सेहत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सेहत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 13 मार्च 2018

क्या आपका बच्चा भी दिन भर मोबाइल में लगा रहता है? तो ये ख़बर आपके लिए है

क्या आपका बच्चा भी दिन भर मोबाइल में लगा रहता है? तो ये ख़बर आपके लिए है


ब्रिटिश रिसर्चर विशालकाय रिसर्च की तैयारी में हैं कि क्या मोबाइल फोन या दूसरे वायरलेस उपकरणों से बच्चों के दिमाग के विकास पर भी असर पड़ता है? मोबाइल के इस्तेमाल से मस्तिष्क के कैंसर के खतरे पर कई रिसर्च पहले हो चुकी है.

ज्ञान, किशोरावस्था और मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर आधारित ‘स्कैंप’ नाम के इस प्रोजेक्ट में उनकी याद्दाश्त और ध्यान जैसी बातों पर गौर किया जाएगा. देखा जाएगा कि किशोरावस्था में इनका किस तरह विकास होता है. यह ठीक वही समय है, जब किशोर मोबाइल फोन और इसके जैसे अन्य वायरलेस उपकरण इस्तेमाल करना शुरू करते हैं.

कैंसर का खतरा

इस बात के अब तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि मोबाइल से निकलने वाली रेडियो तरंगें स्वास्थ्य पर खराब असर डालती हैं. हालांकि इस बारे में कई रिसर्च की जा चुकी हैं और कई जारी हैं. अब तक ज्यादातर रिसर्चों में वयस्कों पर और उनमें मस्तिष्क के कैंसर के खतरे पर ज्यादा तवज्जो दी जाती रही है.

लेकिन अब वैज्ञानिक ध्यान देना चाहते हैं कि क्या बच्चों के विकसित हो रहे दिमाग को वयस्कों के मुकाबले ज्यादा खतरा हो सकता है? इसकी एक वजह तो यह है कि उनका तंत्रिका तंत्र इस उम्र में विकसित हो रहा होता है. दूसरी वजह यह कि कम उम्र में मोबाइल का इस्तेमाल शुरू करने की वजह से वे मोबाइल की रेडियो तरंगों का ज्यादा लंबे समय तक सामना करते हैं.

बच्चों पर असर

लंदन के इंपीरियल कॉलेज में सेंटर फॉर इंवायरमेंट एंड हेल्थ के निदेशक पॉल एलियट कहते हैं, “अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण वयस्कों के 10 साल तक मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद इससे निकलने वाली रेडियो तरंगों और ब्रेन कैंसर के बीच किसी तरह का संबंध नहीं दिखाते हैं.” वह कहते हैं कि, “लेकिन इसके ज्यादा लंबे समय तक इस्तेमाल और बच्चों द्वारा इस्तेमाल के बारे में मौजूदा प्रमाण स्पष्ट नहीं हैं.”

वजन पर दें ध्यान

जन्म के समय जिन बच्चों का वजन चार किलोग्राम या उससे ज्यादा होता है, वह बड़े हो कर मोटापे का शिकार हो सकते हैं. इसीलिए इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि गर्भवती महिलाएं अत्यधिक खानपान से दूर रहें, कसरत करती रहें और उन्हें डायबिटीज न हो.

मोबाइल फोन का इस्तेमाल दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मोबाइल यूजरों की संख्या करीब 4.6 अरब है. ब्रिटेन में 11-12 साल की उम्र के 70 फीसदी बच्चे और 14 साल की उम्र के करीब 90 फीसदी बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बच्चो  पर मोबाइल के बुरे प्रभाव और बचाव

किसी भी देश के लिए बच्चे ही उस देश का भविष्य होते है और जिस देश की युवा पीढ़ी समझदार और स्वस्थ होती है उस देश का विकास भविष्य में निश्चित है और दुनिया के हर सभी देश / Country यही चाहते है की उनके देश के नागरिक और उस देश के बच्चे अधिक से अधिक पढ़े लिखे और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे और यह तभी सम्भव होता है जब युवा पीढ़ी और बच्चे अधिक से अधिक Technology से जुड़ते है और Technology और नये नये आविष्कारो से पूरी दुनिया को एक नई दिशा दे इसी मानव विकास की कड़ी में मोबाइल / Mobile और स्मार्टफोन / Smartphone एक ऐसी उपलब्धी है जिससे कोई भी अछूता नही रहा है और खासकर आजकल के बच्चो का दिनचर्या का एक बड़ा समय मोबाइल में नष्ट हो रहा है जो कही न कही बच्चो पर मोबाइल के दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे है यदि समय रहते हम नही चेते ओ निश्चित ही हमारे सुख के साधन हमारी बर्बादी के कारण भी बन सकते है

जैसा की कबीरदास जी ने भी कहा है

“अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप”

अर्थात जब जब भी किसी चीज की अधिकता होती है तो वही अधिकता बर्बादी का कारण भी बनती है

जब मोबाइल फोन का अविष्कार हुआ तो इसका प्रयोग लोगो तक इसके माध्यम से अपनी कही गयी बातो को पहुचाना होता है लेकिन समय रहते Phone में क्रन्तिकारी बदलाव के कारण यही फोन अब Smartphone में बदल गया जिसके कारण अब लोग घंटो तक इन्ही Smartphone में व्यस्त रहते है जिसके कारण कही न कही हम एक साथ रहते हुए अपनों से दूर होते जा रहे है

तो आईये जानते है किस प्रकार से मोबाइल फोन से बच्चो को खतरा है और कैसे बच्चो को मोबाइल से कैसे दूर रखे

बच्चो पर मोबाइल के विपरीत प्रभाव

जब भी कभी माता पिता अपने कामो की अधिकता और व्यस्तता के कारण अपने बच्चो पर ध्यान नही दे पाते है तो वे अपने बच्चो को वो हर सुविधा तो मुहैया करा देते है लेकिन भावनात्मक रूप से दूर हो जाते है जिनके कारण बच्चे इन्ही Mobile Smartphone में खो जाते है और आजकल इन्टरनेट के कारण तो Smartphone ही मनोरंजन के साथ साथ हर तरह की जानकारी का केंद्र बन गया है जिससे बच्चे लगातार इन्ही फोन में व्यस्त रहते है जिसके कारण अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव बच्चो के सेहत पर देखने को मिलते है

1 – बच्चे यानि जब हम छोटे होते है तब इस अस्वस्था में बच्चो का दिमाग बहुत ही तेजी से विकसित होता है और मस्तिक विकास में आसपास के वातावरण और माहौल का प्रभाव दिमाग पर सीधा असर करता है यानि बच्चो के Mind विकास में बच्चे किसी प्रकार के मॉहौल अच्छे वातावरण Environmental Stimuli का प्रमुख योगदान होता है और जब बच्चे दिन रात इन्ही फोन में खो जाते है तो उनके दिमाग पर तरह तरह के Pressure के प्रभाव देखने को मिलते है

2 – जब भी किसी भी बच्चे के हाथ में Mobile Smartphone आ जाता है तो वह सबसे पहले फोन में गेम खेलना पसंद करता है और फिर विडियो देखना पसंद करता है लेकिन जब बच्चे के पास 24 घंटे मोबाइल रहने लगता है यही हमारे द्वारा दी गयी सुविधा बच्चो के लिए लत / Addiction बन जाती है जो की फिर बच्चा पढने लिखने और खेलने कूदने के बजाय अपने फोन में व्यस्त रहने लगता है जो की कहीं न कही यही बुरी आदत / Bad Habit  बच्चो के शारीरिक विकास को प्रभावित को प्रभावित करता है इससे आम बच्चे के मुकाबले Smartphone उपयोग करने वाले बच्चे का दिमाग तो विकसित हो सकता है लेकिन वे शारीरिक रूप से कमजोर होते जाते है

3 – Smartphone का सबसे बड़ा Side Effect बच्चो की आखो पर पड़ता है दिन के मुकाबले रात में जब बच्चे फोन के साथ Busy रहते है तो Smartphone से निकलने वाली प्रकाश का सीधा असर आखो पर पड़ता है जिसके कारण धीरे धीरे अत्यधिक फोन के उपयोग से बच्चो में आख की बीमारियों के होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है

4 – Smartphone से निकलने वाली रेडियो तरंगे और लगातार Smartphone उपयोग करने से फोन बहुत ज्यादा गर्म होने के कारण यही फोन हमारे सेहत पर सीधा असर डालती है अनेक वैग्निको के रिसर्च के अनुसार एक निश्चित समय तक फोन का उपयोग हो तो तब ठीक है लेकिन बहुत अधिक समय तक लगातार फोन उपयोग करने से दिल, दिमाग, आखो पर इसका सीधा असर पड़ता है

5 – जब बच्चे लगातार फोन उपयोग करते है तो उनके सोचने की क्षमता भी एक सिमित अवस्था तक ही रह जाती है अक्सर बच्चे Smartphone में Game को सबसे ज्यादा महत्व देते है और ये Game जो की बहुत ही आक्रामक और Competition Type के होते है जिससे बच्चे सोचते है वे हर गेम के Level पार कर लेंगे लेकिन इस स्थिति में बच्चे अपनी पढाई और खाना पीने पर ध्यान नही देते है जिससे यदि बच्चो को बीच में रोका जाय तो बच्चो के व्यव्हार में गुस्सा और आक्रामकता का भाव दिखाई देने लगता है

6 – अक्सर बच्चो की खुशी के लिए माता पिता अपने बच्चो को Smartphone तो दे देते है लेकिन उनका बच्चा क्या फोन के अलावा अपनी दिनचर्या को समय से पूरा करता है ये ध्यान नही रख पाते है जिससे बच्चो में भूख की कमी, असमय नीद  या देर रात तक नीद न आना जैसे कई प्रकार के दुष्प्रभाव बच्चो के सेहत पर देखने को मिलता है.

7 – Smartphone के उपयोग से बच्चा Technology में Expert तो हो सकता है लेकिन यही बच्चा धीरे धीरे फोन के अत्यधिक उपयोग से अपने समाज से किनारा करने लगता है जिससे बच्चो की समाज के प्रति समझ में धीरे धीरे कमी आने लगती है

बच्चो को मोबाइल के खतरों से बचाने के उपाय

यदि हम अपने बच्चो को खुशिया देने जानते है अगर अपने बच्चो पर थोडा ध्यान भी रखे तो निश्चित ही हम अपने बच्चो को भविष्य को अच्छा बना सकते है तो आईये जानते है बच्चो को कैसे मोबाइल स्मार्टफोन के होने वाले खतरों से कैसे बचाया जाय.

1 – जब हम सभी पहली बार अपने बच्चो को फोन देते है और बच्चे फोन चलाना शुरू करते है तो हम सभी को ये देखकर ख़ुशी प्राप्त होता है उनका बच्चा तो स्मार्ट है लेकिन जब हम बच्चो काम की अधिकता के कारण पर ध्यान नही दे पाते है तो यही हमारी छोटी सी गलती बच्चो के लिए बुरी आदत बन जाती है जिसका सीधा असर बच्चो की पढाई और सेहत पर पड़ता है इसलिए हम सभी को अपने बच्चो की दिनचर्या पर पूरी तरीके से ध्यान देना चाहिए और हमारा बच्चा क्या अधिक समय फोन गेम में व्यस्त रहता है तो उसे फोन के बजाय किताबो की ओर ज्यादा ध्यान देने के लिए केन्द्रित करना चाहिए

2 – दिन के मुकाबले रात में Smartphone से निकलने वाली प्रकाश की किरणे आखो पर सीधा असर डालती है इसलिए बच्चो को रात के अंधेरो में मोबाइल चलाने से दूर ही रखना चाहिए

3 – जब बच्चे अत्यधिक रूप से Smartphone से जुड़ जाते है तो इन फोन के बिना उन्हें कुछ भी अच्छा नही लगता है इस स्थिति में मारने डाटने के बजाय उन्हें थोडा खेलकूद और अन्य कामो में लगाना चाहिए जिससे बच्चा का ध्यान मोबाइल से दूर हो सकता है

4 – बच्चो को कभी भी झूठे वादे नही करना चाहिए अक्सर देखा जाता है की माता पिता अपने बच्चो से कहते है की तुम जल्दी से अपनी Homework और पढाई पूरी कर लेंगे तब उन्हें Smartphone चलाने के लिए मिल सकता है तो ऐसी स्थिति में बच्चो का सारा ध्यान Smartphone पर केन्द्रित हो जाता है जिससे बच्चे जल्दी से तो अपनी पढाई पूरी कर तो लेते है लेकिन बच्चो को फिर बाद में Smartphone न मिले तो बच्चो में माता पिता के प्रति नकरात्मक भावना का विकास होने लगता है और अंदर ही अंदर बच्चो का माता पिता के प्रति विश्वास कम होने लगता है इसलिए माता पिता को अपने बच्चो से ऐसे वादे करने से बचना चाहिए और यदि वादा कर भी देते हैएक निश्चित समय तक ही Smartphone अपने बच्चो को दे ऐसी कोशिश करनी चाहिए

5 – माता पिता को बच्चो को मोबाइल च्लानेको लेकर मारने पीटने से बचना चाहिए क्यूकी ऐसा करने से बच्चो में माता पिता के प्रति एक Negative Thinking का विकास होने होने लगता है इसकी अपेक्षा माता पिता को अपने बच्चो के साथ भावनात्मक रूप से जुड़कर उनके साथ समय बिताना चाहिए और उनके साथ बातचीत और खेलकूद में भाग लेना चाहिए जिससे बच्चो में माता पिता के प्रति प्यार के साथ आपसी विश्वास भी बढ़ता है

6 – कभी भी बच्चो को अकेले में मोबाइल फोन नही चलाना देना चाहिए हो सकता है की आपका बच्चा मोबाइल में इन्टरनेट उपयोग करते समय गलत वेबसाइट का शिकार हो सकता है ऐसे में आपका बच्चा अपने मोबाइल फोन में क्या क्या करता है इस बात का ध्यान जरुर रखना चाहिए और साथ में यदि बच्चे इन्टरनेट उपयोग करते हो हमे Browsing History भी चेक करते रहना चाहिए

7 – बच्चे दिल से बहुत ही कोमल होते है और उनपर किसी भी प्रकार की डाट फटकार उन्हें बहुत ही तोडती भी है जरुरी नही की आपका बच्चा हमेशा पढता ही रहे सो बच्चो को Smartphone से दूर करने के लिए उनके पढाई में साथ देना चाहिए और बच्चो को साथ पढाई में हमे समय जरुर बीतना चाहिए

बुधवार, 22 नवंबर 2017

महिलाओं के होंठों का रंग बता देता है उनकी S3X लाइफ से जुड़े कई राज

महिलाओं के होंठों का रंग बता देता है उनकी S3X लाइफ से जुड़े कई राज


गुलाबी पिंक होंठ पाने की इच्छा तो हर किसी की होती है। महिलाओं की नैचुरल पर्सनैलिटी में होंठ को सबसे अट्रैक्टिव अंग माना जाता है लेकिन सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बल्कि यह आपकी सेहत से जुड़े बहुत सारे संकेत भी देते हैं। शरीर अगर किसी बीमारी के घेरे में आ रहा है तो होंठों का रंग बदलना शुरू हो जाता हैं जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपके होंठों के रंग में बदलाव आना शुरू हो जाता है तो समझ लीजिए आपको सेहत संबंधी कोई ना कोई दिक्कत आने वाली है। अंदरूनी अंग, शरीर का तापमान और खून से जुड़ी समस्याओं का पता आपके होंठों का रंग बता देता है। अगर होंठों का रंग पीला, बहुत ज्यादा लाल या काला, नीला-जामुनी या फिर सफेद सा दिखाई पड़ता है तो लापरवाही ना बरतते हुए सेहत पर तुरंत ध्यान दें।


#1. पीले और सफेद होंठ
कुछ लोगों के होंठों का रंग गुलाबी होने की बजाए पीला और कुछ का सफेद होता है।ऐसा कुदरती नहीं बल्कि एनीमिया यानि खून की कमी की वजह से होता है। रक्त में लाल हीमोग्‍लोबिन में रक्‍त कणों की कमी होने के कारण होंठों का रंग बदलना शुरू हो जाता है। होंठों के रंग में इस तरह का कोई बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टरी सलाह जरूर लें और अपने खाने में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन के अलावा पोषक तत्वों को शामिल करना शुरू करें।

#2. लाल होंठ
होंठों का रंग बहुत ज्यादा लाल है तो यह भी सेहत संबंधी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इसकी वजह लीवर का कमजोर या फिर सही तरीके से काम न करना हो सकता है। इसके अलावा किसी खान-पान की किसी चीज से एलर्जी के कारण भी होंठों का रंग बहुत ज्यादा लाल दिखाई देने लगता है, जिससे कई बार होंठों पर सूजन भी आ सकती है।
#3. जामुनी होंठ
होंठों का रंग बदलना कोई आम बात नहीं है। सेहत की गड़बड़ी से होंठों के रंग में बदलाव आना शुरू हो जाता है। अगर होंठों का नैचुरल गुलाबी रंग बदल कर जामुनी हो गया है तो दिल और फेफड़ों के साथ पाचन क्रिया में गड़बड़ी इसकी वजह हो सकती है। ऐसे में फाइबर और मिनरल्स युक्त आहार को अपनी डाइट में शामिल करना शुरू कर दें और डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

#4. काले होंठ
वैसे तो कई तरह के ब्यूटी प्रॉडक्ट के इस्तेमाल से भी होंठ काले पड़ने शुरू हो जाते हैं। धूम्रपान से भी होंठों का रंग काला होना शुरू हो जाता है लेकिन अगर इन प्रॉडक्ट का इस्तेमाल नहीं कर रहे और फिर भी होंठों का रंग काला पड़ रहा है तो शरीर में पानी की कमी, हार्मोंस का असंतुलन,विटामिन और फैटी एसिड की कमी हो सकती है। इन सब परेशानियों से बचने के लिए अपनी डाइट का खास ख्याल रखें।

अन्य समस्याएं

– सूखे और फटे होंठ
कुछ लोगों के होंठ सूखे और बार-बार फट जाते हैं। ऐसा या तो सस्ते ब्यूटी प्रॉडक्ट्स इस्तेमाल करने की वजह से होता है जो आपके होंठों की नमी को सोख लेता है। इसके अलावा शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी और इम्यून सिस्टम खराब होने पर भी अक्सर आपके होंठ सूख जाते हैं। विटामिन सी, न्यूट्रिएंट्स की कमी और इम्यून सिस्टम खराब होने पर आपके होंठ फट सकते हैं। अगर आपके होंठ लगातार फटे रहते हैं तो ये डायबिटीज होने का भी संकेत हो सकते हैं।

– होंठों के किनारे फटना
शरीर में विटामिन बी12 की कमी और फंगल इंफैक्शन की वजह से होंठों के किनारे फट जाते हैं इसलिए ऐसी कोई प्रॉब्लम होने पर तुरंत डॉक्टरी जांच करवाएं।

बुधवार, 11 जनवरी 2017

क्या आप भी वजन कम करने के लिए खाते हैं सलाद?

क्या आप भी वजन कम करने के लिए खाते हैं सलाद?


मोटापे की समस्या आजकल आम हो गई है। हर कोई अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान है। इसके लिए लोग कई तरह के तरीके अपनाते हैं। अधिकतर लोग वजन कम करने के लिए सलाद खाते हैं। उन्हें लगता हैं एेसा करके मोटापे से छुटकारा पाया जा सकता है। शायद आप यह नहीं जानते कि सलाद आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

आइए जाने कैसे यह आपके शरीर के लिए हानिकारक है। 

1. ज्यादातर लोग सलाद को खाने के साथ खाते हैं जोकि गलत है। इसे खाने के बाद या पहले लेना चाहिए।

2. आपने अक्सर देखा होगा कि सलाद को सजाने के लिए कई चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों में कई फैटी चीजें भी होती है, जिससे वजन कम होने की बजाय बढ़ जाता है।

3. कुछ लोग सलाद को स्वादिष्ट बनाने के लिए चीज का इस्तेमाल करते हैं, जिसे खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ती है।

4. पत्तेदार सब्जियों और फलों में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाएं जाते हैं जिन्हें पचाने के लिए फैट्स की आवश्यकता होती है। इससे बचने के लिए सलाद में ऑलिव ऑल की ड्रेसिंग की जा सकती है।