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मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

हार्ट अटैक सहित कई बीमारियों में रामबाण है लाल मिर्च

हार्ट अटैक सहित कई बीमारियों में रामबाण है लाल मिर्च


लालमिर्च का पौधा 60 से 90 सेमी ऊंचा होता है इसके पत्ते लंबे होते हैं। इसके फूल सफेद व पत्तियों का रंग हरा होता है। फल अगर कच्चा है तो हरा और पक जाने पर हल्का पीला व लाल होता है। एक मिर्च में बहुत से बीज होते हैं जोकि बिल्कुल बैंगन के बीजों की तरह होते हैं। लालमिर्च का स्वाद तीखा होता है यह काफी मशहूर है। कच्चे एवं पके मिर्च का आचार बनाया जाता है और इसका उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है। पिसी हुई लालमिर्च में लकड़ी का बुरादा और रंग मिला होता है। 1 चम्मच पिसी हुई लाल मिर्च 1 कप पानी में घोलें। इससे पानी रंगीन हो जायेगा और बुरादा पानी में तैरने लगेगा।

1. हार्ट अटैक (दिल का दौरा):
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब किसको हार्ट अटैक आ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं अगर पीड़ित को अस्पताल ले जाने में थोड़ी सी देरी हो गई तो उसकी जान जाने का खतरा रहता है। लेकिन एक ऐसा क्षणिक उपाय है जिसका इस्तेमाल करके आप पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राहत दिला सकते हैं और उसे आराम से अस्पताल पहुंचा सकते हैं। एक शोध के मुताबिक लाल मिर्च हृदय के मरीज के लिए रामबाण है। इसलिए जिस व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा हो उसे एक चम्मच लाल मिर्च पानी में घोलकर पिला दीजिए उसकी हालत स्थिर हो जाएगी। हालांकि, इस घोल को तभी पिलाया जाना चाहिए जब व्यक्ति होश में हो।

1. हैजा (कालरा):
लाल मिर्च के बीजों को अलग करके उसके छिलकों को बारीक पीस लें, फिर उसमें थोड़ा कपूर, हींग और शहद मिलाकर 240 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर खायें। इससे हैजा ठीक हो जाता है। हैजा में हर उल्टी और दस्त के बाद रोगी को 1 चम्मच मिर्च का तेल पिलाना चाहिए। इसे तीन चार बार पिलाने से ही हैजा खत्म हो जाता है।
अफीम और भुनी हींग की गोली देने के बाद, मिर्च का काढ़ा पिलाने से हैजा दूर होता है। लालमिर्च को बारीक पीसकर, झड़बेर जैसी गोलियां बनाकर रखें और हैजे के रोगी को हर 1 घंटे पर 1 गोली और 7 लौंग देने से हैजे की बीमारी दूर होती है।

2. मुंह के छाले: लालमिर्च को पानी में घोलकर या काढ़ा बनाकर पीने से मुंह के छाले व घाव जल्द ठीक होते हैं।

3. पेट में पानी का भरना: लालमिर्च के पौधे की 20 ग्राम पत्तियां और 10 दाने कालीमिर्च लेकर ठण्डा करके 1-1 ग्राम की मात्रा में सेंधानमक और नौसादार मिलाकर पिलाने से जलोदर में लाभ होता है।

4. खाज-खुजली: शोथ (सूजन), खुजली और त्वचा के रोगों में लाल मिर्च में पकाया हुआ तेल लगाने से लाभ होता है। बारिश के मौसम में होने वाली फुंसियों के लिये यह बहुत ही लाभदायक है।

5. त्वचा के रोग: 125 ग्राम लालमिर्च और 375 मिलीलीटर सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाने के लिये रख दें। इसके अच्छी तरह से पकने के बाद उतारकर छान लें। इसे लाल मिर्च का तेल कहते है यह कई सालों पुरानी फुंसियों को भी ठीक कर देती है और यह त्वचा के सारे रोगों में फायदा पहुंचाती है।

6. सिर का दर्द: छोटी लालमिर्च और बड़ी लालमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर थूहर के दूध के साथ पीसकर माथे पर लेप करें। इससे सभी प्रकार का सिर दर्द ठीक हो जाता है।

रविवार, 28 मई 2017

बड़े - बड़े गुण हैं पुदीना के छोटे से पौधे में

बड़े - बड़े गुण हैं पुदीना के छोटे से पौधे में


पुदीना एक छोटा सा पौधा होता है जो अक्सर नमी वाली जगह पर उगता है। इसमें उड़नशील तेल पाया जाता है, जो पेपरमिंट जैसी सुगंध देता है। इसका वानस्पतिक नाम मेन्था स्पीकेटा है। पुदीना एक तीव्र सुगंध प्रदान करने वाला पौधा है जिसका उपयोग न केवल विभिन उत्पादित वस्तुओं जैसे टूथ पेस्ट,चुइंगम, ब्रेथ फ्रेशनर, कैंडी और इन्हेलर आदि में किया जाता है, बल्कि आयुर्वेद में भी पुदीने का उपयोग विभिन्न रोगो के शमन में किया जाता है। आइये आज हम आपको बताते हैं

पुदीने के कुछ ऐसे ही लाजवाब गुण।

चटनी के रुप में प्रयोग
पुदीने की पत्त‍ियों को मुख्य रूप से चटनी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी चटपटी चटनी के साथ खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है। पुदीना मुख्य आहार तो नहीं है,लेकिन इसकी मौजूदगी से खाने का स्वाद बढ़ जाता है। इसके अलावा पुदीने की प‍त्ती औषधीय गुणों से भरपूर होती है।

पेट दर्द में सहायक
पुदीने की पत्तियां, भुना हुआ जीरा, लहसुन, सौंठ, काली मिर्च, कला नमक और धनिया इन सबको समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण तैयार कर लें। पेट दर्द में गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें, पेट दर्द में आराम मिलेगा। इसके अतिरिक्त पुदीने की चाय भी पेट दर्द में लाभकारी होती है।

पचाने में सहायक
पुदीने में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट तथा पोषक तत्व के कारण इसका सेवन जलन तथा अपच में लाभ पहुचता है। यह लार ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, जो की भोजन को पचाने में सहायक होता है।

लू में मददगार
गर्मियों के दिनों में लू लगना एक आम समस्या है। पुदीने के पने का सेवन लू से बचने के लिए बड़ा ही कारगर उपाय है। पुदीने का पना बनाने के लिए पुदीने की पतियों में थोड़ा पानी डालकर पीस लें। बाद में एक महीन कपडे से छानकर उसका रस निकाल लें। फिर उसमे थोड़ा भुना हुआ जीरा एवं नमक मिला लें। लीजिये तैयार हो गया पुदीने का पना।

रक्तचाप को नियंत्रित करे
पुदीने का रस उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने में सहायता करता है तथा निम्न रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए इस रस में काली मिर्च, नमक तथा थोड़ी शक्कर मिला कर सेवन करें, तुरन्त फायदा मिलेगा।

सर्दी – खांसी में राहत दे
पुदीने में उपस्थित एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी- बैक्टीरियल तत्वों के कारण यह श्वाश नली में ठंडक प्रदान करता है। सर्दी - खांसी से बचने के लिए गर्म पानी में पुदीने के रस की कुछ बूंदे डाले और उसके भांप को मुंह से लेते हुए नाक से छोड़ें। इससे आपको सर्दी –खांसी में राहत मिलेगा।

श्वास दुर्गन्ध से बचाये
श्वास दुर्गन्ध में पुदीने की कुछ पत्तियां मुंह में चबाने से मुंह से आने वाली दुर्गन्ध से छुटकारा पाया जा सकता है।

चेहरे में चमक लाये
पुदीने की ६ पत्तियां लेकर उसे एक अंडे की सफेदी में झाग आने तक मिलाये। उसके बाद इसमें आधा चम्मच पिसा हुआ खीरा मिलाये। अब इस लेप को १५ मिनट तक चहरे पर लगाये बाद में ताजे पानी से चेहरा धो लें। इससे धीरे –धीरे आपके चेहरे से दाग धब्बे मिटने लगेंगे और आपका चेहरा में चमक आयेगी।

वजन घटने में सहायक
पुदीना शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करता है। खाने में इसका सेवन कर अतिरिक्त वजन से छुटकारा पाया जा सकता है।

फुंसियों को ठीक करे
पुदीने में एंटी बैक्टीरियल एवं एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिसके कारण पुदीने की पत्तियों का लेप बनाकर फुंसियों पर लगाने से वो जल्दी ठीक हो जाती हैं। साथ ही साथ उनमें होने वाली जलन में भी राहत मिलती है।

हैजे में सहायक
हैजा होने पर भी पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है। हैजा होने पर पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से आपको फायदा होगा।

और भी लाभ हैं पुदीना के
महिला को प्रसव के समय पुदीने का रस पीना चाहिए, इससे आसानी से प्रसव हो जाता है।बुखार होने पर पुदीना पीना चाहिए, इससे बुखार में फायदा होता है। बुखार में पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीना चाहिए।ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इससे त्वचा की गर्मी समाप्त होती है।हिचकी आने पर पुदीना का प्रयोग करना चाहिए, इससे हिचकी आना बंद हो जाता है।

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

लौंग के वो गुण जो नहीं जानते होंगे आप !!

लौंग के वो गुण जो नहीं जानते होंगे आप !!


चाहे भोजन का जायका बढ़ाना हो या फिर दर्द से छुटकारा, छोटी सी लौंग को न सिर्फ अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है बल्कि इसके फायदे भी अनेक हैं। साधारण से सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग के उपचार में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके गुण कुछ ऐसे हैं कि न सिर्फ आयुर्वेद बल्कि होम्योपैथ व एलोपैथ जैसी चिकित्सा विधाओं में भी बहुत अधिक महत्व आंका जाता है। 

•भोजन में फायदेमंद :

मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रोटीम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें विटामिन ए और सी, मैग्नीज और फाइबर भी पाया जाता है।

•दर्दनाशक गुण :

लौंग एक बेहतरीन नैचुरल पेनकिलर है। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में बहुत लाभदायक है। दांतो में कितना भी दर्द क्यों न हो, लौंग के तेल को उनपर लगाने से दर्द छूमंतर हो जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल विशेषता होती है जिस वजह से अब इसका इस्तेमाल कई तरह के टूथपेस्ट, माउथवाश और क्रीम बनाने में किया जाता है।

•गठिया में आराम :

गठिया रोग में जोड़ों में होने वाले दर्द व सूजन से आराम के लिए भी लौंग बहुत फायदेमंद है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स अधिक मात्रा में पाया जाता है। कई अरोमा एक्सपर्ट गठिया के उपचार के लिए लौंग के तेल की मालिश को तवज्जो देते हैं।

•श्वास संबंधी रोगों में आराम :

लौंग के तेल का अरोमा इतना सशक्त होता है कि इसे सूंघने से जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस आदि समस्याओं में तुरंत आराम मिल जाता है।

•बेहतरीन एंटीसेप्टिक :

लौं व इसके तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जिससे फंगल संक्रमण, कटने, जलने, घाव हो जाने या त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं के उपचार में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लौंग के तेल को कभी भी सीधे त्वचा पर न लगाकर किसी तेल में मिलाकर लगाना चाहिए।

•पाचन में फायदेमंद :

भोजन में लौंग का इस्तेमाल कई पाचन संबंधी समस्याओं में आराम पहुंचाता है। इसमें मौजूद तत्व अपच, उल्टी गैस्ट्रिक, डायरिया आदि समस्याओं से आराम दिलाने में मददगार हैं।

•कैंसर :

शोधकर्ताओं का मानना है कि लौंग के इस्तेमाल से फेफड़े के कैंसर और त्वचा के कैंसर को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद युजेनॉल नामक तत्व इस दिशा में काफी सहायक है।

•अन्य फायदे :

इतना ही नहीं, लौंग का सेवन शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है और रक्त शुद्ध करता है। इसका इस्तेमाल मलेरिया, हैजा जैसे रोगों के उपचार के लिए दवाओं में किया जाता है। डायबिटीज में लौंग के सेवन से ग्लूकोज का स्तर कम होता है। लौंग का तेल पेन किलर के अलावा मच्छरों को भी दूर भगाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

शनिवार, 17 सितंबर 2016

जानलेवा है हैजा, जानें लक्षण, कारण और उपचार

जानलेवा है हैजा, जानें लक्षण, कारण और उपचार

हैजा, आंतों में इंफेक्शन होने वाली गंभीर बिमारी है। यह विब्रिओ कॉलेरी नामक बैक्टीरिया से फैलता है। आमतौर पर इस बिमारी की शुरुआत उल्टी या दस्त से होती है, लेकिन सही समय पर अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो जानलेवा भी हो सकता है।

अक्सर लोग शुरुआत में हैजा के लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं जिसकी वजह यह समस्या गंभीर हो जाती है। हैजा के शुरुआती अवस्था में उल्टी व दस्त की समस्या होती है। अगर आपको एक-दो बार से ज्यादा ऐसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए इसके लक्षणों, कारण और उपचार के बारें में जानें।

कैसे फैलता है हैजा :

संक्रमित आहार या पानी पीने से हैजा के बैक्टेरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसक बाद यह बैक्टेरिया तेजी से आंतो पर हमला करते हैं जिससे पतले दस्त व उल्टी की समस्या शुरु हो जाती है। शेलफिश द्वारा खाए जाने वाले कच्चे पदार्थ भी हैजा के स्रोत हो सकते हैं। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती है। इसलिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बीमार होने का कोई खतरा नहीं होता। हैजा का इंफेक्शन होने पर 3 से 6 घंटे में रोगी को बार-बार उल्टियां व दस्त लगने लगते हैं। कोई इलाज ना लेने पर धीरे-धीरे यह समस्या घातक रूप ले लेती है और रोगी का ब्लड प्रेशर कम होन लगता है।

लक्षण :

हैजे के बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं और जब पर्याप्त संख्या में हो जाते हैं तो वहां विष पैदा करते हैं, यह विष रक्त द्वारा शरीर के अन्य भागों में जाता है और रोग बढ़ता है।इस रोग में जबरदस्त उलटियां व दस्त होते हैं। कई बार उलटी नहीं भी होती है और जी मिचलाता है व उलटी होने जैसा प्रतीत होता है।उलटी में पानी बहुत अधिक होता है, यह उलटी सफेद रंग की होती है। कुछ भी खाया नहीं कि उलटी में निकल जाता है।उलटी के साथ ही पतले दस्त लग जाते हैं और ये होते ही रहते हैं, शरीर का सारा पानी इन दस्तों में निकल जाता है। इस बीमारी में बुखार नहीं आता, बस रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है।इस रोग में प्यास ज्यादा लगती है, पल्स मंद पड़ जाती है, यूरिन कम आता है व बेहोशी तारी होने लगती है।हैजा होने पर रोगी के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं।हैजे की शुरुआत होने पर रोगी की सांस टूटने लगती है.यूरीन में समस्या होती है और पीले रंग का होता है.रोगी की नाडी तेज चलने लगती है और कमजोर रहती है.हैजा में ज्यादा बुखार नहीं होता, जैसा कि दूसरे इन्फेक्शन में होता है ।हैजा में रोगी की हृदय गति बढ़ जाती है।

उपचार का तरीका :

हैजे की समस्या से बचने के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं जो रोग की अवधि कम करती हैं और इसे फैलने से रोकती है। हैजा का एक वैक्सीन भी है, जो कि छह माह तक ही क्रियाशील रहता है। रोग की संभावना होते ही तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें। डॉक्टर सलाइन चढ़ाकर, एंटीबायोटिक दवाएं देकर रोग को बढ़ने से रोक सकता है। इसके अलावा नमक-शकर-पानी का घोल पिलाया जाता है या बना बनाया इलेक्ट्रोलाइट पिलाकर रोगी को लवणों की पूर्ति की जाती है। रोगी की हालत गंभीर हो तो रक्त शिरा में इंजेक्शन देकर तुरंत आराम पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

हैजा का कारण :

विब्रिओ कॉलेरी नामक बैक्टेरिया से फैलने वाले रोग इस रोग में खुला खाना या पानी नहीं पीना चाहिए। यह समस्या खास तौर पर गंदगी के कारण फैलती है। इसलिए अपने आसपास वाली जगह को साफ सुथरा रखें। जानें क्या है हैजा के कारण
  • म्यूनसिपल सप्लाई का पानीम्यूनसिपल पानी से बना बर्फगलियों में मिलने वाला खुला खानामानव मल से उगाए गई सब्जियांकच्चा व अधपका मांसाहारी भोजन
  • हैजा जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए उसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है। हैजा की समस्या होने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपंर्क करें और रोगी की जान बचाएं।