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शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

सिर्फ 2 से 3 इलायची खाने के ये फायदे जानकर चौंक जायेंगे!

सिर्फ 2 से 3 इलायची खाने के ये फायदे जानकर चौंक जायेंगे!


इलाइची इसके स्वाद और सुगंध के कारण भारत के खानपान में खूब इस्तेमाल होती है। इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं जिनको आप शायद ही जानते हों और जिन्हें जानकर आपको हैरानी होगी। इलाइची पोटैशियम, कैल्शियम, सल्फर, लोह, मैंगनीज और मैग्नीशियम का काफी अच्छा स्त्रोत होती है। इसके साथ ही इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिन जैसे राइबोफ्लेविन, नियासिन और विटामिन सी पाए जाते हैं।

यदि इलाइची के औषधीय गुणों को देखा जाये तो इसमें रोगाणुरोधक (antiseptic), एंटीऑक्सीडेंट, आक्षेपनाशक (antispasmodic), वातानुलोभक (carminative), पचानेवाले (digestive), मूत्रवर्धक (diuretic), उत्तेजक (stimulant), भूख बढ़ाने वाले (stomachic) और टॉनिक गुण पाए जाते हैं।

चूँकि इलाइची में कई रोगनाशक, स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली और स्वास्थ्यवर्धक क्षमताएं होती हैं इसलिए यह हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में काफी फायदेमंद साबित होती है।

इलाइची के 10 सबसे कारगर स्वास्थ्य लाभ नीचे दिए जा रहे हैं –

मानसिक तनाव से निजातयदि आप किसी भी कारण से तनाव से ग्रसित हैं तो इलाइची खाने या उसकी चाय बना कर पीने से हमारे दिमाग के हार्मोंस एक दम से बदल जाते हैं और हम तरोताजा महसूस करते हैं।

इम्युनिती सिस्टम तेज करता है – यह हमारा पाचन तंत्र मजबूत करती है दोस्तों अकसर देखा जाता है की खाने के बाद पान मसाला या इलाइची या फिर सौंफ ये चीजें खाई जाती है, कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? ऐसा इसलिये होता है क्योंकि इनमें कुछ ऐसे पोषक तत्व पाये जाते हैं जो जल्दी से खाने को पचा देते हैं, और पेट को सही रखते हैं।

जी मिचलाने में लाभकारीउल्टी जैसा फील होने पर आप पानी में इलाइची को उबाल कर वह पानी पिये उल्टी बंद हो जाती है। काफी लोगों को बस का सफर सूट नहीं करता तो अब जब भी आपको उलटी जैसा फील हो तो एक इलाइची मुँह में रख कर उसका रस चूसते रहें | आपको अच्छा लगेगा।

गले की खराश दूर करना – गला बैठ जाने या गले की खराश को दूर करने के लिये सुबह उठकर छोटी इलाइची चबा -चबा कर खाने से  गले की खराश दूर होती है ।

विशाक्त तत्वों को निकाल देती है- दोस्तों हम शरीर की बाहरी सफाई का तो बड़ा ध्यान रखते हैं, लेकिन यह भूल जाते है कि हमें अंदर की सफाई भी उतनी ही जरुरी होती है जितनी बाहर की अब आप सोच रहें होंगे की बाहर की सफाई तो नहा कर हो सकती है। लेकिन अंदर की कैसे करे ? उसके लिये आपको ज्यादा कुछ नहीं करना बस एक इलाइची रोजाना खानी है जी हाँ यह हमारी किडनी से विषाक्त तत्वों को बाहर कर देती है तो हो गई ना अन्दर की भी सफाई।

रक्तअल्पता को कम करती है इलायची : इलायची में मौजूद है एक महत्वपूर्ण धातु यानी तांबा भी मौजूद है जो रक्तअल्पता जैसी बीमारी से निजात दिलाता है रण पैदा हुए लक्षणों को कम करने में इलायची महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रक्तअल्पता दूर करने के लिए इलायची पावडर को हल्दी के साथ गर्म दूध में डालकर लेना चाहिए।

दिमाग और आँखों के लिये लाभकारी– 2 से 3 बादाम और 2से 3 पिस्ते लेकर इलाइची के दानों के साथ इन्हें महीन पीस लेते हैं और इस मिश्रण को हम दूध में डालकर पीते हैं तो इससे हमारी यादाश्त के साथ- साथ हमारी आँखों की रोशनी भीं बढ़ेगी साथ ही हमारे दिमाग को भी ताकत मिलेगी ।

नशा कम करना- यदि आपको किसी तरह के नशे से बचना है तो आप जब तब एक इलाइची चूस ले दोस्तों नशा सिर्फ शराब का ही नहीं होता हर वो चीज जिसके बिना हम रह नहीं पाते जैसे कुछ लोगों को चाय पीने की लत होती है वह जानते है की चाय उनके लिये नुकसानदेह है। फिर भी वह चाय को चाह कर भी छोड़ नहीं पाते उनके सिर में दर्द हो जाता है। काम नहीं हो पाता तो यह भी एक तरह का नशा है तो इससे बचने कै लिये आप इलाइची का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्त्व पाये जाते हैं जो तनाव को कम कर देते है।

आँखों से पानी बहना- यदि कोई आँखों के बहने कि समस्या से ग्रसित है तो वह रोज रात को दूध में इलाइची उबाल कर पिये कुछ ही दिनों में पानी बहना बंद हो जायेगा ।

यौन दुर्बलता कम करने के लिये –  आपको हैरत होगी यह जानकर कि इलाइची जैसी छोटी सी चीज से भी कामेच्छा बढ़ाई जा सकती हैं यह विज्ञान में भी साबित किया गया है। इसके लिये आपको करना ये है कि दूध में एक इलाइची उबाल कर  दूध को ठंडा करके उसमें शहद मिलाकर पीना है इससे नपुंसकता दूर होती है और यौ*न क्षमता बढ़ती है।

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

आप भी करते हैं लहसुन का अधिक सेवन तो हो जाएँ सावधान

आप भी करते हैं लहसुन का अधिक सेवन तो हो जाएँ सावधान


लहसुन एक ऐसी चीज है जो हर घर के किचन में पायी जा सकती है। बिना लहसुन के खानें में वह स्वाद ही नहीं आता है, जिसकी चाहत होती है। खानें में लहसुन पड़ते ही उसका स्वाद बदल जाता है। लहसुन किसी भी खानें को जायकेदार तो बनाता ही है साथ ही यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो कई बिमारियों से रक्षा करते हैं। लेकिन जैसा की कहा जाता है किसी भी चीज की अति सही नहीं है।

भले ही लहसुन स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा हो लेकिन इसका आवश्यकता से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक भी हो सकता है। लहसुन का ज्यादा इस्तेमाल करने से व्यक्ति को कई तरह की शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर आप भी लहसुन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएँ। आज हम आपको ज्यादा लहसुन के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में बतानें जा रहे हैं।

ज्यादा लहसुन के इस्तेमाल से होता है ये नुकसान:

*- लीवर को नुकसान:
शरीर में हर एक अनाग की अपनी उपयोगिता होती है। शरीर के सभी अंगों को अच्छे से चलानें के लिए लीवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसी स्थिति में आपके लीवर का स्वस्थ्य होने बहुत ही जरुरी होता है। लेकिन ज्यादा लहसुन के इस्तेमाल से लीवर को नुकसान पहुँचता है। इसमें मौजूद ऑक्सिडेंट गुण शरीर के विषैले पदार्थों को एक जगह एकत्र कर देते हैं। यह लीवर पर बुरा असर डालते हैं

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*- सांसों की बदबू:
लहसुन को कुछ लोग कच्चा भी खाते हैं। यह फायदेमंद भी होता है। लेकिन ज्यादा लहसुन खानें से मुँह से बदबू आनें लगती है, यह बदबू थोड़ी देर में ख़त्म हो जाती है। लेकिन आप नियमनुसार ज्यादा लहसुन का सेवन करना शुरू कर देते हैं तो यह बदबू हमेशा के लिए आनी शुरू हो जाती है। इसमें पाए जानें वाले कुछ तत्व मुँह की बदबू का कारण बनते हैं।

*- जी मचलना:
एसिडिटी की समस्या ने निजात पानें के लिए खाली पेट लहसुन का सेवन अच्छा माना जाता है। लेकिन यह भी एक समस्या है कि खली पेट लहसुन का ज्यादा सेवन करने से उल्टी, जी मचलना और सीने में जलन की समस्या से जूझना पड़ता है।

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*- एक्जिमा:
लहसुन का ज्यादा इस्तेमाल खानें में करने से त्वचा सम्बन्धी कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसी में से एक है एक्जिमा, इसमें त्वचा लाल पड़ जाती है और खुजली होने लगती है।

*- सर दर्द:
आपको जानकर हाफी हैरानी होगी कि कई रोगों में फायदा पहुँचाने वाला लहसुन सर दर्द और माइग्रेन का भी कारण बन जाता है। इसके सेवन से दिमाग के अणु उत्तेजित होते हैं, जिससे सर दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

शुक्रवार, 5 मई 2017

जायफल है कई बीमारियों का रामबाण इलाज

जायफल है कई बीमारियों का रामबाण इलाज


भारत में आयात कर के पूर्ति किया जाने वाला जायफल जावा, सुमात्रा, मलेशिया और श्रीलंका में अधिक उत्पन्न होता है। इसके लम्बे-लम्बे वृक्ष दक्षिण भारत में कहीं-कहीं देखे जा सकते हैं। इसकी टहनियां कोमल और पत्ते नीचे की ओर झुके हुए होते हैं।

देखने में अति सुन्दर दिखने वाले इस वृक्ष की पत्तियां मसलने पर सुगंध फैलाती है, वहीं इसका फल सूखने पर छिलका छोड़ देता है। इसका छिलका जावित्री कहलाता है जो अनेक दवाओं और घरेलू नुस्खों में उपयोगी है ।

जितना बड़ा, उतना बेहतर

जायफल फल छिलका रहित होने पर चिकना, अंडाकार और पीले रंग का होता है। यह जितना बड़ा होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है। रोचक तथ्य यह है कि भारत में नाममात्र के लिए पैदा होने वाला जायफल भारत के हर शहर और गांव में पंसारी की दुकान में अवश्य मिल जाता है। क्योंकि इसकी मांग घर-घर में होती है और इसका उपयोग घरेलू नुस्खों में किया जाता है।

उपयोग

जायफल कड़वा, तीक्ष्ण, चिरपिरा, अग्नि दीपक, मुख का फीकापन दूर करने वाला, मल की दुर्गंध और कालिमा, क्रमि, खांसी, वमन, श्वास, और हृदय रोग को दूर करने वाला है। यूनानी विशेषज्ञों के अनुसार यह गर्म और खुश्क होता है, इसलिए सर्दी की बीमारियों को दूर करने वाला है। यूनानी चिकित्सक यौन शक्ति की क्षमता और स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाले नुस्खों में इसका उपयोग करते है। इसी प्रकार यह दुर्गंध नाशक वेदना दूर करने वाला, वात शामक और कीट नाशक होने के कारण जायफज नाड़ी संस्थान अर्थात नर्वस सिस्टम के लिए उपयोगी है। अग्नि दीपक और पाचक होने के कारण यकृत को सक्रिय करने वाल क्रमि नाशक होने से उदर एवं पाचन संस्थान के लिए उपयोग है। 

आठ रोगों के लिए यह रामबाण का काम करता है।

सिरदर्द
सर्दी-जुकाम से होने वाले सिरदर्द को दूर करने के लिए दूध में जायफल घिसकर कपाल पर लेप करने से आराम मिलता है।

जी मचलाना
जायफल को पानी में घिसकर लेप को आधा गिलास पानी में घोल कर पीने से जी मचलाना बंद हो जाता है।

शिशु के दस्त
छोटे शिशु को पतले दस्त लगने पर जायफल को चिकने पत्थर पर पानी के साथ 20-25 बार घिसकर लेप को एकत्र कर लें। इस लेप को एक चम्मच पानी में घोल कर शिशु का पिला दें। यह प्रयोग रामबाण सिद्ध होता है। इसकी खुराक सुबह-शाम दी जाए।

अनिद्रा
निद्रा नाश की समस्या से निजात पाने के लिए जायफल को शुद्ध घी में घिसकर आंखों की पलकों पर लेप करें और आंखे बंद करके लेट जाए, तुरन्त नींद आ जाती है।

त्वचा की निर्जीवता
दो चम्मच नारियल तेल में दो बूंद जायफल का तेल डालकर मिला लें। इसे त्वचा के शून्यता अथवा सुन्न स्थान पर लगाकर मालिश करने से त्वचा की निर्जीवता दूर हो जाती है।

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मंदाग्नि
पाचन शक्ति और जठराग्नि मंद होने पर इसका एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटने से लाभ होता है और यह प्रयोग हृदय को भी बलवान करता है।

मुंह के छाले
पानी में जायफल को इतनी देर घिसें कि आधा चम्मच लेप तैयार हो जाए। इस लेप को एक गिलास पानी में घोलकर गरारे और कुल्ले करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते है और बैठा हुआ गला भी साफ हो जाता है।

अतिसार
बड़ी आयु के स्त्री, पुरूषों को जायफल का एक ग्राम चूर्ण आधा कप पानी के साथ सुबह-शाम फांकने से बार-बार पतले दस्त होना, पेट फूलना और पेट दर्द में आराम मिलता है।

सावधानी

तेज प्रभावकारी होने के कारण जायफल के चूर्ण की आधे से एक ग्राम मात्रा ही सेवन के योग्य होती है। अधिक मात्रा में लेना हानिकारक और नशा करने वाला होता है। इसलिए इसका सेवन बहुत सावधानीपूर्वक किया जाता है।