इत्यादि से राहत मिलती है।

- आप ‘शॉर्ट फुटिंग’ भी आजमा सकती हैं। यह एक साधारण कसरत है जिसमें आप बिना जूते पहने खड़ी होकर पैरों की उंगलियों को नीचे की ओर खींच कर पैर के आर्च को सिकोड़ती हैं।इससे आपके पैरों में सिकुडऩ पैदा होती है और आपको आराम मिलता है।यह सिकुडऩ आपके पैरों को मसाज करती है।
- हर सुबह ‘काफ स्ट्रैचेका’ करें। इसके लिए दीवार के सामने खड़ी हो जाएं।अपने हाथों को दीवार पर रखें और अपनी एडियों को फर्श पर सपाट रखें।धीरे-धीरे आगे की ओर स्ट्रैच करें और फिर पहले वाली स्थिति में आ जाएं।

- स्पैशल जैल इनसोल पहनना हमेशा याद रखें। ये इनसोल पैरों की उंगलियों को टाइट महसूस होने से रोकते हैं और एड़ी की बॉल को अपने स्थान पर बनाए रखने में सहायक होते हैं।

-किसी ऊंची जगह पर बैठकर पैरों को लटका कर पंजों को गोल-गोल कई बार घुमाएं। पैरों की उंगलियों को पहले तो अपनी तरफ खींचें, फिर बाहर की तरफ।

- एक्युप्रैशर विधि से भी एड़ी में खून का दौरा बढऩे से दर्द में राहत मिलती है। दिन में कई बार गर्म पानी से एड़ी की सिंकाई करें।

रविवार, 2 अप्रैल 2017

मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी कुछ रोग

मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी कुछ रोग


बहुत से मनुष्य शरीर से देखने में तो ठीक तथा स्वस्थ दिखाई देते हैं लेकिन उन व्यक्तियों को कभी न कभी शरीर के किसी भाग में दर्द जरूर होता है। स्वस्थ व्यक्ति को अपने स्वस्थ रहने पर गर्व होता है, वे व्यक्ति स्वीकार करते हैं कि उन्हें कई बार किसी स्पष्ट कारणों से उनके अंगों में दर्द होता है तथा जोड़ अकड़ जाते हैं तथा मांसपेशियों में ऐंठन सी हो जाती है।

दूसरे और भी प्रकार के रोग हैं जिनकी शिकायत बहुत अधिक देखने को मिलती है। लेकिन आज के समय में जोड़ों में तथा मांसपेशियों में दर्द की शिकायत अधिक देखने को मिलती है। कभी मांसपेशियों में अकड़न होने के कारण दर्द बहुत ही गम्भीर रोग का कारण बन सकता है।   

मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी कुछ रोग इस प्रकार हैं- 

  • मांसपेशियों में दर्द। 
  • जोड़ों में दर्द। 
  • घुटने में दर्द। उंगलियों में दर्द। 
  • गठिया। 
  • कमर में दर्द। 
  • मांस पेशियों में सूजन।   

मांसपेशियों में दर्द तथा अकड़न होने का कारण- 

बहुत से स्वस्थ व्यक्ति जो अपने भारी सामान आदि को कुछ दूर तक ले जाते हैं तो इसके कारण उनकी कमर में दर्द होने लगता है। कुछ व्यक्ति जो लिखने का कार्य करते हैं उनकी कलाई तथा उंगलियों के जोड़ में दर्द हो जाता है। अधिक देर तक लिखने का कार्य करने से यह दर्द हो जाता है। जब बच्चे किताब तथा कापी को अपने बैग में लेकर कंधे पर टांगकर स्कूल जाते हैं तो भी उनकी कमर तथा मांसपेशियों में दर्द तथा अकड़न होने लगता है। कुछ व्यक्ति इस प्रकार के दर्द को गठिया समझ बैठते हैं। लेकिन वह गठिया नहीं होता है। यदि इसी प्रकार से कुछ दिनों तक लगतार बोझ उठाया जाए तो उसे गठिया रोग हो सकता है। कमर की मांसपेशियों में दर्द तथा अकड़न होने का कारण रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार से दबाव पड़ने का कारण हो सकता है या फिर रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार के रोग होने के कारण। यदि किसी व्यक्ति के उठने-बैठने का ढंग सही नहीं है या जो व्यक्ति रीढ़ की हड्डी का गलत तरीके से इस्तेमाल करता है। उन व्यक्तियों की मांसपेशियों तथा कमर में दर्द हो सकता है। किसी तरह की दुर्घटना होने पर या किसी प्रकार से तेज चोट लग जाने के कारण भी मांसपेशियों में दर्द तथा अकड़न हो सकता है। अधिक देर तक व्यायाम करने तथा बोझ उठाने के कारण भी शरीर की मांसपेशियों में दर्द तथा अकड़न हो सकती है।   

मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी कुछ रोगों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार- 

मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी कुछ रोगों को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले इस रोग के होने वाले कारणों को दूर करना चाहिए जैसे- रोगी व्यक्ति को सही तरीके से बैठने-उठने का कार्य करना चाहिए तथा वजन उठाने वाले सभी कार्यों को बंद कर देना चाहिए। फिर इसके बाद रोग का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए। यदि रोगी व्यक्ति को बहुत समय तक खड़े होने के कारण यह रोग हुआ है तो उस व्यक्ति को यह कार्य तुरंत बंद कर देना चाहिए। यदि खड़ा होना भी है तो रोगी व्यक्ति को खड़े होने पर अपने दोनों पैरों पर वजन अदल-बदल कर देना चाहिए तथा प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए रोगी को चाहिए कि गर्म पानी को किसी थैली में भरकर उससे दर्द तथा अकड़न वाले भागों पर सिंकाई करे। इस प्रकार से उपचार करने से मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोग ठीक हो जाते हैं। इन रोगों को ठीक करने के लिए गर्म पट्टी के द्वारा सिंकाई कर सकते हैं जिसको करने से कई प्रकार के रोग जो मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धित होते हैं जल्दी ही ठीक हो जाते हैं। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों से पीड़ित व्यक्ति को गर्म तथा ठंडे पानी से स्नान कराना चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन हैं जिनको करने से ये सभी रोग जल्दी ही ठीक हो जाते है ये आसन इस प्रकार है- पवनमुक्तासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तानासन, पर्वतासन तथा भुजंगासन आदि। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए गेहूं की घास का रस लगभग 25 दिनों तक प्रतिदिन सुबह तथा शाम को खाली पेट पीना चाहिए। जिसके फलस्वरूप ये रोग ठीक हो जाते हैं। गाजर, खीरा तथा शलजम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर कम से कम 25 दिनों तक सेवन करने से मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोग ठीक हो जाते हैं। कच्चे आलू को पीसकर लेप बना लें, इसके बाद इस लेप को जोड़ों पर लगा लें। इसके बाद इसे एक कपड़े के टुकड़े से ढक दें और 2 घंटे तक ऐसे ही रहने दें। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा उपचार करने से ये रोग ठीक हो जाते हैं। यदि जोड़ों में किसी प्रकार से सूजन हो गई हो तो इसके उपचार के लिए कुछ व्यायाम है जिनको करने से कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं- शरीर में भाग व्यायाम के द्वारा उपचार गर्दन रोगी व्यक्ति को अपनी गर्दन को घड़ी की दिशा में घुमाना चाहिए तथा फिर घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाना चाहिए। इस प्रकार से उपचार कम से कम 15 बार करना चाहिए। रीढ़ की हड्डी व्यक्ति को अपनी रीढ़ की हड्डी को लम्बाई में फैलाना चाहिए तथा इसके बाद रीढ़ की हड्डी को पीछे तथा आगे की ओर झुकाना चाहिए। कंधे रोगी व्यक्ति को अपने कंधे को ऊपर से नीचे की ओर तथा साइड़ों में फैलाना चाहिए तथा इस क्रिया को कई बार दोहराना चाहिए। चक्र रोगी को अपने शरीर के चक्र को घड़ी के अनुसार तथा घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाना चाहिए। हाथ की भुजाएं रोगी को हाथ की भुजाएं आगे की ओर फैलानी चाहिए तथा उसे ऊपर से नीचे की ओर करना चाहिए और इस क्रिया को कई बार दोहराना चाहिए। हाथ की भुजाओं को घुमाना हाथ की भुजाओं को घड़ी की दिशा में घुमाना चाहिए तथा फिर उसे विपरीत दिशा मे घुमाना चाहिए। हाथ की भुजाओं से क्रास करना रोगी व्यक्ति को अपनी भुजाओं को छाती पर क्रास के समान लगाना चाहिए। फिर एक भुजा से क्रास करना चाहिए और एक सीधी रेखा में रखना चाहिए और फिर अपने कान को पकड़ना चाहिए। इस क्रिया को प्रतिदिन कम से कम 2 बार दोहराना चाहिए। कोहनियां रोगी व्यक्ति को अपनी कोहनी को आगे तथा पीछे की ओर करना चाहिए। कलाई व्यक्ति को अपनी कलाई को घड़ी की दिशा में घुमाना चाहिए तथा इसके बाद घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाना चाहिए। उंगुलियां व्यक्ति को अपने हाथ की उंगुलियों को कई बार खोलना तथा बंद करना चाहिए। इसके बाद अपनी उंगलियों को फैलाना चाहिए। घुटने रोगी व्यक्ति को अपने घुटनों को मोड़ना तथा फैलाना चाहिए। घुटने को उठाना रोगी व्यक्ति को खड़े होकर अपने  घुटने को ऊपर की ओर उठाना चाहिए। बैठना रोगी व्यक्ति को जब भी बैठना हो तब उसे अपनी टांगों को क्रास करके बैठना चाहिए। टखने तथा अंगूठे रोगी व्यक्ति को अपने टखने तथा अंगूठे को घुमाना, मोड़ना तथा फैलाना चाहिए। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोग हो गए हो तो उन व्यक्तियों को लहसुन तथा सरसों के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिला लेना चाहिए। इसके बाद इस तेल से जोड़ों की मालिश कुछ दिनों तक करने से ये रोग ठीक हो जाते हैं। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए सबसे पहले शरीर में संचित यूरिक एसिड को घुलाकर शरीर से बाहर निकालने वाले पदार्थ जैसे- पोटेशियम प्रधान खाद्य पदार्थ लौकी, तरबूज, ककड़ी, खीरा, पत्तागोभी, पालक, सफेद पेठा आदि के रस को प्रतिदिन पीना चाहिए और फिर उपवास रखना चाहिए। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए पीड़ित रोगी को रात के समय में 2-3 अंजीर तथा 10 मुनक्का तथा 1 खुबानी को भिगोने के लिए रख दें और सुबह के समय में उठकर इसे खा लें। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए पीड़ित रोगी को अदरक तथा तुलसी का रस हल्का गर्म पानी में डालकर पीना चाहिए। यह रोगी के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए पीड़ित रोगी यदि प्रतिदिन सुबह के समय में लगभग 240 मिलीलीटर सूर्यतप्त के द्वारा बनाया गया हरी बोतल का पानी पिये और गठिया रोग से प्रभावित भाग पर इस जल को लगाए तो उसके ये रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों को ठीक करने के लिए पीड़ित रोगी को कटिस्नान, मेहनस्नान, धूपस्नान तथा भापस्नान कराना चाहिए और इसके बाद शरीर पर सूखा घर्षण (सूखे तौलिये से शरीर को पोछना) करना चाहिए। मांसपेशियों तथा शरीर के किसी भाग पर किसी कारण से जो सूजन पड़ गई हो तो उस पर बर्फ के ठंडे पानी की पट्टी करने से सूजन कम हो जाती है और रोगी को इस रोग की वजह से जो दर्द होता है वह कम हो जाता है। इस रोग को ठीक करने के लिए कई आसन हैं जिन्हें प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है ये आसन इस प्रकार हैं- पद्मासन, वज्रासन, उज्जायी, सूर्यभेदी प्राणायाम, भस्त्रिका-नाड़ीशोधन, सिद्धासन, गोमुखासन, गोरक्षासन, सिंहासन तथा भुजंगासन आदि। मांसपेशियों तथा शरीर के ढांचे सम्बन्धी रोगों से पीड़ित व्यक्ति को अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा उपचार कराना चाहिए।

शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

भूलकर भी इन चीजों के साथ न करें दवाओं का सेवन, होगा हानिकारक

भूलकर भी इन चीजों के साथ न करें दवाओं का सेवन, होगा हानिकारक


बिगड़ती लाइफस्टाइल के कारण हम किसी न किसी बीमारी से घिरे रहते है। जिससे राहत पाने के लिए हम न जाने कितने उपाय करते है। इतना ही नहीं जब वह बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो डॉक्टर और दवाओं का सहारा लेते है। दवाओं को लेते समय हम कई ऐसी गलतियां कर देते है। जिससे कि यह समस्या और बढ़ जाती है।


जब कभी हम डॉक्टर, केमिस्ट के पास से दवा लाते है तो यह सख्त हिदायत दी जाती है कि खाली पेट कोई भी दवा न लें। कुछ खा कर ही दवा का सेवन करें। इसीलिए कई बार हम ऐसे चीजों का सेवन कर लेते है। जिसके बाद दवा खाना आपकी सेहत के लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है। इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किस खतरनाक फुड एंड ड्रग्स कॉम्बीनेशन से आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

दूध
माना जाता है कि दूध हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। लेकिन अगर इसका सेवन मल्टीविटामिन और एंटीबोयोटिक के सात किया, तो यह आपके लिए जहर साबित हो सकता है। इसलिए दोनों को कभी साथ में न लें। कम से कम दोनों का सेवन करने के लिए 1 घंटा का गैप रखें।

अल्कोहल
अगर आप सिरदर्द या मांसपेशियों पर खिंचाव की समस्या है, तो आप इनकी दवा खाते समय बिल्कुल भी अल्कोहाल का इस्तेमाल न करें। क्योंकि इन दवाईयों से लिवर पर प्रेशर बनता है जिस कारण ही इन दवाईयों के ज्यादा सेवन की मनाही होती है। अगर आपने इसे अल्कोहाल के साथ ले लिया तो आपका लिवर खराब होने के चांस कई गुना अधिक बढ़ जाते है।


संतरा
संतरा और केले में भरपूर मात्रा में पोटेशिम पाया जाता है। इसलिए जब भी ऐसी दवाओं का सेवन करें जो कि शरीर में पोटेशियम की मात्रा बनाएं रखता है। आमतौर पर एसीई इनहीबिटर्स जैसे केप्टोप्रिल, लिज़िनोप्रिल आदि हृदय के ब्लड वेसल में रक्त संचार को सही रखने का काम करता है। इनमें पोटेशियम की मात्रा भी होती है। अगर आपने इस दवा के पहले संतरा या केला खाया है, तो दवा न खाएं। नहीं तो आपके शरीर में पोटेशियम की ज्यादा मात्रा हो जाएंगी। जिससे कि हार्ट की धड़कनें इर्रेग्युलर हो जाती हैं।

वाइन, चीज
कई लोगों की दिनचर्या में वाइन शामिल हो जाती है। जिसके बिना उनका दिन नहीं खत्म होता है। इसी तरह चीज होता है। कई लोग इसे इस तरह खाते है। जैसे कि यह घी हो। अगर आप मोनोआमाइन ऑक्साइड इनहीबिटर्स ले रहे हो तो उसके साथ चीज़, वाइन और बीयर का सेवन ना करें। अगर आपने लिया तो आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।

शनिवार, 5 नवंबर 2016

सुबह-सुबह लौंग की चाय पीने से होते है ये 7 अद्भुत फायदे.!!!

सुबह-सुबह लौंग की चाय पीने से होते है ये 7 अद्भुत फायदे.!!!


सुबह की चाय पीने से शरीर मे ताजगी आती है। जो पूरे दिन आपको तरोजाता बनाती है। यूं तो बाजार में अलग-अलग तरह की चाय की पत्ती उपल्ब्ध होती है लेकिन जो चाय आपको कई फायदे दे सकती है वो है लौंग की चाय। सर्दियों में खासतौर से लौंग की चाय पीने से आप कई तरह की बीमारियों से मुक्त हो सकते हो। सबसे पहले जानते है कैसे बनती है लौंग की चाय –

कैसे बनाएं लौंग की चाय :

  • लौंग को पीस कर एक छोटी चम्मच चूर्ण बना लें।
  • अब इस चूर्ण को एक कप पानी में मिलाकर 10 मिनट तक उबलने दें।
  • उबलने के बाद इसमें चाय की पत्ती को भी डालकर उबलने के लिए छोड़ दें। और थोड़ी सी चीनी भी आप इसमें डाल सकते हो।
  • इसके बाद इसे छाने और इसका सेवन करें।

लौंग की चाय के फायदे :

1. बुखार : 
यदि बुखार आ गया हो तो एैसे में चाय में लौंग को डालकर पीने से बुखार से राहत मिलती है। बुखार को प्राकृतिक व घरेलू तरीके से ठीक करने की कारगर दवा है लौंग।

2. त्वचा संबधी परेशानी : 
लौंग की चाय पीने से त्वचा संबंधी रोग जैसे स्किन इंफेक्शन आदि ठीक होते हैं। लौग की चाय शरीर से टाक्सिन्स को बाहर निकाल देती है। लौंग की चाय को आप त्वचा के संक्रमण वाली जागह पर भी लगा सकते हैं।


3. मांसपेशियों का दर्द : 
सर्दियों में ठंड लगने की वजह से शरीर की मांसपेशियों में अकड़न और दर्द होने लगता है। जिस वजह से काफी परेशानी होती है। एैसे में आप लौंग वाली चाय का सेवन करें। लौंग मांसपेशियों के दर्द को खत्म करती है। इसके अलावा आप लौंग के पानी से मांसपेशियों की सिकाई भी कर सकते हो।

4. जुकाम : 
लौंग की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका सेवन करने से सर्दी से होने वाले रोग आसानी से नहीं लगते। लौंग आपको जुकाम और खांसी से भी राहत दिलाती है। सर्दियों में दो से तीन बार लौंग को चाय में डालकर जरूर पीएं।

5. पाचन समस्या व एसिडिटी : 
यदि खाना न पचता हो। या पाचन संबंधी कोई परेशानी हो लौंग की चाय का सेवन करें। लौंग एसिडिटी व पेट की गैस को भी ठीक करती है। 

6. दांत दर्द : 
दांतों में सिरहन व दर्द का होना कष्टकारी होता है। ऐसे में लौंग की चाय आपके लिए फायदा कर सकती है। इस चाय को पीने से दांतों का दर्द व सिरहन खत्म होने लगती है।

7. गले के रोग : 
लौंग की चाय पीने से गले संबंधी रोग जैसे कफ व गले का संक्रमण आदि रोग भी ठीक होते हैं।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

अदरक है बड़े कमाल का, जानिये इस्तेमाल का सही तरीका

अदरक है बड़े कमाल का, जानिये इस्तेमाल का सही तरीका


बीमारियों में अदरक जोड़ो के दर्द में , हड्डियों के रोगों के कारण सूजन, दर्द, हाथ पैर चलाने में कठिनाई, पेट के कीड़े और खांसी , जुकाम, दमा और शरीर में दर्द के साथ बुखार, कब्ज होना, कान में दर्द, उल्टियाँ होना, मोच आना, उदर शूल, गठिया, र्‌यूमेटिक आर्थराइटिस, साइटिका और गर्दन व रीढ़ की हड्डियों की बीमारी (सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस) आदि समस्या में अदरक सेवन करने से सूजन एवं अन्य लक्ष्ण उत्पन्न करने वाले रसायन हारमोन जैसे प्रोसटाग्लेनडीन, ल्यूकोट्रिन का उत्पादन कम हो जाता है. 

1. मांसपेशियों के दर्द में - 

अदरक का सेवन शरीर के द्रव्य का बहाव सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए भी किया जाता है. अदरक पूरे शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ा देता है. इसके सेवन से ह्रदय की मांसपेशियां ज्यादा शक्ति से संकुचित होती है रक्त वाहिनियाँ फ़ैल जाती है, जिससे ऊतकों और कोशिकाओं का रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और मांसपेशियों का अकड़न, दर्द, तनाव आदि से आराम मिलता है. ताजे अदरक को पीसकर दर्द वाले जोड़ों व पेशियों पर इसका लेप करके ऊपर से पट्टी बाँध दें.इससे उस जोड़ की सूजन व दर्द तथा माँसपेशियों का दर्द भी कम हो जाता है. 

2. ह्रदय रोग में - 

ह्रदय पर जोर कम पड़ता है. अदरक के प्रभाव से रक्त प्लेटलेट कोशिकाओं का चिपचिपापन कम हो जाता है जिससे रक्त में थक्का बनने की सम्भावना कम हो जाती है फलस्वरूप अनेक रोगों जैसे ह्रदय आघात, स्ट्रोक (पक्ष घात), इत्यादि से बचाव हो जाता है . कोलेस्ट्रोल युक्त भोजन के बाद भी अदरक के सेवन सेकोलेस्ट्रोल स्तर कम बढ़ता है. 

3. गैस होने पर - 

अदरक एक शक्तिशाली जीवाणुनाशक भी है . शोधों से यह ज्ञात हुआ है की अदरक बड़ी आँत में पाए जाने वाली बैक्टीरिया का बढ़ना रोक देता है जिसके कारण गैस से राहत मिलती है . इसमें विद्यमान गुण के कारण कैंसर से भी बचा जा सकता है . इसमें एंटी-ओक्सिडेंट गुण भी होते है , इसके सेवन से कैंसर बचाव में सहायक एंजायम सक्रीय हो जाते है . अदरक में 400 से भी ज्यादा ऐसे कम्पाउंड ( यौगिक ) है जो अलग-अलग ढंग से अपना अच्छा प्रभाव शरीर पर डालता है . 

अदरक का सेवन :

1. - शोधों से ज्ञात हुआ है की करीब एक ग्राम अदरक सेवन करने से यात्रा के दौरान सम्बेदनशील व्यक्तियों में होने वाली मितली और उलटी से आराम मिलता है. इसी प्रकार 250 मिली ग्राम सोंठ दिन में चार बार सेवन से महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली मितली व उलटी से आराम मिलता है और इसके सेवन से कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है. 
2. - 0.5 से 1 ग्राम अदरक प्रतिदिन 3 माह तक सेवन करने से आस्टियो आर्थराईटिस, रुमेटाइड आर्थराईटिस तथा मांसपेशियों के दर्द के मरीजों को आराम मिलता है. 
3.- अगर किसी व्यक्ति को खाँसी के साथ कफ भी हो गया हो तो उसे रात को सोते समय दूध में अदरक डालकर उबालकर पिलाएँ.यह प्रक्रिया करीबन 15 दिनों तक अपनाएँ.इससे सीने में जमा कफ आसानी से बाहर निकल आएगा.इससे रोगी को खाँसी और कफ दोनों आराम भी महसूस होगा.रोगी को अदरक वाला दूध पिलाने के बाद पानी न पीने दें. 
4. त्वचा को निखारे-अदरक त्वचा को आकर्षक व चमकदार बनाने में मदद करता है.सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा खाएं. इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आप लंबे समय तक जवां दिखेंगे. अदरक की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मी के दिनों में कम उपयोग करना चाहिये. भारतीय व्यंजन में अदरक का उपयोग बहुतायत से होता है. इसका सेवन सब्जी, चटनी, अचार, सॉस, टॉफी, पेय पदार्थों, बिस्कुट, ब्रेड इत्यादि में स्वाद व सुगंध के लिए किया जाता है. इसका प्रयोग से भोजन स्वादिष्ट और सुपाच्य हो जाता है साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी.

बुधवार, 31 अगस्त 2016

मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के घरेलू नुस्खे

मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के घरेलू नुस्खे


मांसपेशियों में खिंचाव आपके द्वारा किये जाने वाले किसी भारी काम की वजह से होता है। ये भारी व्यायाम करने तथा असंतोषजनक मुद्रा में देर तक बैठे रहने की वजह से होता है।

आपकी मांसपेशियों में दर्द या मरोड़ें उठने की समस्या किसी मांसपेशी के ज़रुरत से ज़्यादा प्रयोग, मांसपेशियों की कमजोरी, तनाव और शरीर में पानी की कमी की वजह से पेश आ सकती है। इस दर्द का मुख्य कारण नर्वस सिस्टम से आता एक केमिकल सिग्नल होता है, जिसकी वजह से मांसपेशियों में अकडन सी पैदा हो जाती है।

इसके कुछ और कारण निम्नलिखित हैं : –

  • शरीर में रक्त के संचार में कोई परेशानी
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • व्यायाम, चोट या ज़रुरत से ज्यादा प्रयोग
  • किसी ख़ास दवाई का बुरा प्रभाव

मांसपेशियों के खिंचाव को ठीक करने के नुस्खे

स्ट्रेचिंग (Stretching) :

दर्द भरी मांसपेशियों को हिलाने डुलाने से काफी आराम मिलता है। पर इसे करने से पहले डॉक्टरी सलाह अवश्य लें।

कंप्रेस (Compress) :

मांसपेशियों में भीषण खिंचाव की स्थिति में कंप्रेस का इस्तेमाल काफी आवश्यक है। आप ठंडी या गर्म में से कोई भी कंप्रेस चुन सकते हैं। मांसपेशियों में दर्द के हिसाब से ही कंप्रेस चुनें।

आराम करें :

मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के लिए उन्हें पर्याप्त आराम दें। मांसपेशियों में हलके दर्द की स्थिति में ये नुस्खा अपनाएं। रात भर अच्छे से आराम करके अपनी मांसपेशियों को पूर्ण आराम दें। ऐसी मुद्राओं से बचकर रहे जिनसे पीड़ा बढ़ने के आसार हों।

सेंक का प्रयोग करें :

यह मांसपेशियों को आराम देने का काफी असरकारी तरीका है। सेंक देने से मांसपेशियो की नसों को काफी आराम मिलता है। गर्म पानी के टब में एक चम्मच एप्सम नमक मिलाएं और इसमें अपने शरीर को १० से १५ मिनट तक डुबोकर रखें।

मांसपेशियों में दर्द – 

बर्फ के टुकड़े :

मांसपेशियों की पीड़ा का बर्फ के टुकड़ों की मदद से उपचार करने से दर्द से काफी राहत मिलती है। असल में अगर आपको मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से सूजन की समस्या आ गयी हो तो ऐसे समय में बर्फ का टुकड़ा आपकी काफी मदद करता है।एक सूती के कपडे में कुछ बर्फ के टुकड़े लें तथा इसकी मदद से २० मिनट तक प्रभावित भाग पर २० मिनट तक मालिश करते रहे।

गर्म पानी से नहाएं :

मांसपेशियों के दर्द को कम करने का यह एक और बेहतरीन तरीका है। गर्मी से वो नसें कमज़ोर पड़ जाती हैं जो हमें दर्द का अहसास करवाती हैं। अगर आपके शरीर में बहुत दर्द है तो गर्म पानी से नहाएं। इससे दर्द से जल्दी छुटकारा मिलेगा तथा शरीर को आराम की भी प्राप्ति होगी।