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मंगलवार, 1 मई 2018

अगर आपके कानों में भी आती है सीटियों की आवाज तो इस खबर को जरुर पढ़ें

अगर आपके कानों में भी आती है सीटियों की आवाज तो इस खबर को जरुर पढ़ें


हमारे शरीर में मौजूद हर अंग का अलग-अलग महत्व होता है और अंग अपनी मर्ज़ी के हिसाब से काम करते है. जब हमारे शरीर का कोई अंग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता तो हमें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जब भी हमारे शरीर में कोई बीमारी दस्तक देने वाली होती है तब हमें पहले से ही संकेत मिलने लग जाते हैं जिनको हम बहुत बार नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

शायद आपको ना पता हो कि व्यक्ति के शरीर के अंगों का आकार या उनका रंग बदलना किसी बड़ी बीमारी के होने की तरफ इशारा करता है. शरीर में होने वाले ये बदलाव हार्मोन्स में होने वाली गड़बड़ी, हृदय से जुड़े हुए रोग या पाचन तंत्र में होने वाली बीमारियों के बारे में बताते है. व्यक्ति के शरीर के किसी भी अंग में कभी भी दर्द होने लग जाता है.

ठंड के मौसम में कान में दर्द, मैल जमना,खुजली होना बहुत आम बात है. ऐसी बहुत सी समस्याएं हमें होती है, लेकिन आपको बता दें कि ये सब ऐसे ही नहीं होता. व्यक्ति का कान और उसमें जमने वाला मैल व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ बयां करता है. आज हम आपको कान से जुड़ी हुई इन समस्याओं के बारे में बताने जा रहे हैं.

खुश्क कान

हम ज्यादातर कान के खुश्क होने को बहुत आम समझते हैं, लेकिन आपको बता दें कि अगर आपके कान की त्वचा और मैल सुखा और परतदार हो रहा है तो इसका कारण एक्जिमा है. बहुत से केस में ये Psoriasis के संकेत भी हो सकते है. अगर आपके कान की त्वचा खुश्क हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

कान में सीटी की आवाज़ आना

बहुत से लोगों को अक्सर फ़ोन पर बात करते हुए दूसरे व्यक्ति की आवाज नहीं सुनाई देती और दोनों कानों में सीटी बजने की आवाजें आने लगती है. कान से ऐसी आवाजें आने से हमें लगता है की हमें जुकाम हो रहा है उसकी वजह से ये आवाजें आ रही है, लेकिन आपको बता दें कि इन आवाजों को हल्के में ना ले क्योंकि ये कानों की एक बीमारी जिसका नाम अकॉस्टिक न्यूरोमा है के भी लक्षण हो सकते हैं. इन आवाजों को अनदेखा करके आप बहरेपन को न्योता दे रहे हैं.

कान से बदबू

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कानों से बदबू आना भी एक बहुत बड़ी बीमारी की तरफ इशारा करता है. शरीर के दूसरे अंगो के अलावा कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारियों के होने का डर कान में भी होता है. कान से बदबू आने की वजह कैंसर और ट्यूमर जैसी 2 बड़ी बीमारियों की तरफ इशारा भी करती है.

सोमवार, 26 दिसंबर 2016

क्या आप के कानो में भी अजीब अजीब तरह की आवाज़ें आती हैं ?

क्या आप के कानो में भी अजीब अजीब तरह की आवाज़ें आती हैं ?


टिनिटस एक ऐसी अजीब सी बीमारी है जिसके अंतर्गत कानों के अंदर बिना किसी वजह के एक आवाज़ गूंजती रहती है। यह कोई आम समस्या नहीं है। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि किसी बीमारी का लक्षण है। यह रक्तवाहिनियों की समस्या या उम्र के साथ सुनने की शक्ति क्षीण पड़ने से जोड़ी जा सकती है। लोग टिनिटस से काफी परेशान रहते हैं क्योंकि इससे सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है जो कि हमारे जीवन का काफी महत्वपूर्ण भाग है। इसके बावजूद टिनिटस कोई बड़ी समस्या नहीं है। उम्र के साथ लोगों के सुनने की क्षमता कम होती जाती है। कुछ उपचारों की मदद से आप इसे ठीक कर सकते हैं।

टिनिटस के लक्षण :

आसपास किसी भी तरह की आवाज़ ना होते हुए भी आपके कानों में किसी आवाज़ का गूंजना ही टिनिटस कहलाता है। इसके कुछ लक्षण हैं:-

1. सिसकारी
2. दहाड़
3. कानबजना
4. आवाज़गूंजना

स्थिति के गंभीर होने के मुताबिक़ कान में आवाज़ का गूंजना कम या ज़्यादा हो सकता है। कुछ लोगों को ये आवाज़ें एक कान में ही सुनाई देती है तो कुछ को दोनों कानों में। कुछ लोगों को ये आवाज़ें इतनी तेज़ सुनाई देती है कि वो असली आवाज़ ही नहीं सुन पाते। कुछ लोगों के लिए यह समस्या अस्थायी रूप से परेशान करने वाली होती है और अन्य लोगों को काफी दिनों तक ये समस्या सताती है।

टिनिटस के प्रकार :

1. व्यक्तिपरक टिनिटस
यह एक ख़ास प्रकार का टिनिटस होता है जिसमें आप सुन सकते हैं। ज़्यादातर लोग इस प्रकार के टिनिटस से जूझते हैं। इस प्रकार के टिनिटस का मुख्य कारण कान के अंदरूनी, बाहरी तथा मध्य भाग में समस्या होना है। अगर आप सुनने की नसों में आई समस्याओं से परेशान हैं तो आपको व्यक्तिपरक टिनिटस की समस्या है।

2. वस्तुगत टिनिटस
यह टिनिटस काफी कम लोगों में पाया जाता है तथा सिर्फ डॉक्टर ही जांच के दौरान इसे सुन सकते हैं। इस प्रकार के टिनिटस का मुख्य कारण खून की धमनियों में किसी प्रकार की कोई समस्या है। यह अंदरूनी हड्डियों की कोई समस्या मांसपेशियों में मरोड़ की परेशानी हो सकती है।

टिनिटस के कारण :

तेज़ आवाज़ों के संपर्क में रहना
आमतौर पर फैक्ट्री में भारी उपकरणों की आवाज़ से काफी शोर पैदा होता है। इसके अलावा गाने बजाने के तमाम उपकरण काफी शोर पैदा करते हैं। अगर आप इनमें से किसी चीज़ के संपर्क में हैं तो आपको टिनिटस होने की संभावना काफी ज़्यादा है।

कान की हड्डियों में परिवर्तन
अगर आपके कान की हड्डी कान के बीच में कड़ी हो रही है तो इससे आपके सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है। यह हड्डियों के अतिरिक्त रूप से बढ़ने की वजह से भी होती है जिसका कारण आनुवांशिक हो सकता है।

उम्र आधारित समस्या
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई समस्याएं आती हैं। सुनने की क्षमता क्षीण होने का उम्र के साथ भी सम्बन्ध हो सकता है। इससे टिनिटस की समस्या भी हो सकती है। 60 साल की उम्र से यह समस्या शुरू हो सकती है। इसका एक चिकित्सकीय नाम भी है – प्रेस्बाईक्यूसिस।

कान में वैक्स जमा होना
कानों का मोम कानों में गन्दगी एवं बैक्टीरिया जाने से रोकता है। पर कभी कभी अतिरिक्त मात्रा में मोम हमारे कानों में एकत्रित हो जाता है। ऐसे में भी टिनिटस की समस्या हो सकती है।

टिनिटस का उपचार :

दवाई बदलना
कई बार दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी टिनिटस होता है, अतः अपनी दवाइयों को बदलें।

कान का मोम निकालें
अगर आपके कान में काफी मोम जम गया है तो इसे निकालना आवश्यक है। परन्तु इसके लिए हेयर पिन का प्रयोग न करें क्योंकि इससे कानों को हानि पहुँच सकती है।

कान ढकने का यंत्र
आप अब कानों को स्वस्थ रखने के लिए कान ढकने के मास्क का प्रयोग कर सकते हैं। इसको पहनने के बाद आपको बाहरी शोर का सामना नहीं करना पडेगा।

वाइट नॉइज़ मशीन
ये ऐसे यंत्र होते हैं जो पर्यावरण सम्बन्धी आवाज़ निकालते हैं जैसे समुद्र की लहरें और बारिश। यह टिनिटस का काफी महत्वपूर्ण उपचार है।