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शनिवार, 18 नवंबर 2017

पीरियड (माहवारी) के रंग से जाने कितने स्वस्थ हैं आप

पीरियड (माहवारी) के रंग से जाने कितने स्वस्थ हैं आप


माहवारी (पीरियड्स) महिलाओं के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। कुछ महिलाओं में ये साइकल पांच से सात दिन की होती है तो कुछ में चार से पांच दिन की। इस दौरान महिला को चिड़चिड़ेपन, शरीर में दर्द और पाचन से जुड़ी समस्या हो जाती है। कई बार कब्ज की समस्या भी हो जाती है पर ये सभी परेशानियां पीरियड्स के खत्म होने के साथ ही दूर हो जाती हैं।

आमतौर पर आपको यही लगता होगा कि आपके पीरियड ब्लड का रंग लाल ही है। पर अगर आप कभी इस बात पर गौर करें तो आपको पता चलेगा कि पीरियड ब्लड का रंग गाढ़ा भूरा भी हो सकता है और हल्का गुलाबी भी। आमतौर पर शुरुआती दिनों में खून का रंग गाढ़ा होता है और अंत के दिनों में हल्का। कई बार ये काला भी हो सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो गाढ़े रंग के फ्लो का मतलब है कि जननांग से ब्लड का फ्लो बहुत ही धीमा है। स्त्री रोग विशेषज्ञ मानते हैं पीरियड ब्लड के रंग के आधार पर महिला के अंदरुनी स्वास्थ्य से जुड़ी कई बातों का पता चल सकता है।
रंग गाढ़ा भूरा: अगर आपके पीरियड ब्लड का रंग गाढ़ा भूरा है तो इसका मतलब है कि फ्लो हो रहा खून पुराना है. ये खून लंबे समय तक गर्भाशय में संग्रहित रहा होगा और फिर फ्लो हुआ। आमतौर पर गाढ़े भूरे रंग के ब्लड का फ्लो सुबह के समय ही होता है।
लाल रंग: लाल रंग के फ्लो का मतलब है कि ये खून नया बना और बहुत जल्दी ही उसका फ्लो हो गया। ये खून काफी हल्का होता है लेकिन दिन के समय जब फ्लो तेज होता है तभी लाल रंग का स्त्राव होता है। अगर आपको हल्के लाल रंग का फ्लो हो रहा है तो इसका मतलब है कि आप स्वस्थ हैं। आमतौर पर पीरियड के दूसरे दिन ऐसा फ्लो होता है। विशेषज्ञों की मानें तो लंबी पीरियड साइकिल वालों में ही ऐसा फ्लो होता है जो बाद में कुछ गाढ़ा हो जाता है।
काला रंग: काले रंग का ब्लड फ्लो खतरे का संकेत है। हो सकता है कि आपके गर्भाशय में संक्रमण हो या फिर ये गर्भपात का भी सूचक हो सकता है। अगर आपको पीरियड्स के सभी दिनों में काले रंग का ब्लड फ्लो हो रहा हो तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

नारंगी रंग: जब खून, गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के तरल के साथ मिलकर फ्लो होता है तो इसका रंग नारंगी होता है। पर इसे हल्के में लेना सही नहीं होगा। यह किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है।

मध्यम लाल या क्रैनबेरी कलर: मासिक धर्म के लिये यह रंग स्वस्थ और अच्छा रंग माना जाता है। यह रंग मासिक धर्म के दूसरे दिन देखने को मिलता है। शोध कर्ता बताते हैं कि जिन्हें लंबी पीरियड साइकिल होती है,उन्हें यह रंग देखने को मिलता है। इसके बाद में यह क्रैनबेरी शेड बदल कर थोड़ा डार्क हो जाता है,जो कि सामान्य बात है।

रक्त का थक्का बनने पर : यदि मासिक धर्म का रक्त लाल रंग हो परन्तु उससे निकलने वाले खून में थक्का बना हुआ निकले तो आपमें प्रोजेस्ट्रोन का लेवल कम है और एस्ट्रोजन का लेवल अधिक है। ऐसे में फाईबर युक्त भोजन करने की आवश्यकता होती है जो की रक्त को थक्का बनने से बचाता है। अगर इस दौरान निकलने वाले रक्त के थक्के बहुत बड़े हो तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बुधवार, 24 मई 2017

कैसे पहचाने शरीर में खून की कमी, शेयर करें

कैसे पहचाने शरीर में खून की कमी, शेयर करें


हमारे शरीर के लिए रक्त (खून) बेहद अहम् तरल है। यह तरल दो तरह की रक्त कोशिकाओं (ब्लड सेल्स) सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और लाल रक्त कोशिकाओं से मिल कर बना होता है। इनमें से जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है, तो उसे शरीर में रक्त की कमी कहा जाता है। शरीर में रखती की कमी स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती। वहीं, यदि शरीर में खून की कमी एक सीमा से अधिक हो जाए तो यह घातक भी हो सकती है। इसलिए हमें हमेशा अपने आहार में आयरन युक्त चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।

रक्त की कमी किसी को भी हो सकती है। कई बार तो व्यक्ति को खुद भी पता नहीं चल पाता कि उसमें रक्त की कमी है। यह समस्या तब सामने आती है जब वह किसी अन्य बिमारी की जाँच के लिए डॉक्टर के पास जाता है। हमारे शरीर में रक्त की कमी है या नहीं इसकी जाँच हम घर पर तो नही कर सकते, लेकिन रक्त की कमी के कुछ ऐसे लक्षण जरूर होते हैं, जिनसे इसके होने का अंदाज लगाया जा सकता है। चलिए खून की कमी के कुछ लक्षणों पर एक नजर डालते हैं।

जिन लोगों को रक्त की कमी होती है, उन्हें निम्न परेशानियां अक्सर बनी रहती हैं-

अत्यधिक थकावट और कमजोरी- जब शरीर में पर्याप्त रक्त नही होता तो शरीर के थोड़े बचे रक्त पर पूरे शरीर में पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाने का भार आ जाता है। ऐसे में व्यक्ति को थकावट महसूस होने लगती है।

जीभ की सूजन– जीभ की सूजन भी शरीर में खून की कमी का एक संकेत हो सकता है। यदि आपकी जीभ पर बिना किसी खास वजह के सूजन दिख रही है तो एक अन्य लक्षणों के साथ मिलाकर आप शरीर में खून की कमी का अंदाजा लगा सकते हैं।

संक्रमण- हमारा रक्त ही वह तरल है जो शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों को पहुंचाता है। यदि शरीर में रक्त की कमी हो जाती है तो शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व भी नहीं पहुंच पाते। इससे शरीर की रोग प्रति रोधक क्षमता कम हो जाती है और व्यक्ति जल्दी संक्रमण और अन्य बिमारियों का शिकार हो जाता है।

बाल झड़ना- यदि व्यक्ति को कोई अन्य बिमारी न हो लेकिन उसके बाल बहुत ज्यादा झड़ रहें हों तो इसका एक कारण शरीर में खून की कमी भी हो सकता है। क्योंकि यदि बालों के रोम कूपों को पर्याप्त मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन नही मिलेगी तो वह कमजोर होने लगेंगे नतीजा बालों का झड़ने के रूप में सामने आएगा।

रेस्ट्लेट्स लेग सिंड्रोम- शरीर में रक्त की कमी वाले लोगों में यह समस्या भी अक्सर देखी जाती है। इसमें व्यक्ति के पैरों में सनसनी होती है और वह पैर हिलाकर इससे राहत पाने की कोशिश करता है।

हाथ पैर ठन्डे रहना- रक्त का बहाव, शरीर में गर्माहट बनाएं रखता है। यदि शरीर में रक्त की कमी हो और बहाव कम हो तो व्यक्ति के हाथ-पैर सामान्य से ज्यादा ठन्डे रहते हैं।

रूखी और बेजान त्वचा- इसमें कोई संदेह नहीं है कि रक्त की कमी चेहरे से झलक सकती है। रक्त की कमी से चेहरे की त्वचा को पर्याप्त पोषक तत्व और ऑक्सीजन न मिलने से रूखी और बेजान नजर आती है।